Category: national

  • मोदी सरकार एक बड़ा तोहफा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को

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    नई दिल्ली. देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मोदी सरकार एक बड़ा तोहफा देने की तैयारी में है. जानकारी के अनुसार मोदी सरकार ने देश के 1.1 करोड़ सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता बढ़ाने के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स की नई सीरीज पर काम शुरू कर दिया है. गौरतलब है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर ही महंगाई भत्ते को तय किया जाएगा.

    एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया कि लेबर एंड एंप्लॉयमेंट मिनिस्ट्री के तहत काम करने वाले लेबर ब्यूरो ने इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स की नई सीरीज 2016 को बेस ईयर मानते हुए फाइनल कर दिया है जबकि मौजूदा इंडेक्स में बेस ईयर 2001 है.

    माना जा रहा है कि लेबर मिनिस्ट्री इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स की नई सीरीज पर काम शुरू हो चुका है. रिपोर्ट के मुताबिक हर 6 साल पर इस बेस ईयर में बदलाव किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों की जीविका में आने वाले बदलावों के असर को कम किया जा सके. इससे पहले साल 2006 में बेस ईयर में बदलाव किया गया था.

    यदि बेस ईयर में बदलाव के आधार पर महंगाई भत्ता बढ़ता है तो इसका फायदा करीब 1.1 करोड़ कर्मचारियों को मिलेगा. आपको बता दें कि महंगाई भत्ता या डियरनेस अलाउंस या डीए एक लिविंग एडजस्टमेंट अलाउंस है, जो सरकारी कर्मचारियों, सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों और पेंशनर्स को उनकी सैलरी में जोड़कर दिया जाता है. डीएस की गणना कर्मचारी की बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में की जाती है.

  • दुनिया का सबसे ऊंचा 70 मंजिल का चंद्रोदय मंदिर संकट में, इस मंदिर की ये होंगी खूबियां, देखें वीडियो

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    मथुरा में बननेवाले चंद्रोदय मंदिर समिति की प्लानिंग इसे दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर बनाने की है। यह मंदिर बनेगा तो मथुरा में लेकिन इसे बनवा रहा है बेंगलुरु स्थित इस्कॉन टेंपल। इस मंदिर के बनने की खबर के बाद जहां श्रीकृष्ण के भक्त खुशी से फूले नहीं समा रहे थे वहीं, अब अब हो सकता है कि इस मंदिर का प्रॉजेक्ट मझधार में अटक जाए। दरअसल, इस मंदिर के निर्माण पर रोक के लिए एनजीटी में याचिका दायर की गई है।

    सूत्रों के मुताबिक, एनजीटी (नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में याचिका दाखिल कर पर्यावरण कार्यकर्ता मणिकेश चतुर्वेदी ने रोक लगाने की मांग की है। याचिका के बाद एनजीटी द्वारा धार्मिक सोसायटी और केंद्रीय ग्राउंड वॉटर अथॉरिटी को नोटिस जारी किया गया है। एनजीटी में दाखिल याचिक में कहा गया है कि मथुरा के वृंदावन में इस्कॉन द्वारा बनाए जानेवाले चंद्रोदय मंदिर के निर्माण से यमुना के भूजल स्तर पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

    याचिका में आगे कहा गया है कि यमुना किनारे बनाए जा रहे 70 माले के इस मंदिर को 5.40 लाख वर्गफीट में बनाया जा रहा है। इस मंदिर के परिसर के चारों तरफ कृत्रिम तालाब बनाए जाने की योजना है और इस तालाब के निर्माण से यमुना का जलस्तर प्रभावित हो सकता है।

    याचिका पर संज्ञान लेते हुए नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षतावाली पीठ ने इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्ण कॉन्सिसनेस) और सीजीडब्लयूए (सेंट्रल ग्राउंड वॉटर अथॉरिटी) को नोटिस जारी कर 31 जुलाई तक जवाब देने के लिए कहा है।

