Category: health

  • गैस की प्रॉब्लम को दूर करने के लिए ये घरेलू नुस्खे आजमाएं

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    अगर आपको भी गैस की समस्या है, तो आपको खाली पेट एक चम्मच बेकिंग सोडा में नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए। कुछ ही मिनटों में आपको इस नुस्खे से राहत मिल जाएगी।

    हींग गैस की समस्या को भी दूर करती है। अगर आपको गैस की समस्या है, तो इसके लिए एक गिलास गर्म पानी में हींग मिला कर पिएं। अगर आप इस नुस्खे को दिन में दो या तीन बार पीते हैं, तो आपकी गैस की समस्या दूर हो जाएगी।

    गैस की समस्या से राहत दिलाने में भी काली मिर्च फायदेमंद है। गैस की परेशानी के आलावा कलि मिर्च हाजमा को भी ठीक करती है। दूध में काली मिर्च मिलाकर पीने से भी गैस की समस्या दूर होती है।

    अदरक गैस में बहुत ही फायदेमंद है। इसके लिए देसी घी में अदरक का एक टुकड़ा पकाएं और उसके ऊपर काला नमक डालें। अगर गैस है तो इसे तुरंत खाएं। अदरक की चाय पीने से भी गैस और एसिडिटी की समस्या दूर होती है।

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    लहसुन सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। गैस की समस्या से राहत पाने में भी लहसुन फायदेमंद है। लहसुन को जीरा, धनिया के साथ उबालें और इसे रोजाना दो बार लें। इसका सेवन करने से आपको गैस की समस्या से राहत मिलेगी।

  • कोरोना स्तरों के अबतक नए 165 मामले सामने आये, सर्कार ने जानकारी दी

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    नई दिल्ली, प्रेट्र। केंद्र सरकार ने देश में ब्रिटेन के नए कोरोना स्ट्रेन की स्थिति को लेकर बयान जारी किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि कि देश में ब्रिटेन के कोरोना वायरस वैरियंट के पॉजिटिव मामलों की संख्या 165 हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी कि इन सभी व्यक्तियों को संबंधित राज्य सरकारों द्वारा नामित हेल्थ केयर सुविधाओं में सिंगल रूम आइसोलेशन में रखा गया है।

    स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, नए कोरोना स्ट्रेन के संक्रमित लोगों के करीबी संबंधियों को भी क्वारंटाइन के तहत रखा गया है। इसके साथ ही उनके साथ यात्रा करने वाले सह-यात्रियों, पारिवारिक संपर्कों और अन्य लोगों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग(Contact Tracing) भी शुरू कर दी गई है। मंत्रालय ने कहा देश में यूके में मिले कोरोना वायरस स्ट्रेन से संक्रमित मामलों की कुल संख्या 165 है।

    देश में आए इन कुल 165 मामलों में दिल्ली में नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (एनसीडीसी) में 42 लोगों के नमूने पॉजिटिव पाए गए। 51 लोग इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) दिल्ली में पॉजिटिव पाए गए। इसके साथ ही बैंगलोर में नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज में पांच लोग पॉजिटिव पाए गए हैं।

  • देश में कोरोना का रिकवरी 97% के पास पहुंचा, बीते 24 घंटे में 13083 मामले आये

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    नई दिल्ली। देश में कोरोना महामारी में तेजी से सुधार जारी है। देश में कोरोना संक्रमण की रिकवरी दर 97 फीसद के पास पहुंच गई है। इसके साथ ही नए कोरोना के मामलों में भी कमी आ रही है। कोरोना के एक्टिव केस कम हो रहे हैं तो रोजाना मौतों का आंकड़ा भी कम हो रहा है।

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में बीते 24 घंटों में कोरोना वायरस संक्रमण के 13,083 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान 137 लोगों की मौत हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोना संक्रमण के अब तक कुल 1 करोड़ 7 लाख 33 हजार 131 मामले सामने आए हैं। हालांकि, इसमें से 1 करोड़ 4 लाख 9 हजार 160 लोग बिल्कुल ठीक हो चुके हैं। भारत में कोरोना के सक्रिय मामले घटकर 1 लाख 69 हजार 824 रह गए हैं। देश में कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या 1 लाख 54 हजार 147 हो गई है।

  • बालों के लिए नारियल का तेल है सबसे बेहतर

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    नई दिल्ली । बालों की सेहत के लिए नारियल तेल से बढ़कर कुछ और नहीं है क्योंकि इसमें कई सारे ऐसे प्राकृतिक तत्व हैं, जो बालों का बखूबी ख्याल रखते हैं। बालों में नारियल तेल की मालिश के कई ऐसे लाभ हैं, जिनसे हम अंजान हैं, तो आज हम डर्मेटोलॉजिस्ट और हेयर व वेलनेस एक्सपर्ट अपर्णा संथानम के सुझाए गए कुछ ऐसे ही फायदों की बात करेंगे, जो नारियल के तेल को सर्वोत्तम बनाता है।

