Category: national

  • बुराड़ी सामूहिक आत्महत्या: 11 पाइपों में छिपा हुआ है 11 मौतों का रहस्य?

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    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली के बुराड़ी के संत नगर इलाके में एक ही घर में 11 लोगों की मौत में बीतते वक्त के साथ कई ऐंगल सामने आ रहे हैं। परिवार की सामूहिक आत्महत्या ़ ने देश भर में लोगों को सकते में डाल दिया है। वहीं, मामले की जांच में एक के बाद एक कई रहस्यमय बातें और सबूत भी मिल रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि परिवार ने पूरी तैयारी के साथ आत्महत्या की और शायद अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र जैसी चीजों पर बहुत अधिक यकीन करते थे।

    घर में लगे 11 पाइपों में छिपे हैं संकेत?
    मृतकों के घर से मिले रजिस्टर में लिखी बातें तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास ़ की ओर इशारा कर रही हैं। अब इसी क्रम में एक और ऐंगल सामने आ रहा है और वह ऐंगल है श्पाइपश् ऐंगल। दरअसल, मृतकों के घर के बाहरी दीवार पर एक छोटे दायरे में 11 पाइप आसपास लगे हुए हैं। खास बात यह है कि इन पाइपों में 7 सीधे और 4 मुड़े हुए हैं। मरने वालों में 7 महिलाएं और 4 पुरुष हैं। कहा जा रहा है कि इन पाइपों का भी अंधविश्वास का कोई न कोई ऐंगल जरूर है क्योंकि इन पाइपों से पानी गिरने के कोई निशान नहीं है।

    डायरी के पन्नों में नजर आ रही है पूरी तैयारी
    मृतकों के घर से मिली डायरी में इन मौतों के राज छिपे हुए हैं। डायरी में कुछ ऐसी रहस्यमय बातें लिखी हैं जो आपको चैंका सकती हैं। डायरी के एक पन्ने पर लिखा है, श्पट्टियां अच्छे से बांधनी है। शून्य के अलावा कुछ नहीं दिखना चाहिए। डायरी में इस क्रिया के लिए संकेत इस तरह से दिए गए हैं, 7 दिन बाद पूजा लगातार करनी है। थोड़ी लगन और श्रद्धा से। कोई घर में आ जाए तो अगले दिन। गुरुवार या रविवार को चुनिए।

    मृतकों के गले में चुन्नी, लिखे थे धार्मिक संदेश
    मरने वालों में ज्यादातर के गले में चुन्नी बंधी हुई थी, जिनमें धार्मिक संदेश लिखे हुए थे। डायरी के पन्नों के साथ मृतकों की अंतिम स्थिति का मिलान किया जाए तो ऐसा लग रहा है कि शायद परिवार टोटकों में यकीन करता था। परिवार आर्थिक संकट या डिप्रेशन में था, अब तक इसके कोई संकेत नहीं मिले हैं।

  • शिक्षकों पर गिरी गाज , नंबर जोड़ने में की गलती, 130 टीचर्स पर एक्शन

    नई दिल्ली। सीबीएसई की 12वीं क्लास की परीक्षा में नंबर जोड़ने में हुई गलती के लिए शिक्षकों पर गाज गिरी है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंड्री एजुकेशन (सीबीएसई) ने देश भर के 130 शिक्षकों और कोऑर्डिनेटर्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। आपको बता दें कि इस साल दोबारा कॉपी जांच में सीबीएसई की बड़ी चूक सामने आई। दोबारा जांच के बाद किसी छात्र के 400 फीसदी मार्क्स बढ़े तो किसी छात्र को जहां पहले जीरो मार्क्स मिले थे, दोबारा कॉपी चेकिंग के बाद उनको 35 नंबर आए। इससे सीबीएसई की काफी किरकिरी हुई। कड़ी से कड़ी सजा दो. मेरे बेटा भी अभी ही झेल रहा है. अभी भी रिवॅल्यूयेशन प्रोसेस जारी है और डी यू तीसरी कट ऑफ निकलने की तयारी में है. पता नही कैसा एडमिशन होगा।

