नई दिल्ली। स्वस्थ जीवन के लिए हड्डियों को मजबूत बनाए रखना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। सर्द मौसम में दिल्ली जैसे महानगर में प्रदूषण के कारण लोगों तक सूर्य की किरणों से मिलने वाले प्राकृतिक विटामिन-डी कम ही पहुंच पाती है। ऐसे में लोगों के शरीर में विटामिन-डी की कमी होना लाजमी है। इस बारे में फोर्टिस राजन ढल हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के ऑर्थोस्कॉपी एंड स्पॉर्ट्स इंजुरी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. विश्वदीप शर्मा ने कुछ प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला है।
दिन में धूप सेंकने के उचित समय और विटामिन-डी के पर्याप्त स्तर को बनाए रखने को लेकर कई शोध किए गए हैं।
आमतौर पर कहा जाता है कि शरीर का 20 प्रतिशत हिस्सा यानी बिना ढका हाथ और पैरों से प्रतिदिन 15 मिनट धूप का सेवन करने से विटामिन-डी अच्छी मात्रा में लिया जा सकता है। अगला प्रश्न यह है कि दिन का कौन सा पहर सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने का सबसे उपयुक्त होता है। आम धारणा के अनुसार, सुबह का धूप और देर शाम का धूप सेवन के लिए उपयुक्त होता है, जबकि सच्चाई यह है कि सुबह 10 से दोपहर 3 बजे के बीच के दौरान धूप का सेवन मानव शरीर की त्वचा को विटामिन-डी प्रदान करता है। हालांकि धूप के सेवन के दौरान त्वचा पर सन-ब्लॉक क्रीम या लोशन नहीं लगे होने चाहिए।
दिल्ली जैसे शहर, जहां प्रदूषण के कारण लोगों तक धूप नहीं पहुंच पाती है, वहां लोग दुग्ध उत्पादों व आहार के जरिए विटामिन डी का सेवन कर सकते हैं। महिलाओं में विशेष रूप से प्री-मेनोपॉजल और पोस्ट-मेनोपॉजल की श्रेणी की महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोमलेशिया होने की संभावना होती है। वहीं खुद को पूरी तरह से ढकने वाली महिलाओं व सनक्रीम लगाने वाली महिलाओं में भी विटामिन-डी की मात्रा काफी कम होती है, क्योंकि उनकी त्वचा के अंदर धूप प्रवेश नहीं कर पाता है। वहीं बच्चों में विटामिन डी की कमी से रिकेट्स की समस्या होने लगती है।
बच्चों को शुरुआत में ही पर्याप्त आहार के साथ-साथ अच्छी धूप का सेवन कराना आवश्यक होता है। बच्चों को खास कर उन बच्चों को जिन्होंने मां का दूध पीना छोड़ दिया है, उन्हें विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन कराना आवश्यक है।
वहीं सर्दियों में हड्डियों को स्वस्थ रखने में अच्छी मात्रा में कसरत करने से भी फायदा मिलता है। कसरत से हड्डियों का घनत्व बना रहता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।
सेक्सॉलिस्ट्स की मानें तो इंसान के दिमाग में 90 फीसदी वक्त सेक्स रहता है। यहां तक कि सेक्स के बारे में सोचकर ही कई इमोशंस रिलीज करने में मदद मिलती है। वहीं झड़गे के बाद वाले सेक्स की बात करें तो कई लोगों का मानना है कि यह बेस्ट होता है। यहां जानें इसको और प्लैजरेबल कैसे बनाया जा सकता है…
डीप किस से करें शुरआत
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झगड़े के दौरान पैदा हुई एनर्जी का अगर सही इस्तेमाल किया जाए तो सेक्स डीप सैटिस्फैक्शन देने वाला हो सकता है। पार्टनर से किसी बात पर बहस के दौरान ही आप उनका मुंह पैशनेट किस से बंद कर सकते हैं। इसके बाद उनको दिखा दें कि कौन है बॉस…
उन्हें दिखा दें ‘गुस्सा’ क्या होता है
