Category: health

  • Sexual activity: सेक्स से होते हैं यह जबरदस्त फायदे

    Sexual activity: सेक्स एक उपयोगी व्यायाम और मनोरंजन का एक तरीका है जो आमतौर पर दो या उससे अधिक व्यक्तियों के बीच जीवनशैली जुड़ा होता है। सेक्स को सम्बन्ध बनाने वाले दो व्यक्तियों के बीच शारीरिक संबंध, भावनाओं और अभिव्यक्ति का एक मिश्रण माना जाता है।

    इसमें संभोग, स्पर्श, प्रेम, उत्साह, संतुष्टि, उत्साह और अनुभव शामिल होते हैं। सेक्स शारीरिक संपर्क, स्पर्श, भावनाओं का अभिव्यक्ति और आनंद का एक साथ अनुभव होता है।

    सेक्स जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना होती है जो शारीरिक संतुष्टि और मानसिक तृप्ति के लिए महत्वपूर्ण होता है। यह स्वस्थ रहने और संतुष्ट जीवन जीने का एक महत्वपूर्ण अंग होता है।

    मनुष्य के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए सेक्स करने के कई फायदे होते हैं। कुछ मुख्य फायदों में निम्नलिखित शामिल हैं:

    1. स्वस्थ रहना: सेक्स एक अच्छा व्यायाम है जो आपके शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ाता है। इससे आपके हृदय, श्वसन तंत्र, सिर्फ के साथ साथ आपके शरीर की कई अन्य अंगों को भी लाभ मिलता है।

    2. तनाव कम करना: सेक्स स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है। इसमें हार्मोन फेलिंग व एक्सीटोसिन जैसे हार्मोन उत्पन्न होते हैं जो तनाव को कम करने में मदद करते हैं।

    3. सेल्फ एस्टीम में सुधार: एक संतुष्ट और समान में सेक्स शारीरिक और मानसिक रूप से आपको अधिक आत्मविश्वास प्रदान करता है।

    4. स्तंभन शक्ति में सुधार: नियमित सेक्स स्तंभन शक्ति में सुधार करता है जो आपके सेक्स जीवन को बेहतर बनाता है।

    5. नींद में मदद: सेक्स करने से शरीर में एक्सीटोसिन जैसे हार्मोन उत्पन्न होते हैं जो आपको नींद में मदद करते हैं।

  • अब रोबोट पैदा करेगा बच्चे

    लाइफस्टाइल- टेक्नोलॉजी निरंतर तरक्की कर रही है लोग आज टेक के उपयोग से अपना काम आसानी से कर ले रहे हैं वहीं साइंस के बढ़ते चलने ने एक और करिश्मा कर दिया है. असल में अब आप रोबोट की मदद से बच्चा पैदा कर सकते हैं.  स्पेन की एक मेडिकल संस्था से मिली सूचना के मुताबिक़- एक महिला ने बच्चे पैदा करने के लिए रोबोट की मदद ली है और दो स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है. 

    लोग आज बच्चे पैदा करने के लिए IVF टेक्निक का उपयोग करते हैं यह एक लम्बी और महंगी प्रक्रिया है इसमें डॉक्टर की मदद से महिला के गर्भाशय में अंडे यानी स्पर्म डाला जाता है और महिला बच्चे को जन्म देती है लेकिन अब यह काम रोबोट द्वारा किया जाएगा. स्पेन के मेडिकल संस्थान में दावा किया गया है कि महिला के गर्भाशय में स्पर्म रोबोट की मदद से डाला गया है. यह काफी सुरक्षित रहा और महिला ने स्वस्थ्य दो बच्चों को जन्म दिया है.

    बताया गया है कि रोबोट को कंट्रोल करने लिए प्ले स्टेशन 5 के गेमिंग कंसोल की मदद ली गई. रोबोट की मदद से ही महिला ने गर्भ धारण किया और अब दो स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है.NHS के डेटा के अनुसार, IVF ट्रीटमेंट का कुल खर्च 5 लाख के आस-पास आता है जिसे हर कोई अफोर्ड नहीं कर सकता साथ ही IVF टेक्निक से बच्चा होने की गारंटी भी नहीं होती है.

    हालांकि इससे महिला के गर्भ धारण करने के चांसेस सामान्य की तुलना में बढ़ जाते हैं. क्योकि ये एक लम्बी प्रकिया है इसलिए इसका खर्च काफी ज्यादा आता है और कई लोग इसी के डर से IVF नहीं करवाते हैं. लेकिन अब जल्द रोबोट्स की मदद से इस खर्च को कम किया जा सकेगा और IVF के दाम भविष्य में अफोर्डेबल हो सकते हैं.

