Category: national

  • सियासी दलों में तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद तेज

    [object Promise]

    नई दिल्ली, लोकसभा चुनाव 2019 से पहले सियासी दलों में तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद तेज हो गई है। ये मोर्चा उन दलों का हो सकता है जोकि न तो भाजपा से हाथ मिलाकर खुश हैं और न ही कांग्रेस की नीतियां इन्हें पसंद है। साथ ही कुछ ऐसे दल भी है जोकि देश की राजधानी पर राज करने वाली आम आदमी पार्टी से नाराज हैं।

    [object Promise]
    third front

    दरअसल एक समय था जब तीसरा मोर्चे का नाम कांग्रेस को भी पसंद नहीं था- भाजपा तो हंसी उड़ाती ही थी। उनका तर्क था कि देश में द्विदलीय राजनीतिक प्रणाली ही सही है- दो दल हों। जनता उनमें से चुने। लेकिन इतने विशाल, विविधता वाले समाज-समूह में दो दल ही पर्याप्त नहीं है- दोनों पूंजीवादी नीतियों पर चलने वाले शोषण पर आधारित गैरबराबरी का समाज बनाने वाले राजनीतिक दलों को हटाने व जनवादी लोकतांत्रिकता के लिए तीसरा मोर्चा या तीसरी शक्ति जरूरी मानी गई।

    इसी मोर्चे के गठन की प्रक्रिया के विभिन्न चरण हैं। इन्हीं चरणों में एक चरण में आज तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। चंद्रशेखर राव ममता से मिलने के लिए कोलकाता पहुंचे।

    जहां ममता ने गुलदस्ते से उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं की यह मुलाकात गैर-भाजपा मोर्चे के गठन के लिए अहम मानी जा रही है। दोनों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत हुई या नहीं इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आ सकी है। राव राजनीतिक पार्टियों के लिए राष्ट्रीय मोर्चा बनाने को उत्सुक दिखाई दे रहे हैं।

    सीएम ऑफिस से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि राव कांग्रेस और भाजपा का विकल्प तलाश रहे हैं। इसलिए केंद्र स्तर पर एक समानांतर चलने वाली सरकार होनी चाहिए। राव का कहना है कि ये तीसरा मोर्चा राजनीतिक दलों का गठबंधन नहीं होगा बल्कि ये मोर्चा जनता के लिए होगा।

    बैठक के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने कहा कि ये सकारात्मक राजनीति है जिसे अच्छी शुरुआत माना जाता है। उधर पंजाब में अरविंद केजरीवाल की माफी के बाद आम आदमी पार्टी से अलग हुई लोक इंसाफ पार्टी के प्रमुख विधायक सिमरजीत बैंस ने आज घोषणा की कि 2019 के लोकभा चुनाव के लिए नया प्लेटफार्म तैयार किया जा रहा है जिसमें सुखपाल खैहरा, सुच्चा सिंह छोटेपुर व धर्मवीर गांधी जैसे नेता शामिल होंगे।

    Read More : HOT खबर : योगी आदित्यनाथ पर आई भारी मुसीबत, क्या हट सकते हैं अपने CM पद से ?

  • मोदी सरकार के खिलाफ फिर से अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, आज होगी बहुमत की परीक्षा

    [object Promise]

    नई दिल्ली :  संसद में आज फिर से हंगामे के आसार है। वाईएसआर कांग्रेस और तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) ने आज फिर से लोकसभा स्पीकर को अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने का नोटिस दिया है।

    सोमवार को भी दोनों दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था हालांकि हंगामे की वजह से संसद की कार्यवाही दिन भर तक के लिए स्थगित करनी पड़ी और इस प्रस्ताव को पेश नहीं किया जा सका।

    रेलवे में नौकरी को लेकर छात्रों का प्रदर्शन, रोकी ट्रेनें, ठप पड़ा यातायात

    वाईएसआर कांग्रेस के सांसद वाई वी सुब्बा रेड्डी ने एक बार फिर से लोकसभा स्पीकर को आज अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया है।

