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  • अगले 24 घंटे में ठप हो सकती है दिल्ली की ‘लाइफ लाइन’ कही जाने वाली ‘मेट्रो सेवा’

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    नई दिल्ली। इससे पहले जुलाई, 2017 में भी ऐसी परिस्थिति आ गई थी, जब उसके नॉन-एग्जिक्यूटिव स्टाफ ने इसी तरह की मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने की घोषणा की थी। हालांकि, आखिरी समय पर डीएमआरसी प्रबंधन और स्टाफ काउंसिल की बैठकों के बाद मसला टल गया था।

     मुंबई की तरह दिल्ली की ‘लाइफ लाइन’ कही जाने वाली मेट्रो सेवा अगले 24 घंटे में ठप हो सकती है। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि दिल्ली मेट्रो के 9000 नॉन-एग्जिक्यूटिव कर्मचारियों ने 29 जून यानी शुक्रवार से ही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का एलान किया है। अगर कर्मचारियों की भूख हड़ताल हुई तो दिल्ली मेट्रो की सेवाएं ठप होने का खतरा मंडरा गया है। लाखों यात्रियों को इससे भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इससे न केवल मेट्रो की परेशानी बढ़ेगी, बल्कि बसों के साथ सड़क पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

    बता दें कि दिल्ली मेट्रो के जरिये करीब 25 लाख लोग रोजाना यात्रा करते हैं। इन यात्रियों में केवल दिल्ली के ही नहीं, बल्कि हरियाणा (गुरुग्राम, फरीदाबाद व बहादुरगढ़) और यूपी (नोएडा व गाजियाबाद) के मेट्रो यात्री भी शामिल हैं। वहीं, हड़ताल पर जाने के मुद्दे पर दिल्ली मेट्रो के प्रवक्ता का कहना है कि कर्मचारियों की कुछ एचआर संबंधी समस्याएं हैं। हमें उम्मीद हैं कि इन्हें जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।

    तकरीबन एक साल बाद फिर ऐसी ही स्थिति आती दिखाई दे रही है। अब मांगों के लेकर कर्मचारियों ने 29 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और 30 जून से अनिश्चितकालीन सेवा हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है। हड़ताल करने वालों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी भी घटना और यात्रियों की असुविधा के लिए दिल्ली मेट्रो प्रबंधन जिम्मेदार होगा।

    यहां पर याद दिला दें कि डीएमआरसी के कर्मचारी पिछले कई दिनों से लगातार अलग-अलग मेट्रो स्टेशनों पर हाथ पर काली पट्टी बांधकर धरना दे रहे हैं। इनमें ट्रेन ऑपरेटर्स, स्टेशन कंट्रोलर, तकनीशियन, ऑपरेशन स्टाफ व अन्य स्टाफ शामिल है।

    बताया जा रहा है कि 10 सूत्री मांगों के ज्ञापन में मेट्रो कर्मचारियों ने मेट्रो मैनेजमेंट पर पिछले साल हुए समझौते को लेकर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है, साथ ही मैनेजमेंट की तरफ से गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के साथ वेतन में भेदभाव और शोषण की बात कही गई है।

    अगर हड़ताल हुई तो दिल्ली सरकार भी परेशानी में आ सकती है, क्योंकि मेट्रो ट्रेनों के नहीं चलने से ज्यादा से ज्यादा यात्री सार्वजनिक वाहन यानी बसों की तरफ भागेंगे। ऐसे में दिल्ली परिवहन निगम (DTC) नाकाम ही साबित होगा, क्योंकि उसके पास बसों की काफी कमी है।

  • मौसम विभाग की कल प्रदेश में बारिश-ओलावृष्टि की चेतावनी

    देहरादून : उत्तराखंड में दो दिन के भीतर मौसम फिर करवट ले सकता है। कहीं हल्की बारिश तो कहीं बादल छाए रह सकते हैं। साथ ही मौसम विभाग ने 25 जून को कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। अगले 24 घंटे में देहरादून एवं आसपास के क्षेत्रों में आसमान साफ रहने से लेकर आंशिक रूप से बादल छाये रहेंगे। रविवार को अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान क्रमश: 37 व 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। शनिवार की बात करें तो शहर में दोपहर तक चटक धूप खिली रही।

