Category: national

  • ‘वित्त आयोग पर लगे आरोप खारिज’

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को तमिलनाडु समेत दक्षिणी राज्यों के उन आरोपों को खारिज कर दिया है कि 15वें वित्त आयोग द्वारा निर्धारित संदर्भ शर्ते भेदभाव भरी हैं तथा इससे उन राज्यों को नुकसान होगा, जिन्होंने जनसंख्या पर काबू प्राप्त किया है। उन्होंने यहां कैंसर संस्थान की इमारत का उद्घाटन करते हुए कहा, “पिछले कुछ दिनों से निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा एक मुद्दा उठाया गया है। 15वें वित्त आयोग के टीओआर के बारे में आधारहीन आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ खास राज्यों के प्रति यह भेद भावकारी है।”

    उन्होंने कहा कि पहले यह मामला नहीं था। दक्षिणी राज्यों का कहना है कि वित्त आयोग का टीओआर आबादी बढ़ाने वाले राज्यों के पक्ष में है, जबकि दक्षिणी राज्यों ने अपनी आबादी पर काबू पाने में सफलता प्राप्त की है। इस मामले को सबसे पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने उठाया। उसके बाद भाजपा सहयोगी से विरोधी बने आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्राबाबू नायडू ने इसे उठाया।

    केरल के वित्तमंत्री थॉमस इसाक ने मंगलवार को दक्षिणी राज्यों के वित्तमंत्रियों की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और पुद्दुचेरी के प्रतिनिधि शामिल हुआ और उन्होंने टीओआर को ‘संघवाद के लिए खतरा’ करार दिया। मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार सहकारी संघवाद के लिए प्रतिबद्ध है।

    मोदी ने कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूं कि हमारे आलोचकों ने एक चीज पर ध्यान नहीं दिया। केंद्र सरकार ने वित्त आयोग को यह सलाह दी है कि उन राज्यों को प्रोत्साहन दे, जिन्होंने आबादी नियंत्रण पर काम किया है। इससे तमिलनाडु जैसे राज्यों को निश्चित रूप से फायदा होगा, जिन्होंने आबादी नियंत्रण के लिए बहुत ही प्रयास, संसाधन और ऊर्जा खर्च किया है।”

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में कोई गांव वाला न जाए, नक्सलियों का फरमान

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    छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 14 अप्रैल को होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में कोई गांव वाला न जाए। यह फरमान जारी किया है माओवादियों ने, सूत्रों के अनुसार गांव-गांव में बैठकें लेकर नक्सली लोगों को सभा में जाने से मना कर रहे हैं। खुफिया सूत्रों की मानें तो भैरमगढ़ के अंदरूनी क्षेत्रों के ग्रामीणों को नक्सलियों ने हिदायत दी है कि यदि राजनैतिक पार्टी के लोग गाड़ियों में लेने आते हैं तो उन्हें मार भगाओ, बीजापुर में बीजेपी ने एक लाख से अधिक भीड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है, माओवादियों ने मोदी के आने के विरोध में बीजापुर-भोपालपट्टनम मार्ग पर पोस्टर दो दिन पहले लगाए थे, सबसे पहले नक्सलियों ने बीजापुर-भोपालपट्टनम सड़क पर महादेव घाट के पास बड़ी संख्या में पोस्टर फेंके।

    पर्चे में नक्सलियों ने प्रधानमंत्री मोदी पर बस्तर के विकास के नाम पर अमूल्य खनिज संपदा को कारोबारियों को सौंपने का आरोप लगाया है। पोस्टर-बैनर से इलाके के लोगों में दहशत का माहौल है, नक्सली लगातार बैनर-पोस्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी के जांगला में होने वाले कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं। प्रधानमंत्री 14 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के बीजापुर आने वाले हैं जहां से वो आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत करेंगे।

