Category: health

  • ग्लूकोमा को क्यों कहा जाता है काला मोतिया, जानें इसके लक्षण और उपचार, कैसे होती है यह समस्या

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    जब भी एक खास उम्र के बाद आंखों को यही आशंका होती है कि कहीं उन्हें कैटरेक्ट यानी मोतियाबिंद तो नहीं हो गया, पर यह जरूरी नहीं है। आंखों से जुड़ी एक और गंभीर समस्या है ग्लूकोमा, लेकिन जागरूकता में कमी के कारण इसकी ओर लोगों का ध्यान नहीं जाता। अगर सही समय पर उपचार न किया जाए तो इसकी वजह से आंखों की दृष्टि नष्ट हो जाती है।

    क्या है मर्ज

    हमारी आंखों में खास तरह का तरल पदार्थ होता है, जिसे एक्वस ह्यूमर कहा जाता है। इसी की वजह से आंखों का ठोस आकार बना रहता है, इसके निश्चित दबाब के कारण ही व्यक्ति आंखें खोल पाता है। आंखों और नाक के बीच में एक संकरी निकासी नली होती है, जिससे यह अतिरिक्त तरल पदार्थ थोड़ा-थोड़ा करके नाक के रास्ते से बाहर निकल जाता है। कभी-कभी निकास नली में रूकावट के कारण यह फ्लूइड आंखों में जमा होने लगता है और ऑप्टिक नर्व पर उसका दबाव बढ़ जाता है, जिससे उसके फाइबर्स नष्ट होने लगते हैं और आंखों की दृष्टि चली जाती है। यह नर्व ब्रेन को इमेज का मैसेज भेजती हैं और व्यक्ति को आसपास की चीज़ें दिखाई देती हैं, लेकिन ग्लूकोमा होने पर ऑप्टिक नर्व को धीमी गति से नुकसान पहुंचता है। शुरूआत में व्यक्ति सामने की इमेज तो देख पाता है लेकिन पेरिफेरल विज़न में लॉस के कारण वह अपने दाएं-बाएं चीज़ों को बिना गर्दन घुमाए देखने में असमर्थ होता है।

    प्रमुख लक्षण

    आंखों में तेज दर्द, रंगत का लाल होना, दृष्टि में धुंधलापन, तेज रोशनी में तकलीफ, किसी भी वस्तु के चारों ओर उसकी धुंधली छाया जैसी आकृति नजर आना और सिर में तेज दर्द आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं। गंभीर स्थिति में मरीज को वॉमिटिंग भी हो सकती है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि सभी मरीजों में इसके सारे लक्षण दिखाई दें।

    क्या है उपचार

    अगर शुरुआती दौर में इसकी पहचान हो जाए तो आई ड्रॉप के नियमित इस्तेमाल से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। क्लोज़ एंगल ग्लूकोमा की वजह से अगर ऑप्टिक नर्व पर ज्यादा प्रेशर पड़ रहा हो तो पेरिफेरल आईडेक्टॉमी नामक लेज़र तकनीक की मदद से एक छोटा-सा ड्रेनेज चैनल तैयार किया जाता है, जिससे आंखों में जमा होने वाले फ्लूइड को बाहर निकलने का रास्ता मिल जाता है और यह समस्या दूर हो जाती है। आजकल लेज़र के जरिए आंखों की सिंकाई की नई तकनीक भी आ गई है, जो कारगर साबित होती है। सर्जरी को अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

  • इस तरह करें हनुमान जी की पूजा मंगलवार को, करें इस मंत्र का जाप

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    आज मंगलवार है। आज का दिन हनुमान जी को समर्पित है। मान्यता है कि अगर इस दिन हनुमान जी की पूजा की जाए तो व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही भक्तों की मनोकामनाओं भी पूर्ण हो जाती हैं। इन्हें संकट मोचन भी कहा जाता है। हनुमान जी पुरुषोत्तम श्री राम के परम भक्त थे। अगर आज के दिन हनुमान जी की पूजा की जाए तो व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं। आइए जानते हैं हनुमान जी की कैसे करें पूजा।

    इस तरह मंगलवार को हनुमान जी की करें पूजा:

