Category: national

  • PM MODI ने लालकिले पर फहराया तिरंगा, आजाद हिंद फौज की स्थापना के 75 साल पूरे

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    नई दिल्ली । PM MODI ने लालकिले की प्राचीर से फिर राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान संस्कृति मंत्री महेश शर्मा और नेताजी बोस के भतीजे भी मौजूद रहेंगे। बता दें कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को ही आजाद हिंद फौज की स्थापना की थी।

    ट्विटर पर जारी किये गए वीडियो में प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि वो 21 अक्टूबर को नेताजी सुभाषचंद्र के आजाद हिंद फौज की 75वीं सालगिरह पर तिरंगा झंडा फहराएंगे।

    इस वीडियो में प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश हुकूमत में आजादी के लिए निर्णायक भूमिका निभाने वाले नेताओं के योगदान को भी याद किया। प्रधानमंत्री ने रोहतक के छोटूराम को भी याद किया। छोटूराम ने गुलाम भारत में पिछड़े और शोषित वर्ग के उत्थान के लिए काम किया था।

    इसके अलावा पीएम ने 1817 में ईस्ट इंडिया कंपनी के अत्याचारों के खिलाफ ओड़िशा में हुए पाइका विद्रोह की भी बात की।

    विद्रोह की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने जनजातीय समुदाय के योगदान को याद करते हुए बिरसा मुंडा का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने आजादी के संघर्ष में आदिवासियों के योगदान को देखते हुए विद्रोह वाले राज्यों में स्मारक बनाने का भी एलान किया।

  • Ram Mandir बनाने के लिए कानून लाए मोदी सरकार-.मोहन भागवत बोले

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    नई दिल्ली । विजयदशमी से पहले अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर राम मंदिर बनाने का आह्वान किया। भागवत ने कहा कि मंदिर पर चल रही राजनीति को खत्म कर इसे तुरंत बनाना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत हो तो सरकार इसके लिए कानून बनाए। 2019 के चुनावों के लिए तेज हो रही सरगर्मियों के बीच मोहन भागवत के इस बयान के राजनीतिक निहातार्थ भी निकाले जा रहे हैं।

    संघ प्रमुख ने कहा कि बाबर ने राम मंदिर को तोड़ा और अयोध्या में राम मंदिर के सबूत भी मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब यह मामला न्यायालय में चल रहा है लेकिन कितना लंबा चलेगाघ् भागवत ने कहाए इस मामले में राजनीति आ गई इसलिए मामला लंबा हो गया। रामजन्मभूमि पर शीघ्रतापूर्वक राम मंदिर बनना चाहिए। इस प्रकरण को लंबा करने के लिए हुई राजनीति हुई को खत्म होना चाहिए।

    लोग कहते हैं कि सरकार है फिर क्यों नहीं :: भागवत
    मोहन भागवत ने राम मंदिर बनाने की मांग उठाते हुए परोक्ष रूप से मोदी सरकार को भी नसीहत दी। मोहन भागवत ने कहाए भगवान राम किसी एक संप्रदाय के नहीं है। वह भारत के प्रतीक नहीं हैं। सरकार को किसी भी तरह करेए कानून लाए। लोग यह पूछ रहे हैं कि उनके द्वारा चुनी गई सरकार है फिर भी राम मंदिर क्यों नहीं बन रहा। मोहन भागवत ने कहा कि भगवान राम भारत के गौरवपुरुष हैं और बाबर ने हमारे आत्म सम्मान को खत्म करने के लिए राम मंदिर गिराया।

    2019 के चुनावों से पहले मोदी सरकार को नसीहत 
    राम मंदिर पर मोहन भागवत के इस बयान के राजनीतिक मतलब निकाले जा रहे हैं। एक तरह से भागवत ने 2019 के आम चुनावों से पहले मोदी सरकार को संदेश देने की कोशिश की है कि राम मंदिर को किसी भी तरह बनाया जाना चाहिए। आपको बता दें कि राम मंदिर का निर्माण बीजेपी के लिए हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। बीजेपी के घोषणा पत्र में भी अयोध्या में राम मंदिर बनवाने की बात है।

    अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट में 29 अक्टूबर से सुनवाई
    फिलहाल अयोध्या विवाद सुप्रीम कोर्ट की दर पर है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मामला जमीन विवाद के तौर पर ही निपटाया जाएगा। अयोध्या जमीन विवाद मामले की सुनवाई अब 29 अक्टूबर से शुरू होगी। मुख्य पक्षकार राम लला विराजमानए निर्मोही अखाड़ाए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और हिंदू महासभा हैं। इसके अलावा अन्य कई याची जैसे सुब्रमण्यन स्वामी आदि की अर्जी है जिन्होंने पूजा के अधिकार की मांग की हुई है लेकिन सबसे पहले चार मुख्य पक्षकारों की ओर से दलीलें पेश की जाएंगी।

    क्या है अयोध्या विवाद
    6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। इस मामले में आपराधिक केस के साथ.साथ दिवानी मुकदमा भी चला। टाइटल विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाई हाई कोर्ट ने दिए फैसले में कहा था कि तीन गुंबदों में बीच का हिस्सा हिंदुओं का होगा जहां फिलहाल रामलला की मूर्ति है। निर्मोही अखाड़ा को दूसरा हिस्सा दिया गया इसी में सीता रसोई और राम चबूतरा शामिल है। बाकी एक तिहाई हिस्सा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दिया गया। इस फैसले को तमाम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा यथास्थिति बहाल कर दी थी।

    जानिये ऐसा क्या है कि PM मोदी पहली बार 21 अक्टूबर को लाल किले की प्राचीर से फहरायेगें तिरंगा,!!

  • CBI दागदार, किस अधिकारी ने 2 करोड़ की रिश्वत ली, एफआईआर दर्ज

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    नई दिल्ली  : केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) के निदेशक आलोक वर्मा और उनके बाद के अधिकारी राकेश अस्थाना के बीच सीबीआई के नंबर 1 और 2 की लड़ाई तेज हो गई है क्योंकि राकेश अस्थाना के खिलाफ सीबीआई ने ही रिश्वत का मामला दर्ज कर लिया है। इसके जवाब में अस्थाना ने सरकार को एक पत्र लिखकर गलत एफआईआर दर्ज करने का आरोप लगाया है। मिली जानकारी के मुताबिक सीबीआई में नंबर-2 की हैसियत रखने वाले राकेश अस्थाना के खिलाफ  हैदराबाद के बिजनेसमैन सतीश सना की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है।

    सतीश के खिलाफ मीट व्यापारी मोइन कुरैशी से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग की भी जांच हो रही है। सीबीआई को दिए बयान में सतीश सना ने कहा है कि उसने राकेश अस्थाना को 2 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी। यह पैसा 10 महीने की अवधि में दिया गया है जिसकी शुरुआत दिसंबर 2017 से हुई थी, ताकि सीबीआई इस केस में उसका नाम दर्ज न करे।

    इस मामले को लेकर राकेश अस्थाना का दावा है कि सतीश सना कि यह शिकायत सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के कुछ अधिकारियों की साजिश है। उन्होंने सीबीआई चीफ और सीवीसी अरुण शर्मा के खिलाफ भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। अस्थाना का दावा है कि उन्होंने अगस्त में ही कैबिनेट सचिव को इन शीर्ष अधिकारियों के भ्रष्टाचार के 10 उदाहरण, आपराधिक कदाचार, संवेदनशील मामलों की जांच में हस्तक्षेप की जानकारी दी थी।

    अस्थाना ने आरोप लगाया कि सीबीआई चीफ ने मोइन कुरैशी के मामले में सतीश सना के खिलाफ  चल रही जांच को असफल करने के बदले 2 करोड़ रुपयी की रिश्वत ली है लेकिन जब सतीश सना को देश को छोडऩे से मना कर दिया और उसे जांच के दायरे में लाया गया तो उनके खिलाफ साजिश रची गई है।

    अस्थाना के मुताबिक उन्होंने कैबिनेट सचिव को बताया कि सतीश सना ने हाल ही में की गई पूछताछ में बताया है कि उसने टीडीपी के नेता के जरिए सीबीआई निदेशक से केस का सेटलमेंट किया है। टीडीपी के इस नेता के खिलाफ  इनकम टैक्स छापे की भी कार्रवाई कर चुका है।

