Category: national

  • दिल्ली स्थित मंत्रालय से चल रहा था युवाओं से ठगी का खेल, ऐसे हुआ पर्दाफाश ! पढ़ेे पूरी स्टोरी

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    नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ओएनजीसी के नाम पर भर्तियां करने वाले एक बड़े गैंग का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने अब तक गिरोह के 7 बदमाशों को गिरफ्तार किया है. जबकि अभी भी कई बदमाशों की तलाश जारी है. पकड़ में आए लोगों में 2 ग्रामीण विकास मंत्रालय के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी हैं, जो कृषि मंत्रालय में ही इंटरव्यू के लिए रूम दिलाते थे.।

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    ओएनजीसी में सहायक इंजीनियर लगाने के नाम पर ठगी

    अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव रंजन के अनुसार, ओएनजीसी ने वसंत कुंज (नॉर्थ) थाने में शिकायत दी थी कि ओएनजीसी में सहायक इंजीनियर की नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से ठगी हो रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच अपराध शाखा को सौंप दी थी।

    टीम को जांच में पता लगा कि बेरोजगार युवाओं के पास ओएनजीसी की ओर से अधिकारिक मेल गया है और कृषि भवन में साक्षात्कार हुए हैं। ओएनजीसी में पीड़ितों से रणधीर सिंह उर्फ कुणाल किशोर ने 22 लाख रुपये लिए हैं। इसके बाद रणधीर गायब हो गया। रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए विशेष टीम तैयार की गई।

    पुलिस को जांच में पता लगा कि आरोपियों ने पीड़ितों के नाम पर होटल में कमरे बुक कराए थे। आखिरकार पुलिस ने कुणाल किशोर उर्फ रणधीर को पकड़ लिया। इसके बाद सरोजनी नगर (दिल्ली) निवासी जगदीश राज, नजफगढ़ (दिल्ली) निवासी संदीप कुमार, लिसरी रोड (मेरठ) निवासी वसीम, सनड्रम कॉलोनी बागपत रोड (मेरठ) निवासी अंकित गुप्ता, सिवाल खास (मेरठ) निवासी विशाल गोयल और लक्ष्मी नगर (दिल्ली) निवासी सुमन सौरभ को गिरफ्तार कर लिया।

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    ओएनजीसी में सहायक इंजीनियर लगाने के नाम पर ठगी

    आरोपी ओएनजीसी में नौकरी दिलाने के नाम पर 23 युवाओं से, रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर 40 युवाओं से और एफसीआई में नौकरी दिलाने के नाम पर दर्जनों युवाओं से ठगी कर चुके हैं।

    बिहार से बीएससी (भौतिकी शास्त्र) में ग्रेजुएशन डिग्री होल्डर कुणाल पीएंडएमजी कंपनी का निदेशक था। ये कंपनी ऑनलाइन स्कॉलरशिप का व्यवसाय करती है। ये ठगी करने वाले गिरोह का मुख्य साजिशकर्ता है। जगदीश राय 1982 में बतौर एमटीएस भर्ती हुआ था और फिलहाल ग्रामीण विकास मंत्रालय में तैनात था। ये फर्जी साक्षात्कार के लिए कृषि भवन में जगह उपलब्ध कराता था।

    संदीप कुमार 2007 में गृह मंत्रालय में एमटीएस स्टाफ के तौर पर भर्ती हुआ था। अभी ग्रामीण विकास मंत्रालय में तैनात था। ये आरोपियों व पीड़ितों को कृषि मंत्रालय में प्रवेश करवाता था। वसीम ने वेब डिजाइनिंग में मेरठ से डिप्लोमा किया हुआ है।

    ये पीआरडी प्रा. लि., मेरठ नाम की कंपनी में डिजाइनर की नौकरी कर रहा था। ये फर्जी साक्षात्कार लेटर तैयार करता था। अंकित साक्षात्कार लेता था। बीटेक (आईटी) डिग्री होल्डर विशाल गोयल नोएडा की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर की नौकरी करता था। ये ओएनजीसी के नाम पर फर्जी ई-मेल आईडी बनाता था। सुमन प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग हेड के रूप में काम करता था। ये पीड़ितों के साक्षात्कार लेता था। स्रोत: अमरउजाला