    सबसे ज्यादा संख्या में चूक पटना रीजन में सामने आई है जहां 45 टीचर्स/कोऑर्डिनेटर्स को लापरवाही का जिम्मेदार पाया गया है। इलाहाबाद रीजनल ऑफिस ने पटना रीजन के 45 टीचरों/कोऑर्डिनेटरों को निलंबित करने समेत अन्य कार्रवाई करने का सुझाव दिया है। पटना के बाद देहरादून का नंबर है जहां 27 टीचर्स/कोऑर्डिनेटर्स को गैर जिम्मेदार पाया गया है। इलाहाबाद और दिल्ली के बाद अजमेर रीजन में ऐसे मामले ज्यादा सामने आए हैं जहां छात्रों का वेरिफिकेशन के बाद नंबर बढ़ा है। अभी कॉपी दोबारा चेकिंग की प्रक्रिया जारी है, ऐसे में अभी और शिक्षकों की लापरवाही पकड़ में आएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

    ध्यान रहे कि टीओआई पिछले तीन सालों से सीबीएसई की नंबर जोड़ने में होने वाली चूक को सामने लाता रहा है। इससे यह पता चला कि छात्रों को नंबर में गलती का कितना खामियाजा भुगतना पड़ा। हालांकि इस साल ऐसे कम मामले सामने आए हैं लेकिन कुछ बड़ा बवंडर सामने आया है। टीओआई ने 24 जून को एक रिपोर्ट में इस तरह की चूक पर रोशनी डाली थी जिसके बाद सीबीएसई ने दोबारा जांच की प्रक्रिया शुरू की और इसके लिए जिम्मेदार टीचरोंध्कोऑर्डिनेटरों की पहचान शुरू हुई।

  • मुझे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की शक्ल पसंद नहीं: प्रणव पांड्या

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    नई दिल्ली. गायत्री परिवार ने आगामी लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का समर्थन करने का ऐलान किया है. संगठन के मुखिया प्रणव पांड्या ने कहा कि उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की शक्ल नहीं अच्छी लगती है. पांड्या ने कहा कि अगर वह हमारे यहां आना चाहे तो आ सकते हैं लेकिन उन्हें वीआईपी आवभगत नहीं मिलेगी क्योंकि उन्हें राहुल गांधी की चेहरा पसंद है. गौरतलब है कि पांड्या ने आरएसएस चीफ मोहन भागवत के साथ हरिद्वार में बैठक में हिस्सा लिया था. पांड्या ने बुधवार को कहा है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की तरह हम उन्हें रिसीव नहीं करेंगे, वो आए तो आएं, हमे उसकी शकल अच्छी नहीं लगती.

    गायत्री परिवार का दावा है कि उसके पास दुनिया में 15 करोड़ लोग सदस्य हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए कई राजनीतिक दलों ने उन्हें संपर्क किया है क्योंकि वह उनका समर्थन हासिल करना चाहते हैं. रविवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने हरिद्वार दौरे के दौरान पांड्या से मुलाकात की थी, इस दौरान उन्होंने जूना अखाड़ा के स्वामी अवधेशानंद, स्वामी सत्यमित्रानंद से मुलाकात की थी.

    इन सभी लोगों से मुलाकात के दौरान शाह ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा को अपना समर्थन देने की मांग की है. बुधवार को मोहन भागवत ने तमाम हिंदु संगठनों से मुलाकात की, जिसमे पांड्या, अवधेशानंद गिरी, गयानंद महाराज, आचार्य बालकृष्ण शामिल थे.

  • हिंदुओं को नीतीश सरकार दबा रही है – गिरिराज सिंह

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    पटना। बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह बजरंग दल और विश्‍व हिंदू परिषद के नेताओं से मिलने के लिए शनिवार को जेल पहुंचे। उन्होंने बजरंग दल के संयोजक जितेंद्र प्रताप जीतू और विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष कैलाश विश्वकर्मा की गिरफ्तारी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सीधे नीतीश कुमार पर निशाना साधा। गिरिराज सिंह ने कहा कि शासन और प्रशासन हिंदुओं को दबा रहा है। जितेंद्र प्रताप जीतू और कैलाश विश्‍वकर्मा को बिहार के नवादा में सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप है।

