Category: national

  • अजमेर शरीफ में सचिव के मुंह पर पोती कालिख, और की चप्पल से धुनाई

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    जयपुर. अजमेर शरीफ दरगाह में खादिमों की संस्था अंजुमन शेखजादगान के सचिव के मुंह पर कालिख पोतने और उनके साथ मारपीट का मामला सामने आया है.

    इसका एक वीडियो भी वायरल हुआ है इस वीडियो में शेख बंटी नाम का एक खादिम उनके दफ्तर में पहुंच कर उनका ना सिर्फ मुंह काला करता नजर आ रहा है बल्कि चप्पल से धुनाई भी करता दिख रहा है.

    मौके पर मौजूद अंजुमन के सदस्यों ने सचिव अब्दुल मजीद चिश्ती को बंटी से बचाया. सचिव अब्दुल माजिद चिश्ती ने इस पूरी घटना की जानकारी दरगाह थाना पर देकर शिकायत दर्ज कराई है.

    संस्था के पूर्व सचिव शेख हबीबुर्रहमान के भतीजे शेख बंटी सहित अन्य के खिलाफ दरगाह थाने में दी गई शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है. बताया जाता है कि पूरा मामला किसी गबन से जुड़ा है. मामले की जांच की जा रही है.

  • अविश्वास प्रस्ताव भाजपा नीत राजग सरकार के खिलाफ, जानिए क्या है मामला

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    New Delhi, लोकसभा उपचुनाव में मिली पराजय के बाद अब केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा नीत राजग सरकार को संसद में पहले अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ रहा है। आंध्र प्रदेश के मुद्दे पर लोकसभा में वाईएसआर कांग्रेस के वाई. वी. सुब्बारेड्डी और तेदेपा के टी. नरसिंहन ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया हालांकि सदन में व्यवस्था नहीं होने के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

    सदन में कई मुद्दों पर सदस्यों के हंगामे के कारण एक बार के स्थगन के बाद लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिये स्थगित कर दी गई । दोपहर 12 बजे बैठक फिर शुरू होने पर विभिन्न दलों के सदस्य अध्यक्ष के आसन के समीप आकर नारेबाजी करने लगे । इस दौरान अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन में आवश्यक कागजात सभापटल पर रखवाये।

    इसके बाद अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें वाई. वी. सुब्बारेड्डी और टी. नरसिंहन का सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस मिला है। वह इस विषय पर कर्तव्य से बंधी हैं । लेकिन सदन में व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि वह आग्रह करती हैं कि सदस्य अपने स्थान पर जाएं।

    इस पर अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि चूंकि सदन में व्यवस्था नहीं है, इसलिए वाईएसआर कांग्रेस के वाई. वी. सुब्बारेड्डी और तेदेपा के टी. नरसिंहन के अविश्वास प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे की मांग समेत विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही आज दसवें दिन भी बाधित रही।

    हंगामे के कारण सदन में आज भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सका । पिछले दिनों की तरह ही तेलुगूदेशम पार्टी के सदस्य आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आसन के समीप आ गये। तेलंगाना राष्ट्र समिति के सदस्य भी अपने राज्य में आरक्षण संबंधी मांग उठाने लगे।

    अन्नाद्रमुक सदस्य भी कावेरी मुद्दे को उठाते हुए आसन के समीप आकर नारेबाजी करने लगे । राजद के जयप्रकाश नारायण यादव को अखबार की खबर की प्रति लहराते हुए देखा गया। कांग्रेस के सदस्यों को भी अपने स्थान से कुछ मांग उठाते हुए देखा गया। इससे पहले सदन में प्रश्नकाल भी नहीं चला।

    सुबह सदन की बैठक शुरू होने पर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर से नवनिर्वाचित सपा सांसदों क्रमश: प्रवीण कुमार निषाद और नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल तथा अररिया से राजद के सरफराज आलम को शपथ दिलाई गयी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन के दिवंगत पूर्व सदस्यों उत्तमभाई हरजीभाई पटेल, बोल्ला बुल्ली रमैया तथा सुशीला बंगारू लक्ष्मण के निधन की सूचना दी। सदन ने तीनों पूर्व सदस्यों और वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग के निधन पर कुछ क्षण मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।

