Category: health

  • पति का भाग्य चमकता है पत्नी के इन अंगों से, जानकर होगे हैरान

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    समुद्र शास्त्र में शरीर की इन बनावट और अंगों से मनुष्य के स्वभाव का पता चलता है। खासकर महिलाओं के शरीर की बनावट और उनके कुछ अंगों पर उनके पति का भाग्य जुड़ा होता है। किसी भी औरत के शरीर और उसके अंगों की बनावट का धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्व होता हैं।

    वे महिलाएं भाग्यशाली होती है। जिनके अंग समुद्र शास्त्र की बनावट के अनुसार होते हैं। इसलिए जीवनसाथी की तलाश में अगर आप है तो इन बातों पर जरूर गौर फरमाएं।

    पति-पत्नी में प्रेम
    अगर आपकी शादी ऐसी लड़की से हुई है जिसकी कनिष्ठा उंगली अनामिका से बड़ी है तो समझ लीजिए आप भाग्यशाली पति की श्रेणी में आते हैं। लेकिन अनामिका अगर बीच की उंगली से छोटी है तो फिर पति-पत्नी में प्रेम का आभाव रहता है और रिश्तों में खींचतान बनी रहती है।

     महिलाएं  की  मांग
    आजकल फैशन के चक्कर में महिलाएं सीधी की जगह टेढ़ी मांग निकालती है और उसी में सिंदूर लगाती है। जो धार्मिक दृष्टि से सही नहीं हैं। सीधी मांग से पति की आयु लंबी तो होती है। साथ ही संबंधों में प्यार व सम्मान भी रहता है। टेढ़ी मांग से शादीशुदा जीवन पर भी असर पड़ता है। बहुत सी स्थितियों मे तलाक तक की नौबत आ जाती है।

    लड़की की चाल पर पति का भाग्य
    पत्नी हो या कोई भी लड़की उसकी चाल पर पति का भाग्य टिका होता है। अक्सर आपने देखा होगा जो लड़कियां पैर उठाकर चलती है उन्हें मना किया जाता है। क्योंकि इससे लड़कियां अपना तो बुरा करती हैं अपने से जुड़े लोगों का भी जीवन तबाह कर देती है। इसलिए हर औरत को अपनी चाल पर खास तौर से ध्यान देना चाहिए। पति की किस्मत पत्नी की चाल पर टिकी होती है। जिस भी महिला की चाल सामान्य होती है वो परिवार के लिए खुशहाली लेकर आती है।

    पति रहते हैं गुलाम
    किसी भी महिला का सुंदर और सौम्य चेहरा सभी को आकर्षित करता है। समुद्रशास्त्र में कहा गया है कि महिला का चेहरा चिकना होना चाहिए और चेहरे पर बाल नहीं होने चाहिए। जिस महिला के चेहरा पर बाल होते हैं वो गुस्सैल स्वभाव की होती है। घर में इनकी चलती है। पति को इनकी सुननी पड़ती है।

  • Video : जब दादी ने ‘सेक्स’ पर पोती से खुलकर की बात, Social Media पर मचा हंगामा

    नई दिल्ली: आज भी हमारे समाज में सेक्स या शरीर विज्ञान पर खुलकर बात नहीं की जाती. लोग बातें तो करते हैं लेकिन दबी-छुपी जबान में ही. ऐसे में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक दादी मां सेक्स और कंसेंट को लेकर खुलकर अपनी राय रखती नजर आ रही हैं. इंटरनेट यूजर्स इसे काफी पसंद कर रहे हैं और दादी मां की जमकर तारीफ कर रहे हैं.

    69 वर्षीय दादी अज्जी अपनी पोती अवंती नागराल से कहती हैं कि सेक्स के लिए कंसेंट होना बहुत जरूरी है. बता दें कि अज्जी पेशे से डॉक्टर रही हैं. उन्होंने आयुर्वेद का लंबा अध्ययन किया है. वीडियो में दादी अवंती से कहती हैं कि सेक्स ऐसी चीज है जिसके बारे में कोई खुलकर बात नहीं करना चाहता.

