Category: health

  • किडनी की बीमारी का आयुर्वेद में असरदार इलाज

    [object Promise]

    कोलकाता। आयुर्वेद में किडनी (गुर्दे) की बीमारी का असरदार इलाज संभव है। आयुर्वेद की दवा गुर्दे को नुकसान पहुंचाने वाले घातक तत्वों को भी बेअसर करती है। कोलकात्ता में चल रहे भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान मेले में पहली बार आयुर्वेद दवाओं पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया जिसमें गुर्दे के उपचार में इसके प्रभाव पर चर्चा की गई।

    इस सत्र के दौरान एमिल फार्मास्युटिकल के कार्यकारी निदेशक संचित शर्मा ने आयुर्वेद के उपचार में प्रभावी दवा नीरी केएफटी के बारे में अब तक हुए शोधों का ब्यौरा पेश करते हुए कहा कि नीरी केएफटी गुर्दे में टीएनएफ अल्फा के स्तर को नियंत्रित करती है। टीनएफ एल्फा परीक्षण से ही गुर्दे में हो रही गड़बड़ियों का पता चलता है तथा यह सूजन आदि की स्थिति को भी दर्शाता है। टीएनएफ अल्फा सेल सिग्नलिंग प्रोटीन है।

    शर्मा ने अपने प्रजेंटेशन में कहा कि नीरी के एफटी को लेकर अमेरिकन जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च में शोध प्रकाशित हो चुका है। इस शोध में पाया गया कि जिन समूहों को नियमित रूप से नीरी केएफटी दवा दी जा रही थी उनके गुर्दे सही तरीके से कार्य कर रहे थे। उनमें भारी तत्वों, मैटाबोलिक बाई प्रोडक्ट जैसे क्रिएटिनिन, यूरिया, प्रोटीन आदि की मात्रा नियंत्रित पाई गई। जिस समूह को दवा नहीं दी गई, उनमें इन तत्वों का प्रतिशत बेहद ऊंचा था। यह पांच बूटियों पुनर्नवा, गोखरू, वरुण, पत्थरपूरा तथा पाषाणभेद से तैयार की गई है।

    उन्होंने कहा कि जिन लोगों के गुर्दे खराब हो चुके हैं लेकिन अभी डायलिसिस पर नहीं हैं, उन्हें इसके सेवन से लाभ मिलता है। उन्हें डायलिसिस पर जाने की नौबत नहीं आती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि आयुर्वेद में कई उपयोगी दवाएं हैं। आयुर्वेद में उन बीमारियों का उपचार है जिनका एलोपैथी में नहीं है। लेकिन उन्हें आधुनिक चिकित्सा की कसौटी पर परखे जाने और प्रमाणित किये जाने की जरूरत है। इस दिशा में डीआरडीओ और सीएसआईआर ने कार्य किया है इस पर और ध्यान दिये जाने की जरूरत है।

  • होती है सेक्स से पहले घबराहट, कहीं Sex Anxiety के शिकार तो नहीं

    होती है सेक्स से पहले घबराहट, कहीं Sex Anxiety के शिकार तो नहीं

    कई बार पार्टनर के साथ लंबे समय से साथ होने के बाद भी आपको उनके साथ पहली बार सेक्स करने में घबराहट होती है। इसे लेकर अगर आपके मन में किसी तरह का डर है तो आपको बता दें कि यह एक सामान्य बात है। इसे सेक्स एंग्जाइटी कहा जाता है। यह महिलाओं और पुरुषों दोनों को हो सकता है। चाहे आपने पहले भी सेक्स किया हो, लेकिन फिर भी आप इस घबराहट का शिकार हो सकते हैं। आइए, आपको बताते हैं कि क्या है सेक्स एंग्जाइटी इसे दूर करने के लिए आपको क्या करना चाहिए।

    क्या है सेक्स एंग्जाइटी

    सेक्स एंग्जाइटी एक तरह का डर है जिसमें आपको लगता है कि आपका कोई अंग पार्टनर को आकर्षक नहीं लगेगा या फिर आपको यह शक होता है कि आप पार्टनर को सैटिस्फाई नहीं कर पाएंगे। यह डर इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि आप सेक्स में नए हैं या अनुभवी। कई लोगों को यह एंग्जाइटी थोड़ी देर के लिए हो सकती है, वहीं कई लोगों में यह देर तक रहता है।

    महिलाएं ज्यादा प्रभावित

    रिपोर्ट्स की मानें तो महिलाओं में सेक्स एंग्जाइटी ज्यादा होती है। इस एंग्जाइटी के कारण सेक्स में रुचि और ऑर्गज्म में समस्या हो सकती है।

