Category: health
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फैशन फेस-ऑफ: किसका स्टाइल था बेहतर, Kareena या Priyanka?
[object Promise]अब सोचिए जब बॉलिवुड इंड्रस्टी की दो सबसे बड़ी फैशनिस्ता- करीना और प्रियंका एक साथ एक मंच पर आएं तो धमाका तो होना तय है। इस दौरान करीना और प्रियंका दोनों ही बेहद सेक्सी नजर आ रहीं थीं।प्रियंका चोपड़ा ने ब्राउन कलर का वन पीस ब्लेजर ड्रेस पहन रखा था जिसे उन्होंने गोल्डन कलर के हाई हील पंप्स, बोल्ड रेड लिपस्टिक और स्ट्रेट खुले बालों के साथ टीमअप कर रखा था। इस लुक में प्रियंका बेहद हॉट नजर आ रहीं थीं।वहीं, करीना का लुक भी कुछ कम नहीं था। करीना ने पाउडर पिंक कलर का ऑफ-शोल्डर स्टाइल फैंसी आउटफिट पहन रखा था। इस ड्रेस का फिश कट, फ्रंट हाई स्लिट और ड्रमैटिक स्लीव्स ड्रेस की हाइलाइट थी।प्रियंका ने जहां नो अक्सेसरी लुक कैरी किया था वहीं, करीना का नेकलेस बेहद सेक्सी लग रहा था। अब करीना या प्रियंका दोनों में से किसका लुक आपको ज्यादा बेहतर लगा, हमें कॉमेंट कर बताएं। -
बनाना है इम्प्रेशन तो ध्यान रखे मोबाइल यूज करते हैं समय ये नियम
[object Promise]कॉल, मेसेज और ईमेल का जवाब न देना
यह बेहद जरूरी शिष्टाचार है जिस पर अगर आपने अभी तक काम नहीं किया तो कर लेना चाहिए। आप भले ही मिसकॉल्स और चैट मेसेज नोटिफिकेशन को इग्नोर करते रहते हैं लेकिन जब आप अपने जीवन में बिजी होते हैं तो भूल जाते हैं कि जिन लोगों को आपने जवाब नहीं दिया वे आपकी केयर करते हैं। इस आदत को बदल लें कोशिश करें हर मेसेज और मेल का जवाब दें।कोई जरूरी बात मेसेज पर डिसकस करना
मेसेज करना या ईमेल करना आसान काम होता है लेकिन आपको समझना होगा कि सबकुछ मेसेज पर नहीं कहना चाहिए। कुछ चीजें इतनी इम्पॉर्टेंट होती हैं कि उन्हें फेस टु फेस कहा जाना चाहिए खासतौर पर अगर कोई सेंसिटिव या लाइफ चेंजिंग टॉपिक हो। वहीं ऑफिस के केस में अगर पहुंचना संभव न हो और छुट्टी लेनी हो तो बात और मेल करें, मेसेज से छुट्टी न लें।मोबाइल पर बात करते वक्त ये सब भी ध्यान दें
जब आपसे कोई बात कर रहा हो तो मोबाइल स्क्रॉल न करते रहें, सामने वाले को अवॉइडेड फील हो सकता है। वहीं ड्राइविंग के वक्त, खाने की टेबल पर और बिस्तर पर खासतौर पर मोबाइल न ले जाएं। इसके अलावा मीटिंग के दौरान भी फोन साइलंट रखें और मेसेज भी न करें।किसी के घर जाकर गंदगी फैला देना
भले ही आपकी दोस्त का घर आपको अपने जैसा लगे लेकिन उसके पहले से ज्यादा गंदा करके मत आ जाएं। बल्कि आपको इसे थोड़ा अच्छी कंडिशन में करके आना चाहिए। आपके किसी के भी घर गेस्ट बनकर जाएं बेहतर होगा साफ-सफाई से रहें और चीजें इधर से उधर बिखेरें नहीं।रेस्ट्रॉन्ट में न करें ये गलतियांरेस्ट्रॉन्ट में वेटर को कभी भी आवाज देकर न बुलाएं, बल्कि उनसे आई कॉन्टैक्ट बनाने की कोशिश करें और इशारे से पास बुला लें। अगर वेटर न देख पाए तो हाथ से इशारा करके पास बुलाएं। स्टाफ से हमेशा तमीज से बात करें और सबसे जरूरी खाना खत्म होने के 15 मिनट के अंदर टेबल छोड़ दें।किसी को इग्नोर करना