    अवंती जब दादी से पूछती है कि सेक्स हमारे समाज में आज भी टैबू क्यों है, लोगों को सेक्स बोलने में शर्म क्यों आती है? इसपर दादी ने कहा कि मेरे हिसाब से दो तरह के लोग हैं, एक वो जो सेक्स शब्द सुनते ही स्ट्रेंज बरताव करने लगते हैं और दूसरे वो जो सेक्स की ही बातें करते हैं, न सिर्फ बातें करते हैं बल्कि उनके दिमाग में भी हर समय सेक्स ही घूमता रहता है.

    उन्होंने कहा कि इंसानों में सेक्स एक अनोखा अहसास है जिसे आपको बहुत ही सहजता से हैंडल करना चाहिए. ये शारीरिक, मानसिक या इमोशनल हो हो सकता है. लेकिन ये हमेशा सामने वाले के कंसेंट से होना चाहिए.

    अवंती ने जब दादी से पूछा कि कई लोगों को लगता है कि सेक्स सिर्फ शादी के बाद ही करना चाहिए, आप इसे लेकर क्या सोचती हैं? इसपर दादी ने कहा, ‘मुझे लगता है कि सेक्स शादी के बाद ही करना चाहिए लेकिन इसकी कोई बाध्यता नहीं है. लेकिन इसमें आपके पार्टनर की सहमति होनी जरूरी है. हालांकि, शादी के बाद सेक्स करने की कोई बाध्यता नहीं है. ये एक स्पेशल बॉन्ड है, जिसे दो लोग शेयर करते हैं.’

    दादी अपनी पोती से कहती हैं, ‘कई लोग कंडोम का इस्तेमाल नहीं करना चाहते. लेकिन, आपको उस व्यक्ति के बारे में सोचना चाहिए जिसके साथ आप सेक्स कर रहे हैं.’‘डॉक्टर’ दादी कहती हैं, ‘लड़कियों में 18 साल की उम्र में और लड़कों में 25 साल की उम्र में यौन इच्छा शुरू हो जाती है. कई मामलों में लड़कों में 20 साल में भी ये हॉर्मोनल बदलाव आने शुरू हो जाते हैं. कामुकता का जन्म व्यक्ति के प्रति शारीरिक और भावनात्मक आकर्षण से होता है. आपको इसका आनंद लेना चाहिए. इंसानों में यह स्वाभाविक है.’ बता दें कि अज्जी का ये पहला वीडियो नहीं है, वो इससे पहले भी कई वीडियोज में अलग-अलग मुद्दों पर अपनी राय रखती आई हैं.

  • रात को सोने से पहले लहसुन खाने के होंगे ये गजब के फायदे

    लहसुन सेहत के लिए लाभकारी होता है। हर घर में लहसुन का इस्तेमाल काफी किया जाता है। इसके इस्तेमाल से खाने का स्वाद बढ़ जाता है बता दें कि लहसुन में एंटी इंफ्लामेंटरी गुण पाए जाते हैं, जो व्यक्ति के शरीर को संक्रमण से बचाते हैं। खाने के अलावा सोने से पहले तकिए के नीचे भी लहसुन की कुछ कलियां रखना भी बेहद फायदेमंद होता है।

    इसके साथ ही रात के समय सोने से पहले लहसुन खाने से शरीर को कई लाभ मिलते हैं जैसे – लहसुन में भरपूर मात्रा में फाइबर, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, जिंक, कॉपर, सेलेनियम, फोलेट, विटामिन बी6, विटामिन ई, विटामिन सी, सोडियम आदि मौजूद होते हैं जो सेहत को तंदुरुस्त बनाने के साथ-साथ शरीर को कई समस्याओं से छुटकारा भी दिलाते हैं।

    कोलेस्ट्रॉल की समस्या दूर करें – अगर कोई व्यक्ति रात के समय सोने से पहले लहसुन का सेवन करता है तो ऐसा करने से उसे कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद मिलती है। बता दें कि लहसुन शरीर में हानिकारक कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। साथ ही इसके अंदर पाए जाने वाले एंटी हाइपरलिपिडेमिया गुण कोलेस्ट्रॉल को कम करने में उपयोगी हैं।

    वजन होता है कम – जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं तो उन्हें रात को सोने से पहले लहसुन का सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से आप अपना बढ़ता वजन कम कर सकते हैं। लहसुन में पाए जाने वाले anti-obesity गुण शरीर से चर्बी को निकालने में मदद करते हैं। वहीं इसके सेवन से शरीर में फैट जमा होने की समस्या भी दूर हो जाती है।

