Category: national

  • हमारी पार्टी ने कभी नहीं कहा था कि लोगों को खातों में 15 लाख रुपये आएंगे: राजनाथ

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    नई दिल्ली ।केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी ने कभी नहीं कहा कि लोगों के खाते में 15 लाख रुपए आएंगे। राजनाथ ने कहा कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं कहा था कि हर किसी के खाते में 15 लाख आएंगे। एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 2014 में हमने कहा था कि अगर सत्ता में आए तो कालेधन के खिलाफ कार्रवाई करेंगे और काले धन पर कार्रवाई हुई भी।

    हमारी सरकार ने अपना वादा निभाते हुए कालेधन के मामले में एसआईटी का गठन किया है। राजनाथ का 15 लाख पर बयान ऐसे समय पर आया है जब विपक्षी दल भाजपा पर वादा खिलाफी के आरोप लगा रहे हैं।

    विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा ने 2014 में चुनाव प्रचार के दौरान लोगों को उनके खाते में 15-15 लाख देने का वादा किया था। राजनाथ ने कहा कि विपक्षी नेताओं और उनके करीबियों के यहां इनकम टैक्स और ईडी के छापों को राजनीतिक बदला कहना गलत है। उन्होंने कहा कि जो एजेंसिया छापेमारी कर रही हैं वह स्वायत हैं और उन पर चुनाव आचार संहिता भी लागू नहीं होती।

    नरेंद्र मोदी की जगह नितिन गडकरी और खुद के प्रधानमंत्री बनने के सवाल पर राजनाथ ने कहा कि यह मात्र अफवाह है। हमें भरोसा है कि 2019 में भी हमारी सरकार बनेगी और पीएम नरेंद्र मोदी ही होंगे।राजनाथ ने कहा कि मेरे या गडकरी के प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी की खबरें अफवाह है। उन्होंने बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर किए गए एयर स्ट्राइक पर कहा कि सुरक्षा बलों से किसी भी तरह का सबूत मांगना गलत है। सुरक्षा बल पूरी निष्ठा से देश की सेवा और रक्षा कर रहे हैं। विपक्ष को इसे चुनावी मुद्दा नहीं बनाना चाहिए।

  • मोदी के सामने करूंगा आत्महत्या-बीजेपी कैंडिडेट की चेतावनी, बताया यह कारण !

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    शिलॉन्ग। अवैध घुसपैठियों को देश से बाहर करने के वादे पर बीजेपी जहां इस बार का लोकसभा चुनाव लड़ रही है, वहीं बीजेपी के ही एक उम्मीदवार ने नागरिकता संशोधन विधेयक के लागू होने पर जान देने की धमकी दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने आत्महत्या करने की चेतावनी दी है।

    मेघालय के शिलॉन्ग से बीजेपी उम्मीदवार सनबोर शुल्लाई ने गुरुवार को कहा, श्जब तक मैं जिंदा हूं, नागरिकता संशोधन विधेयक को लागू नहीं होने दूंगा। मैं अपनी जान दे दूंगा। मैं नरेंद्र मोदी के सामने आत्महत्या कर लूंगा, लेकिन इस बिल को लागू नहीं होने दूंगा।श्

    उधर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने गुरुवार को कहा, ‘हमारा आपसे वादा है कि हर एक घुसपैठिए को बाहर निकालने के लिए देशभर में एनआरसी को लागू करेंगे। हम ममता बनर्जी की तरह घुसपैठियों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल नहीं करते। हमारे लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि देश के हर एक हिंदू और बौद्ध शरणार्थी को नागरिकता मिले।’

    बता दें कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 का हाल ही में पूर्वोत्तर राज्यों और खासकर असम में बहुत विरोध हुआ। यह बिल लोकसभा में ‘नागरिकता अधिनियम’ 1955 में बदलाव के लिए लाया गया था। केंद्र सरकार ने इस विधेयक के जरिए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैन, पारसियों और ईसाइयों को बिना वैध दस्तावेज के भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव रखा था। इसके लिए उनके निवास काल को 11 वर्ष से घटाकर छह वर्ष कर दिया गया है। यानी अब ये शरणार्थी 6 साल बाद ही भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस बिल के तहत सरकार अवैध प्रवासियों की परिभाषा बदलने के प्रयास में है।