    वाईएसआर कांग्रेस के इस नोटिस के बाद मंगलवार को भी लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव को पेश किए जाने की संभावना है।

    कल्याणकारी एवं शांति प्रदान करने वाला स्वरूप है माता चन्द्रघण्टा

    आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के मुद्दे पर एनडीए से अलग हुई तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) और वाईएसआर कांग्रेस ने सोमवार को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया, हालांकि थोड़ी ही देर बाद दोनों दलों ने सदन में हंगामा करना शुरू कर दिया।

    दोनों दलों के सांसद हंगामा करते हुए लोकसभा स्पीकर के आसन के समीप आ गए, जिसकी वजह से लोकसभा को पहले दोपहर 12 बजे और फिर पूर दिन तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

    सरकार ने साधा विपक्ष पर निशाना

    अविश्वास प्रस्ताव से बेपरवाह दिख रही सरकार ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा है।

    केंद्रीय मंत्री जितेंद्र प्रसाद ने कहा, ‘एक तरफ तो वह अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ वह संसद में हंगामा कर रहे हैं ताकि प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकार नहीं किया जा सके।’

    प्रसाद ने कहा, ‘उन्हें खुद नहीं पता कि वह संसद में क्यों अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं?’

    गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा कि सरकार अविश्वास प्रस्ताव समेत सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है।

    हालांकि विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर अविश्वास प्रस्ताव की राह में रोड़ा डालने का आरोप लगाया है।

    समाजवादी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि तमिलनाडु की सत्ताधारी अन्नाद्रमुक सरकार के इशारे पर संसद में हंगामा कर रही ताकि अविश्वास प्रस्ताव को पेश होने से रोका जा सके।

    उन्होंने कहा, ‘विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन ऐसा लगता है कि अन्नाद्रमुक केंद्र सरकार के इशारे पर सदन को चलने नहीं दे रही है।’
    अविश्वास प्रस्ताव को मिला कांग्रेस का समर्थन

    केंद्र सरकार के खिलाफ पेश होने वाले पहले अविश्वास प्रस्ताव को कांग्रेस पार्टी ने समर्थन दिया है।

    वहीं एनडीए की सहयोगी शिव सेना ने बीजेपी को झटका देते हुए अविश्वास प्रस्ताव से दूरी बना ली है। शिव सेना ने कहा कि वह इस अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार और विपक्षी दल, दोनों में से किसी के साथ ख़ड़ी नहीं होगी।

    पेश हुआ अविश्वास प्रस्ताव तो भी नहीं गिरेगी सरकार

    केंद्र की मोदी सरकार को पहली बार संसद में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ सकता है।

    अगर लोकसभा स्पीकर तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) और वाईएसआर कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी दे भी देती है, तो इससे मोदी सरकार पर कोई असर नहीं होगा।

    आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलने की वजह से नाराज तेलुगू देशम पार्टी ने हाल ही में सरकार सेे अलग होने के साथ एनडीए से नाता तोड़ लिया है।

    क्या कहते हैं आंकड़े?

    लोकसभा में कुल सदस्यों की संख्या 543 है और फिलहाल सदन में 536 सांसद हैं।

    536 सांसदों में अकेले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के 273 सांसद हैं और यह संख्या मौजूदा लोकसभा के हिसाब से सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा यानी 269 से अधिक है।

    हालांकि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इसमें बीजेपी के सहयोगी दलों के सांसदों की संख्या शामिल नहीं है।

    टीडीपी के अलग होने के बाद बीजेपी के सहयोगी दलों के सांसदों की संख्या 56 है और अगर दोनों को मिला दिया जाए तो एनडीए के पास कुल सांसदों की संख्या 329 है।

    ऐसी स्थिति में अगर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मंजूरी मिल भी जाती है तो वह जाहिर तौर पर गिर जाएगा।

  • चुनावी कुरुक्षेत्र में Congress पांडव है और BJP कौरव है, जानिये किशनजी कहां है ?

