Category: health

  • कुछ हफ्तों में केले के इस्तेमाल से सर्दियों में शुष्क त्वचा और बालों की समस्या को दूर करे

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    संपूर्ण आहार की कैटेगरी में शामिल केला अच्छी सेहत के साथ ही स्किन और बालों से जुड़ी परेशानियां भी दूर करने का काम करता है। सर्दियों में होने वाली ड्राय स्किन की प्रॉब्लम हो या गर्मियों में टैनिंग की समस्या हर किसी के लिए आप कर सकती हैं इसका इस्तेमाल। आइए जानते हैं कैसे।

    कैसे करें केले का इस्तेमाल स्किन केयर के लिए

    1. केले को एक नहीं बल्कि कई तरीकों से स्किन को सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। एक बाउल में पके केले को अच्छे से मैश कर लें। आंखों और लिप्स को छोड़कर इसे पूरे चेहरे पर अच्छी तरह से लगाएं। 15-20 मिनट लगाकर रखें। उसके बाद नॉर्मल पानी से इसे धो लें।

    2. पके केले को अच्छे से मैश करें। उसमें दो चम्मच कच्चा दूध मिलाएं। इसे स्किन पर अप्लाई करें। अगर कहीं टैनिंग हुई है तो वहां इसे पैक से हल्के हाथों से मसाज करें। कुछ दिनों के इस्तेमाल के बाद ही आपको फर्क नजर आने लगेगा।

    3. पके केले में शहद मिलाकर चेहरे पर लगाने से आपको मिलेगी सॉफ्ट और ग्लोइंग स्किन। लेकिन अगर आपकी स्किन ऑयली है तो इस पैक को लगाना अवॉयड करें। सर्दियों में ड्राय स्किन की समस्या से परेशान महिलाओं और युवतियों के लिए ये एक अच्छा पैक है।

    4. चेहरे पर होने वाले दाग-धब्बों, ब्लैक और व्हाइट हेड्स से परेशान हैं तो एक बाउल में पका केला लेकर उसमें बेसन और नींबू का रस मिलाकर स्मूद पेस्ट तैयार करें। अब इसे चेहरे पर लगाकर कम से कम 15-20 मिनट तक रखें। इसका फर्क भी आपको कुछ ही इस्तेमाल के बाद देखने को मिलेगा।

    5. कोहनी, घुटना और हाथों के पोर पर होने वाली डार्कनेस खूबसूरती में धब्बा लगाने का काम करती है। तो इन्हें दूर करने के लिए केला है नेचुरल और बेहतरीन। इसके रोजाना इस्तेमाल से आपको फर्क बहुत जल्द नजर आने लगेगा।

    6. बालों की कंडीशनिंग और स्मूथनिंग के लिए महंगे हेयर प्रोडक्ट्स में पैसे खर्च करने की जगह आप एक बार पके केले को लगाकर देखें। इसके लिए अपने बालों के लेंथ और वॉल्यूम के हिसाब से केले लें। इसे अच्छी तरह से मैश कर लें। आप चाहें तो इसमें शहद का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। अब इसे मास्क से बालों को अच्छे से कवर कर लें। और इसे पूरी तरह नहीं सूखाना, हल्का सूखने पर वॉश कर लें। बालों पहले से बहुत ज्यादा रेशमी और चमकदार नजर आएंगे।

     

  • किचन में मौजूद इन 5 चीज़ों से करें दूर टैनिंग और पिग्मेंटेशन की परेशानी को

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    इससे आपकी स्किन को ठंडक भी मिलेगी। एक कोटरी में दही या छाछ लें और चेहरा धोकर इसे उंगुलियों या कॉटन की मदद से लगाएं। सूखने पर धो लें।

    एक कटोरी में 1 छोटा चम्मच शहद या एक चौथाई चम्मच हल्दी लें। इसमें पर्याप्त मात्रा में नींबू का रस मिलाकर पेस्ट तैयार करें और प्रॉब्लम एरिया पर लगाएं। सूखने पर इसे धो लें।

