Category: health

  • माइग्रेन का दर्द मिनटों में होगा छूमंतर

    [object Promise]

    ज्यादातर लोगों को सिर में दर्द की शिकायत रहती है. यह परेशानी बार-बार होने पर माइग्रेन का रूप ले लेती है. माइग्रेन के कारण सिर के एक हिस्से में असहनीय तेज दर्द होने लगता है. कई बार तो यह दर्द मिनटों में ठीक हो जाता है तो कई बार यह दर्द घंटों तक बना रहता है.

    जैसे ही आप सामान्य स्थिति से एकदम तनाव भरे माहौल में पहुंचते हैं तो आपका सिरदर्द और ब्लडप्रैशर हाई हो जाता है. ऐसा होने पर आप समझ जाएं कि आप माइग्रेन का शिकार हो रहे हैं.

    ऐसे में अपनी मर्जी से कोई भी पेन किलर लेने के बजाएं डॉक्टरी डांच करवाएं. नहीं तो आप कुछ घरेलू नुस्खे अपनाकर भी माइग्रेन के दर्द से छुटकारा पा सकते हैं.

    माइग्रेन के कारण

    हाई ब्लड प्रैशर

    ज्यादा तनाव लेना

    नींद पूरी न होना

    मौसम में बदलाव के कारण

    दर्द निवारक दवाईयों का अधिक सेवन

    माइग्रेन के लक्षण

    भूख कम लगना

    पसीना अधिक आना

    कमजोरी महसूस होना
    आंखों में दर्द या धुंधला दिखाई देना

    तेज आवाज या रोशनी से घबराहट

    उल्टी आना या जी मचलाना

    किसी काम में मन न लगना

    माइग्रेन के घरेलू उपाय

    1. देसी घी

    माइग्रेन के दर्द से छुटकारा पाने के लिए रोजाना शुद्ध देसी घी की 2-2 बूंदे नाक में डालें. इससे आपको इसके दर्द से राहत मिलेगी.

  • नहाने के पानी में मिलाएं यह 1 चीज, नहीं जाना पड़ेगा डॉक्टर के पास

    [object Promise]

    मौसम बदलने के साथ सेहत और त्वचा संबंधित कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए लोग कई तरह की दवाईयों का सेवन करते हैं लेकिन छोटी-मोटी परेशानियों के लिए आप घरेलू नुस्खे भी अपना सकते है।

    [object Promise]
    रोज पानी में नमक मिलाकर नहाने से

    जी हां, अगर आप नहाने के पानी में एक चम्मच नमक मिलाएं तो आप हैल्दी और ग्लोइंग दोनों रहेंगे। हम आपको बताते हैं कि नहाने के पानी में नमक मिलाने से क्या-क्या फायदे होते है।

    [object Promise]
    नहाने के पानी में मिलाएं यह 1 चीज, नहीं जाना पड़ेगा डॉक्टर के पास

    – घुटनों का दर्द
    बढ़ती उम्र में अक्सर लोग घुटनों के दर्द से परेशान रहते हैं। नमक वाले पानी से नहाने से इस समस्या से जल्द राहत मिलती है।

    – ग्लोइंग स्किन
    नमक वाले पानी से नहाने त्वचा में कुदरती निखार आता है। इससे झुर्रियां और दाग-धब्बे दूर होते है।

    – कमर दर्द
    लगातार बैठे रहने या फिर सही पोजीशन में न बैठने की वजह से कमर में दर्द होता है। कमर दर्द होने पर पेनकिलर खाने की बजाय इस नुस्खे को अपनाएं। इससे जल्द आराम मिलेगा।

    – स्किन इंफेक्शन
    मौसम बदलने पर कई लोगों को स्किन इंफेक्शन जैसे दाद,खाज,खुजली की समस्या होने लगती हैं। रोज पानी में नमक मिलाकर नहाने से इन परेशानियों से जल्द राहत मिलती है।

    – तनाव
    पानी में नमक मिलाकर नहाने से तनाव दूर होता है। इससे मूड अच्छा रहता है।

  • क्या दूध के साथ अंडा खाना चाहिए?

