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  • पुरुष महिलाओं की ऐसी छाती पर हैं फ़िदा

    जीवन शैली : हमने अक्सर सुना होगा कि उस आदमी की पार्टनर कितनी खूबसूरत है। वह दोनों साथ में कितने अच्छे लगते हैं। लेकिन कई बार हम ऐसे पार्टनर को देखते हैं जिसमे स्त्री बहुत अधिक खूबसूरत नहीं होती है लेकिन उसका पार्टनर उसपर जान छिड़कता है। असल में ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि पुरुष को स्त्री की सुंदरता से अधिक उसके शरीर की बनावट पसंद आती है। वहीं ब्रिटेन में पुरुष की स्त्री को पसंद करने के परिपेक्ष्य में हुई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि कोई भी पुरुष स्त्री के सौंदर्य को नहीं पसंद करता है। 

    अमेरिका में हुई रिसर्च के मुताबिक – ज्यादातर पुरुष स्त्री के सौंदर्य पर नहीं मरते, पुरुषों को स्त्री का सौंदर्य नहीं उनके शरीर पसंद आता है। 100 लोगों पर हुई रिसर्च के मुताबिक – पुरुष को स्त्री का गोरा, काला रंग नहीं भाता वह उसे जैसी है वैसी स्वीकार लेते हैं यदि उनके शरीर की बनावट उनकी आँखों को आकर्षित करती है। 

    रिसर्च से जुड़े पुरुषों से जब यह पूछा गया कि उनको स्त्रियों का कैसा शरीर  आकर्षित करता है तो वह कहते हैं जिस स्त्री की हिप कम होती है, हाइट मीडियम होती है, वेट कैसा भी चलेगा लेकिन उसकी छाती छोटी नहीं होनी चाहिए क्योंकि कम छाती स्त्री के सौंदर्य को कम करता है व सम्भोग के दौरान पुरुष को परम सुख की अनुभूति नहीं करवा पता है। पुरुषों का मनना है बड़ी छाती वाली स्त्रियां सिर्फ ईमानदार नहीं होती बल्कि वह सेक्स के दौरान सबसे ज्यादा सुख देती हैं। ऐसी स्त्रियां सेक्स में बराबरी की भागीदारी रखती हैं और पुरुष को संतुष्ट करने का गुण रखती हैं। 

    शोध में यह भी दावा किया गया है कि पुरुष बड़ी छाती वाली स्त्री के साथ इसलिए भी रहना पसंद करते हैं क्योंकि उनके साथ वह सिर्फ अपनी इन्द्रियों को शांत नहीं करते अपितु खुलकर रोमांस भी कर पाते हैं। 

  • सेक्स के दौरान शरीर और मन दोनों को फायदा पहुंचता

    डेस्क रिपोर्ट ;

    अक्सर सेक्स से जुड़ी बातें हम यानी महिलाएं खुलकर नहीं करती हैं। सामाज के हिसाब से ऐसी बाते करना एक महिला को शोभा नहीं देता है। सेक्स एक महिला और पुरुष दोनों की ही बेसिक बॉडी नीड होती है। हो सकता है कई लोगों को इसमें इंटरेस्ट जरा कम हो लेकिन जिन्हे सेक्स पसंद होता है वो एक टाइम पर इसके आदी भी हो जाते हैं।जब बात आती है महिलाओं में सेक्स की तो वो अपनी बातें खुल कर नहीं रख पाती हैं। बता दें, सेक्स महिलाओं को स्वस्थ रखने में काफी मदद कर सकता है। सेक्स के दौरान शरीर और मन दोनों को फायदा पहुंचता है। यह शरीर को एक्सरसाइज की तरह काम करने में मदद करता है जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बना रहता है। यह दिल की सेहत, शरीर की ऊर्जा को बढ़ाने में, नींद को बेहतर बनाने में, तनाव को कम करने में और सतही तौर पर आनंद के अनुभव करने में मदद करता है। इसके अलावा, सेक्स उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण होता है जो संभोग की समस्याओं से पीड़ित हैं जैसे कि सेक्स ड्राइव में कमी या तनाव संबंधी मुद्दों से ग्रस्त हैं।इसलिए, महिलाओं के लिए सेक्स जरूरी होता है, ताकि उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसलिए, सेक्स के बारे में सोचने से पहले, यह जानना जरूरी होता है कि आपके शारीर और मन के लिए इससे क्या फायदा हो सकता है और आप इसे कैसे संभव तरीके से कर सकती हैं।

    महिलाओं में सेक्स के द्वारा हार्मोनल संतुलन बना रहता है। सेक्स के दौरान महिलाओं में भी कुछ हार्मोन उत्पन्न होते हैं जो उनके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। सेक्स के दौरान महिलाओं में ओक्सीटोसिन हार्मोन उत्पन्न होता है जो उन्हें खुशी और संतुष्टि का अनुभव करवाता है। इसके अलावा, एस्ट्रोजन नामक हार्मोन का स्तर भी बढ़ता है जो महिलाओं के स्तनों और वैजाइना के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।अकसर महिलाएं किसी और के लिए नहीं बल्कि अपनी खुद की ख़ुशी के लिए सेक्स करना पसंद करती है। साथ ही अपने सेक्सुअल प्लेसर के दौरान उनको अपनी सेक्सुएलिटी को और भी करीब से जानने और एक्सप्लोर करने का मौका मिलता है।ये वजह से सेक्स के लिए सबसे बड़ी मानी जाती है। साथ ही हर महिला का खुद का मन भी होता है कि वो अपनी खुद की संतान को जन्म दे। इसे सिर्फ एक पारिवारिक जिम्मेदारी के रूप में नहीं देखा जाता है। ये फैसला एक माँ में इमोशंस पर भी निर्भर करता है।