    ऐसे रखी गई मंदिर की नींव
    मंदिर बनाने के प्रस्ताव के बाद साल 2014 में उत्तरप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादन ने मंदिर का शिलान्यास किया था। मंदिर का भूमि पूजन मथुरा की सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी द्वारा किया गया था। मंदिर सोसायटी द्वारा 2022 तक इस मंदिर का निर्माण पूरा करने की योजना है।

    मंदिर बनने पर ये होंगी खूबियां
    तय योजना के अनुसार अगर मंदिर का निर्माण होता है तो इस मंदिर में कई ऐसी खूबियां होंगी, जो इसे दूसरे मंदिरों से जुदा करेंगी।

    इस मंदिर में 70 मंजिलें होंगी और इसकी कुल ऊंचाई 212 मीटर होगी। इसे इस तरह भी समझ सकते हैं कि यह दिल्ली स्थित कुतुब मीनार से करीब 3 गुना ऊंचा होगा।

    इस मंदिर को बनाने में 300 से 500 करोड़ रुपए तक की लागत आने का अनुमान है। यह मंदिर 5.40 लाख वर्ग फीट में बनेगा और इसमें 12 वन भी बनाए जाएंगे, जिन्हें कृष्ण कालीन (द्वापर युग) रूप दिया जाएगा।

    यह मिश्र के पिरामिड और वेटिकन स्थित सेंट पीटर्स बैसोलिका से भी ऊंचा होगा। साथ ही दुनिया की सबसे ऊंची इमारतों में 12वें नंबर पर इसकी गिनती होगी।

    यह दुबई स्थित बुर्ज खलीफा से भी अधिक गहरा होगा। बुर्ज खलीफा की गहराई 50 मीटर है और चंद्रोदय मंदिर 55 मीटर गहरा होगा।
    इस मंदिर की बिल्डिंग भूकंप प्रतिरोधी होगी। मंदिर में करीब 12 एकड़ जमीन पर पार्किंग और हैलीपैड बनाने की भी योजना है।

  • स्टिंग ऑपरेशन: क्रिकेट जगत में मचा तहलका, राजीव शुक्ला के असिस्टेंट पर यूपी टीम में चयन के बदले लड़की मांगने का लगा गंभीर आरोप

    नई दिल्ली। बीसीसीआई की भष्टाचार रोधी इकाई (एसीयू) ने गुरुवार को कहा कि वे उस कथित रिश्वत प्रकरण की जांच करेंगे जिसका खुलासा स्टिंग ऑपरेशन में हुआ। इस स्टिंग में दावा किया गया था कि आईपीएल अध्यक्ष राजीव शुक्ला के निजी स्टाफ के एक सदस्य ने खिलाड़ियों के चयन के लिए रिश्वत की मांग की।

    उत्तर प्रदेश के एक हिन्दी न्यूज चैनल ने शुक्ला के कार्यकारी सहायक अकरम सैफी और क्रिकेटर राहुल शर्मा की कथित बातचीत का प्रसारण किया था जिसमें सैफी राज्य टीम में राहुल के चयन को सुनिश्चित करने के लिए ‘‘नगदी और दूसरी चीजों’ की मांग कर रहा है। शुक्ला फिलहाल उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) के सचिव भी हैं।

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    Mohammed-akram-saifi

    बीसीसीआई के एसीयू प्रमुख अजीत सिंह ने पीटीआई से कहा- हमने इस स्टिंग से जुडेघ् सारे मामले की जांच करेंगे। हम चैनल से ऑडियो की मांग करेंगे और इससे जुड़े खिलाड़ी से भी बात करेंगे। जब तब हम इससे जुड़े लोगों से बात नहीं कर लेते, कुछ भी कहना मुश्किल है।

    शर्मा ने कभी भारतीय या राज्य की टीम का प्रतिनिधित्व नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगया कि राज्य की टीम में शामिल करने के लिए सैफी ने उनसे घूस की मांग की थी। उन्होंने सैफी पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र भी जारी करने का आरोप लगया। सैफी ने सभी आरोपों को खारिज किया है।

    यूपीसीए के संयुक्त सचिव युद्धवीर सिंह ने चयन में भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा- हम किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। यूपीसीए में हम चयन को लेकर काफी पारदर्शिता बरतते हैं। मैं किसी की निजी बातचीत पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकता हूं क्योंकि यह दो लोगों के बीच का मामला है।