    [object Promise]

    नाश्ते को दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन माना जाता है। इसका मतलब यह है कि नाश्ते के रूप में आप पिछली रात का उपवास तोड़ते हैं और दिन के लिए अपने मेटाबोलिज्म और शरीर के अन्य कार्यों के लिए तैयार करते हैं। सुबह आप जो भी कुछ खाते हैं, उससे न केवल आपका पेट सही रहता है बल्कि आपका दिमाग भी बेहतर रहता है। इससे आपको एनर्जी मिलती है जिससे शरीर बेहतर तरीके से कामकाज कर पाता है। इसलिए नाश्ते में ऐसी चीजें खाना जरूरी है जिससे आपको पर्याप्त ऊर्जा मिल सके। इसमें इस बात का अहम रोल होता है कि आप किस चीज के साथ क्या खाते हैं यानी आपका फूड कॉम्बिनेशन क्या है।

    फूड कॉम्बिनेशन क्यों है जरूरी

    खाने के मामले में आपको सतर्क रहना चाहिए। आपको आसानी से मिलने वाली चीजें नहीं बल्कि वो चीजें खानी चाहिए जिसकी आपके शरीर को जरूरत है। जब नाश्ते में प्रोटीन से भरपूर चीजों की होती है, तो दो चीजों अंडा और दूध का नाम पहले स्थान पर आता है। कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि इन दोनों चीजों का एकसाथ सेवन नहीं करना चाहिए। आपको बता दें कि अंडा प्रोटीन के अलावा  कोलीन और एल्ब्युमिन का भी बेहतर स्रोत है। अंडे को कई तरीके से खाया जा सकता है जैसे कच्चा, उबालकर, तलकर या आधा उबालकर।

    कच्चा अंडा क्यों ना खाएं?

    अमेरिकन जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन के अनुसार, अंडे का ना केवल टेस्ट खराब होता है बल्कि इस रूप में खाना काफी खतरनाक भी माना जाता है। कच्चा अंडा खाने से आपको बायोटिन की कमी, फूड पोइजनिंग और साल्मोनेला इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है। इससे आपको पेट खराब होना, उल्टी होना पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। कई  गंभीर मामलों में साल्मोनेला इन्फेक्शन से मृत्यु भी हो सकती है।

    उबला अंडा क्यों खाएं?

    दूसरी ओर पका हुआ अंडा खाने से इन्फेक्शन और फूड पोइजनिंग का कम खतरा होता है। इसके अलावा जब अंडे को पकाकर खाया जाता है, तो शरीर द्वारा उससे मिलने वाले प्रोटीन को आसानी से अवशोषित किया जा सकता है जबकि कच्चे अंडे के मामले में ऐसा नहीं है।

    दूध के साथ अंडा खाने से क्या होता है?

    दूध कैल्शियम, लिपिड, व्हे, कैसिइन और अन्य मिनरल्स व विटामिन का एक समृद्ध स्रोत है। दूध एक कोलाइड युक्त पानी है जो इसके अन्य घटकों के साथ बांधता है। स्तनधारियों से कच्चा दूध या तो सीधे सेवन किया जाता है या बैक्टीरिया को मारने के लिए पाश्चरीकृत किया जाता है, जो उसमें मौजूद हो सकता है। इन दोनों चीजों को जब एक साथ खाया जाता है, तो यह शरीर के लिए बेहतर होते हैं। लेकिन अंडा पका होना चाहिए और दूध बैक्टीरिया फ्री होना चाहिए।

    जब इन दोनों चीजों को एक साथ खाया जाता है, तो इससे प्रोटीन की मात्रा बढ़ सकती है जो शरीर द्वारा आसानी से अवशोषित नहीं होता है। यह बढ़ा हुआ प्रोटीन फैट में बदलना शुरू हो जाता है। लेकिन जब अंडे को उबालकर खाते हैं, तो प्रोटीन का अवशोषण आसानी से हो जाता है जिससे किसी भी तरह का स्वास्थ्य संबंधी खतरा नहीं होता है। यानी उबले अंडे को दूध के साथ बिना किसी चिंता के खाया जा सकता है। इसलिए उबले अंडे को उबले हुए दूध के साथ खाएं और स्वस्थ रहें।

  • जानिये फेशवॉश के समय आपको रखना किन बातों का ध्यान !

