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  • Hot news : 5 साल में 74 करोड़ की सब्सिडी दी केन्द्र सरकार ने, जानिये किसको मिली ये सब्सिडी !

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    देश में पेट्रोलियम पदार्थो को बाजार के हवाले किया जा चुका है, हर रोज दाम ऊंचे-नीचे हो रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों को रसोई गैस उपलब्ध कराने के लिए आमजन से गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने का आग्रह करते नजर आते हैं, मगर आपको यह जानकार हैरानी होगी कि हमारे माननीय सेवकों यानी संसद सदस्यों को संसद की कैंटीनों से सस्ता भोजन मुहैया कराने पर पांच वर्षो में 74 करोड़ रुपये की सब्सिडी देनी पड़ रही है।

    वैसे तो निर्वाचित प्रतिनिधि अपने को ‘जनता का सेवक’ बताने से नहीं हिचकते, मगर एक बार चुनाव जीतने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में आने वाले बदलाव का किसी को अंदाजा नहीं है। एक तरफ जहां सांसदों को लगभग डेढ़ लाख रुपये मासिक पगार व भत्ते मिलते हैं, वहीं बिजली, पानी, आवास, चिकित्सा, रेल और हवाई जहाज में यात्रा सुविधा मुफ्त मिलती है। इतना ही नहीं, एक बार निर्वाचित होने पर जीवनर्पयत पेंशन का भी प्रावधान है।

    संसद के दोनों सदनों- लोकसभा और राज्यसभा में करोड़पति सांसदों की कमी नहीं है, उसके बावजूद उन्हें संसद परिसर में स्थित चार कैंटीनों में सस्ता खाना दिया जाता है। वास्तविक कीमत और रियायती दर पर दिए जाने वाले खाने के अंतर की भरपाई लोकसभा सचिवालय यानी सरकार को करनी होती है। औसत तौर पर हर वर्ष कैंटीन से सांसदों को उपलब्ध कराए जाने वाले सस्ते भोजन के एवज में 15 करोड़ की सब्सिडी के तौर पर भरपाई करनी होती है।

    मध्य प्रदेश के नीमच निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने सूचना के अधिकार के तहत सांसदों को रियायती दर पर मिलने वाले भोजन के चलते सदन या सरकार पर पड़ने वाले आर्थिक भार की जो जानकारी हासिल की, वह चौंकाने वाली है। बताया गया है कि बीते पांच सालों में सांसदों के सस्ते भेाजन पर 73,85,62,474 रुपये बतौर सब्सिडी दी गई।

    गौड़ द्वारा मांगी गई जानकारी पर लोकसभा सचिवालय की सामान्य कार्य शाखा के उप-सचिव मनीष कुमार रेवारी ने जो ब्यौरा दिया है, उससे एक बात तो साफ होती है कि माननीय सेवकों ने हर वर्ष सिर्फ कैंटीन में किए गए भोजन से सरकार पर औसतन 15 करोड़ का भार बढ़ाया है।

    सूचना के अधिकार के तहत दिए गए ब्यौरे के मुताबिक, वर्ष 2012-13 से वर्ष 2016-17 तक संसद कैटीनों को कुल 73,85,62,474 रुपये बतौर सब्सिडी दिए गए। अगर बीते पांच वर्षो की स्थिति पर गौर करें तो पता चलता है कि वर्ष 2012-13 में सांसदों के सस्ते भोजन पर 12,52,01867 रुपये, वर्ष 2013-14 में 14,09,69082 रुपये सब्सिडी के तौर पर दिए गए।

    इसी तरह वर्ष 2014-15 में 15,85,46612 रुपये, वर्ष 2015-16 में 15,97,91259 रुपये और वर्ष 2016-17 में सांसदों को सस्ता भोजन मुहैया कराने पर 15,40,53,3654 रुपये की सब्सिडी दी गई।

    गौड़ कहते हैं, “प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह गरीबों को रसोई गैस देने के लिए सक्षम परिवारों से सब्सिडी छोड़ने की अपील की थी, उसी तरह सांसदों को कैंटीन से सस्ता खाना उपलब्ध कराने के लिए दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ न लेने की अपील करेंगे, यह उम्मीद करता हूं।”

