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  • Proning से बढ़ जाएगा Oxygen Level, बच सकेगी कोरोना मरीज की जान, जानिए क्या है Process

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    देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के प्रकोप के चलते हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। बड़ी संख्या में कोरोना के मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है, लेकिन देशभर में ऑक्सीजन की भारी कमी के चलते कई मरीजों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने सांस लेने में जिन मरीजों को तकलीफ हो रही है, उनके लिए प्रोनिंग के कुछ आसान तरीके सुझाए हैं। प्रोनिंग प्रक्रिया से कोरोना के मरीजों को अपना ऑक्सीजन लेवल सुधारने में काफी मदद मिल सकती है। खासकर वो मरीज, जो होम आइसोलेशन में रह रहे हैं। प्रोनिंग किसी मरीज को पीठ घुमाकर सटीक व सुरक्षित तरीके से पेट के बल लाने की प्रक्रिया है, जिससे चेहरा नीचे की तरफ कर लेटने की मुद्रा में रहे।

    क्या होती है प्रोनिंग?

    • प्रोनिंग एक तरह की प्रक्रिया है जिससे मरीज अपना ऑक्सीजन लेवल खुद ही मेनटेन कर सकता है।

    • प्रोन पोजीशन ऑक्सीजनेशन तकनीक 80 परसेंट तक कारगर है।

    • यह प्रक्रिया मेडिकली स्वीकार्य है, इसे पेट के बल लेटकर पूरी करना होता है।

    • इससे सांस लेने में सुधार होता है और ऑक्सीजन लेवल में सपोर्ट मिलता है।

    कब करें यह प्रक्रिया

    • इस प्रक्रिया को तब अपनाना है जब कोरोना मरीज को सांस लेने में परेशानी हो रही हो और ऑक्सीजन लेवल 94 से कम हो जाए।

    • अगर आप होम आइसोलेशन में हैं तो समय-समय पर अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहें।

    • बुखार, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर भी समय-मय पर मापते रहें।

    • समय पर सही प्रक्रिया के साथ प्रोनिंग कई लोगों की जान बचाने में मददगार है।

    कैसे करें

    प्रोनिंग प्रक्रिया के लिए मरीज को पेट के बल लिटा दें।

    गर्दन के नीचे एक तकिया रखें फिर एक या दो तकिए छाती और पेट के नीचे बराबर रखें और दो तकिए पैर के पंजे के नीचे रखें।

    30 मिनट से लेकर 2 घंटे तक इस पोजीशन में लेटे रहने से मरीज को फायदा मिलता है।

    ध्यान रहे हर 30 मिनट से दो घंटे में मरीज के लेटने के पोजिशन को बदलना जरूरी है।

    इसके बाद मरीज को

    नहीं गिरता ऑक्सीजन लेवल

    • इस प्रक्रिया में फेफड़ों में खून का संचार अच्छा होने लगता है।

    • फेफड़ों में मौजूद फ्लूइड इधर-अधर होने लगता है।

    • इससे लंग्स में ऑक्सीजन आसानी से पहुंचती रहती है।

    • ऑक्सीजन का लेवल भी नहीं गिरता है।

    कब न करें प्रोनिंग

    • खाना खाने के तुरंत बाद ही प्रोनिंग की प्रक्रिया न करें।

    • खाना खाने के कम से कम एक घंटे बाद ही इस प्रक्रिया को अपनाएं।

    • अगर आप प्रेग्नेंट हैं, गंभीर कॉर्डिएक कंडीशन है तो भी इसे मत करें।

    • शरीर में स्पाइनल से जुड़ी कोई समस्या है या फ्रैक्चर हो तो इस प्रक्रिया को न अपनाएं।

  • ब्राइड मेकअप के लिए पॉर्लर जा रही हैं, तो ध्यान रखें संक्रमण से बचने के लिए ये बातें