    1. सबसे बेहतरीन हेयर प्रोटेक्टर

    नारियल तेल बालों की सुरक्षा के लिए सबसे अच्छा है। धूप और गर्म वातावरण में रहने के चलते बालों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। धूप से बालों में पर्याप्त नमी की भी कमी होने लगती है, बाल रूखे हो जाते हैं, हालांकि नारियल के तेल से इनसे बचा जा सकता है। रिसर्चगेट के एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि नारियल तेल के मालिश से ये रिसकर बालों की तह तक पहुंच जाते हैं और सुरक्षा की एक परत बना लेते हैं, जो बालों में नमीं को बरकरार रखता है। इसमें एसपीएफ सहित कई एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं, जो बालों को धूप से होने वाले नुकसान से बचाते हैं और साथ में कई तरह के केमिकल से भी बालों की रक्षा करते हैं।

    2. अंदर से बालों की सेहत की सुरक्षा

    बालों की देखभाल के लिए बाजार में कई तरह के हेयर केयर प्रोडक्ट्स हैं, जिनका लंबे समय तक इस्तेमाल से बालों को नुकसान पहुंचता है। चूंकि नारियल तेल में रिस-रिसकर बालों की तह तक पहुंचने की क्षमता है इसलिए यह हेयर फॉसिल्स को पुर्नजीवित कर बालों की सेहत को अंदर से तंदरुस्त बनाता है। इसमें मौजूद फैटी एसिड्स और विटामिन्स बालों में नमीं को बनाए रखते हैं, जो रूखेपन से निजात दिलाने में कारगर है।

    3. स्कैल्प का रखे ख्याल

    अधिक गर्मी और नमीं वाले वातारण से हमारे बालों की जड़ों को काफी नुकसान पहुंचता है। चूंकि नारियल के तेल में एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं इसलिए यह स्कैल्प का बेहतर तरीके से ख्याल रखने और इसे तमाम समस्याओं से निजात दिलाने में कारगर है जैसे कि डैंड्रफ, ड्रायनेस, कोई इंफेक्शन इत्यादि। यह स्कैल्प पर जमने वाले सीबम को भी हटाता है, जो बालों और जड़ों को तैलीय बनाने का मुख्य कारक है।

    4. बेजान बालों से मिले छुटकारा

    शैम्पू सहित बालों की देखभाल के लिए बने कई उत्पादों में मौजूद केमिकल से आखिरकार बालों को नुकसान ही पहुंचता है क्योंकि इनमें केमिकल्स की अधिकता होती है। इनके अधिक इस्तेमाल में बालों में प्राकृतिक नमीं की कमी होने लगती है और ये बेजान व उलझे हुए नजर आते हैं और ऐसा खासकर नमीं वाले वातावरणों में अधिक होता है। इससे निपटने के लिए धूले हुए हल्के भींगे बालों में नारियल तेल की कुछ बूंदे डालें, ऐसा करने से नमीं बालों में ही लॉक होकर रह जाता है और बाल मुलायम बन जाते हैं।

    5. नारियल तेल है प्रकृति का और प्रकृति के लिए वरदान

    नारियल तेल नैचुरल है, यह किफायती है, आसानी से मिल जाते हैं और बालों की कई समस्याओं के समाधान में कारगर है। ऐसे में अनावश्यक महंगे हेयर केयर प्रोडक्ट्स के स्थान पर इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे न केवल हमारे बालों को फायदा पहुंचेगा बल्कि पैसे की भी बचत होगी और पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

  • आपकी कामकाजी याददाश्त को बढ़ा सकती है दोपहर की झपकी

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    बीजिंग। एक नियमित दोपहर की झपकी लेने से आपके मस्तिष्क को तेज रखा जा सकता है, क्योंकि एक नए अध्ययन से पता चलता है कि दोपहर की झपकी लेना बेहतर मानसिक चपलता से जुड़ा है। चीन में शंघाई जिओ टोंग विश्वविद्यालय के वी ली शोधकर्ताओं का सुझाव है कि दोपहर की झपकी बेहतर स्थानीय जागरूकता, मौखिक प्रवाह और काम करने की स्मृति से जुड़ी हुई है।

    जनरल साइकियाट्री नामक पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने कम से कम 60 वर्ष की आयु के 2,214 स्वस्थ लोगों को शामिल किया और चीन के आसपास के कई बड़े शहरों के निवासियों को शामिल किया।