    ऐसा कहा जाता है कि फिजिकल रिलेशन बनाने से अच्छी नींद आती है। ये सिर्फ पुरुषों के लिए ही नहीं बल्कि महिलाओं के लिए काफी सही बात कही गयी है। जो महिलायें नींद की कमी का सामना कर रही हैं उनके लिए फिजिकल रिलेशन बनाना फायदेमंद साबित हो सकता है।आपके सेक्सुअल डिजायर पूरे होने पर आपका स्ट्रेस भी रिलीज होता है और इस बात को कोई भी नकार नहीं सकता है। इसलिए ये बेहद जरूरी है कि महिलाएं अपने हिसाब से फिजिकल रिलेशन बनाएं।

  • सुहागरात :जरूरी नहीं है कि आप शादी की पहली ही रात सेक्स करें

    डेस्क रिपोर्ट :

    शादी की पहली रात हर किसी के लिए खास होती है। इसे और भी स्पेशल बनाने में एक रोमांटिक शादी की पहली रात हर किसी के लिए खास होती है। इसे और भी स्पेशल बनाने में एक रोमांटिक सा गिफ्ट आपकी मदद कर सकता है। जी हां, शादी की पहली रात में पत्नी को एक बेहतरीन उपहार देकर उसे खुश किया जा सकता है। साथ ही रोमांटिक गिफ्ट या सरप्राइज आपकी सुहागरात को और भी यादगार बना देगा।शादी किसी भी व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण निर्णय होता है शादी के बाद जिंदगी बिल्कुल बदल जाती है. ऐसें में किसी भी लड़की को खुद को नए रिश्तों, और नए माहौल में ढालना होता है. शादी के बाद पत्नी को अपने पति की हर जरूरत का खास ख्याल रखना होता है। इन सभी जिम्मेदारियों से अगर एक लड़की अपनी शादी की पहली रात के बारे में भी काफी सोचती है।ऐसे में लड़कों के लिए जरूरी है कि वह पत्नी की हर इच्छा का ख्याल रखें।ऐसे में आज हम आपको उन बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जो हर लड़की अपनी शादी की पहली रात में करना चाहती है:

    ऐसा जरूरी नहीं है कि आप शादी की पहली ही रात सेक्स करें. पहली रात आप अपनी पत्नी को बाहों में भरें उनसे प्यार भरी बातें करें और उन्हें एहसास दिलाएं कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं.

    – शादी में तमाम रीति-रश्म निभाते हुए लड़कियां सही तरीके से खाना नहीं खा पाई होती. ऐसे में आप उनके लिए कुछ लाइट खाने का इंतेजाम कर सकते हैं. अच्छा होगा कि आप उनके लिए कैंडल लाइट डिनर का इंतेजाम करें.

    – हर लड़की चाहती है कि शादी की पहली रात पति से उन्हें कोई गिफ्ट मिले. ऐसे में आप उन्हें कुछ स्पेशल गिफ्ट दे सकते हैं.

    – शादी की पहली रात को आप पत्नी को हग करते हुए रोमांटिक सेल्फी ले सकते हैं. ताकि आपको यह दिन हमेशा याद रहे.

    – शादी में घर में काफी लोग होते हैं जिस कारण आप पत्नी को पूरा टाइम नहीं दे पाते. ऐसे में आप उनके लिए एक प्राइवेट पार्टी ऑर्गेनाइज कर सकते हैं. ताकि आपको प्यार जताने का पूरा समय मिले

    Suhagraat केवल सेक्स करने के बारे में नहीं होता हैं। यह एक ऐसा मौका हैं जब आप एक दूसरे को अच्छे से जान सकते हैं और समझ सकते हैं। आप चाहे तो रात भर सिर्फ बातें कर बिता सकते हैं। एक दूसरे को सहज महसूस करवाने के लिए एक दूसरे कि बारे जानें। साथ में प्यार भरे पल बिताने और ढेर सारी बातें करने से आपकी शादी को एक सकारात्मक शुरुआत मिलेगी। पहली बार सेक्स करने वालों के लिए यह और भी मुश्किल हो सकता हैं। ऐसे में इच्छा के विरूद्ध कुछ भी करना आपके रिश्ते के लिए अच्छा नहीं है। अपना पहला कदम उठाने से पहले एक दूसरे से बात करें और सेक्स में शामिल होने के पहले एक दूसरे की इच्छा को जानें और उसके बाद ही आगे बढ़े। सुहागरात में आगे बढ़ने से ए एक बात पर अच्छे से विचार कर ले। शादी के बाद पति नवविवाहित जोड़ों से अक्सर उम्मीद किया जाता है कि वह जल्दी अपने जिंदगी में एक बच्चे को का स्वागत करें। घर के बुजुर्गों द्वारा दबाव डालने पर उन्हें अक्सर अपने परिवार को बड़ा करने का निर्णय लेना पड़ता है। ऐसे में आगे बढ़ने से पहले एक दूसरे से इस बात पर चर्चा कर लें कि आप अपना परिवार अभी बढ़ाना चाहते हैं या नहीं। अगर आप इस वक्त बच्चे के लिए तैयार नहीं है तो याद से गर्भनिरोधक (contraception) या कंडोम (condom) के इस्तेमाल को लेकर बात कर लें।

     

  • सेक्स कब और कितने समय तक करना चाहिए?