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    एक पका एवाकाडो लें और इसे अच्छी तरह मैश कर लें। अब इसे अपने चेहरे और प्रॉब्लम एरिया पर अच्छी तरह लगाएं। 15 मिनट बाद धो लें।

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    एक खीरे का टुकड़ा लें और इसे पूरे चेहरे पर अच्छी तरह खासकर टैनिंग और पिग्मेंटेशन वाले हिस्से पर अच्छी तरह रगड़ें। जब ये सूख जाए तो इसे धो लें।

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    इसके इस्तेमाल से रंगत भी निखरती है। एक पके पपीते का गूदा लें और इसे मसल कर इसमें एक चम्मच दूध मिलाकर लगाएं। सूखने पर इसे धो लें।

  • फॉलो करें सोने से पहले ये टिप्स लंबे वक्त तक खूबसूरत और जवां बने रहने के लिए

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    हफ्ते में दो बार फेस मसाज करें। हाथ से नीचे से ऊपर के डायरेक्शन में सर्कुलर मोशन में मसाज करें। इसके लिए आप किसी तेल का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे बल्ड सर्कुलेशन और कॉलेजन प्रोडक्शन बढ़ेगा। कॉलेजन प्रोडक्शन बढ़ने से स्किन की इलैस्टिसिटी बनी रहेगी और आप लंबे वक्त तक यंग नज़र आएंगी।

    आंखों के पास की स्किन काफी पतली होती है। यही वजह है कि झुर्रियां और फाइन लाइन्स सबसे पहले यहां नज़र आती हैं। इसलिए ये ज़रूरी होता है कि आप सोते वक्त एक अच्छी आई क्रीम का इस्तेमाल करें। इससे इन्हें न्यूट्रिशन मिलता है और ये परेशानी दूर होती है।

    आंखों के साथ चेहरे को भी न्यूट्रिशन और केयर की ज़रूरत होती है। चेहरे पर नज़र आने वाली बुढ़ापे की निशानियों को खत्म करने के लिए विटामिन ए या रेटिनॉल वाली क्रीम इस्तेमाल करें। हां, इनके इस्तेमाल से पहले एक पैच टेस्ट ज़रूर लें। कई बार रेटिनॉल से इरिटेशन की परेशानी हो सकती है।

    लंबे वक्त तक यंग दिखने के लिए आपके होंठों को भी केयर की ज़रूरत होती है। अगर आप इसकी सही केयर नहीं करेंगी, तो इस पर भी क्रीजेज़ के तौर पर झुर्रियां नज़र आने लगती हैं। इसलिए सोते वक्त हर रोज़ एक अच्छा लिप बाम या बादाम तेल लगाएं।

    क्या आपके हाथ भी बूढ़े नज़र आते हैं और इस पर झुर्रियां दिखती हैं. इससे बचने के लिए आपको सोते वक्त बस एक सही रूटीन को फॉलो करने की ज़रूरत है. हर रोज़ सोते वक्त एक अच्छी हैंड क्रीम ज़रूर अप्लाई करें. आप चाहे तो ऑलिव ऑयल या बादाम तेल से भी मसाज कर सकती हैं.

  • मधुमेह रोगियों के लिए एक वरदान है कुर्मासन…

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    दिल्ली।आधुनिक समय में सेहतमंद रहना एक चुनौती है। खराब दिनचर्या, गलत खानपान और तनाव की वजह से कई बीमारियां जन्म लेती हैं। खासकर डायबिटीज और मोटापा से लोग अधिक परेशान हैं। डायबिटीज में रक्त में शर्करा स्तर बढ़ जाता है। साथ ही अग्नाशय से इंसुलिन हार्मोन निकलना बंद हो जाता है। डायबिटीज रोग में मीठा खाने की मनाही होती है। इसके लिए जीवनशैली के साथ-साथ डाइट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इनसे आप बीमारियों से दूर रह सकते हैं। इसके लिए आप योग का भी सहारा ले सकते हैं। योग के कई प्रकार हैं। इनमें एक कुर्मासन है, जिसे करने से न केवल मानसिक, बल्कि शारीरिक विकार भी दूर होते हैं। इससे बल्ड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। अगर आप भी डाबिटीज के मरीज हैं और अपना बल्ड शुगर लेवल कंट्रोल करना चाहते हैं, तो रोजाना कुर्मासन जरूर करें। आइए, जानते हैं कि कुर्मासन क्या है और इसे कैसे करें-