    गिरिराज सिंह ने कहा कि बिहार सरकार एडमिनिस्‍ट्रेशन के मन में एक बात बैठी हुई है कि सांप्रदायिक सद्भाव तभी कायम हो सकता है जब हिंदुओं को दबाया जाएगा। यह दुर्भाग्‍यपूर्ण है, मैं अपील करता हूं कि इस नजरिए को बदलें। गिरिराज सिंह यहीं नहीं रुके, उन्‍होंने आगे कहा कि बजरंग दल और वीएचपी के कार्यकर्ताओं पर फर्जी केस लगाकर उन्‍हें जेल भेजा गया है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नवादा में रामनवमी के दौरान जो भी हिंसक घटनाएं हुईं, वे दुर्भाग्‍यपूर्ण थीं। उन्‍होंने कहा कि नवादा में जो हिंसा भड़की थी, वह दुर्गा और हनुमान की मूर्ति तोड़ने जाने के बाद भड़की। गिरिराज सिंह ने जेल भेजे गए बजरंग दल और विश्‍व हिंदू परिषद कार्यकर्ताओं का बचाव करते हुए कहा कि ये वो लोग नहीं हैं, जिन्‍होंने हिंसा फैलाई, बल्कि ये लोग तो शांति स्‍थापित करने वाली कमेटी के सदस्‍य थे, जिन्‍होंने हालात सुधारने के लिए प्रयास किए थे।

    उन्होंने कहा कि जिले के बहुसंख्यक समाज के लोगों ने सामाजिक सद्भाव को कायम करने की पहल की थी, चाहे अकबरपुर, रजौली का मननपुर हो, पकरीबरावां का धमौल या नवादा, सभी जगह इन्‍हीं लोगों ने सामाजिक सद्भाव को बरकरार रखने के लिए कदम उठाया, लेकिन इन्‍हीं लोगों को शहर का माहौल खराब कर, तनाव फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। गिरिराज सिंह ने कहा कि बिहार पुलिस की यही कार्रवाई लोगों को उकसाने का काम कर रही है। शासन हिंदुओं को प्रताड़ित करने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के लिए लोगों का सहयोग करना उनका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन कार्रवाई दिखाने के लिए इन दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

  • मोदी सरकार वादों को पूरा करे वर्ना शुरू कर देंगे आंदोलन : अन्ना हजारे

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    नई दिल्ली. जाने-माने समाजसेवी अन्ना हजारे ने मोदी सरकार पर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने, लोकपाल तथा लोकायुक्तों की नियुक्ति तथा अन्य वादों को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि इन आश्वासनों को पूरा नहीं किया गया तो वह 2 अक्टूबर  से रालेगणसिद्धि में फिर से आंदोलन शुरू कर देंगे. अन्ना ने प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डा जितेन्द्र सिंह को गुरुवार को पत्र लिखकर आंदोलन के बारे में आगाह किया है. इस पत्र की प्रति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कृषि राज्यमंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस को भी भेजी गयी है.

    उन्होंने लिखा है कि इन मांगों को लेकर वह गत 23 मार्च से दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन पर बैठे थे और तब सात दिन बाद केन्द्र सरकार ने उनकी मांगों को मानने का आश्वासन देकर उनका अनशन तुड़वाया दिया था. इस आश्वासन पत्र पर डा़ सिंह ने ही हस्ताक्षर किये थे. इसके बाद से इन मांगों को पूरा करने की दिशा में किसी तरह का कदम नहीं उठाया गया है. अन्ना हजारे ने लिखा है कि भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान किसानों के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने , किसानों को फसल लागत का डेढ गुना मूल्य देने, लोकपाल और लोकायुक्तों की नियुक्ति करने तथा देश में पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज बनाने का वादा किया था.

    सरकार बनने के बाद भी प्रधानमंत्री ने इन वादों को पूरा करने का आश्वासन दिया था. अन्ना ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को कई बार पत्र लिखकर इन वादों की याद दिलायी है लेकिन उनकी ओर से केवल इतना ही जवाब मिलता है कि आपका पत्र मिला. उन्होंने कहा है कि वह मोदी सरकार को इस पत्र के माध्यम से एक बार फिर उसके आश्वासनों तथा वादों की याद दिला रहे हैं और यदि इन्हें पूरा नहीं किया जाता है तो वह आगामी 2 अक्टूबर से एक बार फिर रालेगणसिद्ध में आंदोलन शुरू करेंगे. उल्लेखनीय है कि अन्ना हजारे ने वर्ष 2011 में भी रामलीला मैदान में लोकपाल की नियुक्ति तथा अन्य मांगों को लेकर आंदोलन किया था.

