Category: health

  • लिप्स कलर्स का सही मैच और पाएं परफेक्ट लुक

    आजकल बोल्ड लिप कलर खूब चलन में है। अगर आप मेकअप के साथ इन लिप कलर्स का सही मैच करें, तो ये आपको डिफरेंट लुक देते हैं। लिपस्टिक आपके लुक को एक अलग आयाम देता है, यह आपके सौंदर्य में चार चांद लगा देता है। अगर आप त्योहारों में अपने लुक के साथ प्रयोग करना चाहती हैं तो नारंगी, ब्लैक और बैंगनी रंग के लिपस्टिक का चुनाव कर सबसे अलग नजर आ सकती हैं।कॉपर ब्राउन कलर हर किसी पर सूट करता है। इस रंग की लिपस्टिक लगाते ही चेरहा एक शाइन करने लगता है।
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    चॉकलेट शेड आपके लुक को हॉट और ट्रेंडी बना देता है। इनदिनों हमारे ग्लैमर जगत की हसीन दीवास का ये पसंदीदा कलर्स में एक है।
    नारंगी रंग की लिपस्टिक या इससे मिलते-जुलते शेड्स इस सीजन में छाए हुए हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह हर परिधान और गोरी या सांवली हर महिला पर जंचता है।
    कॉपर कलर की खासियत ये है कि इसे कहीं भी लगाया जा सकता है।
    रोजी लिप्स
    रेड लिपस्टिक इस सीजन का हॉट है और ग्लैमरस लुक भी देती है, तो आप भी रेड रोज के कलर से मैच करती शॉकिंग रेड लिपस्टिक अप्लाई करें। आंखों पर सिल्वर शिमरी आईशैडो लगाएं और ब्लैक आईलाइनर से ऊपरी पलकों पर बाहर खींचते हुए एक लाइन लगाएं।

  • ऐसे बनायें नववर्ष को यादगार !

    365 दिन के लम्बे इंतजार के बाद नया साल मनाने की रात फिर से आ रही है। ठंडी हवाओं का चलना, नई कलियों का खिलना और प्रकृति का नवयौवना सा रूप नववर्ष के आगमन का संदेश देता है। जब सारी पृथ्वी पूरी मस्ती में होती है, तो भला युवा होती नई पीढी कैसे गुमसुम रह सकती है और रहे भी क्यों। नए साल का स्वागत करना हामारा कत्र्तव्य है और परिवर्तन हमारा जीवन। सिर्फ ध्यान इस बात का रखना है कि मस्ती में कहीं कुछ गलत ना हो जाएं। आज वैश्विक एकता का युग है। संपूर्ण संसार के देशों ने एकदूसरे को किसी ना किसी रूप में प्रभावित किया है, कभी सांस्कृतिक तौर पर, तो कभी बाजार बन कर। इसीलिए तो नववर्ष आज सारी दुनिया का त्यौहार बन गया है। इस दिन सभी कुछ नया करने की चाहत रखते हैं।
    बात जब भी नवीनता को अपनाने की होती है, तो आलोचनाओं के तीर पसोपेश में डाल देते हैं। सामाजिक बंधन अपनी धारा से हटना नहीं चाहते और युवा मन नवीनता की चाह में सारे बंधन तोड देना चाहता है।
    बुराई संस्कृति में नहीं, उसे अपनाने के तरीके में होती है। इसलिए किसी भी शैली को दोष देने के बजाय उस के मूल में छिपे उत्तम आधार का सार अपनी संस्कृति के अनुसार ढाल कर अपनाना चाहिए। शैली कोई भी हो, बुरी नहीं होती। उद्देश और लक्ष्य निर्धारित होना चाहिए।
    मनोरंजन ना बने मनोभंजन
    मनोभंजन ना बन जाए। आनंद की अंधी खोज कहीं गमों के अंधेरे में खोने को मजबूर ना कर दे।
    एक कहावत है कि नया नौ दिन पुराना सौ दिन। कहावत भले ही पुरानी है, किन्तु शब्दों की सार्थकता आप भी उतनी ही है जितनी इस कहावत के जन्म के समय थी। सचाई मापने के लिए हम किसी भी मामले को ले सकते हैं, फिर चाहे वह वस्तुओं की उपयोगिता हो या गुणों की गुणवत्ता, प्राय: मजबूत आधार को ही स्थान प्राप्त हुआ है। नवीनता अपनेआप में एक उत्साह व उमंग जगाती है। निश्चय ही यह प्रगति का पैमाना भी है। यह उदास मन को प्रसन्न करने की एक प्रेरणा भी है। नवीन उपायों की खोज ने ही हमें सुविधायुक्त आधुनिक जीवन दिया हैप नया करने की चाह ही नया संसार बनाती है। नई सोच, नए विचार हमें परिपक्व और साहसी बनाते हैं। नया तरीका, नई संस्कृति, नया रूप एक नई जीवनशैली बनाते हैं।
    लेकिन नवीनता उस रूप में ही सब के द्वारा अपनाने लायक होती है, जिस में शालीनता हो तथा जिस में सब के भले की भावना हो। कोई भी नया दौर संपूर्ण सतुष्टि नहीं दे सकता। किसी भी नवीन कल्पना के अच्छे-बुरे दोनों पहलुओं का होना शाश्वत सत्य है। ये एक दूसरे के पूरक भी होते हैं, किन्तु इन के मध्य का संतुलन ही समाज में पल्लवित हो सकता है और अपना स्थान बना सकता है। नववर्ष नई रूचियों को अपना कर भी मनाया जा सकता है। अच्छे नवीन कार्यों का संकल्प नई स्फूर्ति दे सकता है। सामाजिक सेवा से जुडे कार्यों का आरंभ भी नया नाम देता है। संबंधों की नई पहल से नया उत्साह जागजा है। उगते सूरज से स्वास्थ्य की कामना करना भी नववर्ष के आरंभ का सुंदर आधार बन सकता है। विभिन्न सांस्कृतिक कलाओं का सामूहिक आयोजन जागरूकता और एकता को बढावा देता है, जो नववर्ष को यादगार भी बना सकता है।