    • इस दिन हनुमान भक्त व्रत भी करते हैं। इससे व्यक्ति को हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए। फिर स्नानादि कर पूजा शुरू करनी चाहिए।
    • पूजा करते समय स्वच्छता और नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
    • पूजा शुरू करते समय हनुमान जी के सामने चमेली के तले का दीपक जलाएं।
    • हनुमान चालीस का पाठ हनुमान जी तस्वीर के सामने करना चाहिए।
    • एक पात्र में जल लें और उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिला लें।
    • हनुमान जी की पूजा करते समय उनकी आरती जरुर करें। साथ ही मंत्रोच्चारण भी करें।
    • पूजा के बाद इस जल को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
    • अगर मंगलवार के दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाया जाए तो वे बेहद प्रसन्न हो जाते हैं।
    • उन्हें गुड़ और चने का भोग लगाना भी बेहद शुभ माना जाता है।
    • इस प्रसाद को खुद भी ग्रहण करें और दूसरों में भी वितरित करें।

    पूजा के दौरान इस मंत्र का करें जाप:

    ॐ श्री हनुमंते नम:

    डिसक्लेमर

    ‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।’ 

  • बढ़ता बोझ मोटापे के कारण हेल्थ केयर सेवाओं पर, टेंशन में सरकार

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    नई दिल्ली। देश में कुछ समय पहले नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में आया कि मोटापे से जूझ रहे लोगों की संख्‍या में इजाफा हुआ है। 22 में से 19 राज्‍यों में पुरुषों में मोटापा बढ़ा है। वहीं, 16 राज्‍यों में महिलाओं के मोटापे में इसकी वृद्धि देखी गई है। कर्नाटक में सबसे ज्‍यादा महिलाओं में मोटापा देखा गया। यह 6.8 फीसदी रहा, जबकि पुरुषों में सबसे ज्‍यादा मोटापा जम्‍मू-कश्‍मीर में देखा गया। वहां यह 11.1 फीसदी रहा।

    मोटापे की वजह से दुनियाभर में हेल्थकेयर सिस्टम पर लगातार बोझ बढ़ता जा रहा है। ओईसीडी की रिपोर्ट के अनुसार, डायबिटीज पर होने वाले 70 फीसद खर्च की वजह मोटापा है। कार्डियोवॉस्कुलर बीमारियों का 23 फीसद खर्च और कैंसर के नौ फीसद खर्च में मोटापा ही जिम्मेदार होता है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका 2020 से 2050 तक मोटापे पर प्रति व्यक्ति 644 डॉलर खर्च करेगा। यह अमेरिका के हेल्थ पर खर्च होने वाले बजट का 14 फीसद होगा। वहीं कनाडा 2020 से 2050 के दौर में प्रति व्यक्ति मोटापे पर 295 डॉलर खर्च करने लगेगा, जो उसके हेल्थ बजट का 11 प्रतिशत होगा।

    रिपोर्ट के अनुसार, 36 में 34 ओईसीडी देश के लोग ओवरवेट हैं, और वहां चार में से एक व्यक्ति मोटा है। वहीं इसकी वजह से आयु में 0.9 साल से 4.2 साल तक की कमी हो रही है।

    यह रिपोर्ट भी करती है पुष्टि

    अमेरिका की सबसे बड़ी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी का कहना है कि 2009 और 2010 के बीच अमेरिका में 35.7 फीसदी लोग पहले ही मोटापे से परेशान थे। 2018 तक यह आंकड़ा बढ़कर 42.4 फीसदी हो गया।

    ब्रिटेन की 28 फीसदी आबादी मोटापे से जूझ रही है। वहीं, भारत में 13.5 करोड़ लोग मोटापे से परेशान हैं। भारतीय दूसरी बीमारियों से भी लड़ रहे हैं। देश में 7.2 करोड़ लोग डायबिटीज और 8 करोड़ हाई ब्लड प्रेशर से परेशान हैं। जर्मन वैज्ञानिकों की रिपोर्ट कहती है कि दुनियाभर में मोटापा बढ़ने से हार्ट और डायबिटीज के मरीज भी बढ़ेंगे। कोरोना जैसी महामारी इनके लिए मौत का खतरा और बढ़ा देती है।

  • जानें मुहूर्त और इसका महत्व, होलिका दहन और होली किस दिन है?

