Category: health

  • रिवर्स डायटिंग है Weight Loss का नया ट्रेंड

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    आपका वजन घटाने का मिशन तभी सफल हो पाएगा जब आप जितनी मात्रा में कैलरी का सेवन करते हैं और एक्सर्साइज या वर्कआउट के जरिए जितनी मात्रा में कैलरी बर्न करते हैं उसके बीच परफेक्ट बैलेंस हो। ऐसे में ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि वेट लॉस करना है तो खाना कम खाना चाहिए। लेकिन कुछ लोग ज्यादा खाना खाकर भी दुबले-पतले ही रहते हैं। ऐसे में ज्यादा कैलरीज का सेवन कर वेट लॉस करने के इस डायट ट्रेंड का नाम है रिवर्स डायटिंग और इसे कैसे करते हैं यहां जानें…

    आखिर क्या है रिवर्स डायटिंग?

    रिवर्स डायटिंग का ट्रेंड बॉडी बिल्डर्स और ऐथलीट्स के बीच काफी पॉप्युलर है जो अपने शरीर का एनर्जी लेवल बनाए रखने के साथ ही बॉडी वेट को भी मेन्टेन रखते हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो रिवर्स डायटिंग के जरिए शरीर की एनर्जी बेहतर होती है, भूख कम लगती है और वेट लॉस को स्थिर करने में मदद मिलती है। रिवर्स डायटिंग में कुछ हफ्तों के दरम्यान आपको धीरे-धीरे कैलरी का इनटेक बढ़ाना है ताकि मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाया जा सके।

    आमतौर पर जो दूसरे डायट ट्रेंड्स होते हैं उसमें आपको समय के साथ अपना कैलरी इनटेक धीरे-धीरे घटाना होता है ताकि आपका शरीर उसके अनुकूल हो जाए। ऐसा करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म कम हो जाता है और शरीर की एनर्जी बचने लगती है। लेकिन रिवर्स डायटिंग की यह स्थिति थोड़ी दिक्कत वाली हो सकती है उस समय के लिए जब आप वेट गेन किए बिना अपने नॉर्मल डायट में वापस आना चाहते हैं।

    कैसे करें रिवर्स डायटिंग?

    रिवर्स डायटिंग में आपको हर हफ्ते सामान्य इन्पुट से 50 से 100 कैलरी ज्यादा इनटेक करना होता है। साथ ही इस प्रोसेस को 4 से 10 सप्ताह तक फॉलो करना होता है। इस दौरान आपका प्रोटीन इनटेक एक जैसा ही रहना चाहिए। कैलरी इनटेक बढ़ने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होगा और आप नॉन एक्सर्साइज ऐक्टिविटी जैसे- बात करने, चलने और सामान्य काम करने के दौरान भी काफी कैलरी बर्न कर सकते हैं। साथ ही लेप्टिन जैसे हॉर्मोन का लेवल सामान्य करने में भी मदद मिलेगी जो भूख और बॉडी वेट को रेग्युलेट करने के लिए जिम्मेदार है।

    क्या वेट लॉस में मददगार है रिवर्स डायटिंग?
    रिवर्स डायटिंग के जरिए अनहेल्दी फूड आइटम्स को ज्यादा खाने की जो चाहत होती है उसके रिस्क को कम करने में मदद मिलती है। ऐसे में अगर हम इस डायटिंग ट्रेंड के थिअरी पर विश्वास करें तो यह डायट वेट लॉस के लिए अच्छा है लेकिन प्रैक्टिकली यह कितना असरदार है इस बारे में अब तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। रिवर्स डायटिंग से मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और डायटिंग के बाद दोबारा वजन बढ़ने का खतरा नहीं रहता। साथ ही एनर्जी लेवल बढ़ता है और भूख भी कम लगती है। लेकिन इस डायट ट्रेंड से वेट लॉस होता है इसे पूरे विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता।

  • Heart Failure के मरीज भी जी सकते हैं लंबा जीवन अगर समय पर हो जाए डायग्नोज

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    डॉक्टरों की मानें तो भारत में हार्ट फेलियर के मरीजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है बीमारी की पहचान में होने वाली देरी। ज्यादातर मरीज इलाज के लिए उस वक्त आते हैं जब उनकी बीमारी अडवांस्ड स्टेज में पहुंच जाती है। कार्डियॉलजिस्ट्स की मानें तो वैसे लोग जिनमें पहले से हार्ट डिजीज का खतरा है या फिर हार्ट अटैक की हिस्ट्री रह चुकी है, या हाई ब्लड प्रेशर और डायबीटीज की समस्या है उन्हें नियमित रूप से स्क्रीनिंग करवानी चाहिए ताकि हार्ट फेलियर का पता शुरुआती स्टेज में ही लग जाए और मौत की आशंका को रोका जा सके।

