नई दिल्ली. भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार में आंधी-तूफान एक बार फिर कहर बरपा रहा है। शाम को आए आंधी-तूफान के कारण इन राज्यों में 39 लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल भी हुए हैं। जिनका अस्पतालों में इलाज चल रहा है। आंधी-तूफान से बिहार में कुल 17 लोगों की मौत की खबर है। वहीं, झारखंड में 13 लोग काल के गाल में समा गए। यूपी में 9 लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए।
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मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में बाराबंकी, कुशीनगर, गोरखपुर और आजमगढ में दोबारा तूफान की चेतावनी जारी की है। राजधानी दिल्ली में भी मौसम विभाग ने आंधी का अलर्ट जारी किया है। झमाझम बारिश से उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में तापमान जरूर गिरा है लेकिन आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने से अलग-अलग हिस्सों में लोगों की जानें भी गई हैं। बिहार के कई हिस्सों में तेज हवाएं चलने से रास्ते में पेड़ गिर गए। बिहार में आंधी-पानी, बिजली और दीवार गिरने से जानमाल का भारी नुकसान हुआ है। यहां सबसे ज्यादा नुकसान औरंगाबाद में हुआ है जहां 5 लोग आंधी-पानी की चपेट में आ गए। इसके अलावा कटिहार, नवादा, मुंगेर और रोहतास में भी जानमाल के नुकसान की खबरें है। वहीं, झारखंड में 13 लोगों की मौत हो गई है और 25 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
आंधी-पानी की चपेट से यूपी भी नहीं बच पाया। प्रदेश में अब तक कुल 9 लोगों के मारे जाने की खबर है। यहां उन्नाव जिले में आकाशीय बिजली गिरने से 5 लोगों की मौत हो गई। जलभराव और बड़ी संख्या में पेड़ गिरने से यातायात भी प्रभावित हुआ। यूपी के उन्नाव में 5, रायबरेली में 2, कानपुर नगर में 2 लोगों की जान चली गई। इसके अलावा उन्नाव में 5 और रायबरेली में 2 लोगों के घायल होने की खबर है।
इन चार बच्चों में से एक टॉपर प्रखर मित्तल गुड़गांव के रहने रहने वाले हैं. बाकी तीन टॉपरों की तरह ही प्रखर ने भी परीक्षा में 500 में से 499 नंबर हासिल किए हैं.
अपनी कामयाबी पर खुशी ज़ाहिर करते हुए उन्होंने बीबीसी से कहा, “मुझे ये तो पता था कि नंबर अच्छे आएंगे, लेकिन 499 नंबरों की मैंने उम्मीद नहीं की थी.”
तो उनका एक नंबर कहा कट गया? इस पर प्रखर कहते हैं कि उनका एक नंबर फ्रेंच भाषा में कटा है.
बाकी अंग्रेज़ी, साइंस, एसएसटी और गणित में उन्हें पूरे 100 नबंर मिले हैं.
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कभी घंटों पढ़ाई नहीं की
प्रखर कहते हैं कि उन्होंने कभी ट्यूशन नहीं लिया. बल्कि खुद ही पढ़ाई की. वो सेल्फ स्टडी को अहम बताते हैं.
प्रखर कहते हैं, “अच्छे नंबर लाने के लिए घंटों पढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती है. फ़ोकस के साथ कम समय में पढ़कर भी एक्ज़ाम में अच्छा किया जा सकता है.”
प्रखर किताबी भाषा के बजाय प्रैक्टिकल नॉलेज पर ज़ोर देते हैं.
वो कहते हैं, “जो भी आप किताबों में पढ़ते हैं उसे असल ज़िंदगी में अप्लाई करेंगे तो बहुत आसानी से चीज़ें समझ में आती हैं और लंबे समय तक याद रहती हैं.”
बच्चे अक्सर पढ़ाई का लोड ले लेते हैं जिससे वो एक्ज़ाम के टाइम प्रेशर में आ जाते हैं.
