Category: health

  • आपकी याददाश्त को काफी हद तक घटाने का काम करते हैं खर्राटे, एक रिसर्च के अनुसार

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    अगर आपके परिवार में किसी को खर्राटे की समस्या हो तो इसे हल्के में न लें क्योंकि इससे व्यक्ति की स्मरण-शक्ति कमजोर हो सकती है। ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया यानी खर्राटे की समस्या के बारे में हाल ही में कनाडा स्थित टोरंटो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक व्यक्ति के मस्तिष्क से इस समस्या का गहरा संबंध है और इसकी वजह से सोचने की क्षमता और याददाश्त भी प्रभावित होती है। ऐसी समस्या होने पर नींद में व्यक्ति की सांस लेने की प्रक्रिया में थोड़ी खलल पैदा होती है, जिससे खर्राटे की आवाज सुनाई देती है।

    प्रमुख शोधकर्ता मार्क बुलोस के मुताबिक, मस्तिष्क के लिए अच्छी नींद फायदेमंद होती है और इससे याददाश्त मजबूत होती है। हमने अपने अध्ययन में यह पाया कि भूलने की समस्या से जूझ रहे आधे से अधिक लोग ऑब्स्ट्रेक्टिव स्लीप एप्निया से पीड़ित थे। जिन्हें खर्राटे लेने की समस्या थी, याददाश्त संबंधी टेस्ट में उन्हें सबसे कम अंक मिले थे। इन प्रतिभागियों से नींद और मूड पर आधारित एक प्रश्नावली भरवाई गई थी। शोधकर्ताओं ने अध्ययन में शामिल किए गए इन प्रतिभागियों में से 52 प्रतिशत लोगों को ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया से पीड़ित पाया। अतः ऐसी समस्या हो तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लें।सोते समय खर्राटों की वजह से सांस लेने में प्रॉब्लम होती है। कई बार तो ऐसी स्थिति हो जाती है कि व्यक्ति बेचैनी और घुटन की वजह से घबराकर उठ जाता है। और ये समस्या ऑक्सीजन की कमी के कारण होती है। आपने खुद भी महसूस किया होगा कि सही नींद न होने पर मूड तो खराब होता ही है साथ ही किसी काम में मन भी नहीं लगता।

    डॉक्टर की राय

    यह शोध बिल्कुल सही है, खर्राटा लेने वाले लोगों की नींद बाधित होती है। स्मृतियों को सुरक्षित रखने के लिए गहरी नींद जरूरी है, लेकिन ऐसी समस्या से पीड़ित लोगों को अच्छी नींद नहीं मिलती, जिससे उनकी स्मरण शक्ति घटने लगती है।

    (डॉ. रजनीश कुमार, न्यूरोलॉजिस्ट, पारस हॉस्पिटल, गुरुग्राम से बातचीत पर आधारित)

  • जानें तारीखें, अप्रैल माह में इस दिन से शुरू होंगी शादियां

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    जल्द ही शादियों की शहनाईयां बजनी शुरू होने वाली हैं। अप्रैल माह से शादियों के शुभ मुहूर्त शुरू होने जा रहे हैं। ज्योतिषों के अनुसार, 19 जनवरी को गुरु और शुक्र अस्त हो गए थे। अब शुक्र 18 अप्रैल से उदय हो रहे हैं जिसके चलते 22 अप्रैल से शादी के मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। वहीं, गुरु का भी उदय 18 अप्रैल को ही हो रहा है। ऐसा माना जाता है कि अगर गुरु और शुक्र के अस्त हैं तो इस दौरान शादियां नहीं की जाती हैं। लेकिन अब 18 अप्रैल से एक बार फिर से गुरु और शुक्र उदय होने जा रहे हैं तो अप्रैल के तीसरे हफ्ते से एक बार फिर से शादी की शहनाईयां बजनी शुरू हो जाएंगी। आइए जानते हैं अप्रैल में कब से कब तक चलेंगी शादियां।