    इन आरोपों पर शुक्ला ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है जबकि बीसीसीआई ने सैफी से किसी भी तरह से जुड़े होने से इंकार कर दिया। बोर्ड ने हालांकि माना कि सैफी को वेतन उनकी तरफ से दिया जाता है।

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    मोहम्मद कैफ

    बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा- बीसीसीआई सिर्फ अपने प्राधिकारियों के निजी सहायकों के लिए राशि मुहैया करता है। अधिकारी अपने पसंद के कार्यकारी सहयोगी रखने को स्वतंत्र हैं और उनका वेतन हमारे कोष से दिया जाता है। बोर्ड का निजी स्टाफ से कोइ लेना देना नहीं है।

    भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी और उत्तर प्रदेश के कप्तान रहे मोहम्मद कैफ ने कहा कि वह ऐसे आरोपों से स्तब्ध हैं। उन्होंने इसकी जांच की मांग की। उन्होंने ट्वीट किया- उत्तर प्रदेश क्रिकेट में भ्रष्टाचार के स्तर से स्तब्ध हूं। युवा खिलाड़ियों से घूस मांग कर उनके कौशल को प्रभावित किया जा रहा है।

    उम्मीद है कि राजीव शुक्ला इसकी निष्पक्ष जांच करवाएंगे और युवा खिलाड़ियों को न्याय मिलने के अलावा उत्तर प्रदेश क्रिकेट की प्रतिष्ठा बहाल होगी। हाल ही में क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने वाले कैफ की कप्तानी में उत्तर प्रदेश ने 2005-06 में अपना पहला रणजी ट्राफी का खिताब जीता था।

  • अविश्वास प्रस्ताव ,सरकार की अग्निपरीक्षा कम विपक्ष की परीक्षा ज्यादा……

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    नरेंद्र मोदी की सरकार शुक्रवार यानी आज अपने कार्यकाल के पहले अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेगी. लोकसभा में पेश होने वाला अविश्वास प्रस्ताव सरकार के लिए इम्तिहान कम है बल्कि विपक्ष की परीक्षा ज्यादा है क्योंकि संख्या बल सरकार के साथ है. देखना दिलचस्प होगा कि सरकार के खिलाफ विपक्ष कितनी मजबूती से टिक पाता है.

    संख्या बल में यूं तो सरकार का पलड़ा भारी है लेकिन विपक्ष के चेहरे पर इसे लेकर कोई शिकन नहीं. लोकसभा में जो सीटों का समीकरण है उसके मुताबिक बीजेपी के पास अकेले दम पर बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ों से पांच सीट ज्यादा है. लेकिन चूंकि विपक्ष ने बहुमत पर अविश्वास जताया है, लिहाजा सरकार ने अपनी पूरी ताकत दिखाने की रणनीति बना ली है ताकि विपक्ष ही नहीं पूरे देश को संदेश जाए कि मोदी सरकार कितनी मजबूत है. इसके लिए पार्टी और गठबंधन के तमाम ढीले पेंच कसे जा चुके हैं.

    बीजेपी की तरफ से 4 सांसद रखेंगे पक्ष, मोदी भी दे सकते हैं जवाब

    बीजेपी की तरफ से गृह मंत्री राजनाथ सिंह, मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष राकेश सिंह, बीजेपी किसान मोर्चा के अध्यक्ष विरेंद्र सिंह मस्त और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल पक्ष रखेंगे. अमित शाह और अनंत कुमार ने बीजेपी के इन नेताओं की लिस्ट तैयार की है. इस बीच संभावना यह भी जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कांग्रेस के सवालों पर पलटवार कर सकते हैं.

    बिना लंच ब्रेक के 7 घंटे चलेगा सदन

    अविश्वास प्रस्ताव को लेकर लोकसभा में शुक्रवार को होने वाली चर्चा में कौन पार्टी कितनी देर बोलेगी, इसे लेकर लोकसभा अध्यक्ष ने समय तय कर दिया है. जानकारी के मुताबिक बहस के बीच लंच ब्रेक नहीं होगा और कुल चर्चा के सात घंटे तक चलेगी. हालांकि, सदन की सहमति से समय को बढ़ाया जा सकता है. बता दें कि चर्चा के लिए पार्टी की शक्ति के आधार पर समय तय किया जाता है.