  • यूरिन इंफैक्शन को जड़ से खत्म करेंगे ये छोटे-छोटे नुस्खे

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    यूरिन इंफैक्शन यानी पेशाब करते समय जलन या दर्द होना। यह समस्या स्त्री या पुरूष दोनों को कभी भी हो सकती है। कई बार तो यह समस्या कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती है लेकिन बहुत सी बार डॉक्टरों के पास जाने तक की नौबत आ जाती है। हम लोग अक्सर यूरिन इंफैक्शन को अनदेखा कर देते है जो बाद में कई समस्याओं का कारण बनता है। ऐसे आपको चाहिए कि जब भी यूरिन करते समय जलन या दर्द हो तो तुरंत इलाज शुरू कर दें, ताकि बाद में किसी प्रकार की कोई बड़ी बीमारी होने का खतरा टल जाए। आज हम आपको यूरिन इंफैक्शन के कारण, लक्षण और इसके इलाज के लिए कुछ घरेलू नुस्खे बताएंगे, जिन्हें आप घर पर ही ट्राई करके देख सकते है।

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    यूरिन में जलन के कारण

    मूत्र मार्ग में संक्रमण या ब्लैडर में सूजन
    किडनी में पथरी होना
    शरीर में पानी की कमी
    लीवर प्रॉब्लम होना
    रीढ़ की हड्डी में चोट लगना
    शुगर की बीमारी होना
    यूरिन में जलन के लक्षण
    यूरिन से स्मैल आना
    ब्लैडर में दर्द रहना
    बार-बार यूरिन आना
    यूरिन का रंग पीला हो जाना
    बूंद-बूंद पेशाब आना
    पेट और मूत्र मार्ग में जलन

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    urine problem

    चलिए आपको बताते है पेशाब करते समय जलन और दर्द के कुछ घरेलू इलाजः-

    1. अधिक पानी पीना
    अगर यूरिन लग कर आ रहा है तो हर एक घंटे में पानी का गिलास पीएं। इससे ब्लैडर में जमा हुए बैक्टीरिया बाहर निकल जाएगे और शरीर में पानी की कमी भी नहीं होगी।

    2. सिट्रिक एसिड युक्त फल
    जिन फलों और सब्जियों में सिट्रिक एसिड की मात्रा अधिक होती है, उनका सेवन करें। यह एसिड यूरिन इंफैक्शन बनाने वाले बैक्टीरिया को खत्म कर देता है। ऐसे में खट्टे फल यानी नींबू, मौसमी अन्य आदि का सेवन करें।