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    लिमिटेड गेस्ट्स के साथ कोरोना महामारी में भी शादियां का दौर जारी है। तरह-तरह के खूबसूरत लिबास और मेकअप में दुल्हनें अपनी तस्वीरें पोस्ट कर रही हैं। तो अगर आपकी शादी का मुहूर्त भी इस बीच है और पॉर्लर में मेकअप की बुकिंग करवा रखी है तो उसे कैंसल कराने की जरूरत नहीं, बस कुछ बातों का खास ध्यान रखना होगा जिससे आप इस खतरनाक संक्रमण से बची रहें। तो आइए जानते हैं इसके बारे में…

    अवॉयड करें इन्हें

    मेकअप स्पंज 

    सिर्फ कोरोना के वक्त ही नहीं, नॉर्मली भी किसी दूसरे का मेकअप स्पंज करने से स्किन इंफेक्श होने का खतरा बना रहता है। तो इसका खासतौर से ध्यान रखें। स्पंज में छोटे-छोटे होल्स होते हैं जिससे इसमें बहुत ही आसानी से यीस्ट और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। जिससे फंगल इन्फेक्शन, मुंहासे और भी कई दूसरी तरह की स्किन से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा बना रहता है।

    मेकअप ब्रश

    स्पंज की तरह ही दूसरों पर इस्तेमाल किया हुआ ब्रश भी इस्तेमाल न करें। फ्रेश ब्रश और स्पंज के लिए अलग से पेमेंट करने की जरूरत पड़े तो कर दें कम से कम संक्रमण का खतरा तो कम रहेगा।

    काजल और मस्कारा

    अच्छी क्वालिटी का मस्कारा और काजल अगर आपके मेकअप किट में है तो उसे ही पॉर्लर जाते वक्त कैरी कर लें क्योंकि  पलकों पर मौजूद बैक्टीरिया मस्कारा ब्रश या काजल में लग जाते हैं। जिससे आंखों की समस्याएं जैसे लालिमा, आंखों में दर्द और कार्निया में सूजन आदि हो सकती है।

    हेयर ब्रश

    ये तो बचपन से ही बताया जाता है कि दूसरों का हेयर ब्रश कभी नहीं इस्तेमाल करना चाहिए। इससे भी स्किन इंफेक्शन होने की संभावना रहती है। तो कोरोना काल में तो इस बात का ध्यान रखना और जरूरी हो जाता है।

    लिपस्टिक 

    बेशक पॉर्लर में आपसे ज्यादा लिपस्टिक का कलेक्शन रहता है लेकिन बेहतर होगा कि लहंगे पर सूट करने वाला शेड आप खुद ही खरीद लें। जिससे आप संक्रमण से बच सकती हैं। क्योंकि पॉर्लर में एक ही लिपस्टिक कई सारी दुल्हनों के मेकअप में इस्तेमाल किया जाता है जो बहुत ही हानिकारक होता है।

  • कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में बेहद मददगार है प्लाज्मा, डोनेट करने से पहले जान लें ये जरूरी बातेें

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    अगर आप कोरोना से ठीक हो चुके हैं तो आपके पास मौका है किसी की जान बचाने का। आपके प्लाज्मा से आईसीयू में भर्ती कोरोना मरीज की जान बचाई जा सकती है। कोरोना की पहली वेव में हजारों लोगों की जान इससे बचाई गई हैं। आइए जानते हैं कि क्या है प्लाज्मा थ्योरी और इसके जरिए कैसे किसी की जान बचा सकते हैं।

    कैसे डोनेट कर सकते हैं प्लाज्मा?

    प्लाज्मा थेरेपी के लिए सबसे पहले दान करने वाले का टेस्ट होगा। टेस्ट के जरिए ये देखा जाएगा कि उनके खून में किसी प्रकार का संक्रमण तो नहीं है। मसलन शुगर, एचआईवी या हेपेटाइटिस तो नहीं है। अगर ब्लड ठीक पाया गया तो उसका प्लाज्मा निकालकर आईसीयू के पेशेंट को दिया जाए तो वो ठीक हो सकता है।

    कैसे काम करता है प्लाज्मा?