  • इन दो घटनाओं ने देश को किया शर्मसार – उन्नाव और कठुआ पर बोले पीएम मोदी

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    दिल्ली, प्रधानमंत्री मोदी ने बासाहेब की जयंती पर राजधानी में अलीपुर रोड स्थित ‘डॉ. आंबेडकर नैशनल मेमोरियल’का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने उन्नाव और कठुआ पर बोलते हुए कहा कि इन दोनों घटनाओं ने देश को शर्मसार किया है। गुनहगारों को सजा दिलाना हमारी जिम्मेदारी है और उन्हे सजा मिलकर रहेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि समाज को भी सोचना होगा। पीएम ने कहा कि जिन बेटियों के साथ जुल्म हुआ है उन्हें न्याय मिलेगा।   

    • दो करोड़ 16 लाख से ज्यादा दलितों को लोन दिया है।
    • देश के अधिकतम गांवों में बिजली पहुंची, सौभाग्य योजना से देश के 4 करोड़ घरों में बिजली पहुंची।
    • देश में शौचालय न होना अन्याय था, सरकार ने देश में सवा दो करोड़ गावों में आठ करोड़ शौचालय बनवाए हैं।
    • बिना बैंक गारंटी के लोन देने का विकल्प हमारी सरकार ने दिया है।
    • एससी-एसटी एक्ट में अग्रिम जमानत न देने का प्रावधान पहले जैसा ही रहेगा।
    • SC/ST पर अत्याचार से जुड़े मामलों की तेज सुनवाई के लिए special courts का गठन किया जा रहा है।
    • अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों पर अत्याचार रोकने के लिए कानून को शिथिल नहीं बनने देगी सरकार।
    •  आंबेडकर जब जीवित थे तो कांग्रेस ने उनका अपमान किया और उनके निधन के बाद भी उनका अपमान कर रही है।
    • सरकार ने पिछड़ी जातियों के सब-कैटेगरी के लिए कमीशन के गठन का निर्णय भी किया है।

    पीएम दिल्ली मेट्रो से समारोह में भाग लेने पहुंचे। वह शाम पांच बजकर 41 मिनट पर येलो लाइन के लोक कल्याण मार्ग स्टेशन से मेट्रो में चढ़े और करीब 20 मिनट बाद 6 बजकर एक मिनट पर विधानसभा स्टेशन पर उतरे।प्रधानमंत्री के लोक कल्याण मार्ग स्टेशन पर पहुंचते ही लोगों के उनसे मिलने का सिलसिला शुरू हो गया। वह लोगों से मिले और उनका अभिवादन स्वीकार किया। स्टेशन पर ही लोगों ने उनके साथ सेल्फी ली। मेट्रो के भीतर भी यह सिलसिला चलता रहा। इस दौरान पीएम ने यात्रियों से बात भी की। वह इससे पहले भी मेट्रो में सफर कर चुके हैं। दिल्ली मेट्रो के अनुसार येलो लाइन पर सेवा पूरी तरह से सामान्य रही और प्रधानमंत्री ने अन्य यात्रियों के साथ ही मेट्रो में यात्रा की। अन्य लाइनों पर भी सेवा सामान्य रही। पीएम की इस यात्रा से लोगों को निजी वाहनों के बजाय यातायात के सार्वजनिक माध्यमों का इस्तेमाल करने का संदेश मिलता है।

    बता दें कि यह दलित स्मारक दिल्ली में 26 अलीपुर रोड पर बनाया गया है। इसकी आधारशिला पीएम ने 21 मार्च 2016 को रखी थी।  करीब 200 करोड़ की लागत में बने इस स्मारक को पुस्तक का आकार दिया गया है जो संविधान का प्रतीक है। इस इमारत में एक प्रदर्शनी स्थल, स्मारक, बुद्ध की प्रतिभा के साथ ध्यान केंद्र व डॉ. आंबेडकर की 12 फुट ऊंची प्रतिमा है। प्रवेश द्वार पर 11 मीटर का अशोक स्तंभ भी है। यह इमारत पर्यावरण हितैषी है। इसमें सीवेज शोधन संयंत्र, वर्षा जल सिंचाई प्रणाली व सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित है। संग्रहालय में मल्टी मीडिया तकनीक के माध्यम से अंबेडकर के जीवन और आधुनिक भारत को उनके योगदान की जानकारी मिलेगी।

  • लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने पर जल्द लिया जा सकता है बड़ा फैसला

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    नई दिल्ली, केंद्र सरकार चुनाव आयोग से यह पूछने वाली है कि क्या अगले साल की शुरुआत में ही लोकसभा और विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ दो चरणों में कराया जा सकता है।आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार कानून आयोग के रिपोर्ट सौंपने के बाद इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से उसके विचार मांगेगी।

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    election india

    कानून आयोग इस संबंध में अपनी रिपोर्ट इस महीने के आखिर में कानून मंत्रालय को सौंपने वाला है। समझा जाता है कि केंद्र सरकार वर्ष 2019 और 2024 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराना चाहती है। सरकार चुनाव आयोग को इन दोनों चुनावों को दो चरणों में कराने का सुझाव दे सकती है।

    इसीतरह की एक रिपोर्ट सरकार के थिंक-टैंक नीति आयोग ने भी अपनी सिफारिशों में दी है। नीति आयोग ने भी दोनों चुनाव दो चरणों में एक साथ कराने की सिफारिश की है। सूत्रों के अनुसार सरकार चाहती थी कि खुद चुनाव आयोग इस संबंध में आने वाले महीनों में अपने विचार उसके समक्ष रखे।

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    सरकार की अवधारणा ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ को साकार करने के लिए कानून आयोग ने इंटरनल वर्किग पेपर में सिफारिश की है कि वर्ष 2019 की शुरुआत में ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ और दो चरणों में कराए जाएं। दूसरे चरण का चुनाव एक साथ वर्ष 2024 में कराया जा सकता है। इस दस्तावेज में संविधान में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है।

    साथ ही जनप्रतिनिधि कानून को छोटा या बढ़ा कर सभी विधानसभाओं के कार्यकाल को एक साथ लाया जाए। इन संशोधनों की सिफारिश संसदीय समिति और फिर नीति आयोग दोनों ने ही की है। जिन विधानसभाओं में पहले चरण में चुनाव कराने की पेशकश की गई है, वहां 2021 में विधानसभा चुनाव होने है। इनमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र हैं। दूसरे चरण में आने वाले राज्य हैं-उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, दिल्ली और पंजाब हैं।

    चुनाव आयोग के एक सुझाव के मुताबिक सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले विश्वास प्रस्ताव लाना होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि विपक्ष के पास वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या बल है या नहीं है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने कहा था कि दोनों चुनाव एक साथ कराने की तैयारी में बहुत वक्त लग जाएगा।

  • सत्ता के नशे में चूर मोदी ने हिन्दू समाज के साथ धोखा किया: तोगडिया

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    विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष रहे प्रवीण भाई तोगडिय़ा ने 17 अप्रेल से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन की घोषणा की है। अहमदाबाद में वे अनशन शुरु करेंगे। राम मंदिर समेत हिन्दुत्व के मुद्दों पर वे अनशन कर रहे हैं। एक तरह से मोदी सरकार के खिलाफ तोगडिया ने मोर्चा खोलते हुए अनशन शुरु करने जा रहे हैं, जिसे कई संगठनों का समर्थन मिलना तय माना जा रहा है।
    तोगडिय़ा ने कहा कि वे हिन्दुओं की आवाज उठाते रहेंगे और देश भर में राम मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन की शुरुआत भी करेंगे।

    विश्व हिन्दू परिषद छोडऩे के बाद तोगडिय़ा ने आरोप लगाया कि मुझ पर दबाव बनाया गया कि राम मंदिर का मुद्दा छोड़ दो या फिर विहिप छोड़ दो। मैंने दोनों नहीं छोडऩे की बात कही तो सत्ता के बल पर फर्जी तरीके से चुनाव में हमें हराया। उन्होंने कहा कि हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि 32 बाद इस तरह से उन्हें निकाल दिया जाएगा। विहिप की बैठक में हिन्दुओं की आवाज को दबाया गया। चुनाव जीतने के लिए गलत हथकंडे अपनाए गए। मतदाता सूची में गड़बड़ी की गई। सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया।