    अपने शरीर से करें प्यार

    आपको अपने शरीर से प्यार करना चाहिए। अपने कर्व्स को पैंपर करें। आपको पता होना चाहिए कि आपके लिए आपके शरीर से ज्यादा कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है।

    एक्सरसाइज और मेडिटेशन

    एक्सरसाइज करने से हैपी हॉर्मोन बूस्ट होते हैं। इसके साथ ही अगर आप मेडिटेशन भी करती हैं तो आप सेक्स एंग्जाइटी से लड़ने के लिए तैयार हैं। इससे आप पॉजिटिव विचारों के साथ आगे बढेंगी और डर या घबराहट को दूर कर सकेंगी।

    अपनी चाहतों को समझें

    महिलाओं की सेक्शुअल डिजायर काफी कॉम्प्किकेटेड होती हैं। जरूरी है कि पहले आप खुद समझें कि बेड पर आपको क्या अच्छा लगता है। इसके बाद इसे अपने पार्टनर को भी समझाएं। महिलाओं को ऑर्गज्म देरी से मिलता है इसलिए जरूरी हैं कि अपनी डिजायर्स को लेकर आप और आपके पार्टनर बात करें

    इस बारे में भी करें बात

    आपको इस बात की वजह से एंग्जाइटी है कि आप अपने पार्टनर को संतुष्ट कर पाएंगी या नहीं। इस बारे में भी उनसे बात करें और जानें कि उनको क्या पसंद है। इस तरह आप दोनों की सेक्स लाइफ काफी आसान हो जाएगी और एंग्जाइटी का कोई सवाल नहीं उठेगा।

  • जानिए क्यों देती है अपने पति को शादीशुदा महिलाएं धोखा ?

    जानिए क्यों देती है अपने पति को शादीशुदा महिलाएं धोखा ?

    लाइफस्टाइल। यह बात हम सभी जानते है कि कॉलेज के दिनों में इंसान प्यार में धोखा खाता और देता है। लेकिन आजकल शादी के बाद धोखा देने का एक ट्रेंड सा बन गया है। यदि आपको ऐसा लगता है कि शादी के बाद आपकी पत्नी या आपके पति का किसी अन्य के साथ अफेयर नहीं हो सकता है तो ऐसे में यह आपकी जीवन की सबसे बड़ी भूल होगी। शादी से पहले और बाद धोखा देने के लिए अक्सर पति को अपराधी माना जाता था परन्तु समय बदलने के साथ महिलाएं भी धोखा करने लगी है। यदि किसी शादीशुदा महिला को शादी के बाद भी मानसिक और शारीरिक रूप से शांति नहीं मिल पा रही होती है तब वह निश्चित रूप से कहीं और चली जाती है।

    अक्सर रोजाना ऐसी खबरे आती रहती है कि प्रेमी के साथ मिलकर की पति की हत्या। जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि कोई भी व्यक्ति किसी को जान-बुझकर धोखा नहीं देना चाहता है हर स्त्री या पुरूष चाहता है कि वह अपने पति या पत्नी को खुश रखें। आइए हम आपको बताते है कि क्या वजह हो सकती है। जिसकी वजह से एक शादीशुदा महिला अपने पति को धोखा देती है।

    पहले प्यार को नहीं भूल पाना
    शादी से पहले किसी से लव अफेयर होने की वजह से सामान्य रूप से महिलाएं शादी के बाद पुरूषों को धोखा देने लगती हैं। अक्सर महिलाए पहले प्यार को नहीं भूल पाने के कारण वह धोखा देने पर मजबूर हो जाती हैं।

    घरेलू हिंसा

    शादी नए जीवन की शुरूआत होती है और हम अनेक सपने संजोए गृहस्थ जीवन में प्रवेश करते हैं। विवाह दो इंसानों का मिलन रूपी समझौता है, लेकिन अगर शादी के बाद घर में रोज ही झगड़े हो रहे होते हैं और हिंसा होती हैं तो ऐसे में बड़ी आसानी से कोई और जीवन में आ जाता है। खासतौर पर घरेलु हिंसा का सबसे ज्यादा प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है ऐसे में उनका परिवार से विश्वास उठ जाता है और वह किसी और पार्टनर की तलाश मे रहती है जो उसकी परेशानी महसूस कर सके।