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    रंगों का त्योहार होली हिन्दुओं का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। दिवाली के बाद होली सबसे बड़ा त्योहार है। हिन्दी पंचांग के अनुसार, होली का त्योहार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से प्रारंभ होता है। यह दो दिन का होता है। पूर्णिमा तिथि के दिन प्रदोष काल में होली पूजा और होलिका दहन होता है और अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है, जिसे धुलण्डी भी कहा जाता है। जागरण अध्यात्म में आज हम जानते हैं कि इस वर्ष होलिका द​हन किस दिन है? होली पूजा का मुहूर्त क्या है? रंगों की होली किस दिन मनाई जाएगी?

    होलिका दहन 2021 मुहूर्त

    इस वर्ष फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 28 मार्च दिन रविवार को प्रात: 03 बजकर 27 मिनट पर हो रहा है, जिसका समापन देर रात 12 बजकर 17 मिनट पर होगा। ऐसे में होलिका दहन 28 मार्च को होगा। इस दिन आपको होलिका दहन के लिए 02 घंटे 20 मिनट का समय प्राप्त होगा। इस दिन होलिका दहन मुहूर्त शाम को 06 बजकर 37 मिनट से रात 08 बजकर 56 मिनट तक है।

    होलिका दहन को छोटी होली और होलिका दीपक के नाम से भी जाना जाता है। होलिका दहन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल के समय पूर्णिमा तिथि प्राप्त होने पर ही किया जाता है।

    होली 2021

    28 मार्च 2021 को होलिका दहन होने के बाद अगले दिन रंगों वाली होली होगी। ऐसे में 29 मार्च दिन सोमवार को होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। होली के दिन लोग एक दूसरे को रंग, गुलाल लगाते हैं और बधाई एवं शुभकामनाएं देते हैं। उपहार देने के साथ ही दोस्तों, रिश्तेदारों को मिठाई और भोजन कराया जाता है।

    डिसक्लेमर

    ‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।’

  • जानिए रेसिपी,अदरक और हल्दी, तुलसी का ड्रिंक लंग्स की करेगा हिफ़ाज़त

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    नई दिल्ली। एक तो साल भर से कोरोना ने दुनिया में कोहराम मचा रखा है, दूसरी ओर पॉल्यूशन ने जीना मुहाल कर रखा है। पॉल्यूशन के कारण सांस की तकलीफें बढ़ जाती है और खासकर उन लोगों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकती है जिन्हें पहले से सांस की तकलीफें हैं। मौसम बदलने के कारण कई तरह से शरीर में बीमारियां घर कर रही हैं। सर्दी, बुखार, वायरल फ्लू जैसी कई बीमारियां इन दिनों हर किसी को परेशान करने लगी है। कोरोना और पॉल्यूशन की इस दोहरी मार में हमें अपने लंग की सेहत का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। ऐसे में इम्यूनिटी की मजबूती बेहद महत्वपूर्ण है। इम्यून सिस्टम के लिए कोरोना काल में कई तरह के नुस्खे आजमाए गए हैं लेकिन अगर मामला लंग्स का हो तो इसकी एक्स्ट्रा केयर करना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं इस खतरनाक माहौल में लंग्स को तंदुरुस्त कैसे रखें।

    अदरक और तुलसी औषधीय गुणों से भरपूर है जो ना सिर्फ हमारी इम्यूनिटी बढ़ाते है बल्कि कई बीमारियों का उपचार भी करते हैं। तुलसी और अदरक का ड्रिंक हमारे लंग्स की केयर करने में बेहद असरदार है। इस ड्रिंक को बनाने के लिए सबसे पहले एक इंच के बराबर अदरक लें और उसे छील दें। इतनी ही मात्रा में साबुत हल्दी भी लें। थोड़े काली मिर्च के दानें । तुलसी के चार पत्ते।और 1.5 कप पानी।

    ड्रिंक को बनाने की विधि:

    इन सबको मिलाकर गर्म करें और फिर इसे पीने के स्तर तक ठंडा करें। इसके बाद इस ड्रिंक को सुबह शाम पीएं। यह लंग की सेहत के लिए सबसे उत्तम घरेलू नुस्खा है। तुलसी और अदरक पारंपरिक रूप से एंटीबैक्टीरियल और एंटी वायरल है। इसके अलावा ये दोनों चीजें गले की सर्दी का भी जबर्दस्त घरेलू नुस्खा है।तुलसी और काली मिर्च शरीर के इंफलामेटरी को संतुलित रखते है।