    कुल मिलाकर, 1,534 ने नियमित दोपहर की झपकी ली, जबकि 680 ने नहीं। सभी प्रतिभागियों को मनोभ्रंश की जांच के लिए मिनी मेंटल स्टेट एग्जाम में स्वास्थ्य जांच और संज्ञानात्मक आकलन की एक श्रृंखला से गुजरना पड़ा।

    दोनों समूहों में रात के समय की नींद की औसत लंबाई लगभग 6.5 घंटे थी। दोपहर की झपकी को कम से कम लगातार पांच मिनट की नींद की अवधि के रूप में परिभाषित किया गया था, लेकिन 2 घंटे से अधिक नहीं।

    डिमेंशिया स्क्रीनिंग परीक्षणों में 30 आइटम शामिल थे जो संज्ञानात्मक क्षमता के कई पहलुओं को मापते थे, और उच्च कार्य, जिसमें नेत्र संबंधी कौशल, कार्यशील मेमोरी, ध्यान अवधि, समस्या-समाधान, स्थानीय जागरूकता और मौखिक प्रवाह शामिल थे।

    यह एक अवलोकन अध्ययन है, और इसलिए इसका कारण स्थापित नहीं किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि झपकी की अवधि या समय के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, जो महत्वपूर्ण हो सकती है।

    शोधकर्ताओं ने कहा कि टिप्पणियों के लिए कुछ संभावित स्पष्टीकरण हैं।

  • नाक के ब्लैकहेड्स हटाने के लिए कारगर सस्ते और घरेलू उपाय करें ट्राय

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    ब्लैकहेड्स वाली जगह पर नमक के पानी से मालिश करें और 15 मिनट बाद दही लगाकर हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में मसाज करें। इससे ब्लैकहेड्स के साथ-साथ चेहरे पर होने वाली जलन भी दूर हो जाएगी।

    एक चम्मच शहद में 2 चम्मच काला नमक मिलाएं। इसे लगाने से ब्लैकहैड के साथ-साथ डेड स्किन की समस्या भी दूर होती है। साथ ही ये एक्स्ट्रा ऑयल को सोखकर पोर्स को खोलने में भी मदद करता है।

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    ब्लैकहेड्स दूर करने में नींबू का रस बहुत ही फायदेमंद होता है। इसके लिए नींबू के रस से नाक पर ब्‍लैकहेड एरिया की मसाज करें। फिर उसी गीले चेहरे पर नमक लगाकर गोलाई में हल्के हाथों से मसाज करें। 10 मिनट के बाद चेहरे को गर्म पानी से धो लें।

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    चीनी का इस्तेमाल भी आप नाक से ब्लैक हेड्स दूर करने के लिए कर सकते हैं। बाउल में एक चम्मच चीनी और नमक डालें। हल्के हाथों से 15 मिनट तक नाक की मसाज करें। फिर इसे गीले कॉटन बॉल से पोंछ लें।

    नाक से ब्लैकहैड्स हटाने के टिप्स में आप टूथपेस्ट का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। अगर आपको नाक पर ब्लैकहेड्स हैं, तो नाक पर टूथपेस्ट लगा लें और फिर उस पर नमक रगड़ें। इसे ऊपर के डायरेक्‍शन पर रगड़ें। ऐसा करने से यह ब्लैकहेड्स के साथ डेड स्किन को भी साफ करता है।

  • डॉक्टरों ने कहा: कोविड वैक्सीन कैंसर के मरीज भी ले सकते हैं

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    हैदराबाद। विश्व कैंसर दिवस 4 फरवरी को है और इससे पहले, कैंसर विशेषज्ञों ने कहा है कि कैंसर के मरीज भी कोविड-19 वैक्सीन ले सकते हैं, लेकिन चिकित्सकों की देखरेख में। उन्होंने कहा कि वैक्सीन परीक्षणों में कुछ कैंसर रोगियों को भी शामिल किया गया था। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, ये टीके कैंसर के रोगियों के लिए सुरक्षित हैं।

    ऐसे समय में, जब भारत सहित कई देशों ने कोविड टीकाकरण अभियान शुरू किया है, कैंसर के रोगी यह सुनने के लिए इंतजार में हैं कि क्या वे भी वैक्सीन लगवा सकते हैं?