  • जानें कब होती है डायबिटीज की समस्या

    डायबिटीज एक मौखिक रूप से उल्लेखनीय रोग है जिसमें शरीर में रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है जो शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा प्रदान करने में असमर्थ बनाता है। यह एक गंभीर स्थिति है जो लंबे समय तक अनदेखी नहीं की जा सकती है और यदि इसे नजरअंदाज किया जाता है तो यह कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को उत्पन्न कर सकता है।

    डायबिटीज के दो प्रकार होते हैं: प्रथम जो टाइप 1 डायबिटीज कहलाता है और दूसरा जो टाइप 2 डायबिटीज कहलाता है। टाइप 1 डायबिटीज में शरीर की इंसुलिन उत्पादन करने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं जिससे शरीर उसे स्वयं नहीं बना सकता है। टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं करता है और इस तरह उत्पन्न होता है।

    डायबिटीज के लक्षण शामिल होते हैं: भूख लगने की बढ़ती हुई अवस्था, पेशाब की अधिक बार जाना, ज्यादा थकान या कम ऊर्जा, नाखूनों में संकुचन या फैलाव होना.

    कब होती है डायबिटीज की समस्या-

    डायबिटीज की समस्या कई कारणों से हो सकती है और इसका पता लगाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

    1. वय: बढ़ते उम्र में डायबिटीज के खतरे की संभावना बढ़ती है।

    2. वजन: वजन बढ़ने के साथ, ज्यादा वसा शरीर में जमा होती है जो इंसुलिन उत्पादन को कम करती है और डायबिटीज की समस्या होती है।

    3. बाहरी कारक: खाने की वस्तुओं में शक्कर और वसा की अधिक मात्रा, नियमित शारीरिक गतिविधियों की कमी और तंबाकू या अन्य नशीली चीजों का सेवन डायबिटीज के खतरे को बढ़ाते हैं।

    4. इतिहास: परिवार में डायबिटीज की समस्या होने की स्थिति में व्यक्ति को डायबिटीज के खतरे की संभावना बढ़ जाती है।

    5. अन्य समस्याएं: अन्य समस्याएं जैसे कि गलगंज, उच्च रक्तचाप और प्रश्न प्रतिरोध जैसी समस्याओं के साथ डायबिटीज के खतरे का बढ़ना होता है।

    डायबिटीज के लक्षण-

    डायबिटीज के लक्षण मुख्य रूप से निम्नलिखित होते हैं:

    1. भूख लगने में बदलाव: अचानक भूख लगने में कमी या बढ़ोतरी हो सकती है।

    2. पेशाब में बदलाव: ज्यादातर लोगों को डायबिटीज के लक्षण के रूप में पेशाब के बार-बार आने की समस्या होती है।

    3. थकान: थकान डायबिटीज के लक्षणों में से एक हो सकती है।

    4. पानी की थकान: मुँह में या जीभ पर सूखेपन की समस्या हो सकती है।

    5. वजन कम होना: यदि आपका वजन बिना किसी वजन घटाने की योजना के कम हो रहा है तो यह डायबिटीज का लक्षण हो सकता है।

    6. अस्थिरता: नियमित अस्थिरता या अनुभव के लिए डायबिटीज का एक और सामान्य लक्षण हो सकता है।

    7. घाव ठीक न होना: व्यक्ति के घाव ठीक न होने या देर से ठीक होने की समस्या डायबिटीज के लक्षणों में से एक हो सकती है।

    8. आंखों में समस्या: यह डायबिटीज का एक आम लक्षण हो सकता है, जिसमें आंखों में जलन, खुजली या धुंधला पन होता है।

    डायबिटीज का उपचार-

    डायबिटीज का उपचार व्यक्ति के स्थिति, उम्र, संभावित कारणों और उनके दौरान उपयोग की जाने वाली दवाओं पर निर्भर करता है। हालांकि, कुछ सामान्य उपचार निम्नलिखित होते हैं:

    1. आहार व्यवस्था: डायबिटीज के मरीजों को उनके आहार व्यवस्था को बदलने की आवश्यकता होती है। मरीजों को मीठे व तले चीजों से दूर रहना चाहिए और वे पूरे दिन भोजन के साथ साथ ज्यादा पानी पीना चाहिए।

    2. व्यायाम: डायबिटीज के मरीजों को नियमित व्यायाम करना चाहिए। यह शरीर के रक्त शर्करा स्तर को कम करने में मदद करता है।