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अपने गुस्से को आप बेड पर हार्डकोर सेक्स सेशन में बदल दें लेकिन ध्यान रखें वायलेंट न हों बल्कि प्यार बरकरार रखें। अपने पार्टनर को फील करा दें कि ऐंग्री सेक्स होता क्या है।
डर्टी टॉक से निकाल दें गुस्सा
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आपके अंदर जो गुस्सा है उसे डर्टी टॉक से बाहर निकाल दें। लड़किया डर्टी टॉक से अराउज होती हैं लेकिन ध्यान रखें कि डर्टी टॉक सेक्सी हो अपशब्द हीं। अपने गुस्से से उन्हें प्यार के लिए उत्तेजित करें।
फील करें और करा दें प्यार की ताकत
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गुस्से के बाद जब पैचअप होता है तो हैपी हॉर्मोन्स का काम शुरू हो जाता है। यह बहुत खुशी देते हैं। इस दौरान पार्टनर से नजदीकी बढ़ती है इस मौके का पूरा फायदा उठाएं। हमेशा ध्यान रखें गुस्सा थोड़ी देर का होता है आखिरकार आप दोनों में गहरा प्यार है, उन्हें यह भी फील करा दें।
सर्दियों में जैसे-जैसे ठंड बढ़ती जाती है दिल के मरीजों के लिए मुसीबत बढ़ती जाती है। हृदय रोगों से ग्रस्त लोगों को सर्दियों में अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि इस मौसम में शरीर से पसीना नहीं निकलता और नमक का स्तर बढ़ता जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर अपने आप बढ़ जाता है। इस दौरान अगर दिल के रोगी एक्सरसाइज न करें, तो स्थिति और भी बदतर हो जाती है। इसके कारण ब्रेन स्ट्रोक का भी खतरा बढ़ता जाता है। धमनियों में सिकुड़न की वजह से रक्त का थक्का भी जम सकता है। इस मौसम में दिल के मरीजों को तैलीय और चिकनाई युक्त चीजों से परहेज करना चाहिए।
उच्च रक्तचाप के लक्षण शुरूआत में दिखाई नहीं देते हैं और जब दौरा पड़ता है, तब पता चलता है। इसलिए इसे साइलेंट किलर भी माना जाता है। यह दूसरी समस्याओं जैसे सीने में दर्द, दिखने में समस्या, चक्कर आना, सिरदर्द होना, आदि से भी संबंधित है। लेकिन इनके साथ उच्च रक्तचाप का संबंध हो जरूरी नहीं। सामान्यतया लोग हार्ट अटैक, किडनी फेल्योर, हॉर्ट फेल्योर पर ध्यान नहीं देते और धीरे-धीरे यह पैरों की नसों तक पहुंच जाता है।
ठंड में heart arteries सिकुड़ने से body में blood circulation करने में हार्ट को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है! इसकी वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर जब 120 एमएम से ऊपर जाता है, तब व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है। 120 से 140 एमएम तक ज्यादा नुकसानदेह नहीं होता। लेकिन जब यह 159 एमएम या इससे अधिक होता है तब हाइपरटेंशन कहलाता है। यह स्थिति खतरनाक हो सकती है, इसलिए समय पर इसे नियंत्रित करें। खानपान के साथ अपनी दिनचर्या भी बदलें।
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शरीर की ऊष्मा (बॉडी हीट) को संरक्षित रखने या बरकरार रखने के प्रयास में हमारी रक्त वाहिनियां सिकुड़ जाती हैं। इसके अलावा सर्दियों में पसीना भी नहींनिकलता। इस कारण शरीर में साल्ट भी संचित हो जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप ब्लड प्रेशर बढ़ता है। ब्लड प्रेशर के बढ़ने पर हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसी स्थिति में जिन लोगों का ब्लड प्रेशर अच्छी तरह से नियंत्रित रहता है, उनकी स्थिति भी खराब हो जाती है और इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को सांस लेने से संबंधित दिक्कतें भी महसूस हो सकती हैं।
