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  • गर्मी से हाल बेहाल, हीट रैश से कैसे पाएं निजाद

     

    गर्मियों के साथ अत्यधिक पसीना आता है और इसके साथ ही त्वचा की कई समस्याएं भी आ जाती हैं।  हीट रैश अक्सर शरीर पर लाल चकत्ते के रूप में आते हैं, खासकर पीठ और कंधों पर।  मोतियों की तरह दिखने वाले छोटे लाल दाने से आपको काफी परेशानी, सूजन और जलन हो सकती है।

    जबकि कांटेदार गर्मी से निपटना कठिन हो सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में हीट रैश विकसित होने पर डॉक्टर को देखने की आवश्यकता नहीं होती है।  इसका इलाज घर पर सरल ओवर द काउंटर नुस्खों से किया जा सकता है।

    हीट रैश से जल्दी छुटकारा पाने के 10 घरेलू उपाय

    हीट रैश एक चेतावनी संकेत के रूप में कार्य करता है कि आपका शरीर बहुत अधिक गर्मी के अधीन हो रहा है। यदि आप बाहर बहुत समय बिताते हैं, तो लंबे समय तक सीधी धूप से बचने की कोशिश करें और ठंडा रहने के लिए ढीले कपड़े पहनें।  इस कांटेदार गर्मी का इलाज करने के तरीकों के बारे में आज हम आपको बताएंगे।

     1. ढीले कपड़े पहनें

     कॉटन और लिनन सबसे अधिक गर्मी के अनुरूप कपड़े हैं क्योंकि वे अधिकतम सांस लेने की अनुमति देते हैं और पसीना नहीं फँसाते उसे सोख लेते हैं।  नमी से लथपथ कपड़े आपकी त्वचा को ठंडक और जलन पैदा किए बिना ठीक करने में मदद करते हैं।

    सिंथेटिक के बजाय ढीले, हल्के प्राकृतिक कपड़ों का चयन करने से हीट रैशेज को और खराब होने से रोकने में मदद मिलती है।

     2. एलोवेरा जेल 

    एलोवेरा जीवाणुरोधी और एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर होता है जो गर्मी के चकत्ते सहित विभिन्न प्रकार की त्वचा की सूजन को कम करने में मदद करता है।  एलोवेरा जेल सूजन को कम करने और लालिमा को कम करने में भी मदद करता है।  यह एक अद्भुत त्वचा कोमल और हाइड्रेटिंग एजेंट भी है जो त्वचा को हाइड्रेट रखता है।

    चकत्ते को शांत करने और उपचार में तेजी लाने के लिए एलोवेरा जेल को दिन में एक या दो बार चकत्ते पर लगाएं।

     3. आइस पैक या कोल्ड कंप्रेस

    हीट रैश के इलाज के सबसे आसान और प्रभावी तरीकों में से एक है त्वचा को ठंडा करना। चिड़चिड़ी त्वचा को शांत करने के लिए कोल्ड कंप्रेस एक आकर्षण की तरह काम करता है।  ठंडे पानी में भिगोए हुए चेहरे के कपड़े, या कपड़े में बर्फ लपेटकर, दर्द, लालिमा और सूजन को कम करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

    हालाँकि, सुनिश्चित करें कि आप इसे ज़्यादा नहीं करें;  आइस पैक को 5-10 मिनट के लिए रखें, इसे उतने ही समय के लिए हटा दें, फिर से लगाएं, और प्रक्रिया को दोहराना जारी रखें। यह बहुत ही कारगर है।

     4. कैलामाइन लोशन लगाएं

    कैलामाइन लोशन खुजली को कम करने में मदद करता है।  इस लोशन के त्वचा के लिए कई फायदे हैं क्योंकि इसमें जिंक ऑक्साइड होता है।  हालांकि, यह कुछ लोगों के लिए त्वचा को शुष्क कर सकता है, इसलिए आगे की जलन को रोकने के लिए इसके साथ एक मॉइस्चराइज़र का उपयोग करना एक अच्छा विचार हो सकता है।

    आप गर्मी में कैलामाइन युक्त साबुन या बॉडी वॉश का भी इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि घमौरियों से बचा जा सके।

     5. नीम के पेस्ट का प्रयोग करें

    नीम (मार्गोसा) में बहुत सारे एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।  आप बस एक गाढ़ा पेस्ट बनाने के लिए नीम के पाउडर को पानी के साथ मिला सकते हैं।  इस पेस्ट को सीधे रैश पर लगाएं, इसे 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें और धो लें। आप गुनगुने पानी से नहाने के लिए अपनी बाल्टी में नीम का पाउडर मिला सकते हैं। इसे भी सभी बैक्टीरिया मर जातें हैं और आपको राहत मिलती है।