    सर्दी जुकाम और बुखार को दूर करे लहसुन – यदि किसी व्यक्ति को सर्दी, जुकाम, बुखार आदि की समस्या हो रही है तो इस परेशानी को दूर करने के लिए रात के समय सोने से पहले लहसुन का सेवन करें। ऐसा करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता के कार्य में सुधार होता है। साथ ही बुखार, सर्दी, जुकाम आदि समस्या से राहत भी मिलती है। लेकिन अगर समस्या ज्यादा हो रही है तो पहले डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

  • Gale Ki Kharash Ka Ilaj : गले की खराश में अपनाएँ ये जाँचे-परखे घरेलू नुस्खे

    अक्सर मौसम बदलने की वजह से लोगों को कई तरह की परेशानी होने लगती है, जिसमें से एक गले की खराश है। कई बार लोग धूप से आते ही ठंडा पानी पी लेते हैं तो वो उन्हें नुकसान कर जाता है। वहीं कई बार गले में इन्फेक्शन की वजह से भी गले में खराश की दिक्कत होने लगती है। गले की समस्या से व्यक्ति को बहुत असहजता और परेशानी हो सकती है। विशेष तौर पर गले की खराश व्यक्ति को अधिक परेशान करती हैं। इसके कारण ना तो वह ठीक से खा पाते हैं और ना ही बोल पाते हैं। ऐसे में कुछ घरेलू उपाय करके गले में खराश की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

    नमक के पानी से गरारे करे – अगर किसी को गले में खराश हो रही है तो इसके लिए सबसे आसान तरीका है नमक के गुनगुने पाने से गरारे करना। बता दे कि नमक में एंटीबैक्टीरियल गुण होते है जिससे गले की खराश की समस्या में आराम मिलता है।

    हल्दी का दूध भी लाभकारी – हल्दी में औषधीय गुणों का भंडार पाया जाता है। ऐसे में हल्दी पाउडर को एक गिलास दूध में मिलाकर पीने से गले की खराश के साथ-साथ गले की सूजन और दर्द में भी आराम मिलेगा।

    शहद का उपयोग – गले की खराश की समस्या को दूर करने के लिए शहद भी बहुत असरदार होता है। इसके लिए आप एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच शहद और नींबू का रस मिलाकर दिन में तीन बार पिएं। ऐसा करने से गले की खराश में आराम मिलेगा।

    लहसुन का सेवन करें – लहसुन में एंटी बायोटिक, एंटी माइक्रोबियल, एंटी इंफ्लेमेट्री जैसे कई गुण पाए जाते हैं। ये सभी गुण व्यक्ति की सेहत के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। गले की खराश को दूर करने के लिए भी लहसुन बहुत कारगर है क्योंकि लहसुन में सल्फर प्रचुर मात्रा में होता है जो बैक्टीरिया को खत्म कर देता है।

    काली मिर्च – गले की खराश को दूर करने में काली मिर्च भी लाभदायक है। इसके सेवन से गला साफ होता है और दर्द भी गायब हो जाता है। काली मिर्च का सेवन आप साबुत ऐसे ही खाकर भी कर सकते हैं।

    Disclaimer: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें।  

  • Dubai – The Next Healthcare And Pharma Hub

     

    Dubai is keen on attracting pharmaceutical companies from India reflects in the words of Humaid Al Qutami, Director General of Dubai Health Authority (DHA) who strongly believes that there are several areas in the health sector including pharmaceuticals where both Dubai and India can collaborate.

    “The UAE and India share a deep-rooted, historic partnership.  We can collaborate and continue this partnership with the aim to benefit the people of both the countries and provide high-quality and efficient patient care,” says Humaid Al Qutami.

    Dubai recently decided to reduce its pharmaceutical imports by 18 per cent (from US$ 4 billion) by the end of 2022. This is significant, because by attracting Indian pharma companies to its soil Dubai can emerge as the MENA region’s pharmaceutical hub besides buffering itself against pandemic-like situations that can result in supply chain disruptions.

    In pharmaceutical production India ranks 3rd and 14th in volume and value respectively and the country has a well-established domestic pharmaceutical industry. Hence, the country is well positioned to support Dubai’s strategic move, says Firaq Shroff, Director Marketing, Sunways which is majorly into ophthalmology and ENT segments. 