    3. नारियल पानी पीएं
    नारियल पानी पीने से भी यूरिन के दौरान होने वाली जलन कम हो सकती है। साथ ही रोजाना नारियल पानी पीने से शरीर को पानी और मिनरल्स भरपूर मात्रा में मिलते है।

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    4. चावल का पानी
    आधा गिलास चावल के पानी में चीनी मिलाकर पीने से यूरिन में होने वाली जन कम हो सकती है।

    5. बादाम और इलायची
    बादाम की 5 गिरी में 7 छोटी इलायची और मिसरी डालकर पीस लें। फिर इसे पानी में घोलकर पीएं। इससे दर्द और जलन कम होती है।

    यूरिन इंफैक्शन के आयुर्वेदिक उपचार
    1. आंवला और इलायची
    आंवले का चूर्ण में इलायची मिलाकर पानी के साथ पीएं। इससे यूरिन की जलन कम होगी।

    2. बेकिंग सोडा और पानी
    अगर यूरिन इंफैक्शन के दौरान बार-बार पेशाब आए तो 1 गिलास पानी में 1 चम्मच सोडा मिलाकर पीएं। इससे एसिडिटी और जलन की समस्या कम होगी।

    3. गेहूं और मिसरी
    रात को सोने से पहले 1 मुट्ठी गेंहू को पामी में भिगोएं और सुबह उसी पानी को छान लें। फिर उसमें मिसरी मिलाकर खाएं।

  • सर्दियों में खाली पेट रहने पर लग सकती है ठंड

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    मानव शरीर में ज्यादा या कम तापमान में खुद को संतुलित कर लेने की क्षमता होती है लेकिन किन्हीं कारणों से जब यह क्षमता घट जाती है या बाहर का तापमान बहुत कम हो जाता है, तो शरीर तापमान के मुताबिक संतुलन नहीं बना पाता। इसमें शरीर का तापमान 34-35 डिग्री तक नीचे चला आता है। इसकी वजह से सर्दियों में हाइपोथर्मिया होने का खतरा बढ़ जाता है। आम भाषा में हम इसे ठंड लगना कहते हैं।
    इस बीमारी में रोगी के हाथ-पांव ठंडे पडऩे लगते हैं, काम करना बंद कर देते हैं, पेट में असहनीय पीड़ा होने लगती है। हाइपोथर्मिया का खतरा सबसे ज्यादा छोटे बच्चों और बुजुर्गों को होता है। इसमें उनका शरीर नीला पडऩे लगता है। कई बार हाइपोथर्मिया जानलेवा भी हो सकता है। खाली पेट हाइपोथर्मिया का खतरा ज्यादा होता है।
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    बीमारी को ऐसे पहचानें
    शरीर का तापमान अगर 95 डिग्री से कम हो जाए या शरीर पर्याप्त गर्मी न पैदा कर पाए, तो हाइपोथर्मिया की स्थिति पैदा हो जाती है। इस बीमारी में रोगी की आवाज धीमी हो जाती है या उसे नींद आने लगती है। पूरा शरीर कांपने लगता है। हाथ-पैर जकडऩे लगते हैं। दिमाग शरीर का नियंत्रण खोने लगता है।
    रोगी का प्राथमिक उपचार
    हाइपोथर्मिया के रोगी को सबसे पहले गर्म कपड़ों से ढककर किसी गर्म कमरे या गर्म जगह पर लिटा दें। ध्यान रहे ऐसी स्थिति में सीधे गर्मी देना खतरनाक हो सकता है इसलिए आग के पास या हीटर के पास मरीज को सीधे न ले जाएं। हाइपोथर्मिया के मरीज को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न दें।
    शराब पीने से भी खतरा
    ठंड के मौसम में शराब पीने से अचानक से गर्मी लगने लगती है तो ये हाइपोथर्मिया की चेतावनी हो सकती है। ठंड लगने पर हृदय की गति सामान्य से तेज हो जाती है। ऐसी स्थिति में मांसपेशियां तापमान का लेवल बनाए रखने के लिए एनर्जी रिलीज करती हैं। शराब पीने से हाथ-पैर की नसें फैलती हैं लेकिन ऐसे में खून का प्रवाह कम हो जाता है। इससे हाथ-पांव ठंडे होने लगते हैं मगर इस बात का भ्रम होता है कि ये गर्म हैं।
    अन्य बीमारियां- सर्दी, खांसी, खराश और सिर दर्द
    सर्दियों में अपना ख्याल न रखने पर खांसी, जुकाम, गले में खराश और सिर दर्द होना सामान्य बात है। इनसे बचने के लिए ठंडी चीजें खाने से परहेज करें। खराश के लिए नमक के गरारे करना अच्छा विकल्प है। ठंडी हवाओं में सिर न ढकने से सिर दर्द बना रहता है।
    सांस की समस्या
    ठंड में सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। अस्थमा के रोगियों को इन दिनों बहुत दिक्कत होती है।
    सीने और जोड़ों में दर्द
    सर्दी के बढऩे पर कफ या अन्य कारणों से सीने में दर्द की समस्या हो सकती है। जोड़ों में दर्द से बचने के लिए हर दिन मालिश और व्यायाम करना चाहिए। साथ ही तले-भुने पकवान की जगह घर में बना भोजन करना चाहिए।
    ब्लडप्रेशर
    सर्दी के दिनों में रक्तचाप अधिक होने से हृदय संबंधी तकलीफें भी हो सकती है। इसके लिए भी आपको व्यायाम और सही उपचार पर ध्यान देने की जरूररत होती है।
    रात में ड्राइव करने वालों के लिए हिदायत
    कान के पास से सेवेंथ क्रेनियल नस गुजरती है, जो तेज ठंड होने पर सिकुड़ जाती है। इसकी वजह से फेशल पैरालिसिस हो सकता है। इसमें मुंह टेढ़ा हो जाता है, मुंह से झाग निकलने लगता है, बोलने में जबान लडख़ड़ाने लगती है। खासकर रात के वक्त बिना सिर ढके ड्राइव करने वालों इसका खतरा बढ़ जाता है।