    [object Promise]

    लोकसभा के आम चुनाव वैसे तो अभी दूर है. अगले साल April में चुनाव होने है लेकिन जिस तरह से भाजपा और कांग्रेस ने तैयारिया शरू की है उससे ऐसा लगता है की आम चुनाव कभी भी हो शकते है. जहा तक कोंग्रेस का सवाल है टी भारत के सब से पुराने दल के युवा अध्यक्ष राहुल गाँधी ने चुनाव का बिगुल बजाते हुवे कह दिया की चुनावी महाभारत में कोंग्रेस पांडव है और बीजेपी कौरव है. कांग्रेस ने युध्ध रेखा खिंच ली है. चुनाव को कुरुक्षेत्र करार कर दिया और कार्य्कर्ताओको चुनाव के लिए तैयार रहने को आहवान भी कर दिया. कुरुक्षेत्र में कौन कहा है यह तो तय हो गया लेकिन भगवान् श्री कृष्ण कहा है ?

    आदि युग पुरुष श्री कृष्णा के कई नाम है. उन्हें प्रेम से किशन महाराज भी कहते है. राहुल ने अपने आप को पांडव तो कह दिया लेकिन किशनजी कहा है ? किशनजी कहे तो इस देश का मतदाता. आखिर एक आम मतदाता ही तो तय करेंगा की लोकसभा के चूनाव के बाद दिल्ही की गद्दी पर कौन बैठेंगा .

    फिर से मोदी या राहुल. महाभारत में कहा गया है की किशनजी ने पांडवो को साथ दिया तभी १०० कौरवो के सामने पांच पांडव जित पाए थे. मतदाता लोकतंत्र में राजा होता है लेकिन एक ही दिन का. चुनाव के बाद इसी राजा को कोई पूंछता तक नहीं की आप की समस्या क्या है..! चुनाव से पहले आम मतदाता के इर्दगिर्द सभी दलों के प्रत्याशी हाथ जोड़ कर कहता है की आपका कीमती और पवित्र वोट मुझे ही दे. ओर चुनाव खत्म होते है-आप कौन  हैजी…?!

    जैसे श्री कृष्णा जी ने पांडवो  को साथ दिया और उनकी जित हुई ऐसे ही अगले आम चूनावरूपी महाभारत में मतदातारूपी किशनजी पांडव यानी की कांग्रेस का साथ देंगा तो ही उसका हाथ मजबूत होंगा. लेकिन इस किशनजी को मन्नाने के लिए कांग्रेस के पास क्या है ? कांग्रेस को सही सही विझन के साथ मतदाता के पास जाना होंगा. किसी अन्य दल को कौरव कह देने से महाभारत नहीं जीती जा शकती. बीजेपी यूपी में दो सीटों पर बहोत ही बुरीतरह से हारी है.

    लेकिन आम चूनाव्  में भी ऐसा ही होंगा यह मान कर चलना किसी सेनापति के लिए उसकी नादानियत होंगी. जैसे किशनजी चंचल मन के है वैसे ही भारत का मतदाता भी चंचल मन का है. इसका सबूत गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव का नतीजा है. लोगो ने कहा की हम योगीजी के साथ लेकिन सीएम योगी के साथ नहीं. ऐसे मतदाता को अपनी और लाने में सभी दलों को अगले चुनाव में पापड बेलने पड़ेगे. अगले महाभारत का फैंसला आम मतदाता तय करेंगा और वह जिस के साथ होंगा वो ही पांडव कहलायेंगा.

