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  • Balkar Singh mms video : APP मंत्री ने नौकरी मांग रही युवती को दिखाया Private Part ! अश्लील वीडियो तेजी से हो रही वायरल !

    Balkar Singh mms video : APP मंत्री ने नौकरी मांग रही युवती को दिखाया Private Part ! अश्लील वीडियो तेजी से हो रही वायरल !

    Balkar Singh mms video : अमृतसर]  पंजाब में आम आदमी पार्टी के एक मंत्री का अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पंजाब सरकार के मंत्री बलकार सिंह अश्लील हरकतें करते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि APP नेता बलकार सिंह ने नौकरी मांगने आई एक 21 साल की लड़की को वीडियो कॉल पर कपड़े उतारने के लिए विवश किया। और उसे अपने प्राइवेट पार्ट भी दिखाए।

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    भाजपा के कई नेताओं ने आप मंत्री का कथित वीडियो शेयर किया। वीडियो में एक शख्स, कथित तौर पर बलकार सिंह एक महिला को अपने प्राइवेट पार्ट दिखा रहे हैं। बताया जा रहा है कि युवती ने कथित तौर पर नौकरी के लिए आप मंत्री से संपर्क किया था। APP सरकार में मंत्री बलकार सिंह का एक कथित आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी नेता उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। ये आरोप भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा द्वारा प्रकाश में लाए गए, जिन्होंने आम आदमी पार्टी के सदस्य बलकार सिंह पर अनुचित यौन आचरण में शामिल होने का आरोप लगाया।

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    राष्ट्रीय महिला आयोग ने पंजाब की APP सरकार में मंत्री बलकार सिंह के खिलाफ अनुचित यौन आचरण में शामिल होने के आरोपों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा के नेतृत्व में कथित व्यवहार की कड़ी निंदा की है। महिला आयोग ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि रेखा शर्मा ने मामले में त्वरित और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए पंजाब के पुलिस महानिदेशक से तत्काल हस्तक्षेप का आह्वान किया है। महिला आयोगने घटना पर तीन दिनों के भीतर एक व्यापक रिपोर्ट सौंपने का अनुरोध किया है।

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  • Police Officer Beaten By Constable : महिला सिपाही ने थानेदार की आंखों में झोंकी मिर्ची पाउडर, फिर डंडे से की पिटाई

    Police Officer Beaten By Constable : महिला सिपाही ने थानेदार की आंखों में झोंकी मिर्ची पाउडर, फिर डंडे से की पिटाई

    Police Officer Beaten By Constable:  रामपुर । बिलासपुर तहसील क्षेत्र के खजुरिया थाने में दो महिला कांस्टेबल के बीच स्कूटी को लेकर विवाद इतना बढ़ गया महिला कांस्टेबल ने थानेदार को डंडे से पीट दिया। जिससे थानेदार का हाथ जख्मी हो गया। मामले में सीओ बिलासपुर रवि खोखर मौके पर पहुंचे और मामले की जांच कर रहे हैं।

    बताते हैं कि थाना खजुरिया में तैनात महिला कांस्टेबल आरजू से दूसरी महिला सिपाही स्कूटी लेकर गई थी। स्कूटी का कहीं एक्सीडेंट हुआ, जिससे काफी नुकसान हुआ। इसको लेकर दोनों महिला कांस्टेबल में झगड़ा हुआ। थानाध्यक्ष राजीव कुमार ने बीचबचाव किया। इससे वह नाराज हो गई। आक्रोशित महिला कांस्टेबल ने थानाध्यक्ष को उनके कक्ष में घुसकर डंडे से पीट दिया। इसके पहले उसने थानाध्यक्ष की आंखों में मिर्ची पाउडर झोंक दिया।

    पीटने वाली महिला सिपाही का कहना था कि थानेदार दूसरी महिला कांस्टेबल का पक्ष ले रहे थे. इसी के बाद उसने थानेदार को पीटा. इस मामले की जानकारी पुलिस के वरिष्ठ अफसरों को हुई तो थानेदार को पीटने वाली महिला सिपाही को निलंबित कर दिया गया।