  • ये हैं थाइरॉयड की निशानी, यूं करें अपना बचाव

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    पुरुषों की तुलना में महिलाओं को थायरॉइड की समस्या ज्यादा होती है। बढ़ती उम्र के साथ इसके बढऩे का खतरा ज्यादा होता है। थायरॉइड के कारण महिलाओं में मेटाबॉलिज्म की दर धीमी पड़ जाती है। इसका मतलब यह कि आप जो खाना खाती हैं, उसका आपकी एनर्जी की आवश्यकताओं के लिए उचित तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। आपकी बॉडी में फैट का जमाव और वजन बढऩा शुरू हो जाता है।
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    Thyroid issues are prevalent in women.

    जब थायरॉइड अंडरएक्टिव होता है तो शरीर को पर्याप्त एनर्जी नहीं मिलती, जिसके कारण नींद आती रहती हैं। यहां तक कि जरा सा शारीरिक श्रम करने पर भी व्यक्ति बहुत ज्यादा थका हुआ महसूस करता है। हायपरथायरॉइड से पीड़ित लोगों में मांसपेशी और जोड़ों में दर्द हो सकता है, खासकर बांह और पैर में।’
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    थायरॉइड में इनका न करें सेवन
    तला भुना खाना
    डॉक्टर थायरॉइड हार्मोन को बनाने वाला ड्रग देता है। तला हुए खाने से दवा का असर कम हो जाता है।
    चीनी
    ज्यादा चीनी या चीनीयुक्त पकवानों को खाने से बचें।
    कॉफी
    ज्यादा कॉफी पीने से इसमें मौजूद एपिनेफ्रीन और नोरेपिनेफ्रीन थायरॉइड को बढ़ावा देते हैं।
    गोभी से बचें
    थायरॉइड के इलाज के दौरान बंदगोभी और ब्रोकोली खाने से बचें।
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    ग्लूटेन
    इसमें ऐसे प्रोटीन होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को कमजोर करते हैं। इसीलिए, थायरॉइड होने पर इसे पूरी तरह अवॉइड करें।
    सोया
    हाइपोथायरॉइडिजम के इलाज के दौरान सोया नहीं खाना चाहिए लेकिन थायरॉइड की दवाई लेने के 4 घंटे बाद खा सकते हैं।
    दवा न खाने पर नई बीमारी होने का खतरा
    अगर थाइरॉयड के मरीज रोजाना दवा का सेवन नहीं करते तो उन्हें कई तरह की नई बीमारियों का सामना करना प सकता है।
    ब्लड प्रेशर
    दवा नियमित न लेने पर ब्लड प्रेशर कभी बढ़ या कभी घट सकता है। यानी ब्लडप्रेशर अनियमित हो सकता है।
    बुखार
    थायरॉइड की दवा शरीर में हारमोन को संतुलित करती है। दवा नहीं लेने पर शरीर में असामान्य बदलाव होते हैं। नतीजतन अकसर बुखार बना रह सकता है।
    थकान
    शरीर में थकान बनी रहती है। थकन के कारण ही शरीर में बुखार का एहसास बना रहता है।
    तनाव
    मरीज तनाव से घिर सकता है। यह तनाव आसानी से दूर नहीं जाता।
    याद्दाश्त
    रोजाना दवा न लेने पर मरीज को याद्दाश्त सम्बंधी समस्या हो जाती है।
    कॉलेस्ट्रॉल
    थाइरॉयड की दवाओं का सेवन न करने से कॉलेस्ट्रॉल का स्तर भी प्रभावित होता है।
    वजन बना
    थाइरॉयड के मरीज अकसर मोटे होते हैं। लेकिन जो लोग दवा नहीं लेते, वे असामान्य रूप से मोटे हो जाते हैं फिर उनका वजन घटाया भी नहीं जा सकता है।
    इनफर्टिलिटी
    मरीज को थाइरॉयड की दवा का सेवन इसलिए भी करना चाहिए ताकि उसकी फर्टिलिटी बनी रहे।
    गर्भपात
    थाइरॉयड से ग्रस्त गर्भवती को दवा जरूर लेनी चाहिए। ऐसा न करने पर गर्भपात हो सकता है। शिशु भी इसी बीमारी से पीति हो सकता है।