    कोरोना पॉजिटिव मरीजो में इलाज के बाद ब्लड में एंटीबॉडीज आ जाती हैं। डॉक्टरों के अनुसार अब उसके ब्लड से प्लाज्मा निकालकर कोरोना पेशेंट को दिया जाए तो वो उसे ठीक होने में हेल्प करेगा। इस तरह ठीक हो गए पेशेंट से बीमार को देकर उसे ठीक कर सकते हैं। ये एंटी बॉडीज मरीज के ब्लड में मिलकर कोरोना से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है।

    ये लोग दान कर सकते हैं प्लाज्मा

    • कोरोना पॉजिटिव हुए हों

    • अब निगेटिव हो गए हों

    • ठीक हुए 14 दिन हो गए हों

    • स्वस्थ महसूस कर रहे हों और प्लाज्मा डोनेट करने के लिए उत्साहित हों

    • उनकी उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच हो

    ऐसे लोग नहीं दे सकते प्लाज्मा

    • जिनका वजन 50 किलोग्राम से कम है

    • महिला जो कभी भी प्रेग्नेंट रही हो या अभी हो

    • डायबिटीज के मरीज जो इंसुलिन ले रहे हों

    • ब्लड प्रेशर 140 से ज्यादा हो

    • ऐसे मरीज जिनको बेकाबू डायबिटीज हो या हाइपरटेंशन हो

    • कैंसर से ठीक हुए व्यक्ति

    • जिन लोगों को गुर्दे/हृदय/फेफड़े या लिवर की पुरानी बीमारी हो।

    ऐसे हुई थी प्लाज्मा थेरेपी की शुरुआत

    नोबल प्राइज विनर जर्मन वैज्ञानिक एमिल वॉन बेरिंग ने प्लाज्मा थेरेपी की शुरुआत की थी। इसके लिए उन्होंने खरगोश में डिप्थीरिया का वायरस डाला, फिर उसमें एंटीबॉडीज डाली गई। इसके बाद वो एंटीबॉडीज बच्चों में डाली गई। इसलिए एमिल को सेवियर ऑफ चिल्ड्रेन कहा जाता है।

  • सिर्फ गालों की चर्बी बढ़ाने के एक्सरसाइज और टिप्स

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    भरे हुए गाल चेहरे का आकर्षण बढ़ाने का काम करते हैं। बहुत ज्यादा वर्कआउट करने से बॉडी तो टोन हो जाती है लेकिन उसके साथ चेहरा भी सूखने लगता है। तो अगर आप बॉडी का फैट बढ़ाए बिना सिर्फ गालों का फैट बढ़ाना चाहती हैं तो इसके लिए हम आपके साथ कुछ ऐसी एक्सरसाइजेस और टिप्स बताएंगे, जो इसमें कारगर साबित हो सकते हैं।

    गुब्बारा फुलाने की एक्सरसाइज

    गालों को उभारने के लिए उसकी एक्सरसाइज करें। गुब्बारा फुलाना लंग्स के साथ ही गालों के लिए भी बहुत ही अच्छी एक्सरसाइज है। गुब्बारे में मुंह से धीरे-धीरे हवा भरें, तकरीबन एक मिनट तक हवा भरते रहें। बहुत तेजी से न करें वहां आप थक जाएंगी। रोजाना 4 से 5 बार इसे करें। जल्द ही आपको इसका रिजल्ट दिखाई देने लगेगा।

    फेशियल एक्सरसाइज

    कई तरह के फेशियल योगा भी इसमें बहुत कारगर साबित हुए हैं। फिश फेस बनाकर मुस्कुराने की कोशिश करें। मुंह को खोलें और बंद करें। जीभ को नाक से टच करने की कोशिश करें। सीलिंग देखते हुए खाना चबाने की एक्टिंग करें। ये सारी ही एक्सरसाइज आपको पांच से छह बार करनी है। ये कोलेजन और इलास्टिन बनाने में मदद करते हैं।

    हेल्दी डाइट का है अहम रोल

    उभरे गालों के लिए हमारी डाइट का भी अहम रोल है। हेल्दी डाइट का सीधा और सबसे जल्द असर हमारे चेहरे पर ही नजर आता है। डाइट में जरूरी प्रोटीन, विटामिन, मिनरल, एंटीऑक्सीडेंट से चीज़ें लें। अंडा, फ्रूट्स, दालें, बींस इसमें बेहद फायदेमंद हैं। नेचुरल तरीके से गालों को उभारने के लिए रोजाना ओट्स, पनीर, दूध, गाजर, सेब, एवोकैडो, बादाम और हेल्दी फैट का सेवन करना चाहिए। इन चीज़ों के दो से तीन हफ्ते के इस्तेमाल के बाद ही रिजल्ट नजर आने लगेगा।