    तोगडिया ने मोदी सरकार पर हमला किया और कहा कि जिन्होंने हिन्दुओं की लाशों पर राजनीति की वे अब हिन्दुओं की आवाज और मुद्दों को दबाने में लगे है। लेकिन वे राम मंदिर मुद्दा और हिन्दुत्व मुद्दा नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने बजरंग दल, विहिप, दुर्गा वाहिनी के कार्यकर्ताओं और हिन्दुओं से आह्वान किया है कि वे राम मंदिर और हिन्दु एकता के मुद्दे एक साथ उठाए। सभी लोग सुरक्षित हिन्दु और समृद्ध हिन्दु की ओर बढ़ेंगे।

    गौरतलब है कि शनिवार को 52 साल बाद हुए विश्व हिन्दू परिषद के चुनाव में हिमाचल प्रदेश के पूर्व गवर्नर और राजस्थान के साथ मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश विष्णु सदाशिव कोकजे दो तिहाई बहुमत के साथ जीते है। कोकजे ने परिषद के निवर्तमान अध्यक्ष राघव रेड्डी को 71 मतों से हराया। 192 सदस्यों ने चुनाव में भाग लिया था। कोकजे को 131 तो रेडडी को 60 मत मिले। एक वोट रद्द हो गया। रेड्डी को प्रवीण भाई तोगडिया ने समर्थन किया था। इस हार के साथ ही इन्होंने विहिप से इस्तीफा दे दिया। तोगडिया के स्थान पर आलोक कुमार को अंतरराष्टीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है।

  • कठुआ गैंगरेप केस: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा पीड़ित परिवार, आरोपी बोले- हमारा नार्को टेस्ट कराओ

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    कठुआ गैंगरेप केस अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है। 8 साल की जिस बच्ची के साथ दरिंदगी की घटना को अंजाम दिया गया था, उसके परिवार ने सु्प्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। याचिका में ये मांग की गई है कि इस केस की सुनवाई जम्मू-कश्मीर के बाहर कराई जाए। इसी मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 2 बजे सुनवाई करेगा। पीड़ित परिवार की तरफ से केस लड़ रही दीपिका राजावत ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस याचिका में कहा गया है कि इस केस को जम्मू-कश्मीर से चंडीगढ़ ट्रांसफर किया जाए। इसके अलावा जब तक केस चंडीगढ़ ट्रांसफर नहीं हो जाता, तब तक इस केस की जांच आगे न बढ़ाई जाए। पीड़ित परिवार को इस बात का डर है कि जम्मू-कश्मीर के अंदर इस केस का ट्रायल ठीक से नहीं हो पाएगा। साथ ही याचिका में कहा गया है कि नेताओं को भी आरोपियों और खासकर नाबालिग आरोपी से न मिलने दिया जाए।

    वहीं दूसरी तरफ सीजेएम कोर्ट में आज सभी आरोपियों के पेशी हुई। सीजेएम कोर्ट में आज से सुनवाई शुरू हो गई है, लेकिन सुनवाई के पहले दिन ही कोर्ट ने केस की अगली तारीख दे दी है। अब 28 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी। सुनवाई के बाद अभियुक्तों के वकील अंकुर शर्मा ने कहा, ‘न्यायालय ने निर्देश दिया है कि सभी आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी दी जाएं। हम नार्को टेस्ट के लिए तैयार हैं। अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।

    सीजेएम कोर्ट में पेशी के दौरान आरोपियों ने खुद को बेकसूर बताया है। आरोपियों के वकील की तरह अन्य आरोपियों ने भी इस केस में नार्को टेस्ट की बात कही है। आरोपी ने कहा है कि वो भी नार्को टेस्ट के लिए तैयार है, ताकि पूरी सच्चाई खुद ही सामने आ जाए। आपको बता दें कि कठुआ मामले में 8 आरोपी है, जिसमें से 1 नाबालिग है। इस मामले के मुख्य आरोपी सांझी राम की बेटी ने इस घटना को षड्यंत्रकारी बताया है। उसने कहा कि वो बच्ची कोई हिंदू-मुसलमान की बच्ची नहीं थी। उस बच्ची के साथ कोई दुष्कर्म नहीं हुआ है, उसका मर्डर हुआ है। उस मर्डर की छानबीन सीबीआई करे, तभी यह केस हल होगा अन्यथा निर्दोष ही फंसेंगे।