    लाइफ से खुश ना होना
    यदि कोई भी मर्द या महिला शादी के बाद अपनी सेक्स लाइफ से संतुष्ट नहीं हो पा रहे होते हैं तो ऐसे में उनके किसी और के साथ अफेयर होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती हैं। कई बार महिला अपने पुरूष साथी से रोमांस के दौरान असंतुष्‍ट रहती है। उनकी यह असंतुष्टि महिलाओं को धोखा देने और बाहर की ओर जाने पर मजबूर करती है और वह जल्‍द ही दूसरे पुरूषों के सम्पर्क में आने लगती है।

    दोनों के बीच विश्वास में कमी
    अक्सर देखा जाता है कि कुछ महिलाएं शादी के बाद इसलिए धोखा देने लगती है। क्‍योंकि उनके पति को उन पर विश्वास नहीं होता और वह बिना किसी वजह के उन पर शक करते रहते हैं। अक्सर महिलाएं चाहती है कि वह अपने पति से खूब बातें करें और उनके पति भी अपनी बातें उनसे शेयर करें लेकिन जब आपसी वार्तालाप या संवाद की स्थिति खत्म हो जाती है तो रिश्तों में दरार आने और धोखा देने की संभावना अधिक बढ़ जाती है।

    बदला लेने की प्रवृति

    कुछ महिलाएं अपने पति से बदला लेने के लिए धोखा देने लगती है। जब पति द्वारा उनके भरोसे को तोड़ा जाता है। तो महिलाओं को दिल टूट जाता है और वह उसी तरह से धोखा और चोट पहुंचना चाहती हैं।

    कई बार ऐसा होता है कि महिलाओं को लगता है कि उनके पति उनके साथ धोखा कर रहे है और किसी और के बारें में बात करना उनकी तारीफ करना उन्हें समय नही देना जैसे कारण की वजह से महिलाएं अपने पति से बदला लेने के लिए कई ऐसा निर्णय लेती है।

  • सर्दियों में अपनाए ये घरेलू टिप्स फटी एड़ियों से बचने के लिए !

    सर्दियों में अपनाए ये घरेलू टिप्स फटी एड़ियों से बचने के लिए !

    लाइफस्टाइल। सर्दियों का सीजन आते ही हमारे हाथ पैरों में रूखापन आने के साथ त्वचा फटने लगती है। जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव हमारे पैरों की एड़ियां पर होता है। जिसे हम नजरअंदाज कर जाते है परन्तु आगे चलकर पैरों के फटने से खून भी निकलने लगता है और बाद में चलने पर बड़ी ही परेशानी होती है।

    इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए हम कई प्रकार की क्रीम और लोशन का उपयोग करते है जिसका प्रभाव ना के बराबर देखने को मिलता है। अगर आप फटी एड़ियों से जल्दी ही छुटकारा पाना चाहते है तो आइए हम आपको बताने है इन घरेलू उपचारों के बारे में …

    सर्दियों के सीजन में एड़ियों की नियमित सफाई करें
    सर्दियों के सीजन में आपको अपने हाथ पेरों की त्वचा का विशेष ख्याल रखना जरूरी होता है। अगर आपकी एड़िया फट रही है तो नहाने से पहले स्‍क्रब से अच्छी तरह से इस्तेमाल करें। इससे गंदगी के साथ डेड स्कीन भी निकल जाएगी और समय समय पर अपने पैरों को गर्म पानी से साफ करती रहें।

    एड़ियों की मसाज
    बता दें कि पैरों में तेल ग्रंथी नहीं होती है। इसी लिए इनमें हमेशा रूखापन बना रहता हैं। इसके लिए आपको रात में सोने से पहले तेल या क्रीम से रोज मसाज करना चाहिए। इससे आपके पैरों में नमी बनी रहेगी।

    पपीते का गूदा

    पैरों की त्वचा में नमी लाने के लिए आप पके हुए पपीते के गूदे से मसाज करें। इससे पैर मुलायम होगे और पैरों के फटने की समस्या से राहत मिलेगा।
    केले का गूदा
    फटी एड़ियों से छुटकारा पाने के लिए आप केले के गूदे में 1 या 2 बूंद ग्लिसरिन डालकर लगाये और 15 मिनट तक लगे रहने दें। इसके बाद नार्मल पानी से धो लीजिए। इस गोल का इस्तेमाल तब तक करें जब तक कि आपके पैर सही नहीं हो जाए।

    जूते पहनें
    सर्दियों के सीजन में ऐडियों को धूल मिट्टी और गंदगी बचाये रखने के लिए आप चप्‍पल की जगह बंद जूते का इस्तेमाल करें। इससे आपके पैर रूखे नहीं होते।