    भाजपा को साढ़े तीन घंटे, कांग्रेस को 38 मिनट का समय

    सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाला मुख्य दल तेलुगु देशम पार्टी (TDP) लोकसभा में इस पर चर्चा की शुरुआत करेगा. कुल 7 घंटे के समय में अध्यक्ष ने TDP को बोलने के लिए 13 मिनट का समय दिया है. पार्टी की ओर से जयदेव गल्ला पहले वक्ता होंगे. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को प्रस्ताव पर अपने विचार रखने के लिए 38 मिनट का समय दिया गया है. कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी और सदन में पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इस पर बोल सकते हैं.

    अन्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल (बीजद), तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) को क्रमश : 29 मिनट, 27 मिनट, 15 मिनट और 9 मिनट का समय दिया गया है. सदन में बहुमत वाली सत्तारूढ़ भाजपा को चर्चा में तीन घंटे और 33 मिनट का समय दिया गया है.

    नाराजगी के बावजूद शिवसेना दे सकती है सरकार का साथ

    अविश्वास प्रस्ताव के दौरान एनडीए एक दिखना चाहता है लेकिन शिव सेना का रुख अभी भी साफ नहीं है. पार्टी ने फैसला अपने सुप्रीमो उद्धव ठाकरे पर छोड़ दिया है. फिलहाल संकेत यही हैं कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भाषण में सरकार पर बरसने के बावजूद वोट सरकार को ही देंगे.

    शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, ‘सरकार के पास भारी बहुमत है. हारना या जीतना बड़ी बात नहीं है लेकिन आप के सामने मजबूत विरोधी दल हैं, उनकी बात जनता भी सुनेगी. लोकतंत्र का बड़ा महत्व है. बात शिवसेना के साथ देने की नहीं है अविश्वास प्रस्ताव पर सब बोलेंगे, कांग्रेस बोलेगी, टीडीपी बोलेगी, शिवसेना भी बोलेगी, हम क्यों नहीं बोलेंगे. मन में है तो हम भी बोलेंगे. जब वोटिंग आएगा जो उद्धव ठाकरे निर्णय देंगे उसका पालन होगा.’ शिवसेना ने सरकार का समर्थन नहीं करने का संकेत दिया है. सामना में लिखा गया है कि इस समयदेश में तानाशाही चल रही है इसका समर्थन करने की जगह वो जनता केसाथ जाना चाहेगी

    आंकड़ों में बहुमत से बहुत आगे है बीजेपी

    543 सांसदों वाली लोकसभा में इस वक्त 11 सीटें खाली हैं. यानी लोकसभा में सांसदों की मौजूदा संख्या 532 है. इस लिहाज से बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा 267 सीटों का है. फिलहाल बीजेपी के 272 सांसदों के साथ सरकार के पक्ष में कुल 295 सांसद हैं. ये आंकड़ा 313 का होता लेकिन शिवसेना ने अपना रूख साफ नहीं किया है. उधर, विरोध में 147 सासंद हैं जबकि शिवसेना के 18 सांसदों को मिलाकर 90 सांसद अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेंगे या विरोध ये फिलहाल साफ नहीं हो पाया है.

  • हिंदू नेता होने के बावजूद करुणानिधि को इसलिए किया जा रहा है दफन !

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    चेन्नई : मुथुवल करुणानिधि द्रविड़ अभियान से जुड़े उन अंतिम लोगों में से एक थे, जो तमिलनाडु में पांच दशक पहले सामाजिक न्याय के आधार पर राजनीति में पिछड़े वर्ग के उत्थान और कांग्रेस शासन की समाप्ति के अगुवा बनकर उभरे थे। 94 वर्षीय करुणानिधि तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहे, जिन्होंने यहां एक शलाका पुरुष की तरह अपने सार्वजनिक जीवन को जीया। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जब उन्होंने 1971 में इंदिरा गांधी का साथ दिया और इसका चुनावों में उन्हें फायदा मिला।