  • पूरी दुनिया हैरान रह गई यह जानकर कि यह महिला अपना दिल सीने में नहीं, अपने बैग में लेकर घूमती है !

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    लंदन। दिल को हाथों में थाम कर चलने की कहावतें तो आपने बहुत सुनी होगी पर क्या सच में ऐसा होते कभी देखा है अगर नही तो चलिए आपको एक ऐसी महिला से मिलवाते हैं जो अपना दिल अपने हाथों में क्या बल्कि अपने बैग में ले कर घुमती हैं. जी हां, ये सुनकर भले ही आपको विश्वास ना हो पर ये सच है.. आप माने या ना माने लेकिन दुनिया में एक ऐसी भी महिला है जिसका दिल उसके सीने में नहीं धड़कता है बल्कि वो उसे अपने बैग में लेकर घूमती है.।

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    कल तक जिन बातों को चमत्कार माना जाता था, आज साइन्स ने उन्हें ही सच साबित कर दिया है.. आप आर्टिफियल हार्ट लगाकर इंसान को जिंदा रखने वाली सर्जरी के बारे में तो जानते होगें जो कि अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है, पर हाल ही में मेडिकल साइंस ने इससे भी आगे जाकर कुछ ऐसा करिश्मा कर दिखाया है जिसे जान पूरी दुनिया हैरान रह गई. दरअसल ये मेडिकस साइंस का चमत्कार ही है कि ब्रिटेन की रहने वाली 39 वर्षीय साल्वा हुसैन का दिल उनके शरीर के बाहर काम रहा है।

    असल में, साल्वा हुसैन को आज से लगभग 6 महीने पहले सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. सेल्वा की ये परेशानी इतनी गम्भीर हो गई कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा जहां जांच में पता चला कि उन्हें सीरियस हार्ट फेलियर की दिक्कत है. चूंकि साल्वा की हालात इतनी नाजुक हो चुकी थे कि उनकी सर्जरी भी नहीं की जा सकती थी.. ऐसे में उन्हें जिंदा रखने के लिए लाइफ सपोर्ट का सहारा लेना पड़ा।