  • अगस्त से 100 सेवाएं जनता के दरवाजे तक पहुंचाएगी केजरीवाल सरकार

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    नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी सरकार की महत्वाकांक्षी डोर स्टेप सर्विसेज (सरकार आपके द्वार) योजना अगले दो महीने में शुरू हो जाएगी। करीब 100 तरह की सुविधाओं की होम डिलिवरी अगस्त आखिर से शुरू होगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई दिल्ली कैबिनेट की मीटिंग में इसके लिए ठेका देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

    डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया ने कैबिनेट के फैसले के बारे में बताया कि चयनित कंपनी को तीन साल का ठेका दिया जाएगा। पिछले साल नवंबर में कैबिनेट ने डोर स्टेप योजना को मंजूरी देते हुए 40 तरह की सुविधाओं को शामिल किया था। अब इसमें 30 और सर्विसेज जोड़ी गई है और जल्द ही 30 और सेवाएं जोड़ी जाएंगी। अब लोगों को किसी भी प्रकार के सर्टिफिकेट के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने नहीं पड़ेंगे। सरकार आपके घर पहुंच कर आपका राशन कार्ड बनाएगी। राशन कार्ड ही नहीं, बल्कि करीब 100 तरह की बाकी सभी प्रकार की सुविधाओं की भी होम डिलीवरी होगी।

    पिछले साल दिल्ली सरकार ने डोर स्टेप डिलिवरी ऑफ सर्विसेज की स्कीम बनाई थी और इस स्कीम को मंजूरी के लिए एलजी के पास भेजा गया था। शुरुआत में एलजी ने स्कीम को लेकर कुछ आपत्ति जताई थी, लेकिन बाद में एलजी ने स्कीम को ग्रीन सिग्नल दे दिया था। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि मंगलवार को कैबिनेट ने स्कीम के लिए टेंडर अवॉर्ड करने का फैसला किया और इससे जुड़ी फाइल को एलजी के पास भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी को भी तैयारी के लिए कुछ समय चाहिए और अगस्त के आखिर तक यह स्कीम लागू हो जाएगी और दिल्ली की जनता अब घर बैठे सभी जरूरी सर्टिफिकेट बनवा सकेगी।

    दिल्ली सरकार ने हर महीने इस सिस्टम से 30 से 35 नई सुविधाओं को जोड़ने का फैसला भी किया था और इस हिसाब से अब तक 100 सर्विसेज की लिस्ट फाइनल की गई है। इस स्कीम में लोग अपने हिसाब सर्टिफिकेट बनवाने के लिए फोन कर सकेंगे। पेंशन के पेपर हो या राशन कार्ड, बच्चे का जन्म हो या किसी की मृत्यु, किसी प्रकार के प्रमाण पत्र के लिए ऑफिसों के चक्कर नहीं काटने होंगे। एक कॉल सेंटर होगा, जहां पर लोग कॉल करके यह बताएंगे कि उन्हें कौन सा प्रमाण पत्र बनवाना है।

  • आधार हुआ बेकार, अब वर्चुअल आईडी रहेगा मान्य

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    नई दिल्ली, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI ) के वर्चुअल आईडी सिस्टम की शुरुआत आज से हो जाएगी। अब केवाईसी पूरा करने के लिए आधार नंबर की जगह 16 डिजिट की वर्चुअल आईडी का इस्तेमाल कर सकेंगे। टेलीकॉम कंपनियों और दूसरे सर्विस प्रोवाइडर के पास केवाईसी के लिए आप इस आईडी का इस्तेमाल कर पाएंगे। दरअसल, यूजर की प्राइवेसी को देखते हुए इस आईडी की शुरुआत की गई है। 31 अगस्त के बाद बैंकों और दूसरे सर्विस प्रोवाइडर भी इस वर्चुअल आईडी पर शिफ्ट हो जाएंगे।