    वहीं पीड़िता के परिवार का केस लड़ रहीं वकील दीपिका राजावत को भी जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उनका कहना है कि उन्हें इस केस से हटने के लिए लगातार धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि इस केस के दौरान या फिर केस खत्म हो जाने के बाद भी मेरी हत्या कराई जा सकती है। दीपिका ने बताया कि उन्हें रविवार को धमकी दी गई थी कि तुम्हें माफ नहीं किया जाएगा।

  • हिन्दुत्व रक्षा के मूल एजेंडा से भटक रहा है संघ…?

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    हिंदू हित की बात करेगा वही देश पर राज करेगा,का नारा देने वाले संघ परिवार के ही एक सदस्य डॉ प्रवीण तोगडिया ने करोडो हिंदू जिसका बेसब्री से इन्तजार कर रहे हैं वह राम मंदिर की जो रट लगाइ उसका परिणाम यह आया की उन्हें अपनी ही सरकार के खिलाफ बोलने की सजा के तौर पर रास्ता दिखा दिया गया। और अब वे हिन्दुओं के लिए नया संगठन बनाए तो आरएसएस को बुरा नहीं मानना चाहिए।

    इस तरह का एक मत धीरे धीरे राम मंदिर के रामभक्तों में पनपना शुरू हो चुका है। यह मानना है राजनितिक घटनाओं पर अपनी पैनी नजर रखने वाले पर्यवेक्षकों का। १७ अप्रैल से तोगड़िया, मंदिर वहीं बनायेंगे का फिर एक बार नारा लेकर उसी तरह मैदान में उतर रहे जैसे वे कांग्रेस के शासन में ललकारते थे।

    इस सारे एपिसोड में मोदी को बचाने के लिए संघ परिवार ने राम मंदिर के लिए अपनी आँखे बंद कर ली और जातिवाद को बढ़ावा देने के लिए दलित, आदिवासी, ओबीसी को खुश करने के लिए नया मिशन हाथ में लेकर दूध से मक्खी को निकाल के फेंकने की तरह तोगड़िया को निकाल दिया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है की बीजेपी ने हमेश ये वादा किया की केंद्र में जब भी पूर्ण बहुमत मिलेगा राम मंदिर के लिए कानून बनायेंगे।

    २०१४ में नरेन्द्र मोदी को पूर्ण बहुमत मिला तब तोगडिया की तरह करोडों हिन्दू में ऐसी आशा जगी की बस अब तो राम मंदिर का काम शुरू हो ही गया समझो। लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तब वीएचपी के तोगडिया ने मोदी और संघ एवं बीजेपी को वादा याद करवाया। लेकिन नतीजा जब नहीं निकला तब तोगडिया ने जाहिर में संसद में कानून बनाने का मुद्दा छेड़ा तब आखिर उन्हें ही निकाल दिया।

    और इस सब खेल में संघ की भूमिका राम मंदिर के हित की नहीं किन्तु मोदी के हित की तोगडिया को लगी तो उसमे कसूर तोगडिया का नहीं परन्तु संघ के वरिष्ठ नेताओं का है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का यह भी कहना है की गांधीजी ने कहा था की आज़ादी के बाद कांग्रेस का विसर्जन किया जाना चाहिए। कांग्रेस का तो विसर्जन नहीं हुआ लेकिन लगता है की मोदी संघ का विसर्जन कर के रहेंगे क्योंकि ज्यादातर संघ प्रचारक अब मोदीमय हो गए है।

