Category: national

  • आम लोकसभा चुनाव की तारीख घोषित होते ही क्या होता है, ये भी जानिए

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    नई दिल्ली । तमाम अखबारों, टीवी और नुक्कड़ की बातचीत में अब लोकसभा चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है। नेताओं की रैलियाँ बढ़ गई हैं और साथ ही आरोप-प्रत्यारोप भी। मगर ये चुनाव हैं कब? लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग अमूमन मार्च के पहले हफ्ते में करता है. तारीखों को लेकर जारी अटकलों के बीच समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक इस बार भी मार्च के पहले हफ्ते में चुनाव की तारीख का ऐलान हो सकता है।

    कांग्रेस पहले ही देरी का आरोप लगाते हुए कह चुकी है कि चुनाव आयोग तारीखों के ऐलान से पहले PM मोदी के यात्रा कार्यक्रमों के पूरे होने का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी 8 मार्च को कई प्रॉजेक्ट्स का उद्घाटन करने वाले हैं। कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने आरोप लगाया कि सरकार ने टीवी, रेडियो और प्रिंट मीडिया को राजनीतिक विज्ञापनों से पाट दिया है और ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग सरकार को आखिरी वक्त तक सरकारी पैसों से चुनाव प्रचार करने देना चाहती है।

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    2014 के आम चुनाव की तारीखों का ऐलान 5 मार्च को किया गया था। मतदान 16 अप्रैल को शुरू होकर 5 चरणों में 13 मई को खत्म हुए थे. 16 मई को नतीजों में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत हासिल हुआ था और दूसरे सहयोगी दलों के साथ एनडीए की सरकार बनी. भाजपा को इन चुनाव में 282 सीटें मिली थीं.। इसी तरह 2009 लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान उस साल 2 मार्च को किया गया था। वहीं, 2004 के आम चुनाव की तारीखों का ऐलान 29 फरवरी को हुआ था।

    चुनाव की तारीखों का ऐलान का सही समय क्या है?
    नियम कहते हैं कि चुनावों की आधिकारिक अधिसूचना (जो आम तौर पर चुनाव के ऐलान के 7 से 10 दिनों बाद जारी होती है) और पहले चरण के चुनाव के बीच में 3 हफ्तों से ज्यादा का गैप नहीं होना चाहिए। मौजूदा लोकसभा (16वीं) का कार्यकाल 3 जून को खत्म हो रहा है, यानी नई लोकसभा का गठन 4 जून तक हो जाना चाहिए। इसका मतलब है कि अगर चुनाव आयोग 8 मार्च को चुनाव की तारीखों का ऐलान करता है और 18 मार्च को अधिसूचना जारी करता है तो पहले चरण का चुनाव 10 अप्रैल को पड़ सकता है। पिछले साल 7 अप्रैल को पहले चरण के लिए वोटिंग थी।

    टाइमिंग की राजनीति
    जब चुनाव आयोग ने पिछले साल 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान में देरी की थी (दोपहर साढ़े 12 बजे के बजाय साढ़े 3 बजे) तो विपक्ष ने आरोप लगाया था कि यह पीएम की रैली (अजमेर, राजस्थान) को आचार संहिता लागू होने से पहले पूरी होने को सुनिश्चित करने के लिए किया गया। इससे पहले, (मई 2018 में) बीजेपी की आईटी सेल के चीफ ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम को उसकी आधिकारिक घोषणा से कुछ मिनट पहले ही ट्वीट कर दिया था, जिसके बाद विपक्ष ने पोल शेड्यूल लीक होने का आरोप लगाया था। उससे भी पहले, 2017 में हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा चुनाव का एक साथ ऐलान नहीं करने (दो हफ्ते का गैप) को लेकर चुनाव आयोग पर बीजेपी को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे। आम तौर पर जिन विधानसभाओं के कार्यकाल कुछ महीनों के अंतराल पर खत्म होते हैं, उनके चुनावों का ऐलान एक साथ किया जाता है। गुजरात सरकार ने इन 2 अतिरिक्त हफ्तों का इस्तेमाल कुछ चुनावी वादों के लिए किया।

    चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था
    चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसे संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों को कराने के लिए तमाम शक्तियां मिली हुई हैं। उसे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मिली हुई है। इसलिए जरूरी है कि यह किसी भी तरह के बाहरी दबाव से पूरी तरह मुक्त हो। ऐसे फैसले जिनसे पक्षपाती रवैये का संदेह पैदा हो, उसकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

  • अयोध्या विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने 3 मध्यस्थता पैनल का किया ऐलान, जानिए कौन हैं मध्यस्थ

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    नई दिल्ली । अयोध्या मामले का मध्यस्थता के जरिए हल के लिए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्यस्थता पैनल का ऐलान किया। मध्यस्थता पैनल में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पांचू शामिल हैं। मध्यस्थता की पूरी कार्यवाही बंद कमरे में होगी। यानी, मीडिया इसकी रिपोर्टिंग नहीं कर सकेगा। आइए, जानते हैं कि कौन हैं मध्यस्थता समिति में शामिल ये नाम।

    अपने लंबे न्यायिक सफर में उन्होंने एक वकील से लेकर हाई कोर्ट के जज, हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के जज तक का रास्ता तय किया। 20 अगस्त 1975 को वकालत की शुरुआत करने वाले कलीफुल्ला 2000 में मद्रास हाई कोर्ट में परमानेंट जज नियुक्त हुए। फरवरी 2011 में वह जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के जज बने और दो हफ्ते बाद ही ऐक्टिंग चीफ जस्टिस नियुक्त हुए। सितंबर 2012 में वह जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त हुए। उसके बाद, 2 अप्रैल 2012 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने और 22 जुलाई 2016 को रिटायर हुए।

    मध्यस्थता समिति में जाने-माने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर भी शामिल हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर इससे पहले भी व्यक्तिगत स्तर पर अयोध्या मामले को सुलझाने की पहल कर चुके हैं लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इसके अलावा, वह कश्मीर में शांति के लिए भी व्यक्तिगत तौर पर पहल कर चुके हैं। श्रीश्री रविशंकर के देश-विदेश में करोड़ों अनुयायी हैं। उन्होंने 1981 में आर्ट ऑफ लिविंग की स्थापना की थी। श्री श्री रविशंकर सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द से जुड़े कार्यक्रमों के लिए भी जाने जाते हैं।

    सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या मसले पर गठित मध्यस्थता समिति में श्रीराम पांचू भी शामिल हैं। 40 सालों से वकालत कर रहे वरिष्ठ वकील पांचू पिछले 20 सालों से सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। वह मिडिएशन चैंबर्स के संस्थापक हैं। उन्होंने देश के तमाम हिस्सों में व्यावसायिक, कॉरपोरेट और अन्य क्षेत्रों से जुड़े कई बड़े और जटिल विवादों में मध्यस्थता कर चुके हैं।

  • पटना-रांची मुख्यमार्ग पर ट्रक और कार की भीषण टक्कर, 10 लोगों की मौत

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    पटना/रामगढ़ ।  पटना-रांची मुख्यमार्ग पर शनिवार की सुबह एक ट्रक ने इनोवा कार में जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में दस लोगों की मौत हो गई। ट्रक चालक घटनास्थल से फरार हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया। घटना रांची-पटना मुख्य मार्ग के कुजू ओपी थाना क्षेत्र के एनएच-33 पर हुई।

    इस हादसे में एक ट्रक ने इनोवा कार में सामने से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि इनोवा कार में सवार छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं चार लोगों ने इलाज के लिए अस्पताल जाने के क्रम में दम तोड़ दिया।

    पुलिस ने बताया है कि सभी मृतक मूल रूप से बक्सर जिले के पिहिया जोवियारा गांव के रहने वाले थे और फिलहाल अब वे रांची के हटिया में रह रहे थे। सभी लोग भोजपुर जिले के बिहिया से मुंडन संस्कार के बाद रांची के हटिया लौट रहे थे। मौके से दो लोगों के पहचान पत्र मिले हैं।

  • देश के रसूख घराने की महिलाओं ने बनाया राजनीतिक मंच, 283 महिलाओं को उतारेंगी मैदान में!