    डेस्क रिपोर्ट:

    जब आप अपने साथी के साथ सेक्स करते हैं, तो आप एक संतुष्टि की भावना प्राप्त करते हैं। यह आपको एक-दूसरे के करीब लाने में मदद करता है और परिणामस्वरूप मजबूत और बेहतर संबंध बनता है। यौन गतिविधियों के आपके मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य के साथ सीधा संबंध है। हालांकि यह मायने नहीं रखता की आप कितने बार सेक्स करते है, बल्कि आप साथ में कितना अच्छा समय बिताते हैं।
    आधुनिक जीवनशैली और तनाव के कारण, नए कपल्स को बिस्तर पर एक साथ जाने का समय नहीं मिलता है, इस कारण सेक्स को ठन्डे बस्ते में डाल दिया जाता हैं। शोध में कहा गया है कि ज्यादातर युवा जोड़े अब सेक्स को माध्यमिक, यांत्रिक और नीरस मानते हैं, जिसे बाद में भी किया जा सकता है, लेकिन यह सामान्यता का संकेत नहीं है।

    आपको इसे दैनिक करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन सप्ताह में 2 या 3 बार स्वस्थ शरीर, दिमाग और रिश्ते के लिए फायदेमंद है।सेक्स एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज़ करता है जो तनाव को कम करता है और आपको यूफोरिया का अनुभव भी देता है। यह आपको अधिनियम के दौरान और सामान्य रूप से आपके जीवन के साथ संतुष्ट और खुश महसूस करता है।यह सीधे आकर्षण को बढ़ावा देने से संबंधित है। यौन संभोग के दौरान, शरीर फेरोमोन जारी करता है जो आपको अन्य लोगों के लिए अधिक आकर्षक लगते हैं।

    यदि आप गतिविधि के दौरान ओर्गास्म का अनुभव करते हैं, तो शरीर के भीतर बेहतर परिसंचरण के प्रचार के कारण बेहतर जीवन काल होने की संभावना है।एंडोर्फिन रिलीज़ के कारण सेक्स एक उत्कृष्ट दर्द राहत के रूप में कार्य करता है।लिंग आपको संभोग के दौरान मांसपेशियों को काम करके अपने मूत्राशय पर बेहतर नियंत्रण रखने में भी मदद करता है।यह पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने के लिए भी दिखाया गया है। कुछ कारण हैं जो सेक्सोलॉजिस्ट और स्वास्थ्य देखभाल विशेषज्ञ आपको कम से कम दो बार साप्ताहिक संभोग करने की सलाह देते हैं

     आपको इसे नियमित रूप से करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि अधिक सेक्स नकारात्मक प्रभाव भी डालते है। यह यौन लत के साथ समस्याओं की शुरुआत को भी संकेत दे सकता है। बहुत अधिक सेक्स के कुछ नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं:इससे आपकी यौन गतिविधि पर हानिकारक असर पड़ता हैं। आपको अक्सर उत्तेजित होना मुश्किल लगता है।आप अपने शरीर पर ऐंठन का अनुभव करते हैं।आप अपने आंत्र और मूत्र कार्यों में कठिनाइयों का अनुभव करते हैं।आप सेक्स के विचारों से लगातार विचलित हो जाएंगे जो यौन व्यसन का कारण बन सकता है।एक सीमा के भीतर रहना सबसे अच्छा है, अपने साथी के साथ दो बार या तीन बार मजा लें और इस प्राकृतिक चमत्कार के स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक लाभ का आनंद लें। यदि आप किसी विशिष्ट समस्या पर चर्चा करना चाहते हैं, तो आप एक सेक्सोलॉजिस्ट से परामर्श ले सकते हैं।

  • पीरियड्स से पहले होता है प्री मेन्स्ट्रुअल सिंड्रोम

    डेस्क रिपोर्ट:

    जब किसी लड़की को पहली बार पीरियड्स होते हैं तो उसे मिनार्की कहते हैं। ये आमतौर पर 10-13 साल की उम्र में होते हैं। जब कोई लड़की किशोरावस्था में पहुंचती है तब उसके ओवरी एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन नाम के हॉर्मोन उत्पन्न करने लगते हैं। इसके बाद ओवरी एग रिलीज करती है। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन की वजह से यूट्रस की परत मोटी होने लगती है। जब एग फर्टिलाइडज नहीं होता है तो ये परत टूट जाती है जिससे पीरियड्स आते हैंमेनोपॉज तब होता है जब किसी महिला को लगातार 12 महीने तक पीरियड्स नहीं आते हैं। इसके बाद महिला नेचुरली प्रेग्नेंट नहीं हो सकती है। दरअसल, 45-55 की उम्र के बीच महिलाओं के शरीर में ओवरी एस्ट्रोजन रिलीज करना कम कर देती है जिसे पीरियड्स कम आते हैं। मेनोपॉज के लक्षण आखिरी पीरियड से करीब 4 साल पहले दिखने लगते हैं। इस दौरान महिलाओं को सिरदर्द, बदन दर्द, नींद न आना, एंग्जायटी, ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डीयां कमजोर होना, जैसी कई परेशानियां होती हैं।
    पीरियड्स आने के 3-7 दिन पहले बॉडी में कुछ बदलाव होते हैं। प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन की कमी होने से पीरियड्स आते हैं, लेकिन अचानक आए इस चेंज के कारण कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसमें पेट-पीठ और कमर में दर्द, मूड स्विंग्स, थकान, चिड़चिड़ापन, गैस होना, टिशू में पानी जमा होना, चक्कर आना और बेहोशी तक शामिल है।पीरियड्स के दौरान अधिकतर महिलाओं को पेट में दर्द होता है जो कई बार कमर और पैरों में भी महसूस होता है। कुछ महिलाओं को ये दर्द इतना ज्यादा होता है कि इसका असर उनके काम पर भी पड़ता है। दरअसल, महिलाओं की कोख में पीरियड्स के दौरान प्रोस्टाग्लैन्डिन नाम का हॉर्मोन निकलता है जिससे यूट्रस पर दबाव पड़ता है। यही पेट में दर्द का कारण होता है।2014 में NGO डासरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 23 मिलियन लड़कियां पीरियड्स आने पर स्कूल जाना बंद कर देती हैं। 2016 में YouGov ने BBC के लिए एक सर्वे किया जिसमें सामने आया कि 52% महिलाएं पीरियड पेन या क्रैम्प्स से गुजरती हैं, जिसका सीधा असर उनके काम पर होता है। वहीं हर 10 में से 9 महिलाओं ने माना कि उन्हें कभी न कभी पीरियड पेन से गुजरना पड़ा है।