  • दुनिया की सबसे छोटी महिला ज्योति आमगे ने एक मतदान केंद्र पर किया वोटिंग

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    मुंबई। लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बीच नागपुर के पोलिंग बूथ पर उस वक्त मतदाता से लेकर ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी हैरान रह गए, जब दुनिया की सबसे छोटी महिला यहां वोट डालने के लिए पहुंची। गिनेस बुक वर्ल्ड रेकॉर्ड धारक ज्योति आमगे ने गुरुवार को यहां के एक मतदान केंद्र पर वोट डाला।

    लाल और चेक स्लीवलेस ड्रेस पहनीं दो फीट एक इंच की लंबाई वाली ज्योति अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए धैर्य के साथ कतार में खड़ी हुईं। मतदान के बाद स्याही लगी उंगली दिखाते हुए ज्योति ने मीडिया से कहा, मैं सभी लोगों से वोट डालने का आग्रह करती हूं। कृपया पहले वोट डालें फिर अपने अन्य काम करें।

    आमगे ने मतदान केंद्र संख्या- 253 पर अपना वोट डाला। इस दौरान उस वक्त दिलचस्प नजारा दिखा, जब कागजी प्रक्रिया और वोटर लिस्ट में नाम चेक करने के लिए उन्हें मतदान कर्मी की टेबल पर खड़ा होना पड़ा। एक सिलेब्रिटी कुक और उद्यमी आमगे टीवी शो बिग बॉस-6 में नजर आ चुकी हैं। इसके अलावा वह अमेरिकी और इटैलियन टीवी सीरीज में भी अभिनय कर चुकी हैं। लोनावाला (पुणे) के सिलेब्रिटी वैक्स म्यूजियम में उनका अपना स्टैचू भी लगा है। बता दें कि नागपुर में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी चुनाव लड़ रहे हैं। यहां से कांग्रेस ने उनके खिलाफ नाना पटोले को उतारा है।

  • भाजपा की 6 राज्यों की इन सीटों पर अग्नि परीक्षा !

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    लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर घमासान चरम पर पहुंच चुका है। विपक्षी पार्टियां भाजपा को हराने के लिए लामबंद होने लगी हैं तो वहीं भाजपा सत्ता में दोबारा आने के लिए लगातार नई रणनीति बना रही है। उसने विभिन्न राज्यों में सहयोगियों के साथ गठबंधन को तेजी से आगे बढ़ाया है। महाराष्ट्र में जहां उसने 30 साल पुराने दोस्त शिवसेना के साथ फिर दोस्ती की है, वहीं तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक और पीएमके के गठजोड़ में शामिल हो गई है।

    जिन बड़े प्रदेशों ने 2014 में भाजपा को सत्ता में पहुंचाया उन जगहों पर इस बार भाजपा की अग्निपरीक्षा है। हिंदी हार्टलैंड के तीन राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा को विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। इसने पार्टी पर दबाव बेहद बढ़ा दिया है। नजर डालते हैं ऐसे बड़े राज्यों पर जो उसकी जीत का रास्ता तय करेंगे साथ ही यहां भाजपा को कड़े इम्तेहान से भी गुजरना है।

    उत्तर प्रदेश – 80 सीटें
    सीटों के लिहाज से उत्तप्रदेश पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। आबादी के लिहाज से यहां सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटें हैं। पिछली बार भाजपा ने यहां जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 71 सीटों पर कब्जा जमाया था। यहां मिली प्रचंड जीत ने उसे केंद्र की सत्ता तक पहुंचाया। पीएम मोदी ने खुद वाराणसी से चुनाव लड़ा और संसद पहुंचे। इस राज्य में मोदी लहर इतनी प्रचंड थी कि बसपा का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया जबकि समाजवादी पार्टी 5 सीटें ही जीत सकी। कांग्रेस अमेठी और रायबरेली में ही टिक सकी।लेकिन इस बार हालात अलग है। एक अरसे बाद उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं और तमाम सर्वे में भाजपा को कम सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं। सर्वे की मानें तो सपा-बसपा गठबंधन 50 से 60 सीटों पर कब्जा जमा सकता है। अगर अनुमान सही निकला तो भाजपा के लिए दोबारा सत्ता तक पहुंचना बेहद मुश्किल होगा।