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    नई दिल्ली। नेशनल वुमन पार्टी (एनडब्ल्यूपी) और ऑल इंडिया वुमन यूनाइटेड पार्टी (एआईडब्ल्यूयूपी) ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन किया है।2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने गठबंधन में 50 फीसदी सीटों पर संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। नेशनल वुमन पार्टी और ऑल इंडिया वुमन यूनाइटेड पार्टी संयुक्त रूप से लोकसभा की 283 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। खास बात यह है कि इन दोनों पार्टियों की सदस्य महिलाएं ही हैं। एनडब्ल्यूपी की अध्यक्ष श्वेता शेट्टी ने कहा कि इस समय भारत की 545 सदस्यों की संसद में केवल 11 फीसदी महिलाएं हैं।

    हम चाहते हैं कि संसद में महिलाओं की भागीदारी 50 फीसदी हो। तभी महिलाओं को रेप और शारीरिक उत्पीड़न से सुरक्षित रहने का अधिकार मिलेगा, तभी वह आत्मनिर्भर बन पाएंगी और उन्हें आर्थिक स्थिरता और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं मिल पाएंगी। ऑल इंडिया वुमन यूनाइटेड पार्टी की अध्यक्ष नसीम बानो ने कहा कि 13 मार्च को एनडब्ल्यूपी और एआईडब्ल्यूयूपी संयुक्त रूप से जंतर मंतर से इंडिया गेट तक महिलाओं का मार्च निकालेंगी। हमने केंद्र सरकार से 9 मार्च को इंडियन वुमन डे घोषित करने की मांग की है। संसद में राजनैतिक अधिकार मिलने से ही महिलाओं की आर्थिक और राजनैतिक स्थिति सुधरेगीएनडब्ल्यूपी की अध्यक्ष श्वेता शेट्टी ने कहा कि अमेरिका की दशकों पुरानी नैशनल वुमंस पार्टी से प्रेरित होकर हमने सिर्फ महिलाओं के लिए इस पार्टी की शुरुआत की।

    इस पार्टी का मकसद संसद में महिला आरक्षण और कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न जैसे मुद्दों के खिलाफ लड़ाई लड़ना है। उन्होंने कहा कि हम जात-पात और धर्म का भेदभाव किए बिना पार्टी में शामिल होने वाली हर महिला का स्वागत करते हैं। हम देश के विकास में महिलाओं को समान रूप से भागीदार बनाना चाहते हैं। ऑल इंडिया वुमन यूनाइटेड पार्टी की अध्यक्ष नसीम बानो ने कहा कि दोनों पार्टियों की सभी सदस्य महिलाएं ही हैं। इन दोनों पार्टियों ने आगामी लोकसभा चुनाव में 283 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। 13 मार्च को दोनों पार्टियां संयुक्त रूप से जंतर मंतर से इंडिया गेट तक महिलाओं का मार्च निकालेंगी।

    एनडब्ल्यूपी की अध्यक्ष श्वेता शेट्टी ने कहा कि महिलाएं आजकल समाज के कई क्षेत्रों में अपनी उपलब्धि प्रभावशाली ढंग से दर्ज करा रही है। समाज में बदलाव लाने के लिए महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बहुत जरूरी है। हमारी पार्टी की सभी सदस्य महिलाएं हैं। जिस पार्टी से हमने गठबंधन किया, उसकी भी सभी सदस्य महिलाएं ही हैं। हमें आशा है कि हमारी पार्टियां राजनीति में महिलाओं की भागीदारी के संबंध में क्रांति लाएंगी। एनडब्ल्यूपी की अध्यक्ष श्वेता शेट्टी एमबीबीएस डॉक्टर और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

    एनडब्ल्यूपी की अध्यक्ष श्वेता शेट्टी ने कहा कि हम लोकसभा चुनाव 2019में उतरकर समाज की विचारधारा में बदलाव लाने के लिए बिल्कुल तैयार है। हमारी पार्टी का गठन 18 दिसंबर 2018 को नई दिल्ली में किया गया था। एनडब्ल्यूपी को सभी राज्यों की 15 लाख से अधिक महिलाओं का समर्थन हासिल है। उनका कहना है कि हमारी पार्टी का लक्ष्य सिस्टम के हाथों सताई गई महिलाओं को इंसाफ दिलाना है।

    एनडब्ल्यूपी की सदस्यों में पूर्व राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन की बेटी पद्मा वेंकटरमन, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पी. वी, नरसिम्हा राव की बेटी वाणी दयाकर, भारत के पूर्व राष्ट्रपति वी. वी. गिरि की बहू मोहिनी, क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की बहन नैना जड़ेजा और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की बायोपिक में जयललिता का रोल निभाने वाले अभिनेत्री नित्या मेनन शामिल है।

  •  UP में BJP के गले की फांस बन सकता है यह विवाद !