    3. दवाओं का उपयोग: डायबिटीज के मरीजों को अपने डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं का उपयोग करना चाहिए। ये दवाएं रक्त शर्करा स्तर को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।

    4. इंसुलिन इंजेक्शन: टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों को इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत हो सकती है।

    डायबिटीज के मरीज का भोजन-

    डायबिटीज के मरीज को स्वस्थ आहार का अधिक महत्व होता है। उन्हें मीठे और तले हुए चीजों से दूर रहना चाहिए और ज्यादा पौष्टिक आहार को शामिल करना चाहिए। कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं:

    1. फल और सब्जियां: डायबिटीज के मरीजों को ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जियां खाना चाहिए। वे फल के रूप में सेब, केला, संतरा और अन्य फलों का सेवन कर सकते हैं जो मीठे नहीं होते हैं। सब्जियों के रूप में, लौकी, गोभी, फूलगोभी, बैंगन, गाजर, पालक और टमाटर शामिल किए जा सकते हैं।

    2. प्रोटीन: डायबिटीज के मरीजों को हाइप्रोटीन आहार की जरूरत होती है। वे दूध, दही, दलिया, अंडे, मछली, मीट और ताजे फलों और सब्जियों का सेवन कर सकते हैं।

    3. अनाज और अन्य अन्न: डायबिटीज के मरीजों को अनाज, जैसे कि गेहूं, जौ, राजमा, चने, मक्के का आटा और अन्य अन्नों को शामिल करना चाहिए।

  • ये तरीका अपनाएं जोड़ो के दर्द से आराम पाओ

    गठिया(arthritis) रोग एक व्याधि है जो जोड़ों की स्थिति में प्रभावित होती है। इस रोग में जोड़ों में सूजन, दर्द, अकड़न और कमजोरी होती है। इस रोग की सबसे आम वजह है शरीर में यूरिक एसिड की अधिकता होना, जो जोड़ों में एकत्रित होता है और उन्हें नुकसान पहुंचाता है। यह रोग आमतौर पर वयस्कों को प्रभावित करता है, लेकिन कभी-कभी बच्चों को भी प्रभावित कर सकता है।

    गठिया रोग के लक्षणों में सम्मिलित हैं:

    • जोड़ों में दर्द और सूजन
    • जोड़ों का अकड़न या असमर्थता
    • जोड़ों की स्थिति में सुधार के बाद भी दर्द या सूजन का फिर से उभरना

    यदि आपको लगता है कि आप गठिया रोग से प्रभावित हो सकते हैं, तो आपको एक चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। वे आपको अपने लक्षणों और आपके रोग के गंभीरता के आधार पर उचित उपचार का सुझाव देंगे।

    गठिया रोग के घरेलू उपचार में शामिल हैं:

    1. व्यायाम और योग: नियमित व्यायाम और योग गठिया रोग के उपचार में मददगार होते हैं। इनसे जोड़ों की स्थिति में सुधार होता है और जोड़ों की गतिविधि बढ़ती है।

    2. आहार: एक स्वस्थ आहार लेना भी गठिया रोग के उपचार में मददगार होता है। इसमें अंडे, हरी सब्जियां, फल, अनाज और दूध शामिल होते हैं। इसके अलावा यूरिक एसिड की मात्रा को कम करने के लिए खाद्य पदार्थों में शककरा और मीठा कम खाना चाहिए।

    3. अदरक और लहसुन: अदरक और लहसुन में एंटी-इनफ्लामेट्री गुण होते हैं जो जोड़ों में सूजन कम करने में मददगार होते हैं। इन्हें खाने से गठिया रोग के लक्षणों में राहत मिल सकती है।

    4. ज्योतिष्मती: ज्योतिष्मती के पत्तों को पीसकर लेप बनाकर जोड़ों पर लगाने से जोड़ों की स्थिति में सुधार होता है।

    गठिया की होम्योपैथिक दवा –

    गठिया के होम्योपैथिक उपचार में निम्नलिखित दवाएं शामिल होती हैं:

    1. बेल्लाडोना: यह दवा गठिया के लक्षणों जैसे जोड़ों का दर्द, सूजन और जोड़ों की स्थिति में सुधार करने में मददगार होती है।

    2. अर्निका: यह दवा जोड़ों के दर्द को कम करने में मददगार होती है और सूजन को भी कम करती है।