     6. मुल्तानी मिट्टी 

     ​​मुल्तानी मिट्टी त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक बहुत ही सामान्य सामग्री है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह रैशेज के इलाज में भी एक प्रभावी घरेलू उपाय है।

    मुल्तानी मिट्टी चकत्तों को शांत करती है और त्वचा की जलन को शांत करती है।  मुल्तानी मिट्टी को गुलाब जल या सादे पानी में मिलाकर पेस्ट बना लें, इसे 15 मिनट के लिए रैशेज पर लगाएं और ठंडे पानी से धो लें।

     7. खीरा 

    खीरे प्राकृतिक शीतलक होने के लिए प्रसिद्ध हैं;  चाहे लगाया गया हो या उपभोग किया गया हो।  कुछ पतले कटे हुए खीरे को फ्रीज करें और स्लाइस को प्रभावित जगह पर 15 मिनट के लिए रखें।

    यह तीव्र त्वचा को शांत करती है और इसकी उच्च जल सामग्री त्वचा को हाइड्रेट रखती है।

     8. चंदन पाउडर 

     चंदन अपने विरोधी भड़काऊ और एनाल्जेसिक गुणों के लिए प्रसिद्ध है, जिसका अर्थ है कि यह दर्द को कम करने में मदद करता है।  चंदन के चूर्ण को थोड़े से पानी के साथ मिलाकर चकत्ते पर लगाने से घमौरियों से जुड़ी जलन, दर्द कम हो जाएगी। साथ ही यह आपको ताज़ा और शानदार महक भी देगा।

     9. बेकिंग सोडा बाथ ट्राई करें

    अपने नहाने के पानी में 3 से 5 बड़े चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं ताकि गर्मी की जलन को शांत किया जा सके क्योंकि यह खुजली और जलन को कम करने में मदद करता है।  बेकिंग सोडा एक एक्सफोलिएटिंग एजेंट के रूप में कार्य करता है जो मृत त्वचा, गंभीर गर्मी के चकत्ते और गंदगी को हटाने में मदद करता है।  यह रोमछिद्रों को खोलकर त्वचा को साफ करता है जिससे खुजली और सूजन से भी राहत मिलती है।

     10. अपने नहाने में एप्सम सॉल्ट मिलाएं

    एप्सम सॉल्ट (मैग्नीशियम सल्फेट) स्किन को स्वास्थ्य लाभ देने की एक श्रृंखला है।  इसका उपयोग ज्यादातर मांसपेशियों को आराम देने और कंधों, गर्दन और पीठ के दर्द को दूर करने के लिए किया जाता है, लेकिन इसे गुनगुने बाल्टी या टब में मिला दें तो यह खुजली से भी राहत दिला सकता है।

    एप्सम सॉल्ट शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और त्वचा को एक्सफोलिएट करता है।  यह रोमछिद्रों को खोलता है और घमौरियों को तेजी से ठीक करने में भी मदद करता है।

  • पुरूषों में बढ़ रहा इस कैंसर का खतरा, जानिए कारण, लक्षण और इलाज

     

    डेस्क। मानव शरीर में पाए जाने वाले कई प्रकार के कैंसर जैसे रक्त कैंसर और अग्नाशय का कैंसर की भाती ही प्रोस्टेट कैंसर भी इसी का एक प्रकार है। वैसे तो कैंसर जेंडर के बेस पर नहीं होता हैं। यह एक बीमारी है जो पुरुषों और महिलाओं दोनों में पाए जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो या तो पुरुषों में ज्यादा पाए जाते हैं या केवल महिलाओं में पाए जाते हैं। प्रोस्टेट कैंसर केवल पुरुषों में पाया जाने वाला कैंसर है। 

    बता दें कि हाल ही की एक रिपोर्ट में भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। डॉक्टर्स की माने तो प्रोस्टेट कैंसर महिलाओं में नहीं पाया जाता है; क्योंकि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर ज्यादा होता है। प्रोस्टेट ग्रंथि या ग्लैंड में ही होने वाले कैंसर को प्रोस्टेट कैंसर के नाम से जाना जाता है। 

    क्या आप जानते हैं कि प्रोस्टेट ग्लैंड का आकार अखरोट की तरह होता है हैरानी की बात यह है कि यह ग्रंथि महिलाओं में नहीं पाई जाती है। प्रोस्टेट पुरुषों में पाई जाने वाली एक छोटी ग्रंथि है जो पेट के निचले हिस्से में होती है।