    सूचना के अधिकार के तहत संसद कैंटीन में सस्ता खाना सांसदों को देने के लिए सब्सिडी देने का प्रावधान का खुलासा इसलिए अहम हो जाता है, क्योंकि सरकार किसानों, पेटोलियम पदार्थो पर मिलने वाली सब्सिडी को अपरोक्ष रूप से बंद करने के लिए तरह-तरह के तर्क देती है, मगर सांसदों को सस्ता खाना खिलाने में गुरेज नहीं करती। यह वह वर्ग है, जिसकी मासिक पगार डेढ़ लाख रुपये से कम नहीं है। उनके लिए अन्य सुविधाएं भी अलग से हैं, मगर कहने को ‘सेवक’ हैं।

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  • CBSE paper leak : दिल्ली पुलिस ने गूगल से मांगी ई-मेल आईडी की जानकारी

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    नई दिल्ली :  सीबीएसई पेपर लीक मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गूगल को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है।क्राइम ब्रांच ने गूगल से उस व्यक्ति के ई-मेल आईडी की जानकारी मांगी है जिसने सीबीएससी अध्यक्ष को 10 वीं कक्षा के गणित के प्रश्न पत्र लीक होने को लेकर मेल किया था।

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    क्राइम ब्रांच ने बताया है कि सीबीएसई के बोर्ड के अध्यक्ष अनीता करवाल को 28 मार्च को गणित परीक्षा से एक दिन पहले ई-मेल मिला जिससे पेपर लीक होने की बात पता चली।

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    दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने कहा- जो ई-मेल सीबीएसई के अध्यक्ष को मिला है उसमें हाथों से लिखे प्रश्न पत्रों के 12 पन्ने थे जिसे व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किया गया था।

    आपको बता दें सीबीएसई ने दसवीं कक्षा के गणित और 12 वीं के अर्थशास्त्र के पेपर लीक होने के बाद इन दोनों परीक्षाओं को दोबारा कराने की घोषणा की है और साथ ही पूलिस मामले की जांच कर रही है।

    पुलिस जांच में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अब 10 व्हाट्सएप ग्रुप की पहचान की है जिसके जरिये पेपर लीक को अंजाम दिया गया था।

    बताया जा रहा है कि बारहवीं कक्षा के अर्थशास्त्र का पेपर व्हाट्सएप के जरिये ही लीक किया गया था। पेपर को कम से कम 10 व्हाट्सएप ग्रुप में भेजा गया था।क्राइम ब्रांच ने कहा है कि इन सभी ग्रुप में करीब 50 से 60 सदस्य हैं। मामले की जांच और पूछताछ जारी है।

  • किसी के साथ नहीं करेंगे गठबंधन, अपने दम पर बनाएंगे सरकार- शाह

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    बीजेपी प्रमुख अमित शाह ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना से इंकार किया. उन्होंने कहा कि बीजेपी सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी और अपने दम पर सरकार बनाएगी. अमित शाह का मुख्यमंत्री के गृह जनपद मैसूर में यह दूसरा दौरा है. आज दौरे का दूसरा दिन है. कल शनिवार को पहले दिन अमित शाह को कैबिनेट मंत्री अनंत हेगड़े के एक बयान के चलते दलित नेताओं का विरोध झेलना पड़ा था. कांग्रेस ने इसको व गुजरात के भावनगर में दलित युवा के घुड़सवारी करने पर हत्या किए जाने के मुद्दे को भुनाने की भी कोशिश की गई.
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    इसी दौरान कांग्रेस व बीजेपी दोनों पार्टियों ने एक-दुसरे के खिलाफ चुनाव आयोग के पास आचार संहिता के उल्लंघन करने की शिकायत की. बीजेपी ने सिद्धारमैया पर दो महिलाओं को दो-दो हज़ार रुपये देने को लेकर चुनाव आयोग के पास शिकायत की तो वहीं कांग्रेस ने कहा कि अमित शाह द्वारा एच राजू की मां को 5 लाख रुपये का चेक दिया जाना आचार संहिता का उल्लंघन था.