    Read More : 1 अप्रैल से बदल जाएंगे इनकम टैक्स के यह 5 नियम, इनके बारे में जानना है बेहद जरूरी

  • फेसबुक डेटा लीक में बेटे का नाम आने पर जेडीयू नेता केसी त्यागी की सफाई

    [object Promise]

    फेसबुक डेटा लीक मामले में राजनीति गरमा गई है। जेडीयू नेता केसी त्यागी के बेटे अमरीश त्यागी का नाम आने के बाद केसी त्यागी से इस मामले पर सफाई मांगी है। उन्होंन मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके बेटे और कैम्ब्रिज एनालिटिका के बीच केवल कामकाज का रिश्ता हैं। इसमें किसी तरह की फाइनेंसियल लेन-देन या शेर होल्डिंग नहीं है। त्यागी ने कहा कि सबकुछ जांच के लिए खुला है। वहीं पार्टी का इससे कोई लेना देना नहीं है और न ही 2010 के चुनावों में उन्होंने हमारे लिए कोई प्रचार किया।

    राज्यसभा चुनाव : शह और मात का खेल जारी

    केसी त्यागी बोले मेरे बेटा होने से मुझे घसीटा जा रहा
    जेडीयू नेता ने कहा कि कैम्ब्रिज एनालिटिका या इसके सीईओ से मेरी और नीतीश कुमार की कोई मुलाकात नहीं हुई है। जेडीयू एक सामाजिक पार्टी है और पार्टी ऐसी चीजों से दूर रहती है। उन्होंने कहा कि उनका नाम इस मामले में सिर्फ इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि अमरीश त्यागी उनका बेटा है। बता दें कि अमरीश ओवलीनों बिजनेस इंटेलिजेंस प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) हैं और यह कंपनी भारत में कैम्ब्रिज एनालिटिका एससीएल इंडिया से जुडी है। वहीं अमरीश त्यागी डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी अभियान बतौर रिसर्चर शामिल होने की बात पहले भी कह चुके हैं। उन्होंने कहा कि कैम्ब्रिज एनालिटिका ने उन्हें मीडिया से इस बारे में किसी भी प्रकार की कोई बात करने से मना किया है।

    स्टार्टअप: सिर्फ 6 लाख में आप मरने के बाद भी इंटरनेट चला सकते हैं जानिये कैसे !

    ओबीआई तैयार करती थी सोशल प्रोजेक्ट
    वहीं कंपनी के सूत्रों ने कहा है कि कैम्ब्रिज एनालिटिका की भारत में कोई शाखा नहीं है। ओबीआई उनके लिए कुछ सोशल प्रोजेक्ट जरूर तैयार करता है। अमरीश की कंपनी एनालिटिका को जमीनी रिचर्स और तकनीक के बारे में अवगत कराती थी और जो भी जरूरी होता था, एनालिटिका को यह उपलब्ध कराता था। कांग्रेस ने इस मामले में अमरीश त्यागी का नाम लिया है।

    कांग्रेस ने एक और व्यक्ति का नाम किया उजागर 
    कांग्रेस पार्टी ने इस मामले में एक और व्यक्ति हिमांशु शर्मा का नाम लिया है। वह ओबीआई में पार्टनर हैं। वह इससे पहले बी२बी अलायंसेज के डायरेक्टर रह चुके हैं और हाल में ही अमरीश की कंपनी के साथ जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि वह 2014 में आम चुनाव के दौरान बीजेपी के द्वारा चलाए जा रहे कॉल सेंटरों को संभालते थे। वहीं उन्होंने कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों से इंकार किया है।

    बता दें कि अमरीश त्यागी और हिमांशु शर्मा ने डेटा लीक मामले में किसी भी प्रकार का संबंध होने से इकांक किया है। दरअसल, ओबीआई और कैम्ब्रिज एनालिटिका के बीच कोई लिखित समझौता नहीं है। दोनों के बीच इस बात पर सहमति थी कि वह कैम्ब्रिज एनालिटिका की भारत में पहुंच बनाने में मदद करेंगे।

  • जिंदा नहीं है इराक में लापता 39 भारतीय, IS ने की हत्या – 2015 में हुए लापता

    [object Promise]

    नई दिल्ली :  विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इराक में गायब हुए भारतीयों के मारे जाने की पुष्टि की है।