    जानें अप्रैल में कब से कब तक चलेंगी शादियां:

    अप्रैल माह में 22 तारीख से शादियां शुरू हो जाएंगी। यह 15 जुलाई तक चलेंगी। 15 जुलाई के बाद विष्णु जी शयन में चले जाएंगे। इसके बाद देवउठनी एकादशी से एक बार फिर से शादियां शुरू हो जाएंगी। ज्योतिषों के अनुसार, 22 अप्रैल से 15 जुलाई के बीच में 37 शादियों के मुहूर्त हैं।

    अप्रैल से दिसंबर तक के शादी के शुभ मुहूर्त:

    अप्रैल- 22, 24, 25, 26, 27, 28, 29, 30

    मई- 1, 2, 7, 8, 9, 13, 14, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 28, 29, 30

    जून- 3, 4, 5, 16, 20, 22, 23, 24

    जुलाई- 1, 2, 7, 13, 15

    नवंबर- 15, 16, 20, 21, 28, 29, 30

    दिसंबर- 1, 2, 6, 7, 11, 13

    डिसक्लेमर

    ‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी। ‘ 

  • जानिए 7 फायदे, गर्मी में इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ ही बॉडी को कूल भी रखती है दही की लस्सी

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    नई दिल्ली। गर्मी में हमारा डाइट पैटर्न पूरी तरह बदल जाता है, हम खाने से ज्यादा पीने पर ज़ोर देते हैं। प्यास इतनी ज्यादा लगती है कि हम ज्यादा से ज्यादा ठंडे जूस और लस्सी पीना पसंद करते हैं। आप जानते हैं कि गर्मी में दही की लस्सी सेहत के लिए बेहद उपयोगी है। गर्मी में दही पोषक तत्वों का ख़ज़ाना है, इसमें विटामिन, कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, मैग्नीशियन, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल आदि गुण मौजूद रहते हैं जो हमारी मांसपेशियों व हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी हैं। गर्मी में दही की लस्सी ना सिर्फ आपको हाइड्रेट रखती है बल्कि कई बीमारियों का उपचार भी करती है। आइए जानते हैं गर्मी में दही की लस्सी पीने के कौन-कौन से फायदे हैं।

    ब्लड प्रेशर कंट्रोल करती है:

    लस्सी में मैग्नीशियम, पोटैशियम, प्रोटीन, एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल होने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है। गर्मी में ब्लड प्रेशर के मरीज इसे अपनी डाइट में शामिल करें।

    इम्यूनिटी इंप्रूव करती है:

    दही में प्रोबायोटिक, गुड़ बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं जो हमारा इम्यून सिस्टम दुरुस्त रखते हैं। गर्मी में हम कई बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं ऐसे में दही की लस्सी हमें बीमारियों से लड़ने की ताकत देती है।

    वज़न कंट्रोल करती है:

    कम कैलोरी व फैट की लस्सी का एक गिलास रोजाना पीने से वजन कंट्रोल किया जा सकता है। इसे पीकर आप दिनभर एनर्जेटिक महसूस करते हैं।

    गर्मियों में ज्यादा मसालेदार, ऑयली फूड खाने से पाचन तंत्र बिगड़ने लगता है, ऐसे में ठंडी लस्सी आपके पाचन को दुरुस्त करती है। इसके सेवन से पेट को ठंडक मिलती है और पेट में जलन, अपच, एसिडिटी से भी छुटकारा मिलता है।

    कब्ज से निजात दिलाती है लस्सी:

    डायरिया और कब्ज की समस्या से राहत दिलाती है लस्सी। दही में गुड बैक्टीरिया पाए जाते हैं जिसके सेवन से कब्ज से निजात मिलती है।

    बॉडी को ठंडा रखती है:

    लस्सी गर्मी में बॉडी के तापमान को ठीक रखती है। इसमें पानी व लैक्टिक एसिड अधिक होने से शरीर का तापमान सही रहता है।