लेकिन प्रखर के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ. वो बताते हैं कि उन्होंने हमेशा मज़े लेकर पढ़ाई की.
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रोबोट्स का शौक
प्रखर कहते हैं, “मैंने हमेशा अपने इंटरेस्ट के विषयों पर ज़्यादा ध्यान दिया. साइंस मुझे ज़्यादा पसंद है. इसमें रोबोटिक्स को मैंने हॉबी की तरह लिया.”
“अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर मैंने कार्डबोर्ड और थ्रीडी प्रिंटर की मदद से रोज़मर्रा के काम करने वाली कई मशीनें बनाई हैं.”
अगर आपको लगता है कि जो बच्चे टॉप करते हैं वो हर सब्जेक्ट में अच्छे होते हैं तो ऐसा बिल्कुल नहीं है. ऐसे कई टॉपिक्स हैं जो प्रखर को पसंद नहीं.
वो बताते हैं कि गणित का जियोमेट्री और एसएसटी सब्जेक्ट उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं है. प्रखर मित्तल गुड़गाव के डीपीएस स्कूल में पढ़ते हैं.
वो बताते हैं कि उन्हें स्कूल में अच्छे से पढ़ाया गया और सभी तरह की सुविधाएं मिलीं. प्रखर कहते हैं कि वो 11वीं में फिज़िक्स, केमेस्ट्री और गणित सब्जेक्ट लेंगे.
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‘नंबर किसी की पहचान नहीं बन सकते’
प्रखर भले ही सबसे ज़्यादा नंबर हासिल करके टॉपर बने हैं, लेकिन वो नंबरों को इतना अहम नहीं मानते. वो कहते हैं कि नंबर कभी किसी इंसान की पहचान नहीं हो सकते.
वो कहते हैं कि कम नंबर लाने वाले बच्चों को भी निराश होने की ज़रूरत नहीं है. क्योंकि आज कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां कम नंबर आने के बाद भी आप अच्छा कर सकते हैं.
प्रखर के पिता एक फाइनेंस कंपनी में काम करते हैं और उनकी मां होम मेकर हैं.
प्रखर बताते हैं कि अच्छे नबंर लाने के लिए उनके परिवार की तरफ से कभी प्रेशर नहीं रहा. हां उनकी मां ये ज़रूर कहती थीं कि ‘जो भी करो अच्छे से करो.’
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पढ़ाई के अलावा भी कई शौक
प्रखर को म्यूज़िक सुनने का काफी शौक है. वो पियानो भी बजाते हैं. रिलैक्स रहने के लिए प्रखर भाई के साथ खूब खेलते भी हैं.
प्रखर बताते हैं कि उन्होंने बोर्ड एक्ज़ाम के डर से कभी खेलना या कहीं जाना बंद नहीं किया था.
12वीं के बाद प्रखर आईआईटी में पढ़ना चाहते हैं. वो कहते हैं हमें वही करियर अपनाना चाहिए जिसमें इंटरेस्ट हो.
प्रखर के अलावा आरपी पब्लिक स्कूल बिजनौर की रिमझिम अग्रवाल, शामली के स्कॉटिश इंटरनेशनल स्कूल की नंदिनी गर्ग और कोचिन के भवन्स विद्यालय की श्रीलेखा जी इस साल की टॉपर रही हैं. चार टॉपरों में से तीन लड़कियां हैं.