    डॉक्टरों ने कहा कि यह समन्वित वैश्विक टीकाकरण कार्यक्रम के साथ सुरक्षित और प्रभावी टीके के साथ ही किया जा सकता है।

    दुनियाभर में विकसित किए जा रहे 200 से अधिक टीकों में से तीन का भारत में स्वदेशी उत्पादन किया जा रहा है। इन सभी टीकों का उद्देश्य एसएआरएस-कोवी2 संक्रमण के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रदान करना है।

    कोविड-19 टीकों की प्रभावकारिता भी घातक बीमारी (ट्यूमर प्रकार, रोग सीमा, आंतरिक या चिकित्सा-प्रेरित प्रतिरक्षा दमन) के अलग-अलग संदर्भो वाले रोगियों में भिन्न हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, टीकाकरण का लाभ यह है कि यह जोखिमों से उबार लेता है।

    कोविड-19 टीकों की प्रभावकारिता भी घातक बीमारी (ट्यूमर का प्रकार, रोग सीमा, आंतरिक या चिकित्सा-प्रेरित प्रतिरक्षा दमन) के अलग-अलग संदर्भो वाले रोगियों में अलग-अलग हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, टीकाकरण का लाभ यह है कि रोगी जोखिम से निकल जाता है।

    किम्स अस्पताल के सलाहकार सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और रोबोटिक सर्जन, अजय चाणक्य वल्लभानेनी ने आईएएनएस से कहा, “चूंकि कैंसर रोगियों में वैक्सीन की प्रभावकारिता और प्रतिरक्षा की अवधि अभी भी अज्ञात और अस्पष्ट है, इसलिए वैक्सीन लगने के बाद ऐसे रोगियों पर निगरानी रखने का सुझाव दिया जाता है।”

  • गंभीर नहीं फाइजर वैक्सीन लगने के बाद के प्रभाव : स्टडी

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    लंदन। फाइजर का कोविड वैक्सीन लगने के बाद होने वाले असर की रिपोर्ट करने वाले लोगों पर ब्रिटेन में अध्ययन हुआ है। इसमें सामने आया है कि वैक्सीन लगने के बाद ज्यादातर लोगों में सामने आए लक्षण गंभीर नहीं हैं। गुरुवार को कोविड सिम्पटम्स स्टडी एप द्वारा जारी किए गए निष्कर्षो के अनुसार, ज्यादातर लक्षण टीकाकरण होने के तुरंत बाद के 2 दिनों में होते हैं। इनमें भी सिरदर्द, थकान और ठंड लगना या चक्कर आना सबसे आम है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग पहले कोरोनावायरस के संपर्क आए हैं, उनमें यह संभावना अधिक है कि उन्हें टीकाकरण के बाद ऐसे अनुभव हों।

    टीम ने लगभग 40,000 लोगों की रिपोर्ट का विश्लेषण किया। ये वो लोग हैं, जिन्हें दिसंबर में टीका लगाया गया था। इनमें से 23,308 लोग ऐसे थे, जिन्हें एक डोज मिला था और 12,444 लोग ऐसे थे, जिन्हें दोनों डोज मिल चुके थे। अध्ययन से पता चला कि पहला डोज लेने के एक या दो दिन बाद 10 में से लगभग 4 लोगों को अपने कंधे में दर्द या सूजन अनुभव हुई।

    बता दें कि कोविड सिम्पटम्स स्टडी को एक हेल्थ साइंस कंपनी जेडओई के साथ मिलकर डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने बनाया है। इस स्टडी का नेतृत्व किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर टिम स्पेक्टर ने किया। स्पेक्टर ने ट्वीट कर कहा है, “हमारा जेडओई ऐप का डेटा 40,000 हेल्थ केयर वर्कर्स में 12 दिनों के बाद बीमारी से बचने के संकेत दिखा रहा है।”

    ब्रिटेन में फाइजर/बायोएनटेक कोविड-19 वैक्सीन 8 दिसंबर से लगना शुरू हुई थी। तब से यहां लाखों लोगों को टीका लग चुका है। इसमें बुजुर्ग, हेल्थ केयर वर्कर्स और एनएचएस स्टॉफ के लोग शामिल हैं।

    शोधकर्ताओं ने उन लोगों के बीच भी टीकाकरण के प्रभावों की तुलना की, जिन्हें कोविड-19 हुआ था और जिन्हें यह संक्रमण नहीं हुआ था। विश्लेषण से पता चला है कि ऐसे लोग जिन्हें कोविड संक्रमण हुआ था, उनमें से एक तिहाई लोगों में वैक्सीन लगने के 7 दिनों के अंदर कम से कम एक लक्षण दिखाई दिया है। जबकि ऐसे लोग जिन्हें कोरोना संक्रमण नहीं हुआ था, उनमें 5 में से केवल 1 व्यक्ति को ही वैक्सीन लगने के बाद कोई लक्षण आए हैं।