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  • सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त, SC/ST Act को लेकर स्टे देने से किया इनकार, दंगाईयों को जमकर लगाई फटकार

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    सुप्रीम कोर्ट ने एसटी-एससी संरक्षण विधेयक को लेकर अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने ने केंद्र सरकार की 20 मार्च के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की पुनर्विचार याचिका पर रोक लगाने से मना कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वो एससी-एसटी संरक्षण एक्ट में हुए बदलाव पर  फिलहाल रोक नहीं लगा सकती।
    यही ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों से इस मामले में दो दिन के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश भी दिया है। सुप्रीम कोर्ट में एसटी-एससी संरक्षण विधेयक में बदलाव को लेकर अगली सुनवाई दस दिन बाद होगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले को लेकर दलील दी है कि कोर्ट इस एक्ट के खिलाफ नहीं है, लेकिन कोर्ट को यह भी देखना होगा कि इस एक्ट से किसी निर्दोष के साथ नाइंसाफ ना हो और उसे सजा नहीं मिलनी चाहिए।
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    इसके इलावा सुप्रीम कोर्ट ने कल देशभर में इस एक्ट के विरोध में हुई हिंसा को लेकर प्रदर्शनकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि जो लोग सड़को पर हिंसा कर रहे हैं, दरअसल उन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट को पूरा पढ़ा ही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें निर्दोष लोगों की चिंता है जो लोग सालों से जेलों में बंद हैं।

    गौरतलब है कि कल एसटी-एससी संरक्षण विधेयक में बदलाव को लेकर देशभर में बंद का ऐलान किया गया था। इस बंद के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में 9 लोगो को अपनी जान गवानी पड़ी थी। और करोड़ो रूपये की सरकारी संम्पति को निकसान पहुंचाया गया था।
    गौरतलब है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को फैसले पर असहमति जताते हुए कोर्ट के समक्ष इस मामलें में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश संविधान के अनुच्छेद 21 में एसटी-एससी समुदाय को संविधान द्वारा दिए गए विशेषाधिकार का उल्लंघन बताया था।
    एसटी-एससी संरक्षण विधेयक में बदलाव को लेकर सरकार की तरफ से पुनर्विचार याचिका पर केंद्र सरकार को झटका देते हुए अपने पुराने आदेश पर स्टे देने से मना कर दिया है। सप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सरकार की मुश्किलें बढ़ने वाली है। आपको बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई खुली अदालत में की थी।
    सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को लोक सेवकों के खिलाफ कठोर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून के दुरुपयोग पर विचार करते हुए कहा कि इस कानून के तहत दर्ज ऐसे मामलों में फौरन गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए। न्यायालय ने कहा कि एससी और एसटी कानून के तहत दर्ज मामलों में किसी भी लोक सेवक की गिरफ्तारी से पहले न्यूनतम पुलिस उपाधीक्षक रैंक के अधिकारी द्वारा प्राथमिक जांच जरूर कराई जानी चाहिए।
    न्यायमूर्ति आदर्श गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कहा कि लोक सेवकों के खिलाफ एससी और एसटी कानून के तहत दर्ज मामलों में अग्रिम जमानत देने पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। पीठ ने यह भी कहा कि एससी और एसटी कानून के तहत दर्ज मामलों में सक्षम प्राधिकार की अनुमति के बाद ही किसी लोक सेवक को गिरफ्तार किया जा सकता है।
    न्यायमूर्ति आदर्श गोयल और ललित की पीठ ने कहा कि कानून के प्रावधानों के तहत दर्ज केस में सरकारी कर्मचारियों को अग्रिम जमानत देने के लिए कोई बाधा नहीं होगी। इस दौरान कोर्ट ने माना है कि एससी और एसटी एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है।

  • रेल मंत्रालय की नई सुविधा शुरू, रेलवे सैलून अब आम यात्रियों के लिए भी उपलब्ध

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    New Delhi: Inside view of the first private saloon tour which departed from Old Delhi Railway Station on Friday, attached to the Jammu Mail 

    नई दिल्लीः यात्रियों की सुविधा के लिए रेल मंत्रालय की ओर से नई सुविधा शुरू की गई है। नई सुविधा के तहत रेलवे अधिकारियों के लिए प्रयोग होने वाले रेलवे सैलून अब आम यात्रियों के लिए भी उपलब्ध होंगे। आई.आर.सी.टी.सी. ने इस तरह की पहली सेवा पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से शुरू की है। निजी यात्री द्वारा जम्मू मेल में बुक कराया गया पहला सैलून वैष्णो देवी कटरा की यात्रा पर पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से रवाना किया गया।

    2 लाख में बुक कराया सैलून
    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रेलवे सैलून में यात्रा कर रहे परिवार ने इसकी बुकिंग आई.आर.सी.टी.सी. से 2 लाख रुपए में 6 यात्रियों के लिए बुक कराया गया था। जो 4 दिन की यात्रा पर निकले हैं। रेलवे की तरफ से अधिकारियों के लंबे रूट पर यात्रा करने के लिए इन सैलून को अंग्रेजों के समय में तैयार किया गया था। इसमें चलते-फिरते लग्जरी होटल की तरह सुविधाएं होती है। इसमें हर बेडरूम में अटैच्ड टॉयलेट-बाथरूम होते हैं।