    सदस्यों ने सुकमा में हाल ही में माओवादियों के हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों को भी श्रद्धांजलि दी। अध्यक्ष ने सदस्यों को 18 मार्च से शुरू हो रहे नव संवत्सर की अग्रिम बधाई भी दी। इसके बाद उन्होंने प्रश्नकाल शुरू कराने का प्रयास किया लेकिन विभिन्न मुद्दों पर आसन के समीप सदस्यों का हंगामा जारी रहा । हंगामा थमता नहीं देख अध्यक्ष ने सदन की बैठक दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इनपुट भाषा

  • मजीठिया से माफी मांग CM केजरीवाल ‘घर’ में ही ठान बैठे रार, AAP के संजय सिंह ने भी किया किनारा

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    नई दिल्ली, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अकाली नेता और पंजाब सरकार के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से माफी मांगने पर पार्टी में इतनी किरकिरी का सामना करना पड़ेगा यह उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा। आप नेता संजय सिंह से लेकर कुमार विश्वास को तक को उनका यह कदम पसंद नहीं आया। इसी दौरान पार्टी में मचे घमासान के बीच पंजाब के पार्टी अध्यक्ष पद से भगवंत मान ने इस्तीफा दे दिया। हालांकि उनके इस्तीफे को लेकर अभी तक सीएम केजरीवाल की ओर से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    संजय सिंह ने किया किनारा

    वहीं, सीएम केजरीवाल के माफीनामे से संजय सिंह ने किनारा करते हुए कहा है कि बिक्रम सिंह मजीठिया से अरविंद केजरीवाल द्वारा माफी मांगे जाने से लोग बहुत नाखुश हैं। उनका इस मुद्दे पर क्या स्टैंड है मैं बिल्कुल नहीं जानता हूं, लेकिन मैं अब भी अपने बयानों पर कायम हूं, मैं अब भी मानता हूं कि मजीठिया ड्रग्स के कारोबार में शामिल थे। ड्रग के जरिए पंजाब की जवानी को बर्बाद किया गया है।

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    शायराना अंदाज में कुमार का हमला

    सीएम केजरीवाल के मांफी मांगने के बाद आप नेता कुमार विश्वास ने बिना नाम लिए ट्वीट किया और उन्होंने कवि के अंदाज में सीएम पर करारा प्रहार किया। कुमार ने लिखा, ‘एकता बांटने में माहिर है, खुद की जड़ काटने में माहिर है, हम क्या उस शख़्स पर थूकें जो खुद, थूक कर चाटने में माहिर है’। खबरें आती रही हैं कि कुमार पिछले लंबे समय से पार्टी की कार्यशैली से नाखुश हैं और केजरीवाल खासकर उनको पसंद नहीं आ रहे हैं।

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    भगवंत मान का इस्तीफा

    उधर, शुक्रवार को पंजाब से आप पार्टी के अध्यक्ष भगवंत मान ने इस्तीफा दे दिया। उन्हें अरविंद केजरीवाल का माफीनामा बिल्कुल पसंद नहीं आया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ‘मैं पंजाब के आप के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहा हूं, लेकिन पंजाब में मेरी लड़ाई ड्रग माफियाओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आम आदमी की तौर पर जारी रहेगी।’ भगवंत मान पंजाब में ड्रग तस्करी को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं।