  • इन ट्रिक्स के साथ कर सकती हैं उसे यूज़, ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान गलत लिप शेड की हो गई है डिलीवरी

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    ऑनलाइन शॉपिंग में कुछ चीज़ों के ऊपर रिटर्न पॉलिसी अप्लाई नहीं होती जिसमें अंडर गॉर्मेंट्स के साथ कॉस्मेटिक्स प्रोडक्ट्स भी शामिल होते हैं खासतौर से लिपस्टिक और कई बार लिपस्टिक का जो शेड आपको पिक्चर में दिखाई देता है वो असल में डिलीवर होने के बाद वैसा नहीं होता। ऐसे में ज्यादातर महिलाएं उस लिपस्टिक को या तो किसी को दे देती हैं या फिर इस्तेमाल ही नहीं करती।

    तो अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है और लिपस्टिक अभी भी आपके पास है तो यहां बताए गए टिप्स एंड ट्रिक्स की बदौलत आप उस लिपस्टिक का बखूबी से इस्तेमाल कर सकती हैं। तो आइए बिना देर किए जानते हैं इनके बारे में..

    1. वैसे तो लिपस्टिक का शेड स्किन टोन के अनुसार होना चाहिए लेकिन अगर आपने कोई डल शेड लिपस्टिक खरीद ली है तो उसे लगाने से पहले या बाद में लिप लाइनर का इस्तेमाल जरूर करें। ऐसा करने से लिपस्टिक लंबे समय तक टिकी रहती है।

    2. पुरानी डार्क शेड लिपस्टिक से नया शेड क्रिएट करने के लिए ब्रश से होंठों पर एक पतली लेयर लगाएं। फिर ऊपर से लाइट शेड की लिपस्टिक अप्लाई करें। जब दोनों शेड ब्लेंड होंगे तो इफेक्ट अच्छा आएगा।

    3. ऐसी मैट लिपस्टिक जिसे लगाने के बाद होंठ सूखने लगते हैं, उसे लगाने के बाद ग्लॉस की भी एक लेयर लगाएं। लिप ग्लॉस की जगह पेट्रोलियम जेली का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

    4. लिपस्टिक का शेड बहुत ज्यादा डार्क है, तो उसे लगाने के बाद टिशू पेपर को होंठों के बीच या ऊपर रखकर प्रेस करें। ऐसा करने से कलर बैलेंस हो जाएगा।

    5. ग्लॉसी लिपस्टिक है बहुत ज्यादा, तो उसके ऊपर लिप लाइनर लगाने से मैट लुक दिया जा सकता है।

    8. डार्क लिपस्टिक को लाइट करने के लिए पिंक और पीच शेड्स का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे लिपस्टिक का शेड बदल जाता है और वो पहले से ज्यादा अच्छी दिखती है।

  • जानिए कैसे, सेवन करेंगे तो बीमार हो जाएंगे खाली पेट इन 5 मसालों का

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    नई दिल्ली। कोरोनाकाल में लोगों ने इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए गर्म मसालों के इस्तेमाल पर बेहद ज़ोर दिया है। गर्म मसाले ना सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि सेहत के लिए बेहद उपयोगी है। लेकिन आप जानते हैं हर चीज को सीमित मिकदार में इस्तेमाल करने का तरीका और सही समय होता है। किसी भी चीज का कभी भी अत्याधिक इस्तेमाल सेहत के साथ खिलवाड़ भी साबित हो सकता है। पिछले एक सालों में लोगों ने वज़न को घटाने के लिए भी गर्म मसालों का बेहद इस्तेमाल किया है। लेकिन आप जानते हैं कि गर्म मसालों का सेवन कब करना चाहिए। कुछ लोग वजन घटान के लिए कुछ मसालों का खाली पेट सेवन करते हैं जो कई बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। ऐसा करने से शुरुआत में कुछ फायदा हो सकता है, लेकिन लगातार इनका सेवन आपके पाचन को पूरी तरह बिगाड़ देगा। आज हम आपको ऐसे 5 मसालों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें खाली पेट खाना खतरनाक हो सकता है