    महाराष्ट्र – 48 सीटें
    ये राज्य भाजपा के लिए किस कदर महत्वपूर्ण इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उसने लंबे समय से नाराज चल रहे दोस्त शिव सेना को मनाना पड़ा।भाजपा से नाराज शिवसेना अकेले ही लोकसभा चुनाव लड़ने का एलान कर चुकी थी। लेकिन भाजपा ने किसी तरह शिवसेना के साथ दोबारा दोस्ती कर बड़ी मुसीबत को टाल दिया। समझौते के तहत भाजपा 25 और शिवसेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। दोनों मिलकर फिर से 2014 का जलवा दोहरा सकते हैं। 2014 में इस गठबंधन ने 48 में से 41 सीटों पर कब्जा किया था। भाजपा को 23 जबकि शिवसेना को 18 सीटों पर जीत मिली थी। दोनों मिलकर इसके आसपास का आंकड़ा फिर हासिल कर सकते हैं।

    मध्यप्रदेश – 29 सीटें
    ये राज्य भाजपा के लिए इस बार कड़ी परीक्षा लेने जा रहा है। 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 15 साल से काबिज भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया। सबसे बड़ा कारण सवर्ण आंदोलन को माना गया। 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 29 में से 27 सीटों पर कब्जा जमाया था। लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार का असर लोकसभा चुनाव में भी दिख सकता है। अगर 2019 में इसी पैटर्न पर वोटिंग हुई तो भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    गुजरात – 26 सीटें
    2014 चुनाव में मोदी लहर के चलते भाजपा ने गुजरात में भी भगवा परचम लहराया। भाजपा ने सभी 26 सीटों पर कब्जा किया। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता हासिल करने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। कांग्रेस ने उसे कड़ी टक्कर दी थी। इस लिहाज से 2019 चुनाव में इस राज्य में भाजपा को थोड़ा बहुत नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाणी जैसे युवा नेता लगातार भाजपा को चुनौती दे रहे हैं। लेकिन आखिरी वक्त पर मोदी बाजी को पूरी तरह अपने पक्ष में भी कर सकते हैं। करीब दो दशकों से यहां की जनता भाजपा पर भरोसा जताता आ रही है।

    कर्नाटक – 28 सीटें
    28 सीटों वाला ये राज्य भी भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भाजपा के लिए इस बार कड़ा इम्तेहान है। 2014 में पार्टी ने यहां 17 सीटें जीती थीं जिसने केंद्र में भाजपा सरकार बनने में अहम भूमिका निभाई थी। गौर करने लायक बात है कि बेल्लारी लोकसभा उपचुनाव में भाजपा को हार मिली थी। लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया पर बहुमत से कुछ सीटें दूर रह गई। चुनाव बाद हुए कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन ने उसका खेल बिगाड़ दिया। तमाम मशक्कत के बाद भी भाजपा सरकार बनाने में नाकाम रही। बहुमत साबित कर पाने में नाकाम रहे येदियुरप्पा को सदन में इस्तीफा देना पड़ा। 2019 चुनाव में भाजपा के सामने पुराने प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती होगी।

    राजस्थान – 25 सीटें
    इस राज्य में भी भाजपा को 2018 में तगड़ा झटका मिला। विधानसभा चुनाव में अशोक गहलोत और सचिन पायलट की अगुवाई में कांग्रेस ने पांच साल बाद सत्ता में वापसी की। 2014 की मोदी लहर में भाजपा ने यहां सभी 25 सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार इस प्रदर्शन को दोहरा पाना बेहद मुश्किल होगा। यानी यहां से भी भाजपा को सीटों की कटौती झेलनी होगी।

    इन 6 राज्यों में सीटों के लिहाज से देखें तो भाजपा को 2014 के आसपास के प्रदर्शन को दोहराना होगा तभी उसका दोबारा सत्ता पाने का लक्ष्य पूरा होगा। इन छह राज्यों में कुल 236 सीटें हैं। सभी 6 राज्य बड़े हैं और यहां भाजपा का खासा जनाधार भी है।

    भाजपा ने 2014 में इन राज्यों की 236 में से 189 सीटों पर कब्जा जमाया था। अगर इस बार इस आंकड़े में बड़ी गिरावट आई तो भाजपा का दोबारा सरकार बनाने का सपना चकनाचूर हो जाएगा।

  • भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता पर भाजपा मुख्यालय पर जूता फेंका गया