संक्रमणों का दुष्प्रभाव
सर्दियों में वायरल इंफेक्शन और ऊपरी सांस नली में संक्रमण आदि होने का जोखिम कहीं ज्यादा बढ़ जाता है। दरअसल फेफड़ों और दिल की कार्यप्रणाली एक-दूसरे पर काफी हद तक संबंधित है। इन संक्रमणों के चलते दिल की स्थिति काफी खराब हो सकती है।
खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन
सर्दियों में कई त्योहार और सामाजिक समारोह भी बड़े पैमाने पर होते हैं। विभिन्न समारोहों में लोग उच्च कैलोरी युक्त और ज्यादा नमक युक्त खाद्य पदार्थ लेते हैं। इनका हृदय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
नियमित व्यायाम न करना
ठंड के प्रभाव के चलते लोग बाहर जाकर टहलने और व्यायाम करने के बजाय कंबल या रजाई में रहना ही पसंद करते हैं। इस कारण लोगों का वजन अन्य मौसम की तुलना में ज्यादा ही बढ़ता है।
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इन बातों पर दें ध्यान
जो लोग हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों से पहले से ही ग्रस्त हैं, उन्हें सीमित मात्रा में नमक (साल्ट) और पानी ग्रहण करना चाहिए। हृदय रोगियों को ठंड से बचाव करना चाहिए। सर्द हवाओं से बचने के लिये high blood pressure और दिल की बीमारी से पीड़ित लोग थोड़ा एलर्ट रहना चाहिए क्योंकि यह weather उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। डाक्टरों के अनुसार सर्दी में high bp के रोगियों के लिये सबसे बड़ी परेशानी यह होती है कि ठंड की वजह से पसीना नहीं निकलता और body में नमक का स्तर बढ़ जाता है जिससे blood pressure बढ़ जाता है।
वे सुबह की सैर को जारी रखें, लेकिन तड़के टहलने न जाएं। धूप निकलने के बाद ही टहलने जाएं। इसी तरह उन्हें देर शाम भी टहलने नहीं जाना चाहिए। खाली पेट ही व्यायाम करें। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करें। वजन न बढ़े, इस बात पर भी नजर रखें। अगर फिर भी ब्लड प्रेशर बढ़ता है, तो डॉक्टर के परामर्श से दवा की डोज को समायोजित करने की जरूरत है।
तब लें डॉक्टर से परामर्श
सीने में संक्रमण, अस्थमा (दमा), ब्रॉन्काइटिस की समस्याएं होने पर शीघ्र ही डॉक्टर से परामर्श लें। कुछ लोगों के लिए सीने में संक्रमण की समस्या गंभीर नहीं होती, लेकिन हृदय रोगियों के लिए यह समस्या काफी गंभीर हो सकती है। खास तौर पर उन लोगों के लिए जिनके हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो चुकी हों। सांस लेने में दिक्कत महसूस होना, पैरों में सूजन होना या तेजी से वजन का बढ़ना आदि लक्षणों के सामने आने पर डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर ही इस बात को सुनिश्चित कर सकता है कि आपके शरीर में समस्या किस प्रकार की है। समस्या के अनुसार ही डॉक्टर आपका इलाज करेगा।
नई दिल्ली। सर्दियों के आते ही त्वचा को खास देखभाल की जरूरत पड़ने लगती है। चेहरे को इस दौरान बेहतर बनाए रखने के लिए इन कुछ खास टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। एवोन में स्किनकेयर एक्सपर्ट इस बारे में कुछ टिप्स साझा किए हैं।
आइए देखते हैं :
1. अपने स्किनकेयर रूटीन का पालन पूरी लगन से करें :