    देर से पता चलने पर एक साल में 50% मरीजों की मौत
    एम्स के कार्डियॉलजी विभाग के प्रफेसर डॉ संदीप सेठ कहते हैं, वैसे लोग जिनमें हार्ट फेलियर की समस्या बाद के स्टेज में पता चल पाती है उनमें से 50 प्रतिशत लोगों की एक साल के अंदर मौत हो जाती है। ज्यादातर मरीज दवा का नियमित सेवन और लाइफस्टाइल में किए जाने वाले जरूरी बदलाव पर अमल नहीं करते जिस वजह से बीमारी बढ़ जाती है। इस वजह से मौत की आशंका अधिक होती है।

    जिंदगी का अंत नहीं है हार्ट फेलियर
    एम्स में एक हार्ट फेलियर क्लिनिक चलाया जाता है जहां हार्ट फेलियर नर्सों की बहाली की गई है जो मरीज के परिवार वालों की काउंसलिंग कर उन्हें यह समझाने की कोशिश करती हैं कि मरीज के लिए समय पर दवा लेना, फ्लूइड और लिक्विड का कम सेवन करना, नमक के सेवन पर नियंत्रण करना और नियमित रूप से एक्सर्साइज करना कितना जरूरी है। फॉर्टिस अस्पताल की सीनियर कार्डियॉलजिस्ट डॉ अपर्णा जस्वाल कहती हैं, हार्ट फेलियर जिंदगी का अंत नहीं है। ज्यादातर मरीज जिन्हें हार्ट फेलियर डायग्नोज होता है, वह भी नियमित रूप से दवा का सेवन कर सामान्य जीवन जी सकते हैं।

    हार्ट फेलियर को लेकर लोगों के बीच जागरुकता की कमी
    भारत में नोवार्टिस के एमडी संजय मुर्देश्वर कहते हैं, हार्ट फेलियर जानलेवा होने के साथ-साथ लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है जो दुनियाभर में 2 करोड़ 60 लाख लोगों को प्रभावित करती है जिसमें से अकेले भारत में हार्ट फेलियर के मरीजों की संख्या 80 लाख से लेकर 1 करोड़ के आसपास है। यह बीमारी दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोगों की जान ले रही है, बावजूद इसके बीमारी को लेकर लोगों के बीच जागरुकता की कमी है। करीब 60 प्रतिशर हार्ट फेलियर के मरीज ऐसे हैं जिनकी बीमारी या तो डायग्नोज ही नहीं होती या फिर गलत डायग्नोज होती है। हम यह मानते हैं कि अगर समय पर मरीज को इलाज मिल जाए तो हार्ट फेलियर के मरीज भी अस्पताल से बाहर आ सकते हैं और लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

  • इन बातों के लिए करें खुद को तैयार, फिर करे प्यार का इज़हार

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    किसी से प्यार करना तो हमारे वश में हैं लेकिन हमारे उस इमोशन को स्वीकार करना या ना करना जाहिर तौर पर दूसरे के अधिकार क्षेत्र की बात है। जैसे हम उम्मीद करते हैं कि हमारे फैसले का सम्मान होना चाहिए, ठीक वैसे ही दूसरा भी इस बात की उम्मीद हमसे करता है। लेकिन अपने मन की बात सही ढंग से दूसरे तक पहुंचाना एक आर्ट है ताकि प्रपोजल एक्सेप्ट होने के चांसेज बढ़ जाएं…

    रियल लाइफ में नहीं है उतना एक्साइटिंग

    किसी को पसंद करना और उसे I Love You बोलना सोचने में जितना एक्साइटिंग होता सकता है, असल में उतना ना तो आसान होता है और ना ही एक्साइटिंग। क्योंकि हमारी लाइफ तीन घंटे की स्क्रिप्टेड मूवी नहीं है। इसलिए किसी के प्रति अपनी भावनाएं जाहिर करने से पहले उसे समझने का पूरा प्रयास करना चाहिए। साथ ही बेहतर होगा कि आप उसकी फीलिंग्स के बारे में भी पता लगा लें।

    टाइमिंग मैटर करती है

    इससे ज्यादा जरूरी शायद कुछ नहीं, जब आपको पता होना चाहिए कि अपने दिल की बात कहने का सही मौका कौन-सा रहेगा। इस बात को दिमाग में रखें कि प्यार के मामले में कभी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।