अगर आप अपने दोस्तों के ग्रुप में हैं और कोई नया है तो बात करते वक्त ध्यान रखें कि ऐसी बातें करें कि उसे भी समझ में आएं। उसे अलग-थलग नहीं फील करना चाहिए। अगर आपके साथ कोई ऐसा है जो आपके दोस्तों के लिए नया है तो उसका परिचय जरूर करवाएं।आई कॉन्टैक्ट न बनानाअगर आप बात करते वक्त किसी से आई कॉन्टैक्ट नहीं बनाते तो उसे फील हो सकता है कि आपको उसमें इंट्रेस्ट नहीं है। बात करते वक्त हमेशा आई कॉन्टैक्ट बनाकर रखें। -
Sania Mirza की Weight Loss स्टोरी, 4 महीने में घटाया 26 किलो वजन
प्रेग्नेंसी में 23 किलो वेट गेन किया था
#Mummahustles के नाम से अपने इंस्टाग्राम पर अपनी पोस्ट प्रेग्नेंसी वेट लॉस स्टोरी शेयर करते हुए सानिया कहती हैं, ‘जब मैं ये कर सकती हैं तो कोई भी कर सकता है। यकीन मानिए, हर दिन अपने शरीर को 1 या 2 घंटे दीजिए और फिर देखिए आप सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी काफी बेहतर महसूस करेंगी।’ इस दौरान सानिया ने अपना वर्कआउट विडियो भी शेयर किया।सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं वर्कआउट विडियो
सानिया सभी मॉम्स के लिए प्रेरणा हैं। वह जो भी वर्कआउट करती हैं उसके विडियो #mummahustles के साथ पोस्ट करती हैं। इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘इसके पीछे वजह यह है कि मां बनने के बाद भी आप खुद को फिट रख सकती हैं। मां बनने के बाद ऐसा नहीं है कि आपकी लाइफ खत्म हो गई, बल्कि तब तो आपकी लाइफ शुरू होती है।’सानिया ने खुद को हमेशा रखा ऐक्टिव
सानिया ने फैसला कर लिया था कि वह प्रेग्नेंसी के दौरान खुद को ऐक्टिव रखेंगी। वह प्रीनेटल योगा करती थीं और वर्कआउट करना कभी नहीं भूलीं।इसलिए लिया वजन घटाने का फैसला
सानिया अपने बढ़े वजन से खुश नहीं थीं और यही वजह थी कि उन्होंने वेट लूज करने का फैसला किया। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ‘चाहे मैं टेनिस खेलूं या न खेलूं, लेकिन जब भी मैं खुद को शीशे में देखती थी मुझे लगता था कि मैं अब वैसी नहीं लगती जैसी पहले लगती थी। यह सिर्फ आपके लुक की ही बात नहीं है, बल्कि आप कैसा फील करते हैं यह भी जरूरी है।’4 घंटे वर्कआउट और कार्डियोसानिया खाने की बेहद शौकीन हैं और डिलिवरी के बाद उन्होंने अपनी जिस आदत को बदला वह थी खाने की आदत। उन्होंने हेल्दी डायट लेना शुरू कर दिया। वह रोजाना जिम में 4 घंटे वर्कआउट करती थीं। इसके अलावा 100 मिनट का कार्डियो, एक घंटे किक बॉक्सिंग और पिलाटेज की ट्रेनिंग भी सानिया करती थीं।योग ने की वजन घटाने में मदद
इन एक्सर्साइज़ के अलावा सानिया ने योग को भी अपने डेली रूटीन में शामिल किया। इसी का नतीजा है कि आज वह फिर से फिट और हॉट हो गई हैं। -
Breast Cancer का खतरा करना है कम तो खाने में शुरू करिये कच्चा प्याज और लहसुन