नई दिल्ली : देश की 4 लोकसभा और 10 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में से अधिकतर के नतीजे आ गए हैं। 14 में से मात्र दो सीटों पर बीजेपी जीती है। यूपी में बीजेपी को दोहरा झटका गया है। समाजवादी पार्टी ने उससे नूरपुर सीट छीनी, तो कैराना लोकसभा सीट भी संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार आरएलडी के खाते में जाना तय है। बिहार के अररिया के जोकीहाट में भी तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आरजेडी ने जीत दर्ज की है। ताजा नतीजों में चार लोकसभा सीटों में से भाजपा के खाते में सिर्फ एक सीट पर जीत आई है। महाराष्ट्र की पालघर सीट पर ही भाजपा को जीत मिली है। वहीं 10 विस सीटों में से एकमात्र उत्तराखंड की थराली सीट पर भाजपा उम्मीदवार को जीत नसीब हुई। कैराना में आरएलडी की जीत:- बीजेपी के सांसद हुकुम सिंह के निधन से खाली हुई यह सीट आरएलडी की तबस्सुम हसन ने बड़े अंतर से जीती। उन्होंने ये मुकाबला करीब 49449 मतों से जीता। हुकुम सिंह की बेटी और बीजेपी प्रत्याशी मृगांका ने दो बजे अपनी हार मान ली।
भंडारा-गोंदिया में एनसीपी आगे:- यहां एनसीपी उम्मीदवार के आगे निकलने की खबर। इससे पहले कई राउंड तक भाजपा उम्मीदवार आगे थे। भंडारा-गोंदिया में बीजेपी सांसद नाना पटोले ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और कांग्रेस में शामिल हो गए थे। पालघर में खिला कमल:- पालघर में बीजेपी उम्मीदवार राजेंद्र गावित ने 29 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। गावित कांग्रेस छोडक़र बीजेपी में आए थे। बीजेपी सांसद चिंतामन वनागा के जनवरी में निधन के बाद यह सीट खाली हो गई थी। नगालैंड में सत्तारूढ़ उम्मीदवार को बढ़त:- नगालैंड लोकसभा उपचुनाव में जारी मतगणना के मुताबिक सत्तारूढ़ पीपल्स डेमोक्रैटिक अलायंस (पीडीए) के उम्मीदवार तोखेहो येपथोमी अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एनपीएफ के उम्मीदवार से 41,000 से अधिक मतों से आगे चल रहे हैं।
बीजेपी ने गंवाई फूलपुर सीट:- एसपी उम्मीदवार नईमुल हसन ने 10 हजार वोटों से जीत दर्ज की। विधायक लोकेंद्र सिंह की सडक़ दुर्घटना में मौत के बाद यह सीट खाली हुई थी, जहां से उनकी पत्नी अवनी सिंह को बीजेपी ने प्रत्याशी बनाया था। झारखंड में दोनों सीटों पर जेएमएम की जीत:- सिल्ली सीट पर जेएमएम उम्मीदवार सीमा महतो ने जीत दर्ज कर ली है। गोमिया विधानसभा सीट पर भी जेएमएम उम्मीदवार बबीता देवी ने जीत दर्ज की है। बिहार में आरजेडी की जीत, छीनी जोकिहाट सीट:- अररिया जिले की जोकिहाट से आरजेडी उम्मीदवार ने बड़ी जीत दर्ज की। जेडीयू विधायक सरफराज आलम के इस्तीफा देने के चलते इस सीट पर उपचुनाव हुआ था। आरजेडी के उम्मीदवार शाहनवाज 41,224 वोटों से जीते। पंजाब: शाहकोट पर कांग्रेस का कब्जा:- शाहकोट सीट पर 38 हजार वोटों से कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। शाहकोट सीट से अकाली दल के विधायक अजीत सिंह के इस साल फरवरी में निधन के बाद यहां चुनाव हुए।
केरल की चेंगनूर विस सीट पर सीपीएम को मिली जीत:- चेंगनूर विधानसभा उपचुनाव में सीपीएम उम्मीदवार ने 20956 सीटों से जीत दर्ज की। इस बार यूडीएफ ने डी विजयकुमार को प्रत्याशी बनाया था जबकि एलडीएफ ने साजी चेरियन को मैदान में उतारा। मेघालय की अंपाती सीट पर कांग्रेस जीती:- अंपाती सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार मुकुल संगमा की बेटी मियानी डी शिरा ने 3191 वोटों से जीत दर्ज की। मियानी नेकि सत्तारूढ़ मेघायल डेमोक्रैटिक गठबंधन ने क्लेमेंट जी मोमिन को हराया।