    प्यार का शुरुआती दौर

    जब आप किसी प्रति आकर्षण महसूस करते हैं तो शुरुआती कुछ महीनों में दूसरे व्यक्ति की हर बात अच्छी लगती है, सबकुछ परियों की कहानी जैसा लगने लगता है। लेकिन कुछ वक्त बीत जाने के बाद उसी व्यक्ति का आदतें हमें बुरी आदत लगने लगती हैं। इसलिए मच्योरिटी के साथ आगे बढ़ने की जरूरत होती है। पूरा वक्त लें।

    ‘I Love You’ कहने का सही तरीका

    दुनिया में ऐसा कोई तरीका नहीं है, जिसके लिए कहा जा सके कि पहली बार अपना प्यार जाहिर करने के लिए यही परफेक्ट रहता है। गिफ्ट और फ्लॉवर के साथ अपनी बात करना कॉमन जरूर हो सकता है पर जरूरी नहीं परफेक्ट हो। वक्त और सिचुएशन के हिसाब से आप अपनी बात जाहिर कर सकते हैं। गिफ्ट और फूल महंगे हों ये जरूरी नहीं, भावनाएं सच्ची होनी चाहिए।

    ‘ना’ सुनने के लिए तैयार रहें

    प्यार जताने के लिए जितने साहस की जरूरत है, उतने ही साहस की जरूरत होती है ना सुनने के लिए। लेकिन इसके लिए खुद को तैयार रखना चाहिए। कोई हमारा प्रपोजल एक्सेप्ट नहीं कर रहा है तो ना तो वो हमारा दुश्मन हो जाता है और ना ही हमें उसके साथ बुरा बर्ताव करना चाहिए। यह उसकी अपनी पसंद पर निर्भर करता है।

  • Depression का खतरा Dating न करने वाले टीनएजर्स में कम

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    इन दिनों डेटिंग ऐप्स की बढ़ती तादाद और कम उम्र में ही बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन, सोशल मीडिया एक्सपोजर और इंटरनेट की वजह से टीनएजर्स भी डेटिंग करना शुरू कर देते हैं। लेकिन ऐसा करना इनके लिए अच्छा नहीं होता। एक रिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया कि वैसे टीनएजर्स जो कभी किसी रोमांटिक रिश्ते में नहीं रहे, उनमें डेटिंग करने वालों की तुलना में सामाजिक कौशल बेहतर होता है और डिप्रेशन भी कम होता है।

    नॉन-डेटिंग बेहतर स्वास्थ्य के विकास का विकल्प
    यानी कुल मिलाकर देखें तो डेटिंग करने वाले टीनएजर्स में डिप्रेशन का खतरा अधिक होता है। शोध में पाए गए नतीजे इस बात का खंडन करते हैं कि नॉन-डेटर्स या जो डेट नहीं करते हैं, वे परेशान रहते हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि जिन स्कूलों में स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया जाता है वहां नॉन-डेटिंग को बेहतर स्वास्थ्य

    दोनों ही स्वीकार्य और हेल्दी ऑप्शन्स
    जॉर्जिया विश्वविद्यालय में हुई इस स्टडी के लीड ऑथर बु्रक डॉग्लस ने कहा, ‘अंत में स्कूल में स्वास्थ्य के बारे में बताने वाले शिक्षकों, मानसिक स्वास्थ्य के पेशेवरों और टीचर्स को उन सामाजिक मानदंडों की पुष्टि करनी चाहिए जो किशोर-किशोरियों के व्यक्तिगत स्वतंत्रता का समर्थन करें ताकि वह यह निश्चित कर सकें कि डेट किया जाना चाहिए या नहीं, क्योंकि दोनों ही स्वीकार्य और हेल्दी ऑप्शंस हैं।’

    प्रश्नावली के जरिए की गई तुलना
    इस अध्ययन को स्कूल हेल्थ पत्रिका में प्रकाशित किया गया जिसमें कक्षा 10 के 594 विद्यार्थियों को शामिल किया गया था। शोधकर्ताओं ने इन्हें चार श्रेणियों में बांट दिया था और टीचर रेटिंग्स व उन्हें दी गई प्रश्नावली का उपयोग कर उनकी तुलना की गई।

  • दिल की बीमारी का खतरा कॉमन ऐंटीबायॉटिक्स से: स्टडी

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    आमतौर पर हम सब ऐंटीबायॉटिक्स का इस्तेमाल कुछ ज्यादा ही करते हैं। जरा सा सिरदर्द हुआ नहीं कि गोली ले ली, पेट दर्द हुआ तो गोली ले ली, बुखार हुआ तो गोली ले ली। लेकिन यही साधारण सी दिखने वाली ऐंटीबायॉटिक सेहत के लिए कितनी हानिकारक इसका खुलासा एक नई स्टडी में हुआ है। अनुसंधानकर्ताओं ने कॉमन रूप से इस्तेमाल होने वाली एक ऐंटीबायॉटिक और दो तरह की हार्ट प्रॉब्लम के बीच लिंक होने के सबूत पाए हैं।