  • सरकार द्वारा कस्टम ड्यूटी बढ़ाने से लक्ज़री कार से लेकर ड्राई फ्रूट तक मंहगे हो सकते हैं

    नई दिल्‍ली: लक्‍जरी कार, हाई एंड मोबाइल फोन, फर्नीचर, ड्राई फ्रूट महंगे हो सकते हैं. क्‍योंकि सरकार इस हफ्ते इन गैर जरूरी उत्‍पादों के आयात को लेकर बड़ा फैसला ले सकती है. इसमें कस्‍टम ड्यूटी बढ़ाने से लेकर इनके आयात पर पाबंदी तक लग सकती है. सरकार यह कदम मौजूदा वित्‍तीय घाटे को कम करने के लिए उठाएगी.

    डॉलर के मुकाबले रुपया बढ़ने से वित्‍तीय घाटा बढ़ने की आशंका है. वित्‍त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि महंगे मोबाइल फोन, रेफ्रिजरेटर, लक्‍जरी कार, फर्नीचर और एल्‍कोहल इस सूची में शामिल हो सकते हैं. सोने को इससे बाहर रखा जा सकता है, जिस पर 10% कस्‍टम ड्यूटी लगती है.

    सरकारी समिति तैयार कर रही लिस्‍ट
    कैबिनेट सेक्रेटरी पीके सिन्‍हा की अध्‍यक्षता वाली समिति इन गैर जरूरी उत्‍पादों की लिस्‍ट तैयार कर रही है. समिति क्षेत्रवार उत्‍पादों का ब्‍योरा तैयार कर रही है जिसे लो नीड-हाई फॉरेन आउटगो के नाम से परिभाषित किया गया है. बिजनेस टुडे की खबर के मुताबिक`जानकारों का मानना है कि सोने को इससे बाहर रखा जा सकता है, क्‍योंकि त्‍योहारी सीजन की शुरुआत होने वाली है और इस दौरान इसकी खपत बढ़ जाती है. अगर वह आयात शुल्‍क बढ़ाते हैं तो इससे उसकी तस्‍करी बढ़ने की आशंका रहेगी.

    इम्‍पोर्टेड बाइक-कार पर से हटा था रोडब्‍लॉक
    बीते हफ्ते खबर आई थी कि देश में इम्‍पोर्टेड कार या बाइक मंगाना आसान हो गया है. केंद्र सरकार ने इसके नियमों में ढील दी है. रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍ट्री ने विदेशी कार और बाइक के आयात के लिए रोडब्लॉक को हटाने की घोषणा की है. यह नीति बनने से ऑटोमोबाइल मैन्युफेक्चरर आसानी से विदेशी कार और बाइक भारत में बेच सकेंगे. हरेक मैन्युफेक्चर कार या बाइक की 2,500 यूनिट भारत मंगा पाएगा. वहीं भारी वाहन निर्माता कंपनियां 500 बस या ट्रक का ही आयात कर पाएंगे. इन सभी वाहनों में राइट हैंड स्‍टीरियरिंग कंट्रोल होना अनिवार्य है ताकि भारतीय ट्रैफिक नियमों का पालन हो सके.

    कंपनियों को मिली थी विदेशी कारें बेचने की छूट
    फॉरेन ट्रेड डयरेक्‍टर जनरल (DGFT) ने जो नियम तय किए हैं उनके मुताबिक 40 हजार डॉलर तक की कीमत के वाहन मंगाए जा सकते हैं जबकि 800 सीसी या उससे ऊपर की क्षमता की बाइक मंगाने की छूट होगी. इन वाहनों पर आयात और अन्‍य ड्यूटी लगेगी. वाहनों के रजिस्‍ट्रेशन के संबंध में मंत्रालय का कहना है कि यूरोप, जापान और अन्‍य कुछ देशों द्वारा तय अंतरराष्‍ट्रीय मानकों के अनुरूप वाहनों की ही भारत में रजिस्‍ट्रेशन कराने की छूट होगी.

  • खुलासा : अनूप जलोटा पर एक टीवी ऐक्ट्रेस ने लगाया सेक्शुअल असॉल्ट का आरोप !