    राज्यसभा में बयान देते हुए सुषमा स्वराज ने कहा कि इराक के मोसुल में लापता हुए 39 भारतीय मारे गए हैं।

    स्वराज ने कहा की रडार की मदद से सभी भारतीयों की लाश का पता लगाया, जिन्हें मारकर दफना दिया गया था।

    JNU यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी प्रोफेसर से आज हो सकती है पूछताछ, 17 छात्रों पर भी FIR

    उन्होंने कहा, ‘सभी मृत व्यक्तियों के शव को बगदाद भेजा गया। इसके बाद डीएनए की जांच के लिए उनके परिवार के लोगों को वहां भेजा गया। इस पूरी प्रक्रिया में पंजाब, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार की सरकारें शामिल रहीं।’

    विदेश मंत्री ने कहा, ‘हमें कल ही इस बारे में पता चला कि 38 लोगों के डीएनए मिला लिए गए हैं जबकि एक व्यक्ति का डीएनए 70 फीसदी तक मैच कर गया है।’

    उन्होंने कहा, ‘जनरल वी के सिंह भारतीयों के शव को वापस लाने के लिए इराक जाएंगे। शवों को लाने वाला प्लेन पहले अमृतसर जाएगा और फिर इसके बाद इसे पटना और कोलकाता भेजा जाएग।’

    अमित शाह ने नाराज राजभर को दिल्ली बुलाया, यूपी में बीजेपी की सहयोगी पार्टी है सुहेलदेव भारतीय समाज

    गौरतलब है कि 2015 में इराक के मोसुल से इन भारतीयों को अगवा कर लिया गया था।

  • क्या केंद्र सरकार ने न्यूज़ प्रिंट पर से 5 प्रतिशत जीएसटी हटा ली ? क्यों स्थिति साफ करने को तैयार नहीं सरकार? 

    [object Promise]

    इन दिनों एक ख़बर सभी जगह सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जिसके अनुसार केंद्र सरकार ने न्यूज़ प्रिंट पर से प्रतिशत जीएसटी हटा ली है। इस ख़बर के आने के बाद से समाचार मालिकों में आशा की एक किरण दौड़ पड़ी। लेकिन सरकार ने अभी तक वायरल हो रहे इस प्रपत्र पर कोई व्यवहारिक कार्रवाई नहीं की है।

    यानि 5 प्रतिशत जीएसटी न्यूज़ प्रिंट पर अभी पहले की तरह लगा हुआ है। जिसकी वजह से पेपर प्रिंट के मालिकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जबकि जो प्रपत्र वायरल है, दावा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी किया गया है। जिसका नंबर PMOPG/D/2017/0524256 है।

    हम बता दें कि वायरल हो रहा यह पत्र नवंबर 2017 का है। जिसमें आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गयी थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने मार्च 2018 को जवाब दिया था। ऐसा इस वायरल हो रहे पत्र को देखकर लगता है। इस ख़बर को लेकर जीएनएस संवाददाता ने जब संबंधित सूचना प्रसारण मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के संबंधित अधिकारी से बात करनी चाही तो पत्र को लेकर न तो कोई संबंधित अधिकारी हां करने के लिए तैयार हुआ न ही इंकार किया।

    यानि ऐसा पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी किया गया कि नहीं किया गया है इस विषय पर बोलने के लिए कोई तैयार नहीं है। हां सूचना प्रसारण मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जरूर कहा कि न्यूज़ प्रिंट पर जीएसटी पहले की तरह यथावत है उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    लेकिन संबंधित पत्र को जब सवाल किया गया तो उस पर कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। फिलहाल इस तरह की असमंजस की स्थिति से न्यूज़ प्रिंट के मालिकों में हताशा दिख रही है। और सरकार है कि कोई भी बात स्पष्ट करने के लिए तैयार नहीं है।

  • चारा घोटाले के चौथे मामले में लालू यादव दोषी करार, पूर्व CM जगन्नाथ मिश्रा हुए बरी