    दूध और शहद का मिश्रण
    आधा कप दूध में दो चम्मच शहद मिलाकर मिश्रण तैयार करें। इसको अपने पैरों पर लगाकर 30 मिनट तक छोड़ दीजिये और फिर थोड़ा सा स्क्रब कीजिए और बाद में नार्मल पानी से लीजिए।

  • 7 गुना ज्यादा खतरा ‘इकलौते बच्चे’ का मोटापे का शिकार होने का: स्टडी

    7 गुना ज्यादा खतरा ‘इकलौते बच्चे’ का मोटापे का शिकार होने का: स्टडी

    यह बात तो हम सभी जानते हैं और मानते भी हैं कि अगर बच्चा इकलौता हो तो वह भाई-बहन वाले बच्चों की तुलना में ज्यादा लाड़-प्यार से पला होता है। जाहिर सी बात है मां-बाप का सारा प्यार उसी इकलौते बच्चे को ही मिलता है, लिहाजा इस वजह से कई बार बच्चा थोड़ा जिद्दी भी हो जाता है। लेकिन अब एक रिसर्च ने इसमें एक नया ऐंगल जोड़ दिया है। अनुसंधानकर्ताओं की मानें तो वैसे बच्चे जो इकलौते होते हैं, उनका वजन बढ़ने और मोटापे का शिकार होने की आशंका अधिक होती है उन बच्चों की तुलना में जिनके भाई-बहन होते हैं।

    युवाओं में मोटापा दिखने की आशंका 7 गुना अधिक

    इस बात को साबित करने के लिए एक स्टडी की गई जिसके नतीजे बताते हैं कि वैसे परिवार जिनमें एक से ज्यादा बच्चा होता है वे ज्यादा हेल्दी ईटिंग की आदत को अपनाते हैं उन परिवारों की तुलना में जहां सिंगल चाइल्ड यानी इकलौता बच्चा होता है। न्यूट्रिशन एजुकेशन ऐंड बिहेवियर नाम के जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी में यह भी कहा गया कि इस तरह का मोटापा, युवाओं में 7 गुना ज्यादा देखने को मिलता है।

    3 दिन तक डेली फूड लॉग के डेटा की हुई जांच
    इस स्टडी के तहत अनुसंधानकर्ताओं ने मांओं द्वारा 3 दिन तक डेली फूड लॉग के डेटा की जांच की जिसमें 2 वीकडे और एक वीकेंड डे का दिन शामिल था। साथ ही साथ टीचर्स ने भी बच्चों ने स्कूल में क्या खाया इस बात का लॉग रखा। साथ ही साथ मांओं ने फैमिली न्यूट्रिशन और फिजिकल ऐक्टिविटी के क्वेश्चनेयर के जरिए खाने पीने के मामले में अपने परिवार की आदतों के बारे में जानकारी दी।

    मांओं के भी खुद मोटापा का शिकार होने का खतरा
    अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि अगर परिवार में सिंगल चाइल्ड यानी इकलौता बच्चा है तो उस परिवार का हेल्दी ईटिंग प्रैक्टिस, पेय पदार्थों की चॉइस और टोटल हेल्दी ईटिंग इंडेक्स का स्कोर कम था। रिसर्च में ये भी पाया कि सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि इकलौते बच्चों की मांएं भी खुद मोटापे का शिकार पायी गईं।

  • शरीर में होती है पोषण की कमी वजन घटाने की सर्जरी से

    शरीर में होती है पोषण की कमी वजन घटाने की सर्जरी से

    लाइफस्टाइल। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बेरियाट्रिक सर्जरी भले ही मोटापे से ग्रसित कई किशोरों के लिए जीवन बदलने वाला कदम साबित हो सकता है, लेकिन इस सर्जरी से भविष्य में उनके शरीर में पोषण तत्वों की कमी हो सकती है, जिसका सही तरीके से ध्यान न रखने पर उन्हें स्वास्थ्य संबंधित समस्या हो सकती है।

    उन्होंने कहा है कि इससे निपटने के लिए जीवनशैली में बदलाव के साथ स्वस्थ खाना और व्यायाम मददगार हो सकता है।

    बेरियाट्रिक सर्जरी एक ऐसी सर्जरी है, जिससे मोटापे से ग्रसित लोग इस बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं। भयंकर मोटापे की वजह से मधुमेह, हाइपरटेंशन, हाई कॉलेस्ट्रॉल और अनिंद्रा की समस्या होने लगती है।