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    मुंबई. बिग बॉस 12 में अपने जलवों से ज़्यादा 37 साल छोटी जसलीन मथारू के साथ रिलेशनशिप को लेकर चर्चा में रहने वाले भजन सम्राट कहे जाने वाले अनूप जलोटा इस बार बड़े विवाद में फंसते नज़र आ रहे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार उन पर एक टीवी ऐक्ट्रेस ने सेक्शुअल असॉल्ट का आरोप लगाया है. इस ऐक्ट्रेस ने अनूप जलोटा पर मॉलेस्टेशन का आरोप लगाते हुए कहा है कि अनूप ने उनसे सेक्शुअल फेवर्स मांगे थे और बदले में टीवी पर बड़ा रोल दिलाने का वादा किया था. यह ऐक्ट्रेस ‘देवांशी’ और ‘भाग्यविधाता’ जैसे टीवी शोज़ में काम कर चुकी है. इसने आगे यह भी खुलासा किया कि अनूप जलोटा ने उसे ‘बिग बॉस 12’ में ले जाने का भी वादा किया था.

    इस ऐक्ट्रेस ने ये सब बातें एक ऑनलाइन वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में कहीं और अनूप जलोटा की कथित गर्लफ्रेंड जसलीन मथारू को लेकर भी कई खुलासे किए. वाकई, अनूप जलोटा पर लगाए गए ये इल्ज़ाम बेहद संगीन हैं. हालांकि इनमें कितनी सच्चाई है, यह तो आने वाले वक्त में ही पता चलेगा. वैसे ‘बिग बॉस 12’ के घर में जाने से पहले मुंबई मिरर को दिए एक इंटरव्यू में अनूप जलोटा ने कहा था, ‘शो के अन्य कंटेस्टेंट्स के मुकाबले मैं उम्र में भले ही बड़ा हूं, लेकिन विचारों के मामले में मैं उनसे कहीं ज़्यादा मॉडर्न हूं. मेरे विचार और मेरी सोच जो है, वो सबसे ज़्यादा मॉडर्न है. लोग यह समझते हैं कि भजन गाता है तो साधु-संत होगा, लेकिन ऐसा नहीं है.

    मैं बहुत ही मस्ती वाला आदमी हूं. मजे करता हूं लाइफ में और वो सब देखेंगे बिग बॉस में. मैं चाहता हूं कि आप ये शो (बिग बॉस) देखें और मेरी पर्सनैलिटी को पहचानें, जो आप मेरा गाना सुनकर नहीं पहचान पाते हैं.’ बता दें कि जसलीन के साथ रिलेशनशिप में आने से पहले भी सिंगर अनूप जलोटा की जिंदगी में तीन महिलाएं रह चुकी हैं, जिनसे उन्होंने शादी की थी. शो के पहले ही जसलीन ने बताया था कि वह और अनूप जलोटा पिछले 3 साल से रिलेशनशिप में हैं.

  • सुप्रीमकोर्ट ने अवैध यौन संबंध रखने का दे दिया है लाइसेंस: स्वाति मालीवाल

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    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के धारा 497 पर फैसला सुनाते हुए व्यभिचार को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है. अदालत के इस फैसले की कई लोगों ने प्रशंसा की है, वहीं कुछ विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने का आह्वान किया और इसे महिला- विरोधी बताया, साथ ही यह चेतावनी भी दी कि अदालत के यह फैसला लोगों को अवैध संबंध रखने का लाइसेंस दे दिया है. महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालिवाल ने कहा कि व्यभिचार को पूरी तरह से खत्म करना देश में महिलाओं के दर्द को बढ़ाना है.।

    स्वाति ने कहा कि व्यभिचार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पूरी तरह असहमत हैं, यह निर्णय महिला विरोधी है. एक तरह से, अदालत के इस फैसले ने लोगों को विवाह में रहने के साथ-साथ अवैध संबंध रखने का लाइसेंस दे दिया है. उन्होंने कहा कि अगर ये फैसला सही है तो फिर शादी कि पवित्रता क्या है ?