    लेकिन उन्होंने 1975-77 के आपातकाल का कड़ा विरोध किया था, जिस दौरान उनकी सरकार को भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था। करुणानिधि के नेतृत्व में द्रमुक को 2004 और 2009 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में बेहतर स्थिति हासिल थी। इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में राजग सरकार में भी उनकी पार्टी को अच्छी स्थिति हासिल थी।

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    करुणानिधि

    वह अपने पथ प्रदर्शक सी.एन. अन्नादुरई या अन्ना के स्थान पर 1969 में मुख्यमंत्री बने थे और पार्टी व सरकार पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई। वह लगभग 50 वर्षो तक द्रमुक के अध्यक्ष बने रहे। वर्ष 2016 में उनकी प्रतिद्वंद्वी जे.जयललिता के निधन, और अब मंगलवार को उनके निधन के बाद तमिलनाडु में एक शून्य पैदा हो गया है।

    हालांकि कइयों के जेहन में सवाल है कि एक हिंदू नेता होने के बावजूद करुणानिधि को दफन क्यों किया जा रहा है? दरअसल इसके पीछे वजह है उनका द्रविड़ आंदोलन से जुड़े होना। द्रविड़ आंदोलन से जुड़े ज्यादातर नेताओं को दफनाया गया था।

    चाहें वह पेरियार हों, डीएमके के संस्थापक सीएन अन्नादुरई, एमजी रामचंद्रन या फिर जयललिता, इन्हें मरीना बीच में जगह मिली। इसलिए करुणानिधि को भी दफनाया जाना द्रविड़ आंदोलन से जोड़कर देखा जा रहा है।

    करुणानिधि का जन्म तीन जून, 1924 को तंजावुर जिले में हुआ था। वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने पत्रकार, नाटककार और पटकथा लेखक के तौर पर भी काम किया। वह समाज सुधारक ‘पेरियार’ ई.वी. रामास्वामी और अन्ना के प्रभाव में आकर द्रविड़ अभियान से जुड़े। कलैगनार के रूप में विख्यात करुणानिधि को कला, साहित्य, फैशन, रंगमंच और सिनेमा में भी दक्षता हासिल थी।

    करुणानिधि के राजनीतिक भाग्य का निर्माण तब हुआ, जब अन्ना ने डीके से अलग होकर 1949 में द्रमुक की स्थापना की। तमिल फिल्म ‘पाराशक्ति’ के हिट हो जाने और तिरुचिरापल्ली के समीप काल्लाकुडी में रेल रोको अभियान ने उन्हें पूरे राज्य में पहचान दिलाने में मदद की। फिल्म में उन्होंने पटकथा लेखन किया था। अन्नादुरई के निधन के बाद वह 1969 में राज्य के मुख्यमंत्री बने। एक गरीब ईसाई वेल्लालर(एक पिछड़ी जाति) में जन्मे करुणानिधि का नाम उनके माता-पिता अंजुगम और मुथुलवल ने दक्षिणमूर्ति रखा था।

    बाद में उन्होंने अपना नाम बदलकर करुणानिधि रख लिया। उन्होंने 1937-40 के दौरान हिंदी विरोधी प्रदर्शन में भी भाग लिया था और एक हस्तलिखित अखबार ‘मानवर नेसान(छात्रों का साथी)’ भी प्रकाशित किया था। करुणानिधि ने मासिक ‘मुरासोली’ का भी प्रकाश किया था, जो बाद में साप्ताहिक हो गया और द्रमुक का अधिकारिक दैनिक पत्र बन गया। गत वर्ष इस पत्रिका ने हीरक जयंती मनाई थी। उन्होंने 1957 में कुलिथालाई से सफलतापूर्वक अपना पहला चुनाव लड़ा था और उसके बाद से उन्होंने 13 चुनावों में से एक में भी हार का सामना नहीं किया।

  • भाजपा विधायक ने पं. नेहरू के बारे में ऐसी बातें कही जिसे सुनकर किसी भी भारतीय का खोल जाएगा खून, पढ़े पूरी स्टोरी !