    इस गम्भीर हालत में साल्वा को जिंदा रखन के लिए डॉक्टर्स ने उनके लिए एक ऐसा आर्टिफीशियल दिल तैयार किया जो कि शरीर के बाहर होने के बावजूद भी बिल्कुल दिल ही तरह ही काम करता है और खून को पूरे शरीर में पंप करता है. उसके बाद से साल्वा इसी कृत्रिम दिल के सहारे जिंदा है.. ऐसे में साल्वा हर वक्त अपने साथ एक बैग रखती है जिसमें उनका दिल होता है . 2 बच्चों की मां साल्वा इसी तरह अपनी जिंदगी गुजार रही हैं .. साल्वा के साथ हमेशा एक और बैक-अप सिस्टम, उनके पति और एक सहायक रहते हैं, ताकि अगर कभी साल्वा के सिस्टम में कुछ खराबी आए तो उसे तुरंत उसे बदला जा सके. दरअसल किसी गंभीर परिस्थिति में साल्वा के इस आर्टिफीशियल दिल को केवल 90 सेकंड के अंदर बदलना होता है। वैसे फिलहाल साल्वा इस कृत्रिम दिल के सहारे अच्छी खासी जिंदगी जी पा रही हैं .. साल्वा का एक 5 साल का बेटा और एक 18 महीने की बेटी है. गौरतलब है कि साल्वा हुसैन दुनिया की दूसरी ऐसी शख्स हैं जिनके पास ऐसा कृत्रिम दिल है।

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  • मोच और अंदरूनी चोट से आराम दिलाएंगे ये उपचार

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    किसी दुर्घटना का शिकार होने पर या किसी धारदार हथियार से कट जाने पर जब त्वचा से खून आने लगता है तो उसे चोट कहा जाता है। वहीं किसी ऊबड़-खाबड़ जगह पर चलने या गड्ढे में अचानक से पैर आने पर मोच या फिर अंदरूनी चोट आ जाती है। मोच आने से उस अंग पर सूजन आ जाती है और काफी दर्द होने लगता है। इस दर्द का सही तरीके से अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है क्योंकि यह दिखाई तो नहीं देती लेकिन महसूस बहुत होती है। इसलिए हमें मोच या चोट आने पर तुरंत इसे ठीक करने के लिए प्राथमिक उपचार करना चाहिए। चलिए आपको बताते है कि ऐसी स्थिति में कुछ घरेलू उपचार के जरिए कैसे मोच,अंदरूनी चोट एवं सूजन को दूर कर सकते है।

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    अंदरूनी चोट को ठीक करने के उपाय
    1. अगर आपको लकड़ी-पत्थर लगने से सूजन आई है तो इसके लिए आप हल्दी एवं खाने का चूना एक साथ पीसकर गर्म लेप लगाए अथवा इमली के पत्तों को उबालकर बांधने से भी सूजन उतर जाती है।
    2. कभी-कभी कठिन व्यायाम करने पर भी अचानक से मोच आ जाती है। इसके लिए अरनी (एक प्रकार का पौधा) के उबाले हुए पत्तों को किसी भी प्रकार की सूजन पर बांधने से काफी आराम मिलता है।
    3. मोच या चोट के कारण यदि खून जम गया हो एवं गांठ पड़ गई हो तो बट के पेड के कोमल पत्तों पर शहद लगाकर बांधने से लाभ होता है।
    4. बच्चों को खेलते समय मोच आ जाए तो मोच के स्थान पर चने बांधकर उन्हें पानी से भिगोते रहें। जैसे-जैसे चने फूलेंगे वैसे-वैसे मोच दूर होती जाएगी, यह एक बेहतरीन इलाज माना गया है।
    5. मोच के कारण आई सूजन के दूर करने के लिए गुनगुने पानी में फिटकरी मिलाकर चोट वाले हिस्से पर सिकाई करें।
    6. सीढियों से अचानक पैर फिसल जाने के कारण भी अक्सर लोगों को चोट व मोच आ जाती हैं । सरसो और हल्दी को गर्म करके उसे मोच वाले स्थान पर लगाए और उस पर एरण्ड के पत्ते को रखकर पट्टी बांध दें।
    7. सूजन में करेले का साग खाना भी लाभप्रद माना जाता है।

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  • संतरे के सेवन से दूर होगी ये 8 बड़ी-बड़ी समस्याएं

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    सर्दी के मौसम में बीमारियों से बचने के लिए खान-पान का खास ख्याल रखना पड़ता है। इस मौसम में जरा सी लापरवाही आपको सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों की शिकार बना सकती है। वैसे तो सर्दियों में संतरा खाना हर किसी को पसंद होता है लेकिन शायद ही कोई इससे होने वाले फायदों के बारे में जानता हो। सर्दियों में रोजाना संतरे या इसके जूस का सेवन जुकाम-खांसी के साथ कई बड़ी-बड़ी बीमारियों को दूर करने में मदद करता है। एमिनो एसिड, फाइबर, कैल्शियम, आयोडीन, फॉस्फोरस, सोडियम, मिनरल्स, विटामिन ।   गुणों से भरपूर संतरा कैंसर और दिल की बीमारियों को दूर रखता है। इसके अलावा रोज संतरा खाने से इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है। तो चलिए जानते है रोजाना संतरे या इसके जूस का सेवन आपको किन बीमारियों से दूर रखता है।