    प्रेग्नेंसी में भी है उपयोगी:

    प्रेग्नेंसी के दौरान लस्सी इम्यूनिटी बूस्ट करती है। पोषक व एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर लस्सी शरीर को हाइड्रेट रखती है। ये मांसपेशियों व हड्डियों को मजबूत करने के साथ पाचन तंत्र दुरुस्त रखती है। लस्सी मां और बच्चे दोनों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

  • जानिए – कैसे करें पहचान, कोविड-19 के नए स्ट्रेन के लक्षण पुराने कोरोना वायरस से हैं अलग

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    नई दिल्ली।  साल 2020 ने हमें कई नए शब्दों के बारे में सिखाया और कई ऐसे शब्दों से दोबारा पहचान करवाई, जिनका इस्तेमाल हमें रोज़ करना पड़ेगा, ये हमने कभी नहीं सोचा था। इनमें क्वारेंटीन, महामारी, शारीरिक दूरी, आइसोलेशन आदि जैसे शब्द शामिल हैं। वहीं, साल 2021 ने हमारे सामने इस वायरस के नए रूप, मयूटेंट्स और स्ट्रैन्स रख दिए हैं।

    भारत में भी कोरोना वायरस के नए रूप के मामले ते़ज़ी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में हमारे लिए ये समझना बेहद ज़रूरी हो गया है कि पुराने कोविड-19 संक्रमण से नए वायरस के लक्षण कैसे अलग हैं। हमने ये सुना है कि यूके का वैरिएंट या केंट वैरिएंट- B.1.1.7- बाकी वैरिएंट के मुकाबले ज़्यादा आसानी और ते़ज़ी से फैलता है। अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को बे एरिया में भी डबल म्यूटेंट स्ट्रेन पाया गया है, ये वही है जिसका कहर इस वक्त भारत में भी देखा जा रहा है।

    कोविड-19 के लिए नेशनल टास्क फोर्स के अनुसार, SARS-CoV2 वायरस के 7,000 वेरिएंट हैं में 24,000 से अधिक म्यूटेशन हैं। ये सभी वेरिएंट या म्यूटेशन संक्रमित नहीं करते या संक्रमण को नहीं फैलाते, लेकिन किस स्ट्रेन का क्या लक्षण है, ये अब भी साफ नहीं हुआ है।

    हालांकि, कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन में, लोगों में नए लक्षण देखे जा सकते हैं। आमतौर पर कोविड-19 के रोगियों में ये लक्षण दिखते हैं:

    • मांसपेशियों में दर्द

    • सूखी और लगातार खांसी होना

    • स्वाद और सुगंध का महसूस न होना

    लेकिन कई मरीज़ इन लक्षणों को महसूस नहीं भी कर सकते हैं, और उनमें इस तरह के अन्य लक्षण भी देखे जा सकते हैं:

    • कनजंक्टीवाइटिस

    • गला ख़राब होना

    • सिर दर्द

    • चकत्ते

    • पेट में दर्द

    • हाथों और पैरों की उंगलियों के रंग का बदल जाना

    बच्चों में इन लक्षणों का होना संभावित मल्टीसिस्टम इंफ्लामेंट्री सिंड्रोम (MIS-C) का संकेत हो सकता है, जो एक घातक कोविड का परिणाम हो सकता है। सबसे अच्छी सलाह यही है कि अगर आप इनमें से कोई लक्षण देखते हैं, तो मरीज़ और परिवार की सेहत के लिए बेहतर यही है कि मरीज़ को आइसोलेट कर दिया जाए। इसके बाद डॉक्टर से संपर्क करें और टेस्ट के लिए अपॉइंमेंट लें। इस वक्त लक्षणों की जल्दी पहचान करने और फौरन एक्शन ले लेने से जान बचाई जा सकती है।

    Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

  • पूर्ण होंगी मनोकामनाएं, आज शुक्र प्रदोष को इस विधि से करें भगवान शिव की पूजा

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    आज चैत्र मास का शुक्र प्रदोष व्रत है। प्रदोष के दिन व्रत रखा जाता है और प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि विधान से पूजा की जाती है। एक मास में दो प्रदोष व्रत आते हैं, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में। आज का प्रदोष व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष का है। जागरण अध्यात्म में आज हम आपको बता रहे हैं कि भगवान शिव की पूजा कैसे करें और पूजा का मुहूर्त क्या है।

    शुक्र प्रदोष पूजा मुहूर्त

    आज आपको भगवान शिव की पूजा करने के लिए प्रदोष काल में 02 घंटे 16 मिनट का समय मिलेगा। आज आप शाम को 06 बजकर 43 मिनट से रात 08 बजकर 59 मिनट के मध्य कभी भी भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ आज प्रात: 03 बजकर 15 मिनट से हुआ है। इसका समापन 10 अप्रैल को प्रात: 04 बजकर 27 मिनट पर होगा।

    प्रदोष व्रत की पूजा सामग्री

    प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा करने के लिए आवश्यक सामग्री में 5 प्रकार के मौसमी फल, दही, घी, गुड़, शक्कर, गन्ने का रस, गाय का दूध, शहद, चंदन, बेलपत्र, अक्षत, गुलाल, अबीर, धतूरा, भांग, मदार, जनेऊ, कलावा, कपूर, अगरबत्ती, दीपक आदि होते हैं।

    प्रदोष व्रत की पूजा विधि

    जो लोग आज शुक्र प्रदोष का व्रत हैं या जिनको प्रदोष व्रत की पूजा करनी है, वे प्रदोष काल के शुभ मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा करेंगे। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पहले के समय को कहा जाता है। सबसे पहले शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें या फिर घर पर ही शिवलिंग का जलाभिषेक करें। इसके बाद भगवान ​शिव को चंदन तिलक लगाएं। उनको अक्षत्, बेलपत्र, भांग, धतूरा, मदार, फल, पुष्प, शहद समेत सभी सामग्री अर्पित कर दें। अर्पण के समय ओम नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करते रहें। अब शिव चालीसा का पाठ करें। उसके बाद घी के दीपक या कपूर से शिव जी की आरती करें। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित कर दें। पूजा के समय आप शिव जी के मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं।

    शिव जी की आरती के बाद प्रदोष व्रत की पूजा सम्पन्न हो जाती है। बाद में आप भी पारण करके व्रत को पूरा कर लें। शिव जी की कृपा से सभी कष्ट मिट जाते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

  • ऐसे रखे अपने पार्टनर का ख्याल, रिश्ते को और मजबूत बनाने के लिए रहेगा सही

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    अगर आप जिससे प्यार करते है और उसे कभी नहीं खोना चाहते है तो सबसे पहले आप अपने पार्टनर का विश्वास जीते। दोनों ही लोग एक दूसरे के प्रति अपना बेस्ट देने की कोशिश करते हैं ताकि उनके जीवन की एक अच्छी शुरुवात हो। एक शोध में माना गया है कि फ्लर्ट करने वाले व्यक्ति सफल होते है।

    बढ़ता है आत्मविश्वास

    फ्लर्ट करने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास आता है और उसे खुद में अच्छा लगता है। फ्लर्ट करने से दो लोगों के बीच अच्छी तरह टाइम पास होता है और उन्हे किसी और की कम्पनी की जरूरत नहीं पड़ती है।

    प्यार भरी छेड़छाड़ हो
    दिन भर के बाद घर में आकर अपने पार्टनर के साथ थोड़ी मस्ती और फ्लर्ट करने से सारे दिन की थकान उतर जाती है। इससे आपके पार्टनर को अच्छा लगता है साथ ही रिश्तों में प्यार भरी छेड़छाड़ अच्छी लगती है।