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    New Delhi. अलवर के बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू पर निशाना साधा है. उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू के बारे में कुछ ऐसी बातें कह दी हैं जिन्हे सुनकर किसी भी भारतीय का खून खोल जाएगा. न्यूज एजेंसी एएनआइ से बात करते हुए ज्ञानदेव आहूजा ने कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू कोई पंडित नहीं थे क्योंकि वह गाय और सूअर का मांस खाते थे और एक गाय और सूअर का मांस खाने वाला व्यक्ति पंडित कैसे हो सकता है. ज्ञानदेव ने पंडित जवाहर लाल नेहरू के पंडित होने पर सवाल उठा दिया है. उन्होंने कहा कि गाय से हिन्दू धर्म के लोगों कि आस्था जुडी हुई है वहीं मुस्लिम लोग सूअर से दूर भागते हैं और जवाहर लाल नेहरू तो गाय और सूअर दोनों का मांस खाते थे तो कांग्रेस पार्टी ने उनके नाम के आगे आखिर पंडित क्यों लगाया है और उन्हें ब्राह्मणों की पार्टी से क्यों जोड़ा है।

    ज्ञानदेव इसके पहले भी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं. साल 2016 में भी उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू पर ही तंज कसा था और इस बार भी उन्होंने ने ऐसा ही किया है. पिछली बार उन्होंने कहा था कि कश्मीर की समस्या जो अब तक खत्म नहीं हुई है वह भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के द्वारा ही दी गई है. अब इस बार उन्होंने पंडित जवाहर लाल के पंडित होने पर सवाल उठाए हैं।

    आपको बता दें कि ज्ञानदेव आहूजा बहुत बार गौ रक्षकों के समर्थन में उतरे हैं और वह मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के खिलाफ भी बयान दे चुके हैं. जैसे इस बार उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू के पंडित होने पर सवाल उठाए थे वैसे ही उन्होंने वसुंधरा की अगुवाई में सरकार के कामकाज करने के तरीके पर भी सवाल उठाए थे।

  • जानिये यहां सिर्फ 3 घंटे में जमा किया 150 करोड़ का चंदा!

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    नई दिल्ली. क्या आप कल्पना कर सकते है की महज 3 घंटे में 150 करोड़ रूपये से भी ज्यादा का चंदा इकठ्ठा किया जा सकता है, भले ही ये आपको नामुमकिन सा लगे लेकिन गुजरात के पाटीदारों ने यह कर दिखाया है. गुजरात में पाटीदारों के विश्व उमिया फाउंडेशन (वीयूएफ) ने मंदिर और कम्युनिटी कॉम्प्लेक्स के लिए महज 3 घंटे में 150 करोड़ रुपए जुटा लिए. आपको बता दें कि रविवार को पाटीदार समाज के लोगों ने वीयूएफ की पहली बैठक बुलाई थी. इसमें लोगों से अहमदाबाद में 40 एकड़ में बनाए जाने वाले उमियाधाम मंदिर के लिए दान की अपील की गई थी और देखते ही देखते 150 करोड़ से भी ज्यादा दान मिल गया.

    लोगों ने दिल खोलकर औसतन हर मिनट 84 लाख रुपए दान दिया. एकत्र हुए इस दान से उमियाधाम में कड़वा पाटीदारों की कुलदेवी उमिया माता का भव्य मंदिर बनेगा. इसके साथ यहां अस्पताल, स्पोर्ट्स और कल्चर कॉम्प्लेक्स, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट और लड़के-लड़कियों के लिए हॉस्टल भी बनाए जाएंगे. इस प्रोजेक्ट की लागत करीब एक हजार करोड़ रुपए है. अमेरिका में होटल चलाने वाले सीके पटेल इसके संयोजक हैं. उन्होंने बताया कि उमिया फाउंडेशन ने 100 करोड़ रुपए जुटाने की अपील की थी, पर 150 करोड़ का दान मिला. किसी सामाजिक कार्य के लिए इतने कम समय में सबसे ज्यादा रकम जमा की गई है.