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    1. सर्दी-जुकाम
    संतरे में मौजूद विटामिन सी सर्दी-जुकाम, खांसी और कप जैसी समस्याओं को दूर करता है। रोजाना इसके जूस में नींबू का रस मिलाकर पीना भी सेहत के लिए फायदेमंद होता है।

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    संतरा-खाने-के-फायदे-और-घरेलु-नुस्खे

    2. ब्लड प्रेशर कंट्रो
    फाइबर और सोडियम के गुणों से भरपूर संतरा डायबिटीज मरीजों के लिए अच्छा होता है। रोजाना इसका सेवन ब्लड प्रैशर को कंट्रोल करता है।
    3. कैंसर
    इसमें मौजूद विटामिन ए और सी शरीर में मौजूद लाइमोनिन कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकते है। एक स्टडी के मुताबिक संतरा लीवर और ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करता है।
    4. किडनी की पथरी
    किडनी स्टोन की समस्या होने पर रोजाना संतरे और इसके जूस का सेवन करें। पथरी 2-3 हफ्ते में ही निकल जाएगी।
    5. बवासीर
    यह पेट के अल्सर को खत्म करके बवासीर से राहत दिलाता है। इसके अलावा संतरे के छिलका का पाउडर बनाकर गर्म पानी के साथ पीने से बवासीर से राहत मिलती है।

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    6. गठिया
    सर्दियों में गठिया रोगियों के जोड़ों और घुटनों का दर्द और भी बढ़ जाता है। ऐसे में संतरे के रस और बकरी के दूध को मिलाकर पीने पर इस दर्द से राहत मिलती है।
    7. बुखार
    अगर आपको तेज बुखार है तो दिन में 2 बार संतरे के जूस का सेवन करें। इसका सेवन शरीर के तापमान को कम करने में मदद करता है।
    8. पेट की समस्याएं
    संतरे के रस को गर्म करके उसमें काली मिर्च और सूंड का रस मिला लें। पेट में गैस, अपच, कब्ज, बदहजमी, सूजन, इंफेक्शन और बदहजमी को दूर करने के लिए इस मिश्रण का सेवन का सेवन करें।

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  • एड़ियों में रहता है दर्द तो इसका कारण जानकर करें ये उपचार