    3. ब्रोमेलिया: यह दवा जोड़ों की स्थिति में सुधार करने में मददगार होती है।

    4. बरेगेंसिया: यह दवा गठिया के लक्षणों को ठीक करने में मददगार होती है।

    5. कोल्चिकम: यह दवा गठिया के लक्षणों जैसे जोड़ों का दर्द, सूजन और जोड़ों की स्थिति में सुधार करने में मददगार होती है।

    हालांकि, होम्योपैथिक दवाओं का उपयोग करने से पहले, एक व्यवस्थित चिकित्सक से परामर्श करना अति आवश्यक होता है। वे आपकी स्थिति का आकलन करके आपको सटीक उपचार का सुझाव देंगे।

  • अपनाएं ये तरीका मुहासे होंगे जड़ से गायब

    लाइफ स्टाइल – आजकल हमारी लाइफ पूरी तरह से बदल गई है. हम अपने खाने पीने का विशेष ध्यान नहीं रखते हैं जो हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है कई बार हम देखते हैं कि कुछ लोगों के चेहरे पर काफी मुहासे निकल आते हैं लोग इससे परेशान रहते है कई प्रकार के कोस्मेटिक का उपयोग करते हैं लेकिन उनको इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल पाता. वहीं आज हम आपको मुहासे के सन्दर्भ में कुछ ऐसे तत्व बताने जा रहे हैं जो अगर आप जान लेते हैं तो आपके मुहासे की समस्या आप घर बैठे स्वयं ही खत्म कर सकते हैं. तो आइये जानते हैं- 

    क्यों निकलते हैं मुहासे-

    1. अधिक तेल का निर्माण: त्वचा पर ज्यादा से ज्यादा तेल का निर्माण होना एक मुख्य कारण है जो मुहासों को उत्पन्न करता है। तेल के ज्यादा निर्माण के कारण चेहरे के त्वचा के तंत्रों के मुड़ जाने से त्वचा के अंदर गंदगी और बैक्टीरिया जमा होते हैं। इससे त्वचा पर मुहासे निकलने लगते हैं।

    2. हार्मोनल बदलाव: हार्मोनल बदलाव भी मुहासों के उत्पादन के लिए एक मुख्य कारण हो सकते हैं। इससे त्वचा के तंत्रों में बदलाव होता है और इससे त्वचा के अंदर गंदगी और बैक्टीरिया जमा होते हैं जो मुहासों के उत्पादन को बढ़ाते हैं।

    3. अनियमित खानपान और जीवनशैली: खाने की अनियमित आदतों, जल्दबाजी में खाने से और तंबाकू या अन्य विषाक्त पदार्थों के सेवन से मुहासे होने की संभावना बढ़ जाती है।

    मुहासे को ठीक करने के लिए कुछ घरेलू उपचार हैं, जो निम्नलिखित हैं:

    1. नींबू का रस: नींबू का रस त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होता है। इसमें विटामिन सी होता है जो त्वचा को नरम बनाने में मदद करता है और त्वचा के रंग को निखारता है।

    2. हल्दी और नींबू का अपने चेहरे पर लगाना: हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो मुहासों के लिए लाभकारी होते हैं। इसलिए आप हल्दी को नींबू के साथ मिलाकर लगा सकते हैं।

    3. एलोवेरा जेल: एलोवेरा जेल में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो मुहासों के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। इसे सीधे मुहासे पर लगाया जा सकता है।

    4. शहद और दही का मस्क: शहद और दही में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो मुहासों के लिए लाभकारी होते हैं। आप इन्हें एक साथ मिलाकर मस्क के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

    5. नमक और लहसुन का पेस्ट: नमक और लहसुन को पीस कर उनका पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को मुहासे पर लगाकर आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं.

    नोट- यह जानकारी कई अलग-अलग अनुभवों पर आधारित है इससे आपके मुहासे की समस्या वास्तव में खत्म होगी इसकी कोई गारंटी नहीं ली जा सकती.

  • सेक्स के दौरान कंडोम का उपयोग

    सेक्स एक जीवन शैली है जो मानव जाति के लोगों के बीच शारीरिक संबंधों को सम्बोधित करती है। सेक्स शारीरिक, भावनात्मक, सामाजिक और जीवन के अन्य क्षेत्रों में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सेक्स एक स्वास्थ्यप्रद शारीरिक गतिविधि है जो मानव जीवन के समस्त पहलुओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह आनंददायक और सुखद अनुभव होता है जो एक स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने में मदद करता है। इसके अलावा, सेक्स संबंधित शिक्षा, विज्ञान, रोग निवारण और जनसंख्या नियंत्रण जैसे कुछ दृष्टियों से भी बहुत महत्वपूर्ण है।