    जैसा वे कहते है ऐसा हो रहा है। संघ के मुद्दे नागपुर से नहीं दिल्ली से तय हो रहे है ऐसा तोगड़िया समर्थकों का मानना है। संघ की विचारधारा अब मोदी की विचारधारा बनती जा रही है ऐसे में संघ की विश्वसनीयता भी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि तोगडिया को निकाले जाने के बाद मोहन भागवत ने दहांणु पालघर में ललकारा की यदि अयोध्या में राम मंदिर नहीं बना तो इस देश की संस्कृति की जड़ उखड़ जायेगी।

    जो बात, जो मुद्दा तोगडिया उठा रहे थे वह किसी को नहीं भाया और जब वही बात भागवत ने कही और जोर देकर कही तो क्या भागवत के खिलाफ कदम लेना चाहिए।
    तोगड़िया का अनशन आज १७ से अहमदाबाद में शुरू हो रहा है हालांकि पुलिस द्वारा सार्वजनिक अनशन की अनुमति न मिलने पर वे अब वीएचपी के कार्यालय बनाकर भवन में बैठ कर अपना अनशन शुरू करेंगे।

    हो सकता है की शायद उसकी भी अनुमति न मिले। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है की अब राम मंदिर का मामला कोर्ट के हवाले सौंप दिया गया है जब की संघ और मरते दम तक अशोक सिंघल यही कहते रहे की राम मंदिर कोई कोर्ट का विषय नहीं है। यह करोडों लोगों की आस्था का विषय है। फिर कोर्ट पर आश लगाए बैठना कहां तक ठीक है। हो सकता है की सरकार यह चाहती हो कि मंदिर बनाने का फैसला कोर्ट का है हमारा नहीं और सरकार कोर्ट के फैसले का सम्मान करेगी ऐसी कोई रणनीति पर जा रही हो। तोगड़िया को समर्थन देने वाले राम भक्तों का कहना है कि संघ अपने मूल एजेंडा से भटक कर मोदी बचाव में अटक गया है।

  • एटीएम में नकदी की तंगी, क्या जमाख़ोरी से हुआ है कैश संकट?

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    देश के विभिन्न इलाकों में नकदी की तंगी और एटीएम में नकदी उपलब्ध नहीं होने की खबरों के बीच देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक का कहना है कि पिछले 24 घंटों में उसकी एटीएम मशीनों में नकदी की स्थिति सुधरी है।
    इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक , केनरा बैंक और एक्सिस बैंक ने भी दावा किया है कि उनकी एटीएम मशीनों में नकदी की कमी कुछ ही इलाकों तक सीमित है। चुनावी राज्य कर्नाटक समेत उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में अचानक बढ़ी नकदी की मांग से वहां कई एटीएम मशीनों और बैंक शाखाओं में नकदी की कमी बनी हुई है।
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    आरबीआई का आश्वासन, कोई तंगी नहीं
    हालांकि, सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने आश्वासन दिया है कि देश में नकदी की कोई तंगी नहीं है। स्टेट बैंक के उप प्रबंध निदेशक ( मुख्य परिचालन अधिकारी ) नीरज व्यास ने एक बयान में कहा , ‘स्टेट बैंक की एटीएम मशीनों में पिछले 24 घंटों में नकदी की स्थिति बेहतर हुई है। नकदी उपलब्धता को बेहतर बनाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।
    जल्द होगी सामान्य स्थिति
    कुल मिलाकर नकदी की कमी की समस्या जल्द से जल्द संभावित समय के भीतर सामान्य स्थिति में आ जाएगी। उन्होंने कहा कि बैंक लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और एटीएम मशीनों में नकदी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास कर रहा है।
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    cash atm
    बैंक के पास पर्याप्त नकदी
    बैंक के एक प्रवक्ता ने कहा कि बैंक के एटीएम में नकदी की स्थिति सामान्य तौर पर 92% रहती है जो कल घटकर 85% रह गई थी लेकिन बुधवार को इसमें सुधार हुआ है। इस संबंध में एक्सिस बैंक से सवाल किए जाने पर उसने कहा कि उसके पास पर्याप्त नकदी है और वह ऐसे किसी संकट में नहीं घिरा है।
    कुछ इलाकों के एटीएम में नकदी की कमी
    इस संबंध में पंजाब नेशनल बैंक , बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि कुछ इलाकों में ही उनकी एटीएम मशीनों में नकदी की कमी की समस्या है और वह उससे निपटने के प्रयास कर रहे हैं।
    200 रु. के नोट से हुई समस्या
    एटीएम को 200 रुपए के नोट के अनुकूल बनाने में देरी देश के कुछ हिस्सों में नकदी संकट की एक वजह है। सूत्रों ने कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा 200 रुपए का नोट पेश किए जाने के बाद एटीएम को इसके अनुकूल बनाने का फैसला किया गया। यह अभियान तुरंत शुरू हो गया लेकिन देश के कुछ हिस्सों में इसमें देरी हुई। रिजर्व बैंक ने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में नकदी संकट की एक वजह एटीएम को तेजी से भरने में लॉजिस्टिक की समस्या है। साथ ही एटीएम को नए जारी नोट के अनुकूल बनाने का काम भी चल रहा है।
    2000 रुपए के नोट की छपाई रुकी
    इस बीच, पिछले कुछ दिन से 2,000 रुपये के नोट की छपाई भी रुकी हुई है। आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग ने कहा कि 2,000 के नोट की और आपूर्ति करने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह पहले से ही अत्यधिक आपूर्ति की स्थिति में है।
    एटीएम कैश संकट
    • देश के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक का स्थिति में सुधार का दावा
    • एसबीआई ने कहा, 24 घंटे में उसके एटीएम में नकदी की स्थिति सुधरी
    • पीएनबी, केनरा बैंक और एक्सिस बैंक ने भी स्थिति सुधार का दावा किया
    • बैंकों ने कहा, नकदी की कमी कुछ ही इलाकों तक सीमित
    • कुछ राज्यों में अचानक बढ़ी नकदी की मांग से एटीएम हुए खाली