    आपको बता दें कि मीट व्यापारी मोइन कुरैशी के खिलाफ  इस समय प्रवर्तन निदेशालय हवाला के मामलों की जांच कर रहा है। इसके तार दुबई, लंदन और यूरोप में कई जगह तक फैले हो सकते हैं। जांच एजेंसी ने यह भी बताया है कि आयकर विभाग से मिले दस्तावेजों के मुताबिक मोइन कुरैशी ने उच्चाधिकारियों से अनुचित काम कराने के बदले कई लोगों से काफी पैसे लिए हैं।

  • PM. Narendra Modi : एक और ग्लोबल पुरस्कार से होंगे सम्मानित

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    नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सियोल शांति पुरस्कार 2018 के लिए चुना गया है, वह सियोल पीस प्राइज पाने वाले 14वें व्यक्ति होंगे. यह सम्मान उन्हे विश्व शांति में तथा अपनी विशिष्ट आर्थिक नीतियों से वैश्विक एवं भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि में योगदान के लिए दिया जाएगा.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने आज यहां ट्विटर पर यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को उनकी विशिष्ट आर्थिक नीतियों ‘मोदीनॉमिक्स’ के जरिये वैश्विक एवं भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि तथा विश्व शांति, मानव विकास में सुधार और भारत में लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में उनके योगदान के लिए प्रतिष्ठित सोल शांति पुरस्कार के लिए चुना गया है.  सोल शांति पुरस्कार सांस्कृतिक प्रतिष्ठान आज दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में यह घोषणा की.

    प्रतिष्ठान ने अमीरों और गरीबों के बीच सामाजिक और आर्थिक खाई को कम करने के लिए‘मोदीनॉमिक्स’की प्रशंसा की है. मोदी को इस पुरस्कार के तहत एक अवॉर्ड, पट्टिका के साथ 2 लाख डॉलर यानी करीब 1.46 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की जाएगी. पीएम दुनिया के इस प्रतिष्ठित सम्मान को हासिल करने वाली 14वीं हस्ती हैं. यह पुरस्कार पाने वालों में संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान और बान की-मून भी शामिल हैं.

    इस प्रतिष्ठान ने मोदी सरकार के भ्रष्टाचार रोकने के लिए उठाये गये विभिन्न कदमों तथा वैश्विक एवं क्षेत्रीय शांति के लिए किये गये कूटनीतिक प्रयासों विशेष रूप से एक्ट ईस्ट नीति की भी सराहना की है. इस वर्ष यह दूसरा मौका है जब मोदी को अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. पर्यावरण के क्षेत्र में योगदान के लिए मोदी को इसी वर्ष संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पुरस्कार‘चैम्पियन ऑफ दि अर्थ’ एवार्ड से सम्मानित किया गया है. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने स्वयं नयी दिल्ली आकर श्री मोदी को इस सम्मान से नवाजा था.

  • सीबीआई विवाद: सरकार ने उठाया सख्त कदम, बदल दी पूरी टीम !

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    नई दिल्ली। सीबीआई में शीर्ष अधिकारियों के बीच जारी जबर्दस्त जंग के बीच केंद्र सरकार ने मामले में दखल दिया है। केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को को छुट्टी पर भेज दिया है। वर्मा की जगह एम. नागेश्वर राव को अंतरिम डायरेक्टर का कार्यभार सौंपा गया है। राव सीबीआई में अभी जॉइंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे। 1986 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी राव तेलंगाना के वारंगल जिले के रहने वाले हैं।

    केंद्र द्वारा जारी आदेश में राव को तत्काल प्रभाव से वर्मा की जगह नियुक्त किया गया है। गौरतलब है कि एजेंसी ने अपने ही स्पेशल डायरेक्टर अस्थाना पर केस दर्ज किया है। एफआईआर में उन पर मांस कारोबारी मोइन कुरैशी से 3 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है।

    सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस मामले में दखल दिया था। डायरेक्टर वर्मा की पीएम से मुलाकात हुई और एक घंटे के भीतर ही केस से जुड़े डीएसपी रैंक के अधिकारी देवेंद्र कुमार गिरफ्तार हो गए। कुछ देर बाद तमाम अधिकारियों के ठिकानों पर सीबीआई ने छापे भी मारे।

    उधर, जांच मामले में लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर केस दर्ज करने वाले सीबीआई के निर्णय को राकेश अस्थाना समेत देवेंद्र कुमार ने चुनौती दी है। सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार ने जांच एजेंसी के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना से जुड़े रिश्वतखोरी के आरोपों के संबंध में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

    हाई कोर्ट ने मामले के अगली सुनवाई के लिए 29 अक्टूबर की तारीख तय की है। कोर्ट ने कहा है कि 29 अक्टूबर को सीबीआई डायरेक्टर द्वारा राकेश अस्थाना पर लगाए गए आरोपों पर जवाब देंगे। कोर्ट तब इस मामले में अस्थाना की गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी है और मामले में यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा है।

  • हाईकोर्ट आदेश के फैसले से जागी सरकार, अश्लीलता फैला रही 857 वेबसाइटों को बंद करने का निर्देश

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    नई दिल्ली.  उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद (ISP) को अश्लील सामग्री दिखाने वाली 827 वेबसाइट्स बंद करने का निर्देश दिया है. अदालत ने हाल ही में अश्लीलता फैला रही 857 वेबसाइटों को बंद करने का आदेश दिया था. हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 827 वेबसाइटों को बंद करने को कहा है. जांच में उन 857 में से 30 पर अश्लील सामग्री नहीं पाई है.

    सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय ने दूरसंचार विभाग को 827 वेबसाइट को बंद करने के लिये कहा है. इन वेबसाइटों के नामों की सूची मंत्रालय ने अपने पत्र में दिया है. दूरसंचार विभाग ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को जारी आदेश में कहा, ‘सभी लाइसेंस प्राप्त इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को माननीय हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन और मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक 827 वेबसाइटों को बंद करने के लिये तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाता है.’ हाईकोर्ट ने 27 सितंबर 2018 को इन वेबसाइट को बंद करने का आदेश दिया था और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को आठ अक्टूबर को यह आदेश प्राप्त हुआ.

    मंत्रालय ने दूरसंचार विभाग को सूचित किया है कि उसके (दूरसंचार विभाग के) 31 जुलाई 2015 के पुराने नोटिस के अनुसार हाई कोर्ट ने 857 वेबसाइट को बंद करने का आदेश दिया है. दूरसंचार विभाग ने 4 अगस्त 2015 को अपने आदेश में परिवर्तन किया और कहा कि इंटरनेट सेवा प्रदाता इन 857 वेब लिंक्स या यूआरएल में ऐसे लिंक या यूआरएल को नहीं बंद करने को स्वतंत्र है जिनपर अश्लील सामग्री नहीं दिखती है.

  • Sanitary Pads पर कमेंट को लेकर ट्रोल हुई स्मृति ईरानी ने दिया जवाब, कहा -”हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है.”

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    नई दिल्ली: अभिनेत्री से नेता बनीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने मंगलवार को केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर प्रतिक्रिया दी थी। जिसके लिए सोशल मीडिया पर वह खूब ट्रोल हुई थीं। अब गुरुवार को ईरानी ने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर शेयर कर ट्रोल करने वालों को जवाब दिया है।

    फोटो में जकड़ी हुई, घबराई और अधखुली आँखों से बैठी हुई इस महिला को देखकर एक बार आप भी चौंक गए होंगे, ये हैं हमारे देश की केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी. अभिनय से राजनीति के क्षेत्र में आई ‘कसौटी जिंदगी की’ फेम स्मृति ईरानी ने ये फोटो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की है, जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा है कि ”हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है.”

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    इस मशहूर गीत का कैप्शन और ये फोटो स्मृति ईरानी ने अपने एक बयान पर मचे विवाद के बाद डाली है. यह बयान ईरानी ने मंगलवार को दिया था, वो भी सबसे ज्वलंत मुद्दे सबरीमाला पर. सबरीमाला में 10 से 50 वर्ष के बीच की महिलाओं के प्रवेश को लेकर स्मृति ईरानी ने कहा था कि “क्या आप मासिक धर्म के खून में सने हुए सैनिटरी नैपकिन को लेकर अपने दोस्त के घर में प्रवेश करेंगे, आप ऐसा नहीं करेंगे.”