    हार्ट में खून के बैकफ्लो होने का खतरा 2.4 गुना अधिक
    अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियॉलजी नाम के जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी में अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि fluoroquinolone ऐंटीबायॉटिक जिसे सिप्रॉफ्लॉक्सिन या सिप्रो के नाम से जाना जाता है का सेवन करने से मिट्रल रेगर्गिटेशन नाम की एक हार्ट प्रॉब्लम होने का खतरा 2.4 गुना बढ़ जाता है। यह एक ऐसी समस्या है जिसमें खून, शरीर में जाने की बजाए हार्ट में बैकफ्लो हो जाता है यानी हार्ट में वापस चला जाता है। इस ऐंटीबायॉटिक के इस्तेमाल से 30 दिन के अंदर इस हार्ट प्रॉब्लम का रिस्क सबसे ज्यादा रहता है।

    ऐंटीबायॉटिक रेजिस्टेंस और हार्ट प्रॉब्लम का खतरा
    यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलम्बिया के असोसिएट प्रफेसर और इस स्टडी के लीड ऑथर मेहयर ऐटमिनन कहते हैं, आप मरीजों को हर दिन एक गोली लेने की सलाह देकर घर वापस भेज देते हैं क्योंकि ऐंटीबायॉटिक की ये क्लास आसानी से मिलने वाली है। लेकिन ज्यादातर केस में खासकर कम्यूनिटी रिलेटेड इंफेक्शन में इस ऐंटीबायॉटिक की जरूरत ही नहीं होती। बेवजह ऐंटीबायॉटिक प्रिस्क्राइब करने की वजह से न सिर्फ शरीर में ऐंटीबायॉटिक रेजिस्टेंस पैदा हो जाता है बल्कि सीरियस हार्ट प्रॉब्लम्स भी हो सकती है।

    90 लाख मरीजों के रैंडम सैंपल की जांच की गई
    इस स्टडी के लिए रिसर्च टीम ने अमेरिका के फूड ऐंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन की ऐडवर्स रिपोर्टिंग सिस्टम के डेटा की जांच की। इसमें अनुसंधानकर्ताओं ने करीब 90 लाख मरीजों के रैंडम सैंपल की जांच की। इस स्टडी के लिए fluoroquinolone नाम की ऐंटीबायॉटिक के इस्तेमाल को दूसरे तरह की ऐंटीबायॉटिक्स से भी तुलना की गई। नतीजों से पता चला कि हार्ट में खून के बैकफ्लो का रिस्क fluoroquinolone के इस्तेमाल की वजह से ज्यादा पाया गया। लिहाजा इस स्टडी में इस बात पर जोर दिया गया है कि डॉक्टरों को भी ऐंटीबायॉटिक्स प्रिस्क्राइब करते वक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

  • ये चीजें खाएं अगर चाहिए Jacqueline जैसी परफेक्ट बिकीनी बॉडी

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    बॉलिवुड ऐक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीस अपनी फिटनेस और परफेक्ट बॉडी शेप को लेकर बेहद कॉन्शस रहती हैं। यही वजह है कि वह आए दिन इंस्टाग्राम पर अलग-अलग तरह का वर्कआउट विडियो शेयर करती रहती हैं। पूर्व मिस श्री लंका यूनिवर्स रह चुकीं जैकलीन फ्लेस्किबल बॉडी के लिए जिम करने से ज्यादा हेल्दी लाइफस्टाइल और हेल्दी ईटिंग पर फोकस करती हैं। तो आखिर क्या है जैकलीन की परफेक्ट बिकीनी बॉडी का राज, यहां जानें…

    सुबह उठते के साथ ग्रीन जूस पीती हैं

    डेली रुटीन की बात करें तो सुबह उठते के साथ सबसे पहले जैकलीन एक लीटर गर्म पानी पीती हैं। इसके बाद वह एक गिलास ग्रीन जूस पीती हैं। सुबह 8 बजे ब्रेकफस्ट कर लेती हैं और शाम में 7 बजे डिनर कर लेती हैं। इसके अलावा जैकलीन इंटरमिटेंट फास्टिंग भी करती हैं और हर तरह के शुगरी फूड आइटम्स से दूर ही रहती हैं।