सर्दियों में त्वचा को बेहतर बनाए रखने के लिए अपने स्किनकेयर रूटीन का पालन नियमित तौर पर करें। चेहरे को दिन में दो बार साफ करें, एक बार सुबह और एक बार रात में सोते जाने से पहले। इसके बाद चेहरे पर किसी लाइट मॉश्च्यूराइजर को अप्लाई करना न भूलें, इससे चेहरे की नमीं सर्दियों में भी बरकरार रहेगी, अगर रात का वक्त हो तो बिस्तर पर जाने से पहले हेवी मॉश्च्यूराइजर का उपयोग करें। ऐसा हल्के भीगे चेहरे पर ही करें क्योंकि इससे त्वचा मॉश्च्यूराइजर को अच्छे से सोखती है।
2. हद से ज्यादा एक्सफोलिएट न करें
त्वचा की मृत कोशिकाओं से छुटकारा पाने के लिए एक्सफोलिएशन से बेहतर कोई और विकल्प नहीं है। सर्दियों में आपको अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है क्योंकि इस दौरान त्वचा रूखी हो जाती है। त्वचा को हफ्ते में एक बार जरूर एक्सफोलिएट करें ताकि चेहरे की दमक बरकरार रहे और किसी भी क्रीम या माश्च्यूराइजर या पैक को अगर आप चेहरे पर लगाए, तो वह इसे और अच्छे से सोख पाए। पुरुषों को भी अपनी स्किन टाइप के हिसाब से एक्सफोलिएट के दौरान सावधान रहने की जरूरत है।
3. गर्म पानी से नहाने के बाद नमीं बेहद जरूरी
सर्दियों में लोग गर्म पानी से ही नहाना ज्यादा पसंद करते हैं, लेकिन गर्म पानी से नहाने के बाद अगर किसी बेहतर मॉश्च्यूराइजर का इस्तेमाल नहीं करेंगे तो त्वचा रूखी होने के साथ ही साथ इसमें दरारें भी पड़ जाएगी और इसकी रंगत भी असमान हो जाएगी। अगर नहाने के तुरंत बाद मॉश्च्यूराइजर का इस्तेमाल नहीं करेंगे तो त्वचा में पड़ी दरारों से नसें हवा के संपर्क में आ जाती जिसके परिणामस्वरूप एग्जिमा या त्वचा में खुजली होने लगती है, इसलिए गर्म पानी से नहाने के बाद मॉश्च्यूराइजर का इस्तेमाल करना गलती से भी न भूलें।
4. सनस्क्रीन का उपयोग करें
सर्दियों में सनस्क्रीन लगाना न भूलें। सर्दियों की धूप में निकलने से पहले इसे जरूर लगाए। न केवल यह सूरज की हानिकारक किरणों से होने वाली नुकसान से त्वचा को बचाती है बल्कि इसे लंबे समय तक जवां भी बनाए रखती है।
5. स्लीपिंग मास्क में निवेश करें
कोरियाई सौंदर्य उत्पादों का आजकल काफी चलन है और यह अच्छे भी होते हैं। स्लीपिंग शीट मास्क को रात में मॉश्च्यूराइजर के ऊपर से लगाया जा सकता है ताकि त्वचा क्रीम व उसमें मौजूद जरूरी तत्वों को आसानी से अवशोषित कर सकें।
क्या आपको भी ऑफिस की ड्यूटी खत्म होने और छुट्टी के दिन ऑफिशल ईमेल चेक करने की आदत है? बेहतर होगा कि आप इस आदत को बदल दें। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो इसका नतीजा आपकी सेहत को भुगतना होगा।
स्ट्रेस का जरिया है ईमेल
ऑफिशल ईमेल से जुड़कर आप ऑफिस के बारे में जानकारी रख सकते हैं लेकिन अगर इससे आपने ब्रेक नहीं लिया तो यह स्ट्रेस का जरिया बन जाएगा।
नहीं मिलता ब्रेक
ऑफिस में रहने के दौरान तमाम वजहों से किए गए मेल्स व रिप्लाई और इसके साथ आपके लगातार काम करते रहने के कारण दिमाग पर प्रेशर बना रहता है। ऐसे में अगर ऑफ के दिन या ऑफिस से जाने के बाद भी आप मेल चेक करते रहें तो इस प्रेशर से छुटकारा नहीं मिलेगा जो मेंटल और फिजिकल हेल्थ के लिए सही नहीं है।
इमोशन्स पर पड़ने लगता है असर
मेंटल प्रेशर और स्ट्रेस से ब्रेक न मिलने पर इसका असर आपके इमोशन्स पर पड़ने लगता है। ऑफिस के कामों की सोच में लगातार व्यस्त रहने पर व्यक्ति चिड़चिड़ा होता जाता है और धीरे-धीरे अपने दोस्तों और परिवार से भी कटने लगता है। इतना ही नहीं इस स्थिति में मोबाइल अडिक्शन होने के चांस भी बढ़ जाते हैं।