    दालचीनी का बासी मुंह सेवन

    औषधीय गुणों से भरपूर दालचीनी ना सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि कई बीमारियों का उपचार भी करती है। लेकिन इसका ज्यादा सेवन आपको नुकसान पहुंचा सकता है। दालचीनी लीवर को नुकसान पहुंचा सकती है, इसके इस्तेमाल से मुंह में छाले, सफेद धब्बे और मुंह के अंदरूनी हिस्से में खुजली महसूस हो सकती है। इसलिए इसका इस्तेमाल सुबह-सुबह खाली पेट नहीं करें।

    काली मिर्च:

    कई अध्ययनों में पाया गया है कि काली मिर्च का खाली पेट ज्यादा सेवन करने से कुछ दवाओं का प्रभाव कम हो जाता है। खाली पेट इसका ज्यादा सेवन आंत के बायोम को बदल देता है, जिसकी वजह से दवाओं का असर बॉडी पर कम हो सकता है। काली मिर्च कुछ दवाओं के साथ रिएक्ट कर सकती है, जिसकी वजह से एलर्जी होने की संभावना बढ़ जाती है।

    लाल शिमला मिर्च:

    लाल शिमला मिर्च के पाउडर को खाली पेट उपयोग नहीं करना चाहिए। इसे पैपरिका कहते हैं, सूखी लाल शिमला मिर्च से इसे बनाया जाता है। इससे पेट में फ्लू, पेट में जलन की समस्या हो सकती है। सलाद में डालने से भी इसे बचे। अच्छे स्वाद के लिए इसमें लाल शिमला मिर्च के बजाय नींबू निचोड़ लें।

    सांस के मरीज मेथी से परहेज करें:

    जिन लोगों को सांस संबंधी समस्या है उनको खाली पेट मेथी खाने से बचना चाहिए। इसके अधिक सेवन से अस्थमा हो सकता है। इसके अलावा आप पेट के निचले हिस्से में दर्द भी महसूस कर सकते हैं।

    अजवाइन:

    पेट की बिमारियों के लिए अजवाइन रामबाण इलाज है, यह वजन घटाने में भी मददगार है। यह एक गर्म मसाला है, इसलिए इसके अधिक सेवन से बचना बेहतर है। गर्मी के मौसम में खाली पेट लेने से आप हार्ट बर्न के शिकार हो सकते हैं।

  • जानें मुहूर्त, राहुकाल एवं दिशाशूल, पढ़ें 19 मार्च 2021 का पंचांग, गोरूपणी षष्ठी आज

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    हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, आज फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। आज 19 मार्च 2021 और दिन शुक्रवार है। आज गोरूपणी षष्ठी है। आज दोपहर से रवि योग लग रहा है। आज के दिन भगवान कार्तिकेय की विधि विधान से पूजा की जाती है। उनको स्कंद कुमार भी कहा जाता है, इसलिए यह स्कंद षष्ठी भी कहलाती है। वैसे शुक्रवार के दिन आपको मां दुर्गा, माता लक्ष्मी और शीतला माता की आराधना करनी चाहिए। इन तीन देवियों की कृपा से आपको धन, समृद्धि, आरोग्य और शक्ति प्राप्त हो सकती है। आज के पंचांग में राहुकाल, शुभ मुहूर्त, दिशाशूल के अलावा सूर्योदय, चंद्रोदय, सूर्यास्त, चंद्रास्त आदि के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।

    आज का पंचांग

    दिन: शुक्रवार, फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष, षष्ठी तिथि।

    आज का दिशाशूल: पश्चिम।

    आज का राहुकाल: प्रात: 10:30 बजे से 12:00 बजे तक।

    आज का पर्व एवं त्योहार: गोरूपणी षष्ठी।

    विक्रम संवत 2077 शके 1942 उत्तरायन, दक्षिणगोल, वसंत ऋतु फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी 28 घंटे 49 मिनट तक, तत्पश्चात् सप्तमी कृतिका नक्षत्र 13 घंटे 44 मिनट तक, तत्पश्चात् रोहिणी नक्षत्र विषकुंभ योग 10 घंटे 59 मिनट तक, तत्पश्चात् प्रीति योग वृष में चंद्रमा।