    पुरूषों में मौजूद इस ग्रंथि में बनने वाले द्रव को वीर्य कहा जाता हैं। जब प्रोस्टेट ग्रंथि में कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ती हैं, तो इसे प्रोस्टेट कैंसर के नाम से जाना जाता है। 

    आइए जानते हैं प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण

    वैसे तो प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआत का पता नहीं चल पाता। इसलिए इसका समय पर इलाज भी नहीं किया जा सकता है। पर हां अन्य बीमारियों की तरह ही प्रोस्टेट कैंसर के भी कुछ लक्षण होते हैं-

    पेशाब का  आना: बार-बार पेशाब आना प्रोस्टेट कैंसर का एक प्रमुख लक्षण है।

    पेशाब करते समय खून निकलना: पेशाब करते समय खून आना भी इसी का मुख्य लक्षण है। अगर किसी पुरुष को पेशाब करते समय खून आता है तो उसे तुरंत इसपर ध्यान देना चाहिए।

    कमर में दर्द: कमर दर्द को भी प्रोस्टेट कैंसर का एक लक्षण माना जाता है। इसी कारण हमें इस आम समस्या को नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत अपने डॉक्टर को सूचित करना चाहिए।

    पेशाब का रुक जाना: कई पुरुषों में सही तरीके से पेशाब न आना या बार-बार पेशाब आना और रुक रुक पेशाब का होना भी प्रोस्टेट कैंसर का एक प्रमुख लक्षण है।

     

    प्रोस्टेट कैंसर के कारण

    हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार प्रोस्टेट कैंसर के कई कारण हो सकते हैं जैसे-

    अधिक उम्र

    उम्र का बढ़ना इसका एक स्वाभाविक कारण हो सकता है। लेकिन बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के बढ़ने का भी खतरा होता है। एक रिसर्च में प्रोस्टेट कैंसर ज्यादातर मामले 65 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों में पाए गए हैं।

    मोटापा

    आमतौर पर मोटापे के कारण भी बहुत सी बीमारियां लोगों को पकड़ लेती हैं। बढ़ते वजन के साथ होने वाली बीमारियों में प्रोस्टेट कैंसर की बीमारी भी पाई जाती है। इसलिए ओवर वेटेड पुरुषों को अपने वजन कम करके पर भी ध्यान देना चाहिए।

    हार्मोन

    मानव शरीर में किसी भी के हार्मोन के डिसबैलेंस होने के कारण कोई न कोई बीमारी घर कर ही लेती है। डॉक्टर्स ने बताया है कि हार्मोन में असामान्य तरीके से बदलाव होने के कारण भी प्रोस्टेट कैंसर हो जाता है। 

    असंतुलित आहार

    खराब डाइट के कारण कई सारी बीमारियां होती हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि ज्यादा फ्राइड फूड्स और बाहर के जंक फूड से भी पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

    प्रोस्टेट कैंसर को ठीक कैसे किया जाता है

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों की माने तो प्रोस्टेट कैंसर एक लाइलाज बीमारी नहीं है। इसका इलाज संभव है। आज हम आपको इसके बारे में भी बताएंगे।

    दवाएं:

    प्रोस्टेट कैंसर का इलाज दवाइयों के माध्यम से किया जाना पॉसिबल है। प्रोस्टेट कैंसर के लिए कई दवाएं उपलब्ध हैं जो इसे ठीक करने में कारगर भी हैं। 

    सर्जरी: 

    दूसरा ऑप्शन सर्जरी है। प्रोस्टेट कैंसर का इलाज जब किसी अन्य माध्यम से सफल नहीं हो पता तो सर्जरी आखिरी रास्ता बनता है। प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी को प्रोस्टेटेक्टॉमी भी कहा जाता है। इसमें प्रोस्टेट ग्रंथि को शल्य चिकित्सा की मदद से रिमूव कर दिया जाता है।

  • दिव्यंगों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, उनके साथ भेदभाव बर्दाश्त नही, अस्पताल में मिलेगी यह सुविधा

    हेल्थ:- कई बार हम देखते हैं कि सुविधाओं के अभाव के कारण अस्पतालों में मरीजो को काफी परेशानियों को झेलना पड़ता है। वही अगर हम बात दिव्यंगों की करे तो अस्पतालों में उनकी सुविधा के हिसाब से फैसिलिटी नही होती है। लेकिन अब से दिव्यांगों को किसी भी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होगी। क्योंकि केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नए मानक तैयार किए हैं। केंद्र सरकार के इन नए मानकों के अनुसार अब अस्पतालों में दिव्यंगों के अनुसार सुविधाओं को लागू किया जाएगा। 