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    नई दिल्ली। दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक शख़्स ने जूता फेंका। जिस समय जूता फेंका गया भाजपा नेता नेता जीवीएल नरसिम्हा राव प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे, इसी दौरान जूता फेंका गया, जो उनके चेहरे को छूते हुए निकल गया। जूता मारने वाला शख़्स खुद का नाम शक्ति भार्गव बता रहा है और वह कानपुर का रहने वाला है।

    घटना के तुरंत बाद जूता फेंकने वाले शख़्स को पकड़ लिया गया। मामले में और छानबीन जारी है। घटना की सूचना पुलिस को दे दी गई। इसके बाद मौके पर पहुंची आईपी स्टेट थाने की पुलिस ने आरोपी शख़्स को हिरासत में लिया और थाने ले गई।

    शक्ति भार्गव के परिवार का भार्गव हॉस्पिटल के नाम से अस्पताल भी है। बताया जा रहा है कि परिवार में कुछ सालों से झगड़ा चल रहा है और वह 2 साल से मां से अलग रह रहा है। परिवार ने इसे बेदखल कर रखा है. बताया जा रहा है कि किसी प्लॉट के मामले को लेकर वह परेशान चल रहा है। मानसिक हालत ठीक नहीं है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है।

    हम बता दें कि जीवीएल नरसिम्हा राव राज्यसभा के सदस्य भी हैं।

  • ‘चौकीदार चोर है’ बयान पर फंसे राहुल गांधी, सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस, मांगा जवाब

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    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट द्वारा नए दस्तावेजों के आधार पर राफेल डील पर पुनर्विचार याचिका स्वीकार किए जाने को ‘चौकीदार चोर है’ के रूप में पेश करने से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को नोटिस जारी करते हुए 22 अप्रैल तक जवाब देने को कहा है।

    चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है। राहुल गांधी पर सुप्रीम कोर्ट के बयान को गलत तरह से पेश करने का आरोप है। बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी ने राहुल के खिलाफ आपराधिक अवमानना की याचिका दायर की थी।

    कोर्ट ने कहा, हम यह स्पष्ट करते हैं कि राहुल गांधी ने इस अदालत का नाम ले कर राफेल सौदे के बारे में मीडिया और जनता में जो कुछ कहा उसे गलत तरीके से पेश किया। हम यह स्पष्ट करते हैं कि राफेल मामले में दस्तावेजों को स्वीकार करने के लिए उनकी वैधता पर सुनवाई करते हुए इस तरह की टिप्पणियां करने का मौका कभी नहीं आया।

    बता दें कि बुधवार (10 अप्रैल) को शीर्ष अदालत ने सरकार की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए राफेल मामले में रिव्यू पिटिशन पर नए दस्तावेज के आधार पर सुनवाई की फैसला किया था।

    सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय बेंच ने एक मत से दिए फैसले में कहा था कि जो नए दस्तावेज डोमेन में आए हैं, उन आधारों पर मामले में रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई होगी। इसके बाद राहुल ने मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कहा था कि अब सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है कि चैकीदार चोर है।

    सुप्रीम कोर्ट ने क्लियर कर दिया है कि  चौकीदार जी ने चोरी करवाई है। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि राफेल मामले में कोई न कोई करप्शन हुआ, कोई न कोई भ्रष्टाचार हुआ है।

    केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लीक दस्तावेजों के आधार पर रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई का विरोध किया था और कहा था कि ये दस्तावेज प्रिविलेज्ड (विशेषाधिकार वाला गोपनीय) दस्तावेज है और इस कारण रिव्यू पिटिशन खारिज किया जाना चाहिए।

    बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि वह याचिका पर 15 अप्रैल को सुनवाई करेगी।

    लेखी ने अपनी याचिका में कहा कि गांधी ने अपनी निजी टिप्पणियों को शीर्ष न्यायालय द्वारा किया गया बताया और लोगों के मन में गलत धारणा पैदा करने की कोशिश की। लेखी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने टिप्पणी की थी कि अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया, चौकीदार चोर है।