    एक इंसान का शरीर 45 डेल यूनिट दर्द सहन कर सकता है। वहीं बच्चे को जन्म देने के लिए एक औरत 57 डेल यूनिट तक का दर्द सहन करती है। दरअसल, जन्म के दौरान बच्चेदानी का मुंह 6-10 सेमी तक खुल जाता है। जिससे होने वाला दर्द 20 हड्डियों के एक साथ टूटने जैसा होता है। वहीं पीरियड्स के दौरान बच्चेदानी का मुंह (सर्विक्स) 2-3 सेमी तक खुलता है जिससे तेज दर्द महसूस होता है। डॉ. जेन गनटर के मुताबिक, इस दौरान उतना दर्द होता है जितना बिना एनेस्थीसिया के उंगली काटने पर होगा।

    PMDD: आपने PMS के बार में जान लिया। इसी के एडवांस्ड स्टेज को प्री-मेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर यानी PMDD कहते हैं। 3-8% महिलाएं PMDD का शिकार हैं। इसमें गंभीर डिप्रेशन, थकान, ध्यान लगाने में दिक्कत और पैनिक अटैक तक आ सकते हैं।

    सेरोटोनिन की कमी: पीरियड के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन की कमी होती है। इसकी वजह से दिमाग से रिलीज होने वाले कुछ केमिकल्स पर भी असर पड़ता है। रिसर्च के मुताबिक एस्ट्रोजन कम होने की वजह से दिमाग से सेरोटोनिन हॉर्मोन भी कम निकलता है। सेरोटोनिन को ‘हैप्पी केमिकल’ भी कहा जाता है। इस केमिकल की कमी की वजह से महिलाएं उदास और डिप्रेस्ड रहने लगती हैं। ये कई बार पैनिक अटैक का कारण बनता है।

    बॉडी और लुक में बदलाव: पीरियड्स के कारण होने वाले हॉर्मोनल बदलाव की वजह से उदास होना, बिना बात के गुस्सा आना आम बात है। हॉर्मोनल चेंज के कारण महिलाओं के वजन बढ़ता-घटता है। साथ ही बॉडी हेयर ग्रोथ और स्किन एक्ने के कारण आत्मविश्वास कम होने लगता है, जिसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है।

    पीरियड से जुड़ी बिमारियों के बारे में…

    स्टैटिस्टा वेबसाइट के 2020 के सर्वे के मुताबिक, 20 से 29 साल की महिलाओं में 16% पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या PCOS से पीड़ित थी। इस बिमारी के पीछे मुख्य वजह खराब लाइफस्टाइल को बताया गया।

    तो ये PCOS/PCOD क्या होता है: महिलाओं की ओवरीज से निकलने वाले हॉर्मोन्स ही पीरियड्स मैनेज करते हैं। जब इन्ही हॉर्मोन्स का इम्बैलेंस होता है तो उस कंडीशन को PCOS/PCOD कहा जाता है। इसमें कई बार पीरियड्स कुछ महीनों के गैप पर आते हैं। इस वजह से प्रेगनेंसी में काफी दिक्कतें आती हैं। इसके अलावा चेहरे पर दाने निकलना और शरीर पर बालों की ज्यादा ग्रोथ होना भी इसी कंडीशन की वजह से होता है। समस्या बढ़ने पर बांझपन और डायबिटीज भी हो सकती है।

    अब तक इस बीमारी का कोई सटीक इलाज नहीं मिला है। मगर समय रहते डॉक्टर की सलाह लेने पर इसे कंट्रोल जरूर किया जा सकता है। साथ ही महिलाएं अपनी दिनचर्या में मामूली बदलाव करके PCOS को काबू में कर सकती हैं।

    यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI): यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन वैजाइना में होने वाला इंफेक्शन है जो एसिड लेवल कम होने की वजह से होता है। पीरियड्स के दौरान निकलने वाले ब्लड की वजह से कई बार वैजाइना का एसिड लेवल घट जाता है, जिससे UTI होने की खतरा रहता है। इस दौरान वैजाइना में तेज जलन और दर्द की समस्या होती है।

    जेनिटल ट्रैक्ट इंफेक्शन: ये एक तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन है जो पीरियड के दौरान होने वाले हॉर्मोनल बदलाव की वजह से होता है। दरअसल, वैजाइना में एसिड लेवल को बनाए रखने का काम लैक्टोबैसिलाई नाम का बैक्टीरिया करता है। पीरियड के दौरान हॉर्मोनल बदलाव की वजह से ये बैक्टीरिया मरने लगते हैं जिसकी वजह से जेनिटल ट्रैक्ट इंफेक्शन हो सकता है।

    रीप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इंफेक्शन (RTI): मेंस्ट्रुएशन के दौरान अगर साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए तो भी महिलाओं को कई बीमारियां हो सकती हैं। इनमें से एक है रीप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी RTI। इसकी वजह से कई बार महिलाएं मां नहीं बन पाती हैं।