    वर्चुअल आईडी का सबसे बड़ा फायदा है कि इससे यूजर की ज्यादा जानकारी शेयर नहीं होंगी। वर्चुअल आईडी शेयर करने पर सर्विस प्रोवाइडर को आधार नंबर की जगह एक यूआईडी टोकन मिलेगा। आधार नंबर के ऑथेंटिकेशन के वक्त अब आप केवल VID दे सकते हैं। आपको आधार नंबर को शेयर करने की जरूरत नहीं होगी। इस तरह आधार ऑथेंटिकेशन पहले से ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी। इसके साथ ही यूआईडीएआई ने सर्विस प्रोवाइडर को कम से कम जानकारी शेयर करने का भी आदेश दिया है।

    कहां से जनरेट कर सकते हैं VID:- आधार वर्चुअल आईडी को UIDAI के पोर्टल से जनरेट किया जा सकता है। यह एक डिजिटल आईडी होगी। आधार होल्डर इसे कई बार जनरेट कर सकता है। मौजूदा समय में VID सिर्फ एक दिन के लिए ही वैलिड होती है। इसका मतलब हुआ कि एक दिन बाद आधार होल्डर इस वर्चुअल आधार आईडी को फिर से जनरेट कर सकता है। इसे सिर्फ UIDAI की वेबसाइट से ही जेनरेट किया जा सकता है।
    ऐसे जनरेट करें अपनी VID :- VID जनरेट करने के लिए UIDAI के होमपेज पर जाएं।

    अब अपना आधार नंबर डालें। इसके बाद सिक्योरिटी कोड डालें और SEND OTP पर क्लिक कर दें। जिस मोबाइल नंबर से आपका आधार रजिस्टर्ड होगा, वहीं आपको OTP भेजी जाएगी। OTP डालने के बाद आपको नई VID जेनरेट करने का ऑप्शन मिल जाएगा। जब यह जनरेट हो जाएगी तो आपके मोबाइल पर आपकी वर्चुअल आईडी भेज दी जाएगी। यानी 16 अंकों का नंबर आ जाएगा।

    क्या है वर्चुअल आईडी- वर्चुअल आईडी एक तरह का टेंपररी आधार नंबर है। यह 16 अंकों का होगा। इसे आधार का क्लोन कह सकते हैं। इसमें कुछ ही डिटेल होंगी। यूआईडीएआई यूजर्स को हर आधार का एक वर्चुअल आईडी तैयार करने का मौका देगी। किसी को कहीं आधार की डिटेल देनी है तो वो 12 अंकों के आधार नंबर की जगह 16 अंकों का वर्चुअल आईडी दे सकता है। क्या फायदा होगा:- यह आपको सत्यापन के समय आधार नंबर को साझा नहीं करने का विकल्प देगी। वर्चुअल आईडी से नाम, पता और फोटोग्राफ जैसी कई चीजों का ऑथेंटिफिकेशन हो सकेगा। नई वर्चुअल आईडी जनरेट करते ही पुरानी आईडी अपने आप कैंसिल हो जाएगी।

  • चुनावी तैयारी में लघु और मध्यम अखबारों पर मोदी सरकार का मलहम ?

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    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लघु और मध्यम अखबारों को सहूलियत देते हुए एक नई दिशा निर्देश जारी किया है। जिसके अंगर्तगत दैनिक और साप्ताहिक अखबार को प्रकाशित करने वाले प्रकाशक डीएवीपी में संबंद्ध होने के लिए नया आवेदन दे सकते हैं। इसमें नए आवेदन देने के लिए समय सीमा 1 जुलाई 2018 से 31 जुलाई 2018 निर्धारित की गयी है।

    इसमें नयी बात यह है कि नये आवेदन की पहली की तिथि जहां एक अगस्त होती थी सरकार ने उसे एक जुलाई कर दी है। इस नयी दिशा निर्देश से लघु और मध्यम समाचार मालिकों/प्रकाशकों को बड़ी सहूलियत मिलने की उम्मीद है। सवाल उठता है कि मोदी सरकार पिछले लगभग चार साल से जहां लघु और मध्यम समाचार प्रकाशकों की कमर तोड़ रखी थी उन पर अचानक इतनी बड़ी रहम क्यों कर रही है?