  • सेहत से जुड़ी ये गंभीर समस्याएं हो सकती हैं शरीर में पोटैशियम की कमी से

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    ब्लड में पोटेशियम की मात्रा कम हो जाने से दिल को धड़कने में रुकावट होती है। इसलिए कहा जाता है कि पोटेशियम दिल के धड़कन को सामान्य रखने में काफी मददगार होता है।

    बल्ड के सही सर्कुलेशन में पोटेशियम मदद करता है। इसकी कमी से रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है और ब्लड प्रेशर बाधित होती है।

    जरूरी न्यूट्रिशन न मिलने से हमेशा थकान का एहसास होता रहता है। पोषक तत्वों की कमी से मसल्स अपना लचीलापन खो जाता है और मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं। जो थकान की वजह बनती है।

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    इंसोमेन‍िया एक बीमारी है जो नींद नहीं आने की वजह से होती है। तो अगर आपको भी ये समस्या है तो ये साफ संकते है आपकी बॉ़डी में पोटैशियम की कमी है।

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    भोजन में सभी पोषक तत्वों का होना अनिवार्य है। पोटेशियम की मात्रा कम होने से शरीर में लैक्टिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। जो कमजोरी का कारण बनती है।

  • भारत में अनुमति नहीं फिलहाल फाइजर वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की

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    नई दिल्ली। भारत के ड्रग रेग्युलेटरी अथॉरिटी ने फाइजर की कोविड वैक्सीन की मंजूरी पर रोक लगा दी है। इससे पहले विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने कहा कि वह देश में इसके आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण (ईयूए) के लिए अनुमति देने की सिफारिश नहीं करती है। सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी की घोषणा के बाद ड्रग रेग्युलेटरी अथॉरिटी ने भी फाइजर वैक्सीन को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है।

    सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑगेर्नाइजेशन (सीडीएससीओ) की विशेषज्ञ समिति ने कई गंभीर प्रतिकूल घटनाओं (एसएई) को नोट किया है। इसलिए अन्य देशों में फाइजर वैक्सीन की मार्केटिंग के बाद ईयूए के लिए इसकी सिफारिश नहीं करने का प्रमुख कारण है।

    दस्तावेज के अनुसार, समिति ने जांच परख की, जिसमें निष्कर्ष निकालते हुए कहा गया है, समिति ने नोट किया कि पोस्ट-मार्केटिंग के दौरान पक्षाघात, एनाफिलेक्सिस और अन्य एसएई की घटनाओं की सूचना दी गई है और वैक्सीन के साथ घटनाओं के संबंध में जांच की जा रही है।

    इसके अलावा, एसईसी ने नोट किया कि कंपनी ने भारतीय आबादी में सुरक्षा एवं प्रतिरक्षात्मकता डेटा उत्पन्न करने के लिए कोई योजना प्रस्तावित नहीं की है।

    दस्तावेज में विशेषज्ञों की समिति के निदेशरें के अनुसार, विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, समिति ने इस स्तर पर देश में आपातकालीन उपयोग के लिए अनुमति देने की सिफारिश नहीं की है।

    अमेरिका स्थित फार्मास्यूटिकल दिग्गज पांच दिसंबर को देश में अपनी कोविड वैक्सीन के ईयूए के लिए आवेदन करने वाली पहली दवा कंपनी थी। इसके बाद पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने छह दिसंबर को कोविशिल्ड के ईयूए के लिए आवेदन किया था। वहीं इसके बाद भारत बायोटेक ने सात दिसंबर को अपनी कोवैक्सीन के लिए ईयूए के लिए आवेदन किया था।

    कोविशिल्ड और कोवैक्सीन दोनों को भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल द्वारा ईयूए के लिए तीन जनवरी को अनुमति दी गई थी। देश के कोविड टीकाकरण कार्यक्रम में यही दोनों वैक्सीन लोगों को दी जा रही है।

    इस बीच, फाइजर ने एक बयान जारी कर कहा है कि उसने फिलहाल अपना आवेदन वापस ले लिया है और वह एसईसी द्वारा मांगे गए अतिरिक्त डेटा के साथ फिर से आवेदन करेंगे।

    बयान में कहा गया, बैठक में विचार-विमर्श और नियामक को अतिरिक्त जानकारी की हमारी समझ के आधार पर, कंपनी ने इस समय अपने आवेदन को वापस लेने का फैसला किया है।

    कंपनी के बयान में कहा गया है कि वह फाइजर प्राधिकरण के साथ संपर्क में रहेगी और निकट भविष्य में वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त जानकारी के साथ अनुमति के लिए फिर से आवेदन करेगी।