  • EC ने योगी और मायावती की रैलियों पर लगाया 48 घंटों का प्रतिबंध

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    लखनऊ। चुनाव आयोग ने कड़ा एक्शन लेते हुए आचार संहिता की धज्जियां उड़ा रहे नेताओं पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती की चुनावी रैलियों पर 72 और 48 घंटों के लिए प्रतिबंध लगा दिया है. इस दौरान ये दोनों नेता ना तो कोई चुनावी रैली को संबोधित कर पाएंगे और ना ही किसी जनसभा में भाषण दे पाएंगे. दरअसल चुनाव आयोग ने योगी आदित्यनाथ को नोटिस भेजकर उनसे उनके अली और बजरंगबली वाले बयान पर जवाब मांगा था. योगी आदित्यनाथ ने जवाब में कहा था कि वो आगे से इस तरह का बयान नहीं देंगे।

    योगी आदित्यनाथ ने मेरठ में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि सपा-बसपा और कांग्रेस को अली पर भरोसा होगा लेकिन हमें बजरंगबली पर भरोसा है. वहीं दूसरी तरफ मायावती ने देवबंद में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था अगर भाजपा को हराना है तो मुस्लिम बिरादरी के सभी लोग अपना वोट बांटने के बजाय महागठबंधन को एकतरफा वोट दें. चुनाव आयोग ने मायावती से उनके बयान पर सफाई मांगी थी जिसके जवाब में उन्होंने लिखा था कि रैली में उन्होंने बहुजन समाज को संदेश दिया था और मुस्लिम भी उसी का हिस्सा है।

    दोनों तरफ से जवाब दाखिल होने के बाद चुनाव आयोग ने दोनों को आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी माना और सोमवार को दोनों नेताओं पर कार्रवाई करते हुए योगी आदित्यनाथ पर 72 घंटे और मायावती पर 48 घंटों तक किसी भी तरह की चुनावी मुहीम पर रोक लगा दी है. यानी मंगलवार सुबह 6 बजे से योगी आदित्यनाथ अगले 72 घंटे और मायावती अगले 48 घंटे ना तो कोई चुनाव प्रचार कर सकते हैं, ना ही कोई रोड शो कर सकते हैं और ना ही किसी चैनल पर कोई इंटरव्यू दे सकते हैं. गौरतलब है 18 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान होना है. ऐसे में दोनों नेताओं की कोशिश थी कि अगले दो दिन जमकर रैलियां कर अपने पक्ष में माहौल बनाया जाए लेकिन चुनाव आयोग ने दोनों नेताओं के अरमानों पर पानी फेर दिया।

  • फ्रेंच अखबार लू मुंद की रिपोर्ट में दावा : राफेल सौदे के बाद फ्रांस में रिलायंस के टैक्स माफ हुए

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    नई दिल्ली । फ्रांसीसी अखबार लू मुंद की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फ्रांस ने राफेल डील के ऐलान के बाद अनिल अंबानी की कंपनी के 14.37 करोड़ यूरो (करीब 1,125 करोड़ रुपये) के टैक्स को माफ किया था। लु मुंद की शनिवार को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के 36 राफेल विमान खरीदने के ऐलान के कुछ महीने बाद ही 2015 में फ्रांस सरकार ने रिलायंस कम्यूनिकेशन की फ्रांस में रजिस्टर्ड टेलिकॉम सब्सिडियरी के टैक्स को माफ कर दिया।

    दूसरी तरफ, रिलायंस कम्यूनिकेशन ने फ्रांसीसी अखबार की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए किसी भी तरह की अनियमितता को खारिज किया है। आरकॉम ने कहा है कि टैक्स विवाद को उन कानूनी प्रावधानों के तहत हल किया गया, जो फ्रांस में संचालित सभी कंपनियों के लिए उपलब्ध हैं।

    रक्षा मंत्रालय ने भी कहा है कि राफेल डील और टैक्स मसले को एक साथ जोड़कर देखना पूरी तरह गलत, पक्षपातपूर्ण होने के साथ-साथ गुमराह करने की शरारती कोशिश है। वहीं, कांग्रेस ने फ्रेंच न्यूजपेपर की रिपोर्ट के बाद एक बार फिर पीएम मोदी पर हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि  मोदी कृपा  से फ्रांस की सरकार ने अनिल अंबानी की कंपनी के अरबों रुपये का टैक्स माफ किया।