    [object Promise]

    गर्मियों का मौसम शुरू होने वाला है। और इस मौसम में चेहरे पर आने वाले पसीने के कारण चेरहे पे धूल मिट्टी जमा हो जाती है और चेहरा खराब दिखने लगता है। और इसीलिए गर्मियों में इसे बार बार धोने की आदत सी पड़ जाती है। लेकिन कई बार आप मुंह धोते समय भी ऐसी गलतियां कर देते है, जोकि चेहरे को नुकसान पहुंचा देती है। इसके अलावा इससे इंफेक्शन का खतरा भी हो सकता हैं। आज हम आपको मुंह धोने का सही तरीका बताएंगे, जिससे आप कई प्रॉब्लम से बच सकते हैं। तो चलिए जानते है मुंह धोते समय आपको किन बातों का ध्यानचाहिए।

    [object Promise]
    Natural-substitutes-of-face-washes-7

    सही क्लींजर का इस्तेमाल – सही कलीजर आपके चेहरे के PH स्तर को बनाए रखता है, जिससे आप कई स्किन प्रॉब्लम से बचे रहते है। इसलिए चेहरा साफ करने के लिए हमेशा सही और नेचुरल क्लींजर का इस्तेमाल करें।

    मेकअप पहले साफ करना – अगर आपके चेहरे पर मेकअप लगा हुआ है तो उसे पहले ही साफ कर लें और उसके बाद मुंह धोएं। इससे आपका चेहरा ज्यादा अच्छी तरह साफ होगा।

    [object Promise]
    -these-mistakes-while-having-face

    ठंडा पानी – चेहरा धोते समय कभी भी गर्म या गुनगुने पानी का इस्तेमाल न करें। गर्म पानी से चेहरा धोने पर स्किन ड्राई हो जाती है, जोकि बाद में स्किन प्रॉब्लम का कारण बनती है।

    मालिश करे – चेहरा धोने से पहले कम से कम 20-25 मिनट तक फेस पर क्लीनर से मसाज जरूर करें।

    मॉइस्चराइजर – फेशवॉश करने के बाद चेहरे को मॉइस्चराइजर लगाना न भूलें। इससे त्वचा पर नमी बनी रहती है और स्किन सॉफ्ट भी होती है।

    हल्के हाथों से साफ करना – कुछ लोग मुंह धोने के बाद सख्त तरीके से चेहरे को साफ करते है लेकिन इससे चेहरे पर रैशेज हो सकते हैं। इसके अलावा इससे झुर्रियां पड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए मुंह हमेशा हल्के हाथ से साफ करें।

    बार-बार मुंह धोना – बार-बार मुंह धोने से भी स्किन का ph बैलेंस बिगड़ सकता है। इसलिए दिन में केवल दो बार ही मुंह धोएं। रात को सोने से पहले मुंह जरूर धोएं। इससे आपको बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा नहीं रहता।

    Read More :इमली का ऐसे करेंगे सेवन तो डायबिटीज और मोटापा रहेंगा दूर

  • अब केजीएमयू में स्टेम सेल से होगा ब्लड कैंसर का इलाज….सफल रहा पहला स्टेम सेल ट्रांसप्लांट !

    [object Promise]
    ब्लड कैंसर मायलोमा के मरीज को किया ठीक 
    [object Promise]
    kgmu