    सेक्स के दौरान कंडोम का उपयोग कैसे करें-

    कंडोम सेक्स सुरक्षा का एक अहम हिस्सा है जो सेक्स के दौरान संचारित संक्रमणों से बचाव करता है। कुछ लोग कंडोम के उपयोग के बारे में न जानने के कारण घटना संभव है जो इसके उपयोग के न समझने से नुकसान पहुंचा सकती है। कंडोम के सही उपयोग के लिए निम्नलिखित निर्देशों का पालन करें:

    1. सही साइज का चुनाव करें: कंडोम का सही साइज चुनें। अधिक या कम आकार के कंडोम इस्तेमाल करना बेहतर नहीं होता।

    2. इस्तेमाल से पहले जाँच करें: इस्तेमाल से पहले कंडोम की सतह की जाँच करें। कंडोम की सतह पर कोई निशान, टिप्पणी, या तनाव नहीं होना चाहिए। यदि कंडोम में कोई भी निशान हो, तो उसे नहीं इस्तेमाल करना चाहिए।

    3. सही तरीके से इस्तेमाल करें: कंडोम को सही तरीके से लगाएं। इसके लिए ध्यान रखें कि कंडोम के ऊपरी भाग में थोड़ा जगह होना चाहिए, जो इसे सही तरीके से लगाने में मदद करता है।

    कंडोम कई ब्रांडों द्वारा बनाए जाते हैं। कुछ लोकप्रिय कंडोम ब्रांडों की सूची निम्नलिखित है:

    1. Durex
    2. KamaSutra
    3. Manforce
    4. Skore
    5. Moods
    6. Kohinoor
    7. Playboy
    8. Okamoto
    9. Trojan
    10. LifeStyles
    11. Crown
    12. MySize
    13. ONE
    14. Glyde
    15. Sir Richard’s
    16. Sagami
    17. Billy Boy
    18. Beyond Seven
    19. RFSU
    20. Unique

  • खान-पान में छिपी है परंपरा, इतिहास, आदत और संस्कृति की पहचान

    यदि हम वैसे ही हैं जैसा हमारा भोजन है, तो हम क्या हैं? लेखिका शैलाश्री शंकर की किताब ‘टर्मरिक नेशन: ए पैसेज थ्रू इंडियाज टेस्ट्स’ में खान-पान को परंपरा, धर्म, इतिहास, आदत, जेनेटिक्स, भूगोल आदि के नजरिए से देखने और समझने की कोशिश की गई है। यह पुस्तक लेखों का संग्रह है। शैलाश्री दिल्ली के सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में सीनियर फेलो हैं।

    राज्य सरकार द्वारा टीमवर्क आर्ट्स के सहयोग से आयोजित सिक्किम आर्ट एंड लिटरेचर फेस्टिवल (6-8 मई) के पहले संस्करण के दौरान शंकर ने आईएएनएस को बताया, यही तथ्य हमें सही से परिभाषित करता है कि हम एक समान नहीं हैं। हमारी खाद्य संस्कृति के लिए भी यही सही है।

    अतीत में कई लोगों ने इस देश को जीता, लेकिन लेखिका को लगता है कि उनमें से किसी ने भी यहां के जीवन के तौर-तरीकों को समाप्त नहीं किया बल्कि खुद इस भूमि के कई सांस्कृतिक पहलुओं को अपनाया। यहां के स्थानीय स्वाद को चखने के बाद अपने भोजन में मसालों को शामिल कर कई नए व्यंजन विकसित करने वाले मुगलों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, विदेशों में मुगलई व्यंजनों को ही भारतीय व्यंजनों के रूप में जाना जाता है। बिना इस बात को जाने कि यह अपने-आप में कितने अलग-अलग अर्थो को समाये हुए है और स्वाद कहां से आया है, भोजन की धारणा के बारे में बात करना गलत होगा।