    शुरूआती दिनों की आती है याद

    वाइफ या हसबैंड के साथ फ्लर्ट करने से आपको अपने प्यार के शुरूआती दिनों की याद आने लगती है जब आप कपल के तौर पर साथ में जुड़े और आप दोनों के बीच प्यारा रिश्ता बना। फ्लर्ट करने से पार्टनर की सेक्स लाइफ पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    भावुक पल में लाए खिलखिलाहट

    जब रिश्तों में ज्यादा भावुक पल आएं और हल्की बातचीत की जरूरत हो, ऐसे में भी फ्लर्ट करने वाला अंदाज माहौल में खिलखिलाहट पैदा कर सकता है। जोड़े के बीच ऐसी स्थिति आने पर फ्लर्ट बहुत काम में आता है।

  • पालक की हरी पत्त‍ियों में छिपा है रूप का खजाना

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    हरी सब्जियों में शामिल पालक बॉडी के लिए कई सारे जरूरी न्यूट्रिशन से भरपूर होता है। सब्जी के अलावा दाल, सूप, साग जैसे अलग-अलग रूपों में इसे खाया जाता है। लेकिन रेसिपी कोई भी हो अगर इसके हेल्दी न्यूट्रिशन को बरकरार रखना चाहते हैं तो बेहद जरूरी है इसे सही तरीके से पकाना। तो जरा जान लें पकाने की कौन सी विधि से सबसे बेस्ट।

    जानें पकाने का सही तरीका

    1. स्टीमिंग का सही तरीका: पानी उबालें अच्छी तरह फिर इनमें नमक डालें। पालक को काटने के बाद धोकर इसमें डालें और ढककर एक मिनट तक पकाएं। इसका गहरा हरा रंग बना रहे इसके लिए पालक को छानकर तुरंत बर्फ के पानी में डाल लें और लगभग 40 सेकंड से 1 मिनट तक रहने दें। इसे पीसकर आप पालक राइस, पालक-पनीर जैसी जायकेदार डिशेज बना सकते हैं।

    2. सॉते का सही तरीका: सबसे पहले पैन में ऑलिव ऑयल डालें। फिर बारीक कटा लहसुन डालें। इसके बाद पालक डालें। चम्मच से 30 सेकंड तक चलाएं। ढककर या खुला रखकर लगभग एक मिनट तक पकाएं। इस तरह से पालक को आप सैलेड में इस्तेमाल कर सकते हैं।

    3. ग्रिलिंग का सही तरीका: ग्रिल पैन को हलका गर्म करें। अब इसमें पालक को एक मिनट तक ग्रिल करें। इसमें ऑलिव ऑयल डालें। नमक से सीजनिंग करें। दूसरी सब्जियों या सैलेड में डालकर मिलाएं।

    4. स्टर-फ्राई का सही तरीका: पैन में पालक और ऑलिव ऑयल डालें। इसे सोया या चिकेन नगेट्स के साथ चुटकी भर रेड चिली फ्लेक्स और नमक डालकर खाएं। इससे 1 मिनट में दूसरी सब्जी तैयार हो जाएगी। इस तरह से पालक को आप सूप, नूडल, सैलेड और ऑमलेट के साथ खा सकते हैं।

    5. माइक्रोवेव का सही तरीका: एक बडे बोल में पालक और थोडा-सा ऑलिव ऑयल डालकर माइक्रोवेव सेफ लिड या प्लेट में प्लास्टिक रैप से कवर कर 1-2 मिनट तक रखें। पास्ता या सूप के साथ सर्व करें।

    न्यूट्रिशनल वैल्यू

    कैलरीज : 421

    प्रोटीन: 34.1 ग्राम

    फैट : 25.8 ग्राम

  • बढ़ती गर्मी में आप भी हो सकते हैं फूड पॉइज़निंग का शिकार, बचाव के लिए रखें इन बातों का ध्यान