    देखा जाए तो कई तरह की बेरियाट्रिक सर्जरी होती हैं, लेकिन सर्जन प्रमुखत: तीन तरह की सर्जरी का प्रयोग करते हैं, जो है- रूक्स-एन-वाई गैस्ट्रिक बाईपास, वर्टिकल स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी और लैप्रोस्कोपिक एडजस्टेबल गैस्ट्रिक बैंडिंग।

    हालांकि बेरियाट्रिक सर्जरी के साइड इफेक्ट में संक्रमण, अस्थियों में कमजोरी, एनीमिया, डायरिया, पोषण की कमी, गैस की समस्या, हर्निया, गर्भधारण में समस्या जैसी परेशानियां देखी जा सकती हैं।

    दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल की मिनिमली इनवैसिव सर्जरी विभाग की वरिष्ठ सलाहकार फैजल मुमताज ने इस बारे में आईएएनएस से कहा, “इसे या तो रेस्ट्रीक्टिव या फिर रेस्ट्रीक्टिव और मैलेबसोप्र्शन संयुक्त होना चाहिए। रेस्ट्रीक्टिव बेरियाट्रिक सर्जरी पेट के आकार को कम करती है। यह खाने की सीमा को सीमित करती है, जिससे पेट के भरे होने का अहसास होता है।”

    उन्होंने आगे कहा, “मैलेबसोप्र्शन बेरियाट्रिक सर्जरी शरीर में पोषण को सीमित करती है और मरीजों को पोषण सप्लीमेंट(आयरन, बी1, बी2, बी12 आदि) दिया जाता है।”

    हाल ही में क्लीनिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी और हेपेटोलॉजी में छपे एक लेख के अनुसार शोधकर्ताओं को पता चला है कि रूक्स-एन-वाई गैस्ट्रिक बाईपास और वर्टिकल स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी से विटामिन बी12 और आयरन की कमी होती है।

    विटामिन बी12 से ग्रसित लोग न सिर्फ एनीमिया से जूझते हैं, बल्कि अवसाद, चिड़चिड़ापन और भूलने की समस्या भी उन्हें परेशान करती है।

    वहीं नई दिल्ली स्थित सरोज सुपर स्पेशियलटी हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट आर. पी. सिंह का कहना है कि किशोरों को इस तरह की सर्जरी से बचना चाहिए।

  • Male infertility बुरी तरह प्रभावित करती है सेक्स लाइफ को, जानें लक्षण और बचाव

    Male infertility  बुरी तरह प्रभावित करती है सेक्स लाइफ को, जानें लक्षण और बचाव

    पिछले कुछ सालों में मेल इन्फर्टिलिटी के ढेरों केस सामने आए हैं। मेल इन्फर्टिलिटी यानी पुरुषों में बांझपन। इसकी वजह से कपल्स कंसीव नहीं कर पाते। इन्फर्टिलिटी की वजह से पुरुषों में हीन भावना आ जाती है और आत्मविश्वास में कमी आ जाती है। यह करीब 7 फीसदी पुरुषों को प्रभावित करती है। पुरुषों में बांझपन के कई कारण हैं, जैसे कि खराब लाइफस्टाइल और खान-पान, कम स्पर्म काउंट, हॉर्मोन असतुंलन, उम्र, टेस्टिकुलर कैंसर, अक्रोसोमल डिफेक्ट, मलेरिया और ममप्स शामिल हैं।

    इसके अलावा स्पर्म काउंट घटने और बांझपन के और भी कई कारण हैं, जैसे कि टेस्टिकल्स में दर्द। इस स्थिति को वैरिकोसील (Varicocele) कहा जाता है। इसमें स्क्रॉटम (जहां टेस्टिकल्स मौजूद होते हैं) में नसों में वृद्धि होने लगती है, जो बाद में स्पर्म की क्वॉलिटी और नंबर को बुरी तरह प्रभावित करती है। इंफेक्शन की वजह से भी स्पर्म काउंट पर बुरा असर पड़ता है जो आगे चलकर मेल इन्फर्टिलिटी का रूप ले लेता है। इस इंफेक्शन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि गोनोरिया, माइकोप्लाज्मा, यूरिन इंफेक्शन आदि। तंबाकू के सेवन, डीएनए के डैमेज होने और सीलिएक डिजीज की वजह से भी पुरुषों में बांझपन हो सकता है।