    केंद्र के इस निर्णय को लेकर सामने आई रिपोर्ट के अनुसार अब किसी भी दिव्यांग व्यक्ति के साथ उसकी दिव्यांगता को लेकर भेदभाव नही होना चाहिए। यह वास्तव में अस्वीकृत है। उन्हें सार्वजनिक जगहों पर सुविधाएं मिलनी चाहिए जिसके चलते वह उनका लाभ उठा सके। जानकारी के लिए बता दें साल 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में करीब 2.68 करोड़ लोग दिव्यांग हैं जो कुल आबादी का करीब 2.21 फीसदी हिस्सा है। ऐसे में दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 के तहत केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नए मानक तय किए हैं जिन्हें जल्द ही लागू किया जाएगा।
    केंद्र सरकार ने दिव्यंगों को सुविधाएं दिलाने हेतु एक समिति गठित करने का विचार किया है। इस समिति की निगरानी स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण कर रहे हैं। इस समिति में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. सुनील कुमार, संयुक्त सचिव डॉ. हरमीत सिंह,मुंबई से डॉ. अनिल कुमार गौड़, पांडिचेरी से डॉ. नवीन कुमार, एम्स पटना से डॉ.संजय कुमार पांडेय और नई दिल्ली स्थित सीपीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ वास्तुकार अभिषेक बॉस शामिल हैं। 
    केंद्र सरकार के नए नियमों के कारण अब अस्पतालों में दिव्यंगों के हित को ध्यान में रखकर वाहन पार्किंग से लेकर प्रवेश कक्ष, ओपीडी कक्ष, वार्ड और जांच केंद्रों में दिव्यांगों को ध्यान में रखते हुए बदलाव किए जाएंगें। इसके अलावा अस्पताल में प्रवेश करने के बाद दिव्यांगों के लिए बैठक, व्हीलचेयर, सहायक कर्मी होना चाहिए।

  • दाढ़ी घटा देती है आत्मविश्वास, अपनाएं ये Patchy Beard Solution

    Patchy Beard Solution। भारत मे ये कहावत बड़ी प्रचलित है कि मूंछ तो पुरुषों की शान होती है।

    भारत में पुराने समय से ही दाढ़ी-मूंछ का ट्रेंड चला आ रहा है। हालांकि, अब यह ट्रेंड और भी ज्यादा चल गया है अब सिर्फ दाढ़ी-मूंछ से काम नहीं चलता इसका खूब घना और बड़ा होना भी ट्रेंड का ही हिस्सा है। दाढ़ी-मूंछ पुरुषों को ज्यादा आकर्षक और दमदार दिखती है लेकिन, कुछ लोग चाहकर भी दाढ़ी नहीं रख पाते क्योंकि उनके चेहरे पर पैची बीयर्ड होती है। क्या आप जानते हैं कि दाढ़ी को घना और हैवी बनाना काफी मेहनत और सब्र का काम है। दाढ़ी को घना बनाने के आज हम आपके लिए निम्नलिखित टिप्स को लेकर आएं हैं (Tips to get beard)

    Patchy Beard Solution: पैची दाढ़ी को घना बनाने के लिए क्या करें

    पैची दाढ़ी के पीछे खानपान, वातावरण, आनुवांशिक कारण जैसी चीज़े जिम्मेदार होतीं हैं। जिनमें से कुछ कारकों को कंट्रोल किया जा सकता है और कुछ पर हमारा बस नहीं चलता। आइए घनी और हैवी दाढ़ी पाने के कुछ टिप्स आपको बताते हैं।

    सही विटामिन और पोषक 

    शरीर के किसी भी हिस्से को स्वस्थ बनाने के लिए खानपान पर ध्यान देना बेहद ही जरूरी है। डाइट के जरिए आप बालों को जरूरी विटामिन और मिनरल्स दे सकते हैं। आपको अपनी डाइट में विटामिन ई, विटामिन सी और प्रोटीन युक्त फूड्स को शामिल करना चाहिए।

    दाढ़ी को अच्छे से करें ब्रश 

    घनी और हैवी बीयर्ड पाने के लिए फेस में ब्लड सर्कुलेशन का सही होना एक अनिवार्यता है। इसके लिए आपको अपने चेहरे पर मुलायम ब्रिसल्स वाला कंघा इस्तेमाल करना हैं और ब्रश करने से दाढ़ी के बाल सीधे भी रहते हैं। जिससे आपकी दाढ़ी के बालों की ग्रोथ का भी पता चलता है।