[object Promise]प्याज और लहुसन को सुपरफूड्स माना जाता है क्योंकि यह खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। आयुर्वेद में प्याज और लहुसन को ब्लड प्यूरिफायर माना जाता है। और तो और लहसुन का प्रयोग कई आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण में भी किया जाता है। ऐसे में इन दोनों ही चीजों का सेवन बेहद फायदेमंद है लेकिन अगर आप प्याज और लहसुन को कच्चा ही खाएं तो यह आपके लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि कई रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है।
ऐंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं प्याज और लहसुन
एक नई रिसर्च में बताया गया है कि प्याज और लहसुन को कच्चा खाने से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कई गुना कम हो जाता है। प्याज और लहसुन दोनों ही हमारे डेली खानपान का हिस्सा हैं और दोनों में ढेर सारे ऐंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए लाभदायक हैं। न्यू यॉर्क की यूनिवर्सिटी ऑफ बफेलो और यूनिवर्सिटी ऑफ प्यूर्तो रिको की 600 महिलाओं पर की गई जॉइंट स्टडी में यह बात सामने आयी कि कच्चा प्याज और लहसुन खाकर ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है।कच्चा प्याज और लहसुन खाना है फायदेमंद
स्टडी में पाया गया कि जिन महिलाओं ने दिन में एक से ज्यादा बार कच्चे प्याज और लहसुन को मिलाकर बनाए गए सोफ्रिटो यानी एक प्रकार सॉस जिसका लैटिन, इटैलियन और अमेरिकन फूड में बहुत इस्तेमाल होता है का सेवन किया उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 67 फीसदी तक कम पाया गया। हालांकि प्याज-लहसुन को कच्चा खाना ही फायदेमंद है। बताया जाता है कि इन्हें भूनने या पकाने से इनके ऐंटीऑक्सिडेंट्स खत्म हो जाते हैं जो कैंसर को हराने के लिए जरूरी माने जाते हैं।लंग्स, प्रॉस्टेट, पेट के कैंसर से भी बचाता है
विशेषज्ञों के अनुसार प्याज में अल्केनाइल सिस्टीन सल्फॉक्साइड्स पाया जाता है, जो एक कैंसररोधी तत्व माना जाता है। स्टडी में यह भी सामने आया है कि प्याज-लहसुन का सेवन इंसानों में फेफड़े का कैंसर, प्रॉस्टेट कैंसर और पेट के कैंसर के रिस्क को भी कम करता है। इस स्टडी के नतीजे न्यूट्रिशन ऐंड कैंसर नाम के जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं। -
Anxiety Disorder: दिमाग पर पड़ सकती है भारी तनाव या प्यार की कमी
[object Promise]हर इंसान जीवन में थोड़ा-बहुत परेशान होता है लेकिन एक साथ ऐसी स्थिति है जिसमें कई मेंटल कंडिशंस एक साथ होती हैं। इस सिचुएशन में इंसान को बहुत घबराहट, चिंता होती है और वे छोटी बात पर भी बेचैन हो जाते हैं। अब एक नई रिसर्च से पता चला है कि पैनिक अटैक्स और ऐंग्जाइटी डिसऑर्डर्स का जवाब हमारी कोशिका को ऊर्जा देने वाला माइटोकॉन्ड्रिया में है।
माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाओं को काम करने के लिए ऊर्जा देते हैं। लेकिन जब कभी इंसानों या चूहों में ज्यादा स्ट्रेस होता है तो यह ऐक्टिविटी डिस्टर्ब हो जाती है। यह नतीजे जर्नल PLOS Genetics में छपे थे।