    कुर्मासन क्या है

    कुर्मासन दो शब्दों कुर्मा और आसन से मिलकर बना है। इसका शाब्दिक अर्थ कछुए की मुद्रा में बैठना है। इस योग को करने से मधुमेह में आराम मिलता है। पाचन तंत्र मजबूत होता है और अनिद्रा की शिकायत भी दूर होती है।

    कुर्मासन कैसे करें

    इसके लिए समतल भूमि पर दरी बिछा लें। अब सूर्य की ओर मुखकर पैरों को फैलाकर बैठ जाएं। इसके लिए आप लेख में संलग्न तस्वीर की मदद ले सकते हैं। अब अपने हथेलियों को पैरों के अंदर रखकर आगे की ओर झुकें। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार झुकें। इसके बाद कुछ पल के लिए इस मुद्रा में रुकें। इसके बाद पुनः पहली अवस्था में आ जाएं। इस योगासन को रोजाना कम से कम दस बार जरूर करें।

    कुर्मासन के फायदे

     

  • कोरोना से ठीक हुए मरीजों के दिमागपर पड़ रहा असर, भूल रहे छोटी-छोटी चीज़े…

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    गोरखपुर। कैंट क्षेत्र निवासी एक युवक को कोरोना का संक्रमण होने के बाद बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया था। सांस लेने में दिक्कत के बाद कई दिनों तक आक्सीजन सपोर्ट देना पड़ा था। कोरोना से जंग जीतकर युवक घर पहुंच गया है लेकिन दिमाग कमजोर हो गया है। यहां तक कि मोबाइल और एटीएम का पासवर्ड भी भूल जा रहा है।

    कोरोना से पीडि़त होने के बाद ज्यादा समय तक आक्सीजन लेने वाले युवाओं का दिमाग साथ छोड़ रहा है। मोबाइल व एटीएम के पासवर्ड भी युवा भूल जा रहे हैं। ज्यादा दिन तक आक्सीजन पर रहने के कारण शरीर की क्षमता पर भी असर पड़ा है।

    दिमाग की नसों में मिल रहा खून का थक्का

    कोरोना ने दिमाग की नसों पर भी बहुत असर डाला है। गंभीर हालत में पहुंचे कई मरीजों के दिमाग की नसों में खून का थक्का जमा हो गया है। डाक्टरों का कहना है कि ऐसे मामलों में लंबे समय तक इलाज चलता है।

    हाथ-पैर में भी आ रही कमजोरी

    बाबा राघवदास मेडिकल कालेज के न्यूरोलाजिस्ट डा. अजय यादव कहते हैं कि कोरोना के कारण न्यूरोपैथिक दर्द के मामले बढ़ गए हैं। इसमें शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द, सूजन या मांसपेशियों में कमजोरी आती है। ओपीडी में कोरोना से ठीक हुए ऐसे मरीज आ रहे हैं जिनके हाथ-पैर में कमजोरी की शिकायत रहती है। कई मामलों में भूलने की शिकायत भी आ रही है।

    डिप्रेशन, घबराहट के मरीज बढ़े

    कोरोना से जंग जीत चुके ज्यादातर लोग खांसी-बुखार होने पर भी घबरा जा रहे हैं। उनको लगता है कि उन्हें फिर कोरोना हो गया है। फिजिशियन की जांच से भी यह लोग संतुष्ट नहीं हो रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या मानसिक रोग के डाक्टरों की ओपीडी में बढ़ गई है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. गोपाल अग्रवाल बताते हैं कि कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में बीमारी को लेकर डर पैदा हो गया है। हल्की सी खांसी को भी वह कोरोना की शुरुआत मान ले रहे हैं। ऐसे लोगों का दवाओं व काउंसलिंग से उपचार किया जा रहा है।