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    नई दिल्ली। इनमें ब्राह्मण और ठाकुर सामाजिक तौर पर प्रतिस्पर्धी जातियां हैं।   इसके समानांतर प्रदेश में ठाकुर बड़े नेता केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ब्राह्मणों की एक बड़ी आबादी ठाकुर राजनाथ के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी मान रही है। राज्य से वैसे भी 14 सांसद, 78 एमएलए 10 मंत्री ठाकुर हैं। संतकबीर नगर में सांसद शरद त्रिपाठी और विधायक राकेश सिंह बघेल के विवाद ने पार्टी के बड़े-बड़े नेताओं तक को हिला दिया है।

    केन्द्र सरकार के एक मंत्री इस घटना को बेहद निंदनीय मान रहे हैं और उनका अनुमान है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इस मामले को काफी गंभीरता से लिया है। उन्होंने खुद प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पांडे से बात की है और इस प्रकरण में कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव है। इसी के साथ-साथ भाजपा को उत्तर प्रदेश में जातिगत गणित ने परेशान करना शुरू कर दिया है।

    उत्तर प्रदेश में भाजपा के नेताओं को बड़ा डर ब्राह्मण बनाम ठाकुर का लग रहा है। उ.प्र. में सवर्णों का प्रतिशत 18-20 प्रतिशत है। 2014 और 2017 के विधानसभा चुनाव में यह भाजपा का मूल बेस वोट था। कांग्रेस की प्रदेश में दुर्दशा और बसपा के घटते जाने का कारण भी इस वर्ग का छिटकना है। इसमें सबसे अधिक 8-9 प्रतिशत ब्राह्मण और 4-5 प्रतिशत ठाकुर हैं। वैश्य 3-4 प्रतिशत, त्यागी या भूमिहार दो प्रतिशत के करीब हैं।

    ब्राह्मण का बड़ा चेहरा मुरली मनोहर जोशी हैं। वह एक सांसद भर रह गए हैं। दूसरा बड़ा चेहरा कलराज मिश्र हैं और मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद वह भी सांसद हैं। उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने पर भी 75 साल के उम्र की तलवार लटकी है। कलराज मिश्र को मंत्रिमंडल से बाहर करने के बाद ब्राह्मण चेहरे की भरपाई के लिए भाजपा अध्यक्ष के रूप में महेन्द्र नाथ पांडे को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन अभी वह इतनी बड़ी जगह नहीं बना पाए हैं। उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग करीब 41-43 फीसदी है।

    सबसे बड़ी 10 प्रतिशत की आबादी यादव,4-5 प्रतिशत कुर्मी, 4-5 प्रतिशत मौर्य, 3-4 प्रतिशत लोधी की है। राजभर समेत अन्य 21 प्रतिशत छोटी-छोटी जातियां हैं। साक्षी महाराज से कल्याण सिंह की मौजूदगी भाजपा को लोध मतों को दिलाती है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, स्वामी प्रसाद मौर्य समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। कुर्मी को अनुप्रिया पटेल का अपना दल बांधे रखता है।

    वहीं यादव समेत अन्य का करीब-करीब एक मुश्त वोट समाजवादी पार्टी के पाले में जाता रहा है। भाजपा ने 2014 के बाद 2017 में सामाजिक समीकरण को ठीक करके इसमें भी बड़ी सेंध लगा दी थी। इस बार इस समीकरण को साधना भी एक चुनौती है।