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    पूर्व राष्ट्रपति कर चुके हैं यात्रा
    बता दें कि सैलून ब्रिटिश काल में जब रेलवे लाइन बिछाई जा रही थी, तो दूरदराज के इलाकों में ठहरने की व्यवस्था नहीं होती थी। उस वक्त अधिकारियों के ठहरने के लिए ट्रेन में ही स्पेशल डिब्बों का इंतजाम किया जाता था, इन डिब्बों को ही सैलून कहा जाता है। आज भी ये सुविधा रेलवे अधिकारियों को दी जाती है।

    गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने साल 2006 में इससे आखिरी यात्रा की थी। रेलवे सैलून में पूर्व राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद, डॉ एस राधाकृष्णन, डॉ जाकिर हुसैन, वीवी गिरि और डॉ एन संजीव रेड्‌डी ने तक यात्रा कर चुके हैं।

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    क्या हैं सैलून कोच?
    – रेलवे के सैलून कोच उसके वरिष्ठ अफसरों के लिए होते हैं।
    – वे हादसे वाली जगह या दूर-दराज के इलाकों में जांच पर जाने के लिए इन कोच का इस्तेमाल करते हैं।
    – देश के सभी रेलवे जोन में मौजूद सलून को मिलाकर ऐसे कुल 336 कोच हैं।
    – इनमें से 62 वातानुकूलित हैं।

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    New Delhi: Inside view of the first private saloon tour  

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  • दलितों के आंदोलन से बैकफुट पर मोदी सरकार, भाजपा नेताओने दी सफाई !

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    नई दिल्ली, SC/ST Act  पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलितों और आदिवासियों के भारत बंद का असर मोदी सरकार से लेकर बीजेपी तक देखने को मिल रहा है। यही कारण है कि सरकार के मंत्री से लेकर बीजेपी का नेतृत्व इस मामले में सफाई दे रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस मामले में संसद में बयान दिया, वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ट्विटर पर अपनी बात रखी। उन्होंने यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि बीजेपी दलितों के खिलाफ नहीं है। अमित शाह ने दलित आंदोलन को चुनावी राजनीति करार देने के साथ ही यह भी बताने की कोशिश की है कि सरकार दलितों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है।

    शाह ने ट्वीट किया, यह स्क्रिप्ट अब पुरानी हो चुकी है। हर चुनाव से पहले एक ही ग्रुप अपने हितों के लिए ऐक्टिव हो जाता है और आरक्षण को लेकर भ्रम फैलाने का काम करता है। बीजेपी का स्टैंड साफ है, हम बाबा साहेब के संविधान और दलितों को मिले अधिकारों में पूरा विश्वास रखते हैं। अमित शाह ने एससी-एसटी ऐक्ट को मजबूत करने को लेकर सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि हमने 2015 में संशोधन विधेयक लाकर इसे और मजबूत बनाने का काम किया है।

    आरएसएस और डीएनए पर सवाल उठाने वाले ट्वीट कांग्रेस को घेरा  
    राहुल गांधी की ओर से आरएसएस और बीजेपी के डीएनए पर सवाल उठाने वाले ट्वीट के जवाब में शाह ने लिखा, ‘पीएम नरेंद्र मोदी के डीएनए पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस ने खुद बाबासाहेब आंबेडकर का दो बार अपमान किया। संसद के सेंट्रल हॉल में उनकी तस्वीर नहीं लगने दी और अपने शासन काल में दशकों तक भारत रत्न नहीं दिया।शाह ने एक और ट्वीट किया, हम अपने दलित भाइयों और बहनों को न्यू इंडिया का निर्माणकर्ता बनाने के लिए लगातार कोशिश करते रहेंगे। हम उनके सपनों और उम्मीदों को पूरा करेंगे। जय भीम जय हिंद।