    दोपहर बाद कुछ इलाकों में हल्के बादल छाये रहे, लेकिन कहीं भी बारिश नहीं हुई। शाम तक बादलों के बीच सूरज की लुका-छुपी चलती रही। मौसम के इस मिजाज से लोग दिनभर उमस भरी गर्मी से परेशान रहे। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि अगले कुछ दिनों तक मौसम परिवर्तनशील रहेगा। पर्वतीय इलाकों में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। अधिकांश क्षेत्रों में आंशिक बादल छाए रहेंगे। बताया कि 25 जून को कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी संभावना है। साथ ही मैदानी इलाकों में झक्कड़ के साथ बारिश हो सकती है। शनिवार को दून का अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री अधिक 36.9 व न्यूनतम तापमान 23.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं मानसून पहुंचने में हो रही देरी के कारण फिलहाल जून के अंतिम सप्ताह में अधिकांशत: मौसम शुष्क रहेगा और चटख धूप खिलने से गर्मी में इजाफा होगा।

  • नई दुष्कर्म जांच किट से अब नहीं बच पायेंगे दुष्कर्मी, हर थाने पर होगी उपलब्ध

    नई दिल्ली । विशेष रूप से डिजाइन की गई दुष्कर्म जांच किट जल्‍द ही सभी थानों में सुलभ होगी। ये किट यौन हमले और दुष्कर्म के मामलों में तुरंत मेडिकल जांच और साक्ष्य उपलब्ध कराने में मददगार होगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि देश के सभी पुलिस स्टेशनों में यह सुलभ कराई जाएगी।

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    महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक किट में टेस्ट ट्यूब और बोतलों के सेट हैं और उनकी कीमत 200 से 300 रुपये है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकारें इनकी खरीद बाद में स्वतंत्र रूप से भी कर सकती हैं। इन किट की पहली खेप पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआर एंड डी) ने पहले ही हासिल कर ली है और अधिकारियों को फोरेंसिक ट्रेनिंग प्रदान करना भी शुरू कर दिया गया है।

    ‘लीगल प्रोसेस फॉर पुलिस इन रिस्पेक्ट ऑफ क्राइम अगेंस्ट चिल्ड्रन’ पर हैंडबुक लांच के मौके पर मेनका गांधी ने कहा कि उनके मंत्रालय ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि पांच नई फोरेंसिक लेबोरेटरीज का निर्माण किया जा रहा है जिससे फोरेंसिक विशेषज्ञों की संख्या मौजूदा 1,500 से बढ़कर 20,000 हो जाएगी।

  • एनबीसीसी ने उच्च न्यायालय से कहा, चार जुलाई तक दक्षिणी दिल्ली में नहीं काटे जाएंगे पेड़

    नयी दिल्ली : नेशनल बिल्डिंग्‍स कन्‍स्‍ट्रक्‍शन कॉर्पोरेशन (इंडिया) लिमिटेड ने आज दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि दक्षिण दिल्ली में कालोनियों के विकास के क्रम में वह चार जुलाई तक किसी पेड़ की कटाई नहीं करेगा।

    न्यायमूर्ति विनोद गोयल और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की अवकाशकालीन पीठ ने जब कहा कि वह पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगा देंगी तो नेशनल बिल्डिंग्‍स कन्‍स्‍ट्रक्‍शन कॉर्पोरेशन (इंडिया) लिमिटेड (एनबीसीसी) ने चार जुलाई तक पेड़ नहीं काटने का उसे आश्वासन दिया।

    उच्च न्यायालय ने दक्षिण दिल्ली की छह कालोनियों के पुन : विकास के क्रम में एनबीसीसी और सीपीडब्ल्यूडी द्वारा पेड़ों की कटाई के लिये केन्द्र से मिली मंजूरी को स्थगित रखने से 22 जून को इनकार कर दिया था।

    हड्डियों के एक सर्जन डा कौशल मिश्र ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका में कहा था कि इस क्रम में 16,500 से ज्यादा पेड़ों को काटना पड़ेगा।

    याचिका में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा परियोजना के लिये दी गयी पर्यावरण मंजूरी और कार्य शर्तो को निरस्त करने का अनुरोध किया गया है।

    याचिका में कहा गया है , जिन कालोनियों में पेड़ों की कटाई होगी वे हैं … सरोजनी नगर , नौरोजी नगर , नेताजी नगर , त्यागराज नगर , मोहम्मदपुर और कस्तुरबा नगर।