    क्वीनवा पसंद करती हैं जैकलीन

    डेली डायट की बात करें तो जैकलीन को ओट्स से ज्यादा क्वीनवा (quinoa) पसंद है और इसे वह हर दिन खाती हैं। क्वीनवा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक होती है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है। जैकलीन क्वीनवा को कच्चा ही खाना पसंद करती हैं जिससे देर तक उनका पेट भरा रहता है और उन्हें जल्दी भूख नहीं लगती।

    एनर्जी के लिए बुलेटप्रूफ कॉफी

    दिनभर की शूट और काम के बीच में एनर्जी बनाए रखने के लिए जैकलीन बुलेटप्रूफ कॉफी पीती हैं। जी हां, आपको बता दें कि इन दिनों बुलेटप्रूफ कॉफी काफी ट्रेंड में है। यह एक नॉर्मल एस्प्रेसो शॉट कॉफी होती है जिसमें थोड़ा सा घी और एक चम्मच कोकोनट बेस्ट एमसीटी ऑइल मिलाया जाता है।

    फ्लॉलेस स्किन का राज ऐपल साइडर विनिगर

    जैकलीन की फ्लॉलेस स्किन का राज है ऐपल साइडर विनिगर जो एक बेहतरीन डीटॉक्स एजेंट का काम करता है। इसमें मौजूद ऐंटी-इंफ्लेमेट्री प्रॉपर्टी आपकी स्किन को ग्लोइंग इफेक्ट देते हैं। लिहाजा ऐपल साइडर विनिगर को हल्दी और अदरक के साथ लेना शुरू करें तो आपकी स्किन भी हो जाएगी ग्लोइंग और फ्लॉलेस।

    जैकलीन को योग से है प्यार

    वर्कआउट रूटीन की बात करें तो जैकलीन कहती हैं कि उन्होंने वेट ट्रेनिंग से लेकर पीलाटेज तक…हर तरह का वर्कआउट ट्राई किया है लेकिन सुपर ऐंटी-एजिंग और बॉडी के लिए बेस्ट है योग। योग के जरिए जैकलीन खुद को एनर्जेटिक और लाइटर फील करती हैं इसलिए योग करना उन्हें बेहद पसंद है।

    जूस की बॉटल हमेशा रखती हैं साथ

    एक हेल्दी फूड आइटम जो हमेशा जैकलीन के बैग में होता है वह, जूस की बॉटल क्योंकि जूस पीकर कोई भी अनहेल्दी चीज खाने की तीव्र इच्छा को रोका जा सकता है। साथ ही विटमिन सी से भरपूर जूस स्किन और हेल्थ के लिए भी अच्छा होता है। लाइफ में बढ़ता स्ट्रेस और जंक फूड की आदत, शरीर के साथ चेहरे पर भी दिखने लगती है इसलिए जैकलीन ऐंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर जूस पीना पसंद करती हैं।

    आलू खाएं, हेल्दी रहें, वजन घटाएं

    आपने अक्सर लोगों को यह कहते सुना होगा कि अगर आप वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं तो आपको कार्बोहाइड्रेट्स से दूर रहना चाहिए या फिर बेहद कम मात्रा में इनका सेवन करना चाहिए। वजन घटाते वक्त ज्यादातर लोग आलू से तो सबसे पहले दूरी बना लेते हैं। लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं एक खास पटेटो डायट के बारे में जिसमें आपको 5 दिन तक सिर्फ पटेटो यानी आलू खाना है और फिर देखें कैसे घटेगा आपका वजन…

    रोजाना खाएं आलू

    जर्नल मॉलिक्युलर ऑफ न्यूट्रिशन एंड फूड रिसर्च में प्रकाशित एक नई स्टडी के मुताबिक, अगर पतला होना है तो रोजाना आलू खाएं। इतना ही नहीं, अगर आप केवल 5 दिन तक पटेटो डायट फॉलो कर लें, तो आपका वजन कई किलो तक कम हो जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि आलू खाने के बाद आपको भूख का एहसास नहीं होता। इससे पेट जल्दी भर जाता है और आप ओवरईटिंग से भी बच जाते हैं।

    कैलरी होती है कम

    इस नई स्टडी के मुताबिक आलू वजन घटाने में असरदार रूप से काम करता है क्योंकि यह एक ऐसा स्टार्ची फूड है जिसमें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट ज्यादा होता है जबकी कैलरीज कम। साथ ही मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने के साथ साथ वजन को कंट्रोल करने में मदद करता है आलू।

    वजन घटाता है, सेहत नहीं

    एक मीडियम साइज के आलू में जहां 168 कैलरी होती है वहीं उबले आलू में सिर्फ 100 कैलरीज। वैज्ञानिकों का कहना है आलू एक ऐसा फूड है जो वजन तो घटाता है लेकिन सेहत नहीं। इसे अगर आप दिनभर में 10 भी खा लेते हैं, तो भी आप दूसरे फूड से कम कैलरी इनटेक करेंगे और साथ में हेल्दी भी रहेंगे।

    पोषक तत्व से भरपूर

    आलू में फाइबर और प्रोटीन के अलावा विटमिन बी, सी, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीज, फॉस्फॉरस जैसे पोषक तत्व काफी तादाद में होते हैं।

    उबालकर खाना फायदेमंद

    यदि दो-तीन आलू उबालकर छिलके सहित थोड़े से दही के साथ खा लिए जाएं तो ये एक संपूर्ण आहार का काम करता है।

    आलू नहीं, चिकनाई से मोटापा

    आलू को तलकर तीखे मसाले, घी आदि लगाकर खाने से जो चिकनाई पेट में जाती है, वह चिकनाई मोटापा बढ़ाती है आलू नहीं। वहीं, अगर आप आलू को उबालकर खाते हैं तो हेल्थ को तो फायदा मिलता ही है साथ ही वजन भी कम होता है।

    आलू के छिलके भी हैं फायदेमंद

    आलू के छिलके ज्यादातर फेंक दिए जाते हैं, जबकि छिलके सहित आलू खाने से ज्यादा शक्ति मिलती है। जिस पानी में आलू उबाले गए हों, वह पानी न फेंकें, बल्कि इसी पानी से आलुओं का रसा बना लें। इस पानी में मिनरल और विटमिन बहुत होते हैं।

  • 2 हफ्ते में weight loss के न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए जबरदस्त तरीके

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    ज्यादातर लोग बढ़ते वजन और मोटापे से परेशान हैं और वे इसे कम करने के लिए हर संभव तरीका अपनाने की कोशिश करते हैं। वैसे तो सलाह यही दी जाती है कि वजन को एकदम से कम करने के बजाय धीरे-धीरे कम करें, लेकिन एक न्यूट्रिशनिस्ट ने दो हफ्तों में ही वजन कम करने के 5 बढ़िया तरीके बताए हैं। एक इंटरनैशनल न्यूज वेबसाइट ने न्यूट्रिशनिस्ट जूली लैंबल से इस बारे में बात की। आइए जानते हैं इन तरीकों के बारे में:

    ​दिन में 3 बार खाएं

    दिन में 3 वक्त खाएं और खाने में ताजा फल और सब्जियों को ही शामिल करें। बीच-बीच में स्नैक्स बिल्कुल भी न खाएं। इससे कम कैलरी शरीर में जाएंगी, जिससे वजन घटाने में मदद मिलेगी।

    ​ब्रेकफस्ट न छोड़ें

    कई लोग बिल्कुल भी ब्रेकफस्ट नहीं करते और लंच व डिनर में जमकर खाते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। बल्कि ब्रेकफस्ट दिन का सबसे बड़ा मील होना चाहिए। यानी ब्रेकफस्ट हेवी, लंच कम हेवी और डिनर एकदम हल्का लेना चाहिए। ब्रेकफस्ट में प्रोटीन की मात्रा अधिक होनी चाहिए और ऐसी चीजें कम होनी चाहिए जो अत्यधिक कार्बोहाइ़ड्रेट रिलीज करती हों।

    ​सैचरेटेड फैट, शुगर और गेंहू को ना

    न्यूट्रिशनिस्ट ने कहा कि डायट में सैचरेटेड फैट्स से लेकर शुगर और गेंहू को बिल्कुल भी न शामिल करें। इससे मेटाबॉलिजम और पाचन सिस्टम सुधरेगा और वजन नहीं बढ़ेगा।

    रोजाना 30 मिनट की कड़ी एक्सर्साइज

    रोजाना 30 मिनट की कड़ी एक्सर्साइज करने से भी वजन घटाने में मदद मिलेगी।

    वेट लॉस के लिए एक यह भी बढ़िया डायट प्लान

    वैसे वजन कम करने के लिए एक और डायट प्लान फॉलो कर सकते हैं। इसके लिए दिन की शुरुआत पानी के ग्लास के साथ करें। इसके बाद गर्म ब्लैक टी या ग्रीन टी पिएं। नाश्ते में सूप पिएं, जिसमें सब्जियां डली हों। दोपहर के खाने में होल वीट ब्रेड की दो स्लाइस खाएं। इसके साथ एक कप सूप लें। शाम को ग्रीन टी पी सकती हैं। अन्य तरह की चाय या कॉफी को अवॉइड करें।