    ट्रिमिंग पर दें ध्यान

    पैची बीयर्ड को भरने के लिए आपको बाल बढ़ाने और ट्रिमिंग दोनों पर ही ध्यान देना चाहिए। बाल बढ़ाने से बीयर्ड में नए बाल जुड़ते हैं और उन्हें ट्रिम करने से बालों को मजबूती मिलती है।

    इन प्रोडक्ट्स का भी करें इस्तेमाल

    आपने फिल्म और टीवी सीरियल्स में देखा होगा कि एक्टर्स की बीयर्ड काफी डार्क और हैवी नज़र आती है। इसके पीछे उसके महंगे बीयर्ड डाई का कमाल है। जो कि दाढ़ी को ज्यादा गहरा प्रदर्शित करतीं हैं। इसके साथ ही दाढ़ी के बालों को हेल्दी बनाने के लिए बीयर्ड ऑयल का इस्तेमाल दिया जाता है।

  • Monkeypox का मिला तीसरा केस, सेक्स से भी होता है संक्रमण

    डेस्क। एक 35 वर्षीय व्यक्ति, जो इस महीने की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात से केरल आया था, उसे मंकीपॉक्स से संक्रमित पाया गया है। स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि मलप्पुरम मूल निवासी दक्षिणी राज्य में आया था।  6 जुलाई से उसका वहां के मंजेरी मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा था।  

    उन्होंने कहा कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है।  मंत्री ने यह भी कहा कि जो लोग रोगी के निकट संपर्क में थे, उन पर कड़ी नजर रखी जा रही है। देश के दक्षिणी जिले कोल्लम में 14 जुलाई को मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आया था, एक अन्य प्रवासी जो संयुक्त अरब अमीरात से लौटा था।  उनका तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में इलाज चल रहा है।

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 16 जुलाई को एक विशेषज्ञ चिकित्सा दल को राज्य में भेजा था और इसके सदस्यों ने संक्रमितों के घर, मेडिकल कॉलेज और अन्य स्थानों का दौरा भी किया था।  बाद में, डॉक्टरों ने पाया कि वह पश्चिम अफ्रीकी वायरस से संक्रमित था। 

    सोमवार को केरल ने राज्य के कन्नूर जिले में मंकीपॉक्स का दूसरा मामला दर्ज किया।  

     विशेषज्ञों के अनुसार, मंकीपॉक्स वायरस उच्च दर से उत्परिवर्तित होता है लेकिन यह उपचार योग्य है और उपचार लक्षणों के साथ बदलता रहता है।  उन्होंने कहा कि संक्रमण की शुरुआत बुखार, सिरदर्द और फ्लू से होती है।  जैसे ही संक्रमण तीव्र हो जाता है, शरीर पर लाल घाव दिखाई देते हैं और चिकन पॉक्स जैसी खुजली को ट्रिगर करते हैं।

    उन्होंने कहा कि वायरस की ऊष्मायन अवधि पांच से 21 दिनों तक होती है।  संचरण केवल निकट संपर्क के माध्यम से होगा जैसे संक्रमित व्यक्ति के साथ स्पर्श करना, कपड़े, तौलिये साझा करना या सेक्स करने से होता है।

  • सावधान , असुरक्षित यौन संबंध से फैल रहा है मंकीफ़ॉक्स

    स्वास्थ्य: देश मे कोविड का तांडव खत्म हुआ नहीं कि मंकीफ़ॉक्स का डर लोगो को सताने लगा है। यह एक ऐसी बीमारी है जो तेजी से फैल रही है। मंकीफ़ॉक्स आज लोगो के लिये बड़ी समस्या बन गई है। लोग इससे काफी डर रहे हैं क्योंकि इसका स्वरूप बेहद डरावना है। मंकीफ़ॉक्स इस समय तेजी से फैलने वाला वायरस है दुनिया के 75 देशो में इस समय मंकीफ़ॉक्स का प्रकोप जारी है। वही भारत मे इसके मामले बढ़ने लगे हैं जिसने भारत की चिंता को बढ़ा दिया है।

    जहां मंकीफ़ॉक्स के लक्षणों पर लगातार शोध चल रहे हैं वही अब विशेषज्ञयों का कहना है कि असुरक्षित यौन संबंध भी मंकीफ़ॉक्स के संक्रमण को बढ़ा देते हैं। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में मंकीफ़ॉक्स को लेकर हुई एक रिसर्च में यह खुलासा किया गया कि मंकीफ़ॉक्स एक ऐसा वायरस है जो लोगो के लिए घातक साबित हो सकता है क्योंकि इसका प्रकोप उन लोगो ने अधिक बढ़ रहा है जो लोग असुरक्षित यौन संबंध बना रहे हैं।
    इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि यह समलैंगिक जोड़ो मे अधिक तेजी से फैल रहा है। इस समय इस वायरस का सबसे ज्यादा प्रकोप गे पुरुषों और समलैंगिक जोड़ो में बढ़ रहा है। अब तक जितने भी लोग इस वायरस की चपेट में आये हैं उनमें से 98 फीसदी लोग ऐसे हैं जो की समलैंगिक संबंध में है या गे पुरुष है। उन्होंने कहा कि यह वायरस स्वांस नही से अंदर प्रवेश करता है। अगर आप लिप किस बार बार करते हैं तो आपको मंकीफ़ॉक्स से सावधान रहने की आवश्यकता है।
    मंकीफ़ॉक्स को लेकर कहा जा रहा है कि वायरस का प्रकोप समलैंगिक और उभयलिंगी पुरुषों में सामान्य रूप से फैल रहा है। यह कपड़ो व शरीर के अन्य अंगों के जरिये से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति पर अपना प्रभाव डालता है।

  • सिंगल रहना सबसे बेहतरीन जाने इसके फायदे

    Lifestyle: आज के समय मे ज्यादातर लोग ऐसे होते हैं जिन्हें कमिटेड रहने की चाहत होती है। वह किसी न किसी के साथ रिलेशनशिप में रहते हैं। उन्हें लगता है कि जब वह किसी के साथ रिलेशनशिप में आते हैं तो उनका तनाव कम होता है वह अपने मन की बाते किसी से कह सकते हैं वह अपने पार्टनर के साथ वक्त बिता कर अपने रिश्ते को मजबूत बना सकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रिलेशनशिप से ज्यादा बेहतर रहता है सिंगल रहना। क्योंकि सिंगल रहने के कई फायदे हैं जो आपकी जिंदगी को खूबसूरत बनाते है ओर आपको बेवजह की टेंशन से भी निजात दिलाते है। तो आइये जानते हैं सिंगल रहने के फायदे…

    अपनी मर्जी के मालिक:

    यदि आपकी लाइफ में कोई नही है तो आप आजाद होते हैं आप अपनी मर्जी के मालिक होते हैं आप अपने निर्णय अपनी इच्छा से लेते हैं। आपको छोटी छोटी चीजो के लिये किसी से पूंछना नहीं पड़ता है। जब आप सिंगल रहते हैं तो आप बेफिक्र रहते हैं ओर आप अपनी मर्जी की चीजें कर पाते हैं। कई बार जब हम रिलेशनशिप में होते हैं तो हमको अपनी इच्छाओं को मार कर अपने पार्टनर के अनुकूल चलना पड़ता है लेकिन सिंगल व्यक्ति के जीवन मे ऐसी कोई पाबंदी नही होती है। 

    अपने लिए वक्त:

    सिंगल व्यक्ति के लिए जो कुछ भी कोई होता है वह खुद होता है। सिंगल व्यक्ति सबसे ज्यादा अपने वारे में सोचता है वह अपने लिये वक्त निकालता है। अपनी हर छोटी बड़ी चीज का ख्याल रखता है। हर चीज समय पर करता है और अपने शरीर से लेकर अपने व्यक्तित्व के निखार के लिये काम करता है।

    पैसे की बचत:

    अगर आप सिंगल है तो यह आपके पैसे को भी बचाता है। जब आप किसी के साथ रिलेशनशिप में होते हैं तो आपको अपने पार्टनर की हर छोटी बड़ी इच्छा पूरी करने की ललक रहती है। आपका मन हमेशा यही करता की आप कही जाएं तो आप अपने पार्टनर के लिये कुछ लेकर आएं इससे कई बार आपके काफी पैसे खर्च हो जाते हैं। लेकिन अगर आप सिंगल होते हैं तो आपको सिर्फ अपनी टेंशन होती है और आप अपना पैसा सिर्फ अपने लिये खर्च करते हैं।

    झगड़ो से नहीं पड़ता बेवजह पाला;

    हमने अक्सर देखा होगा कि जब हम किसी के साथ रिलेशनशिप में होते हैं तो पार्टनर कई बार बेवजह झगड़ा करने लगते हैं और अपने अच्छे खासे मुड़ को खराब कर लेते हैं। वही यदि आप सिंगल है तो आपको इन बेवजह के झगड़ो से नही उलझना पड़ेगा और आप खुश रहकर अपनी लाइफ एन्जॉय कर कर सकते हैं।