पश्चिम बंगाल में ममता की पार्टी को मिली जीत:- महेशताला विधानसभा सीट से तृणमूल के दुलाल दास ने दर्ज की जीत। उनकी पत्नी एवं विधायक कस्तूरी दास के निधन के चलते इस सीट पर उपचुनाव हुआ है।
पलूस काडेगांव में कांग्रेस प्रत्याशी निर्विरोध जीते:- कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री पटंगराव कदम के निधन के बाद खाली हुई थी। पार्टी ने उनके बेटे विश्वजीत कदम को मैदान में उतारा है। शिवसेना ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया है। उत्तराखंड की थराली में बीजेपी ने बचाई सीट:- थराली विधानसभा सीट पर बीजेपी ने जीत दर्ज की। बीजेपी विधायक मगनलाल शाह के निधन के कारण खाली हुई। बीजेपी की ओर से इस सीट पर मुन्नी देवी ने जीत दर्ज की।
नई दिल्ली : पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में आज लगातार दूसरे दिन नाम मात्र की गिरावट आई है। पेट्रोल 7 पैसे और डीज़ल 5 पैसे प्रति लीटर सस्ता हुआ है। दिल्ली में आज पेट्रोल 78.35 और डीज़ल 69.25 रु प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल आज भी 86 के पार है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले चार दिनों से कच्चे तेल के दाम कम होते जा रहे हैं। बता दें कि पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने कहा कि तेल की कीमतों का निर्धारण तेल कंपनियां करती हैं और उसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है। पेट्रोलियम मंत्री ने पेट्रोल और डीजल के दाम में एक पैसे की कमी को लेकर विपक्ष के ताने पर सफाई देते हुए यह स्पष्टीकरण दिया।
उन्होंने कहा, “पिछले कुछ साल से पेट्रोल की कीमत बाजार द्वारा तय होती है और दैनिक कीमतों का निर्धारण पिछले साल से हो रहा है। सरकार कीमतों का निर्धारण नहीं करती है। केरल में से पेट्रोल और डीजल के दाम में एक रुपये की कटौती हो जाएगी। इस कदम के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने वाला केरल देश का पहला राज्य बन गया है। केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने कहा है कि राज्य सरकार ने पेट्रोल और डीजल में 1-1 रुपये घटाने का फैसला लिया है। ये कटौती 1 जून से पूरे राज्य में लागू होगी। इससे पहले 16 दिन बाद केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम में मात्र 1 पैसे प्रति लीटर की कटौती की है।
दिल्ली में पेट्रोल 78 रुपये 42 पैसे प्रति लीटर और डीज़ल 69 रुपये 30 पैसे प्रति लीटर है। जबकि यह पेट्रोल के दाम 78 रुपये 43 पैसे प्रति लीटर था और डीजल के दाम 69.31 रुपये प्रति लीटर थी। गौरतलब है कि सुबह यह खबर आ रही थी कि पेट्रोल के दाम में 60 पैसे प्रति लीटर जबकि डीज़ल की क़ीमत में 56 पैसे प्रति लीटर की कटौती की गई है। आपको बता दें कि लखनऊ में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि डॉलर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पेट्रोल-डीजल के दाम चढ़े हैं लेकिन केन्द्र सरकार पेट्रोलियम उत्पाद की कीमतों को कम करने में लगी हुई है।
देश के आठ राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की तैयारी कर रही है. 14 जून 2018 ये वो तारीख है जो देश के कई राज्यों में हिन्दुओं के हक की लड़ाई के इतिहास में दर्ज होने जा रही है और हो सकता है ऐतिहासिक सुधार की गवाह भी बने. इसी दिन हिन्दू अल्पसंख्यक राज्यों को लेकर बड़ी कार्यवाही कोर्ट में होगी जिसके लिए फिलहाल राष्ट्रिय अल्पसंख्यक आयोग के नियमों की विवेचना की जा रही ।