    150 करोड़ की रकम में 51 करोड़ मुंबई के पटेल परिवार ने दिए. यह परिवार कुछ साल पहले मेहसाणा से मुंबई शिफ्ट हुआ था. परिवार ने गोरेगांव में 7 साल पहले उमिया माता के मंदिर के लिए जमीन भी दे चुका है. हरिद्वार में उमिया धाम बनाने के लिए 71 लाख रुपए दान किए थे. गौरतलब है कि ये वही पाटीदार समाज है जिसे आरक्षण दिलाने की मांग को लेकर हार्दिक पटेल पिछले तीन सालो से सरकार की नींद हराम किए हुए है.

  • Delhi पस्त और CM अरविंद केजरीवाल मस्त: कपिल मिश्रा

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    नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार में मंत्री रहे कपिल मिश्रा ने आप सरकार पर गंभीर टिप्पणी की है। कपिल मिश्रा ने कहा है कि एक तरफ तो दिल्ली में तीन बच्चियों की भूख से तड़पकर मौत हो जाती है, वहीं अरविंद केजरीवाल अपने दो घंटे के होटल में रहने के दौरान एक लाख 85 हजार का खर्च कर देते हैं। इससे भी शर्मनाक बात यह है कि 80 हजार रुपए की धनराशि केवल शराब पीने पर खर्च कर दी जाती है।

    कपिल मिश्रा ने कहा है कि यह बेहद शर्मनाक बात है कि एक तरफ तो दिल्ली के लोगों को परेशानी हो रही है, वहीं केजरीवाल बेशर्म अय्याशी दिखा रहे हैं। कपिल ने एक ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने एक कवि की पंक्तियों में परिवर्तन करते हुए लिखा है कि-

    ‘काजू भुने प्लेट में, व्हिस्की गिलास में
    उतरा है पूर्ण स्वराज केजरीवाल के निवास में’

    इसलिए हो रहा हमला
    दरअसल, गुरुवार को मीडिया में एक खबर आई जिसमें कहा गया था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कर्नाटक में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में जब गए थे, तब महज दो घंटे के लिए एक होटल में ठहरे थे। कथित रुप से इस दो घंटे में होटल का खर्च एक लाख 85 हजार का आया। मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक इसमें भी 80 हजार रुपये सिर्फ शराब पीने पर खर्च किए गए। दरअसल, अरविंद केजरीवाल आम आदमी की राजनीति करने की बात करते रहे हैं। यही कारण है कि यह मामला सामने आने के बाद भाजपा उनके ऊपर हमलावर हो गई है।

  • केरल: भारी बारिश …अचानक आई बाढ़ और देखते-देखते बह गई सड़क, देखें विडियो

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    मल्लपुरम । केरल के विभिन्न जिलों में गुरुवार सुबह से हो रही भारी बारिश और भूस्खलन के चलते अब तक 22 लोगों की मौत हो गई है। राज्य के सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में मलप्पुरम भी शामिल है जहां 5 लोग भारी बारिश और भूस्खलन के शिकार हो चुके हैं। मल्लपुरम में अचानक आई बाढ़ के पानी से एक सड़क देखते-देखते बह गई। इस घटना का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    आपदा नियंत्रण कक्ष के सूत्रों के अनुसार, इडुक्की में भूस्खलन में 10 लोगों, मलप्पुरम में 5, कन्नूर में 2 और वायनाड जिले में 1 की मौत हो गई है। वायनाड, पलक्कड ओर कोझिकोड जिलों में एक-एक व्यक्ति लापता बताए जा रहे हैं। फिलहाल आर्मी और नेवी की टीमें रेस्क्यू के लिए पहुंच चुकी हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई इलाकों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।

    भारी बारिश के चलते बुधवार को कांजीकोड और वालायर के बीच रेलवे ट्रैक को भी नुकसान पहुंचा है। इस रूट पर रेल सेवाएं रोक दी गईं हैं। डिविजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) और अन्य अधिकारियों ने यहां का दौरा भी किया। इस रूट को पर ट्रैक को ठीक करने का काम जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्दी ही इसे शुरू किया जा सकेगा।