    मेल इन्फर्टिलिटी का इलाज
    पुरुषों में बांझपन की समस्या के इलाज के लिए पहले डॉक्टर द्वारा कुछ टेस्ट किए जाते हैं, जिनमें सीमन का परीक्षण किया जाता है। हॉर्मोन असंतुलन चेक करने के लिए ब्लड टेस्ट भी किया जाता है। स्पर्म काउंट कम होने का कोई अनुवांशिक कारण तो नहीं है, यह भी देखा जाता है। पुरुषों के प्राइवेट पार्ट का परीक्षण किया जाता है, जिसमें पीनिस से लेकर स्क्रॉटम, टेस्टिकल्स, एनस, यूरिनरी ब्लैडर और स्पर्मेटिक कॉर्ड्स तक शामिल हैं।

    स्पर्म परीक्षण के लिए स्पर्म का सैंपल लिया जाता है। सैंपल के लिए जरूरी है कि 2 से 7 दिनों तक यौन संबंध न बनाए गए हों। चूंकि स्पर्म का प्रॉडक्शन एक साइक्लिक प्रोसेस है, इसलिए 7 दिन से लेकर 3 महीनों के अंदर स्पर्म के दो अलग-अलग सैंपल पर परीक्षण किया जाता है।

    सेक्स लाइफ पर प्रभाव
    मेल इन्फर्टिलिटी यानी पुरुषों में बांझपन की समस्या सेक्स लाइफ पर भी बुरा असर डालती है। डॉक्टरों के अनुसार, इस समस्या की वजह से व्यक्ति स्ट्रेस में चला जाता है और जब स्ट्रेस का स्तर पढ़ता है तो बॉडी कॉर्टिसोल नाम का हॉर्मोन रिलीज करती है। यह हॉर्मोन लड़ाई, चिड़चिड़ाहट और फ्लाइट रिस्पॉन्स को बढ़ा देता है जो अंतत: सेक्स ड्राइव को प्रभावित करता है।

    मेल इन्फर्टिलिटी से बचाव
    1- पुरुष स्मोकिंग न करें और न ही तंबाकू का सेवन करें।

    2- शराब और नशे की अन्य चीजों से दूर रहें।

    3- अत्यधिक तापमान से दूर रहें क्योंकि इससे स्पर्म डैमेज हो जाते हैं।

    4- फुटबॉल, बास्केटबॉल या फिर इसी तरह का गेम खेलते या अन्य गतिविधि करते वक्त प्रटेक्टिव कवरिंग का सहारा लें।

    5- मेल इन्फर्टिलिटी और कम स्पर्म काउंट की मुख्य वजह सही खान-पान नहीं होना है। इसलिए हेल्दी डायट लें और सही समय से खाएं। तला-भुना या ज्यादा मसालेदार खाना खाने से बचें।

    6- खुद को स्ट्रेस और टेंशन से जितना ज़्यादा दूर रखेंगे, उतना अच्छा रहेगा। स्ट्रेस की वजह से हॉर्मोन्स का लेवल गड़बड़ा जाता है। कोशिश करें कि रोज़ाना एक्सर्साइज़ करें और खुश रहें। लेकिन ध्यान रहे कि एक्सर्साइज़ ज़ोरदार तरीके से न हो।

    7- ज्यादातर लोगों को आदत होती है कि वे लैपटॉप जैसी चीजों को गोद में रखकर काम करते हैं। ऐसा बिल्कुल भी न करें। द फर्टिलिटी चार्ल्सटोन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादा तापमान की वजह से स्पर्म काउंट घट जाता है। इसीलिए गर्म पानी से नहाने के लिए भी मना किया जाता है क्योंकि इसकी वजह से अंडकोष के तापमान पर असर पड़ता है और स्पर्म काउंट भी घट जाता है।

    8- वजन भी कंट्रोल में रखें। अत्यधिक वजन होने से एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन जैसे हॉर्मोन्स पर बुरा असर पड़ता है।

  • दिखता नहीं बाहर से, अंदर से खा जाता है डायबीटीज

    दिखता नहीं बाहर से, अंदर से खा जाता है डायबीटीज

    डायबीटीज यानी मधुमेह जिसे साधारण शब्दों में शुगर की बीमारी भी कहा जाता है से आज की तारीख में हर आयु वर्ग के लोग डरने लगे हैं। पहले जहां इसे बुजुर्गों में होने वाली बीमारी माना जाता था वहीं आज के समय में 10-15 साल के बच्चों को भी डायबीटीज हो रहा है। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पहले जहां रोज मधुमेह के 35-40 मरीज आते थे, वहीं अब रोज 50 मरीज आते हैं।