शरीर पर असर
मेंटल स्ट्रेस बने रहने पर सिरदर्द, कॉन्सटिपेशन, शरीर में दर्द, जल्दी-जल्दी बीमार होने जैसी शारीरिक परेशानियां होने लगती हैं। इतना ही नहीं यह याद्दाश्त को भी प्रभावित करने लगता है।
मेल न देखें तो क्या करें
जाहिर सी बात है कि ऑफिस के मेल्स से दूरी बनाए रखना कई लोगों के लिए संभव नहीं है। इस स्थिति में आप अपने ईमेल पर सेटिंग करें, जिससे आपको मेल भेजने वाले को यह मेसेज चले जाए कि आप ऑफिस से बाहर हैं या छुट्टी पर हैं। इस मेसेज में चाहे तो आप यह जोड़ सकते हैं कि यदि कोई इशू है जिसका कन्वे होना जरूरी है तो इसके लिए आपसे फोन या मेसेज के जरिए कनेक्ट हुआ जा सकता है।
लखनऊ। सर्दियां आते ही बुजुर्गो में जोड़ों के दर्द की समस्या अधिक देखने को मिलती है। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ती है दर्द में भी वृद्धि होती है। डॉक्टरों का मानना है कि तापमान में कमी के चलते जोड़ों की रक्तवाहिनियां सिकुड़ती हैं और उस हिस्से में रक्त का तापमान कम हो जाता है, जिसके चलते जोड़ों में अकड़न होने के साथ दर्द होने लगता है। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ सावधानियां बरत कर इस परेशानी से बचा जा सकता है।
कानपुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य रहे अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद स्वरूप ने आईएएनएस से कहा, “ठंड के मौसम में हमारे दिल के आसपास रक्त की गर्माहट बनाए रखना आवश्यक होता है। इसके चलते शरीर के अन्य अंगों में रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है। जब त्वचा ठंडी होती है तो दर्द का असर अधिक महसूस होता है। इस दर्द को वैज्ञानिक भाषा में आर्थराइटिस कहा जाता है।”
उन्होंने कहा, “आर्थराइटिस आमतौर पर 40 साल से अधिक उम्र के लोगों और इनमें भी विशेषकर महिलाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। चूंकि पूरे शरीर का भार घुटने उठाते हैं, इसलिए आर्थराइटिस की समस्या के चलते इन्हें सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ता है। ”
डॉक्टर ने आगे कहा, “रूमेटाइड आर्थराइटिस में जोड़ों के साथ कुछ दूसरे अंग या पूरा शरीर भी प्रभावित होता है। हाथ पैरों के जोड़ों में दर्द, सूजन, टेढ़ापन, मांसपेशियों में कमजोरी, बुखार आदि इसके लक्षण हैं।”
नई दिल्ली। हिमालय के वनों व तराई में मिलने वाली दुर्लभ एवं जीवनरक्षक औषधियों का लाभ जल्द ही शहरी लोग भी ले सकेंगे। सरकार ने आयुर्वेदिक उपचार की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए हिमालय की गोद में आयुर्वेदिक नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट को मंजूरी दे दी है। हिमालयी क्षेत्र में आयुर्वेदिक सेंटर बनाने का एक बड़ा मकसद यहां मिलने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियों का शोध व इन औषधीय पौधों से दवा तैयार करना है।