    “Dubai is the best gateway to the Middle East,” Shroff affirms, adding that Sunways could be an important asset for Dubai in its goal to emerge as the pharmaceutical hub. Dubai is not only a business hub for the MENA region but also provides inroads into the African market and is logistically well connected to all parts of the world.  “It is an opportunity we look forward to since we are looking for newer avenues of growth.”, Shroff adds.

    Rahulkumar Darda, Chairman and Managing Director, Brinton Pharmaceuticals, opines that Dubai’s new strategy on pharma sector would have far-reaching implications, and it would benefit the people of the UAE and the MENA region in general.

    “It would increase the access to high-quality generic medicines from India; increased availability would lead to significant lowering of the prices compared to those from the European and American companies. We are upbeat about this initiative and we are gearing up to play a significant role in Dubai,” asserts Darda.

    Brinton Pharmaceuticals with a strong presence in dermatology, paediatric, respiratory and family physician specialties is already collaborating with Dubai Municipality. The company last year had exported Favipiravir – an antiviral drug against Covid-19 – to Gulf countries.

    Not just pharma companies, Dubai is also looking to collaborate in other healthcare areas, according to Humaid Al Qutami.  So, it is not surprising that some Indian players including those in training, medical education and telehealth are keen on expanding their businesses to Dubai. 

    “As more pharma companies from India open their shops in Dubai, there will be more opportunities to fill the knowledge-gap. We want to make use of this opportunity and we are talking to some potential partners in Dubai,” says Hans Lewis, Founder and CEO of DocMode – an India-based global platform that provides interacting learning programmes to healthcare professionals across the world.

  • Dubai: An advanced healthcare destination

     

     With a strategic focus on developing and providing the finest quality of healthcare, Dubai has positioned itself as a healthcare hub for not only medical tourists but also global investors. Here’s a look at some of the latest advances in the sector.

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    With a focus on health-tech, infrastructure, R&D, innovation, and more, Dubai is steadfastly establishing itself and the UAE as a centre for the most cutting-edge developments in healthcare.

    Health at the forefront

    Be it robotic pharmacy and surgeries, AI (Artificial Intelligence), radiation surgeries, 3D modelling and technology (for instance, for dental procedures) or stem cell technology, among other things—Dubai’s latest technology-driven medical innovations are paving the way for early, quick and cost-effective disease detection and treatment that will improve the lives of millions whilst also attracting global investors.

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    While speaking on some of these path-breaking healthcare advances, Dr Azad Moopen, founder, chairman and managing director, Aster DM Healthcare, shares, “Dubai has already arrived as the healthcare destination in the region and is on the top of the global health tourism map. It has positioned itself as a knowledge-based economy, with the usage of AI, data analytics and IoT being the way forward. Tele-health, e-prescription, and maintenance of electronic medical records are already in vogue. E-ICU, 3D Printing and robotic interface for patients, are some of the technologies in the [offing].”

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    Dr Moopen also emphasises that the government and private players have been investing significantly in the sector, as he shares, “Dubai Health Authority (DHA) is currently working on a project to introduce AI for early detection of diabetic retinopathy by assisting ophthalmologists in conducting faster tests with high accuracy through algorithms. Use of AI in radiology for detection of lesions and the use of AI pods for easy access and quick health screening are some other measures. DHA has also launched the HiNT (Healthcare and Innovative New Technology) stroke detection headband which has a wearable point-of-care monitoring device that detects patients who have a higher risk of stroke. Dubai Genomic is another futuristic project that will go a long way in helping predictive care. The plan is to have a massive genomic data bank, use DNA sequencing and apply AI and Machine Learning (ML) on it to predict diseases before they occur.” It is innovations like these that saw Arab Health and Medlab Middle East sign deals worth AED767 million at the show this year.

    Currently, FDI in Dubai’s AI and Robotics industry is the third highest in the world. The city also aims at having around 34 indigenous pharmaceutical companies by the year end and attracting USD 2.5 billion in pharma research and manufacturing by 2022 with the city’s pharmaceutical sector pegged to be valued at USD 6.8 billion by 2025.