जीवन में तनाव देने वाले कुछ मुद्दे जैसे तलाक, बेरोजगारी, प्यार का बिछड़ना या फिर युद्ध वगैरह पैनिक अटैक्ट्स और ऐंग्जाइटी पैदा करने वाले मुख्य फैक्टर्स हैं।
ऐसा हर इंसान के साथ नहीं होता कि उसके जीवन में तनाव आए और उसको यह डिसऑर्डर हो जाए, हालांकि वैज्ञानिक उनक फैक्टर्स का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कुछ लोगों पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है और कुछ लोग अप्रभावित रहते हैं।
एक एक्सपेरिमेंट में उन्होंने चूहों को स्ट्रेस दिया और उनके ब्रेन सेल्स में के माइटोकॉन्ड्रिया में कई बदलाव देखे गए। इसके बाद पैनिक डिसऑर्डर के मरीजों के ब्लड सैंपल पैनिक डिसऑर्डर के बाद लिए गए इसमें भी माइटोकॉन्ड्रिया पाथवे अलग आया। इससे यह पता चला कि सेल्युलर एनर्जी मेटाबॉलिजम में बदलाव जानवरों और इंसानों में स्ट्रेस के रिस्पॉन्स का सिमिलर तरीका है।
-यहां देखें ऐंग्जाइटी डिसऑर्डर के कुछ लक्षण
-नर्वसनेस या उलझन महसूस करना
-तेज सांस चलना
-कांपना
-हर वक्त थका महसूस करना
-चिंता पर कंट्रोल न कर पाना
-नींद न आना -
पहाड़ों का ये कीड़ा दे रहा जानलेवा इन्फेक्शन
[object Promise]दिल्ली में इन दिनों एक नए किस्म की बीमारी फैली है। डॉक्टरों ने इसे स्क्रब टाइफस नाम दिया है। ये पहाड़ों में पाए जाने वाले एक खास किस्म के कीड़े टिक बाइट के काटने से फैलने वाला इन्फेक्शन है। इसके काटने से शरीर पर खास तरह का निशान बन जाता है। समय पर इस इन्फेक्शन की पहचान न हो तो इसका सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है, जिससे शरीर के कई अंगों के फेल हो जाने का खतरा बढ़ जाता है। यह जानलेवा हो सकता है। गाजियाबाद में एक महिला की इसकी चपेट में आने से मौत हो चुकी है।
अस्पतालों में इन दिनों स्क्रब टाइफस के मरीजों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई है। गंगाराम अस्पताल में इसके एक दर्जन से ज्यादा मरीज पहुंच चुके हैं। इनमें से कुछ तो आईसीयू में भर्ती हैं। मैक्स के डॉक्टर रोमेल किट्टू ने बताया कि आमतौर पर स्क्रब टाइफस की पहचान के लिए मरीज का आइजीएम टेस्ट कराया जाता है। इसके इलाज के तौर पर ऐंटीबायोटिक्स मौजूद हैं।
डेंगू जैसे लक्षण
इसमें मरीज को बुखार के अलावा सांस लेने में दिक्कत, सिर दर्द, सूखी खांसी के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे ही लक्षण डेंगू, वायरल फीवर या चिकनगुनिया के भी होते हैं। -
फीमेल बॉडी का सबसे लचीला या फ्लैग्जे़बल पार्ट है वजाइना
[object Promise]बनावट और स्ट्रेचिंग
बात इंटरकोर्स की हो, पीरियड्स के दौरान टैंपॉन लगाने की हो, सेक्स टॉय का यूज करने की हो या फिर चाइल्ड बर्थ से जुड़ी हो। वजाइना इन सभी प्रॉसेस के दौरान अपने आकार को बढ़ा लेती है जबकि इन प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद यह वापस अपने आकार में आ जाती है।उत्तेजना के वक्त भी