    उत्तर प्रदेश में यह संख्या 22-23 प्रतिशत है। बसपा की मायावती अपना दावा अब 25 प्रतिशत वोटों तक कर लेती है। इसमें 14-15 प्रतिशत जाटव, आठ प्रतिशत गैर जाटव हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कुछ सेंध इधर भी लगाया था। इस बार यह राह भी थोड़ा मुश्किल भरी लग रही है। हालांकि भाजपा के पास इन सबको बांधे रखने के लिए मजबूत तर्क हैं। बाल्मिकी समाज के सफाई कर्मियों का प्रधानमंत्री द्वारा संगम तट पर पैर धोना इसी कड़ी में देखा जा रहा है।

    17-18 प्रतिशत अल्पसंख्यक मतदाता हैं। रामपुर से मुख्तार अब्बास नकवी भाजपा सांसद रह चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी छवि में थोड़ा सॉफ्ट कार्नर दिखाया है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि अल्पसंख्यक समाज को छकाती है। मोदी सरकार का नारा सबका साथ, सबका विकास है। हालांकि भाजपा के कुछ बड़े नेता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि वह अल्पसंख्यकों के वोट को हटाकर अपने सफलता की सीढ़ी बनाते हैं।

  • चौकीदार जी हम चौकीदारों की भी मद्द करो

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    कठुआ । विलेज गार्ड यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर वीरवार को शहीद भगत सिंह पार्क में प्रदर्शन किया। यूनियन के सदस्यों ने अपनी मांगों संबंधी ज्ञापन भी बाद में प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल को भेजा। यूनियन के पुरुषोत्तम कुमार, मनोहर लाल, निम्र वेतन भोगी संघ के काबला सिंह ने कहा कि विलेज गार्ड यानि चौकीदार तबका पिछले कई सालों से अपने हकों को लेकर दरबदर हो रही है।

    यूनियन के सदस्यों ने कहा कि उनकी मुख्य मांगों में एक तो उन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मी के आधार पर नियतित किया जाए। इसके अलावा उन्हें जूते, वर्दी, सहित अन्य तमाम उचित उपकरणों की सुविधा दी जाए और साथ्ज्ञ ही आफिस रिकार्ड के लिए उन्हें बाक्स दिए हैं ताकि वह सरकारी रिकार्ड वहां सुरक्षित तरीके से रख सकें।

    इसके अलावा एस.आर.ओ. 413 को हटाया जाए और यदि कोई गार्ड किसी स्थिति में इस दुनिया से चला जाता है तो उसके स्थान पर उसके किसी परिजन को एडजस्ट करने का प्रावधान बनाया जाए। उन्होंने कहा कि यह मांगें उनकी जायज हैं और उन्हें उम्मीद है कि इसपर गौर होगा।

  • चीन की आई शामत, देशभर में व्यापारी चीनी सामान की जलाएंगे होली !

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    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में चीन द्वारा मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने पर वीटो लगाने और लगातार पाकिस्तान की मदद करने को देश के व्यापारियों ने इसे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ एक बड़ा खतरा माना है और इसी को ध्यान में रखते हुए कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) देश भर के व्यापारियों से चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का आव्हान किया है। कैट ने यह भी घोषणा की है की आगामी 19 मार्च को देश भर में हजारों स्थानों पर व्यापारी चीनी सामन की होली जलाएंगे।

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    कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि अब समय आ गया है जब चीन को पाकिस्तान का साथ देने के लिए और हर तरह से पाकिस्तान की मदद करने जो भारत के विरुद्ध काम आती है की कीमत चुकानी पड़ेगी ! चीन के लिए भारत एक बड़ा बाजार है और यदि इस बाज़ार से चीन को बेदखल कर दिया जाए तो इससे चीन की अर्थव्यवस्था को गाढ़ा झटका झेलना होगा और इसीलिए कैट ने देश भर के व्यापारियों से आग्रह किया है की वो चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करते हुए कोई चीनी सामन न बेचें और न ही खरीदें। अपने इस राष्ट्रीय अभियान में कैट ट्रांसपोर्ट, लघु उद्योग, हॉकर्स , उपभोक्ता आदि के राष्ट्रीय संगठनों को भी जोड़ेगा।