    ईरानी ने कहा कि “जब आप इसे लेकर अपने दोस्त के घर नहीं जा सकते तो और क्या आपको लगता है कि जब आप भगवान के घर में जाते हैं तो ऐसा करना आपके लिए सम्मानजनक होगा.” उनका इस बयान पर भारी बवाल मचा था, जिसके बाद उन्होंने अपनी इस फोटो और कैप्शन के द्वारा ये सन्देश दिया है कि ‘हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है.’

  • कोर्ट ने कहा-सोशल मीडिया पर पोस्ट अभिव्यिक्ति का अधिकार, खारिज की आलोक नाथ की याचिका

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    नई दिल्ली। मीटू कैम्पेन में यौन शोषण के आरोपों में घिरे अभिनेता आलोक नाथ को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने आलोकनाथ की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है. इस याचिका में आलोक नाथ ने मांग की थी विनता नंदा द्वारा सोशल मीडिया पर लिखी पोस्ट पर रोक लगा दी जाए।

    . कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करना अभिव्यिक्ति के अधिकार के तहत आता है.। कोर्ट का कहना है कि विनता को किसी भी प्लैटफॉर्म पर बोलने की आजादी है. दरअसल विनता के आरोपों के बाद आलोक नाथ की पत्नी आशू सिंह ने कोर्ट में याचिका दायर की थी.।

    आशू का कहना था कि विनता पर किसी भी प्लैटफॉर्म पर बयान देने पर रोक लगाई जाए. आशू की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि विनता टीवी, सोशल मीडिया, प्रिंट या दूसरे किसी भी प्लैटफॉर्म पर बयान दे सकती हैं.।

    एक तरफ तो आलोक नाथ की पत्नी, विनता सिंह के बयानों पर रोक लगवाने की कोशिश कर रही थीं ।

    वहीं दूसरी ओर आलोक नाथ पहले ही खुद पर लगे आरोपों को गलत बता चुके हैं. उनका कहना था, वो (विनता) जो कुछ भी बोल रही हैं उनका व्यक्तिगत दृष्टिकोण है. मैं न इस मामले को स्वीकारता हूं, न ही इससे मना करता हूं. लोगों का काम तो बातें करना है. मैं यहां अपनी सफाई नहीं देने जा रहा हूं. किसी भी ऐसे मामले में सिर्फ एक आदमी इन्वॉल्व नहीं होता है. इस समय मैं चुप ही रहना चाहूंगा. अभी-अभी इस मामले को पढ़ा है और वे ज्यादा क्लीयर नहीं हैं।

  • तीन लोगों को जिंदगी दे गया जज का बेटा

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    गुडगांव । जज कृष्णकांत के बेटे धु्रव की भी मंगलवार को सुबह 4 बजे मेदांता अस्पताल में मौत हो गई। अंगदान के लिए जज की सहमति के बाद ध्रुव की दोनों किडनियों और लिवर को सर्जरी कर निकाल लिया गया, जिनसे तीन लोगों को नया जीवन मिला है। दोपहर करीब 12 बजे पोस्टमॉर्टम के लिए ध्रुव का शव ले जाया गया। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉ. दीपक माथुर और डॉ. पवन चैधरी की टीम ने बताया कि 2 गोली सिर के आर-पार हो गई थी, तीसरी गोली गर्दन में लगी थी। इसकी वजह से ही ध्रुव ब्रेन डेड हो गए थे। जज के गनर महिपाल ने 13 अक्टूबर को उनकी पत्नी रितु और बेटे धु्रव को गोली मार दी थी।