    इसके अलावा हाई इंटेसिंटी इंटरवल (HIIT) एक्सरसाइजेस को भी अपने रूटीन का हिस्सा बनाएं। जिससे बॉडी ही नहीं चेहरे पर भी ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है।

  • वैक्सीन की पहली डोज लेने के बाद हो गया है कोरोना? यहां जानें कब लगाएं दूसरी डोज

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    भारत में 1 मई से 18+ लोग भी कोरोना की वैक्सीन लगवा सकेंगे। जिसका रजिस्ट्रेशन 28 अप्रैल से शुरू हो रहा है। तो आइए जानते हैं वैक्सीन से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां। कितनी असरदार हैं ये वैक्सीन, किसने बनाया है इन्हें, दूसरा डोज कब ले सकेंगे और साथ ही इनसे होने वाले साइड इफेक्ट्स भी।

    कोवैक्सीन

    किसने बनाया- आईसीएमआर- भारत बायोटेक ने मिलकर बनाई। हैदराबाद में बन रही है।

    वैक्सीन टाइप– इनएक्टिवेटेड

    इफेक्टिवनेस कितनी है- 81.3%

    45 प्लस के लिए कीमत- सरकारी अस्पतालों में फ्री, प्राइवेट में 250 रुपए

    18-44 साल उम्र वालों के लिए प्रति डोज कीमत- 24 राज्यों में मुफ्त लगाई जाएगी। राज्यों को कंपनी से यह वैक्सीन 600 रुपए में मिलेगी और प्राइवेट में 1200 रुपए में मिलेगी।

    साइड इफेक्ट्स- इंजेक्शन की जगह पर दर्द, सिरदर्द, थकान, जोड़ों में दर्द, बुखार, कमजोरी, उल्टी।

    कोवीशील्ड

    किसने बनाया- ऑक्सफोर्ड- एस्ट्रोजेनेका ने बनाई। पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में बन रही है।

    वैक्सीन टाइप- नॉन रेप्लिकेटिंग वायरल वेक्टर

    इफेक्टिवनेस कितनी है- 70%

    45 प्लस के लिए कीमत- सरकारी अस्पतालों में फ्री, प्राइवेट में 250 रुपए

    18-44 उम्र वालों के लिए प्रति डोज कीमत- 24 राज्यों में मुफ्त लगाई जाएगी। राज्यों को कंपनी से ये वैक्सीन 400 रुपए में व प्राइवेट में 600 में

    साइड इफेक्ट्स- इंजेक्शन की जगह पर सूजन, सिरदर्द, थकान, जोड़ों में दर्द, बुखार

    एंटी कोरोना दवा विनकोव- 19 को मंजूरी

    कोरोना की लड़ाई में देश आगे बड़ा है। डीसीजीआई ने एक खास दवा के क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी दी है। यह घोड़े की एंटीबॉडी इंजेक्ट करने से कोरोना मरीज को बचाने में कारगर साबित हो सकती है। विनकोव-19 नाम से बनने वाली कोरोना की यह दवा सेल्युलर और आणविक जीव विज्ञान, हैदराबाद यूनिवर्सिटी के सहयोग से जगह की दवा बनाने वाली विन्स बायोटेक बना रही है।

    दूसरा डोज कब लगेगा?