    SC/ST एक्ट पर बोले राजनाथ सिंह
    इससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में इस मामले में कहा कि सरकार दलितों और आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए वचनबद्ध है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एससी/एसटी एक्ट में सरकार पार्टी नहीं थी। उन्होंने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर अफवाह फैलाई जा रही है।
    कानून मंत्री एक्टिव दूसरी ओर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि छुट्टियों की वजह से केंद्र सरकार को पुनर्विचार याचिका दायर करने में देरी हुई। उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इत्तेफाक नहीं रखते। गौरतलब है कि पुनर्विचार याचिका दायर करने में हुई देरी पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    संघ ने कहा-फैसले से हमारा संबंध नहीं 
    वहीं राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ ने भी इस मामले में अपनी बात रखी। आरएसएस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आड़ में संघ के खिलाफ जिस तरह विषैले दुष्प्रचार की कोशिश की जा रही है, वह आधारहीन और निंदनीय है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कोर्ट के इस फैसले से कोई संबंध नहीं है। संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने कहा कि संघ जाति के नाम पर किसी भी भेदभाव या अत्याचार के खिलाफ है और इसका हमेशा से विरोध करता रहा है। इस प्रकार के अत्याचारों को रोकने के लिए बनाए गए कानूनों का कठोरता से पालन होना चाहिए।

  • 20 घंटे में तीन मुठभेड़ों में मारे गये 8 आतंकवादी, दो सैनिक शहीद, दो नागरिकों की भी मौत

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    जम्मू-कश्मीर में पिछले 20 घंटे में तीन मुठभेड़ो में आठ आतंकवादी मारे गये हैं। मुठभेड़ में सेना के दो जवान शहीद हो गये हैं और दो आम नागरिक भी मारे गये हैं। दक्षिण कश्मीर के शोपियाँ में दो जगहों पर और अनंतनाग में एक जगह पर आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ हुई। रविवार (एक अप्रैल) को जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ में हुई मुठभेड़ में सात आतकंवादी मारे गये। ये मुठभेड़ शोपियाँ के द्रागद में हुई। रविवार सुबह की शोपियाँ के कछडूरा में भी सुरक्षाबलों की आतंकवादियों से मुठभेड़ हो गई। शनिवार-रविवार की दम्यानी रात को अनंतनाग में हुई मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया और एक पकड़ा गया।  सेना के प्रवक्ता के अनुसार मारे गए आतंकवादियो में वो दो आतंकवादी भी शामिल हैं जिन्होंने भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट उमर फैयाद की हत्या की थी।

    हसीन जहां ने चली ये चाल, शमी का करियर पूरी तरह से ‘तबाह’ करने के लिए

    उत्तर प्रदेश पूरे देश में बिजली चोरी मामले में शीर्ष पर , केंद्र सरकार ने जारी किए खास निर्देश

    सुरक्षाबलों को शनिवार (31 मार्च) को देर रात आतंकवादियों के ठिकाने के बारे में खुफिया जानकारी मिली। सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों की घेराबंदी को तो वो जवाब में गोलीबारी करने लगे। अनंतनाग में हुई मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया और एक अन्य गिरफ्तार कर लिया गया है। आतंकवादी की पहचान रऊफ अहमद के रूप में हुई है। रऊफ अहमद पिछले महीने ही आतंकवादियों गिरोह में शामिल हुआ था।

    अनंतनाग में मारा गया आतंकी रऊफ अहमद और गिरफ्तार आतंकी स्थानीय नागरिक हैं। अनंतनाग में सुरक्षाबलों ने डियालगाम में छिपे आतंकवादियों को आत्मसमर्पण की चेतावनी दी लेकिन उन्होंने जवाब में गोलीबारी शुरू कर दी। शनिवार (31 मार्च) को आतंकवादियों ने एक पुलिस काफिले पर हमला कर दिया था जिसमें एक पुलिसकर्मी घायल और एक आम नागरिक घायल हो गया था। आतंकवादियों ने गुरुवार (29 मार्च) को भी एक पुलिस अफसर की हत्या कर दी थी। आतंकवादी हमले में पुलिस अफसर की पत्नी घायल हो गईं।

    जम्मू-कश्मीर में हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकवादी बुरहानी वानी की मुठभेड़ में मौत के बाद आतंकवाद से जुड़ने वाले नौजवानों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। वहीं भारतीय सुरक्षाबलों ने घाटी में आतंकवाद पर काबू करने के लिए विशेष अभियान चलााय है जिसकी तहत पिछले एक साल में सौ से ज्यादा आतंकवादी मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं। भारत सरकार के अनुसार पड़ोसी देश पाकिस्तान कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। भारत सरकार के अनुसार पाकिस्तान कश्मीरी नौजवानों को आतंकवाद से जुड़ने के लिए उकसाने के अलावा उन्हें आतंकी प्रशिक्षण और आर्थिक मदद भी देता है। हालाँकि पाकिस्तान सरकार भारत के आरोपों को गलत बताती है।