    ये है मामला

    पंजाब चुनाव के दौरान केजरीवाल ने नशे का मुद्दा उठाते हुए इसके लिए बिक्रम मजीठिया को जिम्मेदारी ठहराया था और कहा था कि अगर उनकी सरकार राज्य में बनेगी तो वह जेल में होंगे। इस पर बिक्रम सिंह मजीठिया ने अमृतसर जिला अदालत में अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और आशीष खेतान पर मानहानि का केस कर दिया था। इस मानहानि केस के बाद अब अचानक से इस मामले में माफी मांगी है, जबकि कहा जा रहा है कि केजरीवाल ने ये माफी इसलिए मांगी है क्योंकि उनको लग रहा है कि कोर्ट का फैसला उनके खिलाफ आएगा।

  • सोमवार को पेश होगा अविश्वास प्रस्ताव, चंद्रबाबू नायडू ने बयां किया अपना दर्द

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    नई दिल्ली ; आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलने तेलुगू देशम पार्टी (TDP) ने बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन तोड़ने का फैसला कर लिया है। इतना ही नहीं चंद्रबाबू नायडू की तेलगू देशम पार्टी ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर भी आ रही है।  इसके पहले टीडीपी ने वाईएसआर कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन का ऐलान किया था। टीडीपी के इस प्रस्ताव को कांग्रेस, एआईएडीएमके और सीपीआईएम ने भी समर्थन की घोषणा कर दी है। वहीं, ममता बनर्जी ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।

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    कांग्रेस और टीडीपी दोनों ही दल राज्य में केंद्र से विशेष दर्जे की मांग को उठाना चाहते हैं। कांग्रेस जो इस समय लोकसभा चुनाव की पूरी तैयारियों में जुटा है। इसी को ध्यान में रखते हुए  टीडीपी के अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन का ऐलान किया है। आंध्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष एन रघुवीरा रेड्डी ने कहा कि पार्टी केंद्र के खिलाफ टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस की ओर से लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेगी।

    आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू राज्य विधानसभा में भाषण दे रहे हैं। उन्होंने कहा- विखंडन के वादे अभी तक पूरी नहीं हुए हैं।  ये स्थिति उत्पन्न नहीं होती, अगर लोकसभा में इस मामले को तभी शामिल किया जाता। मैंन लिए फंड मांगा तो अरुण जेटली ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा था कि तेलंगाना भावना के लिए तैयार किया गया था तो क्या अब आप अन्याय नहीं कर रहे हैं।  मैंने पीएम मोदी को भी कई पत्र लिखा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

    – सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री विजय गोयल उप सभापति पीजे कुरियन से कहा कि टीडीपी सांसद वाई एस के भाषण के बाद सदन की कार्यवाही चलाई जाए। सरकार सभी मुद्दों पर बात करने के लिए तैयार है।

    – दोपहर दो बजे के बाद राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हो गई है। टीडीपी सांसद वाई एस चौधरी अपना अधूरा भाषण दे रहे हैं। गुरुवार को उनकी बात सुने बिना सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी।

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    – AIADMK विधायक और तमिलनाडु मंत्री डी जयकुमार ने NDA से TDP के अलग होने पर कहा कि आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद कई मुद्दे सामने आए थे। लेकिन इन वर्षों में समस्याए नहीं दिखी और अगर दिखी तो उन्हें क्यों नहीं उठाया गया? यह केवल एक मौके का फायदा उठाकर किया गया है।

    – संसद के बाहर  TDP का विरोध जारी, कहा- बीजेपी तलाक,तलाक, तलाक

    –  जब कोई अविश्वास प्रस्ताव चला जाता है तो 50 सांसदों को इसके समर्थन में खड़ा होना चाहिए और 50 सांसद खड़े हो गए, लेकिन अध्यक्ष ने कहा कि इसे नहीं माना जा सकता। तो, मैं पूछना चाहता हूं कि सरकार को क्या डर लगता है? उनके पास लोकसभा में भारी बहुमत है- कांग्रेस शशि थरूर

    -संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर हंगामे तो लेकर लोकसभा की कार्यवाही सोमवार तक स्थगित कर दी गई है।

    – लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन देने वाले सांसदों की गिनती हंगामे के बीच करना मुमकिन नहीं है। इस तरह लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पेश हुए बिना ही सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

    – कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने कहा, आंध्र प्रदेश के लोगों के साथ हमारी प्रतिबद्धता जारी है और मोदी सरकार इसको हमसे अलग नहीं कर सकती। केंद्र सरकार के नीतियों का खुद ही पर्दाफाश हो रहा है।

    – JDU नेता केसी त्यागी ने कहा- एक इतने बड़े  गठबंधन में विचारों को लेकर छोटे-मोटे मतभेद आम बात है।  एनडीए सरकार को इससे कोई खतरा नहीं है।

    –  बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हन राव ने कहा, राज्य सरकार और टीडीपी सोचती है कि ऐसा करने से जनादेश खिलाफ हो सकती है, तो वह गलत हैं। बीजेपी राजनीतिक पार्टी के तौर पर आंध्र प्रदेश में खुद का कायम करने की कोशिश कर रही है। आंध्र प्रदेश  लिए यह एक और त्रिपुरा साबित होगा।

    – टीडीपी सांसद जयदेव गल्ला ने दिल्ली में कहा, बीजेपी ने डर्टी गेम खेलना शुरू कर दिया है। आपने देखा ना तमिलनाडु में उन्होंने क्या किया। बीजेपी छोटे दलों को प्रोत्साहित करके बड़े पार्टियों के भीतर दरार पैदा करने की कोशिश में लगी है।

    – केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने टीडीपी के अविश्वास प्रस्ताव के बारे में कहा, हम देख लेंगे संसद में क्या होता है। देखते हैं कौन सी पार्टी किस और जाती है। अभी चुनाव का वक्त सारे राज्य अलग-अलग डिमांड करेंगे।

    -टीडीपी सांसद थोटा नरसिम्हन ने अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा के सचिव को लिखा  पत्र।

    –  सीपीआईएम के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि आंध्र प्रदेश के साथ धोखे को माफ नहीं किया जा सकता है। अब मोदी सरकार को सबक सिखाना ही होगा। सीपीआईएम भी अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेगी।

    –  पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेता ममता बनर्जी ने भी टीडीपी के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा , ‘मैं सभी राजनीतिक दलों से अपील करती हूं कि सभी राजनीतिक मिलकर काम करें।

    – आंध्र प्रदेश के एक्साइज मिनिस्टर केएस जवाहर ने कहा कि बीजेपी ने तेलुगू जनता को धोखा दिया है और इस बार भी उन्होंने ऐसा ही किया है, इसलिए हम अपना सर्मथन वापस ले रहे हैं।

    सूत्रों की मानें तो वाईएसआर को इस अविश्वास प्रस्ताव पर टीडीपी के साथ कई अन्य विपक्षी पार्टियों का भी साथ मिल सकता है। पिछले हफ्ता टीडीपी ने यह कह कर केन्द्र सरकार का साथ छोड़ा था कि केंद्र ने उन्हें आंध्र प्रदेश को  विशेष राज्य का दर्जा देने की बात कही थी। लेकिन वह अब अपनी बातों से मुंह मोड़ रहे हैं।

    इसपर वित मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि अगर हम आंध्र प्रदेश को  विशेष राज्य का दर्जा देते हैं तो बिहार, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्य भी ऐसी मांग उठा सकते हैं। इसके बाद ही  कैबिनेट में टीडीपी के दो मंत्रियों ने इस्तीफा दिया था। वहीं बीजेपी के दो मंत्रियों ने भी आंध्र प्रदेश में इस्तीफे दिए थे।

    क्या है अविश्वास का प्रस्ताव

    अविश्वास का प्रस्ताव को निंदा प्रस्ताव, अविश्वास प्रस्ताव या विश्वास प्रस्ताव कहा जाता है। ये एक संसदीय प्रस्ताव है, जिसे पारंपरिक रूप से विपक्ष द्वारा संसद में एक सरकार को हराने या कमजोर करने की उम्मीद से रखा जाता है। या फिर दुर्लभ उदाहरण के रूप में यह एक तत्कालीन समर्थक द्वारा पेश किया जाता है, जिसे सरकार में विश्वास नहीं होता। यह प्रस्ताव नये संसदीय मतदान द्वारा पारित किया जाता है या अस्वीकार किया जाता है।