    कोवैक्सीन- पहला डोज लेने के 28 दिन बाद। दूसरा डोज 28 से 42 दिन के बीच ले सकते हैं। इसका असर दूसरे डोज के 14 दिन बाद ही प्रभावी होगा।

    कोवीशील्ड

    पहला डोज लेने के 42 बाद। दूसरा डोज 42 से 56 दिन के बीच ले सकते हैं। इसका असर दूसरे डोज के 14 दिन बाद ही प्रभावी होगा।

  • माइग्रेन के दर्द से राहत द‍िलाएंगे ये योगासन, रोजाना करने से जल्द मिलेगा छुटकारा

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    दिल्ली। आजकल खराब दिनचर्या, अनुचित खानपान और तनाव के चलते माइग्रेन की समस्या सामान्य हो गई है। इस बीमारी में सिर में तेज़ दर्द होता है। यह दर्द कई घंटों तक रहता है। इस स्थिति में पीड़ित को मितली और उल्टी भी हो सकती है। माइग्रेन आभासी और वास्तविक दो प्रकार होते हैं। जबकि माइग्रेन होने के कई कारण हैं। इनमें मानसिक तनाव, नसों में खिंचाव, थकान, कब्ज, नशा, खून की कमी, सर्दी जुकाम प्रमुख हैं। इस बीमारी का इलाज संभव है, लेकिन लापरवाही बरतने पर यह खतरनाक साबित हो सकती है। जबकि योग विशेषज्ञ माइग्रेन को दूर करने के लिए सूर्य नमस्कार, योग मुद्रा, शशांकासन, पवनमुक्तासन, सर्वागासन, हलासन, मत्स्यासन करने की सलाह देते हैं। अगर आप भी माइग्रेन की समस्या से परेशान हैं, तो रोजाना इन योगासन को रोजाना जरूर करें-

    मत्स्यासन करें

    मत्स्यासन दो शब्दों मत्स्य अर्थात मछली और आसन यानी मुद्रा से मिलकर बना है। आसान शब्दों में कहें तो मछली की मुद्रा में रहना मत्स्यासन कहलाता है। इस योग को करने से माइग्रेन में आराम मिलता है।

    इसके लिए समतल जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। इसके बाद अपने दोनों पैरों को बैठने की मुद्रा में समेटकर अपनी जांघों पर रखे लें। अब धीरे-धीरे अपने धड़ को ऊपर की ओर उठाएं। इस मुद्रा में कुछ पल के लिए रुकें। इसके बाद पहली अवस्था में आ जाएं।

    सेतु बंधासन करें

    इस योग को करने से रक्त चाप नियंत्रित रहता है। जबकि माइग्रेन में भी आराम मिलता है। साथ ही तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है। इससे रक्त प्रवाह मस्तिष्क में सही से होने लगता है, जिससे माइग्रेन की समस्या दूर होती है।

    इसके लिए समतल ज़मीन पर दरी बिछा लें। अब उस पर पीठ के बल लेट जाएं। इसके बाद धीरे-धीरे अपने पैरों को ज़मीन पर टीकाकर कमर को ऊपर उठाएं और हाथों को ज़मीन पर टिका दें। ध्यान रहें कि इस मुद्रा में आपका आधा धड़ ज़मीन पर रहें। इस योग को रोजाना करें।

    बालासन करें

    इस योग को करने से संपूर्ण शरीर में रक्त का संचार होता है। मस्तिष्क में भी रक्त संचरण सही से होने लगता है, जिससे माइग्रेन में आराम मिलता है।

    इसके लिए सबसे पहले किसी स्वच्छ वातावरण में दरी अथवा चटाई बिछा लें। अब सूर्य की ओर मुखकर अपने पैरों को मोड़कर वज्रासन मुद्रा में बैठ जाएं। इसके बाद सांस लेते वक्त अपने दोनों हाथों को ऊपर ले जाएं। जबकि सांस छोड़ते समय आगे की तरफ झुकें। यह क्रम तब तक जारी रखें। जब तक आपकी हथेलियां ज़मीन को न छू जाएं। इसके बाद अपने सिर को ज़मीन पर टिका दें। इस मुद्रा में आने के बाद शरीर को अनवरत छोड़ दें और आराम महसूस करें। सांस लें और सांस छोड़ें। हालांकि, सांस आराम से लें। इसमें कोई जल्दबाजी न करें।

    डिस्क्लेमर: स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • 18+ आबादी के टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन आज से, यहां जानें पूरा प्रोसेस और अन्य डिटेल्स