     

  • ईराक से 38 भारतीयों के शव लेकर अमृतसर पहुंचे वीके सिंह,

    चंडीगढ़, इराक के मोसुल में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट द्वारा मारे गए भारतीय नागरिकों के अवशेष को लेकर विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह सोमवार भारत लौटे। वीके सिंह 38 भारतीयों के शवों को लेकर इराक की राजधानी बगदाद से रवाना हुए थे। साल 2014 में मोसुल पर कब्जा करने के बाद आईएस आतंकियों ने 39 भारतीयों की हत्या कर दी थी। एक मृतक की शिनाख्त न हो पाने की वजह से 38 भारतीयों के शव वापस लाए गए हैं।

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    पंजाब सरकार ने मारे गए लोगों के परिजनों को 5 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बीती 20 मार्च को संसद को बताया था कि इराक में काम कर रहे जिन 39 भारतीयों का 2014 में मोसुल से अपहरण हो गया था, उनकी हत्या हो गई है। सुषमा ने कहा था कि लापता 39 भारतीय नागरिकों में से 38 के डीएनए नमूनों के आधार पर उनकी शिनाख्त हुई थी।

    मंत्री वीके सिंह अवशेष को लेकर पहले पंजाब के अमृतसर एयरपोर्ट पहुंचे। सिंह इसके बाद पटना जाएंगे, जहां वह बिहार के मृतक लोगों के अवशेष उनके परिजनों को सौपेंगे। बता दें कि मारे गए 39 लोगों में 27 पंजाब के रहने वाले थे और 4 बिहार के थे। अमृतसर में पत्रकारों से बात करते हुए वीके सिंह ने कहा कि बहुत मुश्किल से मृतकों का डीएनए सैंपल मैच हुआ। उन्होंने कहा, ‘ट्रेंड लोगों ने पूरी ताकत झोंककर मृतकों के डीएनए सैंपल मैच कराए।

    यह काफी मुश्किल काम था। भारत सरकार की तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी। मैं चार बार इराक गया था। इसके बाद भारतीयों के अवशेष लाए जा सके हैं।’मैं पहली बार 11 जुलाई को इराक गया था। उस समय वहां युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था। उस समय हमें जो वहां जानकारी मिली वह लेकर मैं चला आया।

    फिर अक्टूबर में मैं इराक गया। जहां भारतीय लोग काम करते थे उस फैक्ट्री के मालिक को पकड़ा और उससे भारतीयों की जानकारी मांगी। रेडियो पर उदघोषणा करवाई। मोसुल के बदूश पहाड़ी में भारतीयों के अवशेष मिले।

    मृतक के परिजनों को नौकरी के सवाल पर सिंह ने कहा कि देश और राज्य की सरकार मिलकर फैसला लेगी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मृतकों के सभी परिजनों से उनकी परिवार की जानकारी मांगी। जैसी जिसकी योग्यता होगी उसके आधार पर सरकार कोई निर्णय करेगी।

  • Congress के ये तीनों अधिवक्ता सह सांसद नहीं कर सकेंगे चीफ जस्टिस की कोर्ट में वकालत ?

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    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे कांग्रेस के 3 सांसद अगर ऐसा करते हैं तो वो चीफ जस्टिस की कोर्ट में वकालात नहीं कर सकेंगे. यह फैसला बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से किया गया है. काउंसिल के मुताबिक, कोई भी ऐसा वकील जो सांसद या फिर विधायक है, अगर वो हाईकोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाता है तो वो फिर उन जजों की कोर्ट में जिरह नहीं कर सकेगा.

    कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा

    कांग्रेस के कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा वो वकील और सांसद भी हैं. ये तीनों अधिवक्ता सह सांसद सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं. बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट मनन मिश्रा ने कहा कि इस बारे में ज्यादातर सदस्य सहमत हैं.