    लखनऊ। के.जी.एम.यू. के हेमेटोलाॅजी विभाग में प्रथम बार ब्लड कैंसर मायलोमा के मरीज में हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल का सफल ट्रांसप्लांट क्लिनिकल हेमोटोलाॅजी विभाग, के.जी.एम.यू. की एक प्रमुख उपलब्धियों में से एक है, इससे विभाग में रक्त कैंसर के मरीजो के उपचार में एक नया आयाम हासिल किया जा सकेगा।
    प्रो. ए.के. त्रिपाठी, विभागाध्यक्ष, हेमेटोलाॅजी विभाग, के.जी.एम.यू. ने बुधवार को बताया कि अब इससे गरीब से गरीब मरीजो को अच्छा से अच्छा इलाज प्रदान करने के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा। प्रो0 त्रिपाठी द्वारा यह भी बताया गया कि उपरोक्त सेल प्रत्यारोपण में चिकित्सकों के दल में प्रो. ए.के. त्रिपाठी, डाॅ. एस.पी. वर्मा, नैदानिक हेमेटोलाॅजी विभाग, डाॅ0 रश्मि कुशवाहा एवं डाॅ. गीता यादव, पैथोलाॅजी विभाग, डाॅ. तुलिका चंद्रा, विभागाध्यक्ष, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग एवं डाॅ. प्रशांत, माइक्रोबायोलाॅजी विभाग शामिल थे।
    इस उपलब्धि के लिए चिकित्सा विश्वविद्यालय के मा. कुलपति प्रो. एम.एल.बी. भट्ट द्वारा डाॅ. ए.के. त्रिपाठी और उनकी टीम को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी गई। उन्होने ने कहा कि हेमेटोलाॅजी विभाग एक-एक करके कई सारी उपलब्धियों को हासिल करता जा रहा है तथा आम लोगों को विश्वस्तरीय उपचार प्रदान करने लिए आगे बढ़ रहा है।
    मरीज पन्ने लाल उम्र 38 वर्ष को डेढ़ वर्ष पूर्व गंभीर प्रकार रक्त कैंसर मायलोमा का पता चला था। शुरूआती उपचार में मरीज को लाभ मिला किन्तु एक वर्ष के अन्दर मरीज के स्वास्थ्य में पतन दिखाई देने लगा। इस स्थिति मे मरीज को स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (आॅटोलाॅगस एससीटी)  द्वारा पुनः उपचार देने की योजना बनाई गई। मरीज बहुत गरीब है अतः विभाग द्वारा असाध्य रोग योजना  के अंतर्गत दवाएं, किट्स एवं अन्य समान उपलब्ध कराया गया।
    स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया 13 मार्च को प्रारम्भ हुई और स्टेम सेल 14 मार्च को मरीज को चढ़या गया। मरीज को ट्रांसप्लांट वार्ड के एक विशेष विसंक्रमित कमरे में शिफ्ट कर उपरोक्त प्रक्रिया की गई। मरीज का ब्लड काउंट कुछ दिनों तक धिर-धिरे कम हेता रहा और उसको हल्का बुखार एवं दस्त की भी समस्या रही।
    उसके पश्चात मरीज को हिमैटोपोटिक ग्रोथ फैक्टर एवं ब्राड स्पेक्ट्रम एंटी बायोटिक ट्रिटमेंट पर डाला गया उसके पश्चात मरीज में 10 दिन के अंदर ब्लड काउंट बढ़ने लगा। मरीज में अब नार्मल ब्लड काउंट है और वह पूर्णतः एसिम्प्टोमैटिक है। मरीज को दो दिनों मे अस्पताल से छुट्टी मील जाएगी।
    डाॅ. ए.के.त्रिपाठी द्वारा अधिक जन शक्ति और बुनियादी ढांचे के उन्नयन की मांग की गई है ताकि प्रत्यारोपण इकाई को पूरी क्षमता में चालाया जा सके और स्टेम सेल ट्रांसप्लांटको उन लोगों के लिए उपलब्ध करया जा सके जिनको इसकी आवश्यकता है। अंततः भविष्य में विभाग द्वारा ऐप्लाॅस्टिक एनीमिया और थैलेसीमिया के रोगियों के उपचार के लिए एलोजेनिक हेमटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांस्प्लांटेशन की योजना पर कार्य किया जा रहा है।

  • जानियें क्यों नहीं होती सगोत्र में शादी !