    Treating with care

    With so many advancements underway, it’s no wonder that the city is a popular destination for medical tourism (read: sports medicine, orthopaedics, dermatology and skincare, dentistry and fertility treatments). The city is home to numerous internationally accredited hospitals, infrastructure and healthcare professionals that offer integrated healthcare services. Further, with around 400 aesthetic clinics, 150-day care centres and the highest number of cosmetic surgeons per capita, Dubai is set to soon become the cosmetic surgery capital of the world at an estimated USD 21.97 billion by 2023. The city will also be adding new hospitals and healthcare centres to its already existent infrastructure.

    Speaking on what sets Dubai apart as a medical tourism destination, Dr Philip John M, senior consultant psychiatrist, child psychiatrist with Peejays Policlinic and Child Guidance Clinic @ The Neurocenter Kochi, explains, “Dubai has the best of everything—from infrastructure to surgical and investigation facilities, and the latest tools. The city has made huge investments in creating such a massive healthcare infrastructure.”

    P.K. Ramankutty, a resident of Kerala, who visited Dubai three years ago while accompanying his daughter who was undergoing cosmetic surgery here, says of the experience, “Our enquiries revealed that Dubai is the best place for cosmetic surgery. It was a superb experience, both, in terms of the treatment results and the personal care we received.” The city’s stringent safety standards and protocols that saw 3.7 million international visitors between July 2020 to May 2021, will only boost medical tourism in the UAE further.

    Recent developments

    Other notable developments include the establishment of the Dubai Academic Health Corporation that will integrate healthcare, medical education and scientific research to improve the quality, efficiency and accessibility of the city’s healthcare system. Dubai Healthcare City has also launched C37, a private medical workspace (a first in UAE) wherein visiting oversees doctors or local physicians can practise on a part-time basis.

    So, with these, and many other developments in the offing, Dubai is set to achieve its healthcare goals and targets in the near future.

    Disclaimer: This article is a part of featured content series on Business in Dubai

  • ओमीक्रॉन से खुद करें बचाव, जानिए आसान टिप्स, जरूर करें फॉलो

    नया वैरिएंट ओमिक्रॉन दुनियाभर में खतरा बन चुका अब भारत में भी दस्तक दे चुका है। ओमीक्रॉन वेरियंट कितना खतरनाक हो सकता है। इस बारे में पूरी स्थिति साफ नहीं है। लेकिन फिर भी ओमीक्रॉन को लेकर विशेषज्ञों ने साफ किया है कि ये कोराना वायरस से ज्यादा खतरनाक है । ऐसे में ओमीक्रॉन से बचने के लिए हमको इम्यूनिटी को मजबूत करना सबसे जरूरी है।

    देश के कई हिस्सों में मरीज मिलने से चिंता बढ़ गई है। हम सभी इस बात से वाकिफ हैं कि आज भी पूरा विश्व कोरोना वायरस की समस्या से जूझ रहा है। अभी इस संक्रमण के नए वैरिएंट ने तबाही मचाए हुई है और उसका नाम ओमीक्रॉन है. इस समय हर कोई इस महामारी से काफी सहमा हुआ है। वहीं दूसरी तरफ अब तक विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस महामारी से बचने के लिए साफ-सफाई व सामाजिक दूरी को अपनाना आवश्यक है।

    इस कड़ी में केंद्र सरकार भी नए-नए कदम उठा रही है. कई राज्यों में राज्य सरकार द्वारा रात्रिकालीन कर्फ्यू लगाया गया है। वहीं चिकित्सकों के अनुसार इस महामारी से घबराने के बजाय सतर्कता एवं सावधानियां बरतने की आवश्यकता है। जी हाँ और सामने आने वाली जानकारी के मुताबिक कोरोना के लक्षण फ्लू से मिलते-जुलते हैं।

    -ठंडे पानी की जगह गुनगुन पानी का सेवन करें.

    -उसके बाद अदरक तुलसी और काली मिर्च वाली चाय का सेवन करें.

    -खाने में हरी सब्जियां जरूर खाएं जिससे आपकी इम्म्यूनिटी स्ट्रांग हो.

    -किसी भी फल का जूस जरूर पीएं, या फिर घर में ही बनाना शेक बना कर पी लें.

    इस संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं। वहीं ओमीक्रॉन से ग्रसित होने पर लक्षण कम नजर आते हैं. इसी के चलते दुनियाभर में बहुत सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। अगर सावधानी नहीं बरती तो कोरोना वायरस का नया वेरिएंट घातक भी हो सकता है। आप ओमीक्रॉन से बच सकते हैं.