इस बैठक में मसले पर फैसला लिए जाने की संभावना है.। बताया जा रहा है कि बैठक के बाद अल्पसंख्यक आयोग केंद्र को सिफारिश भेजेगा. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सामने नवंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्वनी उपाध्याय ने एक अर्जी दायर कर इस मुद्दे को उठाया था।
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अश्विनी ने उदाहरण देते हुए कहा, श्भारत सरकार हर साल 20 हजार अल्पसंख्यकों को टेक्निकल एजुकेशन में स्कॉलरशिप देती है। यह स्कॉलरशिप इन आठ राज्यों में हिंदुओं को नहीं मिल पाती। जबकि जम्मू-कश्मीर में 68.30 फीसदी मुस्लिम हैं, वहां सरकार ने हाल में 753 में से 717 मुस्लिम स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप दी। इस राज्य में हिंदू स्टूडेंट्स मुस्लिमों से कहीं कम हैं, लेकिन उन्हें स्कॉलरशिप का लाभ नहीं मिला। दूसरी बात यह है कि लक्षद्वीप में मुस्लिम 96.20ः, असम में 34.30ः, वेस्ट बंगाल में 27.5ः और केरल में 26.6ः हैं। यहां उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा मिला हुआ है। फिर जिन राज्यों में हिंदू कम हैं, वहां उन्हें अल्पसंख्यक क्यों नहीं माना जाता?
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2011 में हुई जनगणना के मुताबिक- लक्षद्वीप में 2.5%, मिजोरम 2.75%, नगालैंड में 8.75%, मेघालय में 11.53%, जम्मू कश्मीर में 28.44%, अरुणाचल प्रदेश में 29%, मणिपुर में 31.39% और पंजाब में 38.4% हिंदू हैं। इन राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं मिलने से उन्हें सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इन आठ राज्यों में हिन्दू अल्पसख्यक है. इसके आलावा कई राज्यों में मुस्लिम और ईसाई बहुसख्यक होने के बावजूद अल्पसंख्यक का दर्जा लेकर तमाम सरकारी सुविधाएं और सहानुभूति बटोर रहे है. ऐसे में सवाल उठता है कि हिंदुस्तान में हिन्दू होने की सजा कब तक भुगतेगा हिन्दू.।
फिलहाल देश के 8 राज्य जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं.। इसे लेकर कई बार मांग उठाई गई है मगर सिर्फ वोट बैंक को खतरे में न डालते हुए हिन्दुओं के साथ यह कह कर अन्याय जारी है कि देश तो हिन्दुओं का है बाकि सब तो अल्पसंख्यक. बस यह जुमला हर पार्टी और सरकार ने रट रखा है, जिसका खामियाजा सालों से हिदुस्तान के हिन्दू उठा रहे है. आखिर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग दोहरी नीति के तहत कैसे काम कर रहा है और क्यों. क्यों सिर्फ जाती ही अल्पसंख्यक होने का मानक है जबकि परिभाषा तो संख्यात्मकता को लेकर बनाई गई है. कश्मीर में 68 फीसदी मुस्लिम आबादी अल्पसंख्यक कैसे है समझ से परे है. देश के कई राज्यों का हाल ऐसा ही है.।
केंद्र सरकार हर साल राज्य सरकारों को अल्पसंख्यकों की मदद के लिए करोड़ों रुपए की आर्थिक मदद देती है. मगर इसका लाभ देश के उन आठ राज्यों में नहीं मिल पा रहा है जहां वे सही मायनों में अल्पसंख्यक हैं.।
बहरहाल 14 जून को एक बड़ा फैसला होना है जिसमे एक देश और दो तरह के कानून की बहस होना है और इस सवाल का जवाब भी आना है कि सियासी सहानुभूति कि आड़ में हिंदुस्तान में हिन्दू होने की सजा कब तक सहेगा।