    फ्रांसीसी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फ्रांस के टैक्स अधिकारियों ने रिलायंस फ्लैग अटलांटिक फ्रांस से निपटारे के रूप में 73 लाख यूरो (करीब 57.15 करोड़ रुपये) स्वीकार किए, जबकि ऑरिजिनल डिमांड 15.1 करोड़ यूरो (करीब 1182 करोड़ रुपये) की थी। रिलायंस फ्लैग का फ्रांस में टेरेस्ट्रियल केबल नेटवर्क और दूसरे टेलिकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर पर स्वामित्व है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन फ्रेंच प्रेजिडेंट फ्रांस्वा ओलांद के साथ बातचीत के बाद 10 अप्रैल 2015 को पैरिस में 36 राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने का ऐलान किया था। राफेल पर फाइनल डील 23 सितंबर 2016 को हुई थी।

    मुख्य विपक्षी कांग्रेस इस डील में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाती रही है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार एक राफेल जेट को 1,670 करोड़ रुपये में खरीद रही है जबकि यूपीए के दौरान जब डील पर बात हुई थी तब एक विमान की कीमत 526 करोड़ रुपये तय हुई थी। हालांकि, यूपीए शासनकाल में राफेल को लेकर सिर्फ बातचीत हुई थी, कोई डील नहीं।

    रिलायंस कम्युनिकेशन ने इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया में किसी भी तरह के गलत काम से इनकार किया है। कंपनी ने कहा है कि कर विवाद को कानूनी ढांचे के तहत निपटाया गया। उन्होंने कहा कि फ्रांस में काम करने वाली सभी कंपनियों के लिए इस तरह का तंत्र उपलब्ध है। फ्रांस के समाचारपत्र ने कहा है कि देश के कर अधिकारियों ने रिलायंस फ्लैग अटलांटिक फ्रांस से 15.1 करोड़ यूरो के कर की मांग की थी लेकिन 73 लाख यूरो में यह मामला सुलट गया।

    इस समाचार पर प्रतिक्रिया देते हुए रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि कर मामले और राफेल के मुद्दे में किसी तरह का संबंध स्थापित करना पूरी तरह अनुचित, निहित उद्देश्य से प्रेरित और गलत जानकारी देने की कोशिश है। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है,
    हम ऐसी खबरें देख रहे हैं, जिसमें एक निजी कंपनी को कर में दी गयी छूट एवं भारत सरकार द्वारा राफेल लड़ाकू विमान की खरीद के बीच अनुमान के आधार पर संबंध स्थापित किया जा रहा है। ना तो कर की अवधि और ना ही रियायत के विषय का वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हुई राफेल की खरीद से दूर-दूर तक कोई लेना-देना है।

  • मुख्यमंत्री पुत्र हत्याकांड: रोहित की हत्या उसकी पत्नी अपूर्वा ने ही की – पुलिस

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    नई दिल्ली। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी के बेटे रोहित शेखर की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने बुधवार को उनकी पत्नी अपूर्वा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में अपूर्वा ने रोहित को मारने की बात कबूल ली। रोहित की मां उज्जवला तिवारी ने कहा था कि प्रेम विवाह के बाद से ही बेटा-बहू के बीच तनाव था। अपूर्वा परिवार की संपत्ति पर कब्जा करना चाहती थी। 16 अप्रैल को रोहित की मौत का पता चला था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की बात सामने आई थी।

    पुलिस के मुताबिक, रोहित की गर्दन पर रगड़ के निशान पाए गए थे। इसके लिए पुलिस ने मंगलवार को अपूर्वा के नाखूनों और बालों को लेकर उन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने बताया कि रोहित की कॉल डिटेल से पता चला है कि वारदात वाली तड़के करीब 4.10 बजे रोहित के मोबाइल से आखिर बार कुमकुम नाम की महिला को कॉल की गई। कई लैंडलाइन नंबर भी मिले हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रोहित की मौत का वक्त 1.30 बजे से 2.30 बजे के बीच आया है। पता लगाया जा रहा है कि आखिर कुमकुम को रोहित के मोबाइल से किसने कॉल किया था। टीम हत्या का मकसद जानने की भी कोशिश कर रही है।

    दिल्ली के अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर राजीव रंजन ने कहा, ‘‘हमने अपूर्वा को वैज्ञानिक सबूतों और फोरेंसिक सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया। उसने पति को मारने की बात स्वीकार कर ली। यह भी बताया कि वह शादी से खुश नहीं थी। अपूर्वा 16 अप्रैल की रात को रोहित के कमरे में गई थी और वारदात को अंजाम दिया। बाद में उसने सबूत मिटा दिए। पूरा घटनाक्रम करीब डेढ़ घंटे चला।’’ पुलिस ने कहा कि जांच अफसर ने यह भी बताया कि अपूर्वा ने शुरुआत में मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच की टीम को भटकाने की भी कोशिश की थी। रोहित-अपूर्वा की शादी पिछले साल मई में हुई थी।

    हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए क्राइम ब्रांच की जांच घटना से जुड़े आखिरी 3 घंटों पर फोकस रही। घटना वाली रात 1 बजे से लेकर तड़के 4 बजे तक के बीच की कड़ियों को जोड़ा। दरअसल सीसीटीवी फुटेज में सामने आया है कि करीब 11.30 बजे रोहित पहली मंजिल पर स्थित अपने कमरे में जाकर सो गए थे। रात 1.30 बजे अपूर्वा ग्राउंड फ्लोर से पहली मंजिल पर स्थित रोहित के कमरे में जाते हुए सीसीटीवी कैमरे में दिखाई दी। ठीक एक घंटे बाद रात 2.30 बजे वह पहली मंजिल से ग्राउंड फ्लोर पर आते दिखी। पुलिस का मानना है कि इस दौरान दोनों में हाथापाई हुई होगी।

  • 15 राज्यों की 117 सीटों पर आज तीसरे चरण का मतदान, बीजेपी और कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर

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    नई दिल्ली ।  आज सबसे ज्यादा 117 सीटों पर वोट डाले जाने हैं। इस चरण के साथ ही गुजरात, केरल, गोवा, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, असम, दादर नागर हवेली और दमन-दीव की सभी लोकसभा सीटों पर मतदान पूरा हो जाएगा। इस चरण में बीजेपी और कांग्रेस, दोनों पार्टियों के अध्यक्ष चुनाव मैदान में हैं।

    बीजेपी अध्यक्ष  अमित शाह पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। वह गांधीनगर से पार्टी के प्रत्याशी हैं जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस चरण में केरल के वायनाड संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार हैं। तीसरे चरण में 15 राज्यों की 117 सीटों में से बीजेपी का लक्ष्य अपनी 62 सीटों को बचाने का होगा जहां पार्टी ने 2014 में जीत हासिल की थी। ऐसे में यह चरण सत्तारूढ़ दल के लिए काफी अहम है।

    पिछले चुनाव में इनमें से 16 सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी जीते थे, जबकि अन्य सीटें बीजेडी (6), माकपा (7), NCP (4), समाजवादी पार्टी (3), शिवसेना (2), आरजेडी (2), एआईयूडीएफ (2), आईयूएमएल (2), एलजेपी (1), पीडीपी (1), आरएसपी (1), केरल कांग्रेस-एम (1), भाकपा (1), स्वाभिमानी पक्ष (1), तृणमूल कांग्रेस (1) और निर्दलीय (3) की झोली में गई थीं। इस बार बीजेपी की परीक्षा उसका गढ़ रहे गुजरात में होगी, जहां प्रदेश की सभी 26 लोकसभा सीटों पर मंगलवार को मतदान होगा।

    पार्टी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी उन शीर्ष नेताओं में शामिल हैं जो मंगलवार को गुजरात में मतदान करेंगे। पीएम के सोमवार रात में ही अहमदाबाद पहुंचने की उम्मीद है। एक बयान के मुताबिक मोदी गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शहर के रणिप क्षेत्र स्थित एक स्कूल में स्थापित बूथ पर अपना वोट डालेंगे। इसके अलावा कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में भी बीजेपी की परीक्षा होगी जहां पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहा था।

    बीजेपी ने इस चरण में मतदान वाली सीटों पर 2014 में गुजरात की सभी 26 सीटों, कर्नाटक की 14 में से 11 सीटों और उत्तर प्रदेश की 10 सीटों में से आठ पर, छत्तीसगढ़ की सात में से छह सीटों पर, महाराष्ट्र की 14 में से छह सीटों पर, गोवा की दोनों सीटों पर और असम, बिहार, दादर नागर हवेली और दमन-दीव की एक-एक सीटों पर जीत हासिल की थी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य होने के कारण बीजेपी इस बार भी गुजरात की सभी सीटों पर जीत हासिल करने की उम्मीद लगाए बैठी है। हालांकि कांग्रेस ने 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में बीजेपी को कड़ी चुनौती दी थी, इसलिए कांग्रेस भी 10 से 15 सीटों पर इस बार जीत की उम्मीद कर रही है।