    [object Promise]

    नई दिल्ली, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने दुमका कोषागार मामले में दोषी करार दिया। इस मामले में लालू प्रसाद यादव के अलावा जगन्नाथ मिश्र सहित 31 लोगों के खिलाफ आरोप थे। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को बरी कर दिया गया। कोर्ट ने इस मामले में 12 लोगों को बरी किया है, जबकि 19 लोगों को दोषी करार दिया है।

    चुनावी कुरुक्षेत्र में Congress पांडव है और BJP कौरव है, जानिये किशनजी कहां है ?

    रांची कोर्ट ने इससे पहले लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्र सहित अन्य को चारा में  दोषी करार दिया था। ये सभी लोग दोषी करार दिए जाने के बाद बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं। लालू की सेहत सहीं नहीं होने की वजह से अस्पताल में भर्ती थे जिस कारण से वह कोर्ट में देरी से पहुंचे।

    राज्यसभा चुनाव से पहले भड़के ओपी राजभर, कहा- अब शाह से ही होगी आर-पार की बात

    यह फैसला जज शिवपाल सिंह की अदालत ने सुनाया। यह मामला दुमका कोषागार से 3.76 करोड़ रुपये की अवैध निकासी को लेकर दर्ज हुआ था। बीते गुरुवार को लालू प्रसाद यादव की ओर से एक और आवेदन दाखिल कर कहा गया था कि जब तक आरोपित बनाए जाने से संबंधित आवेदन पर सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक के लिए फैसला को टाल दिया जाए।

    आपको बता दें, चारा घोटाले का यह मामला दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच का है, जिसमें आरोप है कि दुमका कोषागार से 13.13 करोड़ रुपये फर्जी तरीके से निकालने गए हैं। सीबीआई की विशेष अदालत 31 लोगों के खिलाफ फैसला सुनाया। हालांकि, चार्जशीट 48 लोगों के खिलाफ दायर की गई थी, लेकिन 14 लोगों की मामले की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।

    लालू प्रसाद यादव अब तक चारा घोटाले से जुड़े तीन मामलों में दोषी पाए गए हैं। चाईबासा ट्रेजरी से जुड़े एक अन्य मामले में अदालत पहले ही लालू यादव को साल 2013 में पांच साल की सजा सुना चुकी है। चारा घोटाले से जुड़े देवघर ट्रेजरी मामले में दिसंबर 2017 में लालू यादव एवं अन्य दोषियों को साढ़े तीन साल कारावास की सजा हुई थी। लालू यादव चारा घोटाले से जुड़े पांच मामलों में अभियुक्त बनाए गये थे।

    चाईबासा मामले में उन्हें 5 साल, देवघर कोषागार मामले में 3.5 साल और अब चाईबासा के एक अन्य मामले में 5 साल की सजा हुई है। यानी कि लालू प्रसाद यादव को कुल 13.5 साल जेल हो चुकी है। सजा पूरी होने के 6 साल बाद तक चुनाव लड़ने पर रोक रहेगी। लालू प्रसाद यादव अगले बीस साल प्रत्यक्ष रूप से चुनाव नहीं लड़ सकते। फिलहाल वह रांची जेल में बंद हैं।

  • राज्यसभा चुनाव से पहले भड़के ओपी राजभर, कहा- अब शाह से ही होगी आर-पार की बात

    [object Promise]

    उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार सत्ता का पहला साल पूरा होने पर जहां अपनी उपलब्धियां गिना रही है. वहीं, उसके विरोधी दल विकास की गति रुक जाने का आरोप लगा रहे हैं. इस बीच अब योगी आदित्यनाथ सरकार में एक मंत्री ने ही सत्ताधारी दल की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं.