  • आज PM मोदी 55 हजार लोगों के साथ करेंगे योगासन, पूरी दुनिया लेगी स्वस्थ्य रहने का संकल्प,

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    नई दिल्ली: पूरी दुनिया में ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ 21 जून को मनाया जाएगा। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देहरादून में योग कार्यक्रम में करीब 55 हजार लोगों के साथ बैठकर आसन करेंगे। यह योग सुबह 7:00 बजे से 7:45 तक फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट (एफआरआई) के प्रांगण में किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा मंच पर चार लोग मौजूद रहेंगे जिनमें राज्यपाल डॉक्टर के.के पॉल, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत, केंद्रीय आयुष मंत्री और उत्तराखंड के आयुष मंत्री हरक सिंह रावत शामिल हैं। इस दिन भारत सहित दुनिया के अलग-अलग देशों में लोग योग करते हैं।

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    वहीं बीजेपी के एक पदाधिकारी ने बताया कि केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, सुरेश प्रभु, उमा भारती, रामविलास पासवान, रविशंकर प्रसाद क्रमश लखनऊ, नागपुर, चेन्नई, रुद्रप्रयाग, हाजीपुर और पटना में योग कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा, बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ जैसे केंद्रीय शसस्त्र पुलिसबल की महिलाकर्मियों सहित करीब 50 हजार लोग ब्रहम कुमारी द्वारा लालकिले में आयोजित योग समारेाह में हिस्सा लेंगे।

    गौरतलब है कि पहली बार योग दिवस 2015 में मनाया गया था। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को 11 दिसम्बर 2014 को मंजूरी मिली थी। संयुक्त राष्ट्र में 177 सदस्यों ने 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। हालांकि, कई लोग योग दिवस की तैयारी पहले से शुरू कर देते हैं। दुनियाभर में लोगों ने चौथा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे उत्साह और जोश के साथ मनाना शुरू कर दिया है।

  • पुलिस ने पूछे 80 से ज्यादा सवाल, फूट-फूटकर रोने लगा दुष्कर्मी दाती महाराज

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    नई दिल्ली. रेप के आरोप में फंसे जाने-माने ज्योतिषाचार्य और धर्मगुरु दाती महाराज दूसरी बार पूछताछ में शामिल होने के लिए दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ऑफिस पहुंचे. क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट CP आलोक कुमार ने खुद इस बार दाती महाराज से पूछताछ की. पूछताछ के दौरान दाती महाराज खुद को बेगुनाह बताकर फूट-फूटकर रोने लगे. पुलिस ने 80 से ज्यादा सवाल पूछे. क्राइम ब्रांच के सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को इस मामले में अहम सबूत मिले हैं और अब क्राइम ब्रांच दाती महाराज का पोटेंसी टेस्ट करवा सकती है.

    दाती महाराज शुक्रवार की सुबह 10 बजे के करीब क्राइम ब्रांच ऑफिस पहुंचे थे. पुलिस के मुताबिक इस मामले में दाती महाराज से जुड़े तीन अहम किरदारों सचिन जैन अभिषेक अग्रवाल और नवीन गुप्ता से भी पूछताछ की जा सकती है.

    पुलिस का कहना है कि अब तक जांच में ऐसे सबूत नहीं मिले हैं, जिसके चलते दाती महाराज को गिरफ्तार करना पड़े. हालांकि क्राइम ब्रांच ने दाती महाराज को को क्लीन चिट भी नहीं दी है. पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में पीड़िता ने अपनी शिकायत में जिन दो महिलाओं के नाम बताये थे उन्हें भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा.

    सूत्रों के मुताबिक दाती ने अपनी बेगुनाही के कुछ अहम सबूत क्राइम ब्रांच को सौंपे हैं, जिनकी क्राइम ब्रांच बारीकी से जांच कर रहा है. वहीं केस से जुड़े तमाम लोगों के मोबाइल कॉल डीटेल्स भी खंगाले जा रहे हैं.

  • अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : पीएम मोदी देंगे देश-दुनिया को योग के प्रति जागरूकता का संदेश

    देहरादून. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर 21 जून को देहरादून में होने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम में योग से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश-दुनिया को योग का संदेश देंगे. इसके बाद करीब 45 मिनट तक वह योगसाधकों के साथ विभिन्न योगासनों का अभ्यास करेंगे. कार्यक्रम के लिए करीब 55 हजार पंजीकरण अब तक हो चुके हैं.

    योग दिवस इस मर्तबा देवभूमि के लिए ऐतिहासिक होने जा रहा है. देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआइ) के मैदान में आयुष विभाग के तत्वावधान में होने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शिरकत करेंगे. कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रदेश की त्रिवेंद्र रावत सरकार के साथ ही पूरा प्रशासनिक अमला इन दिनों जुटा हुआ है. सरकार, शासन के अलावा भाजपा के स्तर से योग के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से कार्यक्रमों की श्रृंखला चल रही है.

    इस बीच प्रधानमंत्री मोदी का प्रारंभिक कार्यक्रम भी शासन को मिल गया है. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी 20 जून की रात देहरादून पहुंचेंगे और रात्रि विश्राम राजभवन में करेंगे. 21 जून को सुबह साढ़े छह बजे से प्रारंभ होने वाले योग दिवस के इस आयोजन से पहले एफआरआइ मैदान में प्रधानमंत्री का संबोधन होगा.

    मंच पर उनके साथ राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पाल, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक, राज्य के आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के बैठने की व्यवस्था संभावित है. संबोधन के उपरांत प्रधानमंत्री करीब पौन घंटे तक चलने वाले योगाभ्यास में भाग लेकर विभिन्न योगासन करेंगे. कार्यक्रम में भाग लेने के बाद प्रधानमंत्री दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे.

  • कैबिनेट की सलाह से काम करें LG , दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मुमकिन नहीं

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    नई दिल्‍ली । सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर स्थिति साफ कर दी है कि यह संभव नहीं है। लेकिन अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने उपराज्यपाल को भी उनके अधिकारों से अवगत कराया। कोर्ट ने कहा कि उपराज्यपाल को चुनी हुई सरकार के साथ मिलकर काम करना होगा। यही नहीं शीर्ष अदालत ने कहा कि असली शक्ति जनता की चुनी ही सरकार के पास है और जनता के प्रति जवाबदेही भी उनकी ही है।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) दीपक मिश्रा ने अपनी टिप्पणी में कहा कि उपराज्यपाल को दिल्ली सरकार के साथ मिलकर जनता के हित में काम करना चाहिए। पुलिस, भूमि और पब्लिक ऑर्डर के अलावा दिल्ली विधानसभा कोई भी कानून बना सकती है।

    वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सख्त टिप्पणी ने कहा है कि दिल्ली में किसी तरह की अराजकता की कोई जगह नहीं है और सरकार और उपराज्यपाल को साथ मिलकर काम करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच भी रिश्ते बेहद सौहार्दपूर्ण होने चाहिए।

    वहीं, संविधान पीठ के अन्य जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि राष्ट्र तब फेल हो जाता है, जब देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं बंद हो जाती हैं। हमारे समाज में अलग विचारों के साथ चलना जरूरी है। मतभेदों के बीच भी राजनेताओं और अधिकारियों को मिलजुल कर काम करना चाहिए।

    चंद्रचूड ने कहा कि असली शक्ति और जिम्मेदारी चुनी हुई सरकार की ही बनती है। उपराज्यपाल मंत्रिमंडल के फैसलों को लटका कर नहीं रख सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा है कि एलजी का काम राष्ट्रहित का ध्यान रखना है, उन्हें इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि चुनी हुई सरकार के पास लोगों की सहमति है।

    पांच जजों की संविधान पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं।

    पीठ ने साफतौर पर कहा कि दिल्ली की स्थिति अलग है, ऐसे में पूर्ण राज्य का दर्जा मुमकिन नहीं है। उपराज्यपाल वहीं पर स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकते हैं, जहां उन्हें संविधान ये अधिकार देता है, यह भी कहा कि एलजी दिल्ली सरकार के फैसले को नहीं अटका सकते। उपराज्यपाल हर फैसला राष्ट्रपति के पास नहीं भेज सकते हैं। साथ ही फैसले में यह भी जोड़ा है कि पहले नौ न्यायाधीशों के फैसले को देखते हुए दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं हो सकता है।

    वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फैसले पर कहा कि यह दिल्ली के साथ लोकतंत्र की भी बड़ी जीत है। इस बाबत उन्होंने ट्वीट भी किया है।

    वहीं, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बाकायदा पत्रकार वार्ता कहा कि अब दिल्ली में एलजी की मनमानी नहीं चलेगी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला दिल्ली सरकार के पक्ष में है।

    दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने उपराज्यपाल को दिल्ली का प्रशासनिक मुखिया घोषित करने के हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अपीलीय याचिका में दिल्ली की चुनी हुई सरकार और उपराज्यपाल के अधिकार स्पष्ट करने का आग्रह किया गया था।

    सुरक्षित रख लिया था फैसला
    मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एके सीकरी, न्यायमूर्ति एमएम खानविल्कर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से पेश दिग्गज वकीलों की चार सप्ताह तक दलीलें सुनने के बाद गत छह दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम, पी. चिदंबरम, राजीव धवन, इंदिरा जयसिंह और शेखर नाफड़े ने बहस की थी जबकि केन्द्र सरकार का पक्ष एडीशनल सालिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने रखा था।

    उपराज्यपाल चुनी हुई सरकार को काम नहीं करने देते
    दिल्ली सरकार की दलील थी कि संविधान के तहत दिल्ली में चुनी हुई सरकार है और चुनी हुई सरकार की मंत्रिमंडल को न सिर्फ कानून बनाने बल्कि कार्यकारी आदेश के जरिये उन्हें लागू करने का भी अधिकार है। दिल्ली सरकार का आरोप था कि उपराज्यपाल चुनी हुई सरकार को कोई काम नहीं करने देते और हर एक फाइल व सरकार के प्रत्येक निर्णय को रोक लेते हैं।

    दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है
    हालांकि दूसरी ओर केंद्र सरकार की दलील थी कि भले ही दिल्ली में चुनी हुई सरकार हो लेकिन दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है। दिल्ली विशेष अधिकारों के साथ केंद्र शासित प्रदेश है। दिल्ली के बारे में फैसले लेने और कार्यकारी आदेश जारी करने का अधिकार केंद्र सरकार को है। दिल्ली सरकार किसी तरह के विशेष कार्यकारी अधिकार का दावा नहीं कर सकती।

    मामूली बातों पर मतभेद नहीं होना चाहिए
    दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी भी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उपराज्यपाल और चुनी हुई सरकार के बीच आत्मीय संबंध होने चाहिए। खासतौर पर जब केंद्र और दिल्ली में अलग-अलग पार्टी की सरकार हो। उपराज्यपाल और सीएम के बीच प्रशासन को लेकर सौहार्द्र होना चाहिए।आपसी राय में मतभेद मामूली बातों पर नहीं होना चाहिए।

    एलजी के अधिकार राज्य सरकार से ज्यादा
    बता दें कि उपराज्यपाल को दिल्ली का प्रशासनिक प्रमुख बताने वाले, दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली दिल्ली सरकार की विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर चुकी है। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ स्पष्ट कर चुकी है कि केजरीवाल सरकार को स‌ंविधान के दायरे में रहना होगा, पहली नजर में एलजी के अधिकार राज्य सरकार से ज्यादा हैं।

  • सरकार आज मनाएगी जीएसटी दिवस, जेटली बोले- कमाई में 12 लाख हजार करोड़ का उछाल

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    देश में वस्तु व सेवाकर (जीएसटी) लागू होने की पहली वर्षगांठ पर को आज जीएसटी दिवस मनाया जाएगा। जीएसटी के एक साल ने भारतीय कराधान क्षेत्र में अप्रत्याशित सुधारों के प्रति करदाताओं के उत्साह और भागीदारी का पूरी दुनिया में बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।
    वित्त मंत्रालय ने कहा कि सरकार 1 जुलाई, 2018 को जीएसटी दिवस मनाएगी। केंद्रीय रेल, कोयला, वित्त व कारपोरेट मंत्री पीयूष गोयल कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला भी मौजूद रहेंगे। संसद के केंद्रीय कक्ष में 30 जून और 1 जुलाई, 2017 की मध्यरात्रि को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की उपस्थिति में इस नई कर व्यवस्था को लागू किया गया था।