    भारत में कब रखा गया पहला अविश्वास का प्रस्ताव

    भारत में पहली बार संसद के इतिहास में  अगस्त 1963 में जे बी कृपलानी ने अविश्वास प्रस्ताव रखा था। ये तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार के खिलाफ था। 1963 से लेकर अब तक संसद में 25 बार अविश्वास प्रस्ताव रखा जा चुका है।  जिसमें से 24 बार यह प्रस्ताव असफल रहा है। लेकिन 1978 में अविश्वास प्रस्ताव ने  मोरारजी देसाई की सरकार को गिरा दिया था।

    कैसे पास होगा अविश्वास प्रस्ताव

    लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव तभी स्वीकार करेगा जब कम से कम 50 सांसद इसके समर्थन में होंगे। संसद की कार्यप्रणाली के तहत लोकसभा स्पीकर वाईएसआर कांग्रेस  फ्लोर लीडर से प्रस्ताव पेश करने को कहेंगी। इसमें अगर  50 सांसदों ने सर्मथन कर दिया तो मोदी सरकार के खिलाफ पहला अविश्वास प्रस्ताव होगा। हालांकि ये कार्यवाही तभी हो सकती है, जब सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चले ।

     

  • क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव, जानें इसकी वजह से कैसे गिर जाती है सरकार

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    New Delhi, आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलने की वजह से तेलुगू देशम पार्टियां नाराज हो गई है। जिस कारण वो अब एनडीए से अलग हो गई है। और अब पार्टी ने केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला लिया है। 

     
    मोदी सरकार के खिलाफ ये पहला अविश्वास प्रस्ताव
    आपको बता दें कि विपक्षी पार्टी कांग्रेस और कुछ अन्य दलों ने इस अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया है। अगर ये अविश्वास प्रस्ताव सदन में पेश हो जाता है तो बीजेपी सरकार के खिलाफ ये पहला अविश्वास प्रस्ताव होगा।

    क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव 

    अविश्वास प्रस्ताव विपक्षी दल के खिलाफ लाए जाने वाला प्रस्ताव है। जब दल को ऐसा लगता है कि सरकार के पास बहुमत नहीं है और वो संसद में अपना विश्वास खो चुकी है ऐसी स्थिति में पार्टी की तरफ से ये प्रस्ताव लाया जाता है। यह केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता हैं राज्यसभा में नहीं।

    अविश्वास प्रस्ताव को लाने की प्रकिया 

    अगर सदन में कोई दल अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहता है तो सबसे पहले दल को सभापति को इसकी लिखित सूचना देनी होती है। जिसके बाद सभापति उस दल के किसी सांसद से इस लिखित सूचना को पेश करने के लिए कहते हैं। 

    अविश्वास प्रस्ताव के लिए जरूरी है  50 सांसदों का समर्थन

    अविश्वास प्रस्ताव को तभी स्वीकार किया जाता है जब प्रस्ताव को कम से कम 50 सांसदों का समर्थन हासिल होता है।इसके बाद सदन में इस प्रस्ताव की चर्चा हो सकती वोटिंग कराई जा सकती है या समर्थन करने वाले सांसदों को खड़ा कर उनकी गिनती की जाती हैं।

    कैसे गिरती है सरकार 

    अविश्वास प्रस्ताव में अगर सरकार के विपक्ष में ज्यादा वोट पड़ गए, मतलब कि सदन में कुल मौजूद सदस्यों में से आधे से एक ज्यादा ने अगर सरकार के खिलाफ वोट हुआ तो, उस स्थिति में सरकार गिर जाती है।