    1 अप्रैल से बदल जाएंगे इनकम टैक्स के यह 5 नियम, इनके बारे में जानना है बेहद जरूरी

    यूपी सरकार में सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और योगी कैबिनेट में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अपनी ही सरकार पर बड़ा हमला बोला है. राजभर ने आरोप लगाया है कि मौजूदा यूपी सरकार सिर्फ मंदिरों पर ध्यान दे रही है. इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि जिन गरीबों ने उसे वोट दिया, उन पर सरकार तवज्जो नहीं दे रही है.

    ओम प्रकाश राजभर ने अपने बगावती तेवर और तीखे करते हुए कहा ये सरकार पिछड़ों और दलितों की उपेक्षा कर रही है. उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है जब-जब इनकी उपेक्षा हुई सरकारों का नाश हुआ है.

    स्टीफन हॉकिंग के अंतिम शोध पत्र से खुल सकेंगे अन्य ब्रह्मांडों के रहस्य

    सिर्फ अमित शाह से होगी बात

    ओमप्रकाश राजभर ने साफ कहा कि सुलह समझौते को लेकर अब वो योगी की बात नहीं मानेंगे, जो भी बात होगी साफ-साफ होगी और सीधे अमित शाह से होगी. अमित शाह के नीचे कोई बात नहीं होगी.

    ओमप्रकाश राजभर के तेवर इतने तीखे हैं कि योगी के सबसे करीबी मंत्री सुरेश खन्ना के घर आकर मनाने से भी वह नहीं माने. साथ ही सरकार के एक साल के जश्न में जाने से भी इंकार कर दिया.

    राजभर ने योगी के दूत बनकर आए सुरेश खन्ना को दो टूक कह दिया कि अमित शाह से आमने-सामने बैठकर बात होगी तभी फैसला होगा.

    राज्यसभा में बीजेपी के लिए वोट नहीं

    ओम प्रकाश राजभर ने 23 मार्च को होने जा रहे राज्यसभा चुनाव में बीजेपी को समर्थन न देने ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि जब तक अमित शाह से बात नहीं हो जाती, तब तक राज्यसभा चुनाव में समर्थन पर कोई समझौता नहीं होगा.

    ओपी राजभर ने ये भी कहा कि हम सरकार में हैं और एनडीए का हिस्सा हैं, लेकिन बीजेपी गठबंधन धर्म का पालन नहीं कर रही है. उन्होंने ये भी कहा कि मैंने अपनी चिंताओं से सरकार को अवगत कराया है, लेकिन 325 सीट के नशें में ये लोग पागल होकर घूम रहे हैं.

    बीजेपी का जवाब

    राजभर के बयान पर सरकार ने पलटवार किया है. यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि राजभर हमारी सरकार में मंत्री हैं और अगर उन्हें कुछ समस्या है तो कैबिनेट में अपनी बात रखें. सिंह ने कहा कि आप सरकार में रहकर इस तरीके से सार्वजनिक तौर पर आलोचना नहीं कर सकते.

    बता दें कि इससे पहले भी ओम प्रकाश राजभर अक्सर योगी सरकार को घेरते रहे हैं. वो सार्वजनिक मंचों से सरकार की नीतियों पर टिप्पणी करते रहे हैं.

  • नहीं थम रहा मूर्तियों को तोड़ने का सिलसिला, तमिलनाडु के पुडुकोट्टई में गिराई गई पेरियार की मूर्ति

    [object Promise]

    नई दिल्ली :  त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की जीत के बाद से शुरू हुई मूर्तियों को तोड़े जाने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है।

    शादी में दहेज नहीं मिला तो पति ने दिया ट्रिपल तलाक, फिर पत्नी को घर से निकाला

    हालिया मामला तमिलनाडु के पुडुकोट्टई का है, जहां ई वी रामस्वामी पेरियार की मूर्ति को तोड़े जाने का मामला सामने आया है। मूर्ति तोड़े जाने के मामले में किसी व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई है और पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच की शुरुआत कर दी है।

    रेलवे की विशेष सेवा: सफर के बाद यात्रियों को घर तक छोड़ेगा रेलवे, ऐसे आप भी उठा सकते हैं लाभ