    बता दें कि भारी बारिश के कारण इडुक्की के अडीमाली शहर में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई है। पुलिस और स्थानीय लोगों ने मलबे से दो लोगों को जिंदा बाहर निकाला है। बताया जा रहा है कि बारिश की वजह से इडुक्की बांध का पानी का स्तर काफी ज्यादा हो गया था जो 26 साल खोला गया। गुरुवार सुबह करीब 600 क्यूसेक पानी छोड़ा गया जिससे जल स्तर 169.95 मीटर पर पहुंच गया। इडुक्की बांध में गुरुवार सुबह आठ बजे तक जल स्तर 2,398 फीट था जो जलाशय के पूर्ण स्तर के मुकाबले 50 फीट अधिक था।

    जानकारी के मुताबिक, नेवी की ओर से दक्षिणी नवल कमांड ने वयानड में फंसे लोगों को बचाने के लिए चार टाइविंग टीमें और एक सी किंग हेलिकॉप्टर भेजा है। इसके अलावा भारतीय थल सेना की ओर से भी अयान्नकुलु, इदुक्की और वयानड में लगभग 75 जवानों की टीम भेजी गई है। दो और टीमें कोझिकोड और मलप्पुरम भेजी जा रही हैं। जल्द ही इंजिनियरिंग टास्क फोर्स की तीन टीमें भी भेजी जाएंगी।

  • क्यों न दागी को टिकट देने वाली पार्टी का रद्द कर दिया जाए पंजीकरण: सुप्रीम कोर्ट

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    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से पूछा कि क्यों न आपराधिक मामला झेलने वाले व्यक्तियों को चुनाव लड़ने का टिकट देने वाली राजनीतिक पार्टियों का पंजीकृत रद्द कर दिया जाए। शीर्ष न्यायालय ने सरकार से पूछा कि क्या चुनाव आयोग को ऐसा करने का निर्देश दिया जा सकता है? राजनीति में अपराधीकरण के लिए कोई जगह नहीं होने की बात कहते हुए शीर्ष अदालत ने यह भी पूछा कि अपराधमुक्त राजनीति के लिए क्या विधायिका को इस संबंध में कानून बनाने के लिए कहा जा सकता है? अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।

    चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने ये सवाल इस संबंध में दाखिल कई जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान उठाए। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि भ्रष्टाचार एक ‘संज्ञा’ है, लेकिन जैसे ही यह राजनीति में प्रवेश करता है कि यह ‘क्रिया’ बन जाती है। तब कोई एंटीबायोटिक काम नहीं करती।

    बता दें कि 8 मार्च, 2016 को एक तीन सदस्यीय पीठ ने ये मसला संविधान पीठ को रेफर किया था। इससे पहले शीर्ष न्यायालय सांसदों-विधायकों पर चल रहे आपराधिक मुकदमों की सुनवाई स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर 1 साल के अंदर निपटाने के निर्देश सभी हाईकोर्ट को दे चुका है।

    एक एनजीओ की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी ने कहा कि कानून तोड़ने वाले कानून निर्माता नहीं हो सकते। इस पर पीठ ने कहा कि आप चाहते हैं कि हम संसद को इस संबंध में कानून बनाने के लिए कहें। संविधान में सभी के अधिकारों का बंटवारा किया गया है। कानून बनाना विधायिका का काम है न कि अदालत का।

    अदालत की लक्ष्मण रेखा कानून की व्याख्या करने तक सीमित है। इस पर द्विवेदी ने कहा कि वर्ष 2014 में 34 फीसदी से अधिक सांसद व विधायक दागी थे। इस कारण विधायिका इस मसले पर चुप है, इसलिए अदालत को इसमें दखल देना चाहिए।

    केंद्र सरकार ने गंभीर आपराधिक मामले में आरोप तय होने पर चुनाव लड़ने की पाबंदी लगाने का विरोध किया है। केंद्र की तरफ से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि ये मुद्दा संसद के दायरे में आता है। मौजूदा कानून के मुताबिक दोषी साबित होने पर ही चुनाव लड़ने पर पाबंदी है। जब तक किसी आरोपी को अदालत में दोषी नहीं ठहरा दिया जाता, तब तक वह निर्दोष रहता है। ऐसे में उसके चुनाव लड़ने पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती।