Category: health

  • कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी के दर्द से मिलेगी राहत, मरीज को मिलेगा जीवनदान

    [object Promise]

    वैज्ञानिकों को एक बड़ी उपलब्धि हाथ लगी है। उन्होंने कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी और उन दवाओं का विकल्प खोज लिया है, जो कैंसर के इलाज के दौरान कैंसर सेल्स के साथ सामान्य सेल्स को भी नुकसान पहुंचाती हैं। वैज्ञानिकों ने चूहों पर सफल प्रयोग किया है। हालांकि इसे मानव शरीर पर लागू करने में अभी काफी वक्त है लेकिन पहले ही पायदान पर प्रयोग को सफलता मिलने से वैज्ञानिक उत्साहित हैं।

    [object Promise]
    chemotherapy1

    यह सफल प्रयोग 11 वैज्ञानिकों की टीम ने क्लेवलैंड क्लीनिक, अमेरिका में किया, जो विश्व में दूसरे स्थान पर है। वैज्ञानिकों की टीम का नेतृत्व क्लेवलैंड क्लीनिक में कैंसर बायोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. यांग ली ने किया, बीते साल वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय आए थे और यहां सात साल से कैंसर जागरूकता कार्यक्रम के तहत उनके कई लेक्चर भी आयोजित किए गए थे।

    [object Promise]
    chemotherapy1

    इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जैव रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. मुनीश भी इस टीम का हिस्सा रहे। इस रिसर्च को औंको जीन नामक प्रतिष्ठित जरनल में पब्लिशर नेचर स्प्रिंग की ओर से प्रकाशित किया गया है। डॉ. मुनीश ने बताया कि कैंसर की बीमारी से शरीर में ट्यूमर बन जाते हैं। कीमोथेरेपी और दवाओं के जरिये इन ट्यूमर्स को खत्म किया जाता है।

    इलाज की इस प्रक्रिया में कैंसर सेल्स के साथ सामान्य सेल्स को भी नुकसान होता है। शरीर पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मरीज को भी काफी पीड़ा होती है। वैज्ञानिकों की टीम ने रिसर्च में पाया कि माइक्रो आरएनए यानी एमआईआर-21 नार्मल सेल्स को खत्म करता है। इससे कैंसर सेल्स और प्रभावशाली हो जाती हैं।

    [object Promise]
    chemotherapy1

    टीम ने चूहों पर प्रयोग करते हुए एमआईआर-21 को प्रभावहीन बनाने के लिए उसका एंटी सेंस चूहे में इंजेक्ट कर दिया और पाया कि चूहे के शरीर में बना ट्यूमर धीमे-धीमे छोटा हो गया और कुछ ट्यूमर पूरी तरह से खत्म हो गए। यह प्रयोग साल भर तक अमेरिका के क्लेवलैंड क्नीनिक में चला। हालांकि अभी मानव शरीर पर इसका प्रयोग नहीं हुआ है। इसे व्यवहारिक रूप से लागू करने में तकरीबन दस वर्ष का समय लग सकता है।

  • Viral Photo: जींस के नाम पर सिर्फ जेब और ज़िप, कीमत जानकर हैरान रह जाएंगे आप

    [object Promise]

    नई दिल्ली: आपको याद होगा कुछ दिनों पहले ब्रैंड ज़ारा की रिप्ड जींस सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी. इस जींस को लेकर बॉलीवुड एक्टर ऋषि कपूर ने भी ट्वीटर पर चुटकी ली थी. इस जींस का क्रेज़ ऐसा हुआ कि यह यूथ के बीच बहुत पॉपुलर हुई और आज भी कई लोग इसे पहने हुए नज़र आ जाते हैं. लेकिन अब इस जींस से भी ज्यादा फटी डेनिम मार्केट में आ गई है. इसे नाम दिया गया है एक्सट्रीम कट आउट जींस.

    यह जींस लॉस एंजेल्स के डेनिम ब्रैंड कारमर की है. इनकी वेबसाइट पर यह जींस सेल के लिए अवेलेबल है. यह एक्सट्रीम कट आउट जींस सिर्फ आगे से ही नहीं बल्कि पीछे से भी इतनी ही फटी हुई है और इसकी कीमत जान आप हैरान हो जाएंगे. जी हां, इस एक्सट्रीम कट हाई रेज़ जींस की कीमत है 168 डॉलर यानी लगभग 11 हज़ार से ज्यादा.

    वहीं, यह जींस सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल भी हो रही है. लोग जमकर इसका मज़ाक बना रहे हैं.

  • भरपूर नींद लेने के बाद भी रहती है थकान तो करें ये काम

    [object Promise]

    भागदौड़ भरी कामकाज में व्यस्त जिंदगी में आराम करना भी बहुत जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार थकावट को दूर करने के लिए सभी 6 से 7 घंटे तक जरूर सोना चाहिए। इससे पूरा दिन शरीर भी स्वस्थ रहता है और मस्तिष्क सही तरीके से काम करता है। अगर आप 6 से 7 घंटो तक सोने के बाद भी थके.थके महसूस करते हैं तो इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे कोई लंबी बीमारीए नींद का पूरा ना होनाए खराब भोजन  अनियमित दिनचर्या थायराइड  शरीर में अधिक एसिड बनना आदि। आज हम आपको ऐसे उपाय बताएंगेए जिसे इस्तेमाल करके आपकी थकान तो दूर होगीए साथ में पूरा दिन ताजगी भी महसूस करेंगे।

    • शरीर में पानी की कमी होने पर भी पूरा दिन थकावट महसूस होती है। इसलिए दिन में अधिक से अधिक मात्रा पानी     पीएं।
      गर्म पानी की बोतल से शरीर के अंगों की सिकाई करें।
    • दिन में कमजोरी या थकान अनुभव होने पर चॉकलेट खाएं। इससे शरीर में तुरंत एनर्जी आएगी। इसके अलावा कोको तनाव को भी कम करता है।
    •  समय पर न सोना और कम नींद लेना भी सुबह.सुबह थकावट के खास कारण है। इसलिए समय पर सोएं और सुबह समय पर उठे।
    • सुबह.सुबह ठंडे पानी से नहाएं। इससे ब्लड सर्कुलेशन ठीक होगा और आप पूरा दिन तरोताजा महसूस करेंगे।
    • सुबह जल्दी उठने के बाद व्यायाम जरूर करें। सुबह की सैर सेहत के लिए वैसे भी बहुत फायदेमंद होती है। इससे शरीर में पूरा दिन एनर्जी बनी रहती है।
    • थकान को दूर करने के लिए गर्मा.गर्म चाय काफी कारगार उपाय है। खास करके तुलसी के पत्तियों की चाय बनाएं और पीएं।
    • सुबह के नाश्ते में ताजे फलों का जूस शामिल करें। इससे थकान कम लगती है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। इसके अलावा नींबू पीने से थकावट से छुटकारा मिलता है।
    • थकावट महसूस होने पर हाथों.पैरों की मालिश करवाएं। इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है और शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है।
    • अपनी डाइट में हरी सब्जियों पालक  साग  भिंडी आदि को शामिल करें। इससे शरीर में खून की पूर्ति होती है। कई बार खून की कमी और हीमोग्लोबिन का स्तर घटने से भी पूरा दिन थकावट महसूस होती है।

  • रोज एक केले का सेवन महिलाओं को दूर रखेगा इस रोग से महिलाओं के लिए इस मामले में फायदेमेंद है केला

    [object Promise]

    वैसे तो केले में इतने पौष्टिक गुण हैं कि यह सेहत के लिए कई बड़े फायदे की वजह हो सकता है लेकिन महिलाओं के लिए इसके नियमित सेवन का एक खास फायदा है।

    अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित शोध की मानें तो मेनोपॉज के बाद जो महघ्लिाएं नियमघ्ति तौर पर एक केले का सेवन करती हैं, उन्हें स्ट्रोक का खतरा 27 प्रतिशत कम रहता है।

    [object Promise]
    banana

    उनके अनुसार, नघ्यिमित तौर पर एक केले का सेवन महघ्लिाओं के शरीर में पोटैशघ्यिम की कमी नहीं होने देता जघ्सिसे स्ट्रोक का रिस्क कम रहता है।

    शोधकर्ताओं ने 50 से 79 साल की उम्र वाली 90,137 महघ्लिाओं पर अध्ययन करने के बाद यह दावा कघ्यिा है।   केवल एक केले के सेवन को फायदेमंद बताते हुए माना है कि इसकी अधघ्किता दघ्लि से जुड़े रोगों का खतरा भी बढ़ा सकती है क्योंक  अधघ्कि पोटैशघ्यिम का सेवन दिल के लिए फायदेमंद नहीं है। इसके अलावा भी केले के सेवन के सेहत से जुड़े कई बड़े फायदे आप जरूर जानना चाहेंगे।

    [object Promise]
    banana

    पोषक तत्वों से भरपूर है केला

    अगर आप केले के सेवन से बचते हैं कि यह बीमारों का फल है तो इसके फायदे और पोषक तत्वों को जानने के बाद अपनी राय बदल देंगे।

    केला में विटामिन ए, बी, सी और ई, मिनिरल्स, पोटैशियम, जिंक, आयरन आदि कई पोषक तत्व हैं जो औपको सेहत से जुड़े ये बड़े फायदे देंगे।

    केले में प्राकृतिक तौर पर शुगर है। शारीरिक श्रम या कसरत करने के बाद केले के सेवन से शरीर में इसका स्तर सामान्य होता है और

    तुरंत ऊर्जा मिलती है। थकान महसूस करने पर इसके सेवन से आपको ताकत व ताजगी मिलेगी।

    [object Promise]
    banana

    तेज दिमाग और बेहतर मूड  
    केला में ट्राइपोफन नामक तत्व अच्छी मात्रा में है जो शरीर में सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ाता है जिससे मूड अच्छा होता है। स्ट्रेस के दौरान इससे अच्छी कोई डाइट हो ही नहीं सकती है।

    केले में विटामिन बी अच्छी मात्रा में होता है। यह नर्वस सिस्टम को ठीक रखता है और याददाश्त तेज करता है। ऐसे में तेज दिमाग के लिए नियमित रूप से केले का सेवन कर सकते हैं।

    इसमें पोटैशियम अच्छी मात्रा में होता है जो रक्त संचार ठीक रखता है और सोडियम नियंत्रित रखता है। इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। मजबूत हड्डियों से लेकर पाचन तक फायदेमंद

    केले में मौजूद प्रोबायोटिक बैक्टीरिया शरीर में कैल्शियम को सोखने में मदद करता है। इसके अलावा, इसमें पोटेशियम अच्छी मात्रा में होता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए फायदेमंद है।

    केले में प्रोबायोटिक इन्जाइम्स हैं जो पोषक तत्वों के पाचन में मदद करते हैं। इसके नियमित सेवन से पाचन ठीक रहता है। कच्चे केले का सेवन डायरिया से बचाव में काफी मददगार है।

    इसके अलावा, इसमें मौजूद पेसटिन नामक तत्व कॉन्स्टिपेशन ठीक करने में भी मददगार है। केले में प्रोबायोटिक इन्जाइम्स हैं जो पोषक तत्वों के पाचन में मदद करते हैं। इसके नियमित सेवन से पाचन ठीक रहता है। कच्चे केले का सेवन डायरिया से बचाव में काफी मददगार है। इसके अलावा, इसमें मौजूद पेसटिन नामक तत्व कान्स्टिपेशन ठीक करने में भी मददगार है।

  • बॉलीवुड की सबसे फिट और खूबसूरत एक्ट्रैस शिल्पा शेट्टी ऐसे रहती है फिट, देखें वीडियो!

    नई दिल्ली/टीम डिजिटल। शिल्पा शेट्टी बॉलीवुड की ऐसी अदाकारा हैं, जो अपनी एक्टिंग के लिए ही नहीं, बल्कि फिटनेस के लिए भी मशहूर हैं। खानपान और योग से भी इनका खास लगाव रहा है। इनके फिटनेस वीडियो और किताब भी चर्चा में रहती हैं। बिजनेस के फंडे भी वह बाखूबी समझती हैं। लेकिन, फिटनेट पर उनकी अच्छी पकड़ है।

    shilpa-shetty-

    इस बारे में शिल्पा शेट्टी का कहना है कि कूल दिखने के लिए जरूरी नहीं है कि जिम में पसीना बहाया जाए। इसके लिए फिटनेस को लाइफ का एक हिस्सा बनाना भी जरूरी है।  42 वर्षीय शिल्पा ने कहा कि ऐसे बहुत से लोग हैं, जो जिम जाते हैं। उनपर यह एक सनक की तरह सवार रहता है। लेकिन मेरे लिए यह हमेशा ही एक अनुशासित लाइफस्टाइल का पार्ट रहा है।

    shilpas1

    उन्होंने कहा, ‘फिटनेस मेरे लिए लाइफ है। यह मेरे लिए कुछ भी ऐसी चीज नहीं है, जो मैंने कूल नजर आने के लिए की हो। दरअसल, आज जिम जाना फैशन सा हो गया है।’ एक्ट्रेस ने कहा कि वह ऐसी फैमिली से ताल्लुक रखती हैं, जो हेल्थी लाइफ जीने में भरोसा रखता है। अपने स्कूली दिनों को याद करते शिल्पा ने कहा कि उस दौरान तो मैंने तरह-तरह के खेलों में भाग लिया था।

    शिल्पा ने कहा, ‘मैं स्टेटलेवल की वॉलीबॉल प्लेयर थी और अपने स्कूल में ताइकवोंडो की भी प्रैक्टिस करती थी। मेरे पेरेंट्स ने फिटनेस पर जोर दिया। मेरे लिए जिम जाना कोई लग्जरी नहीं, बल्कि एक जरूरत थी।’

  • 80 की उम्र में 30 साल की यंग लगती है यहां की महिलाएं, जानिये इनके लम्बे जीवन का रहस्य और इनका लाइफस्टाइल

    [object Promise]

    आपने अक्सर बच्चे के जन्म पर परिवार के बुजुर्गों को उन्हें सौ साल तक जीने का आर्शीवाद देते हुए सुना होगा, पर क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान के पहाड़ी इलाके में एक जगह ऐसी है जहां हुंजा कम्युनिटी के लोग रहते हैं, वो ये सुन कर हंसते होंगे, क्योंकि उनकी औसत उम्र ही है 120 साल। इतना ही नहीं इस समुदाय की महिलायें 65 साल और पुरुष 90 साल की उम्र तक माता पिता बनने की क्षमता रखते हैं। आइये जाने इस समुदाय के लोगों के बारे कुछ और रोचक बातें।

    hunja-valley-women

    उत्तरी पाकिस्तान के पहाड़ी इलाके में करीब 87000 की आबादी वाला एक छोटा सा क्षेत्र है जिसमें हुंजा कम्युनिटी के लोग रहते हैं। ये लोग आज भी प्राकृतिक संसाधनों से अपना जीवन चलाते हैं। इस समुदाय के लोगों की होती है जबकि विशेष परिस्घ्थितियों में कोई कोई इंसान 160 साल तक भी जीवित रहता है। कहते हैं एक बार ब्रिटिश एयरवेज ने एक हुंजा समाज के व्यक्ति को वीजा देने में परेशानी जतायी क्योंकि पासपोर्ट पर उसकी जन्मतिथि 1832 लिखी हुई थी। एक ही परिवार में आपको 95 साल तक के पिता और 75 साल के बेटे का मिलना सामान्य बात है।

    [object Promise]
    hunja-valley-women

    दरसल हुंजा कम्युनिटी की इस लंबी आयु का राज उनकी जीवनशैली में ही छिपा है जो पूरी तरह प्राकृतिक साधनों पर निर्भर है। ये लोग पूरी तरह शुद्ध दूध, फल, मक्खन आदि का इस्तेमाल करते हैं। आज भी इनके समाज में कैमिकल बेस्घ्ड मॉर्डन पेस्टिसाइड को बगीचों और खेतों में छिड़कना प्रतिबंधित है। हुंजा लोग खास तौर पर जौ, बाजरा, कुट्टू और गेहूं का ही खाने में प्रयोग करते हैं।

    hunja-valley-women

    यहाँ के लोग दिन में केवल दो बार ही खाना खाते हैं। पहली बार वो दिन में 12 बजे खाना खाते हैं और फिर रात को। इनका खाना पूरी तरह नेचुरल होता है। इसमें किसी तरह का कैमिकल नहीं मिलाया जाता। इनका दूध, फल, मक्खन सब चीजें प्योर होती हैं। गार्डन में पेस्टिसाइड स्प्रे करना इस घाटी में बैन है। इस घाटी के लोग खासकर खुद से उगाई हुई चीजें खाते हैं जिनमे जौ, बाजरा, कुट्टू और गेहूं प्रमुख है।

    हुंजा घाटीइनके अलावा आलू, मटर, गाजर, शलजम, दूध जैसी चीजें भी ये बहुत खाते हैं। यहाँ के लोग मांस खाना बहुत कम पसंद करते हैं। हुंजा के लोग शून्य के भी नीचे के तापमान पर बर्फ के ठंडे पानी में नहाते हैं। ये लोग वही खाना खाते हैं जो ये खुद उगाते हैं।

    hunja-valley-women

    आबादी की लिहाज से हुंजा समुदाय के लोग भले गिनती में कम हों, लेकिन इन्हें दुनिया के सबसे लम्बी उम्र वाले, खुश रहने वाले और स्वस्थ लोगों में गिना जाता है. हुंजा कम्युनिटी की एक और खासियत है कि यह दुनिया की अकेली के कैंसर फ्री पापुलेशन है . आजतक एक भी हुंजा शख्स कैंसर का शिकार नहीं हुआ है. इन लोगों ने अपनी जिन्दगी में कभी कैंसर का नाम तक नहीं सुना है. हैरानी वाली बात यह है कि हुंजा फीमेल्स 65 की उम्र में भी बच्चे पैदा कर सकती हैं. ।

    hunja-valley-women

    इस समुदाय के लोग कैंसर और ट्यूमर जैसी बीमारियों के बारे में जानते ही नहीं हैं क्योंकि इनका भोजन और जीवन शैली इस का शिकार होने ही नहीं देती। ये लोग बहुत ज्यादा पैदल चलते हैं। एक दिन में लगभग 15 से 20 किलामीटर, जबकि अच्छे सा अच्छा जिम आपको 3 किलोमीटर से ज्घ्यादा कार्डियो नहीं करने देता। इसके अलावा साल के चार पांच महीनों में ये लोग पारंपरिक कारणों से खाना बिलकुल छोड़ कर सिर्फ लिक्वििड डाइट पर ही रहते हैं।

    [object Promise]
    hunja-valley-women

    पूरी तरह मुस्लिम परंपराओं का पालन करने वाले बेहद खूबसूरत हुंजा लोग खुद को सिकंदर महान का वशंज बताते हैं। ये लोग अपने ही समुदाय में शादियां करते हैं। यही वजह है कि सदियों से इनका समुदाय इस छोटे से इलाके में सीमित है।

  • एक लाल मिर्च आपको दे सकती है ये खुशी जानिये !

    [object Promise]

    लंबा और स्वस्थ जीवन हर व्यक्ति चाहता है. लेकिन लाइफस्टाइल में बदलाव और रोजमर्रा की आदतें हमें बीमार बना देती हैं. क्या आप लंबे समय तक जीना चाहते हैं? तो खूब लाल मिर्च खाइए, इससे कोलेस्ट्रॉल कम होता है जिससे जिंदगी लंबी होती है. ऐसा शोधकर्ताओं का कहना है. हालांकि शोधकर्ताओं को उस प्रणाली का पता नहीं चल पाया है, जिससे लाल मिर्च खाने से जीवन लंबा होता है. अमेरिका के वरमोंट विश्वविद्यालय के मुस्तफा चोपान ने बताया, “ट्रांसिएंट रिसेप्टर पोटेंसियल (टीआरपी) चैनल्स, जो कैप्सीचीन जैसे एजेंटों के प्राथमिक रिसेप्टर्स होते हैं, जोकि मिर्च का प्रमुख तत्व है. उसकी जीवनकाल को बढ़ाने में कोई भूमिका हो सकती है.”

    चोपान ने बताया, “माना जाता है कि कैप्सीचीन ही मोटापे को घटाने और धमनियों में रक्त प्रवाह को नियंत्रिण करने में सेलुलर और आणविक तंत्र में अपनी भूमिका निभाता है. साथ ही इसमें माइक्रोबियल विरोधी गुण होते हैं जो ‘संभवत: आंतों के माइक्रोबायोटा में बदलाव कर अप्रत्यक्ष तौर पर उस व्यक्ति के जीवनकाल को बढ़ाने में योगदान करता है.” मसालों और मिर्ची को शताब्दियों से रोगों के इलाज में लाभकारी माना जाता रहा है. इस शोध के लिए दल ने 16,000 अमेरिकियों का 23 सालों तक अध्ययन किया.

  • जानिये मानसून में क्यों नहीं खाना चाहिए स्ट्रीट फूड ?

    [object Promise]

    मानसून सीजन में स्ट्रीट फूड खाना तो हर किसी को पसंद होता है। अक्सर लोग बारिश के मौसम में  सड़के किनारे बिकने वाला स्ट्रीट फूड खाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं यह आपकी सेहत के लिए कितना खतरनाक है। भले ही सड़क किनारे मिलने वाले चाय-पकौड़ों या अन्य स्ट्रीट फूड्स की महक आपको अपनी ओर खींच लें लेकिन सेहत के लिहाज से इसका सेवन नहीं करना चाहिए। बारिश के मौसम में स्ट्रीट फूड्स का सेवन करने से इंफैक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

    [object Promise]
    eating-street-food-

    मानसून में क्यों नहीं खाना चाहिए स्ट्रीट फूड?
    भले ही बारिश का मौसम आपको गर्मी से राहत देता हो लेकिन वातावरण में नमी बढ़ने के कारण इस मौसम में कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा इस मौसम में रोगाणुओं से पैदा होने वाली बीमारियां जैसे चिकनगुनिया, टाइफाइड, डेंगू और अपच का खतरा भी बढ़ जाता है। वहीं, स्ट्रीट फूड न तो ठीक से पकाया जाता है और न ही उसे बनाने के लिए साफ सामान, पानी का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसका सेवन आपको बीमार कर देता है। इसके अलावा ज्यादातर दुकानदार अपने फूड्स को बाहर खुले में रखते हैं, जिसपर कई तरह बैक्टीरिया होते हैं, जोकि आपको बीमार कर देते हैं। ऐसे में इस मौसम में इससे परहेज करना ही बेहतर है।

     

    इन बातों का रखें ध्यान
    1. ज्यादातर दुकानदार स्ट्रीट फूड को ठीक तरह से नहीं पकाते, जिसके कारण वह अच्छी तरह नहीं पकता। मगर मानसून के मौसम में हमेशा पके हुए भोजन का सेवन करना चाहिए। कच्चे या आधे पके हुए भोजन में रोगाणुओं और बैक्टीरिया होने की संभावना ज्यादा होती है। ऐसे में इनका सेवन आपको बीमार कर सकते हैं।
    2. कोशिश करें की आप हमेशा ताजा और फ्रैश चीजें ही खाएं। इस बात का भी ध्यान रखें कि भोजन सही तापमान और ढककर रखा गया हो।
    3. बारिश के मौसम में बहुत ज्यादा तैलीए, मसालेदार या ज्यादा शुगर वाले भोजन से भी परहेज करें। क्योंकि इस तरह की चीजें खाने से पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे आपको एसिडिटी, गैस, कब्ज, दस्त और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
    4. इस मौसम में पानी वाले स्ट्रीट फूड्स जैसे गोलगप्पे, गन्ने का रस, बर्फ का गोला जैसी चीजों का सेवन भी न करें। क्योंकि दुकानदार इन चीजों को ढककर नहीं रखते और इन्हें बनाने के लिए गंदे हाथों का इस्तेमाल करते हैं। इससे बैक्टीरिया आपके शरीर में जाकर आपको बीमार कर देते हैं।
    5. इस मौसम में बोतलबंद पानी तथा प्योरिफायर्स वाले पानी के अलावा कहीं से पानी न पीएं। इससे आप कई बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
    6. मानसून में गलती से भी खुले में रखे स्ट्रीट फूड का सेवन न करें। सड़क किनारे बिकने वाली पाव भाजी या छोले कुलचे में बैक्टीरिया हो सकते हैं, जोकि फूड प्वाइजनिंग, इंफैक्शन के साथ कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

  • High blood pressure रखना  है. Control तो खाइए ये सब्जियां

    [object Promise]

    हाई ब्लड प्रैशर की समस्या आजकल आम है. भोजन में हरी सब्जियों को अवॉइड करके लोग फ्राई फूड्स को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं. जिससे सेहत को नुकसान पहुंचने लगता है. जब आपके शरीर का बीपी140/90 mm Hg या इससे अधिक हो तो आपको उच्च रक्त चाप यानि हाई बीपी की समस्या है. शरीर में खून का दबाब बढ़ जाने से दिल की धड़कन भी बढ़ जाती है, जिसे हम हाई ब्लड प्रैशर कहते हैं. इसका इलाज समय पर न होने से किडनी और दिल की बीमारी का खतरा भी बन जाता है. अपने भोजन में पोटाशियम से भरपूर फल और सब्जियां जैसे केला,फलियां,पालक शामिल करें. आइए जानते हैं कि भोजन में कौन-सी पांच सब्जियां शामिल करनी चाहिए जो आपको हाई बीपी से राहत दिला सके.

    1.लहसुन

    रोजाना अपने खाने में लहसुन का इस्तेमाल करें. लहसुन से शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है जो खून के दबाब को कम करता है जिससे ब्लड प्रैशर कंटोल रहता है.

    2.पालक

    पालक में आयरन और कैल्शियम की भरपूर मात्रा है. पालक के सेवन से हाई बीपी के मरीजों को लाभ होता है.

    3.शकरकंदी

    इसमें बीटा कैरोटीन, कैल्शियम और घुलनशील रेशे होते हैं जो स्वाद के साथ दिमाग को भी शांत करते है. जिससे तनाव कम होता है. तनाव कम होने से बीपी नही बढ़ता.

    4. आलू

    आलू को छिलकों समेत उबालने से उनमें नमक की मात्रा घट जाती है इसलिए बीपी के मरीजों को उबलें हुए आलू खाने चाहिए. आलू में मौजूद पोटाशियम और मैग्नशियम बीपी को नॉर्मल रखने में सहायक होते हैं.

    5. लाल शलगम

    बीपी के मरीज को अपने खाने में लाल शलगम का इस्तेमाल बढ़ा देना चाहिए. लाल शलगम में नाइट्रिक अॉक्साइड नाम का पदार्थ ब्लड वैसल्स को खोलता है जिससे शरीर में खून का संचार सही रहता है .

  • ‘मेलेनोमा’ कहीं आप भी तो इस स्किन कैंसर के चपेट में तो नही है ?

    [object Promise]

    नई दिल्ली । वैज्ञानिकों को त्वचा कैंसर के उपचार को प्रभावी बनाने में बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने एक ऐसे मोलेक्यूल की पहचान की है जिसे कैंसर वैक्सीन में मिलाकर त्वचा कैंसर से लड़ने की प्रतिरक्षा तंत्र की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, डिप्रोवोकिम नामक मोलेक्यूल को मौजूदा वैक्सीन के साथ जोड़ने से कैंसर से मुकाबला करने वाली कोशिकाओं को ट्यूटर तक पहुंचाया जा सकता है। चूहों पर किए गए परीक्षण में पाया गया कि इस थैरेपी की मदद से मेलेनोमा के उन मामलों में भी सुधार की संभावना बढ़ सकती है जिनमें सिर्फ दवा थैरेपी प्रभावी नहीं होती।

    मेलेनोमा त्वचा कैंसर का सबसे घातक प्रकार है। अमेरिका के स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर डेल बोगर ने कहा, ‘मेलेनोमा के उपचार में यह सह-थैरेपी समूची प्रतिक्रिया देती है। जिस तरह कोई वैक्सीन शरीर को बाहरी रोगाणुओं से मुकाबला करना सिखा सकती है, ठीक उसी तरह यह वैक्सीन ट्यूमर के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को ट्रेनिंग दे सकती है।’

    मेलानोमा बहुत ही खतरनाक प्रकार का स्किन कैंसर है। यह त्‍वचा के रंग का निर्माण करने वाले मेलोनोसाईट्स में होता है। मेलोनोसाईट्स या मिलेनिन सूर्य की किरणों के असर से स्किन की रक्षा करते हैं। मेलानोमा स्किन कैंसर के चार चरण होते हैं। चौथे चरण में यह सामान्‍य न रहकर गंभीर बीमारी बन जाती है। मेलानोमा का पता चलते ही तुरंत इसका उपचार शुरू कर देना चाहिए। कई बार मेलानोमा त्‍वचा के साथ ही शरीर के अन्‍य अंगों और हड्डियों को भी अपनी चपेट में ले लेता है। आगे इस आलेख के जरिए बात करते हैं मेलानोमा के कारण और लक्षणों के बारे में।

    मेलानोमा स्किन कैंसर होने के ये हैं खतरे

    कैंसर हो या अन्‍य कोई बीमारी सभी का अपना-अपना रिस्‍क फैक्‍टर या खतरा जरूर होता है। सभी रोगों और अलग-अलग प्रकार के कैंसर के विभिन्‍न खतरे होते हैं। कैंसर कई प्रकार का होता है। इन सभी के खतरे में भी कोई समानता नहीं पायी जाती। किसी कैंसर का खतरा स्‍मोकिंग से बढ़ता है तो किसी के होने का खतरा सन एक्‍पोजर से है। वहीं कुछ कैंसर का खतरा व्‍यक्ति की उम्र बढ़ने पर होता है और कुछ फैमिली हिस्‍ट्री के कारण भी होते हैं।

    सूरज की अल्‍ट्रा वायलेट (यूवी) किरणों से मेलानोमा स्किन कैंसर का सबसे ज्‍यादा खतरा रहता है। जिन लोगों की दिनचर्या ऐसी होती है कि उन्‍हें सूर्य की रोशनी में ज्‍यादा रहना पड़ता है, उन्‍हें मेलानोमा कैंसर होने का भी खतरा ज्‍यादा होता है।

    तिल

    शरीर पर मौजूद तिल भी मेलानोमा कैंसर का कारण हो सकते हैं। सामान्‍यतया बच्‍चे के जन्‍म के समय उसके शरीर पर तिल मौजूद नहीं होते, ये बचपन में या फिर युवावस्‍था में दिखाई देते हैं। हालांकि ज्‍यादातर मामलों में तिल से कोई खतरा नहीं होता, लेकिन यदि किसी व्‍यक्ति के शरीर पर ज्‍यादा तिल हैं तो उसे मेलानोमा का खतरा बना रहता है।

    गोरी त्‍वचा, चकत्‍ता और हल्‍के बाल

    अफ्रीकन लोगों के मुकाबले गोरे लोगों में मेलानोमा होने का खतरा दस गुना तक ज्‍यादा होता है। इन लोगों के लाल व भूरे कलर के बाल, ब्‍लू और ग्रीन कलर की आंखे और गोरी त्‍वचा होती है। इसलिए इनमें मेलानोमा स्किन कैंसर होने की ज्‍यादा आशंका होती है।

    फैमिली हि‍स्‍ट्री

    यदि आपके परिवार में माता-पिता, भाई-बहन या कोई बच्‍चा मेलानोमा से ग्रसित है तो आपको मेलानोमा स्किन कैंसर होने का खतरा ज्‍यादा रहता है। मेलानोमा छुआ-छूत से फैलने वाला रोग है। लगभग 10 फीसदी मामलों में देखा गया है कि लोगों को परिवार के कारण मेलानोमा कैंसर हुआ है।

    मेलानोमा रोगी को खतरा

    यदि कोई पहले व्‍यक्ति मेलानोमा रोग का उपचार करा चुका है तो उस व्‍यक्ति को दुबारा से मेलानोमा कैंसर होने का खतरा बना रहता है। करीब पांच फीसदी मामलों में मेलानोमा का उपचार करा चुके व्‍यक्ति को फिर से यह शिकायत हुई है।

    पाचन तंत्र की खराबी

    यदि किसी का पाचन तंत्र संबंधी का ट्रीटमेंट चल रहा है या उस व्‍यक्ति के शरीर का कोई अंग ट्रांसप्‍लांट हुआ है तो ऐसे लोगों को मेलानोमा होने का खतरा ज्‍यादा बना रहता है।

    उम्र

    मेलानोमा कैंसर होने का खतरा उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है। बुजुर्गों में यह रोग खूब पाया जाता है। हालांकि मेलानोमा युवाओं में भी पायी जाने वाली बीमारी है। अक्‍सर मेलानोमा की परेशानी 30 साल के आसपास उम्र वाली महिलाओं में भी देखी गई है।

    कैसे फैलता है स्किन कैंसर

    शरीर लाखों जीवित कोशिकाओं से मिलकर बनी है। सामान्‍य रूप से शरीर की कोशिकाएं बढ़ती हैं और नई कोशिकाओं का जन्‍म होता है, फिर पुरानी कोशिकाएं मर जाती है। यही क्रम चलता रहता है। किसी भी व्‍यक्ति के जीवन के शुरुआती सालों में सामान्‍य कोशिकाएं तेजी से बढ़ती है। इसके बाद युवावस्‍था आने पर ज्‍यादातर नई कोशिकाएं बेकार कोशिकाओं को बदलने या क्षतिग्रस्‍त कोशिकाओं की रिपेयर के लिए तैयार होती है।

    मेलानोमा का उपचार

    मेलानोमा के उपचार के लिए डॉक्‍टर सर्जरी करता हैं। इसका पता चलने के तुरंत बाद उपचार के लिए डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए। यदि इसके उपचार में देरी की गई तो यह आपके शरीर के अन्‍य भागों में भी फैल सकता है। सर्जरी के बाद डॉक्‍टर नियमित चेकअप के लिए आपका शेड्यूल तय करेगा। शेड्यूल के मुताबिक नियमित जांच कराये। यदि आपका मेलानोमा ज्‍यादा पुराना हो गया है और लिम्‍फ नोड्स तक फैल गया है तो इसमें सर्जरी के साथ इंटरफेरोन नामक दवाई लाभदायक रहती है। यदि आपके शरीर पर हुए किसी दाग या धब्‍बे में खुजली होती है और खून निकलता है तो आपको मेलानोमा कैंसर हो सकता है। इसके उपचार के लिए जल्‍द से जल्‍द चिकित्‍सक से संपर्क करें।