ऊपर बताई गई स्थितियों से अलग भी एक वक्त ऐसा होता है, जब वजाइना अपने आकार को नैचरल तरीके से बड़ा कर लेती है और यह होता है सेक्स के दौरान फॉरप्ले और उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुंचने पर।इस तरह बढ़ता है साइज
उत्तेजना के वक्त वजाइना का ऊपरी भाग कुछ लंबा और बड़ा हो जाता है। जिस तरह पीनिस का साइज बढ़ता है, उसी तरह वजाइना की डेप्थ भी बढ़ती है। पेनिट्रेशन के दौरान वजाइना की मसल्स फैलती और सिकुड़ती रहती हैं।ऐसा मानना सही नहीं
कुछ महिलाओं और पुरुषों को लगता है कि अगर सेक्स लाइफ में लंबा ब्रेक लिया जाए तो वजाइना टाइट हो जाती है। लेकिन कई बार महिलाएं लंबे समय बाद सेक्स करने में दर्द के कारण झिझकती हैं।तब होती है पीड़ा
अगर किसी महिला ने लंबे समय तक किसी भी वजह से सेक्स नहीं किया हो और फिर सेक्स के दौरान किसी कारण से वजाइना में जरूरी चिकनाहट और गीलापन ना होने के कारण भी सेक्स के दौरान दर्द होता है।तब होता है दर्द
महिलाएं 45 की उम्र के बाद मेनोपॉज की स्थिति से गुजरती हैं। इस दौरान कई हॉर्मोनल चेंजेज के कारण कभी सेक्स की इच्छा नहीं होती तो कभी वजाइना में जरूरी चिकनाहट और गीलापन नहीं आता। इस कारण भी दर्द होता है और टाइटनेस का अहसास हो सकता है।तब महसूस होता है ऐसा
जो महिलाएं लंबे समय तक सेक्स नहीं करती हैं या अपनी सेक्स लाइफ में बहुत ऐक्टिव नहीं रहती हैं, इस कारण उनकी वजाइना वापस अपने नेचरल साइज में आ जाती है, जिस कारण उन्हें लगता है कि टाइटनेस बढ़ गई है। -
कैसे करे बच्चे को हैंडल अगर देख लिया है उसने पार्टनर के साथ आपको हमबिस्तर!
[object Promise]सामान्य रहें और बच्चे को न डांटें
कुछ देर के लिए ऐसा बिल्कुल भी मत सोचिए कि आपका बच्चा सब कुछ समझ गया होगा, खासतौर पर अगर वह 5 साल से छोटा है। ऐसा कुछ भी न कहें कि हम खेल रहे थे वगैरह। इसके बजाए सबसे पहले खुद को कवर करें और उससे कहें कि वह अपने कमरे में जाए और आप जल्द ही उसके पास आती हैं। आप कुछ भी कर रहे हों लेकिन बच्चे को डांटे नहीं।अपराधबोध न लें
इस बारे में अपराधबोध न लें। थोड़े देर के लिए शर्मिंदगी ठीक है। बच्चे से इस बारे में बात करने के लिए कुछ समय ले लें। शर्मिंदगी में बच्चे से तुरंत चिड़िया, तोता जैसी इधर-उधर की बातें न करने लग जाएं। शांत और आराम से रहें। आपके बच्चे को नहीं लगना चाहिए कि आप इस पर बात करते हुए शर्मिंदा हैं।उम्र पर भी ध्यान दें
बच्चे की उम्र को देखते हुए इस बारे में उससे बात करें। देखें क्या उन्हें बताने का सही वक्त आ गया है कि बच्चे कैसे इस दुनिया में आते हैं। अगर आपका बच्चा 5 साल के आसपास है तो आपको क्लीनिकल डिटेल या सेक्स पर डिसकशन नहीं करना चाहिए। कोई भी गैरजरूरी जानकारी न दें। अगर आपका बच्चा 5 साल से बड़ा है और वह नजदीकी के बारे में थोड़ा-बहुत समझता है तो उससे बात कर सकती हैं।ये कर सकती हैं