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    हर कोई आजकल अपने-अपने काम में बहुत व्यस्त हो गया है। ज्यादातर पति-पत्नी दोनों ही कामकाजी होते हैं और सारा दिन जिम्मेदारियों और भागदौड में वह अपनी सेहत का भी सही तरह से ध्यान नहीं रख पाते। इसकी बीच लोगों को छोटी-मोटी सेहत से जुड़ी परेशानियों से भी जूझना पड़ता है। इन्हीं में से एक है एड़ी का दर्द। पुरूष हो या फिर महिला दोनों में से किसी को भी इस असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है। इसके बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे ऊंची एड़ी के सैंडल पहनना,पैर की हड्डी का बढ़ना,दवाइयों का सेवन,पोषक तत्वों की कमी,वजन का बढ़ना आदि। पैर में कुल 26 हड्डियां होती हैं। इसमें से एक हड्डी सबसे बड़ी होती है जो कुुदरती रूप से शरीर का भी भार उठाने में सक्षम होती है। जिसे हम आसानी से अगले चल फिर सकते हैं। चोट या फिर किसी और कारण भी कई बार इसमें दर्द होने लगता है। आइए जानें इसका कारण।
    एड़ी में दर्द के कारण
    – ऊंची एड़ी का सैंडल
    – पैर में मोच आना
    – टाइट फुटवियर पहनना
    – नींद की गोलियों का ज्यादा सेवन
    – डायबिटिज या फिर मोटापा
    – शरीर में पोषक तत्वों की कमी
    – पैर की हड्डी बढ़ जाना
    – ज्यादा देर तक खड़े रहना
    दर्द से बचने के उपाय
    पैरों में दर्द होने पर शुरुआत में ही इस तरफ ध्यान देना बहुत जरूरी है। अनदेखी करने पर यह परेशानी और भी बढ़ सकती है।
    1. एड़ी में दर्द होने पर हाई हील पहनना बंद कर दें। इससे पैरों को आराम मिलेगा।
    2. दर्द वाली जगह पर बर्फ की सिकाई करने से भी बहुत लाभ मिलता है। दिन में 3-4 बार 15-20 मिनट के लिए बर्फ से पैर की सिकाई करें।
    3. सैर,व्यायाम, साइक्लिंग और स्वमिंग से पैरों की हड्डियों को मजबूती मिलती है।
    4. दिन में एक बार 1 चम्मच दूध के साथ 1 चम्मच अश्वगंधा का चूर्ण मिलाकर सेवन करें। इसके बाद एक कप गर्म दूध पी लें।
    5. एलोवेरा, अदरक और काला तिल को मिलाकर गर्म करें और एड़ी पर लगाएं।
    6. घरेलू तरीके से पाएं एड़ी की दर्द से राहत
    एलोवीरा 1/4 चम्मच
    नौशादर का एक टुकड़ा
    हल्दी 1/4 चम्मच
    इस्तेमाल का तरीका
    एक बर्तन में एलोवीरा को हल्की आंच पर गर्म करेें। अब इसमें नौशादर और हल्दी भी मिला लें। जब यह पानी छोड़ दें तो गैस बंद कर दें और फिर गुनगुना होने पर एक रूई के टुकड़े पर रख दें। इसे एड़ी पर पट्टी की तरह बांध लें। इस बात का ध्यान रखें कि यह उपचार रात के समय करें ताकि आपको चलना फिरना न पड़े। लगातार कुछ दिन इसका इस्तेमाल करने से राहन मिलेगी।

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  • लिवर है खतरे में अगर दिखने लगे बॉडी में ये 5 संकेत तो समझ जाएं आपका 

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    लिवर सिर्फ खून को ही फिल्टर नहीं करता यह हार्मोन को प्रोड्यूस करने के साथ ही एनर्जी को स्टोर करने, फूड को डाइजेस्ट करने का भी काम करता है। लिवर के हेल्थ पर ही पूरी बॉडी की हेल्थ डिपेंड करती है। अगर लिवर हेल्दी नहीं है तो आप हेल्दी नहीं रह सकते। यहां हम आपको कुछ ऐसे कॉमन सिम्टम बता रहे हैं जो लिवर के खतरे में होने का संकेत होते हैं। अगर आपको ये संकेत बॉडी में दिखाई दे रहे हैं तो आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

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    एक बीमार लिवर आपके दिमाग और ब्लड में बहुत सारा कॉपर बनने देता है। इससे अल्जमाइजर की तरह कंफ्यूजन रहता है। अगर आपको ऐसा लग रहा है कि आपको डिसीजन लेने में कंफ्यूजन हो रहे हैं तो एक बार डॉक्टर से जरूर मिलें।

    अगर आपका लिवर ब्लड को प्रॉपर्ली क्लीन नहीं कर रहा है तो स्किन पर ब्लड क्लॉटिंग के मार्क दिखाई देंगे। इसको पहचान कर भी आप डॉक्टर के पास जा सकते हैं।

    अगर आपको एबडोमिनल में सूजन, दर्द जैसा फील हो रहा है तो इस बात का संकेत है कि आपका लिवर खतरे में है। अगर आपको लगातार ऐसा पेन हो रहा है तो डॉक्टर से कंसल्ट करें।

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    जॉइन पेन, सर्दी- खांसी, वॉमिटिंग और भूख की कमी ये लिवर के खतरे में होने के संकेत हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार ऐसे संकेत मिले तो डॉक्टर से जरूर कंसल्ट करें।

    जब बॉडी में ब्लड सेल टूटती हैं तो एक बायप्रोडक्ट क्रिएट होता है उसे बिलिरूबिन कहते हैं। हेल्दी लिवर इस बिलिरूबिन को आसानी से डिस्पोज कर लेता है लेकिन बीमार लिवर नहीं कर पाता जिससे स्किन और आंखें पीली होने लगती है। यही बाद में पीलिया में बदल जाता है।

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