    लाइफस्टाइल में करें जरूरी बदलाव

    इन सबके बीच डॉक्टरों का कहना है कि अगर इंसान थोड़ा परहेज करे व सावधानी बरते, अपनी लाइफस्टाइल में सुधार करे तो डायबीटीज से बचा जा सकता है। बी के अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. मोहित ने बताया कि करेला व नीम जैसी कड़वी चीजें शुगर और फैट को नियंत्रण में रखने में सहायक होती हैं। शारीरिक मेहनत न करने और तनाव के कारण लोग मोटापे का शिकार होते हैं, फिर मधुमेह होने लगता है। जीवनशैली में बदलाव कर बीमारी पर काबू पा सकते हैं।

    मोटापा बढ़ना खतरनाक
    एमएनसी में जॉब करने वाला एक युवक (25) को मोटापे की शिकायत हो गई। वह सेक्टर-8 सर्वोदय अस्पताल में जांच कराने के लिए आया। जांच में पता चला कि उसको डायबिटीज हुई है, जबकि उसके घर में किसी को भी यह बीमारी नहीं है। डॉक्टर ने बताया कि एकाएक मोटापा बढ़ना भी डायबिटीज का मुख्य लक्षण है।

    बंद न करें दवाइयां
    क्यूआरजी हेल्थ सिटी हॉस्पिटल की इंटरनल मेडिसिन सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सुंदरी श्रीकांत ने बताया कि डायबीटीज की बीमारी एक दीमक की तरह है, जो बाहर से दिखाई नहीं देती है, लेकिन अंदर ही अंदर सारे शरीर को खत्म कर देती है। इस बीमारी के प्रति लोग ज्यादा गंभीर नहीं दिखाई देते हैं। दवाइयां भी कुछ समय बाद अपनी मर्जी से बंद कर देते हैं। इससे भी कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।

    अंधापन-किडनी पर असर
    डायबीटीज अन्य बीमारियों को भी न्योता देती है। इसका सबसे ज्यादा असर किडनी पर पड़ता है। डायबीटीज के चलते लोग अंधे हो जाते हैं, गैंगरीन हो जाता है और हार्ट अटैक की ज्यादातर गंभीर बीमारियां भी डायबीटीज के कारण होती हैं। टाइप-2 डायबीटीज सबसे आम समस्या है। यह आमतौर पर 40 वर्ष की आयु के बाद होती है, लेकिन आज यह बीमारी 20 और 30 साल के लोगों में देखने को मिल रही है।

  • क्या अचानक मचल उठता है Sex के लिए आपका मन? वजह है ये

    क्या अचानक मचल उठता है Sex के लिए आपका मन? वजह है ये

    अक्सर ऐसा होता है जब किसी को भी अचानक सेक्स करने की इच्छा होने लगती है। कई बार यह इच्छा इतनी तीव्र होती है कि खुद को कूल डाउन करने में वक्त लगता है। आपके मन में भी अक्सर ऐसा सवाल उठता होगा कि आखिर अचानक से ऐसे क्यों सेक्स करने की इच्छा हुई, जबकि आप तो इस बारे में कुछ सोच भी नहीं रहे हैं और ना ही ऐसा कुछ देख रहे हैं। आइए जानते हैं क्यों अचानक मन सेक्स के लिए मचल उठता है…

    दरअसल, सेक्स की इच्छा दो तरह की होती है, एक स्पॉन्टेनियस यानी अचानक से सेक्स का मन करने लगना। जबकि दूसरी होती है रेस्पॉन्सिव यानी किसी क्रिया की प्रतिक्रिया स्वरूप। अचानक सेक्स का मन करनेवाली जो स्वभाविक इच्छा होती है यह काफी हद तक आपकी सोच, ध्यान और हॉर्मोनल चेंजेज पर निर्भर करती है।

    महिलाओं की बात करें तो पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले और पीरियड्स के दौरान महिलाओं में सेक्स की इच्छा बहुत तीव्र होती है। जबकि पुरुषों में थॉट प्रॉसेस और इवेंट इसके लिए अधिक जिम्मेदार होते हैं। यह सब हॉर्मोन्स पर निर्भर करता है। अगर किसी के साथ ऐसा होता है कि अचानक ही सेक्स की इच्छा करने लगती है और फिर कंट्रोल करना मुश्किल होता, साथ ही यह स्थिति आय दिन रहती है तो आपको डॉक्टर की सलाह की जरूरत है। बाकि अन्य स्थितियों में यह बेहद सामान्य है।

    अब बात करते हैं रेस्पॉन्सिव सेक्स डिजायर की। यह आमतौर पर तब होती है, जब आप आपने पार्टनर या लवर के साथ एकांत में होते हैं और इस इंटेशन के साथ एक-दूसरे के करीब आते हैं। तब मेल और फीमेल दोनों की ही बॉडी सेक्स की डिमांड करती है। ऐसा पोर्न देखते वक्त भी होता है। इस दौरान महिलाओं के प्यूबिक एरिया में खिंचाव होता है जबकि पुरुषों में इरेक्शन होता है।