    [object Promise]

    भारत में हमारे धर्मशास्त्रों में अपने गोत्र में विवाह वर्जित किया हुआ है। इसका कारण कई प्रकार की गंभीर बीमारियों से बचाव को लेकर है। आपने विवाह संबंधों की चर्चा के दौरान अक्सर यह सुना होगा कि अमुक विवाह इसलिए नहीं हो पाया, क्योंकि वर और कन्या सगोत्री थे। कुछ लोग इसे महज एक रूढ़ि मानते हैं तो कई इसका बढ़ा-चढ़ाकर प्रचार करते हैं।

    विश्वामित्र, जमदग्नि, भारद्वाज, गौतम, अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप इन सप्त-ऋषियों और आठवें ऋषि अगस्त्य की संतानों को गोत्र कहते हैं। इस प्रकार से अगर दो लोगों के गोत्र एक समान होते हैं, तो इसका मतलब ये होता है कि वो एक ही कुल में जन्मे हैं। इस तरह उनमें पारिवारिक रिश्ता होता है।

    ऐसा माना जाता है कि एक ही कुल या गोत्र में शादी करने से होने वाली संतानों में आनुवांशिक विकार होते है और उन संतानों की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। धर्म कहता है कि उसके बच्चे चांडाल श्रेणी में पैदा होते हैं।

    वैदिक संस्कृति के अनुसार, एक ही गोत्र में विवाह करना वर्जित है क्योंकि एक ही गोत्र के होने के कारण स्त्री-पुरुष भाई और बहन हो जाते हैं। तो सवाल उठता है कि किस गोत्र में शादी करनी चाहिए? कहा जाता है कि तीन गोत्र छोड़ कर ही विवाह करना चाहिए।

    पहला स्वयं का गोत्र, दूसरा मां का गोत्र और तीसरा दादी का गोत्र। कहीं-कहीं लोग नानी का गोत्र भी देखते हैं और इसलिए उस गोत्र में भी शादी नहीं करते।

    वास्तविक रूप में सगोत्र विवाह निषेध चिकित्सा विज्ञान की ’सेपरेशन ऑफ जींस’ की मान्यता पर आधारित है। कई वैज्ञानिक अनुसंधानों के बाद यह निष्कर्ष प्राप्त किया गया है कि यदि करीब के रक्त संबंधियों में विवाह होता है तो अधिक संभावना है कि उनके जींस (गुणसूत्र) अलग न होकर एक समान ही हों।

    एक समान जींस होने से उनसे उत्पन्न होने वाली संतान को कई गंभीर बीमारियों जैसे हीमोफीलिया, रंग-अंधत्व आदि के होने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए हमारे शास्त्रों ने सगोत्र विवाह निषेध का नियम बनाया था, लेकिन कई समाज में निकट संबंधियों में विवाह का प्रचलन होने के बावजूद उन दंपतियों से उत्पन्न हुई संतानों में किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी नहीं पाई गई।

    वर्तमान समय में इस प्रकार के नियमों को उनके वास्तविक रूप में देखने की आवश्यकता है। यह नियम यदि वैज्ञानिक अनुसंधानों पर आधारित होकर यदि केवल रक्त संबंधियों तक ही सीमित रहे तो बेहतर है, लेकिन देखने में आता है कि सगोत्र विवाह निषेध के नाम पर ऐसे रिश्तों को भी नकार दिया जाता है जिनसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी में कोई रक्त संबंध नहीं रहा है। इसलिए वर्तमान चिकित्सा विज्ञान वाले युग में इस प्रकार के नियमों के पीछे छिपे उद्देश्यों को उसके वास्तविक रूप में देखना व समझना अतिआवश्यक है।

  • गर्मी में खरबूजे के सेवन से होते है ये बेहतरीन फायदे

    [object Promise]

    खरबूजे के फायदे हर किसी को पता होना चाहिए। गर्मी का मौसम आ गया है और हर कोई खरबूजा खाना पसंद करता है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि खरबूजे के फायदे के बारे में जान लिया जाए। गर्मी में खरबूजे का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। सेहत के लिहाज से खरबूजे के फायदे बहुत सारे होते हैं।