  • गर्मियों में ये हर्बल टी आपको देगी राहत

    डेस्क। How To Make Pudina Tea: पुदीने को पेपरमिंट के नाम से भी जाना जाता है और आमतौर पर पुदीना को चटनी बनाकर खूब खाया जाता है पर क्या कभी आपने पुदीने की चाय बनाकर पी है?
    अगर नहीं तो आज हम आपके लिए पेपरमिंट टी बनाने की रेसिपी को लेके आए हैं और अगर आपके पेट में गर्मी घुस गई है तो पुदीना चाय बेहतरीन उपचार साबित भी हो सकती है। 
    गर्मियों में पेपरमिंट टी के सेवन से आपका पाचन बेहतर बना रहता है और इसके साथ ही इससे आपके शरीर को अंदर से ठंडक प्रदान होती है। इतना ही नहीं पेपरमिंट टी को पीकर आप शारीरिक कमजोरी को भी दूर कर सकते हैं वहीं पुदीने की चाय स्वाद में अच्छी लगती है।
     इसको बनाना भी बेहद सिंपल होता है, तो चलिए जानते हैं (How To Make Pudina Tea) पेपरमिंट टी को कैैसे बनाएं…..
    पेपरमिंट टी बनाने के लिए सामग्री-
    पानी 2 कप 
    पुदीने के पत्ते 15 ताजे 
    शहद 1 बड़ा चम्मच 
    आइस क्यूब्स 4-5 
    नींबू का रस ताजा 
    पेपरमिंट टी को कैसे बनाएं? (How To Make Pudina Tea)
    पेपरमिंट टी बनाने के लिए आप सबसे पहले एक पैन लें और फिर आप इसमें 2 कप पानी डालकर 1 उबाल लीजिए।
    इसके बाद आप इसमें पुदीने के पत्तियां डालें और फिर आप इसको धीमी आंच पर करीब 4-5 मिनट तक पकाएं।
    इसके बाद आप गैस को बंद करके थोड़ा ठंडा होने के लिए छोड़ भी दें।
    फिर आप एक सर्विंग गिलास में आइस क्यूब्स और पेपरमिंट टी भी डालें।
    इसके बाद आप इसमें शहद और नींबू का रस मिलाकर सर्व कर दें।
    अब आपकी हेल्दी पेपरमिंट टी बनकर तैयार हो गई है।

  • बेडरूम में कभी मत रखना ये चीजे, पार्टनर से होगी लड़ाई और बढ़ेगा बेवजह खर्च

    डेस्क। आपके बेडरुम में एक्वेरियम रखा हुआ है, मछली शुभता का प्रतीक होती है, हिंदू धर्म में जब भी कोई अच्छे काम की शुरुआत करते हैं, तो उन्हें दही मछली कहकर विश किया जाता है, बेडरुम में यदि एक्वेरियम रखा है, तो ये आपके दांपत्य जीवन में तनाव ला सकता है, मछली को कैद करने का अर्थ जीव को पीड़ा देना होता है, आपको बता दें कि किसी भी आजाद जीव जंतु को कैद करके नहीं रखना चाहिये, आइये वास्तु के नियमों के बारे में आपको विस्तर से बताते हैं।
    वास्तु में घर की बात करें, तो सबसे जरुरी बेडरुम है, ज्यादातर लोग ज्यादा समय बेडरुम में ही बिताते हैं और इसलिये आपको ध्यान रखना होगा, कि रुम में जो भी चीजें हो, वह बहुत सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाली हो, जिससे आपको और आपके रिश्तों को मजबूती मिल सके, कई लोग बेडरुम को खूबसूरत बनाने के लिये विभिन्न तरह की कीमती चीजों का इस्तेमाल भी करते हैं।
    वास्तु के अनुसार बेडरुम में रखी कुछ चीजों के कारण आपको मानसिक, शारीरिक, तथा आर्थिक समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है, कभी-कभी आंखों में नींद तो भरी होती है, इसके बाद भी चैन से आप सो नहीं पाते हैं, दांपत्य जीवन की बात करें, तो कपल्स के बीच आये दिन छोटी-छोटी बात पर झगड़े होते रहते हैं, जिससे रिश्ते में खटास भी आ जाती है, कभी-कभी बेवजह के खर्चे आये दिन लगे रहते है और यदि सोने से पहले अपने आस-पास अनावश्यक चीजें रखकर सोते हैं, तो आज से ही इन आदतों में बदलाव लाएं, क्योंकि इन आदतों की वजह से आपको आर्थिक तंगी, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन जैसी कई समस्याओं से परेशान भी होना पड़ता है, बेडरुम में वास्तु के नियमों का ध्यान रखना बेहद जरुरी है, ऐसे में जानिये कि बेडरुम में किन चीजों को रखने से नकारात्मक प्रभाव होता है।
    इन बातों का रखें ध्यान
    यदि आपके बेडरुम में एक्वेरियम है, तो आज से ही इसका स्थान बदल दें, बेडरुम में एक्वेरियम रखना वास्तु के लिहाज से अच्छा नहीं माना जाता है क्योंकि इसकी वजह से दांपत्य जीवन डिस्टर्ब होता है, साथ ही लाइफ पार्टनर के साथ झगड़े भी बढते हैं।
    बेडरुम में टीवी, मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिये, क्योंकि आधुनिक यंत्र आपकी शांति को अवरुद्ध करते हैं, साथ ही बेडरुम में आक्रामक जानवरों या प्राणियों की तस्वीरें तथा देवी-देवताओं की क्रोधित मुद्रा में तस्वीर या मूर्ति भी नहीं होनी चाहिये।
    मिरर तथा शीशा बेड के सामने नहीं होना चाहिये, झाड़ू में मां लक्ष्मी का वास होता है, इसलिये इसे कभी भी बेडरुम में नहीं रखना चाहिये और ऐसा करना बेवजह के खर्च को बढावा देता है।

  • सावधान वेस्टर्न टॉयलेट का उपयोग आपको करेगा बीमार

    जीवन शैली: आज जमाना काफी बदल गया है लोग देशी चीजों को छोड़कर विदेशी चीजों से संतुष्ट रहने लगे हैं। घर के नक्शे से लेकर रख-रख का सामान सब विदेशी हो गया है। वही अब ज्यादातर घरो में  वेस्टर्न टॉयलेट का उपयोग हो रहा है। आम तौर पर वेस्टर्न टॉयलेट काफी आरामदायक होते हैं घुटने का मरीज वेस्टर्न टॉयलेट काफी पसंद करता है। लेकिन क्या आपको पता है यह वेस्टर्न टॉयलेट हमारी हेल्थ के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। 