     

  • पाएं खूबसूरत स्किन के साथ चमकदार बाल भी खीरे के इस्तेमाल से

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    ये एक नैचुरल ब्लीच होता है और साथ ही इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेंटरी प्रोपर्टीज़ आपके चेहरे में मौजूद दाग-धब्बों को खत्म कर क्लीयर स्किन देती है। हर रोज़ सोने से पहले चेहरा धोकर एक खीरे का टुकड़ा अच्छी तरह चेहरे पर रगड़ें। आप चाहे तो इसका रस निकालकर भी इस्तेमाल कर सकती हैं। कुछ वक्त तक हर रोज़ इसका इस्तेमाल करें और पाएं क्लीयर स्किन।

    सिर्फ लंबे नहीं, इससे आप पा सकती हैं शाइनी बाल भी। इसमें मौजूद सिलिका आपके बालों को शाइन देकर इसे खूबसूरत बनाता है। इसके लिए भी हफ्ते में दो बार इसके रस को निकालर कर स्कैल्प और बालों पर अच्छी तरह लगाएं और फिर धो लें।

    इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और सीलिका इस परेशानी से राहत दिलाने में मदद करता है। इतना ही नहीं ये आंखों के पास नज़र आने वाली झुर्रियों को भी खत्म करता है। इसके लिए सोने से पहले या सुबह उठने के बाद दो खीरे के टुकड़े को काटकर फ्रिज़ में रखकर ठंडा कर लें। अब इसे अपनी आंखों पर रखें 10 मिनट तक रखें। ज़रूरत महसूस हो तो इसे दोबारा रिपीट करें। कुछ दिनों तक ऐसा हर रोज़ करें।

    इसमें मौजूद सिलिकॉन और सल्फर बालों की ग्रोथ में मदद करते हैं और इनके झड़ने की परेशानी खत्म करते हैं। इसके लिए खीरे का रस का इस्तेमाल करें। अपने बालों की लंबाई के हिसाब से इसका रस निकाल लें। अब इसे कॉटन की मदद से पूरे स्कैल्प पर लगाएं और दो मिनट तक इसकी मसाज करें। 20 मिनट बाद इसे धो लें।

    जैसा कि ये एक नैचुरल ब्लीच होता है इसलिए ये टैनिंग से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। इतना ही नहीं, ये असमान रंगत को एक समान कर आपको देता है फेयर स्किन। इसके लिए आप खीरे और दही से बने मास्क का इस्तेमाल करें। एक चम्मच खीरे का गुदा लें और इसमें एक चम्मच दही मिलाकर पूरे चेहरे पर लगाएं। सूखने पर इसे धो लें। हफ्ते में हर दूसरे दिन ऐसा करें।

  • कई सारी बीमारियों से दूर रहें न्यूट्रिशन से भरपूर मशरूम खाकर

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    खराब मेटाबॉलिज्म की वजह से हृदय रोग, मोटापा, कैंसर व मधुमेह जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मशरूम में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण मेटाबॉलिज्म सुधारने के साथ ही इन सभी समस्याओं को दूर करने में भी मददगार होता है।

    मशरूम में मौजूद एंजाइम्स और फाइबर कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने का काम करते हैं। इसके अलावा मशरूम में पाए जाने वाले उच्च फाइबर, अनसैचुरेटेड फैटी एसिड व सोडियम के साथ-साथ इरिटेडेनिन फेनोलिक यौगिक और स्टेरोल्स हानिकारक कॉलेस्ट्राल को कम करते हैं और आपके दिल को रखता है दुरूस्त।

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    मोटापा कम करने वालों को प्रोटीन रिच डाइट लेने की सलाह दी जाती है और मशरूम प्रोटीन का स्त्रोत है। इसमें लीन प्रोटीन होता है। इसके अलावा मशरूम में एंटी ओबेसिटी गुण भी होते हैं, जो बढ़ते वजन को कम करने में फायदेमंद हो सकते हैं

    एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर मशरूम फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। इन्हें खाने में बॉडी में प्रोटीन और एंटीवायरल की मात्रा बढ़ती है जो डैमेज सेल्स की मरम्मत और नए सेल्स की ग्रोथ में मदद करता है। मशरूम एक नेचुरल एंटीबायोटिक है जिसके सेवन से फंगल इंफेक्शन को भी ठीक किया जा सकता है।

    कुछ खास प्रकार के मशरूम में एंटीडायबिटिक गुण पाए जाते हैं, जो ब्लड में मौजूद शुगर की मात्रा को कम करने में मदद कर सकते हैं। इनके कारण मशरूम डायबिटीज को कंट्रोल कर उसके असर को बढ़ने से रोक सकता है। साथ ही अगर मशरूम का इस्तेमाल आप डायबिटीज की दवाओं के साथ करें, तो शरीर में इंसुलिन का लेवल बेहतर हो सकता है।

  • जानें- किसको दी जानी चाहिए सबसे पहले कोरोना की वैक्‍सीन

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    कोरोना वायरस महामारी के दस माह बाद इसकी वैक्‍सीन की राह काफी हद तक साफ हो गई है। इसको पहले किन्‍हें दिया जाना चाहिए इसको लेकर भी तस्‍वीर काफी हद तक साफ है। हर देश ने इसका खाका तैयार कर लिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रॉस ऐडनेहॉम घेबरेयेसस ने भी इस वैक्‍सीन को किसे सबसे पहले दिया जाए, इसके बारे में कुछ खास कहा है। उनका कहना है कि इस वैक्‍सीन को पहले सबसे

    पहले फ्रंट लाइन पर काम करने वाले स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों को दी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन मरीजों को ये वक्‍सीन दी जानी चाहिए जो सबसे अधिक जोखिम वाले हालात में हैं। उन्‍होंने ये भी कहा कि हर देश को इस वैक्‍सीन को लेकर अपने यहां पर प्राथमिकता तय करनी चाहिए। इसके आधार पर ही इसको दिया जाना चाहिए। घेबरेयेसस ने कहा कि आने वाले कुछ समय में कुछ देशों में कोरोना की वैक्‍सीन मुहैया करवा दी जाएंगी।

    यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख ने जिनेवा में कहा कि दुनिया में काफी संख्‍या में लोग ऐसे हैं जो अधिक उम्र के हैं और कई तरह की गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं। ऐसे में उनको जोखिम अधिक है। इनको वैक्‍सीन दिए जाने से इनकी मौत का जोखिम काफी हद तक कम हो जाएगा। ऐसा करने से देश अपने यहां की स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं पर भी बोझ को कम कर कसेंगे। कुछ समय बाद जैसे-जैसे वैक्‍सीन की सुलभता होती जाएगी इसमें दूसरे लोगों को भी शामिल कर लिया जाएगा। डब्‍ल्‍यूएचओ ने वैक्‍सीन को प्राथमिकता के आधार पर इसका एक रोडमैप भी तैयार किया है। संगठन ने इसको लेकर कुछ दूसरी सिफारिशें भी की हैं।

    संगठन के प्रमुख का कहना है कि वैक्‍सीन अब देशों को मुहैया करवाए जाने शुरुआती दौर में है। हालांकि उन्‍होंने वैक्‍सीन की रखरखाव को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि सरकारों को इन वैक्‍सीन को सुरक्षित बनाए रखने के उपाय करने होंगे। उनके मुताबिक डब्‍ल्‍यूएचओ इस बात पर निगाह रखे हुए है कि ठीक होने वाले मरीजों में एंटीबॉडीज आखिर कितने समय तक शरीर में बरकरार रहती है।