    पहले तो उच्च अधिकारियों ने इस घटना को दबाने की कोशिश की लेकिन जब भनक बाहर लोगों और मीडिया को लगी तब महिला सिपाही को निलंबित किया गया।

  • IAS Puja Khedkar News : पुणे की अदालत ने trainee IAS Puja Khedkar की मां मनोरमा को 20 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजा

    IAS Puja Khedkar News : पुणे की अदालत ने trainee IAS Puja Khedkar की मां मनोरमा को 20 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजा

    IAS Puja Khedkar News : पुणे एक अदालत ने विवादास्पद आईएएस-प्रोबेशनरी अधिकारी पूजा खेडकर की मां मनोरमा दिलीप खेडकर को 20 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें गुरुवार को रायगढ़ जिले के महाड कस्बे से गिरफ्तार किया गया था।

    मुलशी में कुछ किसानों को कथित तौर पर उनकी जमीन हड़पने के लिए पिस्तौल से धमकाते हुए वायरल हुए एक वीडियो के बाद करीब एक सप्ताह तक ‘लापता’ रहीं मनोरमा को महाड कस्बे के पास पार्वती निवास नामक एक छोटे से लॉज में पाया गया।

    पुणे (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक पंकज देशमुख ने घटनाक्रम की पुष्टि की और कहा कि जासूसों की एक टीम ने उन्हें महाड के पास एक लॉज में पाया।

    वहां ‘इंदु ज्ञानदेव ढाकने’ के फर्जी नाम से रह रही और ‘दादासाहेब ज्ञानदेव ढाकने’ नामक एक अन्य व्यक्ति के साथ किराए की टैक्सी में घूम रही थी। उसे भोर में पुणे पुलिस की एक टीम ने उठा लिया और पुणे के पौड़ ले गई।

    पुणे के भालगांव की पूर्व सरपंच मनोरमा डी. खेडकर को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी एसजी बर्डे के समक्ष पेश किया गया, जिन्होंने उसे शनिवार (20 जुलाई) तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।

    पुलिस ने सात दिनों के लिए उसकी रिमांड की मांग करते हुए कहा कि वे उस पिस्तौल का पता लगाना और उसे जब्त करना चाहते हैं जिसका इस्तेमाल उसने जुलाई 2023 में किसानों को धमकाने के लिए किया था, उसके अन्य साथियों की जांच करना चाहते हैं और उसके प्रभाव और राजनीतिक संबंधों को देखते हुए उसे सबूत नष्ट करने या गवाहों को प्रभावित करने से रोकना चाहते हैं।

    हालांकि, जेएमएफसी कोर्ट ने उन्हें दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया और मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को तय की।

    मुलशी के एक किसान पंढरीनाथ पासलकर द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर मनोरमा खेडकर और छह अन्य लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला एक साल पुराना है, जिस पर पुलिस ने 12 जुलाई को संज्ञान लिया था।

    किसानों के सामने पिस्तौल लहराने के उनके वीडियो ने लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया, जिसके बाद पौड पुलिस ने मनोरमा और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया, लेकिन उसके बाद से वे संपर्क में नहीं रहीं।

    इसके बाद, पुणे के पुलिस आयुक्त ने भी उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा कि क्यों न उनका हथियार लाइसेंस रद्द कर दिया जाए।

    डॉ. पूजा खेडकर, एक आईएएस-प्रोबेशनरी अधिकारी, जो पहले पुणे में सहायक कलेक्टर के रूप में तैनात थीं और फिर पिछले सप्ताह वाशिम में उसी पद पर स्थानांतरित हो गईं, के खिलाफ कई चौंकाने वाले खुलासे और कई मामलों में आरोपों के बाद खेडकर परिवार सवालों के घेरे में आ गया है। अब वे अपने विभिन्न कृत्यों के लिए केंद्रीय जांच का सामना कर रही हैं।

    साथ ही, जब उनके परिवार के बारे में अधिक जानकारी सामने आई, तो उनकी मां मनोरमा को भी गिरफ्तार कर लिया गया (आज), जबकि उनके पिता दिलीप, जो एक पूर्व राज्य सरकार के अधिकारी हैं, जो वर्तमान में ‘लापता’ बताए जा रहे हैं, वे भी अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के लिए जांच के घेरे में हैं।

    (16 जुलाई) को एक बड़े घटनाक्रम में, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) मसूरी के निर्देशों के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने पूजा खेडकर को वाशिम में IAS-PO के रूप में उनके कर्तव्यों से मुक्त कर दिया और उन्हें ‘आगे की आवश्यक कार्रवाई’ के लिए 23 जुलाई तक अपने विद्यालय में लौटने का निर्देश दिया।

  • Budget 2024 :  Modi सरकार 3.O के पहले Budget पर ये क्या बोल गए  Rahul Gandhi  !!

    Budget 2024 : Modi सरकार 3.O के पहले Budget पर ये क्या बोल गए Rahul Gandhi !!

    Budget 2024 : भारत में वित्तीय नीतियों और बजट का समाज के विभिन्न वर्गों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट प्रत्येक वर्ष एक चर्चा का विषय बन जाता है, जहाँ विभिन्न राजनीतिक दलों, विशेष रूप से विपक्ष, अपनी राय व्यक्त करते हैं। हाल ही में प्रस्तुत बजट को लेकर कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने मीडिया में अपने विचार साझा किए, जिनका उद्देश्य केंद्र सरकार की नीतियों और उनके संभावित प्रभावों पर प्रकाश डालना था।

    राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि सीतारमण का बजट आम आदमी की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को ध्या‌न में रखते हुए नहीं बनाया गया है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि बजट में विकास की कोई स्पष्ट दिशा नहीं है और यह युवाओं, किसानों और मध्यम वर्ग के लिए निराशाजनक है। गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियाँ सिर्फ बड़े उद्योगपतियों के लाभ में केंद्रित हैं, जबकि आम नागरिकों के लिए कोई ठोस योजना प्रस्तुत नहीं की गई है।

    इसके अलावा, राहुल गांधी ने बजट में स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए आवंटन की कमी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में निवेश न करने से गरीब और कमजोर वर्गों पर भारी असर पड़ेगा, और यह भारतीय समाज के विकास के लिए एक बड़ा खतरा है। उनके अनुसार, नागरिकों की बुनियादी जरूरतों की अनदेखी करना, सरकार की प्राथमिकताओं की कमी को दर्शाता है।

    बजट के संदर्भ में राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सीतारमण द्वारा प्रस्तुत नीतियों का क्रियान्वयन प्रभावी नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए, उन्होंने बताया कि उस समय की सरकार ने विकास और सामाजिक कल्याण के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाया था। राहुल का तर्क था कि मौजूदा सरकार की तुलना में पहले अधिक समावेशी और जनहितैषी नीतियाँ थीं।

    अंत में, राहुल गांधी ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपनी आवाज उठाएँ और सरकार की नीतियों के खिलाफ खड़े हों। उन्होंने यह उल्लेख किया कि केवल आलोचना करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामूहिक प्रयासों से एक सकारात्मक बदलाव लाना आवश्यक है। उन्होंने देशवासियों को सजग और सक्रिय रहने का आह्वान किया, ताकि आम जन के मुद्दों को समग्र रूप में उठाया जा सके।

    इस प्रकार, राहुल गांधी ने सीतारमण के बजट पर अपनी चिंताओं को उजागर करते हुए यह स्पष्ट किया कि सरकार की नीतियों में सुधार की आवश्यकता है, ताकि वे समाज के हर वर्ग के हितों की रक्षा कर सकें। उनके बयान ने बजट पर चर्चा को एक नई दिशा दी है और यह दिखाया है कि राजनीतिक दृष्टिकोण से इस विषय का कितना महत्व है।

  • Masjid Imam Raped : मस्जिद के इमाम को नाबालिग बच्ची के यौन शोषण के आरोप में 20 साल कैद की सजा

    Masjid Imam Raped : मस्जिद के इमाम को नाबालिग बच्ची के यौन शोषण के आरोप में 20 साल कैद की सजा

    Masjid Imam Raped : गुवाहाटी, नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण के मामलों में न्याय की प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। हाल ही में, असम के मोरीगांव जिले के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मोरीगांव जिले के एक मौलवी को नाबालिग बच्ची के यौन शोषण के आरोप में 20 साल कैद की सजा सुनाई है। यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज को यह संदेश देने के लिए भी है कि ऐसे गम्भीर अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी की पहचान इमाम मंजिल इस्लाम के रूप में हुई है, जो दक्षिण बालीडोंगा रहमानिया जामे मस्जिद नामक स्थानीय मस्जिद का इमाम था। 25 मार्च 2023 को भूरागांव थाने में इमाम मंजिल इस्लाम के खिलाफ नाबालिग लड़के से अप्राकृतिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच करते हुए भूरागांव पुलिस ने संदिग्ध चरित्र वाले इमाम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।अदालत ने उन सभी सबूतों की जांच की, जिनसे पता चला कि इमाम ने नाबालिग लड़के के साथ अप्राकृतिक घिनौनी हरकत की है। यही नहीं आरोपी मंजिल इस्लाम ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी भी दी थी। सबूतों के आधार पर इमाम मंजिल इस्लाम को दोषी ठहराया और 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई और 10,000 का जुर्माना भी लगाया गया।

    युवाओं और बच्चों की सुरक्षा समाज की जिम्मेदारी है। नाबालिग बच्चियों का यौन शोषण न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि यह एक समाजिक समस्या भी है, जो गहरी जड़ों वाले सांस्कृतिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारणों से प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में सजा केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पीड़ित को मानसिक सुकून देने का कार्य भी करती है।

    हाल के वर्षों में, भारत में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में वृद्धि हुई है। इसी संदर्भ में, न्यायालयों की चयनित सजा देने की शक्ति अत्यंत आवश्यक हो जाती है ताकि उन अपराधियों को कठोरतम दंड दिया जा सके, जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग पर हमला करते हैं। 20 वर्ष की सजा, इस दिशा में एक सशक्त कदम है, जो न केवल न्याय की पुष्टि करता है, बल्कि लोगों को यह सुझाव भी देता है कि ऐसे अपराधों की रोकथाम की आवश्यकता है।

    अंततः, नाबालिगों के अधिकारों की रक्षा करना और समाज में यौन हिंसा के खिलाफ आवाज उठाना, सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। यह निर्णय इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो न केवल सजायाफ्ता को सजा देता है बल्कि आगे आने वाली पीढ़ियों को बेहतर सुरक्षा और समर्थन देने के लिए प्रेरित करता है।

  • Free internet : सरकार लेकर आ रही है Free Internet का नया प्लान, लोगों को मिलेगी महंगे रिचार्ज से राहत !!

    Free internet : सरकार लेकर आ रही है Free Internet का नया प्लान, लोगों को मिलेगी महंगे रिचार्ज से राहत !!

    Free internet : आधुनिक युग में इंटरनेट संचार, शिक्षा, और व्यापार का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यह न केवल सूचना के आदान-प्रदान को सरल बनाता है, बल्कि समाज में समानता और विकास की संभावनाओं को भी बढ़ाता है। इसी संदर्भ में, सरकार द्वारा लोगों को मुफ्त इंटरनेट देने की योजना एक महत्वपूर्ण पहल है, जो न केवल डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देगी, बल्कि समाज के हर वर्ग को डिजिटल सेवाओं की पहुंच भी मुहैया कराएगी। सरकार की ओर से फ्री इंटरनेट बिल पर विचार करने की मंजूरी दे दी है।

    यह बिल देश में इंटनरेट को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ता है। मतलब बिल देश के पिछड़े और गरीब तबके के लोगों को फ्री इंटरनेट उपलब्ध कराने पर जोर देता है, जिससे देश का गरीब तक डिजिटल इंडिया से दूर न रह जाए। इस बिल में प्रावधान है कि कोई भी भारतीय नागरिक इंटरनेट कनेक्टिविटी से दूर न रहे। इसके लिए सरकार की ओर से बिना किसी चार्ज के फ्री में इंटरनेट उपलब्ध कराया जाए।

    फ्री इंटरनेट योजना का उद्देश्य डिजिटल विभाजन को समाप्त करना है। भारत जैसे देश में, जहां बड़े पैमाने पर जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, इंटरनेट की अनुपलब्धता से सामाजिक एवं आर्थिक विकास में बाधाएं आती हैं। मुफ्त इंटरनेट सेवा प्रदान करके सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को समान अवसर देना चाहती है। यह योजना विशेष रूप से विद्यार्थियों, छोटे व्यवसायों, और महिलाओं के लिए फायदेमंद सिद्ध होगी, जो कि डिजिटल साधनों का उपयोग करके अपनी शिक्षा और उद्यमिता को आगे बढ़ा सकते हैं।

    इस योजना के द्वारा, सरकार शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की कोशिश कर रही है। आजकल, ऑनलाइन शिक्षा की मांग तेजी से बढ़ रही है। मुफ्त इंटरनेट से छात्र उन शिक्षण सामग्रियों और कोर्सों तक पहुंच प्राप्त कर सकेंगे, जिन्हें वे पहले नहीं देख पाते थे। इससे न केवल छात्रों की जानकारी का विस्तार होगा, बल्कि यह उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने में भी सक्षम बनाएगा।

    आर्थिक दृष्टिकोण से, फ्री इंटरनेट से छोटे व्यवसायों को बड़ा लाभ होगा। आज के डिजिटल युग में, ऑनलाइन मार्केटिंग और ई-कॉमर्स ने व्यापार के तरीकों को बदल दिया है। मुफ्त इंटरनेट के माध्यम से, छोटे उद्यमी अपने उत्पादों और सेवाओं को बड़े बाजार में प्रस्तुत कर सकेंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    हालांकि, इस योजना के कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियाँ भी हैं। इन चुनौतियों में बुनियादी ढांचे की कमी, सुरक्षा और गोपनीयता से संबंधित मुद्दे, तथा इंटरनेट की गुणवत्ता को बनाए रखना शामिल हैं। इसलिए, सरकार को इन सभी पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि योजना सफलतापूर्वक लागू की जा सके।

    अंत में, सरकार द्वारा लोगों को मुफ्त इंटरनेट प्रदान करने की योजना एक दूरदर्शी दृष्टिकोण है, जो समग्र विकास, डिजिटल समावेशिता, और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण है। यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाता है, तो यह न केवल लोगों के जीवन को बदलने की क्षमता रखती है, बल्कि देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। इसका सफल कार्यान्वयन समस्त समाज के लिए एक उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाएगा।

  • Agniveers के लिए UP CM Yogi Adityanath की बड़ी घोषणा, इन विभागों में मिलेगी जाॅब

    Agniveers के लिए UP CM Yogi Adityanath की बड़ी घोषणा, इन विभागों में मिलेगी जाॅब

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में Agniveers के प्रति एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जो न केवल देश की अर्धसैनिक बलों में भर्ती की प्रक्रिया को प्रभावित करेगी, बल्कि युवाओं के लिए एक नई दिशा भी प्रदान करेगी। इस योजना के अंतर्गत, सीएम योगी ने Agniveers  को स्थायी नौकरी में शामिल किए जाने के संबंध में महत्वपूर्ण कदम उठाने की बात कही है, जिससे देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले युवा पुरुषों और महिलाओं को सशक्त किया जा सके।

    Agniveers योजना, जिसे भारतीय सेना द्वारा लागू किया गया है, के तहत युवा चार साल के लिए सेना में शामिल होते हैं, और इस दौरान उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण एवं अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलता है। सीएम योगी के इस नए एलान के अनुसार, अग्निवीरों को उनके चार साल के सेवा काल के बाद विशिष्ट क्षेत्र में रोजगार देने का आश्वासन दिया गया है। इस दिशा में सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का वादा किया है कि अग्निवीरों को उनकी क्षमताओं के अनुसार नौकरी मिल सके, जिससे वे अपने करियर को एक नई दिशा दे सकें।

    इस घोषणा का एक बड़ा प्रभाव यह होगा कि यह युवाओं के बीच राष्ट्रीय सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा। अग्निवीर योजना के तहत युवा आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होंगे और देश की सुरक्षा में योगदान देने का एक अद्वितीय अवसर प्राप्त करेंगे। इसके साथ ही, स्थायी रोजगार की गारंटी मिलने वाले अग्निवीरों के मनोबल में भी वृद्धि होगी, जो उन्हें देश की सेवा करने के लिए और भी प्रेरित करेगा।

    योगी सरकार की यह पहल यह दर्शाती है कि वह युवाओं के मुद्दों को कितनी गंभीरता से ले रही है और साथ ही, यह एक संदेश है कि देश की सेवा में लगे प्रेरित युवा भविष्य की आधारशिला हैं। इससे न केवल युवाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि यह देश के सुरक्षा तंत्र को भी सशक्त बनाने में योगदान देगा।

    यह घोषणाएं केंद्र और राज्य सरकार के बीच युवा कल्याण और सुरक्षा को लेकर चल रही योजनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सीएम योगी की इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि सरकार अग्निवीरों के कल्याण और उनके भविष्य को लेकर गंभीर है। यह न केवल एक सकारात्मक कदम है, बल्कि युवा भारत के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरेगा, जो आने वाले समय में राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम होगा।

    इस प्रकार, सीएम योगी का अग्निवीरों के लिए यह बड़ा एलान हमारे समाज में युवाओं की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करेगा और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति और भी समर्पित बनाने का कार्य करेगा। यह कदम वास्तव में एक सकारात्मक परिवर्तन की ओर इंगित करता है, जो निस्संदेह हमारे देश के भविष्य के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

  • love jihad Law passed in UP assembly : अब यूपी में ‘लव जिहाद’ और धर्म परिवर्तन वालों की खैर नहीं, अब सीधे होगी उम्रकैद, योगी सरकार का बिल पास

    love jihad Law passed in UP assembly : अब यूपी में ‘लव जिहाद’ और धर्म परिवर्तन वालों की खैर नहीं, अब सीधे होगी उम्रकैद, योगी सरकार का बिल पास

    love jihad Law passed in UP assembly : लखनऊ, उत्तर प्रदेश विधानसभा ने आज एक महत्वपूर्ण विधेयक को पास किया है, जिसका नाम ‘जबरन धर्म परिवर्तन विरोधी विधेयक‘ है। यह विधेयक उन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत किया गया है, जिनमें जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों की बढ़ती संख्या की चर्चा होती रही है।

    विधेयक का उद्देश्य
    जबरन धर्म परिवर्तन विरोधी विधेयक का मुख्य उद्देश्य उन घटनाओं को रोकना है, जहां किसी व्यक्ति को उसके धार्मिक विश्वासों को बदलने के लिए मजबूर किया जाता है। सरकार का दावा है कि इस विधेयक के माध्यम से समाज में धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन व्यक्तियों की सुरक्षा करना भी शामिल है, जो धार्मिक पहचान को लेकर संवेदनशील हो सकते हैं।

    इस विधेयक के नए प्रावधानों के अनुसार किसी नाबालिग, दिव्यांग अथवा मानसिक रूप से दुर्बल व्यक्ति, महिला, अनुसूचित जनजाति का धर्म परिवर्तन कराया जाता है तो दोषी को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने से दंडित किया जाएगा। इसी तरह, सामूहिक धर्म परिवर्तन पर भी आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा होगी।