    जानकार मानते हैं कि इस सबके पीछे 2019 का चुनाव है जो महज कुछ महीने ही बचा हुआ है। मोदी राज में पिछले चार साल से लघु और मध्यम अखबारों को सरकारी मिलने वाले विज्ञापनों पर लगभग एक तरह से पाबंदी लग चुकी थी। इसके लिए सरकार तमाम अपने तर्क दे रही थी। लेकिन इन अखबारों के प्रकाशकों ने इसे मोदी सरकार की दमन वाली नीति करार दी थी।

    अब चूंकि 2019 का लोकसभा का चुनाव सर पर है और सरकार लगभग चुनावी मोड पर आ चुकी है। जून बीत चुका है। 2018 का महज सिर्फ छह महीने बचे हैं। उम्मीद है कि फरवरी में चुनाव आचार संघिता लागू हो जाएगा। यानि सरकार पास अब समय नहीं बचा है

  • फड़णवीस पर 1767 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले का आरोप

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    मुंबई : मुंबई कांग्रेस ने सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस पर एक सनसनीखेज आरोप लगाया। विपक्षी पार्टी ने कहा कि फड़णवीस ने नवी मुंबई में एक प्रमुख भूखंड एक बिल्डर को औने-पौने दाम में दे दिया। मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरूपम और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मीडिया को बताया कि फड़णवीस सरकार ने लगभग 1,767 करोड़ रुपये कीमत की 24 एकड़ जमीन पैराडाइज बिल्डर्स को मात्र 3.60 करोड़ रुपये में दे दिया है। दोनों नेताओं ने कहा कि यह भूखंड शहर एवं औद्योगिक विकास निगम (सिडको) का है। उन्होंने कहा कि यह जमीन कथित रूप से कोयना बांध परियोजना से प्रभावित लोगों और किसानों के पुनर्वास के लिए थी। इसे एक ‘महाघोटाला’ करार देते हुए निरूपम और सुरजेवाला ने बंबई उच्च न्यायालय के दो मौजूदा न्यायाधीशों से इसकी जांच कराने की मांग की।

    निरूपम ने कहा, ‘‘सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाना और पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए गरीबों के साथ धोखा करना भाजपा का आंतरिक चरित्र है। केंद्र की सूट-बूट वाली सरकार और भाजपा शासित राज्यों की सरकारों में अपने मु_ीभर पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाने की होड़ मची हुई है।’’निरूपम ने अपने आरोपों को स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में पैराडाइज बिल्डर्स ने नवी मुंबई में निर्माणाधीन अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से लगी जमीन मांगी थी और अधिकारियों ने कथित तौर पर कोयना बांध परियोजना में विस्थापित हुए कुछ भोले-भाले किसानों की पहचान की, ताकि उन्हें सिडको की भूमि आवंटित कर बाद में उसे बिल्डर को स्थानांतरित कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष फरवरी में रायगढ़ के कलेक्टर ने रंजपपाड़ा गांव में 24 एकड़ जमीन आठ विस्थापित किसान परिवारों को आवंटित कर दिया, जबकि पैराडाइज बिल्डर ने इस भूमि को 15 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से स्थानांतरित करने का एक करार किसानों के साथ पहले ही कर लिया था।

    निरूपम ने कहा, ‘‘सिडको और फड़णवीस के नेतृत्व वाले शहरी विकास विभाग (यूडीडी) ने भूमि को डीनोटीफाई करने की मंजूरी दे दी, ताकि इसे बिल्डर को स्थानांतरित किया जा सके।’’ उन्होंने कहा कि सभी अन्य औपचारिकताएं तेजी से पूरी की गईं और बिल्डर को पिछले महीने भूमि का कब्जा दे दिया गया, मात्र 15 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से, जबकि सिडको ने इससे सटी जमीन 184,000 रुपये प्रति वर्गमीटर की ऊंची दर से बेची थी। कांग्रेस ने यह भी सवाल किया कि वे आठ किसान कौन थे, और उनकी पहचान क्यों की गई, उन्हें खेती की जमीन आवंटित करने के बदले कैसे सिडको की कीमती जमीन आवंटित की गई, बिल्डर ने कैसे किसानों के साथ जमीन बिक्री का करार कर लिया, जिसे किसानों आवंटन के तत्काल बाद मामूली कीमत में बेच दिया।