नई दिल्ली : मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर एक राष्ट्रीय चैनल द्वारा बुलाई गई पंचायत में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शिरकत की। इस मौके पर उनसे दाऊद इब्राहिम और हाफिज सईद की गिरफ्तारी पर सवाल किए गए जिसके बाद राजनाथ ने इस सवाल के जवाब में कहा कि उनकी सरकार इस पर काम कर रही है, लेकिन वह प्लान को डिस्क्लोज नहीं करेंगे। राजनाथ ने इशारों-इशारों में कहा कि इन 2 मोस्ट वॉन्टेड अपराधियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की जा सकती है।
राजनाथ के कहा आतंकियों और अपराधियों के खिलाफ जो करना चाहिए, उनकी सरकार कर रही है, लेकिन परिणाम आने में टाइम लगता है। राजनाथ ने कहा कि हमने सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए भी घोषणा नहीं की थी। ऐसे में हाफिज सईद और दाऊद इब्राहिम के खिलाफ कार्रवाई भी बिना कोई घोषणा की होगी, लेकिन जब होगी तो लोगों को पता जरूर चल जाएगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि आजादी में बंटवारे के बाद से पाकिस्तान अपने नापाक मंसूबों से बाज नहीं आ रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने का काम किया जा रहा है।
नई दिल्ली : कृष्णा नगर इलाके में गत 24 मई को एलपीजी सिलेंडर ब्लास्ट के बाद झूलसे 15 लोगों में से मरने वालों की संख्या अब आठ हो गई है। जीटीबी और एलएनजेपी अस्पताल में अलग-अलग दिन में मौतें मरने की पहचान राजपाल (60), सुबोध (21), बृजेश (15), शंभू (25), खिलाड़ी (22) और तीन अन्य लोगों के रूप में हुई। पुलिस ने सभी आठ लोगों के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है। घायलों में चार लोग की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। कृष्णा नगर थाना पुलिस मामला दर्ज कर छानबीन कर रही है।
बता दें कि 24 मई को कृष्णा नगर स्थित शंकर नगर में 100 गज के मकान में दूसरी मंजिल पर एलपीजी सिलेंडर में ब्लॉस्ट हो गया था। मकान में निर्माण कक्ष में मजदूरों के परिवार रहते थे। घटनाक्रम दिन सत्तो देवी नामक खाना खाना बना रही थी। उसी दौरान गैस रिसाव के बाद आग लग रहा था। शोर-शराब सुनकर लोग लोग की भीड़ इकबाया हो गया। धमाके के साथ एलपीजी सिलेंडर फट गया।
हादसे में पंद्रह लोग जख्मी हो गए। घायल राजपाल, सत्तो, धर्मवीर, नरेश, बृजेश, शंभू, निरंजन, रंजीत, सुबोध, शिवपूजन, संजू मारिया, दिनेश, कैलाश, विजय और खिलाड़ी को एलजेजेपी और जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया। आठ आठ लोगों की अब तक इलाज के दौरान मौत हो गई है। सभी आठ मौतें एक-एक दिन छोड़कर हुई। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
नई दिल्ली . पीएम नरेंद्र मोदी 26 मई को अपनी सरकार के चार साल पूरे कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने देश को अब तक का सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म सिस्टम दिया, पुराने दिवालियापन कानून को नया रूप दिया, पुराने रुके हुए प्रॉजेक्ट को फिर से शुरू किया और अपनी परफॉर्मेंस से वर्ल्ड बैंक को यह कहने पर मजबूर कर दिया कि भारत बिजनस करने के लिहाज से दुनिया का तीसरा सबसे बेहतर देश है। हालांकि देश की अर्थव्यवस्था में अभी सब कुछ ठीक नहीं है। ब्लूमबर्ग में छपी एक रिपोर्ट में अर्थव्यवस्था के नजरिए से मोदी सरकार के चार साल का आंकलन किया गया है।
सरकारी और प्रावेट बैंकों में धोखाधड़ी के मामले सामने आ रहे हैं। बैंकों का डूबे हुए कर्ज का ढेर अब तक का सबसे बड़ा हो चुका है। निवेशक मजबूत डॉलर के बीच भारतीय शेयरों और बॉन्डों को खत्म कर रहे हैं। शुरुआती तीन साल के बाद अब एफडीआई में भी कोई खास बढ़ोतरी नजर नहीं आ रही है।