    भोजन द्वारा बनाई गई विभिन्न पहचानों को मोजाइक के रूप में देखते हुए और विविध मोजाइकों की जांच करते हुए, लेखिका भोजन को विभिन्न धर्मों के चश्मे से देखती हैं। अतीत में आधुनिक चिकित्सा के आने से पहले मुसलमान यूनानी और हिंदू आयुर्वेदिक सिद्धांतों का उपयोग करते थे। उस समय हम जो खाते थे उसका भी एक समग्र तौर-तरीका था। खाने पकाने के तरीके में संतुलन था। आम का शरबत पीने के साथ इसे किसी और चीज से संतुलित करना या बरसात में मछली नहीं खाना आदि। यह इस बारे में भी है कि यह हमारे व्यक्तित्व के बहुत से पहलुओं को कैसे प्रभावित करता है और हम अपने बचपन के खाद्य पदार्थों की ओर कैसे लौटते हैं। आप जिस भोजन के साथ सहज हैं उस पर लौटते हैं, लेकिन साथ ही प्रयोग भी करते हैं। और हमें नहीं भूलना चाहिए कि अतीत में भोजन किसी की पहचान – जाति, धर्म और पदानुक्रम का एक प्रमुख चिह्न् था। ब्राह्मण मांसाहार नहीं खाएंगे, जबकि क्षत्रिय और अन्य लोग खाएंगे।

    लेकिन एक राजनीतिक विश्लेषक ने भोजन के बारे में क्या लिखा? शंकर ने कहा कि इसे लेकर उनके मन में हमेशा एक अजीब आकर्षण रहा है। पिछले 25 साल से वह खान-पान के संस्मरण और खाना पकाने की विधि की किताबें पढ़ रही हैं – हर समय नया कुछ बनाती रहती हैं। वह खुद को नौसिखिया कहती हैं। उन्हें लगता है कि उनके मन में जो सवाल हैं वह दूसरे लोगों के मन में भी होंगे। वह कहती हैं, यह किताब लिखने के लिए मैंने उन प्रश्नों के उत्तर अलग-अलग जगहों पर तलाशने की कोशिश की। मैंने विज्ञान, मानव विज्ञान और पुरातत्व में उत्तर ढूंढा, और विद्वानों ने किस प्रकार इनका उत्तर दिया है यह देखा। यही कारण है कि ‘हल्दी राष्ट्र’ थोड़ा अलग है – इसमें एक नौसिखिए का अंदाज है – इसलिए यह अत्यधिक प्रयोगात्मक है और कुछ लेख दूसरों की तुलना में बेहतर हैं।

    अब लेखिका ऐसी चीज पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं जिसके प्रति वह हमेशा आकर्षित रही हैं – क्राइम फिक्शन। वास्तव में, उसकी पांडुलिपि पहले से ही लंदन में उसके एजेंट के पास है।

  • मुस्लिम धर्म में महिलाओं की स्थिति

    मुस्लिम धर्म के अनुयायी मुस्लिम कहलाते हैं। मुस्लिम धर्म दुनिया का सबसे बड़ा धर्म है जो अधिकतर अरब देशों में फैला हुआ है। मुस्लिम धर्म का मुख्य कायदा-कानून कलम है, जो कि ईस्लाम के संपूर्ण शास्त्रों का आधार है। मुस्लिम धर्म में अल्लाह पर विश्वास किया जाता है और मुस्लिमों को उनके पैगम्बर मुहम्मद का विशेष सम्मान दिया जाता है। इस धर्म के अनुयायी विभिन्न देशों में रहते हैं और वे विभिन्न जातियों, भाषाओं और संस्कृतियों से हो सकते हैं।

    मुस्लिम धर्म के नियम क्या हैं-

    मुस्लिम धर्म के नियमों का आधार कुरान और हदीस से लिया जाता है, जो मुस्लिम धर्म के प्रमुख शास्त्र होते हैं। निम्नलिखित कुछ मुख्य नियम हैं जो मुस्लिम धर्म के अनुयायी अपनाते हैं:

    1. शहादत का प्रण लेना: मुस्लिम धर्म में शहादत का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है। शहादत का मतलब होता है कि किसी अन्य देवता के बजाय केवल अल्लाह के सामने नमाज पढ़ना।

    2. रोजा रखना: मुस्लिम धर्म के अनुयायी रमदान के महीने में रोजा रखते हैं। रोजा रखने का मतलब होता है कि निर्मम अनाहार के दौरान अल्लाह के सामने नमाज पढ़ा जाए।

    3. नमाज पढ़ना: मुस्लिम धर्म में प्रतिदिन पाँच वक्त की नमाज का पालन किया जाता है।

    4. जकात देना: मुस्लिम धर्म के अनुयायी जकात देते हैं, जो उनकी मालिकी के लिए एक देय राशि होती है।

    5. हज्ज करना: मुस्लिम धर्म के अनुयायी को अल्लाह के घर का यात्रा करनी होती है। हज्ज अल्लाह के सामने नमाज पढ़ने और दूसरे रीती-रिवाजों का प्रावधान है .

    मुस्लिम धर्म में महिलाओं की स्थिति-

    मुस्लिम धर्म में महिलाओं की स्थिति संबंधित मुद्दों पर विभिन्न मतानुसार विवाद होते हैं। हालांकि, कुरान और हदीस में महिलाओं के अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

    कुरान में महिलाओं के अधिकार के बारे में कई बातें उल्लेखित हैं। उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

    • सभी मुस्लिमों को अल्लाह के सामने समान होना चाहिए। (सूरह अन-निसा 4: 1)
    • अधिकारों और कर्तव्यों के मामले में महिलाओं को नासिहत करना चाहिए। (सूरह अन-निसा 4: 19)
    • लड़कियों के जन्म पर दुःख नहीं होना चाहिए। (सूरह النحل 16: 58-59)
    • महिलाओं का अधिकार है कि वे सही तरीके से विवाहित हों और अपने संबंधों को स्थापित करें। (सूरह अन-निसा 4: 3)

    हदीस में भी महिलाओं के अधिकारों के बारे में बताया गया है। उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

    हदीस में महिलाओं के अधिकारों के बारे में उल्लेख कुछ इस प्रकार हैं:

    • महिलाएं अपनी इच्छा से विवाह कर सकती हैं।
    • महिलाएं नैतिक और धार्मिक शिक्षा देने के लिए लोगों की मुख्य शिक्षिका होती हैं।
    • महिलाएं पुरुषों के समान अधिकार रखती हैं और उन्हें समान रूप से व्यवहार किया जाना चाहिए।
    • महिलाएं अपने पति और परिवार के साथ अपने अधिकारों का पूरा उपयोग करने का अधिकार रखती हैं।
    • महिलाओं को नसीहत करने, संघर्ष में उन्हें सहायता देने, समस्याओं को हल करने और मुश्किल समय में उनके साथ सहयोग करने का काम देना चाहिए।

    यद्यपि कुरान और हदीस में महिलाओं के अधिकारों के बारे में स्पष्ट उल्लेख होते हैं, लेकिन कुछ जगहों पर महिलाओं को नापाक होने या अनुचित व्यवहार के लिए दोषी ठहराया जाता है। ऐसी धारणा आमतौर पर संस्कृति और स्थानीय रीति-रिवाजों से जुड़ी होती हैं जो धर्म से सीधे संबंधित नहीं होतीं।

  • किशमिश खाएं और बड़ी-बड़ी बीमारियों से छुटकारा पाएं

    किशमिश एक प्रकार का सूखा फल होता है जो अंगूर (ग्रेप्स) के सूखे हुए ड्राई फलों को कहते हैं। जब अंगूर को धूप और हवा में सुखाया जाता है, तो उसका पानी शुष्क हो जाता है और फल में मिठास बनती है। किशमिश एक प्रमुख औषधीय फल माना जाता है और यह खाद्य उपयोग में व्यापक रूप से प्रयोग होता है। इसे एक स्वादिष्ट सूखे मेवे के रूप में खाया जाता है और विभिन्न पकवानों में भी शामिल किया जाता है। किशमिश में ऊर्जा, पोषक तत्व और विटामिन ए, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, और खनिजों की मात्रा मौजूद होती है।

    किशमिश अंगूर (ग्रेप्स) के सूखे हुए ड्राई फ्रूट्स हैं। इन्हें बनाने की प्रक्रिया निम्नलिखित होती है:

    1. अंगूर के चयन: किशमिश बनाने के लिए, पहले अंगूर के उत्पादन में उच्च गुणवत्ता वाले अंगूर का चयन करें। यहां जर्मनी, आयरलैंड और टर्की जैसे देशों में प्रमुख अंगूर उत्पादक हैं।

    2. पकाने की प्रक्रिया: पहले अंगूर को पानी में धो लें और उसे साफ़ करें। फिर, इसे अधिकतम 12 घंटे तक गुनगुने पानी में भिगो दें। इससे अंगूर में मौजूद शक्कर का प्रतिशत कम होता है।

    3. सुखाने की प्रक्रिया: अंगूर को पानी से निकालें और इसे साफ़ करें। फिर, इसे धूप और उच्च तापमान वाले सुखाने के लिए रखें। सुखाने के दौरान, अंगूर अपने आकार में श्रिंक हो जाता है और उसकी चमक खत्म हो जाती है।

    4. उद्गमन: सुखाने के बाद, अंगूर को निपटाएं और इसकी खुराकों को अलग कर दें। इसके बाद, ये अंगूर किशमिश के रूप में उपयोग करें.