  • क्या सिर्फ समलैंगिक पुरुषों को हो रहा Monkeypox

    डेस्क। दिल्ली में मंकीपॉक्स (Monkeypox) का पहला मामला मिलने के बाद लोगों के जहन में इसका खतरा आसानी से मापा जा सकता है। यह देश में मंकीपॉक्स का चौथा मामला है क्योंकि मंकीपॉक्स के तीन मामले केरल से पहले ही सामने आ चुके हैं।

    आल इंडिया मेडिकल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS), दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा ने इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए कहा है कि मंकीपॉक्स से घबराने की कोई जरूरत नहीं है। यह कोविड 19 की तरह संक्रामक नहीं और यह उसकी तरह तेजी से फैलता भी नहीं है। 

    आगे उन्होंने बताया है कि इसमें मृत्यु दर बहुत कम है और ज्यादातर मरीज 14-21 दिन में ठीक हो जाते हैं। 99 फीसदी मामलों में मंकीपॉक्स को समलैंगिक पुरुषों में देखा गया है। 

    आगे उन्होंने कहा कि दिल्ली सहित देश की स्वास्थ्य व्यवस्था इस तरह की बीमारी को हैंडल करने में पूरी तरह सक्षम है और यह चिंता का बड़ा कारण नहीं है। 

    डॉ. एमसी मिश्रा ने कहा कि मंकीपॉक्स दुनिया के 74 देशों में फैल चुका है। अब तक इसके 16,836 मामले देखने को मिले हैं। यह सबसे ज्यादा समलैंगिक पुरुषों में देखा गया है, इसलिए ऐसे समय में शारीरिक संबंधों से बचने की कोशिश करनी चाहिए। जिन लोगों में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखाई पड़ते हैं, उनसे दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए। हालांकि इससे संक्रमण का खतरा कम है पर सावधानी बरतने की जरूरत है। आगे उन्होंने इसके लक्षण बताते हुए कहा कि इस बीमारी में सबसे पहले चेचक की तरह बुखार आता है और मांसपेशियों में दर्द होने लगता है। 

    मंकीपॉक्स के सबसे ज्यादा केस स्पेन में 3125, अमेरिका में 2890, जर्मनी में 2268, ब्रिटेन में 2208 और फ़्रांस में 1567 केसेज मिल चुके हैं। 

    भारत की बात करें तो यहां मंकीपॉक्स का पहला मामला केरल में विदेश से आए व्यक्ति में मिला था। इसके बाद केरल में ही एक और मामला भी विदेश से आएं मरीज में मिला। इसका तीसरा मरीज भी केरल से था। पर दिल्ली में सामने आए देश के चौथे मंकीपॉक्स के मरीज के विदेश से आने की कोई जानकारी नहीं है। जिससे यह भी साफ होता है कि यह शारीरिक संबंधों के अलावा अन्य माध्यमों से भी फैल रहा है।

  • शादी के बाद लड़को का बदलना निश्चित है यह आदते हर लड़के में दिखेगी

    Lifestyle: शादी एक व्यक्ति का जीवन पूर्ण रूप से बदल देती है। चाहे व लड़का हो या लड़की शादी के बाद उनका अंदाज अलग ही हो जाता है वह पहले की तरह अकेले नहीं रहते उन्हें अपने साथ साथ अपने पार्टनर के बारे में सोचना पड़ता है। लोगो के रहन सहन से लेकर उनके व्यवहार में शादी के बाद काफी परिवर्तन देंखने को मिलते हैं जहां एक लड़की अपना परिवार छोड़कर किसी अन्य घर मे आती है और वहां एडजेस्ट होने के लिये वहां के रीतिरिवाजों और व्यवहार के अनुकूल खुदको डालने का प्रयास करती है। वही शादी के बाद कुछ ऐसे खास बदलाव है जो सिर्फ लड़को में होते हैं। तो आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से यह जानने का प्रयास करेंगे की शादी के बाद लड़को के जीवन के क्या बदलाव होते हैं।

    जिमेदार:

    लड़को का रवैया अक्सर गौर जिम्मेदार होता है। वह न अपनी फिक्र करते हैं न अपने आस पास की चीजो की। उन्हें सिर्फ अपनी मस्ती में रहना पसंद होता है वह किसी की नही सुनते। लेकिन जैसे ही उनकी शादी होती है वह जिम्मेदार हो जाते हैं उन्हें यह पता चल जाता है कि वह अब अकेले नहीं है उन्हें अपने साथ किसी और कई जरूरतों का ध्यान रखना पड़ेगा और हर चीज के लिये वह दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकते हैं।