    गुजरात के तीन युवा नेता हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी ने विधानसभा चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस की पकड़ मजबूत बनाने में मदद की थी, लेकिन इस बार वे चुनाव की दौड़ में शामिल नहीं हैं। पाटीदार नेता हार्दिक पटेल पिछले महीने कांग्रेस में शामिल हुए लेकिन दंगे से संबंधित मामले में अभियुक्त होने के कारण वह चुनाव नहीं लड़ पाए, जबकि ठाकोर ने इसी महीने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया। कर्नाटक में मंगलवार को जिन 14 सीटों पर मतदान हो रहा है, वहां बीजेपी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन उसे कांग्रेस-जनता दल (एस) गठबंधन से कड़ी चुनौती मिल रही है।

    उधर, सत्तारूढ़ दल को उत्तर प्रदेश में भी तीसरे चरण में यादव बहुल इलाके में कड़ी चुनौती मिल सकती है। समाजवादी पार्टी का गढ़ रहे मैनपुरी, बदायूं और संभल लोकसभा क्षेत्रों में मंगलवार को मतदान होने जा रहा है और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के साथ गठबंधन होने के बाद इन क्षेत्रों में एसपी की संभावना को मजबूती मिली है।

    कुछ विश्लेषक मानते हैं कि कांग्रेस भी बीजेपी का ही वोट काटेगी। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव फिरोजाबाद से अपने भतीजे व एसपी उम्मीदवार अक्षय यादव के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं और वह एसपी-बीएसपी गठबंधन के विरोध में लोगों को वोट करने को कह रहे हैं। SP के संरक्षक मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से चुनाव लड़ रहे हैं।

    महाराष्ट्र में तीसरे चरण में बारामती, माधा, कोल्हापुर और सतारा समेत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के गढ़ में मतदान हो रहा है। पार्टी अध्यक्ष शरद पवार की पुत्री सुप्रिया सुले बारामती से चुनाव मैदान में हैं। छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने अपने सभी मौजूदा सांसदों को बदल दिया है। पार्टी को प्रदेश में 15 साल बाद पिछले साल सत्ता में आई कांग्रेस से कड़ी चुनौती मिल रही है।

    बिहार में इस चरण में जिन क्षेत्रों में चुनाव हो रहा है उनमें से बीजेपी को 2014 में सिर्फ एक सीट पर जीत मिली थी और पार्टी इस बार भी इनमें से एक ही सीट पर चुनाव लड़ रही है, जबकि सहयोगी पार्टी जनता दल (युनाइटेड) तीन सीटों पर और लोकजनशक्ति पार्टी (एलजेपी) एक सीट पर चुनाव लड़ रही है।

    वहीं, महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) तीन सीटों पर जबकि कांग्रेस और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) एक-एक सीट पर चुनाव लड़ रही हैं। मुख्य मुकाबला मधेपुरा में है जहां वर्तमान सांसद पप्पू यादव (पिछली बार RJD के टिकट पर) इस बार अपने ही दल जन अधिकार पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं और उनके खिलाफ आरजेडी उम्मीदवार शरद यादव चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल जदयू के टिकट पर दिनेश चंद्र यादव चुनाव मैदान में हैं।

    मधेपुरा में इस बार त्रिकोणीय संघर्ष है। ओडिशा के पुरी लोकसभा क्षेत्र में भी त्रिकोणीय संघर्ष है, जहां तीन प्रमुख दलों के प्रवक्ताओं के बीच लड़ाई है। वर्तमान सांसद और बीजू जनता दल (बीजेडी) प्रवक्ता पिनाकी मिश्र का मुकाबला बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा से है, जबकि कांग्रेस के मीडिया सेल अध्यक्ष सत्यप्रकाश नायक भी चुनावी मैदान में हैं।

    असम में चार लोकसभा क्षेत्रों में मंगलवार को मतदान होगा जहां कांग्रेस और ऑल इंडिया युनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) को नागरिकता (संशोधन) विधेयक को लेकर बीजेपी के विरोध का लाभ मिलने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल में बहुकोणीय संघर्ष है जहां तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), कांग्रेस अपने-अपने दावे ठोंक रहे हैं।