    जानें वेस्टर्न टॉयलेट  से क्या है खतरा :

    वेस्टर्न टॉयलेट का उपयोग बहुत से लोग करते हैं। इसमें हमारी बॉडी सीधे टॉयलेट से टच हो जाती है जिससे इन्फेक्श की समस्या हो जाती है। वेस्टर्न टॉयलेट के उपयोग से पहले उसपर टिसू या टॉयलेट पेपर बिछा लेना चाहिए। यदि आप ऐसा नही करते हैं तो इससे आप बीमार पड़ सकते हो। 

    वेस्टर्न टॉयलेट में हम आराम से बैठ जाते हैं जिससे हमारे पेट पर दबाव नही पड़ता है और हमें कब्ज की समस्या हो जाती है। वेस्टर्न टॉयलेट  की तुलना में देशी टॉयलेट काफी बेहतर होता है। 

    वही वेस्टर्न टॉयलेट के इस्तेमाल से मल त्यागने वाले द्वार पर सुजान और नसों की समस्या हो सकती है. क्योंकि वाटर जेट का प्रेशर तेज होता है इससे नसों में सूजन आ सकता है या टिशु फट सकता है.

  • आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों के उपयोग

    डेस्क रिपोर्ट :

    अनचाहे गर्भ से बचने के लिए गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा तरीका है लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आप गर्भनिरोधक गोली लेना भूल गए या सेक्स के दौरान कोई चूक हो गयी तो ऐसे में अनचाहे गर्भ के डर से घबराएं नहीं। ऐसे हालात में ही आपातकालीन गर्भनिरोधक काम आते हैं। आपातकालीन गर्भनिरोधक दो तरीकों से इस्तेमाल किये जाते हैं : इंट्रायूटेरिन डिवाइस और आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियां। इस लेख में हम आपको दूसरे तरीके यानी आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां बता रहे हैं।इन आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों को ‘मॉर्निंग आफ्टर पिल’ भी कहते हैं। आमतौर पर इन दवाइयों को असुरक्षित सेक्स के अगले 72 घंटों के अंदर लेना होता है, लेकिन जितनी जल्दी आप इनका सेवन करती हैं ये दवाइयां उतनी ही अधिक असरकारक होती हैं। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि गर्भ का ठहरना या ना ठहरना सबसे ज्यादा गोली लेने के समय पर ही निर्भर करता है। आइये इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।   

    इनके नाम से ही स्पष्ट है कि ये दवाइयां आपातकाल में उपयोग करने के लिए बनाई गयी हैं अर्थात जब गलती से असुरक्षित यौन संबंध बन जाए तो उस दौरान आप इन दवाइयों की मदद से गर्भ को ठहरने से रोक सकती हैं। जैसे कि अगर महिला किसी दिन गर्भनिरोधक गोली खाना भूल जाती है या पुरुष कंडोम लगाना भूल जाते हैं या सेक्स के दौरान उनका कंडोम फट जाता है तो ऐसी परिस्थितियों में ये गोलियां गर्भ को ठहरने से रोकती हैं।यहां एक बात जरुर ध्यान रखें कि आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियां, रोजाना इस्तेमाल की जाने वाली गर्भनिरोधक गोलियों से काफी अलग होती हैं। इनका प्रयोग ही तभी करना होता है जब आपने गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन ना किया हो। वहीं कुछ महिलाएं इन्हें गर्भपात की गोली समझने की गलती कर देती हैं। वास्तव में ये दवाइयां गर्भपात नहीं करती हैं बल्कि सिर्फ गर्भधारण को रोकती हैं। इन दवाइयों को खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची की जरुरत नहीं है बल्कि आप इसे सीधे मेडिकल स्टोर से खरीद सकती हैं।

    इन गोलियों में भी वही हार्मोन होते हैं जो गर्भनिरोधक गोलियों में इस्तेमाल होते हैं बस इनमें उन हार्मोन (लेवोनोरजेस्ट्रेल) की मात्रा बहुत ज्यादा रहती है जिससे गर्भधारण को पूरी तरह रोका जा सके। आपातकालीन निरोधक गोलियां निषेचित अंडों को गर्भाशय में स्थापित होने से रोकती है और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया में देरी करती हैं।

    यदि ये निषेचित अंडे गर्भाशय में पहले ही स्थापित हो चुकें हैं तो फिर इन दवाइयों का कोई असर नहीं होता है। यही वजह है कि इन दवाइयों को सेक्स के 72 घंटों के अंदर लेने की सलाह दी जाती है क्योंकि हर एक महिला में इस प्रक्रिया के होने का समय अलग अलग होता है। इसलिए असुरक्षित सेक्स के बाद जितनी जल्दी हो सके एक गोली खा लें। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अगर आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन सही समय पर किया जाए तो इनकी सफलता दर लगभग 99% रहती है।  

    दरअसल इन दवाइयों के सेवन से जुड़ी यह बात बहुत प्रचलित है कि इन्हें असुरक्षित यौन सबंध के अगले 72 घंटों के अंदर ले लेना चाहिए। जबकि असल में आप इन्हें जितना जल्दी लेंगी ये उतने ही ज्यादा असरकारक होते हैं। इन दवाइयों को ‘मॉर्निंग आफ्टर पिल’ कहे जाने की वजह से कुछ महिलायें ऐसा सोचती हैं कि इन्हें असुरक्षित सेक्स के अगली सुबह खाना चाहिए जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। इन्हें खाने के लिए अगली सुबह का इंतज़ार ना करें बल्कि जैसे ही दवाइयों का इंतजाम हो जाए या जैसे ही आपको अपनी गलती का पता चल जाए तो तुरंत इसका सेवन कर लें। असुरक्षित सेक्स के अगले 12 घन्टों के भीतर ये दवा लेने से ये ज्यादा बेहतर परिणाम मिलते हैं।