    इन नियमों को अपनाएं :
    * साबुन और पानी से हाथ धोएं और एल्कोहल बेस्ड हैंड सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
    * अपने घर की चीजों को, जैसे डिश, पानी, बर्तन इत्यादि को गंदे हाथों से न छुएं।
    * अपने चेहरे पर सर्जिकल मास्क को पहनें, हर 6-8 घंटे में मास्क चेंज करें और उसका निस्तारण सही से करें।
    * कहीं भी जाए तो हाथ न मिलाएं, यदि आपको खांसी और बुखार महसूस हो रहा है तो किसी के पास ना जाएं बल्कि खुद को एक कमरे में आइसोलेट करें।

    * आप अपनी आंख, नाक और मुंह को स्पर्श न करें, हाथों की हथेलियों में न छींके और न ही खासें।
    * ध्यान रहे सार्वजनिक रूप से न थूकें, अनावश्यक यात्रा न करें, विशेषकर प्रभावित इलाकों में तो ना ही जाएं।
    * इस दौरान समूह में न बैठें, बड़े समारोहों में भाग न लें अपना ध्यान रखे।
    * किसी भी तरह की अफवाह और दहशत न फैलाएं, सतर्कता जरुरी है।
    * कोरोना वायरस से बचने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के जारी किए गए दिशा निर्देशों का पालन अवश्य करें।

  • आपको ये लक्षण दिखे तो हो जाएं सावधान, हो सकता है Omicron संक्रमण !

    नई दिल्ली/नोएडा। डेल्टा के साथ कोरोना का ओमिक्रोन वैरिएंट भी दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में तेजी से पांव पसार रहा है, जिससे लोगों में दहशत बढ़ने लगी है। लोग इसके लक्षण को लेकर भ्रमित हैं, इसको लेकर डाक्टरों/विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दी, खासी और जुकाम के साथ बुखार भी आए तो यह ओमिक्रोन या फिर डेल्टा वैरिएंट का भी लक्षण हो सकता है, ऐसे में कोरोना को लेकर सतर्क रहें। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि लोग अगर कोविड गाइडलाइन का पालन करें तो कोरोना को हराना मुश्किल नहीं है। शारदा अस्पताल के आइसीयू इंचार्ज डा. अभिषेक देशवाल भी कोरोना से संक्रमित होने के बाद ठीक हैं और पुरानी दिनचर्या में लौट आए हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना अब असाध्य बीमारी नहीं रही है।

    अपना अनुभव बांटते हुए डा. अभिषेक ने बताया कि 18 दिसंबर को कफ और बुखार जैसा महसूस हुआ। अगले दिन कोरोना का टेस्ट कराया तो रिपोर्ट पाजिटिव आई। इसके बाद पत्नी, मां (65 साल), चार साल के बेटे और घरेलू सहायिका का टेस्ट कराया तो पत्नी को छोड़कर सभी की रिपोर्ट पाजिटिव आई। सभी को हल्के जुकाम और बुखार की शिकायत थी। सभी ने घर पर ही इलाज करना शुरू किया। तीन दिन में सभी ठीक हो गए। शुगर की मरीज होने के बाद भी उनकी मां ने बीमारी को हरा दिया।

    कुछ बातों का ध्यान रखकर कोई भी इसे आसानी से हरा सकता है। जैसे ठीक तरीके से मास्क पहनना, दो गज की दूरी, हाथ को बार-बार धोने की आदत, वैक्सीन लगवाने के बाद भी भीड़भाड़ से बचना सबसे बेहतर उपचार हैं। खासतौर से आज नए साल की पार्टी मनाने में लोगों इन बातों का खास ध्यान रखना होगा, जिससे लोग कोरोना के संक्रमण से बचे रहें।

    घर में यदि बुजुर्ग और बच्चे हों तो उन्हें गर्म पानी, अच्छा प्रोटीन वाला खाना और ठंड से बचने की जरूरत है। जुकाम और खांसी के साथ बुखार होने लगे तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं, लापरवाही न बरतें।