    कब आया पहला अविश्वास प्रस्ताव

    संसद के इतिहास में पहली बार अगस्त 1963 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार के खिलाफ जे बी कृपलानी ने अविश्वास प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव के पक्ष में सिर्फ 62 वोट पड़े और विरोध में 347 वोट पड़े थे। तब से लेकर अबतक भारतीय राजनीति में 26 से ज्यादा बार अविश्वास प्रस्ताव रखे जा चुके हैं। लेकिन ज्यादातर प्रस्ताव सदन में गिरते आए हैं। 

    अविश्वास प्रस्ताव के कारण किसकि गिरी सरकार 

    पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की सरकार के 1978 में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की वजह से गिर गई थी। हालांकि देसाई सरकार के खिलाफ 2 अविश्वास प्रस्ताव रखे गए थे, पहले प्रस्ताव से सरकार को कोई दिक्कत नहीं हुई, लेकिन दूसरे प्रस्ताव के वक्त घटक दलों ने साथ नहीं दिया था। 

    गौरतलब है कि अब तक सबसे ज्यादा 15 बार अविश्वास प्रस्ताव इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ लाए गए थे वहीं लाल बहादुर शास्त्री और नरसिंह राव सरकार को तीन-तीन बार ऐसे प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था।

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  • उपचुनाव में हार पर स्वामी-रमाकांत ने योगी पर तो शत्रुघ्न ने मोदी पर किया हमला

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    गोरखपुर. यूपी उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार के बाद अब पार्टी के भीतर से विरोध के सुर उठने लगे हैं. सूबे के सीएम आदित्यनाथ सवालों के घेरे में हैं. बीजेपी के पूर्व सांसद रमाकांत यादव के बाद अब बीजेपी के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी ने भी योगी पर हमला किया है.

    इसके अलावा बीजेपी के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने पीएम नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किया है. सुब्रमण्यम स्वामी ने इशारों-इशारों में यूपी के सीएम आदित्यनाथ पर सवाल उठाए हैं. स्वामी ने कहा कि जो नेता अपने सीट पर चुनाव नहीं जिता सके, ऐसे नेताओं को बड़ा पद देना लोकतंत्र में आत्महत्या करने जैसा है.

    आपको बता दें इससे पहले, पूर्वांचल के बड़े बीजेपी नेता और पूर्व सांसद रमाकांत यादव ने कहा कि पिछड़ों और दलितों की उपेक्षा के चलते उपचुनाव में बीजेपी को हार मिली. रमाकांत यादव यही पर नहीं रुके, बल्कि पार्टी नेतृत्व को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर गर पार्टी समय रहते सचेत नहीं हुई तो 2019 में भी बीजेपी को करारी हार मिलेगी.

    रमाकांत यादव ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी की कार्यशैली पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, “जिस प्रकार से पूजा पाठ करने वाले को मुख्यमंत्री बना दिया गया उनके बस का सरकार चलाना नहीं है. पिछड़ों-दलितों को उनका हक़ मिलना चाहिए, सम्मान मिलना चाहिए जो योगी नहीं दे रहे. केवल एक जाति तक सीमित हैं. जब सरकार बनी थी तब सोचा गया था कि सभी को मिलाकर चलेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ.”

    रमाकांत का शुमार पूर्वांचल में बीजेपी के एक कद्दावर नेता के तौर पर की जाती है. वो आजमगढ़ से सांसद रहे हैं.  योगी के बाद पीएम मोदी भी निशाने पर लिए गए. अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वो लगातार कह रहे हैं कि घमंड, गुस्सा  और अति आत्मविश्वास लोकतांत्रिक राजीति में सबसे बड़े मारक हैं.

    आपको बता दें कि कल आए उपचुनाव नतीजों में बीजेपी को गोरखपुर और फूलपुर सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है. ये दोनों सीटें मुख्य आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की हैं. दोनों सीटों पर 2014 में बीजेपी की बड़ी जीत दर्ज की है, लेकिन एक साल राज्य में सत्ताई में आई बीजेपी को ये सीट गंवानी पड़ी है.