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    रेणुका चौधरी

    कांग्रेस नेता रेणुका Choudhary  ने भी अदालत के फैसले पर स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा कि अदालत बताए की ये किस तरह सही है. उन्होंने कहा कि अदालत ने ट्रिपल तलाक को जुर्म बताया है, वहीं व्यभिचार को स्वीकृति दी है, ऐसे में अगर पति कई शादियां करता है और अपनी बीवी को तलाक न देकर सिर्फ उसे छोड़ देता है तो क्या किया जाएगा।

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    सामाजिक कार्यकर्ता ब्रिंडा अडिगे

    सामाजिक कार्यकर्ता ब्रिंडा अडिगे ने भी स्पष्टता मांगी और पूछा कि क्या यह निर्णय बहुविवाह की अनुमति देता है. ष्क्योंकि हम जानते हैं कि पुरुष अक्सर दो या तीन बार शादी करते हैं और समस्या तब उत्पन्न होती है जब पहली, दूसरी या तीसरी पत्नी को त्याग दिया जाता है. अगर व्यभिचार अपराध नहीं है, तो यह महिला अपने पति के खिलाफ किस आधार पर मामला दर्ज कर सकती है, जिसे अपने पति द्वारा त्याग दिया गया है, यह गहन चिंता का विषय है।

  • जानिए ‘Aadhaar’ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: ‘Aadhaar’ अब कहां जरूरी और कहां नहीं है जरूरी

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    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कन्फ्यूजन खत्म कर दिया है। आपको अपना आधार नंबर कहां शेयर करना है और कहां नहीं, देश की सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को आधार पर फैसला सुनाते हुए इसे संवैधानिक रूप से वैध तो माना, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि इसे हर किसी से शेयर करना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि आधार नंबर कहां देना जरूरी है और कहां नहीं। सबसे बड़ी बात यह है कि मोबाइल सिम के लिए अब आधार की जरूरत नहीं है। आइए जानते हैं अब कहां जरूरी होगा आधार और कहां नहीं…
    पैन कार्ड बनाने और आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए आधार नंबर जरूरी। सरकार की लाभकारी योजना और सब्सिडी का लाभ पाने के लिए आधार कार्ड जरूरी होगा। सबसे ज्यादा चोरी यहीं होती थी..

    फैसले के दौरान कोर्ट ने क्या कहा
    -आधार आम लोगों के हित के लिए काम करता है और इससे समाज में हाशिये पर बैठे लोगों को फायदा होगा।
    -आधार डेटा को 6 महीने से ज्यादा डेटा स्टोर नही किया जा सकता है। 5 साल तक डेटा रखना बैड इन लॉ है।
    -सुप्रीम कोर्ट ने आधार ऐक्ट की धारा 57 को रद्द करते हुए कहा कि प्राइवेट कंपनियां आधार की मांग नहीं कर सकतीं।
    -आधार पर हमला संविधान के खिलाफ है। इसके डुप्लिकेट होने का कोई खतरा नहीं। आधार एकदम सुरक्षित है।
    -लोकसभा में आधार बिल को वित्त विधेयक के तौर पर पास करने को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया।

    कहां जरूरी
    1-पैन कार्ड बनाने के लिए आधार कार्ड जरूरी होगा
    2-आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए भी आधार नंबर जरूरी होगा।
    3-सरकार की लाभकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ पाने के लिए भी आधार कार्ड अनिवार्य होगा।

    कहां नहीं जरूरी
    1-सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि मोबाइल सिम के लिए कंपनी आपसे आधार नहीं मांग सकती।
    2-बैंक भी अकाउंट खोलने के लिए आधार नंबर की मांग नहीं कर सकते हैं।
    3-इसके साथ हीसुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि स्कूल ऐडमिशन के वक्त बच्चे का आधार नंबर नहीं मांग सकते।
    4-सीबीएसई, नीट और यूजीसी की परीक्षाओं के लिए भी आधार जरूरी नहीं। बता दें कि इससे पहले इसके लिए आधार मांगा जा रहा था।
    5-सीबीएसई, बोर्ड एग्जाम में शामिल होने के लिए छात्रों से आधार की मांग नहीं की जा सकती है।
    6-14 साल से कम के बच्चों के पास आधार नहीं होने पर उसे केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली जरूरी सेवाओं से वंचित नही किया जा सकता है।
    7-टेलिकॉम कंपनियां, ई-कॉमर्स फर्म, प्राइवेट बैंक और अन्य इस तरह के संस्थान आधार की मांग नहीं कर सकते हैं।