  • समय की बर्बादी करने वाला, आजकल के लोगों का लोकप्रिय वाहन प्रेम

    Lifestyle| कहते है प्रेम सुख की दूसरी अनुभूति है जहां हर व्यक्ति खुशी का अनुभव करता है पर मैं आजकल के लोगों को जब देखती हूं तो बड़ा आश्चर्य चकित हो जाती हूं कि जहां प्रेम सुख का प्रतीक है जिसका होना जीवन को एक नया आधार प्रदान करता है वहीं लोग इससे व्यथित और परेशान क्यों है और आजकल ये लोगों की पीड़ा का कारण क्यों बन रहा है । 
    जहां 12 वर्ष के बच्चे का मन किताबों की दहलीज पर होना चाहिए वहीं उसका मन प्रेम से मिले दर्द को संभालने में लगा है बड़ी अजीब बात जहां इस उम्र में लोग खुद को नहीं संभाल पाते वहां बच्चे प्रेम को संभाल रहे हैं और उसको परिभाषित भी कर रहे हैं और उनकी परिभाषाओं को सुनकर मेरे कर्ण के पर्दे स्थिर से हो जा रहे हैं कि मैं आज तक इसका एक अंश न समझ पाई और मेरे पीछे ओर मेरे साथ की पीढ़ी इसको जी रही है पर उनके प्रेम का तरीका बड़ा अजीब है .
    जिसे देख कर मुझे बस यही लगता है वह उनके लिये भले ही प्रेम हो पर वास्तव में वह प्रेम नहीं बल्कि समय की बर्बादी करने वाला एक साधन हैं और जिस प्रेम को वो परिभाषित करते हैं वो शायद दर्द का कारण इसीलिए भी बन रहा है क्योंकि वह प्रेम को अनुभव नहीं कर रहे बल्कि एक संसाधन का उपयोग कर रहे हैं जिसका एक निश्चित मुकाम पर पंहुचने के बाद खराब होना जाहिर है। आज एक अजीब किस्सा आँखों के सामने था.
     जहां ये प्रेम रूपी वाहन पर एक व्यक्ति इस प्रकार सवार था मानो यह वाहन उसके लिये सर्व सुखदायी है इसकी चकाचौंध उसपर इस कदर हावी थी कि उसके आप पास का वातावरण उसके लिये शून्य था पर कुछ समय बाद उसके इस प्रेम रूपी वाहन की मशीन में शायद कुछ खराबी आ गई और वह अपने सर्व सुखदायी सुख से दुख की और बढ़ने लगा । उसके इस बदलते स्वभाव ने कई सावल तो जहन में जगा दिये हैं पर इनके जवाब की अभिलाषा मैं किसी से नहीं करती क्योंकि इसका जवाब वहीं दे सकता है जो इस वाहन के स्पर्श में न होकर प्रेम को समझता हो और जो प्रेम को समझता होगा वो स्वयं इस वाहन की लोकप्रियता की वजह जरुर खोज रहा होगा ।।

  • अहंकार ही है विनाश का कारण- विजयता पाण्डेय

    जीवन शैली l पत्रकारिता विभाग की प्रोफेसर रही विजयता पाण्डेय कहती है मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा संकट उसका अहंकार है। अहंकार जिस व्यक्ति पर छाता है यह उसे नष्ट कर देता है। यह व्यक्ति की सफलता का सबसे बड़ा रोड़ा बनता है। क्योंकि इतिहास कहता है की आज तक अहंकारी व्यक्ति को कभी कोई सफलता हासिल नहीं हुई है यह महज विनाश का कारण बना है। उदाहरण के लिए हम हिंदुओ के प्रमुख ग्रन्थ रामायण के अहम किरदार रावण को ही देख ले। रावण जिसे अमृत का वरदान प्राप्त था फिर भी वह श्री राम के सामने नही टिक पाया और अपने अहंकार के चलते अपने विनाश का कारण बना। वही यदि हम आज के परिपेक्ष्य की बात करें तो आज के मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन उसका अहंकार है अहंकार को हम घमंड भी कह सकते हैं। 