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  • पोकरण में पकड़ा गया संदिग्ध पाक जासूस, डेढ़ साल से रह रहा था किराए के मकान में

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    जयपुर ; जैसलमेर के पोकरण में  पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों ने गुरुवार को संयुक्त कारवाई करते हुए एक संदिग्ध पाकिस्तानी नागरिक को गिरफ्तार किया है। उसका नाम शाहिद हुसैन जिलानी बताया जा रहा है। वह लंबे समय से पोकरण में रह रहा था। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि वह पाक का जासूस भी हो सकता है।

    फिलहाल, पुलिस व सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर ये पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उसका आईएसआई या पाक के किसी दूसरे संगठन से क्या कोई ताल्लुक है। अभी उसको लेकर ज्यादा जानकारी खुफिया एजेंसियों ने नहीं दी है।

    पुलिस के मुताबिक, पकड़ा गया संदिग्ध शाहिद हुसैन जिलानी पुत्र बरसद अली है। वह जोधपुर के नागौरी गेट का रहने वाला है। वह पोकरण में हॉस्पिटल के पास जोधनगर स्थित एक मकान में पिछले करीब डेढ़ वर्ष से किराए पर रहा था।

    सुरक्षा एजेंसियों ने शक के आधार पर दबिश देकर उसे वहां से गिरफ्तार कर लिया और जैसलमेर ले जाया गया, जहां उससे कड़ी पूछताछ की जाएगी।

    गौरतलब है कि जैसलमेर के पोकरण में 18 मार्च से होने वाले जागृत हिन्दू महासंगम व विराट हिन्दू सम्मेलन को लेकर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। इसी को लेकर चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है।

  • भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में अभी भी पुराने नोट करीब 25 करोड़, RBI से मांगी मदद

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    तिरूपतिः 500 और 1,000 के पुराने नोट 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी के बाद चलन से बाहर हो गए थे। वहीं तिरूमाला के प्रसिद्ध भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में अभी भी पुराने नोटों की करीब 25 करोड़ राशि जमा है।

    मंदिर से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि श्रद्धालुओं ने दानपत्र में पांच सौ और हजार के पुराने नोटों को दानपत्र में डाला है। मंदिर ने आरबीआइ को पत्र इस मामले में मदद मांगी है।

    मंदिर की ओर से बैंक को पत्र में नोट बदलने के लिए अनुग्रह किया गया है। मंदिर के अतिरिक्त वित्त सलाहकार और मुख्य अकाउंट अधिकारी ओ बालाजी ने बताया कि बैंक को साफ कर दिया गया है कि नकदी को पूरी सुरक्षा में रखा जाएगा।

    उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के नकदी चढ़ाने से जुड़ी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें मना भी नहीं किया जा सकता इसलिए बैंक से नोट बदलने की अपील की गई है।

  • EVM के बदले बैलट से चुनाव कराने में कोई आपत्ति नहीं : BJP

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    नई दिल्ली,  कांग्रेस की मांग के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का बेहद महत्वपूर्ण बयान आया है। इस बयान में बीजेपी ने साफ कर दिया है कि यदि इस मामले पर सभी पार्टियों का रुख सकारात्मक हो तो उसे भी बैलेट पेपर से चुनाव कराने में कोई आपत्ति नहीं है।

    इस संदर्भ में ताजा बयान बीजेपी के महामंत्री संगठन राम माधव का आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि विपक्ष चाहे तो इस पर आम सहमति बना ले, भाजपा को इस मामले में कोई आपत्ति नहीं है।

    उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस को याद दिलाना चाहूंगा कि बैलट पेपर की बजाय ईवीएम से चुनाव कराए जाने का फैसला बड़े स्तर पर सहमति बनने के बाद ही लिया गया था। अब आज यदि हर पार्टी यह सोचती है कि हमें बैलट पेपर पर लौट जाना चाहिए तो इस पर भी हम विचार कर सकते हैं।

    आम चुनाव के बाद फिर उत्तर प्रदेश समेत 5 राज्यों के चुनाव में कई दलों ने ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। यहां तक कि गुजरात के चुनाव में भी पाटीदार नेता हार्दिक पटेल समेत कई लोगों ने ईवीएम को बीजेपी की जीत का कारण बताया था।

    बता दें कि हाल ही में यूपी में हुए दो सीटों के लोकसभा उपचुनाव में जीत के बाद भी समाजवादी पाटीज़् के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा था कि यदि ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी न होती तो हमारी जीत का अंतर और अधिक होता। कांग्रेस ने महाअधिवेशन में बैलट का इस्तेमाल शुरू करने का प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि कई बड़े लोकतंत्रों में इसका इस्तेमाल होता है। इससे चुनाव की प्रक्रिया में लोगों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

    बीते कुछ महीनों में ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें विपक्षी दलों की ओर से कुछ अधिक हो गई हैं। नवंबर में हुए यूपी के निकाय चुनाव के दौरान कई मशीनों में पहले से ही बीजेपी के खाते में वोट पडऩे की रिपोट्सज़् आई थीं। इस पर चुनाव अधिकारियों ने मशीनों में तकनीकी खामी की बात कही थी।

    खासतौर पर यूपी के विधानसभा चुनाव में 403 में से बीजेपी के 325 सीटें जीतने पर बीएसपी चीफ मायावती समेत कांग्रेस और एसपी ने भी ईवीएम में गड़बड़ी को इसकी वजह बताया था।

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  • भारत सरकार की वेबसाइट्स को ब्लॉक कर रहा है पाकिस्तान

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    नई दिल्ली ; भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच भारत के सरकारी अधिकारियों से सूचना मिल रही है कि पाकिस्तान भारत सरकार की सभी सरकारी वेबसाइट को ब्लॉक कर रहा है। पाकिस्तान ने  मई 2017 से gov.in डोमेन वाली सभी भारतीय सरकारी वेबसाइट को ब्लॉक कर देगा। इतना ही नहीं पाकिस्तान ने अगले महीने दिल्ली में होने जा रही है  WTO की बैठक में आने से इंकार कर दिया है।

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    पाकिस्तान को पहले भी भेजा जा चुका है नोटिस

    सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान में भारत सरकार की वेबसाइट्स खुलने में काफी समस्याएं हो रही है। इस सूचना के बाद जब भारत सरकार ने पांच बार डिप्लोमैटिक चैनल के जरिए इस बारे में बात की तो पाकिस्तान ने जवाब दिया कि भारत की बेवसाइट को ब्लॉक नहीं किया गया है। इस मामले में पाकिस्तान को 18 मई 2017 को भी नोटिस भेजा गया था। जिसके बाद मार्च के इस हफ्ते में नोटिस भेजा गया है।

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    भारतीय वीजा का फार्म डाउनलोड में हो रही परेशानी

    भारतीय अधिकारियों का कहना है कि पाक ने ऐसा इसलिए किया ताकि उसके देश में (पाक) स्थित भारतीय राजनयिक और अधिकारी अपनी ही सरकारी वेबसाइट्स को एक्सेस ना कर पाए। सूत्रों का यह भी कहना है कि भारत सरकार के पास ऐसी कई शिकायतें आई हैं जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तानी नागरिक भारतीय वीजा का फार्म को डाउनलोड नहीं कर पा रहे हैं।

    WTO की बैठक में पाक नहीं हो रहा है शामिल

    राजनायिक सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में 19-20 मार्च  को WTO की बैठक में भी पाकिस्तान ने शामिल होने से मना कर दिया है। पाकिस्तान के इस फैसले से राजनयिक विवाद और ज्यादा बढ़ सकता है। इस बैठक में पाकिस्तान के मंत्री परवेज मलिक आने वाले थे। पहले तो परवेज मलिक ने इस बात का भरोसा दिलाया था कि वह बैठक में जरूर शामिल होगें लेकिन अब उन्होंनें इंकार कर दिया है।