    10 लाख रुपये का जुर्माना
    संशोधन विधेयक में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति धर्मांतरण के संबंध में किसी विदेशी या अवैध संगठन से धन प्राप्त करता है, तो उसे कम से कम सात साल की कैद होगी, जिसे 14 साल तक बढ़ाया जा सकता है और साथ ही कम से कम 10 लाख रुपये का जुर्माना भी देना होगा।

    इस विधेयक के पास होने से राज्य की राजनीति में हलचल मची है। समर्थकों का कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक आवश्यक कदम है, जबकि विरोधियों का मानना है कि यह विधेयक धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देने का एक हथियार बन सकता है।

    राज्य में धर्म परिवर्तन से जुड़ी घटनाओं में कमी लाने की दिशा में यह विधेयक एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसे कार्रवाई में लाने के लिए सरकार को सभी धाराओं को निष्पक्ष और पारदर्शिता के साथ लागू करना होगा।

  • Kolkata doctor rape Case : पीड़ित डॉक्टर छात्रा के लिए कोलकाता की सड़कों पर न्याय मांगने उतरी 60,000 से अधिक भीड़ पर पुलिस का लाठीचार्ज, जवाब में डटी भीड़

    Kolkata doctor rape Case : पीड़ित डॉक्टर छात्रा के लिए कोलकाता की सड़कों पर न्याय मांगने उतरी 60,000 से अधिक भीड़ पर पुलिस का लाठीचार्ज, जवाब में डटी भीड़

    Kolkata doctor rape Case  : पिछले सप्ताह कोलकाता में सरकारी आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक जूनियर डॉक्टर के साथ हुए क्रूर बलात्कार और हत्या ने दो कट्टर प्रतिद्वंद्वी शहर फुटबॉल क्लबों – ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के समर्थकों को एक साथ ला दिया है।

    रविवार को, इन दो प्रतिद्वंद्वी क्लबों के प्रशंसकों ने संयुक्त रूप से ‘आर.जी. कर के लिए न्याय’ के नारे लगाए, जिन पर साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर लाठीचार्ज किया गया, जहां शनिवार को सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दोनों पक्षों के बीच डूरंड कप डर्बी को अंतिम समय में रद्द कर दिया गया था। सूत्रों ने कहा कि प्रशासन को यह भी डर था कि अगर रविवार को मैच हुआ तो स्टैंड पर मौजूद प्रशंसक आर.जी. कर की घटनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।

    हालांकि, मैच रद्द होने के बावजूद, दोनों टीमों के समर्थक अपने-अपने क्लब के झंडे लेकर रविवार दोपहर से साल्ट लेक स्टेडियम के सामने इकट्ठा हुए और क्रूर बलात्कार और हत्या के खिलाफ अपनी आवाज उठाई, जिसने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया है।

    फुटबॉल प्रशंसकों के संयुक्त विरोध की आशंका में बिधाननगर सिटी पुलिस ने स्टेडियम के आसपास एक निश्चित दायरे में सभा, विरोध या रैलियों पर रोक लगाने वाली भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी।

    ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के समर्थकों को उस समय बल मिला जब शहर के दूसरे फुटबॉल क्लब मोहम्मडन एससी के समर्थकों ने एकजुटता दिखाते हुए उनका साथ दिया और ‘आर.जी. कर के लिए न्याय’ के नारे लगाए।वहां मौजूद पुलिस ने गैग ऑर्डर का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों से हटने को कहा, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।

     जब पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की, तो पहले दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और फिर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।

    जल्द ही पूरा ईस्टर्न मेट्रोपॉलिटन बाईपास इलाका पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद एक आभासी युद्धक्षेत्र में बदल गया। पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया और उन्हें पास में खड़ी जेल वैन में घसीट कर ले गई।