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    गर्मियों में सुबह का बना खाना अगर फ्रिज में नहीं रखा तो शाम तक वो खाने लायक नहीं रह जाता। गर्म करने के बाद भी इन्हें खाना पॉसिबल नहीं होता। फिर भी लोग लापरवाही और बचा हुआ खाना बर्बाद न हो इस वजह से ऐसा खाना खा लेते हैं और उसके बाद उल्टी, दस्त, बुखार से परेशान हो जाते हैं। तो आपको बता दें ये फूड प्वॉइजनिंग की वजह से होता है। फूड प्वॉइजनिंग के बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं। इसलिए मौसम को देखते हुए खान-पान की आदतें बदलें। फूड प्वॉइजनिंग को गैस्ट्रोएंट्राइटिस के नाम से भी जाना जाता है।

    फूड प्वॉइजनिंग की वजहें

    फूड प्वॉइजनिंग कई वजहों से हो सकती है। आमतौर पर यह बैक्टीरिया या वायरस के कारण होती है।

    • बासी, अधपका खाना खाने से,

    • गंदे बर्तनों में पकाए गए खाने से,

    • फ्रिज में रखा खाना गर्म किए बिना खाने से।

    • दूध, पनीर, दही जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स को फ्रिज में न रखने से।

    चीज़ें जो फैलाती हैं फूड प्वॉइजनिंग 

    पानी

    किसी भी चीज़ में बैक्टीरिया को पनपने के लिए पानी की जरूरत होती है। इसलिए गीली चीज़ों में प्वॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।

    टाइम

    गर्मियों में रात के बने हुए खाने को अगर आपने फ्रिज में नहीं रखा तो इसे सुबह खाना अवॉयड करें। सात घंटे में फूड प्वॉइजनिंग के एक बैक्टीरिया से 20 लाख बैक्टीरिया बन सकते हैं।

    न्यूट्रिशन वाले फूड्स

    अंडा, मीट, दूध, पनीर जैसी ज्यादा न्यूट्रिशन वाली चीज़ों में बैक्टीरिया भी ज्यादा तेजी से फैलते हैं।

    फूड प्वॉइजनिंग से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

    • सब्जियों और फल को अच्छी तरह से धोने के बाद ही खाएं।

    • खाना बनाने और खाने से पहले हाथ जरूर धोएं।

    • मीट और सब्जियों को काटने के लिए अलग-अलग चॉपिंग बोर्ड रखें।

    • काटने के बाद हमेशा इसे धोकर ही रखें।

    • रोटी बनाने के बाद चकला-बेलन को अच्छी तरह धोकर रखें।

    • बाहर से खाना ऑर्डर करने पर मिलने वाले एक्स्ट्रा प्याज और चटनी को खाने से बचें।

  • आइए ‘विश्‍व पृथ्वी दिवस’ पर धरती को हरा-भरा बनाने का लें संकल्‍प

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    धरती की हिफाजत करने, एनर्जी कंजर्वेशन, बिजली-पानी और आबोहवा की सुरक्षा करने के लिए आमतौर पर सोचा जाता है कि इसमें हम क्या ही योगदान दे सकते हैं ये तो सरकार का काम है लेकिन अगर अवेयर हैं तो एक मिनट का समय देकर छोटी-छोटी आदतों के जरिए भी धरती को सुरक्षित कर सकते हैं।

    1. लंबे वक्त तक बाल्टी भर कर नहाने के बजाय छोटे शावर से काम चलाएं। इससे पानी की बचत के साथ ही बिजली का बिल भी कम आएगा।

    2. घर में एयरकंडीशनिंग या हीटिंग के वक्त कोशिश करें कि जहां आप कूलिंग करना चाहते हैं वहां दरवाजे व फ्रिंजेस से हवा स्केप न हो। ऐसा करने से बिजली की बचत होती है।