    डब्‍ल्‍यूएचओ के वरिष्ठ अधिकारी और वैक्‍सीनेशन, वैक्‍सीन और बायोलॉजीकल्स विभाग की डायरेक्‍टर डॉक्टर कैथरीन ओ ब्रायन का कहना है कि कोविड-19 महामारी की वैक्सीन के बारे में लोगों को जागरुक करना और उन्‍हें इस बात का भरोसा दिलाना बेहद जरूरी है कि ये वैक्‍सीन सुरक्षित हैं, काफी जरूरी है। उन्‍होंने ये भी कहा है कि वैक्‍सीन और इसके फायदे के बारे में खुद अपनी राय विकसित करेंगे जो भविष्‍य में इसके लिए जरूरी इक्‍यूपमेंट जुटाने में सहायक साबित होंगी।

    उन्‍होंने ये भी कहा है कि डब्‍ल्‍यूएचओ चाहता है कि वैक्‍सीन के जरिए लोगों को इसके पीछे की साइंस के बारे में भी जानकारी हासिल हो। ऐसा इसलिए भी है क्‍योंकि इससे लोगों को भरोसा दिलाने में मदद मिलेगी कि वैक्‍सीन सुरक्षित है। इस काम में कंपनियां, डॉक्‍टर, नर्स बखूबी कर सकते हैं। इसके अलावा स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं से जुड़े लोग भी इसमें मदद कर सकते हैं।

  • वैज्ञानिक प्रमाण मिलेगा आयुर्वेद से कोरोना के इलाज को, लखनऊ में शुरू होगा ट्रायल

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    लखनऊ। कोरोना महामारी को आयुर्वेद से मात देने के दावे का वैज्ञानिक प्रमाण शीघ्र ही ट्रायल के जरिए सामने आएगा। क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया (सीटीआरआइ) ने ट्रायल की अनुमति दे दी है, जो लोकबंधु कोविड अस्पताल में होगा। यहां कोविड के बायोमार्कर आयुर्वेदिक औषधियों से कोरोना ठीक होने का वैज्ञानिक प्रामाण परखा जाएगा। ट्रायल में एक से डेढ़ माह का समय लग सकता है। अगर यह सफल रहा तो देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।

    लोकबंधु कोविड-19 अस्पताल में कुछ माह पहले 120 कोरोना मरीजों पर आयुर्वेदिक औषधियों से संक्रमण मुक्त करने का ट्रायल हुआ था, जो 100 फीसद सफल रहा था। बाद में इस शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित भी किया गया। ट्रायल में मरीजों के तीन ग्रुप बनाए गए थे। इनमें से कुछ मरीजों को सुबह शाम सोंठ का पाउडर व कच्चे लहसुन की डोज डॉक्टर के परामर्श के अनुसार दी गई। कुछ मरीजों को लोकबंधु अस्पताल में ही तैयार विशेष प्रकार का काढ़ा दिया गया, जिसमें कई अतिरिक्त औषधियां मिलाई गई थीं।

    वहीं, कुछ मरीजों को इन दोनों में से कुछ भी नहीं दिया गया। पड़ताल में देखा गया कि जिन मरीजों को सोंठ पाउडर व कच्चा लहसुन की डोज दी गई, उनकी कोरोना रिपोर्ट पांच-छह दिन में निगेटिव आ गई। जिन्हें विशेष प्रकार का काढ़ा दिया गया, वह मरीज भी सात से नौ दिन बाद संक्रमण मुक्त हो गए। जिन्हें कुछ नहीं दिया गया, उनमें संक्रमण बना रहा। इस प्रकार यह सिद्ध हो गया कि आयुर्वेदिक नुस्खों से मरीज कोरोना संक्रमण से मुक्त हो रहे है। हालांंकि, दावे के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। यही वजह है, नए ट्रायल का फैसला हुआ है।

    50 मरीजों पर ट्रायल

    लोकबंधु अस्पताल के आयुर्वेद एवं पंचकर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. आदिल रईस ने बताया कि क्लीनिकल ट्रायल के लिए 50 मरीज चुने हैैं। इनके ब्लड मार्कर में आयुर्वेदिक दवाएं शुरू करने से पहले और बाद में उनके साइटोकाइन स्टॉर्म की स्थिति का आकलन करेंगे।