    फुटबॉल प्रशंसकों ने एकजुट विरोध के नारे लगाते हुए सड़कें भी जाम कर दीं – ‘शोभ गैलरी-आर एक शवोर, आर.जी. कर के लिए न्याय’ कर’ (सभी क्लबों की गैलरी आर.जी. कर के लिए न्याय की मांग करती है)।

    इसी से जुड़े घटनाक्रम में, सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को आर.जी. कर मामले का स्वतः संज्ञान लिया।

    सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर प्रकाशित वाद सूची के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ मंगलवार को “कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ कथित बलात्कार और हत्या की घटना और संबंधित मुद्दे” शीर्षक वाले मामले पर सुनवाई करेगी।

  • Gujarat Flood : भारी बारिश ने गुजरात में मचाई तबाही, 15 की मौत !

    Gujarat Flood : भारी बारिश ने गुजरात में मचाई तबाही, 15 की मौत !

    Gujarat Flood : गुजरात में लगातार बारिश के बीच, राज्य की कई नदियों ने खतरे का निशान पार कर लिया है. भरूच जिले में, नर्मदा नदी ने 24 फीट के खतरे के निशान को पार कर लिया, जिससे कई निचले इलाकों में बाढ़ आ गई है. वहीं, वडोदरा जिले में, 3,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया, जब मंगलवार की सुबह विश्वामित्री नदी ने 25 फीट के खतरे के निशान को पार कर लिया. गुजरात में भारी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है, जिससे कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई है और 23,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. बाढ़ प्रभावित जिलों में 300 से अधिक लोगों को बचाया गया है, जबकि राज्य के तटीय इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है.मंगलवार को गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की.

    मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया कि वे भारी बारिश के कारण उफनती नदियों, नालों और झीलों में किसी को भी जाने से रोकने के लिए पुलिस की मदद से पूरी सतर्कता और सावधानी बरतें. इसके अलावा, मौसम विभाग ने तटीय क्षेत्रों के जिला कलेक्टरों से मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त चेतावनी का पालन करने का आग्रह किया है.मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से जानकारी दी कि भूपेंद्र पटेल ने सेना, वायुसेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ कर्मियों के बारे में भी जानकारी ली, जो स्थानीय प्रशासन की सहायता कर रहे हैं. गुजरात सरकार ने बचाव और राहत कार्यों को गति देने के लिए भारतीय सेना के छह कॉलम मांगे हैं, जिनमें से एक-एक कॉलम द्वारका, आनंद, वडोदरा, खेड़ा, मोरबी और राजकोट जिलों में तैनात किए जाएंगे. इसके अलावा, 14 एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) और 22 एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीमों को पहले ही तैनात किया जा चुका है.

    सोमवार से बारिश के कारण होने वाली घटनाओं में कम से कम 15 लोगों की जान चली गई है. गुजरात सरकार द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, मोरबी, वडोदरा, खेड़ा, भरूच और अहमदाबाद जिलों में कम से कम एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है. वहीं, गांधीनगर और महिसागर जिलों में दो-दो लोगों की मौत हुई, जबकि आनंद जिले में छह लोगों की जान गई.
    मंगलवार को वडोदरा (8,361) और पंचमहल (4,000) में 12,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जो सबसे अधिक प्रभावित राज्य हैं. अब तक, 23,870 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है और 1,696 लोगों को बचाया गया है. पिछले दो दिनों में, नवसारी में 1,200, वलसाड में 800, भरूच में 200, खेड़ा में 235 और बोटाद जिलों में 200 लोगों को निकाला गया.
    जो लोग निकाले गए, उनमें 75 गर्भवती महिलाएं भी शामिल थीं – जिनमें से 45 वडोदरा और 30 देवभूमि द्वारका जिले में थीं, जिन्हें निकटतम स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया.
    गुजरात की इस आपदा ने राज्य में जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, और सरकार के साथ-साथ आम नागरिक भी इस चुनौतीपूर्ण समय से उबरने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं.