Category: health

  • पाना है हेल्दी ब्रेन तो रहिये फिट

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    अगर लंबे समय से आप जिम जॉइन करने के बारे में सोच रहे हैं लेकिन कभी आलस तो अभी किसी और वजह से इसे जॉइन नहीं कर रहे हैं तो हाल ही हुई एक स्टडी जिम जॉइन करने की जायज वजह बन सकती है। बॉडी फिटनेस और ब्रेन शार्पनेस से जुड़ी एक रिसर्च में 12 सौ से अधिक लोगों को शामिल किया गया। इन सभी की उम्र 30 साल के आस-पास थी।

    इस रिसर्च में सभी पार्टिसिपेंट्स को अंडरवॉटर ब्रेन स्कैन, यादाश्त, शार्पनेस, निर्णय लेने की क्षमता और तार्किक स्तर पर अपनी बात रखने के पैमानों पर परखा गया। इन सभी के साथ ही हर्टबीट्स को भी जांचा गया। स्डटी में साफ था कि यहां फिटनेस का अर्थ मसल मेकिंग से नहीं है।

    शोधकर्ताओं ने पाया कि फिट लोग दो मिनट के वॉक टेस्ट में काफी तेज गति से रिद्म के साथ चले। जांच के दूसरे पैरामीटर्स पर भी वे अपने कॉलीग्स, जो उनकी तुलना में कम फिट थे, उनसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। फिट लोग दिमागी स्तर पर काफी मजबूत और बेहतर थे। साथ ही फिट महिलाओं और पुरुषों के मस्तिष्क के सफेद पदार्थ के हिस्से में स्वस्थ तंत्रिका फाइबर पाए गए। शोधकर्ताओं के अनुसार, दिमाग में पाया जानेवाला सफेद पदार्थ (वाइट मैटर) उच्च गुणवत्ता वाले तंत्रिका संचार के लिए महत्वपूर्ण है।

    रिसर्च के रिजल्ट के तौर पर सामने आया कि बड़ी संख्या में फिट लोग अपने कम फिट कॉलीग्स की तुलना में वर्कप्लेस पर भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं। रिसर्च टीम के प्रमुख डॉ जोनाथन रिपल ने कई थिअरीज के जरिए यह साबित किया कि स्ट्रॉन्ग बॉडी में ही स्ट्रॉन्ग ब्रेन रहता है। उनका कहना है कि एक्सर्साइज से इंफ्लेमेशन में कमी आती है, जिससे दिमाग की नसों को लाभ पहुंचता है। रिपल जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ मंस्टर में सायकॉलजिस्ट और न्यूरोसाइंटिस्ट हैं।

  • अपने पार्टनर के घुटन भरे डोमिनेटिंग व्यवहार को ऐसे करें हैंडल

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    किसी भी रिश्ते में सबसे अधिक महत्व अगर किसी चीज का होता है तो वह है आपसी सम्मान और एक-दूसरे की स्वतंत्रता। लेकिन कई बार हमें पता ही नहीं चल पाता कि हमारा पार्टनर हमें डोमिनेट कर रहा है। हालांकि इसमें तब तक कोई दिक्कत नहीं है जब तक चीजें आपको भावनात्मक या मानसिक या शारीरिक तौर पर हर्ट ना कर रही हों। ऐसे समझें कि क्या आपका पार्टनर आपको डोमिनेट कर रहा है…

    रिश्ते के लिए जरूरी चीजें

    लव-रिस्पेक्ट और इक्वेलिटी जैसी चीजें किसी भी हेल्दी रिलेशन के लिए जरूरी हैं। अगर एक पार्टनर दूसरे को हर समय नीचा दिखाने या कमतर महसूस कराने की कोशिश करता है तो यह सुखद रिश्ते के लिए अच्छा संकेत नहीं है। आपको इस स्थिति को बदलने का प्रयास करना होगा।

    इंवेस्टमेंट चाहिए

    आर्थिक और सामाजिक जीवन की ही तरह निजी जीवन में भी वक्त और ऊर्जा का निवेश करना पड़ता है। अच्छे रिश्ते के लिए जरूरी है कि आप साथ में वक्त बिताएं। एक-दूसरे से अपनी प्लानिंग और मन की बातें शेयर करें। अगर कोई एक पार्टनर वक्त की कमी की बात कहकर हमेशा दूसरे को इग्नॉर कर रहा है तो यह सही नहीं है।

    उसे ही सारे निर्णय लेने हैं
    मेल हो या फीमेल, डोमिनेटिंग पार्टनर सारे निर्णय खुद ही लेना पसंद करते हैं। कब कहां घूमने जाना है, कितना खर्च करना है, क्या पहनना है, किससे बात करनी है, किससे नहीं करनी है। आपकी हर आदत और जरूरत को वे अपने हिसाब से ढालना चाहते हैं।

    उसे हर समय अटेंशन चाहिए

    डोमिनेटिंग पार्टनर अपने साथी को लेकर बहुत अधिक कॉन्शस होते हैं। उन्हें हर समय अपने पार्टनर की अटेंशन चाहिए होती है। ऐसे लोग अपने साथी की किसी जरूरत को प्राथमिकता नहीं देते और हर बार उनका अपना काम और जरूरते पहले पूरी करनी होती हैं।

    पर्सनल स्पेस चाहिए

    हर व्यक्ति को अपने जीवन में कुछ निजता की जरूरत होती है। हर बात और हर काम में दखल किसी को भी अच्छा नहीं लगता है। अगर आपका पार्टनर आपकी निजता का सम्मान नहीं करता है तो यह इस बात का सबसे कॉमन साइन है। इसमें पार्टनर आपका फोन चेक करता है, वो भी आपसे पूछे बिना।

    ऐसा इसलिए होता है

    सायकॉलजिस्ट्स के अनुसार, कुछ लोग डोमिनेटिंग पर्सनैलिटी के होते हैं जबकि कुछ लोगों में यह आदत समय और परिस्थितियों के कारण आ जाती है। लेकिन स्थिति जो भी हो अगर किसी एक पार्टनर के कारण दूसरा परेशान हो रहा है तो उसे इस मुद्दे पर बात करनी चाहिए।

    इसमें नहीं है गुरेज

    अगर आपका रिश्ता आपको घुटन दे रहा है तो परेशान होने से बेहतर है कि आप काउंसलर की मदद लें। इससे आपको अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने और अपनी जिंदगी को सही से जीने की प्लानिंग करने में मदद मिलेगी।

  • क्या आप करना चाहेंगी Sonam Kapoor का बाइकर साड़ी लुक ट्राई?

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    करवा चौथ आने वाला है और सभी शादीशुदा महिलाओं ने इसकी तैयारियां भी अभी से शुरू कर दी होंगी। इस दिन अगर आप कुछ अलग पहनने की सोच रही हैं। लहंगा और साड़ी जैसे आउटफिट्स पहनकर थक चुकी हैं तो फिर सोनम कपूर का यह अनारकली और बाइकर साड़ी लुक ट्राई कर सकती हैं।

    रेड कलर के अनारकली में सोनम का स्वैग

    सोनम कपूर ने रेड कलर का यह फ्लोर लेंथ अनारकली हाल ही में पहना था। यह अनारकली मसाबा के फेस्टिव एडिट कलेक्शन से है, जिसमें गोल्डन कलर का ट्री ट्रंक ग्रिड था। इस अनारकली की खासियत ही यह ग्रिड है, जो इसे एक्स्ट्रा शाइन दे रहा था।

    भारी झुमके, जूड़ा और न्यूड लिप्स का डेडली कॉम्बो
    हाई नेक और फुल स्लीव्स वाले इस अनारकली में सोनम काफी गॉर्जस लग रही थीं। बालों को उन्होंने मिड पार्टिंग करके जूड़ा बनाया हुआ था, जबकि कानों में भारी झुमके पहने। बेहद लाइट मेकअप और न्यूड शेड की लिपस्टिक और रेड कलर की बिंदी में सोनम किसी नई दुल्हन से कम नहीं लग रहीं।

    सोनम की बाइकर साड़ी

    सोनम का यह बाइकर साड़ी लुक भी काफी चर्चा में हैं और आप इसे अपने करवा चौथ व्रत पर कैरी कर सकती हैं। इस लुक में आप खूबसूरत दिखने के साथ ही सबसे अलग भी लगेंगी।

    बड़े कॉलर वाले ब्लाउज के साथ डैंगलर्स

    बाइकर साड़ी के साथ सोनम ने बड़े कॉलर वाला ब्लाउज और हेवी लेकिन बड़े डैंगलर्स पहनें, जो उन्हें हॉट और सेक्सी लुक दे रहे थे। सोनम का यह लुक सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोर रहा है। 

  • जानें मटके की खासियत और इनके नायाब फायदे

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    पहले के जमाने में लोग पानी पीने और उसे स्टोर करने के लिए मिट्टी के घड़ों का इस्तेमाल करते थे। मिट्टी का प्राकृतिक गुण होता है कि वो सारी गदंगी को अपने में समेट लेती है और खुद साफ रहती है। किसी भी प्रकार की गंदगी को आप मिट्टी में दबा दें और पाएंगे कि वो कुछ दिनों बाद खुद-ब-खुद उसमें समाहित हो जाती है। बस ऐसे ही अगर आप मिट्टी के घड़े का इस्तेमाल पानी पीने के लिए करेंगे तो सेहतमंद रहने के साथ ही कई प्रकार की बीमारियों से भी बचे रहेंगे।

    मेटाबॉलिज्म सुधारता है

    मिट्टी के बर्तन में पानी पीने से बॉडी में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बना रहता है वहीं प्लास्टिक की बोतल में पानी पीते रहने से इसका लेवल लगातार कम होता जाता है। टेस्टोस्टेरोन, पुरुषों में प्रजनन संबंधी टेस्टिस और प्रोस्ट्रेट के विकास के लिए बहुत ही जरूरी होता है। मिट्टी के बर्तन में रखा पानी हमेशा ठंडा ही होता है जो मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है।

    हेल्दी रखता है 

    मिट्टी कई तरह के मिनरल्स और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी से भरपूर होती है। तो इसमें पानी रखने से इसके सारे जरूरी तत्व पानी में धीरे-धीरे मिक्स होते रहते हैं। जो सेहत के लिए हर तरीके से हैं फायदेमंद।

    पानी को रखता है ठंडा

    बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीना सेहत के लिए नुकसानदायक होता है लेकिन गर्मियों में फ्रिज का ठंडा पानी पीकर ही प्यास बुझती है। बेहतर होगा आप घर में मिट्टी का घड़ा रखें। मिट्टी में बहुत ही बारीक छिद्र होते हैं जो वाष्पीकरण का काम करते हैं। इस वजह से इसमें रखा पानी हमेशा ही ठंडा रहता है और सेहत के लिए फायदेमंद भी।

    पीएच बैलेंस रखता है मेनटेन

    मिट्टी में एल्काइन मौजूद होता है जो पानी का पीएच बैलेंस करता है। यही वजह है कि मटके में रखा पानी हर तरह से फायदेमंद है। पेट से जुड़ी बीमारियों से बचने के लिए मिट्टी के घड़े में रखा पानी इस्तेमाल करें।

  • खानपान में करें जरूरी बदलाव उम्र के हिसाब से और रहें बीमारियों से कोसों दूर

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    अगर आप स्वस्थ और लंबा जीवन व्यतीत करना चाहते हैं तो युवावस्था से ही आपको अपने खानपान और जीवनशैली को संतुलित रखना होगा। 18 साल की आयु के बाद उम्र के अनुसार आपके आहार में परिवर्तन की आवश्यकता होती है। हमारा मेटाबॉलिज्म भी उम्र के साथ घटता जाता है और पोषक तत्वों की जरूरतें भी बदलती रहती हैं।

    हमारा भोजन प्रमुख पोषक तत्वों की दैनिक जरूरतों को पूरा करे, जिससे हमारे शरीर का रोग प्रतिरोधक तंत्र मजबूत बना रहे, हड्डियां और मांसपेशियां नुकसान से बची रहें, आंखों की रोशनी सुरक्षित रहे और हमारी कोशिकाएं फ्रीरेडिकल्स की क्षति से बची रहें। आइए जानते हैं कि आपका खानपान उम्र के मुताबिक कैसा होना चाहिए..

    20 से 30 साल तक

    यह जीवन का बहुत महत्वपूर्ण और चुनौती भरा समय होता है। जब अनेक लोग अपनी पहली नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं और कुछ उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे होते हैं। वहीं कुछ लोग अपने व्यक्तिगत संबंधों को कायम करने में लगे होते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना स्वाभाविक है। शोध से यह भी पता चला है कि इस उम्र के लोगों के भोजन में मुख्यत: प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड की कमी होती होती है। इस समय के दौरान आपकी हड्डियों का घनत्व बन रहा होता है। इसी वजह से कैल्शियम आहार का महत्वपूर्ण भाग होना चाहिए। बींस हरी पत्तेदार सब्जियां और और फली आदि भी हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं।

    फोलेट का महत्व: यह डीएनए को बनाने और इसे दुरुस्त रखने के लिए जरूरी है। पुरुषों और महिलाओं को प्रतिदिन 0.4 मिलीग्राम फोलेट की जरूरत पड़ती है।

    इन्हें जरूरी है बी विटामिन: जो महिलाएं गर्भवती होना चाहती हों, उन्हें बी विटामिन पर अधिक ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा उन्हें दलिया पालक, ब्रोकोली, बींस और दालों को अपने आहार में वरीयता देनी चाहिए। प्रसव उम्र की महिलाओं को एक मल्टी विटामिन भी लेना चाहिए जो 04 से 1 मिलीग्राम फोलिक एसिड की आपूर्ति करे।

    आयरन आवश्यक: यह अच्छे मेटाबॉलिज्म के लिए जरूरी है। मांसपेशियों में ऑक्सीजन को स्थानांतरित करना आयरन का एक प्रमुख कार्य है। इसके अलावा आयरन शरीर में रक्त को बढ़ाता है और हार्मोन को संतुलित रखता है। आयरन की कमी से थकान महसूस होती है। दाल, सोयाबीन, किशमिश और पालक आयरन के अच्छे स्रोत हैं। 30 साल की उम्र से मांसपेशियों में उम्र से संबंधित क्षति की शुरुआत होने लगती है और मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है। इस वजह से कैलोरी की आवश्यकता कम होने लगती है। अगर हम 30 या 40 में 20 के दशक जैसा खाने का पैटर्न रखें तो वजन बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।

    30 से 40 के दौरान

    इस उम्र के मध्य अत्यधिक चिकनाईयुक्त खाद्य पदार्थ स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थ, नमक, मिठाई, मीठे पेय पदार्थ अत्यधिक वसा और बहुत ज्यादा कैलोरी वाली वस्तुओं को कभी कभार लेना चाहिए। फाइबर युक्त भोजन लें। सब्जियों में फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। खाद्य पदार्थों में ऊपर से नमक न डालें। प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएं। प्रतिदिन 50 से 60 ग्राम प्रोटीन लें। अधिक वसा, मैदा, मीठा और ज्यादा नमकीन खाद्य पदार्थ खाने से आगे चलकर अनेक शारीरिक समस्याएं-जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हाजमे से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। शोध से यह बात भी प्रमाणित होती है कि 5 से 10 प्रतिशत वजन कम करके डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। इस उम्र में एंटीऑक्सीडेंट का भी बहुत महत्व है। इसके लिए पर्याप्त मात्रा में फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। जैसे टमाटर, पपीता, संतरा, चेरी और स्ट्राबेरी आदि।

    40 से 50 के मध्य

    इस दौरान अधिकतर लोगों में वजन बढ़ने से हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग होने का जोखिम बढ़ जाता है। अपने वजन को संतुलित रखने के लिए और हड्डियों को मजबूत रखने के लिए प्रतिदिन व्यायाम करें। इस समय के दौरान भोजन की मात्रा को कम करके उसकी गुणवत्ता पर अधिक ध्यान दें। तला हुआ खाना और ज्यादा मिर्च मसाले वाला खाना कम करें। भोजन समय से करें। अगर शराब या सिगरेट का सेवन करते हैं, तो इन लतों को बंद कर दें। खाने में तेल और नमक का इस्तेमाल कम से कम करें।

  • एक समाधान परिवार की इन सभी समस्याओं का

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    हम सभी जानते हैं कि आजकल हमारे पास वक्त की कमी है। पैरंट्स और बच्चे सभी अपनी-अपनी लाइफ में व्यस्त हैं। उस पर टेक्नॉलजी हमारे जीवन पर इतनी हावी हो गई है कि एक कमरे में एक सोफे पर बैठकर भी सब चुप होते हैं और शरीर से कमरे में होते हुए भी दिमाग से सब वर्जुअल दुनिया में होते हैं। मतलब अपने-अपने फोन के साथ फेसबुक, यूट्यूब और वॉट्सऐप जैसे सोशल प्लेटफॉर्म पर व्यस्त।

    ऐसा करने में कोई बुराई नहीं है लेकिन अगर यह आपकी रोज की आदत बन गई है तो आप सोशल प्लेटफॉर्म पर भले ही कितने भी ऐक्टिव रहते हों आपकी फैमिली लाइफ और अपने परिवार से बॉन्डिंग टूटती जा रही है। इस पर वक्त रहते काम करने की जरूरत है। इससे पहले कि आपको लगने लगे कि आप अपने परिवार के साथ रहते हुए भी उससे बहुत दूर हो गए हैं।

    क्या पड़ता है असर?
    विशेषज्ञों के अनुसार, परिवार से बढ़ती दूरियां शुरुआत में समझ में नहीं आती हैं लेकिन इसका अहसास तब जरूर होता है, जब हमें किसी भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है। क्योंकि तब हम अपने परिवार को अपनी भावनाओं से जुड़ा हुआ नहीं पाते हैं और उनसे अपनी बातें शेयर करने में हमें दिकक्त आती है। कई बार हम भीड़ में भी खुद को अकेला फील करने लगते हैं।

    क्या करें और कैसे करें?
    सायकाइट्रिस्ट्स का कहना है कि बुरा नहीं है फोन पर व्यस्त रहना और सोशल मीडिया पर ऐक्टिव रहना लेकिन अति हर चीज की बुरी होती है। जरूरत से ज्यादा फोन का इस्तेमाल हमें मानसिक रूप से भी थकानेवाला होता है। जिसका असर हमें काफी बाद में पता चलता है। साथ ही सोशल मीडिया पर लोग कई बार गलत लोगों के चंगुल में भी आ जाते हैं। हर टेक्नॉलजी के अपने फायदे और नुकसान हैं। यह हमें समझना होता है कि हमारे लिए क्या बेहतर है और क्या नहीं। हर प्लेटफॉर्म के यूज के लिए समय निर्धारित करें और परिवार के लिए भी समय जरूर निकालें।

    ऐसे करें डील

    अपने सभी शौक जारी रखते हुए अपने परिवार के लिए भी वक्त निकालें। दिन में कम से कम एक बार पूरा परिवार कुछ वक्त के लिए साथ बैठकर बातें करें। अगर ऐसा लगे कि किस मुद्दे पर और क्या बात करें तो इसका भी समाधान है। बच्चों से उनके स्कूल, कॉलेज या ऑफिस के बारे में पूछें। दिन कैसा रहा उनका, क्या किया आज पूरा दिन साथ ही दिनभर की अपनी गतिविधियों के बारे में भी बताएं।

  • ये घरेलू नुस्खे करेंगे मदद सिगरेट की लत छोड़ने में

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    कुछ समय पहले तक यह बात कही जा रही थी कि ई-सिगरेट, सिगरेट छोड़ने की लत में मदद कर सकती है। लेकिन ई-सिगरेट के शरीर पर होने वाले हानिकारक प्रभाव को देखते हुए केन्द्र सरकार ने बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, भंडारण और आयात- निर्यात पर रोक लगा दी। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कुछ बेहद आसान घरेलू नुस्खों के बारे में जिसके जरिए आप भी आसानी से छोड़ पाएंगे सिगरेट पीने की लत…

    ​दालचीनी और शहद

    सिगरेट पीने और तंबाकू खाने से फेफड़ों का कैंसर, मुंह का कैंसर और कई दूसरी जानलेवा बीमारियों का खतरा बना रहता है। लिहाजा सिगरेट की लत छुड़ाने के लिए दालचीनी को बारीक पीस लें और उसमें शहद मिला लें। जब भी सिगरेट पीने का मन हो तो दालचीनी और शहद के इस मिश्रण का सेवन करें।

    ​अदरक और आंवला

    अदरक और आंवला को कद्दू-कस कर उसे सुखा लें और नींबू और नमक डाल कर डिब्बे में भरकर हमेशा अपने साथ रखें। जब भी सिगरेट पीने की तलब लगे, आप थोड़ी थोड़ी देर पर इस पेस्ट का सेवन कर सकते हैं।

    ​अजवायन और सौंफ

    अजवायन और सौंफ को बराबर क्वॉन्टिटी में और इन दोनों से आधी क्वॉन्टिटी में काला नमक मिलाकर बारीक पीस लें। फिर इसमें थोड़ा सा नींबू का रस मिलाकर रातभर रख दें। सुबह इसे गर्व तवे पर हल्का भून लें और फिर एयर टाइट कंटेनर में बंद करके रखें। जब भी सिगरेट पीने का मन हो तो इस चूर्ण को चूस लें। सिगरेट की लत छूट जाएगी।

    ​फ्रूट जूस पिएं

    मौसम्मी, संतरा और अंगूर जैसे फल और उनका रस पीना भी सिगरेट की तलब मिटाने में मददगार साबित हो सकता है।

    प्याज का रस
    सिगरेट और गुटका छोड़ने के लिए रोजाना 4 चम्मच प्याज का रस पिएं। सुबह उठते ही 2 गिलास गुनगुने पानी में नींबू निचोड़ कर पिएं। पानी में शहद का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इससे न सिर्फ आपकी सेहत बनी रहेगी, वजन कम होगा बल्कि सिगरेट-तंबाकू की लत छुड़ाने में भी मदद मिलेगी

    ​पॉपकॉर्न खाएं

    सिगरेट की लत छोड़ने के दौरान व्यक्ति को कुछ खाने की इच्छा होती रहती है ताकि उसके हाथ व मुंह बिजी रहें जैसा स्मोकिंग के दौरान होता है। ऐसे में पॉपकॉर्न काफी मदद कर सकते हैं। पॉपकॉर्न का फायदा यह है कि इसमें मौजूद फाइबर पेट को भरता है साथ ही में यह स्मोकिंग की इच्छा को भी कम करता है।

  • लिवर और किडनी कैंसर का खतरा चमकते सेब से, रहें सावधान

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    कहते हैं हर चमकती चीज सोना नहीं होती वैसे ही हर चमकता सेब फायदेमंद नहीं होता। बाजार में बिकने वाले चमकदार सेबों पर केमिकल वैक्स की परत चढ़ाकर उन्हें बेचा जाता है और अगर आप इसकी सुंदरता के चक्कर में इसे अच्छा और साफ सुथरा मानकर खरीद रहे हैं तो यकीन मानिए आप अपनी सेहत से समझौता कर रहे हैं। सेब पर की जाने वाली यह केमिकल वैक्स की कोटिंग लिवर और किडनी पर असर डालती है जिससे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी भी हो सकती है।

    मंत्री को भी मिले वैक्स वाले सेब
    इस तरह के केमिकल कोटिंग वाले सेब की बिक्री की रोकथाम के लिए कई बार अभियान चलाए जाते हैं पर कुछ दिन बाद बीमारी फैलाने वाले ये सेब फिर से बाजार में बिकने लगते हैं। हाल में इसकी चर्चा तब फिर शुरू हो गई जब केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने बाजार से जो सेब मंगवाए थे उन पर केमिकल वाले वैक्स की मोटी परत चढ़ी मिली।

    फल खराब होने से बचाने के लिए लगाते हैं वैक्स
    फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के डीओ पृथ्वी सिंह ने इस बारे में बताया कि वेजिटेबल वैक्स का फल सब्जियों पर प्रयोग किया जा सकता है। नियम के अनुसार नैचरल वैक्स व वेजिटेबल वैक्स का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन ज्यादातर दुकानदार केमिकल वैक्स का इस्तेमाल करते है, जो हमारी सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। फल विक्रेताओं की मानें तो फलों को खराब होने से बचाने के लिए उस पर वैक्स कोटिंग का इस्तेमाल किया जाता है।

    गर्म पानी से धोकर ही खाएं फल

    सर्वोदय अस्पताल के विशेषज्ञ डॉ सुनील राणा ने बताया कि फल और सब्जियों पर लगा वैक्स शरीर के लिए नुकसानदेह होता है जिससे पेट से जुड़ी बीमारियां, लिवर व किडनी कैंसर भी हो सकता है। कई बार लोग वैक्स लगे फल व सब्जियों का सेवन कर लेते हैं, जिसके बाद वैक्स शरीर के अंदर जाकर कई अंगों में जम जाता है। लिहाजा फल व सब्जी का प्रयोग करने से पहले उन्हें करीब 15 से 20 मिनट तक गर्म पानी में रखें और फिर अच्छे से धोकर ही उनका खाने में इस्तेमाल करना चाहिए।

  • पार्टनर से हुआ है ब्रेकअप? दुखी होने के बजाय करें ये काम

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    लंबे समय से चला आ रहा रिलेशनशिप अगर खत्‍म हो रहा हो तो यह किसी के लिए भी काफी दर्द भरा होता है। खासतौर पर ऐसा तब लगता है जब आप अपने पार्टनर को सच्‍चे दिल से चाहते हों। जब आपको पता चलता है कि रिश्ते को बचा पाने का कोई रास्ता नहीं है तो इसका दर्द किसी भी शारीरिक चोट के बराबर महसूस होता है। इस गैलरी के जरिए हम आपको यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि इस दर्द से कैसे उबरा जा सकता है…

    नकारात्मक भावनाओं को न दबाएं
    नकारात्मक भावनाओं को दबाने की कोशिश मत करें। अगर आपको गुस्‍सा आ रहा है, आप अपमानित और हताश महसूस कर रहे हैं तो ठीक है। इसमें ज्‍यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसी भावनाएं आती हैं और फिर चली जाती हैं। आपके भीतर जो तूफान उठ रहा है, वह कुछ समय के बाद कम हो जाता है और समय घावों को ठीक करता है।

    पुरानी यादों को मिटाएं
    उन सभी चीजों को भुलाने की कोशिश करें जो आपको आपके एक्‍स की याद दिलाती हैं। सबसे पहले आप उसे सोशल मीडिया पर चेक करना बंद कर दें। हो सके तो उसके ब्‍लॉक कर दें।
    लोगों के बीच में रहें

    इस फेज में लोगों को दर्द से उबरने के लिए अकेला रहना ज्‍यादा बेहतर लगता है लेकिन कोशिश करें कि ऐसा न हो। आप अपने परिवार और करीबी दोस्‍तों के बीच रहें।