     

  • खुलासा: कथित कथक सम्राट गिरफ्तार, पीएम के नाम पर धाक जमाकर ले रहे थे वीआईपी सुविधा

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    नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर वीआइपी सुविधा लेने वाले एक शख्स को गिरफ्तार किया है। कथित कथक सम्राट राष्ट्रपति से भी सम्मानित हो चुका है। वह बड़े-बड़े नेताओं और मंत्रियों के साथ अपनी फोटो दिखाकर धाक जमाता था। गिरफ्तार आरोपी देश का जाना माना कथक सम्राट पुलकित मिश्रा उर्फ पुलकित महाराज है।

    दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसे रोहिणी सेक्टर-18 से गिरफ्तार किया है। उसके खुलासे के बाद पुलिस को कई चैंकाने वाले राज पता चले हैं। पुलिस आरोपित से पूछताछ कर उसके द्वारा किए गए फर्जीवाड़ों की फेहरिस्त तैयार करने में जुटी है।पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी कथक सम्राट पुलकित महाराज जब भी दिल्ली से बाहर किसी राज्य में जाता था, तो केन्द्र सरकारी की तरफ से संबंधित राज्य सरकार को एक फर्जी ईमेल भेजता था।

    फर्जी ईमेल में बताया जाता था कि राष्ट्रपति से सम्मानित देश के जाने-माने कत्थक महाराज उनके यहां आने वाले हैं। इसलिए उन्हें राज्य अतिथि की तरह वीआइपी सुविधाएं प्रदान की जाएं। साथ ही उनके लिए वीआइपी सुरक्षा का भी बंदोबस्त किया जाए। बताया जा रहा है कि आरोपित इस तरह से कई बार फायदा उठा चुका है। फर्जी ईमेल को सही मानकर उसे वीआइपी सुरक्षा और सुविधा मुहैया कराई जाती थी।आरोपी अपने आगे-पीछे सरकारी सुरक्षा लेकर बड़ी शान से घूमता था।

    हालांकि उसका फर्जीवाड़ा कैसे सामने आया है, ये अभी स्पष्ट नहीं है। क्राइम ब्रांच आरोपी से पूछताछ के बाद मीडिया को पूरी जानकारी देगी। फिलहाल मामला हाई प्रोफाइल होने की वजह से पुलिस अधिकारी भी कुछ कहने से बच रहे हैं।पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी केन्द्र सरकार, राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय में ऊंची पकड़ का दावा करता था।

    इसके लिए वह राष्ट्रपति से सम्मानित होने की फोटो दिखाता था। साथ ही वह प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और अन्य कई बड़े नेताओं के साथ अपनी फोटो दिखाकर रौब जमाता था।पुलिस के अनुसार गिरफ्तार कथक सम्राट पुलकित महाराज साहिबाबाद में डांस अकादमी चलाता था। वह खुद को अलग अलग मिनिस्ट्री का बड़ा अधिकारी बताता था। जहां भी जाता था स्थानीय प्रशासन को अपनी फर्जी पहचान बता कर सरकारी सुविधाएं लेता था।

    आरोपी दूसरों के नाम पर भी सुविधा लेता है।आरोपी ने सीतापुर के डीएम से हाल में सरकारी वीआइपी सुविधा मांगी थी। उसने जिलाधिकारी को बताया ता कि वह मंत्रालय का अधिकारी है। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट ने आरोपी को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

  • सुप्रीम कोर्ट बड़ा फैसला :  धारा 497 खत्म, पति, पत्नी और ‘वो’ का रिश्ता अब अपराध नहीं 