    सूर्योदय और सूर्यास्त

    आज के दिन सूर्योदय प्रात:काल 06 बजकर 26 मिनट पर हुआ है, वहीं सूर्यास्त शाम को ठीक 06 बजकर 32 मिनट पर होगा।

    चंद्रोदय और चंद्रास्त

    आज का चंद्रोदय सुबह 09 बजकर 50 मिनट पर होगा। चंद्र का अस्त आज देर रात 11 बजकर 51 मिनट पर होगा।

    आज का शुभ समय

    अभिजित मुहूर्त: आज दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक।

    रवि योग: आज दोपहर 01 बजकर 44 मिनट से 20 मार्च को सुबह 06 बजकर 25 मिनट तक।

    अमृत काल: आज दिन में 11 बजकर 01 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक।

    विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से दोपहर 03 बजकर 18 मिनट तक।

    आज फाल्गुन शुक्ल षष्ठी है। आज शुक्रवार के दिन दुर्गा चालीसा, देवी पुराण, दुर्गा मन्त्र और माता लक्ष्मी तथा शीतला माता के मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आज आप कोई नया कार्य करना चाहते हैं तो शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें।

  • आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, 19 मार्च 2021 का राशिफल:, कन्या राशि वालों के लिए मालव्य योग बिजनेस में लाभप्रद होगा

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    12 राशियों में से हर व्यक्ति की अलग राशि होती है, जिसकी मदद से व्यक्ति यह जान सकता है कि उसका आज का दिन कैसा होगा? ज्योतिष में ग्रहों की चाल से शुभ और अशुभ घड़ियां बनती हैं, जो हमारे जीवन को प्रभावित करती हैं। अगर आपकी राशि के बारे में आज का दिन अच्छा है, तो आप उसे सेलिब्रेट कर सकते हैं, वहीं अगर आज का दिन आपके लिए खराब है तो आप पंडित जी के दिए गए सुझावों को अपनाकर कुछ अच्छा कर सकते हैं।

    आज का पंचांग

    दिन: शुक्रवार, फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष, षष्ठी का राशिफल।

    आज का राहुकाल: प्रात: 10:30 बजे से 12:00 बजे तक।

    आज का दिशाशूल: पश्चिम।

    आज का पर्व एवं त्योहार: गोरूपणी षष्ठी।

    राशिफल

    मेष: दांपत्य जीवन में तनाव आ सकता है। परिवार के अतिरिक्त किसी महिला का हस्तक्षेप कष्टप्रद हो सकता है, बचें। कालसर्प योग तथा अंगारक योग कष्ट देगा। संयम बरतें।

    वृष: रिश्तों में सुधार होगा। अधीनस्थ कर्मचारी, मित्र या भाई का सहयोग मिलेगा, फिर भी मन अशांत रहेगा। एक अज्ञात भय क्रोध में वृद्धि करा सकता है। संयम से काम लें।

    मिथुन: शाही खर्च से बचना होगा। चल या अचल संपत्ति के लिए ऋण लेने का प्रयास सार्थक हो सकता है। उच्च अधिकारी का सहयोग मिलेगा। आपसी संबंध मधुर होंगे।

    कर्क: पिता या धर्म गुरु का सहयोग मिलेगा। त्वचा या उदर विकार के प्रति सचेत रहें। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी। जीवनसाथी का सहयोग एवं सानिध्य मिलेगा।

    सिंह: पारिवारिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। अधीनस्थ कर्मचारी या भाई से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। तनाव का सामना करना पड़ सकता है। संयम से काम लें।

    कन्या: मालव्य योग व्यावसायिक दृष्टि से लाभप्रद होगा। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में किया गया श्रम सार्थक होगा। पारिवारिक सहयोग मिलेगा।

    तुला: रोग या शत्रु तनाव का कारण हो सकते हैं। आर्थिक और व्यावसायिक योजना फलीभूत होगी। दांपत्य जीवन में तनाव आ सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। संयम से काम लें।

    वृश्चिक: महत्वाकांक्षाओं में वृद्धि होगी। बुद्धि कौशल से किया गया कार्य संपन्न होगा। दूसरे से सहयोग लेने में सफलता मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में किया गया प्रयास सार्थक होगा।