    क्या करें :

    1- अगर आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली लेने के बाद अगले 3 से 4 हफ़्तों बाद भी पीरियड नहीं आता है तो क्लिनिक पर जाकर गर्भावस्था की जांच करवाएं।

    2- अगर सेक्स किये हुए 72 घंटों से भी ज्यादा समय बीत चुका है और आपने आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली अभी तक नहीं ली है तो अब नजदीकी स्त्री रोग विशेषज्ञ से इस बारे में सलाह लेकर ही दवा का सेवन करें।  

    3- इन गोलियों के सेवन के बाद उल्टी, मिचली, थकान या हल्के पेट दर्द जैसी समस्याएं हों सकती हैं लेकिन अगर ये समस्याएं गंभीर हो रही हैं या रुक नहीं रही हैं तो तुरंत नजदीकी स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

    क्या ना करें :

    1- एक मासिक चक्र में एक ही बार आपातकालीन गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करें। एक मासिक चक्र में एक से ज्यादा गोलियों का सेवन आपके मासिक चक्र को बिगाड़ सकता है साथ ही ज्यादा गोलियों से गर्भाशय पर बुरा असर पड़ सकता है।

    2- कई लोग इन दवाइयों को असुरक्षित सेक्स से बचने के आसान उपाय के रुप में इस्तेमाल करने लगते हैं जो कि पूरी तरह गलत है। ऐसा बिल्कुल ना करें बल्कि सेक्स करते समय कंडोम या अन्य गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल करें। आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन सिर्फ इमरजेंसी में ही करें।

    3- अगर आप पहले से ही गर्भवती हैं और आपातकालीन निरोधकों का इस्तेमाल गर्भपात के लिए करना चाहती हैं तो ऐसा ना करें। ऊपर भी बताया जा चुका है कि ये गर्भपात की गोलियां नहीं है बल्कि ये सिर्फ गर्भधारण को रोकती हैं।

    4- कुछ महिलायें ऐसा भी मानती है कि इन दवाइयों से सेवन से यौन संचारित रोगों से बचाव होता है जबकि ऐसा नहीं है। ये दवाइयां एसटीडी (sexually transmitted diseases) की रोकथाम में कोई असर नहीं करती हैं।

    अगली बार जब गलती से असुरक्षित सेक्स हो जाए तो आप बेहिचक आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करें। सेवन के बाद अगले कुछ दिनों में या अगले पीरियड में कोई तकलीफ हो तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

  • कॉन्डोम और सेक्स, दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे

    डेस्क रिपोर्ट :

    कॉन्डोम और सेक्स, दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं” यह कहना अब गलत नहीं माना जा सकता है। दरअसल, कॉन्डोम का जिक्र होते ही सेक्स का ख्याल आता है और सेक्स की बात करते हैं, तो कॉन्डोम का उपयोग कैसे करें यह जानना बहुत जरूरी होता है।सेक्स के दौरान कॉन्डोम का उपयोग कैसे करें, इसका ध्यान रखना इसलिए भी बहुत जरूरी है कि यह अनचाहे गर्भ से सुरक्षित रखता है। साथ ही, कॉन्डोम का उपयोग करने से यौन जनित रोगों से भी सुरक्षित रहा जा सकता है। हालांकि, सेक्स के दौरान कॉन्डोम का उपयोग पूरी तरह से तभी सुरक्षित हो सकता है, जब कॉन्डोम का सही इस्तेमाल किया जाए। अगर कॉन्डोम के इस्तेमाल में जरा भी चूक की जाए, तो यह कई समस्याओं का कारण भी बन सकता है।

    • कॉन्डोम रबड़ का बना हुआ एक खोल (कवर) होता है। जिसका इस्तेमाल पुरुष लिंग को ढकने के लिए करते हैं। इससे सेक्स के दौरान पुरुष अपने शुक्राणुओं को महिला के गर्भाशय में प्रवेश करने से रोक सकते हैं।
    • इसी तरह, महिलाओं के लिए भी कॉन्डोम बने हुए हैं, जिसे योनि के अंदर फिट किया जा सकता है।
    • पुरुष कॉन्डोम का उपयोग एक तनावयुक्‍त लिंग पर ही कर सकते हैं।
    • अधिकतर कॉन्डोम लेटेक्‍स के बने होते हैं।
    • अगर कॉन्डोम का उपयोग ठीक प्रकार से किया जाए, तो यह गर्भधारण के जोखिम को 85 फीसदी से 98 फीसदी तक रोक सकता है।
    • एक कॉन्डोम का इस्तेमाल सिर्फ एक बार के लिए ही किया जा सकता है। एक ही इस्तेमाल के बाद यूज किए गए कॉन्डोम का उचित तरीके से निपटारा करना चाहिए।
    • जिन लोगों को लेटेक्‍स से एलर्जी है, वे पॉ‍लीयुरथेन से बने कॉन्डोम का उपयोग कर सकते हैं।

    सही कॉन्डोम का इस्तेमाल करना आनंदमय संभोग के लिए बेहद जरूरी होता है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि हर प्रकार के कॉन्डोम से सामान्य परिणाम ही आते हैं। जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है। अपने लिए बेस्ट कॉन्डोम का ऐसे करें चयन –