बच्चों को इस पर समझाने की हड़बड़ी न दिखाएं। उनके इमोशंस को पढ़ने की कोशिश करें अगर आपको लगता है कि वे इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाए हैं तो डिसकस न करें। अगर आपको बच्चा परेशान दिख रहा है और समझने की उम्र में हैं तो बता सकती हैं कि उसके मम्मी-पापा एक-दूसरे को प्यार करते हैं और यह प्यार जताने का एक तरीका। बड़े लोग कभी-कभी ऐसे प्यार जताते हैं। आपको समझ में नहीं आ रहा है कि बात कैसे करें तो एक्सपर्ट की मदद भी ले सकती हैं। -
शहद का ऐसे करें इस्तेमाल ऑयली त्वचा को खूबसूरत बनाने के लिए
[object Promise]त्वचा संबंधी कई प्रकार की समस्याओं के इलाज के लिए शहद का इस्तेमाल एक गुणकारी आयुर्वेदिक औषधि के रूप में हजारों सालों से किया जा रहा है क्योंकि इसमें पर्याप्त मात्रा में पौषक तत्वों के गुण त्वचा को बेहतर बनाने में सहायता करते हैं। ऑयली त्वचा के लिए सबसे असरकारक उपाय है।
इसका इस्तेमाल करने के लिए रसोई घर में रखे सामानों के साथ इसे मिलाना है। अगर आप भी चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाना चाहते हैं तो यहां हम आपको शहद के साथ अन्य वस्तुओं का इस्तेमाल करने के खास उपायों के बारे में बता रहे हैं जो तैलीय त्वचा के लिये एक वरदान साबित होती हैं।
[object Promise]हल्दी और शहद का पेस्ट
यदि आपकी त्वचा पर कील-मुंहासे होने के साथ सूजन, घाव या किसी भी प्रकार का संक्रमण है तो यह पैक आपके लिए एक अच्छा उपचार है। इसके अलावा, यह आपकी त्वचा को खूबसूरत बनाने में भी मदद करता है। हल्दी और शहद का मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाकर 20 मिनट तक लगा रहने दें। उसके बाद अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें। इससे आपके चेहरे पर चमक बढ़ेगी।
दूध और शहद का मिश्रण
यह बात हम सभी जानते है कि दूध और शहद ये दोनों ही बेहतरीन मॉइस्चराइज़र के रूप में जाने जाते हैं जो आपकी त्वचा को हाइड्रेट रखने में सहायता करते हैं। अगर आप त्वचा में प्राकृतिक और निखार पाना चाहते हैं तो इसका उपयोग जरूर करें।
शहद और नींबू का मिश्रणशहद और नींबू का इस्तेमाल प्राचीनकाल से चेहरे का खूबसूरत बनाने के लिए किया जाता है। इस दोनों के मिश्रण से चेहरे के मुँहासे और पिंपल्स को अासानी से दूर किया जा सकता है।
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World Heart Day: सीने का सामान्य दर्द हो सकता है हार्ट अटैक
[object Promise]बिजी लाइफ और बदलते लाइफस्टाइल के चलते अब हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या में भी काफी तेजी आई है। इनमें भी ज्यादा महिलाएं शामिल हैं। दरअसल, सीने में हो रहे हल्के दर्द को भी महिलाएं अक्सर इग्नोर कर देती हैं, जो हार्ट अटैक का एक अहम लक्षण है। हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे के रूप में मनाया जाता है। आइए, इस दिन जानते हैं अपने दिल और उसकी सेहत से जुड़ी कुछ ऐसी बातें, जो सेहतमंद दिल के लिए बेहद जरूरी हैं…