  • नोटबंदी जैसे हालात, ATM के बाहर फिर लगी लंबी लाइन, जेटली ने बताई वजह

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    नई दिल्ली : 

    एक बार फिर देश के कई राज्यों में एटीएम मशीन के बाहर लंबी-लंबी लाइन लगनी शुरू हो गई है। लोगों को फिर कैश की कमी के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

    मध्य प्रदेश के भोपाल में कई दिनों से लोग एटीएम से पैसे निकालने की कोशिश में लगे हैं। लोगों का कहना है कि हम नकदी संकट का सामना कर रहे हैं, ATM से रुपये नहीं निकल रहे। यह स्थिति 15 दिन से बरकरार है।

    वही वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ऐसे हालात पर सफाई देते हुए कहा, ‘देश में जरूरत से ज्यादा नोट सर्कुलेशन में हैं और बैंकों में भी पर्याप्त नोट उपलब्ध हैं। सरकार ने देश में करंसी के हालात की समीक्षा की है। ऐसे हालात अचानक कैश की ज्यादा डिमांड की वजह से हुए हैं। जहां कैश की किल्लत है उसे दूर किया जाएगा।’

    अरुण जेटली से पहले वित्त राज्यमंत्री एसपी शुक्ला ने करेंसी की कमी को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास अभी 1,25,000 करोड़ रुपये की कैश करंसी है। एक समस्या यह है कि कुछ राज्यों के पास कम (कैश) करंसी है और कुछ के पास ज्यादा है। सरकार ने राज्य-स्तर पर कमिटी गठित कर दी हैं और RBI ने भी एक राज्य से दूसरे राज्य को नकदी ट्रांसफर करने के लिए कमिटी गठित कर दी है। यह 3 दिन में हो जाएगा।’

    कैश क्रंच को लेकर विपक्ष सरकार पर एक बार फिर हमलावर हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।

    अमेठी दौरे के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अच्छे दिनों का वादा किया था, लेकिन देश एक बार फिर कतारों में खड़ा है। क्या इन्हीं अच्छे दिनों की बात की जा रही थी। राहुल ने कहा कि हमें संसद में बोलने नहीं दिया जाता है, अगर मैं 15 मिनट संसद में भाषण दूं तो प्रधानमंत्री हमारे सामने खड़े नहीं हो पाएंगे।