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार के मुताबिक, भारत सरकार ने लेह में आयुर्वेद का ‘नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ सोवा-रिग्पा’ स्थापित करने की मंजूरी दी है। जहां लेह में नेशनल इंस्टीटयूट बनाने की मंजूरी दी गई है। वहीं आयुष मंत्रालय हिमालयी क्षेत्रों में आयुर्वेद के 9 रिसर्च केंद्र स्थापित कर चुका है। ये केंद्र जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, त्रिपुरा व नागालैंड में बनाए गए हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने बताया कि भारतीय पारंपरिक दवाओं के शोध को बढ़ावा देने के लिए इन हिमालयी क्षेत्रों में आयुर्वेदिक सेंटर स्थापित किए गए हैं। साथ ही ये केंद्र स्थानीय कृषि पर भी शोध करेंगे। हिमालय की गोद में बनाए गए ये केंद्र ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि उपज को कैसे बढ़ाया जाए व कौन सी फसलें किस विधि से उगाई जाए इस विषय पर भी शोध करेंगे।
उन्होंने कहा कि इस शोध से पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली कृषि को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि हिमालय क्षेत्रों में आयुर्वेदिक केंद्र बनाए जाने से यहां के दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों को समय पर सही उपचार भी प्राप्त हो सकेगा।
हर किसी का सपना होता है कि वह अपने पार्टनर से अच्छी रिलेशनशिप मेंटेन करें। मगर कुछ खराब आदतों की वजह से रिश्तों में दरार आने लगती है। इसके लिए कपल एक-दूसरे को दोष देते है। यदि अाप अपने पार्टनर के साथ बेहतर रिलेशनशिप बनाने रखना चाहते है तो इन चार आदतों को तुरंत छोड़ दें।
एक्स से रिश्ता
बीते समय को पकड़कर न रखने में ही समझदारी होती है। इसलिए एक्स के साथ रिश्ता रखना आपके लिए सबसे खतरनाक हो सकता है। यह आदत आपके वर्तमान को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। यहां तक कि आपका मौजूदा रिलेशनशिप टूट भी सकता है। इसलिए बेहतर है कि बीते समय को जाने देना चाहिए।
पुरानी गलती से सीखना
पुरानी गलतियों से सीखना चाहिए। यह बात स्ट्रांग रिलेशनशिप मेंटेन करते समय ध्यान रखनी जरूरी होती है। यदि पुरानी रिलेशनशिप टूटने की गलती को फिर से दोहराएंगे तो मौजूद रिलेशनशिप भी खतरे में पड़ सकती है। इसलिए जो पीछे घट चुका है वह दोबारा न हो पाए इसका ध्यान रखें।
हर बात में टोका-टाकी
यह बात हम सभी जानते है कि हर बात में टोकाटाकी आपके रिलेशनशिप को खराब करने में बहुत तेजी से काम करती है। अक्सर देखा गया है कि कपल्स एक दूसरे को ये करो वो न करो की सलाह देते रहते हैं। यह आदत आपके पार्टनर को बहुत ज्यादा दिन तक हजम नहीं होने वाली है। इसी वजह से इस बुरी आदत को जल्दी से जल्दी बदलने की कोशिश करें।
अटेंशन जरूरी
हर रिलेशनशिप में एक दूसरे को अंटेशन देना बेहद जरूरी है। यदि ऐसा नहीं होता है तो रिश्ते में टकराव शुरू हो जाते हैं और अलगाव की स्थिति बनती जाती है। यदि आपकी गर्लफ्रेंड का बेली फैट बढ़ रहा है और वह ड्रेसअप होते वक्त आपसे फैट के बारे में पूछती है तो उसे हकीकत बताएं। ऐसी बातों को इग्नोर नहीं करें।
लंदन। स्मार्टफोन के अधिक उपयोग से हमारे मन की स्थिति तो प्रभावित हो ही रही है, अब इसका असर लोगों के यौन जीवन पर पड़ने की बात भी सामने आई है। एक नए अध्ययन की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। मोरक्को के कासाब्लांका में शेख खलीफा बेन जायद अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय अस्पताल के यौन स्वास्थ्य विभाग ने खुलासा किया है कि अध्ययन के दायरे में शामिल किए गए लगभग 60 फीसदी लोगों ने स्मार्टफोन के कारण अपने यौन जीवन में आई समस्याएं स्वीकार की हैं।
मोरक्को वल्र्ड न्यूज की गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया है कि सभी 600 प्रतिभागियों के पास स्मार्टफोन थे और इनमें से 92 फीसदी लोगों ने इसे रात में उपयोग करने की बात स्वीकार की।