     

  • ब्रेस्ट मिल्क प्रॉडक्शन बढ़ाने के नई मांओं के लिए टिप्स

    ब्रेस्ट मिल्क प्रॉडक्शन बढ़ाने के नई मांओं के लिए टिप्स

    डिलिवरी के तुरंत बाद ज्यादातर नई मांओं के मन में जिस एक बात को लेकर सबसे ज्यादा चिंता रहती है, वो ये है कि क्या अपने बच्चे के लिए उनकी ब्रेस्ट मिल्क सप्लाई सफिशंट होगी? क्या उन्हें ऊपर का दूध यानी फॉर्मुला मिल्क बच्चे को देना चाहिए? क्या सिर्फ मेरे दूध से बच्चे का पेट भर जाएगा? एक्सट्रा..एक्सट्रा…एक्सट्रा… अगर आप भी एक न्यू मॉम हैं और आपके मन में ब्रेस्ट मिल्क प्रॉडक्शन को लेकर इस तरह के सवाल हैं तो यहां जानिए इन सब सवालों का जवाब।

    नैचरल तरीकों से बढ़ाएं ब्रेस्ट मिल्क प्रॉडक्शनबच्चे के जन्म से लेकर शुरुआती 6 महीने तक उसे सिर्फ ब्रेस्टफीडिंग करवाना बेहद जरूरी है। मां के दूध में मौजूद पोषक तत्व नवजात शिशु की सेहत के लिए बेहद जरूरी होते हैं और ये बच्चे को सभी तरह के इंफेक्शन और जानलेवा बीमारियों से बचाते हैं। लेकिन कई बार मांएं इस समस्या का सामना करती हैं कि उनके ब्रेस्ट से सही मात्रा में दूध का उत्पादन नहीं होता और ऐसा लगता है कि मानो बच्चे का पेट नहीं भरा और वह भूखा है। ऐसे में इन 4 नैचरल तरीकों को अपनाकर आप भी बढ़ा सकती हैं ब्रेस्ट मिल्क का प्रॉडक्शन…

    Latching का रखें ध्यान
    latch का अर्थ है ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बच्चा किस तरह से मां के ब्रेस्ट को अपने मुंह से जकड़ता है और फिर दूध खींचता है। अगर बच्चे की लैचिंग प्रक्रिया अच्छी है तो ब्रेस्ट मिल्क का फ्लो बढ़ता है और बच्चे की मां को निप्पल में किसी तरह की असहजता भी महसूस नहीं होती। ऐसे में बेहद जरूरी है कि बच्चे की लैचिंग की प्रक्रिया सही हो, तभी बच्चा पूरी तरह से और पेट भरकर दूध पिएगा।

    बच्चे को बार-बार ब्रेस्टफीड करवाएं
    याद रखें कि आपका शरीर डिमांग और सप्लाई के फंक्शन पर काम करता है। इसका मतलब है कि अगर आपका बच्चा बार-बार ब्रेस्टफीड होगा तो शरीर को इस बात के संकेत मिलेंगे कि उन्हें बच्चे की जरूरत के हिसाब से ज्यादा ब्रेस्ट मिल्क की सप्लाई करनी है। औसतन एक न्यूबॉर्न बेबी को दिन भर में हर 2 से 3 घंटे में ब्रेस्टफीड करवाना चाहिए।

    मां का हाइड्रेटेड रहना जरूरी

    बच्चे को दूध पिलाने वाली मां को इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि वह दिनभर में कितना पानी या लिक्विड डायट का सेवन करती है। अगर आपको लग रहा है कि आप बच्चे की जरूरत के हिसाब से ब्रेस्टमिल्क का उत्पादन नहीं कर पा रही हैं तो अपना वॉटर इनटेक बढ़ाएं। दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं।

    दोनों ब्रेस्ट से बच्चे को पिलाएं दूध
    भले ही बच्चे को दूध पिलाने की आपकी कोई फेवरिट पोजिशन हो लेकिन बच्चे को दोनों ब्रेस्ट से दूध पिलाना बेहद जरूरी है। ऐसा करने से भी ब्रेस्ट मिल्क का उत्पादन बढ़ता है। अगर पहले ब्रेस्ट से दूध खींचते वक्त बच्चा स्लो हो जाए तो उसी दौरान उसे दूसरे ब्रेस्ट से दूध पिलाएं।