    खरबूजे के फायदे

    गर्मियां आते ही काफी मात्रा में खरबूजे बिकने लगते हैं। कच्चे खरबूजे का रंग हरा होता है, जबकि पके हुआ खरबूजा पीला रंग का दिखता है।

    खरबूजे में पर्याप्‍त मात्रा में पानी होता है, जो व्यक्ति को गर्मी के दिनों में हाइड्रेट रखता है। खरबूजे में शर्करा की काफी मात्रा होती है।

    [object Promise]
    खरबूजे के फायदे

    यह भी पढ़ें:  एक अप्रैल से 10 करोड़ गरीब परिवारों को मिलेगा 5 लाख रुपये तक स्वास्थ्य बीमा

    साथ ही खरबूजे में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, आयरन, कैलोरी और कई तरह के विटामिन्स भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।खरबूजे के फायदे हर किसी को पता होना चाहिए। गर्मी का मौसम आ गया है और हर कोई खरबूजा खाना पसंद करता है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि खरबूजे के फायदे के बारे में जान लिया जाए। गर्मी में खरबूजे का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। सेहत के लिहाज से खरबूजे के फायदे बहुत सारे होते हैं।

    खरबूजे के फायदे

    गर्मियां आते ही काफी मात्रा में खरबूजे बिकने लगते हैं। कच्चे खरबूजे का रंग हरा होता है, जबकि पके हुआ खरबूजा पीला रंग का दिखता है।

    खरबूजे में पर्याप्‍त मात्रा में पानी होता है, जो व्यक्ति को गर्मी के दिनों में हाइड्रेट रखता है। खरबूजे में शर्करा की काफी मात्रा होती है।साथ ही खरबूजे में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, आयरन, कैलोरी और कई तरह के विटामिन्स भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। खरबूजा खाने से आंखों की रौशनी कम नहीं होती। साथ ही मोतियाबिंद होने का खतरा कम रहता है।

    खरबूजा खाने के हैं कई फायदे

    खरबूजा खाने से शरीर का इंसुलिन नियंत्रित रहता है, जिससे डायबिटीज के मरीजों के लिए यह फायदेमंद होता है। साथ ही खरबूजा खाने से कोलेस्ट्रॉल की समस्या नहीं होती है।

  • रिश्ते पर विश्वास की कमी से जिम्मेदारी लेने से कतराने लगी हैं लड़कियां

    आजकल लड़कियां अपने पसंद की नौकरी से लेकर अपनी शादी जैसे अहम फैसले खुद ही लेती हैं। ऐसे में लड़कों के दिमाग में एक सवाल हमेशा बना रहता है कि आखिर क्यों ज्यादातर लड़कियां सालों तक चले रिलेशनशिप के बावजूद अपने ब्वॉयफ्रेंड से शादी क्यों नहीं करतीं। अगर आप भी इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो पढ़ें ये दिलचस्प 5 सच कारण।

    [object Promise]
    Better-in-the-case-of-meat-eating-meat

    जब आप प्यार में होते हैं तो आपको न तो कोई छोटा लगता है और न कोई बड़ा। लेकिन वक्त के साथ लड़कियों को यह अहसास होता है कि उन्हें अपने पार्टनर के साथ रहते हुए कई तरह के कॉम्प्रोमाइज करने पड़ रहे हैं तो उन्हें अपना भविष्य अंधकार में लगने लगता है। ऐसे में लड़कियां अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए किसी सेटल्ड लड़के से ही शादी करना चाहती हैं।

    [object Promise]
    bf

    लड़कियां अक्सर अपने माता-पिता के डर से भी अपने ब्वॉयफ्रेंड से शादी नहीं करती हैं। अगर उन्हें लगता है कि उनके माता-पिता उनके रिश्ते को नहीं अपनाएंगे या फिर उनके रिश्ते की वजह से उनके माता-पिता दुखी हो सकते हैं तो भी लड़कियों को लगता है कि उन्होंने प्यार करने में थोड़ी जल्दबाजी कर दी है और वो दूसरे लड़के से ही शादी कर लेती हैं।