उनमें से केवल 18 फीसदी लोगों ने अपने फोन को शयनकक्ष में फ्लाइट मोड में रखने की बात कही।
अध्ययन में पाया गया कि स्मार्टफोन ने 20 से 45 वर्ष की आयु के वयस्कों को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया, जिसमें 60 फीसदी ने कहा कि फोन ने उनकी यौन क्षमता को प्रभावित किया है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि लगभग 50 फीसदी लोगों ने यौन जीवन के बेहतर नहीं होने की बात कही, क्योंकि उन्होंने लंबे समय तक स्मार्टफोन का उपयोग किया।
अमेरिका की एक कंपनी श्योरकॉल के एक सर्वेक्षण में बताया गया है कि लगभग तीन-चौथाई लोगों ने माना कि वे रात में अपने बिस्तर पर या उसके बगल में अपने स्मार्टफोन को रखकर सोते हैं। जो लोग अपने पास फोन रखकर सोते हैं, उन्होंने डिवाइस से दूर होने पर डर या चिंता महसूस करने की बात कही। अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों में से एक तिहाई ने माना कि इनकमिंग कॉल का जवाब देने की मजबूरी से भी सेक्स में बाधा पहुंचती है।
अनानास, बेल, पपीता, आम, केला, कद्दू यह सभी खुशी के रंग होते हैं। इनमें लाइकोपीन, बिटामिन-ए,सी, पोटेशियम, फलेवोनायड पाया जाता है यह पोषक पदार्थ ब्लडप्रेशर को नियंत्रिता करते हैं। इनके सेवन से कब्ज और गले की जलन से राहत मिलती है। यह आपकी हेल्थ के अलावा बालों में चमक लाने के लिए नींबू का उपयोग करें।
आम में घुलनशील फाइबर पेक्टिन और विटामिन सी पाया जाता है। यह रक्त में कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन सीरम खराब कोलेस्ट्रोल को लेवल में कम करता है। यह ग्रंथि में होने वाले कैंसर से भीबचाता है।
पीले रंग का कद्दू में है पौष्टिक तत्व। आहार विशेषज्ञों अनुसार कद्दू हृदयरोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है। यह कोलेस्ट्रोल को कम करता है, ठंडक पहुंचाने वाला और मूत्रवर्धक होता है। यह पेट की गडबडियों में भी असरदायक है। कद्दू रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करता है ओर अग्न्याशय को सक्रिय करता है। इसी कारण चिकित्सक मधुमेह रोगियों को कद्दू खाने की सलाह देते हैं।
पीली शिमला मिर्च में विटामिन ए, सी और बीटा कैरोटीन भरा होता है। इसके अंदर बिल्कुल भी कैलोरी नहीं होती इसलिये यह खराब कोलेस्ट्रॉल को नहीं बढाती। साथ ही यह वजन को स्थि बनाये रखने के लिये भी योग्य है।
पपीते में विटामिन ए भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो आंखों की रोशनी के लिए बहुत लाभकारी है। कोई भी व्यक्ति उम्र बढने की वजह से आंखों की रोशनी से मरहूम नहीं होता चाहता और पपीते को अपने आहार में शामिल कर के आप आप ऐसी मुश्किल से बच सकते हैं।
केले में प्राकृतिक मिठास होती है जो मीठा खाने की इच्छा को पूरा करती है। वजन घटाने वालों के साथ कई बार ऐसा होता है। कि उन्हें अंदर से बहुत तेज कुछ मीठा खाने की ख्वाहिश होती है। तो उनके लिए केले बेस्ट ऑप्शन है।
पपीता आप हृदय रोग में ले सकते है यह फल पेट के रोगी के लिए बहुत ही फायदेमंद तो है ही, इसका सेवन से आंखों की रोशनी भी बढती है।
बेल में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन सी, बी, फॉस्फोरस, कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। आयुर्वेद में इसके रस को खाली पेट पीने की सलाह दी गई है।