    विजयता पाण्डेय कहती हैं की जब कोई व्यक्ति खुद पर बिना वजह घमंड करता है किसी की नहीं सुनता है और अपने समान किसी को नहीं आंकता है तब वह अहंकार की बेड़ियों में जकड़ जाता है। कहते हैं कीड़े कपड़े को नष्ट कर देते हैं ठीक उसी प्रकार अहंकार व्यक्ति के विवेक को नष्ट कर देता है उसके सोचने समझने की शक्ति को क्षीण करता है और उसे स्कारतकता से नकारात्मकता की ओर ले जाता है। आजकल हम सब देखते है मुनष्य खुशी की तलाश करता है इधर उधर अपनी खुशी को खोजता है लेकिन उसे खुशी नहीं मिलती उसकी खोज अधूरी रहती है। इसका कारण उसका भाग्य नहीं अपितु उसका अहंकार है क्योंकि दुख का आरंभ अहंकार का प्रथम चरण है। व्यक्ति के दुखों का कारण उसका अहंकार ही है और अहंकार उसी के भीतर निवास करता है जो स्वयं को सर्वश्रेष्ठ, सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञाता समझता है। 

    जाने कैसे लोग होते हैं अहंकारी-

    विजयता पाण्डेय कहती है अहंकारी व्यक्ति कहीं बाहर से नही आता वह हम आपके बीच का ही सामान्य व्यक्ति होता है। लेकिन उसका व्यवहार उसके आचरण का परिचय देता है। जो व्यक्ति अहंकार में डूबा होगा वह कभी भी अपने बारे में नहीं सोचता न अपने विषय मे बात करता है। उसका एकमात्र लक्ष्य दूसरों को आंकना उनके विषय मे सोचना और उनपर चर्चा करना होता है। क्योंकि इनका उद्देश्य नकारात्मक होता है यह सदैव दूसरो को खुद से नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं और जब यह अपने उद्देश्य में सफल नही होते तो दुख में डूब जाते हैं और अपने भाग्य को कोसते है।
    उन्होंने अहंकार को ज्ञान से जोड़ते हुए कहा, अहंकार वान लोग खुद को सर्वश्रेष्ठ समझते हैं वह अपनी चीजो को बढ़ा चढ़ाकर दिखाते हैं। यह किसी की सलाह नहीं लेते और न किसी के ज्ञान को स्वीकारते हैं। क्योंकि अहंकार शराब की भांति एक लत है यह जिस व्यक्ति को लगती है उसे बर्बाद कर देती है। क्योंकि ऐसे व्यक्ति जीवन मे आगे नहीं बढ़ते और न अच्छे गुणों को खुद में प्रवेश करने देते यह खुद को बड़ा समझते हैं और अपने ज्ञान में बढ़ोत्तरी नहीं कर पाते।  

    अहंकार डालता है मानसिक स्थिति पर प्रभाव- विजयता पाण्डेय 

    विजयता पाण्डेय कहती है अहंकार व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर को प्रभावित करता है। क्योंकि जब कोई इसकी संगति में होता है तो उसका साथ हर कोई छोड़ देता है। ऐसे लोगो का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ा रहता है यह कभी भी खुश नहीं रहते क्योंकि इनके दिमाग ने हर दम दूसरों को नीचा दिखाने का विचार चलता रहता है। यह इतने अकेले होते हैं कि यह अपने मन की बात कभी किसी से नहीं कह पाते हैं और अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं। ऐसे लोग कभी किसी से जुड़ नहीं पाते और यह सामाजिक नहीं होते क्योंकि यह लोगो के समूह में भी खुद की तारीफों के पुल बांधते रहते हैं और खुद को सर्वोच्च दिखाने का प्रयास करते हैं। यह इतने स्वार्थी होते हैं की इन्हें किसी अन्य के सुख दुख से ज्यादा अपने स्वार्थ से मतलब होता है यह स्वयं को खुश रखने हेतु किसी को दुख पहुंचाने या उनपर कटाक्ष करने से नहीं चूकते है। 
    सामान्यतः यह एक ऐसा रोग है जो अंदर ही अंदर व्यक्ति को नष्ट करता है। इसका कोई इलाज नहीं है और न इसे शांत किया जा सकता है। यह ऐसे स्वभाव के होते हैं की अपनी कमजोरियों को छुपाने के लिए किसी दूसरे को नीचा दिखाने लगते हैं। यह दूसरों की कमियों को निकालने में माहिर होते हैं। इनके सम्बंध से पारिवारिक सम्बन्धों में कटुता आती है। यह मुख्यतः व्यक्ति की क्षमताओं दया नम्रता जैसे गुणों को बर्बाद कर देता है।