मोदी की भारतीय जनता पार्टी ने साल 2014 में जबरदस्त बढ़त के साथ सरकार बनाई थी। चुनाव के दौरान मोदी ने बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, भ्रष्टाचार खत्म करने, गरीबों का उत्थान करने का वादा किया थ। मोदी के पास इन सब वादों को पूरा करने के लिए महज एक साल बचा है। सामाजिक और आर्थिक मोर्चों पर मोदी सरकार को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। यहां जानिए कि मोदी के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था ने कैसा काम किया।
जीडीपी आंकड़े बताते हैं कि मोदी के जीडीपी कैलकुलेट करने के तरीके बदलने के बाद देश की अर्थव्यवस्था में जबरदस्त तेजी आई। नवंबर 2016 में अचानक नकदी पर शिकंजा कसने से उन लाभों को खत्म कर दिया और मार्च में समाप्त हुए वित्त वर्ष में 2.3 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था में पिछले चार साल की सबसे धीमी रफ्तार का अनुमान लगाया गया। मोदी जैसे-जैसे अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में पहुंचे चीन के मुकाबले भारत की जीडीपी चीन से कुछ पीछे नजर आ रही है।
ट्रेड डेफिसीट सोने के लिए भारत के बढ़ते प्यार और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने देश के व्यापार को घाटे में रखा है। बीजेपी सरकार के दौरान यह घाटा बढ़ा है। चीन के साथ बहुत घनिष्ठ संबंध न होने के बावजूद चीन से भारत का आयात बढ़ा है। भारत अमेरिका के साथ एक व्यापार अधिशेष चलाता है, लेकिन इससे मुद्रा में हेरफेर के लिए भारत को यूएस ट्रेजरी की वॉच लिस्ट में रखता है।
इसके अलावा करंट अकाउंट डेफिसीट की बात करें तो मोदी की पॉलिसी ने फॉरेन इन्वेस्टमेंट को भारत में लाने में काफी मदद की और 10 साल में पहली बार इसमें रेकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी हुई, लेकिन अमेरिकी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए अभी काफी मशक्कत करने की जरूरत है। मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट फरवरी में पेश किया। उन्होंने स्वास्थ्य और किसानों को आमदनी को बढ़ाने का वादा किया, लेकिन इन वादों को पूरा करने में अभी पूरा होमवर्क करना बाकी है।
केरल में निपाह वायरस को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। प्रयोगशाला की एक रिपोर्ट के अनुसार इस खतरनाक वायरस के फैलने के लिए चमगादड़ जिम्मेदार नहीं हैं। भोपाल की प्रयोगशाला से आयी रिपोर्ट में कहा गया कि कोझिकोड के चंगारोथ गांव से मरने की पहली घटना सामने आयी थी। मरने वाले के शरीर में भी एनआईवी के नमूने नहीं मिले हैं। वायरस फैलने के लिए मानव को ही जिम्मेदार माना जा रहा है।
आईसीएआर और पशुओं की बीमारी पर काम कर रहे भोपाल के राष्ट्रीय संस्थान (आईएचएसएडी) ने परीक्षण संबंधी अपने नतीजे का विश्लेषण करने के बाद कहा कि निपाह वायरस जिनोम के सभी नमूने निगेटिव मिले हैं।‘ पहले की रिपोर्ट में संदेह जताया गया था कि चमगादड़ की वजह से केरल में यह बीमारी फैली है। केरल हेल्थ डिपार्टमेंट के एक वरिष्ठ अफसर के मुताबिक 21 चमगादड़ों के खून के सैंपल जांच के लिए भेजे गये थे लेकिन सारे नेगिटिव निकले। इसके साथ ही गाय, बकरी, खरगोश, कुत्ते और बिल्लियों के खून के सैंपल भी भेजे गए थे। इनमें भी निपाह के निशान नहीं मिले। हालांकि एक्सपर्ट्स के मुताबिक अभी और गहन जांच की जाएगी।