    ट्रिप प्‍लान करें
    ट्रैवल करने का प्‍लान करें। यह न सोचें कि आप अपने पार्टनर के साथ घूमने जाते थे तो अब कैसे जाएं। दोस्‍तों के साथ घूमने की प्‍लानिंग करें। फन ट्रिप में खुद को शामिल करें, उस जगह को चुनें जहां आप न गए हों।
    खुद का ख्‍याल रखें

    दुखी और अकेले रहने से आपके स्‍वास्‍थ्‍य पर भी असर पड़ता है। ऐसे में आप कितना भी सुस्त महसूस कर रहे हों, अपना ख्‍याल रखें। ठीक से और अच्‍छा खाएं और एक्सर्साइज करना न छोड़ें। जितना हो सके, खुद से प्‍यार करें। अपने लिए बिल्‍कुल भी लापरवाह न हों।

  • ये परेशानियां हो सकती है प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकिंग से होने वाली बच्ची को

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    प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकिंग से होने वाली बच्ची को बाद में फर्टिलिटी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। एक हालिया स्टडी में यह जानकारी सामने आई है। स्टडी में कहा गया है कि प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकिंग करने वाली माताओं से पैदा होने वाली बच्चियां के टेस्टोस्टेरॉन के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है, जो भविष्य में उनके हार्मोन और फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है। यह स्टडी यूरोपियन सोसायटी फॉर पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी की सलाना मीटिंग में प्रस्तुत किया गया था।

    स्टडी में कहा गया है कि स्मोकिंग एक एंडोक्राइन डिसरप्टर है जो गर्भ में ही लड़कियों को मर्दाना बना सकता है और प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकिंग करने वाली महिलाओं की बच्चियों में लंबे समय में हार्मोनल और फर्टिलिटी की समस्या हो सकती है। प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकिंग करना मां और बच्चे दोनों के हेल्थ के लिए बहुत बुरा माना जाता है। हालांकि कुछ महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकिंग करना बंद नहीं करती हैं। सिगरेट के धुएं में मौजूद कई टॉक्सिन्स बच्चों के हेल्थ के लिए खतरनाक होते हैं और इन टॉक्सिन्स से टेस्टोस्टेरॉन का स्तर बढ़ता है।

    टेस्टोस्टेरॉन के संपर्क में आने वाली बच्चियों में असामान्य विकास के साथ उनकी फर्टिलिटी और मेटाबॉलिजम पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। यह स्टडी को तुर्की के सिगली स्टेट ट्रेनिंग हॉस्पिटल की डॉक्टर डेनिज ओजाल्प किजिले और उनके सहयोगियों ने किया है। स्टडी के दौरान रिसर्चर्स ने 56 नवजात बच्चियों और 64 बच्चों के एजीडी एनोजेनिटल डिस्टेंस (Genitalia से Anus की दूरी) को मापा। इन बच्चों के माताएं प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकिंग करती रहती हैं। स्मोकिंग करने वाली महिलाओं की बच्चियों के एजीडी नॉर्मल से ज्यादा पाया गया। वहीं लड़कों के एजीडी पर कोई प्रभाव नहीं पाया गया।

    डॉ. किजिले ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘गर्भ में सिगरेट के धुएं के संपर्क में आने के कारण होने वाली संभावित समस्याओं के पीछे के तंत्र को पूरी तरह से नहीं समझा जा सकता है। हमारे परिणाम बताते हैं कि लड़कियों में हाई टेस्टोस्टेरॉन का जोखिम होता है, लेकिन प्रजनन से इसके संबंध को नहीं बताता है। इसके प्रभाव को और इस रिश्ते को समझाने के लिए सावधानी से डिजाइन किए गए स्टडी की आवश्यकता होती है।’ टीम ने नवजात बच्चियों के एक समूह पर स्मोकिंग के जोखिम और हाई टेस्टोस्टेरॉन लेवल के संपर्क में आने से पड़ने वाले प्रभावों की निगरानी करने का प्लान बनाया है ताकि उनपर होने वाले प्रभाव को समझा जा सके।