    3. फ्रिज के दरवाजे को बंद रखें। केवल एक बार खोलने से ही उसके अंदर के एक क्वॉर्टर से ज्यादा ठंडी हवा बाहर चली जाती है। साथ ही, कहीं शहर से बाहर जा रहे हो तो बेहतर है उसे बंद कर दें।

    4. अगर आप हॉब पर खाना बना रहे हैं तो कोशिश करें कि सॉसपैन उतना बड़ा हो जितना हीटिंग एलिमेंट है। इससे पैन जल्दी गर्म होगा और ऊर्जा खपत कम होगी।

    5. दांतों को ब्रश करते वक्त या फिर शेविंग करते वक्त वॉश बेसिन का नल खुला न रखें। एक मिनट तक नल से बहते पानी के कारण एक लीटर पानी बर्बाद हो सकता है।

    6. जिन नलों में से पानी रिसता रहता है उन्हें ठीक कराएं। एक रिसते नल में से औसतन 5500 लीटर पानी बर्बाद हो सकता है।

    7. गार्डन होज व स्प्रिंकलर्स एक हजार लीटर प्रति घंटे तक पानी बर्बाद कर सकते हैं जो कि किसी एरवेज फैमिली की वॉटर डेली यूज से भी ज्यादा है।

    8. अगर आप कोई बेहद स्टेन्ड चीज को धो रहे हैं तो ही डिश वॉशर या वॉशिंग मशीन को फुल एबिलिटी पर ऑपरेट करें। हाथ से धोना बेहतर ऑप्शन हो सकता है।

    9. अगर संभव हो सके तो अपनी वॉशिंग मशीन में कोल्ड साइकल का इस्तेमाल करें। हर बार हॉटवॉश से बचने पर ऊर्जा समय और पैसा तीनों की बचत होती है।

    10. घर में एनर्जी एफिशिएंट लाइट बल्ब लगाएं। इससे ऊर्जा तो बचेगी ही आपके बिजली का बिल भी 90 परसेंट कम आएगा।

    11. लो एनर्जी इंकजेट प्रिंटर का इस्तेमाल करें। लेजर प्रिंटर की अपेक्षा यह कम ऊर्जा खपत करता है।

    12. क्या आप अब भी फुल साइज्‍ड कंप्यूटर यूज करते हैं। इसके बजाय लैपटॉप या अल्ट्राबुक का इस्तेमाल करके आप ऊर्जा खपत को आधा कर सकते हैं।

    13. बेहतर होगा फ्रिज को खाली रखने के बजाय उसे भरकर रखें। इससे उसे कूलिंग में कम ऊर्जा लगेगी। मगर, बेवजह की चीज़ों को भी फ्रिज में स्टॉक करने से बचें।

    14. डिशवॉशर को तभी चालू करें जब यह फुल हो। हाफ लोड होने में भी उतनी ही ऊर्जा खपत होती है जितना की आधे में, इसलिए बेहतर है कि एक बार में ही सारे बर्तन साफ कर लें।

    15. वॉशिंग मशीन पर भी यही प्रिंसिपल लागू होता है। हालांकि, अगर उसमें इकोनॉमी फंक्शन है तो बेहतर है क्योंकि वह कम लोड में भी काम कर सकता है। कपड़े तब ही धोएं जब ड्रम फुल हो जाए।

    16. इलेक्ट्रिकल एप्लाएंसेस को स्टैंड बाय मोड पर न छोड़ें। ऐसा करके आप ऊर्जा खपत और बिजली बिल दोनों में कटौती कर सकते हैं।

    17. स्टैंडबाय सेवर में इनवेस्ट करें। ये आपके सभी डिवाइसेज को एक बार में स्टैंडबाय मोड से ऑफ करने में मदद करता है।

    18. घर में जब रूम से बाहर निकल रहे हों तो लाइट, फैन व अन्य जरूरी एप्लाइंसेज को बंद कर दें। ऐसा करके आप एनर्जी और पैसा दोनों बचा सकते हैं।