अमेरिका में हुए एक रिसर्च के मुताबिक, सीने में हो रहे सामान्य दर्द को नजरअंदाज करने की वजह से हार्ट अटैक की समस्या ज्यादा बढ़ रही है। इसमें जहां 42 फीसदी पुरुष सीने में दर्द की शिकायत के साथ हॉस्पिटल पहुंचे हैं, तो वहीं 30.7 प्रतिशत महिलाएं सीने में दर्द की शिकायत लेकर हॉस्पिटल पहुंची हैं। इस वजह से हार्ट अटैक के कारण महिलाओं की डेथ पुरुषों के मुकाबले 41 फीसदी ज्यादा होती है। इसकी खास वजह महिलाओं में दर्द कम होना या सहने की जबर्दस्त क्षमता का होना है। जनरल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल असोसिएशन में पब्लिश एक रिसर्च के मुताबिक, हार्ट अटैक के दौरान सीने में उठने वाले दर्द को महिलाएं आसानी से सह जाती हैं।
लाइफस्टाइल और तनाव के चलते
बिजी लाइफस्टाइल और एक साथ कई काम के प्रेशर की वजह से जिंदगी में स्ट्रेस में आना कोई बड़ी बात नहीं है। महिलाएं इसकी चपेट में ज्यादा आती हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक, बदलते लाइफस्टाइल और तनाव के चलते कम उम्र में ही महिलाएं हार्ट प्रॉब्लम की शिकार हो रही हैं। इस बार में कार्डियॉलजिस्ट बताते हैं कि हार्ट डिजीज कोई भी हो, इससे जान का खतरा होता है। आंकड़ों पर नजर डालें, तो हर एक मिनट में एक डेथ दिल की बीमारी से होती है।
अब 30 के बाद ही प्रॉब्लम शुरू
मोटापा और फिजिकल वर्क ना करना हार्ट अटैक की बड़ी वजहें हैं। पानी की कमी के चलते भी हार्ट से जुड़ी प्रॉब्लम हो सकती है। इससे ब्लड थिक हो जाता है और हार्ट अटैक के चांस बढ़ जाते हैं। इसकी एक वजह लाइफ स्टाइल भी है। जंक फूड, एक्सरसाइज और प्रॉपर नींद न लेना टेंशन की वजह बनते हैं, जो दिल की बीमारी को इन्वाइट करती है। कार्डियोलॉजिस्ट कहते हैं कि पहले हार्ट अटैक 40 साल के बाद ही पड़ता था, लेकिन अब 30 के बाद ही महिलाएं इसकी चपेट में आने लगी हैं।लक्षण
हार्ट अटैक होने का सबसे नॉर्मल सिम्पटम सीने में दर्द या बेचैनी है। देखा गया है कि महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से बिल्कुल अलग होते हैं।
• सुबह उठते ही दर्द होना।
• नींद कम आना। भले ही कितनी थकावट हो, अच्छी नींद नहीं आती।
• पेट दर्द, पेट में ऐंठन, डाइजेशन में प्रॉब्लम।
• कान, गर्दन और कंधे का दर्द।
• सीढ़ी चढ़ने या रूटीन वर्क करने में सांस फूलती है।
बचाव
• अगर आपको डायबिटीज है तो उसे कंट्रोल करना जरूरी है। आपका फास्टिंग ब्लड शुगर 100 एमजी/ डीएल से नीचे होना चाहिए और खाने के दो घंटे बाद उसे 140 एमजी से नीचे होना चाहिए। इसके लिए रेग्युलर एक्सरसाइज करें और डाइट में फाइबर को शामिल करें।
• सलाद, सब्जियों और फलों का प्रयोग ज्यादा करें। ये फाइबर देंगे और गुड कॉलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मददगार होंगे।
• रोज 30 मिनट का योग व एक्सरसाइज जरूरी है।
• बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई 25 से नीचे रहना चाहिए।