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     नई दिल्ली । SC के फैसले के अनुसार विवाह के इतर यौन संबंध अब अपराध नहीं है लेकिन तलाक के लिए वजह हो सकता है,  सुप्रीम कोर्ट ने अडल्टरी यानी विवाहेतर संबंध को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया है। कोर्ट ने आईपीसी की धारा 497 में अडल्टरी को अपराध बताने वाले प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया। गुरुवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए.एम. खानविलकर, जस्टिस इंदु मल्होत्रा, जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस आरएफ नरीमन की पांच जजों की बेंच ने एकमत से यह फैसला सुनाया।
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    विवाह के इतर यौन संबंध अब अपराध नहीं 1
    कोर्ट ने हालांकि कहा पति, पत्नी और ‘वो’ का रिश्ता अब अपराध नहीं है।   लेकिन इसके चलते खुदकुशी के मामले में उकसाने का केस भी दर्ज हो सकेगा। यह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने महिलाओं की इच्छा, अधिकार और सम्मान को सर्वोच्च बताया और कहा कि पति महिला का मालिक नहीं होता है। उन्हें सेक्शुअल चॉइस से रोका नहीं जा सकता है।
    चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपने और जस्टिस खानविलकर की ओर से फैसला पढ़ते हुए कहा, ‘हम विवाह के खिलाफ अपराध से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 497 और सीआरपीसी की धारा 198 को असंवैधानिक घोषित करते हैं।’ अलग से अपना फैसला पढ़ते हुए न्यायमूर्ति नरीमन ने धारा 497 को पुरातनपंथी कानून बताते हुए जस्टिस मिश्रा और जस्टिस खानविलकर के फैसले के साथ सहमति जताई।
    उन्होंने कहा कि धारा 497 समानता का अधिकार और महिलाओं के लिए समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन करती है।   अडल्टरी कानून मनमाना है। यह महिला की सेक्सुअल चॉइस को रोकता है और इसलिए असंवैधानिक है। महिला को शादी के बाद सेक्सुअल चॉइस से वंचित नहीं किया जा सकता है।
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    विवाह के इतर यौन संबंध अब अपराध नहीं 1

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अडल्टरी अपराध तो नहीं होगा, लेकिन अगर पति और पत्नी में से कोई अपने पार्टनर के व्यभिचार के कारण खुदकुशी करता है, तो सबूत पेश करने के बाद इसमें खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला चल सकता है। इसके साथ ही तलाक के लिए विवाहेतर संबंधों को आधार माना जाएगा।
     देश की सर्वोच्च अदालत ने फैसला देते वक्त महिला अधिकारों की बात भी की। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि अब यह कहने का समय आ गया है कि पति महिला का मालिक नहीं होता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में कहा कि अडल्टरी कानून मनमाना है। उन्होंने कहा कि यह महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। अडल्टरी कानून महिला की सेक्सुअल चॉइस को रोकता है और इसलिए यह असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि महिला को शादी के बाद सेक्सुअल चॉइस से वंचित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने इसके साथ ही दूसरे देशों की मिसाल देते हुए कहा कि चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में व्यभिचार अपराध नहीं है।
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    विवाह के इतर यौन संबंध अब अपराध नहीं 1

     इससे पहले 8 अगस्त को हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा था कि अडल्टरी अपराध है और इससे परिवार और विवाह तबाह होता है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली संवैधानिक बेंच ने सुनवाई के बाद कहा था कि मामले में फैसला बाद में सुनाया जाएगा।
     सुप्रीम कोर्ट ने आज विवाहेतर संबंध को लेकर बड़ा फैसला दिया है। अडल्टरी कानून के सेक्शन 497 को असंवैधानिक करार देते हुए इसे अपराध के दायरे से बाहर करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाते हुए चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का उदाहरण दिया और कहा कि इन देशों में ऐसा कानून नहीं है। इससे पहले 2 अगस्घ्त को सुनवाई के दौरान विवाहेतर संबंध को अपराध मानने वाले आईपीसी के सेक्शन 497 को मनमाना और महिला विरोधी बताया था।

  • राम मंदिर केस की सुनवाई 29 अक्टूबर से होगी शुरू

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    नई दिल्‍ली : अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद सेे जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच में से चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा व जस्टिस अशोक भूषण ने संयुक्त फैसला सुनाते हुए कहा कि ‘पुराना फैसला उस वक्‍त के तथ्‍यों के मुताबिक था. इस्‍माइल फारूकी का फैसला मस्जिद की जमीन के मामले में था’. जस्टिस भूषण ने कहा कि ‘फैसले में दो राय, एक मेरी और एक चीफ जस्टिस की, दूसरी जस्टिस नजीर की. मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्‍लाम का अटूट हिस्‍सा नहीं. पूरे मामले को बड़ी बेंच में नहीं भेजा जाएगा’. उन्‍‍‍‍‍‍‍होंने कहा कि ‘इस्‍माइल फारूकी के फैसले पर दोबारा विचार की जरूरत नहीं’. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ’29 अक्‍टूबर में राम मंदिर मामले पर सुनवाई शुरू होगी’.