    एक दर्जन करों को किया समाहित
    जीएसटी में करीब एक दर्जन करों को समाहित किया गया है। केंद्रीय स्तर पर लगने वाले उत्पाद शुल्क, राज्यों में लगने वाले मूल्य वर्धित कर (वैट) और कई स्थानीय शुल्कों को जीएसटी में समाहित किया गया। इसके बाद देश में एक राष्ट्र, एक कर की नई प्रणाली लागू हुई।

    ई वे-बिल है अहम बदलाव
    मंत्रालय ने कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक वे-बिल जीएसटी के तहत पहले के विभागीय नीतिगत मॉडल से आगे बढ़कर एक स्वघोषित मॉडल की दिशा में अहम बदलाव है। ई-वे बिल हासिल कर पूरे देश में माल की बिना किसी रोकटोक के आवाजाही सुनिश्चित हो सकती है। देश में अंतरराज्यीय ई-वे बिल व्यवस्था 1 अप्रैल, 2018 से लागू हुई है, जबकि राज्यों में माल परिवहन के लिये ई-वे बिल व्यवस्था 15 अप्रैल से चरणों में लागू की गई।

    केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी प्रणाली के लागू होने के एक वर्ष पूरा होने की पूर्व संध्या पर फेसबुक पर एक पोस्ट में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान प्रत्यक्ष कर संग्रह में 44 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी होने का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि समाप्त वित्त वर्ष में जीएसटी का प्रत्यक्ष कर संग्रह पर असर नजर नहीं आया था।

    उनका कहना था कि जीएसटी वित्त वर्ष की शुरुआत से लागू नहीं हुआ था । इसलिए इसका पूरा असर नहीं दिखाई दिया लेकिन मौजूदा वित्त वर्ष में जीएसटी का करसंग्रह में असर साफ नजर आयेगा।

    जेटली के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तमाही में व्यक्तिगत आयकर में 44 प्रतिशत और कंपनी कर श्रेणी में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने लिखा है 2017..18 में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या 6.86 करोड़ पहुंच जाने की उम्मीद है। वर्ष के दौरान आयकर रिटर्न भरने वालों में 1.06 करोड़ नये थे। कुल आयकर 10.02 लाख करोड़ एकत्रित किया गया। चार वर्षों में आयकर प्राप्ति में 57 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

  • अब विधायकों और सांसदों के आपराधिक मामलों की सुनवाई स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में 15 जुलाई से

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    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधायकों और सांसदों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए इलाहाबाद में जल्द ही स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई जाएगी। बुधवार की शाम को प्रदेश के विधि विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। इस कोर्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हो रहा है, जिसके तहत हर राज्य में इस तरह की स्पेशल फास्ट ट्रैक अदालतें बनाई जानी हैं।

    विधि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विभाग ने इससे संबंधित जरूरी आदेश जारी कर दिए हैं। अब मामला हाई कोर्ट के पास है। उम्मीद है कि यह स्पेशल कोर्ट 15 जुलाई से शुरू हो जाएगी। उन्होंने बताया कि स्पेशल कोर्ट बनाए जाने का उद्देश्य यह है कि यहां विधायकों और सांसदों पर दर्ज मुकदमों की सुनवाई होगी। इन अदालतों में सुनवाई के बाद उनपर लगे मामलों का जो फैसला होगा, उसी आधार पर वे चुनाव लड़ सकेंगे।

    उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में विधायकों और सांसदों पर 2000 से ज्यादा मामले पेंडिंग हैं। अदालतों में इतने केस हैं कि जल्दी मामलों में सुनवाई नहीं हो पाती है। स्पेशल कोर्ट से मामलों में तेजी से सुनवाई हो सकेगी। स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में सिर्फ माननीयों पर लगे आपराधिक केस की सुनवाई होगी। अधिकारी ने बताया कि उम्मीद है कि 2019 लोकसभा से पहले माननीयों पर लगे सारे आपराधिक मामलों की पेंडेंसी खत्म कर ली जाएगी।

    सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया था कि राज्यों में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएं। इन अदालतों में सुनवाई करके 1 मार्च 2018 तक विधायकों और सांसदों पर लगे केस निपटाए जाएं। यह सिंगल कोर्ट होगी, जिसमें सात स्टाफ और एक जज होंगे। इसमें जज एडीजे रैंक के होंगे जो हायर जुडिशल सर्विस से होंगे।