हेमंत सोरेन की चौथी पारी: झारखंड की सत्ता में वापसी और राजनीतिक समीकरणों का खेल!
झारखंड की राजनीति में एक बार फिर हेमंत सोरेन का जलवा देखने को मिला है। चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए उन्होंने न केवल अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया, बल्कि विपक्षी खेमे में भी हलचल मचा दी है। लेकिन क्या इस जीत के पीछे सिर्फ़ ‘इंडिया’ गठबंधन का दम है या फिर कुछ और भी राजनीतिक चालें शामिल हैं? आइये जानते हैं इस रोमांचक राजनीतिक घटनाक्रम की पूरी कहानी!
चौथी बार मुख्यमंत्री: एक ऐतिहासिक क्षण
रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में हेमंत सोरेन ने एक बार फिर झारखंड की कमान संभाली। इस समारोह में शामिल हुए ‘इंडिया’ गठबंधन के दिग्गज नेता जैसे मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने अपनी मौजूदगी से इस राजनीतिक घटनाक्रम को और भी खास बनाया। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि हेमंत सोरेन ने अकेले ही शपथ ली। क्या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक रणनीति काम कर रही है?
मंत्रिमंडल का गठन: एक पेचीदा समीकरण
सहयोगी दलों के बीच मंत्रिमंडल के गठन को लेकर अभी तक आम सहमति नहीं बन पाई है। झामुमो, कांग्रेस और राजद के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है। सूत्रों के मुताबिक, झामुमो 7 मंत्रियों की मांग कर रही है, जबकि कांग्रेस अपने हिस्से में 4 मंत्रियों की जिद पर अड़ी हुई है। इस बीच, राजद भी अपनी हिस्सेदारी की मांग कर रही है। दिल्ली में कांग्रेस नेताओं का डेरा और मंत्री पद के लिए होड़ ने इस समीकरण को और भी जटिल बना दिया है।
‘इंडिया’ गठबंधन: एकता की परीक्षा?
‘इंडिया’ गठबंधन ने 81 सदस्यीय विधानसभा में 56 सीटें जीतकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। लेकिन मंत्रिमंडल गठन में आई रुकावटें ‘इंडिया’ की एकता पर सवालिया निशान खड़े करती हैं। क्या यह अंदरूनी मतभेदों का संकेत है, या फिर ‘इंडिया’ गठबंधन की ताकत का परीक्षण? समय ही बताएगा कि यह राजनीतिक समीकरण आगे कैसे बदलता है।
विपक्ष को मुँहतोड़ जवाब?
हेमंत सोरेन के अकेले शपथ लेने के फैसले को विपक्ष के लिए एक चतुर राजनीतिक चाल माना जा रहा है। यह कदम विपक्ष को एकजुटता पर सवाल उठाने का मौका देने से बचता है और ‘इंडिया’ गठबंधन की सकारात्मक छवि बनाने में मदद करता है।
हेमंत सोरेन की व्यक्तिगत रणनीति?
कुछ जानकारों का मानना है कि हेमंत सोरेन ने अपनी पत्नी कल्पना के साथ मिलकर 200 से ज़्यादा चुनावी रैलियाँ कर, खुद को मुख्य प्रचारक के रूप में स्थापित किया है। चुनाव से पहले सीएम पद छोड़ने और जेल जाने के बावजूद भी उनका आत्मविश्वास कायम रहा। यह भी एक कारन हो सकता है की शपथ समारोह में सिर्फ उनकी तस्वीर होने के कारण अकेले शपथ लेने का फैसला लिया। इससे जीत का श्रेय सिर्फ उन्हें ही मिल सके और उन्होंने अपने आप को स्पॉट लाइट में बनाए रखा।
‘मुनियाँ सम्मान योजना’: चुनावी गेम चेंजर?
सोरेन सरकार की ‘मुनियाँ सम्मान योजना’ को चुनाव में गेम चेंजर माना जा रहा है। इस योजना ने महिला मतदाताओं में खासा समर्थन जुटाया, जिससे झामुमो को भारी फायदा हुआ।
निष्कर्ष: क्या आगे क्या?
हेमंत सोरेन के चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के साथ झारखंड की राजनीति में नया अध्याय शुरू हो गया है। मंत्रिमंडल के गठन और ‘इंडिया’ गठबंधन की एकता आगे की राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित करेगी। आने वाले समय में देखना दिलचस्प होगा कि झारखंड में ये राजनीतिक समीकरण कैसे बदलते हैं।
टेक अवे पॉइंट्स:
- हेमंत सोरेन ने चौथी बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
- ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया।
- मंत्रिमंडल गठन में सहयोगी दलों के बीच मतभेद हैं।
- हेमंत सोरेन ने अपनी रणनीतिक चालों से विपक्ष को जवाब दिया।
- ‘मुनियाँ सम्मान योजना’ ने चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।