    19. किचन और बाथरूम में लगे एग्जॉस्ट फैन को बेवजह हमेशा ऑन न रखें बल्कि जरूरत के हिसाब से ही यूज करें।

    20. अगर आप अपने कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल या अन्य गैजेट का यूज नहीं करने वाले हैं तो उसे बजाय स्क्रीनसेवर मोड में रखने के बंद करना बेहतर होगा। वहीं, वॉल सॉकेट में लगे चार्जर्स को निकाल कर यूज करने के बाद स्विच को ऑफ कर दें। इससे एनर्जी बचाने में आपको मदद मिलेगी।

  • कोरोना वैक्‍सीन लगवाने के बाद भी बरतनी होगी सावधानी, तभी जीत सकेंगे ये जंग

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    पिछले साल कोरोना संक्रमण के आने के बाद से ही दुनियाभर के देश वैक्सीन बनाने की तैयारी में जुट गए थे। जिससे इस वायरस के बढ़ते प्रसार को रोका जा सके। क्योंकि डॉक्टर्स से लेकर एक्सपर्ट्स तक का मानना है कि वैक्सीन ही फिलहाल कोरोना को रोकने का एकमात्र कारगर जरिया है। लेकिन अभी कई ऐसे मामले देखने-सुनने को मिल रहे हैं जिसमें वैक्सीन लेने के बाद भी लोग संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। तो इसके लिए वैक्सीन को दोष देना पूरी तरह से गलत है। बल्कि इसकी मुख्य वजह लोगों की लापरवाही है। तो संक्रमण से बचे रहने के लिए वैक्सीन लगने के बाद भी लोगों को मास्क पहनना , हाथ धोना जारी रखना चाहिए, साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन करना चाहिए।

    वैक्सीन के बाद संक्रमण की दर बेहद कम

    न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपी रिसर्च के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर में 8121 कर्मचारियों ने कोविड-19 का वैक्सीन लगवाया था। इनमें से महज 4 में बाद में संक्रमण देखने को मिला। वहीं, 14,990 कर्मचारियों को यूसी सैन डिएगो हेल्थ एंड डेविड जेफेन स्कूल ऑफ मेडिसिन में टीका लगाया गया, दूसरी डोज के कुछ हफ्तों बाद संक्रमण के सिर्फ 7 मामले सामने आए।

    वैक्सीन इसलिए है जरूरी

    अगर आपको लगता है कि वैक्सीन लगवाने से संक्रमण का खतरा पूरी तरह से खत्म हो जाता है तो ये गलत है। कोई भी मौजूदा वैक्सीन इंफेक्शन से 100% सुरक्षा की गारंटी नहीं देती।

    वैक्सीनेशन के बाद आपकी बॉडी वायरस के जानलेवा परिणामों से बचाने का काम करती है। इसलिए वैक्सीन लगवाने के बाद भी कोरोना के लिए जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

    जरा सी लापरवाही आपको तो संक्रमित करेगी ही साथ ही औरों को भी।

    वैक्सीन कोविड-19 इंफेक्शन के बढ़ते प्रसार को घटाती है, इसलिए इसकी तय खुराक लेना जरूरी है।

    वैक्सीन लेने के बाद भी संक्रमित होने की वजहें

    • अपने आप को इम्यून समझकर मास्क पहनने, हाथ धोने, सैनेटाइजर का यूज करने और सोशल डिस्टेंसिंग पर सुरक्षा उपायों का पालन नहीं करते।

    • वैक्सीनेशन के बाद डॉक्टर्स द्वारा बताए गए जरूरी एहतियातों का पालन नहीं करते।

    • इम्यून सिस्टम कमजोर होने की वजह से।

    • वैक्सीन की दूसरी खुराक समय पर नहीं लेना या लगवाना ही नहीं।

    • 80 से 90 परसेंट आबादी के टीकाकरण तक सर्तकता बनाए रखना जरूरी।