    मामला बड़ी बेंच को भेजा जाना चाहिए- जस्टिस अब्‍दुल नजीर
    वहीं, बाद में अपना फैसला सुनाते हुए जस्टिस अब्‍दुल नजीर ने कहा कि मामला बड़ी बेंच को भेजा जाना चाहिए. मस्जिद में नमाज पर दोबारा विचार की जरूरत है. पुराने फैसले में सभी तथ्‍यों पर विचार नहीं किया गया.

    मुस्लिम पक्षों ने दायर की थी अर्जी
    दरअसल, कोर्ट को यह फैसला करना था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा है या नहीं और क्या इस मसले को बड़ी संवैधानिक बेंच को भेजा जाए. दरअसल, राम जन्मभूमि मामले में 1994 के इस्माइल फारुकी के फैसले पर पुनर्विचार के लिए मामले को संविधान पीठ भेजने की मांग वाली मुस्लिम पक्षों की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट को फैसला सुनाना था. मुस्लिम पक्षों ने नमाज के लिए मस्जिद को इस्लाम का जरूरी हिस्सा न बताने वाले इस्माइल फारुकी के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी. इससे पहले मुस्लिम पक्षकारों ने फैसले में दी गई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए बड़ी पीठ को भेजे जाने की मांग की थी.

    1994 के फैसले में दी गई थी यह व्‍यवस्‍था
    दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 1994 में अयोध्या में भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाले डॉक्‍टर एम. इस्माइल फारुकी के मामले में 3-2 के बहुमत से दी गई व्यवस्था में कहा था कि नमाज के लिए मस्जिद इस्लाम धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं है. मुसलमान कहीं भी नमाज अदा कर सकते हैं. यहां तक कि खुले में भी नमाज अदा की जा सकती है. मुस्लिम पक्षकार एम. सिद्दीकी के वकील राजीव धवन ने गत 5 दिसंबर को इस फैसले पर सवाल उठाते मामला पुनर्विचार के लिए संविधान पीठ को भेजे जाने की मांग की है.

    जानें क्या है पूरा मामला
    राम मंदिर के लिए होने वाले आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था. इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला. टाइटल विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला दिया था. फैसले में कहा गया था कि विवादित लैंड को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए. जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए. सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए, जबकि बाकी का एक तिहाई जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए.

    इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया. अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान और हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. वहीं, दूसरी तरफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी. इसके बाद इस मामले में कई और पक्षकारों ने याचिकाएं लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई करने की बात कही थी. सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट में इसके बाद से यह मामला पेंडिंग है.

    फैसले पर सबकी नजर
    सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कई मायनों में अहम था. इसी फैसले पर अयोध्या विवाद की दिशा टिकी हुई थी. अगर सुप्रीम कोर्ट की बैंच इस फैसले को बड़ी संवैधानिक बैंच के पास भेजने का फैसला करती है तो राम मंदिर विवाद का मामला और आगे के लिए टल सकता था.

  • अगर पेट्रोल का दाम हुआ इतना, पंप हो जाएंगे बंद!

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    नई दिल्ली। जिस तेजी से पेट्रोल की कीमत बढ़ रही है, उसे देखते हुए इसके जल्द ही 3 अंकों में पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। देश के कुछ शहरों में पेट्रोल पहले ही 90 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है। तेल की आसमान छूती कीमतें ही नहीं, पेट्रोलियम इंडस्ट्री के लिए एक और बड़ी चुनौती है।

    जो बहुत हद तक पिछली सदी के अंत में बहुचर्चित वाईटूके बग जैसी तकनीकी चुनौती है। इंडस्ट्री को इस चुनौती से जल्द निपटना होगा, पेट्रोल के दाम के शतक लगाने से पहले निपटना होगा। दरअसल, अगर पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर को पार किया तो पेट्रोल पंपों पर लगे डिस्पेंसिंग यूनिट (आसान शब्दों में मीटर, जो दाम और मात्रा दिखाते हैं) काम करना बंद कर देंगे।