    ऐसे सिद्ध होगी वैज्ञानिक प्रमाणिकता

    देखा जाएगा कि ब्लड मार्कर आयुर्वेदिक दवाओं के असर से किस प्रकार परिवर्तित हो रहे हैं। साइटोकाइन स्टॉर्म एक तरह से इम्यून सिस्टम हैं, जो रोगों से लड़ते हैं। हां, कोविड के मामले में यह देखा गया है कि साइटोकाइन स्टॉर्म अपने ही शरीर को नुकसान पहुंचाने लगते हैं। आयुर्वेदिक दवाओं से साइटोकाइन स्टॉर्म की स्थिति को ठीक किया जाता है, ताकि शरीर का इम्यून सिस्टम कोरोना से जंग लड़ सके।

    यह जांच होगी जरूरी

    प्रक्रिया के दौरान मरीजों के कई रक्त आधारित टेस्ट होंगे। इनमें आइएल-6, डी-डाइमर (रक्त के जमने की स्थिति बताता है), एलडीएच, सीबीसी, सीआरपी, लिवर व किडनी फंक्शन टेस्ट इत्यादि हैं। यदि सभी ब्लड मार्कर दवाओं के असर से संतुलित स्थिति में आते हैं या सकारात्मक परिणाम देते हैं तो आयुर्वेदिक इलाज पर वैज्ञानिक मुहर लग जाएगी।

     

  • इन 5 ज़रूरी बातों का धूप में निकलने से पहले सर्दी हो या गर्मी रखें ख्याल

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    यकीनन UV रेज़ से स्किन को बचाकर रखने के लिए सनस्क्रीन काफी ज़रूरी होता है। लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आप मॉइश्चराइज़र का इस्तेमाल ना करें। ये भी सनस्क्रीन जितना ही ज़रूरी है। धूप में पसीने के साथ स्किन से नैचुरल ऑयल भी निकल आता है। अगर आप स्किन को मॉइश्चराइज़ नहीं करेंगी, तो ये अपना मॉइश्चर खोकर ड्राय हो जाएगा। इस मौसम में हमेशा एक ऑयल फ्री मॉइश्चराइज़र का इस्तेमाल करें।

    सिर्फ चेहरा नहीं, आपके होंठों को भी Uv रेज़ से प्रोटेक्शन की ज़रूरत होती है. अगर आप इसे प्रोटेक्ट नहीं करेंगी, तो ये ड्राय और डल हो जाएगा. इतना ही नहीं, ये धीरे-धीरे डार्क नज़र आने लगेगा. इसलिए धूप में जाने से पहले SPF वाला कोई अच्छा लिप बाम ज़रूर लगाएं. ये आपके होंठों को प्रोटेक्शन देने के साथ ही इसे सॉफ्ट-स्मूद भी रखेगा.

    होंठों की तरह आपके आंखों को भी प्रोटेक्शन की ज़रूरत होती है। अगर आप इसे धूप से बचाकर नहीं रखेंगी, तो डार्क सर्कल्स और झुर्रियों की परेशानी हो सकती हैं। इसलिए बाहर निकलने से पहले अपने साथ सनग्लासेज़ ज़रूर रखें और इसे पहनकर अपनी आंखों को प्रोटेक्शन दें।

    जब आप धूप में निकलती हैं, तो पसीने की वजह से आपकी बॉडी से काफी पानी निकल जाता है। अगर आप इसकी भरपाई नहीं करेंगी, तो स्किन डिहाईड्रेट हो जाएगी और डल नज़र आएगी। इसलिए सिर्फ घर पर नहीं, बाहर निकलने पर भी जितना पानी हो पिएं। इसके साथ ही फ्रेश फ्रूट जूस भी पिएं।

    कई ऐसे इंग्रीडिएंट्स होते हैं जो धूप में रिएक्ट कर स्किन एलर्जी जैसी परेशानी की वजह बनते हैं। रेटिनॉएड और hydrocortisone इन्हीं में से एक है। अगर आपकी क्रीम या लोशन में ये मौजूद हो तो इन्हें अप्लाई करने के बाद धूप में ना निकलें।