    रितु की अगले दिन अस्पताल में मौत हो गई थी, जबकि ब्रेन डेड होन होने के बाद ध्रुव का मेदांता में इलाज चल रहा था। मेदांता हॉस्पिटल के प्रवक्ता ने बताया कि ध्रुव के शरीर की दो किडनियों और 1 लीवर से 3 लोगों को जीवनदान मिला है। 3 अलग-अलग मरीजों को ये अंग लगा दिए गए हैं। प्रवक्ता ने बताया कि हॉस्पिटल की पॉलिसी के अनुसार मृतक के परिवार को भी नहीं बताया गया कि ये अंग किस मरीज को लगाए गए हैं। यह बात सार्वजनिक नहीं की जा सकती। अडिशनल सेशन जज कृष्णकांत की पत्नी रितु (37) और बेटा ध्रुव (17) सेक्टर-49 के आर्केडिया मार्केट में 13 अक्टूबर को गए थे। मार्केट में हुए विवाद के बाद गनर महिपाल ने रितु और ध्रुव को गोली मार दी थी। घटना के बाद महिपाल जज की होंडा सिटी कार लेकर भाग गया था। दोनों घायलों को पास के अस्पताल पहुंचाया गया था। करीब डेढ़ घंटे बाद पुलिस ने ग्वाल पहाड़ी के पास से महिपाल को गिरफ्तार किया था।

    गुडगांव पुलिस ने घटना की जांच के लिए डीसीपी सुलोचना गजराज के निर्देशन में एसआईटी का गठन किया था। 17 अक्टूबर को एसआईटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गनर महिपाल कार के पास नहीं था। उसके आने पर रितु और ध्रुव ने उस पर गुस्सा हुईं तो वह मारपीट करने के बाद गोली मार दी। एसआईटी ने बताया कि गनर महिपाल पुलिस की नौकरी के अलावा अपने परिचित की कार जो ओला से अटैच थी, उसे चलाता था। इसके साथ ही किसी कंपनी के साथ चेन सिस्टम पर आगे ग्राहक बनाने का काम भी करता था। काम की अधिकता की वजह से वह चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो गया था। गुस्से में ही उसने वारदात की थी। वारदात की रिपोर्ट जज कृष्णकांत ने सेक्टर-50 थाने में दर्ज कराई है।

  • ADR रिपोर्ट में खुलासा: वाह नीति निर्माता, जनता के लिए अनिवार्य है आधार और पैन, खुद इसका नहीं करते है पालन !

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    नई दिल्लीं । कुछ दिनों बाद पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में एक रिपोर्ट सामने आई है कि देश के मौजूदा सात सासंदो और लगभग 200 विधायकों ने अपने पैन कार्ड का विवरण जारी नहीं किया है। जबकि संसद में बैठे हुए यह नीति निर्माता जनता के लिए कानून बनाकर आधार और पैन कार्ड अनिवार्य करते हैं। इसके बावजूद वह खुद इसका पालन नहीं करते हैं।
    वर्तमान में देश के मौजूदा सात सांसदों और 199 विधायकों ने अपने पैन कार्ड विवरण घोषित नहीं किये हैं। जिसकी चुनाव के वक्त नामांकन पत्र भरने के लिए जरूरत होती है। एक रिपोर्ट में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच (एनईडब्ल्यू) की इस रिपोर्ट को 542 लोकसभा सांसदों और 4,086 विधायकों के स्थायी खाता संख्या (पैन) के विवरण के विश्लेषण के बाद तैयार किया गया है।
    संसद और राज्य विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों को निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष अपने नामांकन पत्रों के साथ अपने हलफनामों में पैन का विवरण देना होता है। दिलचस्प बात यह है कि जिन सांसदों और विधायकों ने पैन डिटेल नहीं दी है, उनमें से कई करोड़पति हैं। इन सांसदों ने अपने शपथ पत्र में पैन कार्ड का विवरण नहीं दिया है।
    एडीआर ने एक बयान में कहा, ‘पैन विवरण घोषित नहीं करने वाले सबसे अधिक 51 विधायक कांग्रेस के है। इसके बाद भाजपा के 42 विधायक, माकपा के 25 विधायक हैं।’ राज्यवार सबसे अधिक संख्या (33) केरल से है। इसके बाद मिजोरम (28) और मध्य प्रदेश (19) हैं। दिलचस्प बात यह है कि मिजोरम राज्य विधानसभा में विधायकों की संख्या 40 हैं जिसमें से 28 विधायकों ने अपना पैन विवरण नहीं दिया है।