    किशमिश खाने के फायदे-

    किशमिश खाने के कई फायदे होते हैं। यहां कुछ मुख्य फायदे हैं:

    1. पोषण स्रोत: किशमिश में ऊर्जा, पोषक तत्व और विटामिन ए, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन, और खनिजों (जैसे कि पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन) की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इन्हें खाने से शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है और शारीरिक स्थिति को सुधारने में मदद मिलती है।

    2. अंतिऑक्सिडेंट्स: किशमिश में अंतिऑक्सिडेंट्स जैसे रेज़्वेरेट्रॉल पाए जाते हैं, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद कर सकते हैं। ये अंतिऑक्सिडेंट्स स्वस्थ रक्त प्रवाह, मजबूत इम्यून सिस्टम, और संचार के नियंत्रण में मदद कर सकते हैं।

    3. पाचन तंत्र को सुधारे: किशमिश में मौजूद फाइबर और नैचुरल सुगर पाचन तंत्र को सुधारने में मदद कर सकते हैं। यह पाचन को सुधारकर अपच, कब्ज़, और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं को कम कर सकता है।

  • जानें कढ़ी बनाने का सबसे बेहतरीन तरीका

    कढ़ी एक प्रमुख भारतीय व्यंजन है जो दही (कटा हुआ या बटाटा हुआ) और बेसन (ग्राम फ्लोर) के मिश्रण के आधार पर बनती है। इसे मसालों और तड़के के साथ तैयार किया जाता है। कढ़ी एक मसालेदार और तीखी रंगाई ग्रेवी होती है जिसे चावल, परांठे या रोटी के साथ सर्व किया जाता है। यह प्रत्येक राज्य में थोड़ा अलग तरीके से बनाई जाती है और उपयोगिता के लिए विभिन्न सब्जियों और आटे के पकोड़ों के साथ परोसी जाती है। कढ़ी अपने विशेष स्वाद, मसालेदार ग्रेवी और शाकाहारी विकल्पों के लिए जानी जाती है।

    कढ़ी एक पारंपरिक भारतीय व्यंजन है जिसे योग्यतापूर्वक पकाने के लिए निम्नलिखित सामग्री और उपयोगी निर्देश आपकी मदद करेंगे:

    सामग्री:

    • 1 कप दही (कटा हुआ)
    • 4 कप पानी
    • 1/2 कप बेसन (ग्राम फ्लोर)
    • 1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
    • 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर (वैकल्पिक)
    • 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
    • 1/2 छोटा चम्मच जीरा
    • 1/2 छोटा चम्मच राई
    • 1/2 छोटा चम्मच हींग (असेफोटिडा)
    • 8-10 करी पत्ते
    • 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट
    • 1 छोटा चम्मच तेल
    • नमक स्वादानुसार

    निर्देश:

    1. एक बड़ी कटोरी में दही को अच्छी तरह से फेंटें और उसमें बेसन डालें। फिर से अच्छी तरह से मिलाएं ताकि कोई गांठ न बने।
    2. अब उसमें पानी डालें और अच्छी तरह से मिक्स करें। सामग्री को घोल बनाने के लिए बेसन को पूरी तरह घुलाएं।
    3. अब हल्दी पाउडर और नमक डालें और फिर से अच्छी तरह से मिलाएं। ध्यान दें कि गोला आकार की कढ़ी बनाने के लिए घोल धीरे-धीरे डालें और बारीक छलनी से चावल के अनुसार चावल को पीसें।
    4. एक कड़ाही में तेल गर्म करें।
    5. गर्म तेल में जीरा और मेथी दाना डालें। ध्यान दें कि जीरा और मेथी दाना सुनहरा होने तक अच्छी तरह से भूनें, जिससे उनका स्वाद निखरे।
    6. अब करी पत्ते डालें और उन्हें थोड़ी देर तक भूनें।
    7. अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें और उसे भूनें जब तक उसकी खुशबू आने लगे।
    8. अब लाल मिर्च पाउडर (वैकल्पिक) डालें और इसे अच्छी तरह से मिलाएं।
    9. तड़के को धीरे से बनी कढ़ी में मिलाएं और धीमी आंच पर पकाएं।
    10. चावल को धीरे-धीरे पीसें और उसे चावल के साथ मिलाएं।
    11. कढ़ी को हल्की आंच पर और बारीक अचार और रोटी के साथ परोसें।

    यहां आपकी स्वादिष्ट कढ़ी तैयार है! इसे गर्म या ठंडा परोस सकते हैं और उसे धनिया पत्ती से सजा सकते हैं। आप अपनी पसंद के अनुसार इसे ताड़के और मसालों से विविधता दे सकते हैं।