वायरस से प्रभावित मरीज को तेज सिरदर्द के साथ बुखार आता है और इसके बाद वह दिमागी रूप से अक्रियाशील हो जाता है। कुछ दिन बाद कोमा में जाकर पीड़ित की मौत हो जाती है। इस बीमारी का दुनिया में अभी कोई इलाज नहीं है। उत्तरी केरल के कोझिकोड और मलाप्पुरम जिलों में इस वायरस से अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोगों का इलाज चल रहा है। पश्चिम एशियाई देश यूएई ने भारत यात्रा पर आए और आने वाले अपने नागरिकों को केरल जाने में सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
चमगादड़ के नमूनों की होगी जांच वहीं निपाह वायरस से प्रभावित क्षेत्र पेराम्बरा के निकट फल खाने वाले चमगादड़ के नमूने एकत्र किए जा रहे हैं और इन्हें परीक्षण के लिए भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा रोग पशु संस्थान (एनआईएचएसएडी) भेजा जाएगा। पशुपालन विभाग के निदेशक डा. एन एन सासी ने बताया कि राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणे और पशुपालन तथा वन विभाग के विशेषज्ञों ने नमूनों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया है जो एनआईएचएसएडी को भेजे जाएंगे। निपाह वायरस से अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि मूसा परिवार के एक अप्रयुक्त कुएं से तीन चमगादड़ों को पकड़ा गया था और उनके नमूने सूअरों, बकरियों और मवेशियों के नमूनों के साथ भोपाल प्रयोगशाला भेजे गये थे और इन सभी के परीक्षण नेगेटिव आए है।
नई दिल्ली. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघ संचालक मोहन भागवत एक ही मंच पर दिखेंगे. राष्ट्रपति बनने से पहले कांग्रेस की पिछली सरकारों में वित्त, रक्षा जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके प्रणब मुखर्जी लगातार बीजेपी और आरएसएस पर हमलावर रहे. ऐसे में उनका आरएसएस के कार्यक्रम में मेहमान बनने की खबर लोगों का ध्यान खींच रही है.
सूत्रों के मुताबिक आरएसएस की ओर से प्रणब मुखर्जी को कार्यक्रम में आने का न्योता भेजा गया था, जिसे उन्होंन स्वीकार लिया है. आरएसएस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 7 जून को तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग कार्यक्रम होगा. इसमें प्रणब मुखर्जी के पहुंचने की पूरी संभावना है. यह कार्यक्रम नागपुर के रेशम बाग स्थित संघ मुख्यालय पर होगा. हालांकि इस संबंध में प्रणब मुखर्जी की ओर से स्पष्ट नहीं किया गया है कि वह संघ के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे या नहीं.
अगर प्रणब मुखर्जी आरएसएस के इस कार्यक्रम में पहुंचते हैं तो वह 800 स्वंयसेवकों को संबोधित करेंगे. जिस वक्त प्रणब मुखर्जी मंच मौजूद होंगे, उस दौरान मोहन भागवत भी वहां रहेंगे. मालूम हो कि मनमोहन सिंह की सरकार में गृह मंत्री रहे पी चिदंबरम ने ‘भगवा आतंक’ शब्द का प्रयोग किया था, जिसका RSS ने जोरदार विरोध किया था.
उस वक्त प्रणब मुखर्जी भी सरकार में शामिल थे, लेकिन उन्होंने इस पर आपत्ति नहीं की थी. इसके अलावा प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति रहते हुए मौजूदा बीजेपी सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनके काफी अच्छे रिश्ते रहे. पीएम मोदी कई सार्वजनिक मंचों से प्रणब मुखर्जी की तारीफ कर चुके हैं. वहीं कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी समेत पार्टी के सभी बड़े नेता आरएसएस के प्रति आक्रामक रुख अपनाए रहते हैं.