    नेताओं ने सवाल किया है कि आखिर सिडको-यूडीडी और पैराडाइज बिल्डर्स के बीच क्या रिश्ता है, और उन्हें लगभग 1,767 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन मात्र 3.6 करोड़ रुपये में प्राप्त करने वाले इस सौदे के लिए फड़णवीस का आशीर्वाद क्यों प्राप्त है। उन्होंने इस सौदे में संबंधित सरकारी विभागों की तरफ से की गई कथित अनियमितता का आरोप लगाया है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य इकाई के प्रवक्ता माधव भंडारी ने सभी आरोपों तत्काल खारिज कर दिया और इसे झूठा व निराधार बताया। जबकि फड़णवीस के करीबी विश्वासपात्र और विधायक प्रसाद लाड ने कांग्रेस के खिलाफ 500 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर करने की धमकी दी।

  • स्विस बैंक का खुलासा : भारतीयों का जमा काला धन 7,000 करोड़ हुआ

    भारतीयों का स्विस बैंकों में जमा धन चार साल में पहली बार बढ़कर पिछले साल एक अरब स्विस फैंक (7,000 करोड़ रुपए) के दायरे में पहुंच गया जो एक साल पहले की तुलना में 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

    स्विट्जर लैंड के केंद्रीय बैंक के ताजा आंकड़ों में यह बात सामने आयी है। इसके अनुसार भारतीयों द्वारा स्विस बैंक खातों में रखा गया धन 2017 में 50फीसदी से अधिक बढ़कर 7000 करोड़ रुपए (1.01 अरब फ्रेंक) हो गया।

    इससे पहले तीन साल यहां के बैंकों में भारतीयों के जमा धन में लगातार गिरावट आई थी। अपनी बैंकिंग गोपनीयता के लिए पहचान बनाने वाले इस देश में भारतीयों के जमाधन में ऐसे समय दिखी बढ़ोतरी हैरान करने वाली है जबकि भारत सरकार विदेशों में कालाधन रखने वालों के खिलाफ अभियान चलाए हुए है।

    स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) के सालाना आंकड़ों के अनुसार स्विस बैंक खातों में जमा भारतीय धन 2016 में 45 प्रतिशत घटकर 67.6 करोड़ फ्रेंक (लगभग 4500 करोड़ रुपए) रह गया। यह राशि 1987 से इस आंकड़े के प्रकाशन की शुरुआत के बाद से सबसे कम थी।

    एसएनबी के आंकड़ों के अनुसार भारतीयों द्वारा स्विस बैंक खातों में सीधे तौर पर रखा गया धन 2017 में लगभग 6891 करोड़ रुपए (99.9 करोड़ फ्रेंक) हो गया। वहीं प्रतिनिधियों या धन प्रबंधकों के जरिए रखा गया धन इस दौरान 112 करोड़ रुपये (1.62 करोड़ फ्रेंक) रहा।

    ताजा आंकड़ों के अनुसार स्विस बैंक खातों में जमा भारतीयों के धन में ग्राहक जमाओं के रूप में 3200 करोड़ रुपये , अन्य बैंको के जरिए 1050 करोड़ रुपये शामिल है।

    इन सभी मदों में भारतीयों के धन में आलोच्य साल में बढ़ोतरी हुई। स्विस बैंक खातों में रखे भारतीयों के धन में 2011 में इसमें 12फीसदी, 2013 में 43फीसदी, 2017 में इसमें 50.2फीसदी की वृद्धि हुई। इससे पहले 2004 में यह धन 56फीसदी बढ़ा था।एसएनबी के ये आंकड़े ऐसे समय में जारी किए गए हैं जबकि कुछ महीने पहले ही भारत व स्विटजरलैंड के बीच सूचनाओं के स्वत: आदान प्रदान की एक नयी व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य काले धन की समस्या से निजात पाना है।

    स्विटजरलैंड के बैंकों का मुनाफा 2017 में 25फीसदी बढ़कर 9.8 अरब फ्रेंक हो गया। हालांकि इस दौरान इन बैंकों के विदेशी ग्राहकों की जमाओं में गिरावट आई। इससे पहले 2016 में यह मुनाफा घटकर लगभग आधा 7.9 अरब फ्रेंक रह गया था।