    वहीं टीएमसी सांसद डेरेके ओ ब्रायन ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा- यह एक वित्तीय आपातकाल है। पीएम मोदी ने कहा था कि सबकुछ 50 दिनों में ठीक हो जाएगा, लेकिन अब 1.5 साल से ज्यादा हो चुके हैं और अभी भी नकदी संकट है।’

    नकदी में कमी को लेकर SBI के अध्यक्ष रजनीश कुमार ने कहा- कैश की कमी का एक कारण है कि खरीदी का मौसम आ गया है और किसानों को भुगतान किया गया है। जहां तक एसबीआई का सवाल है तो महाराष्ट्र और मुंबई में नकदी की कमी नहीं है।’

    आर्थिक मामलों के विभाग के सेक्रेटरी एससी गर्ग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में हम हर दिन 2500 करोड़ 500 के नए नोट सप्लाई करेंगे। एक महीने में लगभग 70000-75000 करोड़ रुपये की छपाई कर देंगे।

    वहीं नोटबंदी के बाद फिर इस तरह के हालात को देखते हुए रिजर्व बैंक के सूत्रों का कहना है कि असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में लोगों के जरूरत से ज्यादा नकदी निकालने की वजह से यह संकट खड़ा हुआ है।

    आपको बता दें 8 नवंबर 2017 को सरकार ने देश में सभी पूराने 500 और 1000 के नोटों को अवैध घोषित कर दिए थे। उस वक्त भी हालात ऐसे ही थे जब लोगों को कई घंटो तक लाइन में पैसे निकालने के लिए खड़ा होना पड़ता था।

  • BJP में बड़ा फेरबदल, राकेश को एमपी की कमान, राजस्थान अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

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    नई दिल्ली, आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित 2 राज्यों में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। मध्यप्रदेश में नंदकुमार सिंह चौहान के स्थान पर जबलपुर से सांसद राकेश सिंह को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, राजस्थान बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने पद से इस्तीफा दे दिया है।

    बीजेपी के मुख्यालय प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा संगठनात्मक नियुक्तियों के संदर्भ में एक आदेश जारी किया। इसमें मध्य प्रदेश इकाई का अध्यक्ष राकेश सिंह को बनाया गया है। वहीं निवर्तमान अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के अलावा राजस्थान के अशोक परनामी, आंध्र प्रदेश के डॉ. के हरिबाबू को भाजपा कार्यसमिति का सदस्य नियुक्त किया गया है।

    ज्ञात हो कि, पिछले काफी समय से भाजपा में प्रदेशाध्यक्ष बदलने की कवायद चल रही थी। भाजपा कोर ग्रुप की देर रात तक बैठक चली और उसमें मंत्री भूपेंद्र सिंह, नरोत्तम मिश्रा, राजेंद्र शुक्ला और महामंत्री वी.डी. शर्मा के नाम पर चर्चा हुई लेकिन इनमें से किसी भी नाम पर सहमति नहीं बनी। बाद में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सहमति से जबलपुर से सांसद राकेश सिंह को अध्यक्ष बनाने का निर्णय हुआ।

    इसके बाद पार्टी हाईकमान को अवगत कराया गया। भाजपा में देर रात तक चले घटनाक्रम में नंद कुमार सिंह चौहान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया जिसके बाद कोर ग्रुप और मुख्यमंत्री चौहान ने राकेश सिंह के नाम पर मुहर लगा दी।राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष अशोक परनामी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

    हालांकि, अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष अशोक परमानी ने किस वजह से इस्तीफा दिया है। लेकिन, परनामी ने अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भेज दिया है। इस पद से इस्तीफे के बाद बीजेपी अध्यक्ष ने सांसद अशोक परनामी, नंद कुमार सिंह चौहान और डॉ. के हरिबाबू (आंध्र प्रदेश) को बीजेपी की राष्ट्रीय कार्य समिति का सदस्य नियुक्त किया है।