    तमिलनाडु में मूर्ति तोड़े जाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी पेरियार की मूर्ति को तोड़े जाने का मामला सामने आया था।

    इससे पहले वेल्लोर में उनकी मूर्ति को नुकसान पहुंचाया गया था। हालांकि इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था।

    तमिलनाडु में पेरियार की पहली मूर्ति को त्रिपुरा में रूसी साम्यवादी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति गिराए जाने के बाद नुकसान पहुंचाया गया था।

    दरअसल लेनिन की मूर्ति गिराए जाने के बाद बीजेपी नेता एच राजा ने फेसबुक पोस्ट में द्रविड़ आंदोलन के संस्थापक पेरियार के खिलाफ टिप्पणी की थी, जिसके बाद यह घटना सामने आई थी।

  • JNU यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी प्रोफेसर से आज हो सकती है पूछताछ, 17 छात्रों पर भी FIR

    [object Promise]

    नई दिल्ली :  जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्राओं के साथ कथित यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी प्रोफेसर अतुल जौहरी के खिलाफ 8 एफआईआर दर्ज कर ली गई हैं और उनसे इस मामले में आज पूछताछ की जा सकती है।

    अमित शाह ने नाराज राजभर को दिल्ली बुलाया, यूपी में बीजेपी की सहयोगी पार्टी है सुहेलदेव भारतीय समाज

    वहीं प्रोफेसर उमेश अशोक कदम की शिकायत पर जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष गीता कुमारी, उपाध्यक्ष जोया खान सहित 17 छात्रों के खिलाफ डीन के ऑफिस में हंगामा मचाने के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।

    मोदी सरकार के खिलाफ फिर से अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, आज होगी बहुमत की परीक्षा

    उन्होंने बताया कि छात्र ज़बरदस्ती उनके दफ्तर में घुस आए थे और डीन को बंधक बना लिया था।

    दरअसल यह छात्र IHA सर्कुलर के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे थे। इनकी मांग थी कि इस सर्कुलर को खत्म किया जाए। गीता कुमारी और ज़ोया खान को भी कमेटी में शामिल किया जाए।

    इसी बात को लेकर छात्रों ने प्रोफ़ेसर को उनके कमरे में बंधक बनाया, वो कुछ खा भी नहीं पाए। आखिरकार सिक्योरिटी गार्ड की मदद से उन्हें ऑफिस से बाहर निकाला गया।

    सबूत के तौर पर पुलिस को एक सीसीटीवी फुटेज भी दी गई है। जिसमे सारी वारदात कैद है।

    बता दें कि सोमवार शाम से ही जेएनयू के छात्र वसंत कुंज थाने के बाहर आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

    दिल्ली पुलिस ने इस मामले में पीड़ित छात्राओं का बयान धारा 164 के तहत दर्ज किया।

    गौरतलब है कि जेएनयू के छात्र और शिक्षक चाहते हैं कि जौहरी के खिलाफ कार्रवाई हो और उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया जाए।

    छात्राओं का कहना है कि प्रोफेसर अक्सर अश्लील कमेंटस करते हैं, खुलेआम सेक्स के लिए कहते हैं और लगभग हर लड़की की शारीरिक बनावट पर भद्दी टिप्पणी करते हैं। अगर इस पर कोई लड़की आपत्ति जताती है तो वह उसे अपना दुश्मन मान लेते हैं।

    वहीं प्रोफेसर ने आरोपों से इंकार करते हुए कहा, ‘मैनें आरोप लगाने वाली लड़कियों को लैब में अनियमित रूप से उपस्थिति को लेकर 27 फरवरी को ईमेल मिला था जिस कारण वो मुझे निशाना बना रही हैं।’

    इससे पहले साल 2015 में भी एक जेएनयू में प्रोफेसर पर विदेशी छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था जिसमें दोषी पाए जाने के बाद प्रोफेसर को बर्खास्त कर दिया गया था।