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    Kapil Sibal, Abhishek Manu Singhvi

    उनके मुताबिक-ऐसे वकील जो सांसद या विधायक भी हैं. अगर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाते हैं तो फिर वो उन जजों की अदालतों में वकालात नहीं कर सकेंगे जिनके खिलाफ वो महाभियोग प्रस्ताव लाए हैं. मिश्रा के मुताबिक, इन वकीलों को पूरी तरह वकालात करने से नहीं रोका जा सकता. दूसरे शब्दों में कहें तो वो उन जजों की अदालतों को छोड़कर जिनके खिलाफ वो महाभियोग प्रस्ताव लाए हैं, किसी भी कोर्ट में जिरह कर सकते हैं.

    बार काउंसिल ऑफ इंडिया के इस फैसले का कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा ने विरोध किया है. उनका कहना है कि ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके आधार पर बार काउंसिल उन्हें इस तरह से रोक सके. बता दे कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट भारतीय जनता पार्टी के नेता और मशहूर वकील अश्विनी उपाध्याय की एक पिटीशन पर सुनवाई कर रहा है. अश्विनी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वो ऐसे वकीलों के लिए गाइडलाइन्स तय करे जो सांसद या विधायक भी हैं.

  • खास मिशन : अब केंद्र के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने में जुटे नायडू

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    नई दिल्ली , 2019 के लिए तैयारी शुरू हो गई है और अब ममता बनर्जी के बाद इसका संदेश आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू की तरफ से आ रहा है। एक तरफ देश में भारत बंद के दौरान हुई हिंसा का शोर है, वहीं नायडू चुपचाप एक खास मिशन में ही जुटे नजर आ रहे हैं। दरअसल आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगा एनडीए से अलग हुए नायडू अब केंद्र के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने में जुटे हैं।

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    इसकी एक झलक संसद में तब देखने को मिली जब नायडू एनसीपी, कांग्रेस समेत अन्य दलों के नेताओं से एक-एक कर मिलते देखे गए। इससे पहले ममता बनर्जी वन-टू-वन की रणनीति के तहत विपक्ष के सभी प्रमुख दलों से मुलाकात कर चुकी हैं। चंद्रबाबू नायडू ने सदन में गांधी प्रतिमा के आगे सिर झुका अपनी रणनीति की शुरुआत की।

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    इसके बाद आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की अपनी मांग के लिए समर्थन जुटाने हेतु नायडू की मुलाकातों का सिलसिला शुरू हुआ। इस क्रम में चंद्रबाबू नायडू ने एनसीपी चीफ शरद पवार से मुलाकात की। इसके बाद नायडू कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया और नैशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला से मिलते देखे गए। साफ तौर पर नायडू विपक्ष में नेताओं से वन-टू-वन करते दिखे जिसका टारगेट विशेष राज्य से आगे 2019 तक जाता दिख रहा है।

    इससे पहले भारत बंद के दौरान भी नायडू विपक्षी दलों के सुर में सुर मिलाते हुए देखे गए। नायडू ने इस संदर्भ में पीएम को एक पत्र लिख कहा था कि एससी-एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से ऐक्ट कमजोर होगा। उन्होंने पीएम मोदी से एससी-एसटी के हित में फैसला लेने का आग्रह किया था।

    विरोधी क्षत्रप 2019 लोकसभा चुनाव की आहट के साथ

    पहले ममता बनर्जी और अब चंद्रबाबू नायडू, विपक्ष के नेताओं से मुलाकात का इनका सिलिसिला 2019 की ही तरफ ही इशारा कर रहा है। पहले ममता ने दिल्ली में ताबड़तोड़ बैठकें की। ममता ने शिवसेना, एनसीपी, समाजवादी पार्टी, टीडीपी, आरजेडी, डीएमके और कांग्रेस से संपर्क साधा। ममता की वन-टू-वन मुलाकातों के बीच एक खबर यह भी सामने आई कि तृणमूल सुप्रीमो बीजेपी को हर राज्य में अलग-अलग घेरने की रणनीति बना रहीं हैं।

    ममता ने इस बीच टीआरएस चीफ के चंद्रशेखर राव के फेडरल फ्रंट की संभावनाओं को भी अपना समर्थन दिया। इससे एक सुगबुगाहट यह भी खड़ी हो गई कि ममता कहीं गैर कांग्रेसी फ्रंट की कोशिशों में तो नहीं जुटी हैं। हालांकि बाद में ममता ने साफ कर दिया कि वह कांग्रेस के भी संपर्क में हैं। इसके बाद आंध्र सीएम चंद्रबाबू नायडू भी कुछ इसी तरह की कवायद करते नजर आ रहे हैं।

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