    रात के खाने में सब्जियों से बनी सैंडविच खाएं। ब्रेड ओट्स या होल वीट वाली हो तो बेहतर होगा।

    जरूरी नहीं कि ऊपर बताए तरीकों से सभी लोगों का वजन समान प्रक्रिया से घटे या समान मात्रा में घटे। हर किसी का बॉडी टाइप अलग होता है। इसलिए किसी भी डायट प्लान को फॉलो करने से अपने डॉक्टर से भी जरूरी सलाह लें। डायबीटीज, थाइरॉयड या हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति में तो जरूर ही संपर्क करें।

  • डेंटल डैम यानी मुंह का कॉन्डम है बड़े ही काम का , जानें इस्तेमाल का तरीका और फायदे

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    हम जब भी सेफ सेक्स की बात करते हैं तो दिमाग में कॉन्डम का ही नाम आता है। डॉक्टर भी सुरक्षित यौन संबंधों के लिए कॉन्डम के इस्तेमाल की ही सलाह देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ओरल सेक्स के लिए भी कॉन्डम का इस्तेमाल किया जाता है?

    इन यौन रोगों से बचाएगा डेंटल डैम यानी मुंह का कॉन्डम

    ओरल सेक्स के दौरान अगर सावधानी न बरती जाए तो एचआईवी, साइफिलिस, गोनोरिया, एचपीवी और वायरल हेपेटाइटिस जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए ओरल सेक्स के दौरान भी कॉन्डम इस्तेमाल करना चाहिए। हालांकि ओरल सेक्स के लिए एक अलग तरह का कॉन्डम यूज किया जाता है, जिसे डेंटल डैम कहा जाता है। इसे हम ‘मुंह का कॉन्डम’ भी कह सकते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में

    क्या होता है डेंटल डैम या मुंह का कॉन्डम?

    डेंटल डैम यानी मुंह का कॉन्डम काफी पतला और छोटा होता है जोकि पॉलियूरीथेन या लेटेक्स का बना होता है। चूंकि इसका इस्तेमाल मुंह में किया जाता है इसीलिए इसे ‘मुंह का कॉन्डम’ का जाता है। यह कॉन्डम ओरल सेक्स के दौरान फैलने वाले यौन रोगों से बचाव करता है।

    असहज लेकिन सही चुनाव है डेंटल डैम

    अन्य कॉन्डम की तरह डेंटल डैम कॉन्डम को भी सावधानीपूर्वक और सही तरीके से इस्तेमाल की जरूरत होती है। शुरुआत में इन्हें यूज करने में थोड़ा सा असहज भले ही लगे लेकिन वास्तव में यह बड़े ही काम की चीज है।

    ​ऐसे करें यूज

    सबसे पहले डेंटल डैम पर लगे पाउडर को साफ करें और देखें कि कहीं उसमें किसी तरह का छेद या डिफेक्ट तो नहीं है। अब ओरल ऐक्ट परफॉर्म करने से पहले ल्यूब का यूज करें। हालांकि ध्यान रखें कि यह ल्यूब वॉटर बेस्ड हो क्योंकि ऑइल बेस्ड लुब्रिकेंट्स से लेटेक्स का बना कॉन्डम खराब हो जाता है। मुंह के कॉन्डम को एक ही तरफ से इस्तेमाल करें।

    ​बरतें ये सावधानियां

    अगर अलग-अलग बॉडी पार्ट्स में ओरल ऐक्ट परफॉर्म करना है तो फिर हर पार्ट के लिए अलग डेंटल डैम का यूज करें। मुंह के कॉन्डम को इस्तेमाल के बाद तुरंत डिस्पोज करें और उसे गलती से भी दोबारा यूज करने का न सोचें।

  • अमीबा खा रहा है स्विमिंग के वक्त संपर्क में आई 10 साल की बच्ची के ब्रेन को

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    टेक्सॉस के फोर्ट वर्थ में एक 10 साल की बच्ची के दिमाग में ऐसा अमीबा प्रवेश कर गया है, जो धीरे-धीरे उसके दिमाग को खा रहा है। तेज सिरदर्द और बुखार के बाद अब बच्ची कोमा की स्थिति में है। डॉक्टर्स उसकी बेहतरी के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं। यूएस में 1962 से लेकर अब तक इस तरह के अमीबा के शिकार हुए 145 लोगों में से केवल 4 लोग ही जीवित बच पाए हैं। पीड़ित बच्ची लिली के सौतेले पिता प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी बेटी पांचवी ऐसी खुशकिस्मत इंसान बने।