    • हमेशा अच्छी क्वालिटी और भरोसेमंद ब्रांड का ही कॉन्डोम खरीदें।
    • कॉन्डोम खरीदने से पहले उसके एक्सपायर होने की तारीख जांचें।
    • सही साइज चुनें, कॉन्डोम को चुनते समय अधिक भावनात्मक न हो और बड़े साइज को बेहतर न समझें। सही तरह से फिट होने वाला कॉन्डोम सबसे प्रभावशाली होता है। अधिक बड़ा या बहुत छोटा कॉन्डोम सेक्स के दौरान बाहर निकल सकता है और उसके फटने की आशंका भी ज्यादा रहती है।
    • प्रैक्टिस मेक्स अ मैन परफेक्ट – कॉन्डोम को तुरंत इंटरकोर्स करते समय लगाने की बजाए कुछ समय पहले उसे पहनने की कोशिश करें। अकेले में कुछ बार कॉन्डोम पहनने की कोशिश करें और सीखें कि उसे कैसे और कितने समय में पहना जा सकता है।
    • अन्य प्रकार के कॉन्डोम को चुनें और ट्राय करें। ज्यादातर लोग लेटेक्स कॉन्डोम का इस्तेमाल करते हैं और उसके अलावा अन्य विकल्प की ओर ध्यान भी नहीं देते। लेटेक्स सबसे अधिक बिकने वाला कॉन्डोम का मटेरियल है। लेकिन इससे कई लोगों को एलर्जी भी होती है, जिसके चलते लैम्बस्किन कॉन्डोम भी बनाए जाते हैं। अगर आपको सेक्स के दौरान जलन होती है, तो अन्य प्रकार के कॉन्डोम का इस्तेमाल करें।
    • आप चाहें तो फ्री में भी कॉन्डोम ले सकते हैं। कई जगहों पर मौजूद स्थानीय हेल्थ डिपार्टमेंट फ्री कॉन्डोम प्रदान करते हैं।
    • कॉन्डोम को सही जगह पर रखें। कॉन्डोम को जेब, अपने पर्स या बाथरूम में न रखें। इसकी बजाए उसे ठंडी-सूखी जगह पर रखें, जहां सूर्य की सीधी किरणें न पड़ती हों। इसके साथ ही ध्यान रखें कि कॉन्डोम हीट, नमी और घर्षण के संपर्क में न आए।

    कॉन्डोम का उपयोग कैसे करें?

    • कॉन्डोम का पैक खोलने से पहले उसके लेबल पर लिखे गए निर्देशों को सावधानी से पढ़ें। कॉन्डोम का इस्तेमाल कैसे करना है, इसकी पूरी सटीक जानकारी पैक के लेबल पर दिया गया होता है।
    • कॉन्डोम का पैक बहुत ही सावधानी से खोलें।
    • पैक को हमेशा किनारों से खोलें।
    • पैक खोलने के लिए दांतों का इस्तेमाल न करें।
    • कॉन्डोम का इस्तेमाल करने से पहले कॉन्डोम के अगले और पिछले हिस्से की जांचें।
    • ऊपरी हिस्सा चिकनाई युक्त होगा, जबकि अंदर की तरफ रहने वाला हिस्सा सूखा होगा।
    • कॉन्डोम का पैक तभी खोलें जब लिंग में इरेक्शन हो।
    • अगर आपने कॉन्डोम को उल्टी तरफ से पहन लिया है, तो उसे दोबारा निकाल कर न पहनें। इससे गर्भधारण का जोखिम बढ़ सकता है क्योंकि, सेक्स के दौरान पुरुषों के लिंग से लगातार एक लिक्विड जिसे प्री-इजेक्यूलेशन (प्री-कम) कहा जाता है, निकलता रहता है, यह यौन संचारित बीमारियों (STDs) के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।
    • कॉन्डोम पहनते समय कॉन्डोम की निकली हुई टिप को दबा कर रखें, ताकि इससे कॉन्डोम के अंदर हवा न जाए।
    • कॉन्डोम पहनने के दौरान टिप को दबा कर उसे इरेक्ट पेनिस पर लगाएं। फिर कॉन्डोम रिंग को ऊपर की तरफ घुमाएं। इससे कॉन्डोम खुलता जाएगा और लिंग में फिट हो जाएगा।
    • स्‍खलन के बाद और पुरुष लिंग के मुलायम होने से पहले ही कॉन्डोम के रिम को पकड़ें और इसे सावधानीपूर्वक निकाल लें। कॉन्डोम को लिंग से हटाते समय रिम पकड़ कर ही रखें, नहीं तो पुरुष साथी का वीर्य बाहर निकल सकता है।
    • एक बार इस्तेमाल किए गए कॉन्डोम का उपयोग दोबारा न करें। इस्तेमाल किए जाने के बाद इसका सही तरीके से निपाटा करें। इसे पालतू जानवर या बच्चों की पहुंच से भी दूर रखें।
    • शारीरिक संबंध बनाने के दौरान अगर कॉन्डोम फट जाता है या फिसल जाता है, तो पुरुष साथी को तुरंत संभोग की क्रिया रोक देनी चाहिए। इसके बाद वो एक नए कॉन्डोम का उपयोग कर सकते हैं या गर्भ रोकने के दूसरे तरीकों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
    • अगर फटे हुए कॉन्डोम से पुरुष साथी का वीर्य महिला के योनि में प्रेवश कर जाता है, तो अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए महिला डॉक्टर की सलाह पर गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन कर सकती हैं। हालांकि, गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन बहुत ही कम करना चाहिए।
    • गर्भावस्था के जोखिम को रोकने और यौन संचारित रोगों के जोखिम को कम करने के लिए कॉन्डोम का उपयोग करना सबसे बेस्ट होता है।
    • कॉन्डोम का उपयोग करना बहुत ही आसान होता है।
    • कॉन्डोम का उपयोग करने के कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं होते हैं।
    • कॉन्डोम का उपयोग पुरुष और महिला दोनों ही कर सकते हैं।