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    देश में आगामी एक मई से 18 साल से ज्यादा एज ग्रूप के लोगों का वैक्सीनेशन शुरू हो जाएगा। इसके लिए रजिस्ट्रेशन 28 अप्रैल से शुरू हो रहा है। इस नई व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने नई पॉलिसी बनाई है। पात्र सभी भारतीय नागरिक वैक्सीन लगवाने के लिए को-विन एप (Cowin APP) cowin.gov.in या फिर आरोग्य सेतु एप (Aarogya Setu App) पर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं पूरा प्रॉसेस की आप कैसे वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

    को-विन पोर्टल के जरिए ऐसे करें रजिस्ट्रेशन

    • को-विन वेबसाइट पर रजिस्टर या साइन-इन पर क्लिक करें।

    • अपना मोबाइल नंबर डालें और फिर गेट ओटीपी पर क्लिक करें। ओटीपी डालकर वैरीफाई पर क्लिक करें।

    • इसके बाद ‘रजिस्टर फॉर वैक्सीनेशन’ पेज में अपने फोटो आईडी प्रूफ के साथ अपनी जानकारी दर्ज करें।

    • रजिस्ट्रेशन करने के बाद आपको अपॉइंटमेंट शेड्यूल करने का ऑप्शन मिलेगा। शेड्यूल बटन पर क्लिक करें।

    • अपना पिन कोड दर्ज करें और फिर सर्च पर क्लिक करें। इसके बाद उस पिन कोड के साथ जोड़े गए सेंटर आपको दिखाई देने लगेंगे।

    • आप डेट और टाइम सिलेक्ट कर के कंफर्म पर क्लिक कर दें।

    नोटः एक यूजर एक लॉगिन से चार मेंबर्स को वैक्सीनेशन के लिए रजिस्टर कर सकता है और आसानी से अपॉइंटमेंट को रिशेड्यूल भी कर सकता है।

    आरोग्य सेतु एप से भी रजिस्ट्रेशन

    • सबसे पहले आरोग्य सेतु ऐप को ओपन करें और फिर होम स्क्रीन पर दिए गए कोविन टैब पर क्लिक करें।

    • वैक्सीनेशन रजिस्ट्रेशन को सिलेक्ट करें और फिर अपना फोन नंबर एंटर करें। आपको एक ओटीपी प्राप्त होगा और उससे खुद को वैरिफाई कर सकते हैं।

    • ‘रजिस्टर फॉर वैक्सीनेशन’ खुलेगा, जहां अपनी सभी जानकारी देने के बाद आप ‘रजिस्टर’ पर क्लिक करें।

    • रजिस्टर करने के बाद आपको अपॉइंटमेंट को शेड्यूल करने का ऑप्शन मिलेगा। नाम के बगल में दिए ‘रजिस्टर’ बटन पर क्लिक करें।

    • अपना पिन कोड डालें और सर्च पर क्लिक करें। ऐसा करने के बाद आपको सेंटर्स दिखाई देंगे।

    • आप डेट-टाइम को सिलेक्ट कर के कंफर्म पर क्लिक करें। ऐसा करने के बाद आपका अपॉइंटमेंट बुक हो जाएगा।

  • बालों का वॉल्यूम बढ़ाने में मददगार हैं ये आसान घरेलू तरीके, सिर्फ 2 बार में दिखता है असर

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    खूबसूरत चेहरे और घने बालों के लिए हर बार इंटरनेट पर जाकर घंटों समय बिताकर भी समझ नहीं आता कि कौन सा टिप्स पहले ट्राय करें और क्या नहीं करना चाहिए। तो आज हम आपके साथ कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे शेयर करेंगे जो हैं सिर से लेकर पैर के नाखूनों तक के लिए फायदेमंद।

    असरदार ब्यूटी टिप्स

    1. नहाते समय पानी में आधा नींबू निचोड़ कर नहाएं। ऐसा 7,8 दिन तक लगातार करें और फिर देखें आपकी त्वचा चिकनी और खूबसूरत दिखने लगेगी।

    2. हफ्ते में दो बार गर्म पानी में एलोवेरा जेल डालकर चेहरे पर भाप लेने से स्किन हेल्दी और ग्लोइंग होती है और चेहरे के दाग-धब्बे भी दूर हो जाते हैं।