    [object Promise]
    relationship

    लड़कियों को अक्सर ये लगता है कि अगर उन्होंने अपने मर्जी से शादी कर ली तो बाद में पति के साथ विवाद होने पर वो अपने माता-पिता से इस बारे में बात नहीं कर पाएंगी। अपने  भी ब्वॉयफ्रेंड को छोड़ दूसरे लड़के से शादी कर लेती हैं।

    जब आपको कोई अच्छा लगता है तो आप यह नहीं सोचते कि वो अपके स्टेट्स का है या नहीं। आपको उसका नेचर, उसके बात करने का तरीका इतना पसंद आता है कि लड़कियां उसे अपना दिल देने से खुद को नहीं रोक पातीं। लेकिन धीरे-धीरे बात जब शादी की आती हैं और उन्हें लगता है कि लड़का उसके स्टेंडड से मैच नहीं करता तो सोसाइटी में उनकी इमेज खराब होने के डर से भी वो दूसरे लड़के से शादी कर बैठती हैं।

    ब्वॉयफ्रेंड से शादी

    जब आप कई सालों तक किसी रिश्ते में होते हैं तो अपने पार्टनर में छिपी अच्छाई और बुराई दोनों से वाकिफ हो जाते हैं। ऐसे में अगर आपका पार्टनर आपके लिए जरूरत से ज्यादा पजेसिव है और बात-बात पर आपके ऊपर सख्ती करता है तो भी नहीं बनाना चाहती।

    Read More : भाजपा अध्यक्ष पर सिद्धारमैया का बड़ा हमला, कहा- अमित शाह खुद को समझते हैं ‘चाणक्य’

  • फंगल इंफेक्शन को मिनटों में दूर करते हैं ये 7 जादुई नुस्खे

    [object Promise]

    बदलते मौसम के साथ स्किन प्रॉब्लम होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। गर्मी में तो धूप और प्रदूषण के कारण आपको कई त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसमें से एक है फंगल इंफेक्शन। इसके कारण त्वचा की ऊपरी सतह में पपड़ी, पैरों में खुजली, नाखूनों का पीला और मोटा होना, त्वचा पर लाल चकत्ते बनना और त्वचा में खुजली, रैशेज होना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।

    [object Promise]
    fungal-infection

    फंगल संक्रमण एंटीबॉघ्योटिक दवाओं के साइड इफेक्घ्ट, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, डायबिटीज, प्रदूषण, धूप, blood सर्कुलेशन की कमी के कारण हो जाती है। कुछ लोग इस समस्या को दूर करने के लिए क्रीम या दवाओं का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कुछ आसान से घरेलू नुस्खे अपनाकर भी इस प्रॉब्लम को दूर किया जा सकता है।

    1. जैतून के पत्ते
    फंगल इंफेक्शन को दूर करने के लिए जैतून के 5-6 पत्तों को पीसकर इसका पेस्ट बना लें। इसके बाद इसे इंफेक्शन वाली जगहें पर 30 मिनट के लिए लगाएं और इसके बाद धो लें। इंफेक्शन दूर होने तक इस पेस्ट लगाते रहें।

    [object Promise]
    Cure-For-Fungle-Infection

    2. एलोवेरा जेल
    एलोवेरा जेल का इस्तेमाल इंफेक्शन को दूर करने के साथ आपको जलन, खुजली और रैशेज से राहत भी दिलाएगा। इसके लिए आप एलोवेरा जेल को त्वचा पर रगड़ें और इसके बाद इसे 30 मिनट के लिए छोड़ दें। अब इसे गुनगुने पानी से धो लें।

    3. दही
    दही में एसिड होने के कारण यह हानिकारक बैक्टीरिया को मार देता है। कॉटन की मदद से दही को इंफेक्शन वाली जगह पर लगाएं और कुछ देर बाद इसे धो लें। ध्यान रहे, इंफेक्शन वाली जगह को कभी भी हाथों से न छुएं क्योंकि ये इंफेक्शन संक्रामक होता है।