    धनु: जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी। पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी।

    मकर: सामाजिक कार्यों में रुचि लेंगे। जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी। दांपत्य जीवन सुखमय होगा। किसी कार्य के संपन्न होने से आत्मविश्वास और सम्मान में वृद्धि होगी।

    कुंभ: जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी। चल या अचल संपत्ति के मामले में सफलता मिलेगी। गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। किया गया पुरुषार्थ सार्थक होगा। मधुर संबंध बनेंगे।

    मीन: शासन सत्ता से सहयोग मिल सकता है। बुद्धि कौशल से किया गया कार्य संपन्न होगा। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। मधुर संबंध बनेंगे।

  • धर्म के नाम पर लोग उड़ा रहे नियमों की धज्जियां, ध्वनि प्रदूषण से जन स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा, कानून का कड़ाई से हो पालन

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    ध्वनि प्रदूषण से जन स्वास्थ्य के समक्ष खतरे बढ़ते जा रहे हैं। इस पर संसद और सरकार काफी पहले से चेत चुकी हैं और सर्वोच्च न्यायालय भी सुस्पष्ट व्यवस्थाएं दे चुका है, किंतु सामाजिक चेतना की कमी और धार्मिक हठवादिता के चलते वांछित परिणाम नहीं आ सके हैं। हाल में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति द्वारा अजान की वजह से नींद में खलल पड़ने की शिकायत के बाद से इस मुद्दे ने फिर से तूल पकड़ा है। इस मामले में कानून तो एकदम स्पष्ट है, बस कार्यान्वयन के लिए अधिकारियों में साहस व इच्छा शक्ति चाहिए।

    पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 15 को ‘ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण)नियमावली 2000 के नियम 5/6 के साथ पढ़ने पर यह संज्ञेय और गैर जमानतीय अपराध है, जिसमें पांच वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक के हर्जाने की व्यवस्था है। नियमावली में प्रदत्त अनुसूची के अनुसार आवासीय क्षेत्र में दिन की अवधि में ध्वनि का स्तर 55 डेसिबेल और रात में 45 डेसिबेल स्वीकार्य है।

    धर्म के नाम पर लोग नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं

    कानूनी प्रविधानों में रात 10 बजे से प्रात: 6 बजे तक लाउडस्पीकर का प्रयोग वर्जति है। दिन में सक्षम प्रधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य होता है, लेकिन धर्म के नाम पर लोग नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं तथा लोक जीवन से खिलवाड़ करते हैं। अजान, नमाज पढ़ने वालों का बुलावा है। इसी तरह रमजान में 3 बजे रात से ही सहरी खाने की पुकार लाउडस्पीकर पर होने लगती है। प्रश्न यह है कि जिसे नमाज/पूजा भक्ति करनी होगी या जिसे रोजे में, सुबह से पहले भोजन लेना होगा, उसे लाउडस्पीकर पर चिल्लाकर कहने का क्या औचित्य है?

    देश का कानून भी तो कोई चीज है!

    तीव्र ध्वनि तो आसपास रह रहे अन्य धर्मावलंबियों के भी कान में पड़ती है और उनकी निद्रा भंग हो जाती है। इनमें बूढ़े, बच्चे व बीमार लोग भी होते हैं। देश का कानून भी तो कोई चीज है! विधान सब पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उसका पालन कड़ाई से हो। हिंदूू धर्म में ईश्वर को अंतर्यामी कहा गया है। कुरान शरीफ में कहा गया है कि खुदा नजदीक ही है।’ फिर शोर-शराबे और लाउडस्पीकर जैसेआडंबर के क्या मायने। कुछ वर्ष पूर्व पटना उच्च न्यायालय के एक न्यायमूर्ति को ऐसी ही शिकायत हुई थी। दिन में अजान की तेज आवाज से उन्हें न्यायिक कार्य में बाधा पड़ती थी। मुद्दा गर्माया था, किंतु मुस्लिम तुष्टीकरण के चलते उनका अन्यत्र स्थानांतरण कर दिया गया था। अब देखना है इस बार उठी इस बात पर शासन-प्रशासन क्या करता है? कानून का पालन या साहसहीन तुष्टीकरण!