    3. गुनगुने तेल से सिर की मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे बालों को पोषण मिलने के साथ सिर से जुड़ी परेशानियों से राहत मिलती है। दिनभर की थकान दूर होने के साथ दिमाग भी शांत रहता है।

    4. खीरे के टुकड़ों को अपनी आंखों पर रखें। थोड़ी देर बाद डार्क जगह पर हल्का-हल्का घुमाएं। इससे आंखों के आसपास का कालापन दूर हो जाता है।

    5. मूली या इसके पत्तों का रस स्कैल्प पर लगाएं और फिर मिनट बाद बाल धो लें। इससे बालों की जड़ों को पोषण मिलता है और वो मजबूत होते हैं। रोजाना ऐसा करने से बाल झड़ना भी बंद हो जाएगा।

    6. कच्चे चावल को अच्छे से पीसकर तरबूज के रस में मिलाकर एक मास्क तैयार करें। इसे चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट बाद सादे पाने से चेहरे को धो लें। यह बहुत ही कारगर नुस्खा है ब्लेमिश फ्री स्किन पाने का।

    7. अगर चेहरे पर मुंहासे हैं, तो बिना देर किए चेहरे को भाप दीजिए। इससे रोमछिद्रों में जमी गंदगी और सीबम आसानी से निकल पाएगा और आपकी त्वचा साफ हो पाएगी।

    8. एक या दो बूंद अरंडी का तेल और जैतून के तेल को मिक्स करें। अब इसे अपनी पलकों पर सोने से पहले लगाएं। सुबह चेहरे को धो लें। इसे रोजाना रात को दोहराएं। ये उपाय आपकी पलकों को बढा़ने में मदद करेगा।

    9. टमाटर और दही में कुछ बूंदे नींबू के रस की मिलाकर पेस्ट बनाएं। यह एक नेचुरल ब्लीच की तरह काम करता है जो कि आपके स्किन को और ज्यादा सुंदर और चमकदार बनाता है।

    10. थोड़ा सा नींबू का रस लेकर नाखूनों पर लगाएं और 10 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर थोड़ा सा पेस्ट लगाकर नाखूनों पर रगड़ें। ऐसा करने से आपके नाखून एकदम साफ हो जाएंगे।

  • बॉडी में क्या है ऑक्सीजन लेवल का रोल, कैसे करें इसे मेंटेन

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    बिना ऑक्सीजन मानव जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। कोरोना संक्रमण के गंभीर लक्षणों में से एक है बॉडी का ऑक्सीजन लेवल कम होना। तो हाल-फिलहाल की स्थिति को देखते हुए हर वो उपाय करें जिससे बॉडी में ऑक्सीजन का सही लेवल मेनटेन रहे।

    कितना होना चाहिए ऑक्सीजन लेवल

    वैसे तो ब्लड में 95 से 100 फीसदी के बीच का ऑक्सीजन लेवल नॉर्मल माना जाता है। 95 फीसदी से कम ऑक्सीजन लेवल किसी परेशानी की ओर इशारा करता है। लेकिन अगर पल्स ऑक्सीमीटर में ऑक्सीजन का लेवल 93 या 90 से नीचे दिखा रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

    दरअसल बॉडी में ऑक्सीजन की कमी से इम्यून सिस्टम पर असर पड़ता है वो कमजोर होते जाता है जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। तो आज हम कुछ ऐसे कारगर उपायों के बारे में बात करेंगे जो हैं बॉडी में ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने में मददगार।

    आयरन से भरपूर चीज़ें खाएं

    हेल्दी और अनहेल्दी डाइट का बहुत ज्यादा और जल्द असर हमारी बॉडी पर दिखता है। इसलिए सेहतमंद बने रहने के लिए हमेशा खानपान सुधारने की सलाह दी जाती है। तो ब्लड में ऑक्सीजन का लेवल बढ़ाने और उसे मेनटेन किए रहने के लिए आयरन रिच फूड्स को अपनी डाइट में शामिल करें। हरी पत्तेदार सब्जियां खासतौर से पालक, बीन्स, दालें, मीट, अंडा, मछली जैसी चीजें। ये शरीर में आयरन की कमी को पूरा करते हैं, जिससे ब्लड में ऑक्सीजन का लेवल सुधरता है।