    अभी पेट्रोल पंपों पर जो फ्यूल डिस्पेंसिंग यूनिट लगे हैं, वे रुपये में 2 अंक और दशमलव के बाद यानी पैसे भी 2 अंकों के लिहाज से सेट किए गए हैं। इस तरह मौजूदा डिस्पेंसिंग यूनिट जो अधिक से अधिक कीमत दिखा सकते हैं, वह है 99.99 रुपये। ऐसे में अगर पेट्रोल की कीमत 100 रुपये के स्तर को छू गई तो डिस्पेंसिंग यूनिट में 0.00 रुपये दिखेगा।

    ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स असोसिएशन के चेयरमैन एम. प्रभाकर रेड्डी कहते हैं, श्जब डिस्पेंसिंग यूनिट्स को डिजिटल बनाया गया तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि पेट्रोल के दाम एक दिन 100 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाएगा। वे लोग (पेट्रोलियम कंपनियां) एकदम आखिरी वक्त में जाग रहे हैं। इसका खामियाजा डीलर्स और उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा, क्योंकि सिस्टम को अपग्रेड करने में वक्त लगेगा। रिटेल इंडस्ट्री तो एक तरह से ठहर जाएगी।

  • SBI ने एटीएम से कैश निकालने की सीमा को घटाया, ग्राहक परेशान

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    नई दिल्‍ली: देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्‍टेट बैंक (SBI) ने अपने ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है. बैंक ने एटीएम से कैश निकालने की सीमा को घटा दिया है. मतलब यह कि अब एटीएम से पहले के मुकाबले कम पैसे निकलेंगे. एसबीआई ने ग्राहकों को एटीएम से एक दिन में 40,000 रुपए निकालने की छूट देख रही थी. लेकिन, अब इसे घटाकर 20000 रुपए प्रति दिन कर दिया गया है. हालांकि, एसबीआई ने 20,000 रुपये तक निकासी की सीमा 31 अक्‍टूबर से लागू होगी. 31 अक्टूबर तक ग्राहक 40000 रुपए निकाल सकते हैं. एसबीआई ने इस संदर्भ में अपनी सभी शाखाओं को निर्देश जारी कर दिए हैं.

    SBI ने अपनी शाखाओं को जारी किया निर्देश
    एसबीआई शाखाओं को भेजे गए आदेश में बैंक ने कहा है, ‘बैंकों को एटीएम ट्रांजेक्शन में होने वाली धोखाधड़ी की मिलने वाली शिकायतों को देखते हुए डिजिटल-कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के मकसद से कैश निकासी सीमा को घटाने का फैसला किया गया है. क्लासिक और मेस्ट्रो प्लैटफॉर्म पर जारी किए डेबिट कार्ड से भी निकासी सीमा को घटाया है.’ कैश निकासी सीमा में यह कटौती त्योहार शुरू होने से पहले की गई है.

    ऐसे होती है डेबिट कार्ड्स से धोखाधड़ी
    पिछले कुछ सालों में ऐसा देखा गया है कि एटीएम मशीन के आसपास कैमरे लगाकर ग्राहकों का पिन चुराकर फ्रॉड करने वाले कार्ड का क्‍लोन तैयार कर लेते हैं. दुकानों पर लगे स्‍वाइप मशीन के जरिए भी कुछ लोग कार्ड का क्‍लोन तैयार कर डेबिट-क्रेडिट कार्डधारकों को चूना लगाया करते हैं.

    ATM से ज्‍यादा कैश निकासी के लिए SBI ने ग्राहकों को लेना होगा खास कार्ड
    एसबीआई ने कहा है कि जिन ग्राहकों को एक दिन में 20,000 रुपए से अधिक की निकासी एटीएम से करनी हो वह चाहें तो ऊंचे वेरिएंट वाला डेबिट कार्ड्स ले सकते हैं। ऐसे कार्ड्स उन खाताधारकों को जारी किया जाता है जिनके खाते में मिनिमम बैलेंस ज्‍यादा होता है ।