    टेक्सॉस के कुक चिल्ड्रन्स मेडिकल सेंटर में 10 साल की लिली को मंगलवार को तब हॉस्पिटल में लाया गया जब तेज सिरदर्द और बुखार के बाद वो बेहोशी में बड़बड़ा रही थी। फिलहाल बच्ची कोमा की स्थिति में है और मौत से जीवन के लिए लड़ाई लड़ रही है। लिली का ट्रीटमेंट कर रहे डॉक्टर्स का कहना है कि लिली नेगलेरिया फाउलरली नाम के एक सिंगल सेल लिविंग ऑर्गेनिज़म यानी एकल-कोशिका वाले जीवित जीव के संपर्क में आ गई है। जो आमतौर पर साफ और ताजे पानी में पाए जाते हैं। ये अमीबा मनुष्यों को संक्रमित करते हैं।

    सेंट्रल ऑफ डिज़ीज कंट्रोल के अनुसार, लोग इस तरह के अमीबा के शिकार स्विमिंग के दौरान होते हैं। जब नेगलेरिया फाउलरली उनकी नाक में प्रवेश करके उनके दिमाग तक पहुंच जाता है और दिमाग के टिश्यूज़ को खाना शुरू कर देता है। इस तरह के अमीबा के संपर्क में आनेवाले लोगों के जीवित ना रहने की संभावाना 97 प्रतिशत तक होती है।

    लिली के परिवार के अनुसार, लिली अपने पैरंट्स और फैमिली के साथ उनके घर के पीछे बह रही ब्रजोस नदी में स्विमिंग कर रही थी। उस समय वहां करीब 40 लोग स्विमिंग इंजॉय कर रहे थे। घर के ठीक पीछे की तरफ होने के कारण लिली अक्सर इस नदी में स्विमिंग किया करती थी। लेकिन इस बार स्विमिंग के बाद उसके सिर में तेज दर्द शुरू हुआ और फिर काफी तेज बुखार के कारण वह बेहोशी की हालत में चली गई। हॉस्पिटल लाए जाने के बाद लिली को मिल्टेफोसिन नामक अमीबा से लड़ने वाली टैबलेट दी गई। डॉक्टर्स और फैमिली उसकी बेहतरी के लिए दुआ कर रहे हैं।

    डॉक्टर्स का कहना है कि अगर आप एकदम फ्रेश और साफ दिखनेवाले पानी में भी तैराकी कर रहे हैं तो नोज़ क्लिप या मास्क पहनकर ही करें। कोशिश करें कि आप ज्यादा देर तक अपने सिर को पानी के अंदर ना डुबोकर रखें। क्योंकि यह अमीबिया नाक के जरिए दिमाग में प्रवेश करता है और फिर दिमाग की नसों को डैमेज करने लगता है।

  • Kriti Sanon पहुंची हाई स्लिट सेक्सी गाउन में न्यू यॉर्क फैशन वीक

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    दुनिया के सबसे फेमस और प्रतिष्ठित फैशन शोज में से एक न्यू यॉर्क फैशन वीक के दौरान बॉलिवुड ऐक्ट्रेसेस भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रही हैं। बॉलिवुड की देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा के बाद ऐक्ट्रेस कृति सैनन भी पहुंची न्यू यॉर्क फैशन वीक में।

    दुनिया के लीडिंग लेदर ब्रैंड्स में से एक Coach के स्प्रिंग समर 2020 कलेक्शन के लॉन्च के दौरान बतौर गेस्ट पहुंचीं थीं कृति सैनन। न्यू यॉर्क फैशन वीक में यह कृति का डेब्यू अपीयरेंस था।

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    इस दौरान कृति सैनन ने मेटैलिक ग्रीन कलर का बेहद सुंदर प्रिंटेड ड्रेस पहन रखा था। इस ड्रेस का थाई हाई स्लिट कट कृति सैनन को बेहद सेक्सी लुक दे रहा था। यह खास ड्रेस ब्रैंड कोच की सबसे पॉप्युलर प्रिंटेड Prairie ड्रेस थी जिसे कृति ने बियान्का सैंडल्स और कोच के ही शोल्डर बैग के साथ टीमअप कर पहन रखा था।

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    न्यू यॉर्क फैशन वीक में यह कृति सैनन का डेब्यू था और इसमें कोई शक नहीं कि वह इस ड्रेस और लुक में बेहद खूबसूरत लग रही थीं। कृति ने अपने इंस्टाग्राम पर कुछ तस्वीरें भी शेयर की।