    नियमित रूप से करें एक्सरसाइज

    एक्सरसाइज हमेशा से ही सेहत के लिए जरूरी माना गया है लेकिन लोगों को कोरोना महामारी में खासतौर से इसकी अहमियत समझ आई। तो अगर आप ब्लड में ऑक्सीजन लेवल बढ़ना चाहते है तो रोजाना 25-30 मिनट जरूर निकालें एक्सरसाइज के लिए। एक्सरसाइज करने से श्वसन क्षमता बेहतर होती है क्योंकि उस दौरान आप तेज गति से सांंस लेते और छोड़ते हैं। जिसके फेफड़े ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन ले पाते हैं।

    इंडोर प्लांट्स लगाएं 

    इंडोर प्लांट्स का काम सिर्फ घर को खूबसूरत बनाना ही नहीं होता बल्कि ये पौधे कार्बन डाइऑक्साइड लेकर हमें  ऑक्सीजन देने का काम करते हैं। तो अपने घर में स्पाइडर, स्नैक प्लांट, ऐलोवेरा, मनी प्लांट, गेरबेरा डेज़ी जैसे पौधे को जरूर जगह दें।

    लिक्विड्स का लें सहारा

    बॉडी में ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिक्विड की क्वांटिटी बढ़ाएं खासतौर से पानी का। पानी का रासायनिक सूत्र H2O होता है, जिसमें हाइड्रोजन के दो और ऑक्सीजन का एक परमाणु होता हैं। इसलिए तो जब आप लिक्विड्स का सेवन करते है तो आप हाइड्रेटेड रहते हैं और अपने बॉडी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ा सकते हैं।

  • प्लाज्मा की आपूर्ति

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    दोबारा संक्रमण न हो जाए या परिवार में किसी को अचानक प्लाज्मा की जरूरत न पड़ जाए, इस डर से डोनर आगे नहीं आ रहे हैं। इस सोच के चलते ठीक हुए मरीज प्लाज्मा देने से बच रहे हैँ। वहीं अस्पतालों के पास भी प्लाज्मा नहीं हैं।

    हालात यह हैं कि किसी मरीज को प्लाज्मा की जरूरत पड़ती है तो उसके तीमारदार डोनर और ठीक हुए मरीजों की लंबी लिस्ट खंगालते हैं। डोनर नहीं मिलता। जो मिलता है, वह शहर का नहीं होता। वो दूसरे शहर में जाने को राजी नहीं होता। किसी की उम्र कम होती है तो कोई अन्य बीमारियों से ग्रसित मिलता है। सही समय पर सही समूह का प्लाज्मा दस में से दो या तीन मरीजों को ही मिल पा रहा है।
    प्लाज्मा देने के लिए केंद्र सरकार ने कुछ नियम तय किए हैं। इन नियमों का पालन करने वाले व्यक्ति ही प्लाज्मा दान कर सकते हैं।
    – जो लोग कोरोना संक्रमण से उबर चुके हैं, वे ठीक होने के 28 से 30 दिन के भीतर अपना प्लाज्मा दान कर सकते हैं।
    – प्लाज्मा दान करने वाले व्यक्ति की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आरटीपीसीआर टेस्ट से होनी चाहिए। उसकी मूल कॉपी और आधार कार्ड की कॉपी भी अस्पताल में साथ लेकर जानी होगी
    – जिस व्यक्ति की उम्र 18 से अधिक और 60 साल तक की है, ऐसे लोग प्लाज्मा दे सकते हैं
    – 50 किग्रा वजन है तो शारीरिक रूप से स्वस्थ इंसान भी प्लाज्मा दे सकता है
    – अगर बुखार, खांसी, सर्दी, जुकाम के लक्षण हैं तो वह प्लाज्मा दे सकते हैं। ऐसे लोगों में एसिम्प्टोमेट्रिक रोगी की तुलना में एंटीबॉडी रखने की अधिक क्षमता होती है।