    शेयरिंग:

    ज्यादातर लड़के ऐसे होते हैं जिनको अपनी चीजो को किसी के भी साथ बांटना बिल्कुल नही पसन्द होता है। लेकिन जैसे ही उनकी शादी होती है वह अपनी हर चीज अपने पार्टनर के साथ बांटने लगते हैं। उनके कमरे से लेकर हर चीज में उनके पार्टनर की भागीदारी होती है और लड़के शादी के बाद शेयरिंग का मूल मतलब समझते हैं।

    परिवार से जुड़ाव:

    शादी केवल एक लड़के या लड़की के बीच नही होती है। यह दो परिवारों को साथ लाती है। शादी के बाद लड़का समाजिक गतिविधियों को समझता है वह अपनी जिम्मेदारी को जान कर अपने परिजनों को खुश रखने की कोशिश करता है। शादी के बाद लड़के को अपने घर परिवार व ससुराल में संतुलन बनाना आ जाता है।

    केयर: 

    जो लड़का अपना सामान ठीक से नही रखता था वह शादी के बाद केयर का मतलब समझ जाता है। जो हमेशा अपनी मां पर निर्भर करता था वह अब अपनी मां के साथ अपनी पत्नी के साथ उनके सुख दुख में खड़ा होता है। शादी के बाद लड़के केयर करना और अपनों के साथ वक्त बिताना सिख जाते हैं।

    मैच्योर:

    लड़को की आदत होती है कि वह हर चीज में हसी मजाक करते हैं लोगो को परेशान करते रहते हैं। बेवजह गाड़ी लेकर लॉन्ग ड्राइव पर चले जाते हैं। लेकिन शादी के बाद उनकी यह लाइफ स्टाइल बिल्कुल बदल जाती है वह मैच्योर हो जाते है। उन्हें समझ आ जाता है कि उनकी लाइफ में इन सब चीजो को करने से उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा। वह मैच्योर हो जाते हैं और अपने भविष्य को बेहतर बनाने का विचार करते रहते हैं।

  • Monkeypox को लेकर सरकार ने जारी कीं नईं गाइडलाइंस

     

    Monkeypox Government Guidelines । मंकी पाक्स (Monkeypox) को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है इस के चलते प्रदेश के सभी जिलों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। व्यक्ति में किसी भी तरह के लक्षण मिलने पर तत्काल जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।

    बता दें कि अगर कोई व्यक्ति किसी संक्रमित के संपर्क में आया है तो वह रक्त, अंग और वीर्य दान नहीं कर सकेगा। फिर चाहे उसमें संक्रमण के लक्षण हो या फिर नहीं हो पर उसे इस गाइडलाइन (Monkeypox Guideline) का पालन करना होगा।

    देश में मंकी पाक्स के संक्रमितों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इसे लेकर कई गाइडलाइन जारी कर दी गई है। 

    इसके चलते विदेश से आने वालों को स्वास्थ्य विभाग को जानकारी देनी होगी। साथ ही यह भी बताना होगा कि वह ऐसे देश से तो नहीं आए हैं, जहां संक्रमण फैला हुआ हो? और वह किसी संक्रमित के संपर्क में तो नहीं रहे हैं? क्या उनमें किसी तरह के लक्षण तो नहीं है?

    ऐसे परिस्थितियों में अगर कोई लक्षण नहीं भी मिलते हैं और वह किसी संक्रमित के संपर्क में है तो उस व्यक्ति को 21 दिनों की निगरानी में रखा जाएगा। 

    इस दौरान वो रक्तदान (Blood Donation), अंग या वीर्य दान नहीं कर सकेगा। पर अगर वह किसी संक्रमित के संपर्क में नहीं आया था तो उस पर यह गाइड लाइन लागू नहीं होगी।

    जानिए मंकी पाक्स के ये लक्षण

    बता दें कि छह से 13 दिनों के अंतर्गत दिखते है मंकी पाक्स संक्रमण के लक्षण जिसमें

    बुखार आना

    तेज सिर में दर्द होना

    लिम्फ नोड्स की सूजन

    पीठ दर्द व मांसपेशियों में दर्द रहना 

    शरीर में एनर्जी की कमी होना

    त्वचा का फटना

    चेहरे और हाथ-पांव पर दाने दिखना आदि।