    4. लहसुन
    एंटीफंगल गुणों से भरपूर लहसुन का इस्तेमाल आपकी इस समस्या को मिनटों में दूर कर देगा। इसके लिए लहसुन की 3-4 कलियों का पेस्ट बनाकर इंफेक्शन वाली जगह पर लगाएं। लहसुन लगाने से एक मिनट तक हल्की सी जलन हो सकती है लेकिन इससे यह इंफेक्शन धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा।

    [object Promise]
    Cure-For-Fungle-Infection

    5. हल्दी
    कच्ची हल्दी को पीसकर इंफेक्शन वाली जगह पर 30 मिनट के लिए लगाएं। एंटीफंगल गुण होने के कारण यह फंगल इंफेक्शन और इससे होने वाले दाग-धब्बों को भी खत्म करती हैं।

    6. सेब का सिरका
    फंगल इंफेक्शन होने पर 1 कप गर्म पानी में 2 टेबलस्पून सेब का सिरका मिलाकर पीएं। इसका सेवन आपके खून में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करके इस प्रॉब्लम को दूर करेगा।

    7. टी ट्री ऑयल
    एंटीसेप्टिक गुण होने के कारण टी ट्री ऑयल इंफेक्शन की समस्या को कुछ समय में ही दूर कर देता है। ट्री टी ऑयल, जैतून का तेल और बादाम के तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर इंफेक्शन वाली जगह पर लगाएं। इंफेक्शन दूर होने तक रोजाना इसका इस्तेमाल करें।

  • जानिए किन लोगों को नहीं पीना चाहिए नींबू पानी

    ज्यादातर लोग गर्मी से राहत पाने के लिए नींबू पानी का सेवन करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि नींबू पानी भी सब लोगों के लिए फायदेमंद नहीं होता है। कुछ लोगों को जिन्हें कोई विशेष बीमारी या दिक्कत है उन लोगों को नींबू पानी नहीं पीना चाहिए। कई स्थितियां ऐसी होती हैं, जब नींबू पानी व्यक्ति को फायदा नहीं बल्कि नुकसान पहुंचाता है।
    नींबू पानी का सेवन
    अगर आप भी रोज नींबू पानी पीते हैं तो इस रिपोर्ट में जान लें कि किन लोगों को नींबू पानी नहीं पीना चाहिए। इस तरह की दिक्कत और बीमारी होने पर नींबू पानी पीना सेहत के लिए घातक हो सकता है।
    नींबू पानी का सेवन
    किडनी और लिवर
    किडनी और लिवर की समस्या वाले लोगों को नींबू पानी नहीं पीना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि नींबू में ऑक्सलेट्स पाया जाता है, जो क्रिस्टल के रूप में जमकर शरीर में कैल्शियम एब्जॉर्प्शन को प्रभावित करता है। इस कारण किडनी स्टोन का खतरा बढ़ जाता है।
    कमजोर हड्डियां
    जिन लोगों को हड्डियों से जुड़ी कोई समस्या हो तो उन्हें भी नींबू पानी नहीं पीना चाहिए। नींबू पानी पीने से ज्यादा यूरिन आती है और उसके माध्यम से शरीर का कैल्शियम बाहर निकल जाता है और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
    एसिडिटी
    एसिडिटी की समस्या वाले लोगों को नींबू पानी नहीं पीना चाहिए। क्योंकि नींबू पानी एसिडिक होता है। इसके नियमित सेवन से एसिडिटी, हार्टबर्न जैसी प्रॉब्लम्स बढ़ सकती हैं।
    पेट में अल्सर
    अगर किसी व्यक्ति को पेट में अल्सर है तो उसे भी नींबू पानी नहीं पीना चाहिए क्योंकि नींबू पानी में पाए जाने वाले एसिडिक का गुण पेप्टिक अल्सर को नुकसान पहुंचाता है। साथ ही दर्द और जलन की समस्या हो सकती है।
    दांतों की समस्या
    जिन लोगों को दांतों से जुड़ी कोई प्रॉब्लम हो उन्हें नींबू पानी नहीं पीना चाहिए। नींबू पानी पीने से दांतों का एनामल कमजोर होता है, जिसके कारण दांत टूटने का डर रहता है। साथ ही दांतों की सेंसिटिविटी भी बढ़ जाती है।