    ऐसे समय में जब पाकिस्तान भारत के साथ आतंकवादी गतिविधियों का खेल खेल रहा है ऐसे में चीन द्वारा मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने में रोड़ा अटकना एक तरह से भारत के खिलाफ कार्रवाई है। यह लगातार चौथी बार है जब चीन ने मसूद अजहर के मामले में वीटो का उपयोग किया है। इससे साफ़ जाहिर होता है की चीन पाकिस्तान का खुला समर्थन कर रहा है और करेगा। इसी कड़ी में यदि चीन को भारत के बाज़ार से बेदखल कर दिया जाए तो शायद चीन को समझ आए जाये।

    कैट ने सरकार से मांग की है की चीनी वस्तुओं के आयात पर 300 से 500 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगा दी जाए।

  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 56 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से नवाजा

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    नई दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कारों के लिए चयनित 112 में से 56 हस्तियों को सम्मानित किया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में दिवंगत अभिनेता कादर खान को मरणोपरांत पद्म श्री, जबकि अकाली दल नेता सुखदेव सिंह ढींढसा और विख्यात पत्रकार कुलदीप नैयर (मरणोपरांत) को पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया।

    महाराष्ट्र के प्रसिद्ध थिएटर कलाकार बाबासाहेब पुरंदरे उर्फ बलवंत मोरेश्वर पुरंदरे को पद्म विभूषण, बिहार के नेता हुकुमदेव नारायण यादव को पद्म भूषण तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी सिस्को सिस्टम के पूर्व सीईओ जान चैंबर्स और मशहूर डांसर व फिल्म निर्माता प्रभु देवा को पद्म श्री से सम्मानित किया गया। इस दौरान समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के अलावा कई भाजपा नेता मौजूद रहे।

    इनको मिला पद्म पुरस्कार :-

    – कुश्ती में एशियाई खेल पदक विजेता बजरंग पुनिया पद्म श्री से सम्मानित।
    – भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी एस जयशंकर पद्म पुरस्कार से सम्मानित। ब्लाइंड महिलाओं के लिए संस्था की संस्थापक
    मुक्ताबेन पंकजकुमार दगली पद्म श्री से सम्मानित।
    – प्रसिद्ध पंडित आनंदन शिवमणि पद्मश्री से सम्मानित।
    – भारतीय राष्ट्रीय कबड्डी टीम के कप्तान अजय ठाकुर को पद्म श्री।
    – शीर्ष क्रम की शतरंज खिलाड़ी हरिका द्रोणावल्ली पद्म श्री से सम्मानित।
    – केरल के फ़िल्म अभिनेता विश्वनाथन मोहनलाल ‘पद्म पुरस्कार से सम्मानित।
    – शिकारपुर विधायक और सामाजिक कार्यकर्त्ता भागीरथी देवी पद्म श्री से सम्मानित।

    गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार बाकी 56 हस्तियों को 16 मार्च को आयोजित होने वाले दूसरे समारोह में सम्मानित किया जाएगा। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार पद्म पुरस्कारों के लिए रिकॉर्ड 50000 नामांकन आए थे। यह 2014 के मुकाबले 20 गुना ज्यादा है।

  • ममता ने लगाया ‘हॉट’ एक्ट्रेस पर दांव, BJP को हराने के लिए चली ये चाल

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    कोलकाता । सिनेमाई पर्दे पर नजर आने वाली अभिनेत्रियां अब ममता के सियासी पर्दे पर नजर आने वाली हैं। बंगाल की फिल्मों में सुपरहिट इन्हीं चेहरों के सहारे ममता दीदी मोदी से मुकाबला करने वाली हैं। लोकसभा चुनाव के सियासी रण में जीत हासिल करने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बेहद सोची समझी रणनीति के तहत बांग्लादेश की सीमा से सटे बशीरहाट सीट से टॉलिवुड स्टार नुसरत जहां को मैदान में उतार दिया है।

    पार्क स्ट्रीट रेप केस में विवादों में रहने वाली बंगाली फिल्म स्टार नुसरत जहां पर दांव लगाकर ममता बनर्जी ने एक साथ कई निशाने साधे हैं। उधर, इसी रेप कांड की वजह से नुसरत जहां सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल भी हो रही हैं। दरअसल, यूपी में कम सीटें मिलने की आशंका के बाद बीजेपी इसकी भरपाई पश्चिम बंगाल से करना चाहती है लेकिन दीदीको यह मंजूर नहीं है। बीजेपी के इरादों पर पानी फेरने के लिए ममता ने बशीरघाट सीट से नुसरत जहां को टिकट दे दिया है।

    बताया जा रहा है कि बसीरहाट भी एक ऐसी सीट है जहां बीजेपी जीत की उम्मीद कर रही है। अब नुसरत जहां के जरिए ममता ने युवाओं और अल्पसंख्यकों को अपने पाले में लाने की कोशिश की है। नुसरत जहां इन दिनों बंगाली फिल्घ्म इंडस्ट्री में एक बेहद लोकप्रिय चेहरा हैं। कोलकाता की रहने वाली नुसरत जहां ने अपने छोटे से फिल्मी करियर में कई टॉप स्टार के साथ काम किया है। पेशे से मॉडल रह चुकी नुसरत जहां ने वर्ष 2011 में अपने करियर की शुरुआत जीत फिल्म से की थी।

    इसके बाद उन्घ्होंने बोलो दुर्गा माई की, हर हर ब्योमकेश, जमाई 420 जैसी फिल्में कीं। नुसरत जहां के सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोवर हैं। दुर्गा पूजा पर बधाई देने पर कुछ समय पहले कट्टरपंथियों ने उन्हें ट्रोल किया था। वह राज्य सरकार की ओर से आयोजित होने वाले सभी सांस्कृतिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्घ्सा लेती रही हैं। नुसरत जहां को लोकसभा टिकट मिलने को लेकर बहुत कम लोगों को पता था लेकिन कुछ समय पहले उन्घ्होंने इसका संकेत दिया था।

    टिकट मिलने के बाद नुसरत जहां ने कहा, राजनीतिक करियर की शुरुआत पर मैं बहुत रोमांचित महसूस कर रही हूं लेकिन यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी देता है। मैंने कभी ऐक्ट्रेस बनने और राजनीति में जाने के बारे में नहीं सोचा था। बता दें कि बसीरहाट लोकसभा सीट पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले में आती है जहां से अक्सर सांप्रदायिक संघर्ष की खबरें आती रहती हैं। टीएमसी ने इस सीट से दो बार जीत हासिल की है लेकिन उसने हर बार अपना उम्मीदवार बदलना पड़ा है। हालांकि नुसरत को टिकट देकर ममता ने अपना मास्टर स्ट्रोक चल दिया है।

    नुसरत जहां पार्क स्ट्रीट रेप कांड को लेकर काफी विवादों में रह चुकी हैं। इस रेप कांड के मुख्य आरोपी कादर खान की लंबे समय तक गर्लफ्रेंड रह चुकी नुसरत जहां का नाम चार्जशीट में नहीं आया था। बताया जा रहा है कि एक ऐंग्लो इंडियन महिला के साथ वर्ष 6 फरवरी, 2012 को पार्क स्ट्रीट पर चलती कार में रेप के बाद कादर खान को अरेस्ट कर लिया गया था। कादर और नुसरत एक-दूसरे से निकाह भी करने वाले थे। पुलिस ने नुसरत के साथ पूछताछ भी की थी।

  • गंगा की रक्षा के लिए अपने जान की कुर्बानी देने को तैयार हैं 26 वर्षीय ब्रह्मचारी आत्‍मबोधानंद

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    हरिद्वार । यह कहानी भगवान भोलेनाथ की नगरी हरिद्वार के एक आश्रम और उसमें रहने वाले तीन साधुओं की है। इन साधुओं में से एक की मौत हो गई है, एक लापता है और एक साधु पिछले 141 दिनों से महज नींबू पानी, नमक और शहद पर जिंदा है। इन साधुओं का एकमात्र लक्ष्‍य खनन, पेड़ों की अवैध कटाई और अंधाधुंध बन रही पनबिजली परियोजनाओं से गंगा को बचाना है। इसी उद्देश्‍य के लिए ये साधु लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

    यही नहीं यह कहानी स्‍वामी शिवानंद द्वारा वर्ष 1997 में स्‍थापित आश्रम मैत्री सदन की भी है जिससे तमाम घटनाएं जुड़ी हुई हैं। सबसे पहले बात मैत्री सदन में रहने वाले 26 वर्षीय ब्रह्मचारी आत्‍मबोधानंद की जो पिछले 141 दिनों से अनशन कर रहे हैं। ब्रह्मचारी आत्‍मबोधानंद मां गंगा की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाने को भी तैयार हैं। उन्‍होंने 24 अक्‍टूबर को गंगा की रक्षा की दिशा में ‘सरकारी निष्क्रियता’ के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू किया था।

    ‘सरकार गंगा को मरने दे रही है’
    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ताजा सर्वे के मुताबिक करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी देश के 39 स्‍थानों में से मात्र एक जगह पर गंगा का पानी साफ हुआ है। आत्‍मबोधानंद कहते हैं, ‘सरकार गंगा को मरने दे रही है। मैं एक संन्‍यासी हूं। मैं रैलियों में विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकता हूं या धरना नहीं दे सकता हूं। मेरी भूख हड़ताल लोगों को जगाने के लिए है, उन्‍हें यह अहसास दिलाने के लिए है क‍ि वे विकास के नाम पर अन्‍याय कर रहे हैं।’

    अस्‍पताल में भर्ती कराए गए ब्रह्मचारी आत्‍मबोधानंद

    ब्रह्मचारी आत्‍मबोधानंद इसे अपने भाग्‍य का हिस्‍सा मानते हैं। पांच साल पहले तक वह केरल के अलप्‍पुझा के एक कॉलेज में वह औसत दर्जे के छात्र थे और धर्म के प्रति उनका कोई झुकाव नहीं था। कंप्‍यूटर साइंस की पढ़ाई के तीसरे साल में उन्‍हें प्रॉजेक्‍ट तैयार करने के लिए एक महीने का समय मिला। उनका इरादा पढ़ाई पूरी करके नौकरी करने का था लेकिन एक महीने के फ्री टाइम ने उन्‍हें एक अलग ही क्षेत्र में भेज दिया।

    ब्रह्मचारी आत्‍मबोधानंद
    इसके बाद वह दिल्‍ली, हरिद्वार और बद्रीनाथ गए जहां वह एक आश्रम से दूसरे आश्रम तक चक्‍कर काटते रहे। उन्‍होंने कहा, ‘आश्रमों में सबकुछ बिजनस था। जब मैं गुरु की तलाश कर रहा था, तब मुझे धूम्रपान करने और भीख मांगने के लिए कहा गया। यह बहुत घृणास्‍पद था। इसके बाद स्‍वामी जी से मुलाकात हुई।’ स्‍वामी शिवानंद उन्‍हें मैत्री सदन लेकर आए और उन्‍हें नया नाम आत्‍मबोधानंद दिया।

    स्‍वामी ज्ञान स्‍वरूप साणंद की हार्ट अटैक से मौत
    गत 11 अक्‍टूबर को स्‍वामी ज्ञान स्‍वरूप साणंद की हार्ट अटैक से मौत हो गई। स्‍वामी साणंद 111 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे थे। आत्‍मबोधानंद ने आरोप लगाया कि स्‍वामी साणंद जबरन एम्‍स ऋषिकेश ले जाए जाने से पहले ठीक थे। साणंद की मौत के ठीक बाद 6 दिसंबर को 39 वर्षीय संत गोपाल दास लापता हो गए। संत गोपाल दास भूख हड़ताल पर थे और उन्‍हें एम्‍स दिल्‍ली में भर्ती कराया गया था।

    आत्‍मबोधानंद का आरोप है कि संत गोपाल दास का अपहरण किया गया और उन्‍हें 29 नवंबर को एम्‍स ऋषिकेश ले जाया गया। डॉक्‍टरों ने दावा किया कि संत गोपाल दास को डेंगू है लेकिन जब उन्‍होंने विरोध प्रदर्शन किया तो तीन दिन बाद उन्‍हें एम्‍स से छुट्टी दे दी गई। उधर, मैत्री सदन में रहने वाले लोगों का मानना है कि प्रशासन की ओर से यह साजिश रची गई है कि हरेक साधु को धीरे-धीरे मार दो। उनका डॉक्‍टरों पर भरोसा नहीं है।