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  • न दें 2 साल से कम उम्र के बच्चों को फ्रूट जूस: एक्सपर्ट्स

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    फ्रूट जूस पीना भला किसे पसंद नहीं। इससे न सिर्फ जरूरी पोषक तत्व शरीर को मिलते हैं बल्कि पानी की कमी भी दूर हो जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिशुओं और छोटे बच्चों को फ्रूट जूस बिल्कुल भी नहीं देना चाहिए, फिर चाहे वह फ्रेश हो या फिर पैक्ड जूस। खासकर 2 साल से 18 साल की उम्र के बीच के बच्चों को फ्रूट जूस या फ्रूट ड्रिंक्स पीने से रोकना चाहिए। इसके बजाय बच्चों को मौसमी फल खिलाने चाहिए ताकि उनकी सेहत दुरुस्त रहे। ऐसा एक्सपर्ट्स का कहना है।

    आइडियन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के न्यूट्रिशन चैप्टर द्वारा बनाए गए राष्ट्रीय सलाहकार समूह यानी नैशनल कंसल्टेटिव ग्रुप ने हाल ही में फास्ट ऐंड जंक फूड्स, शुगर स्वीटन्ड बेवरेजेस और एनर्जी ड्रिंक्स को लेकर ताजा दिशानिर्देश जारी किए हैं और उन्हीं में कहा गया है कि शिशुओं व छोटे बच्चों को फ्रूट जूस देने के बजाय मौसमी फल खिलाने चाहिए।

    इस समूह ने सलाह दी है कि अगर बच्चों को फ्रूट जूस या फिर फ्रूट ड्रिंक्स दिए भी जाते हैं तो उसकी मात्रा 2 से 5 साल की उम्र के बच्चों के लिए प्रति दिन 125ml यानी आधा कप होनी चाहिए, जबकि 5 साल से अधिक आयु वाले बच्चों को एक कप यानी प्रति दिन 250 ml के हिसाब से फ्रूट जूस देना चाहिए। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में सीनियर पीडिऐट्रिशन डॉ. हेमा गुप्ता मित्तल, जोकि इस सलाहाकर समूह यानी कन्सलटेटिव ग्रुप का भी हिस्सा हैं, उन्होंने कहा, ‘बच्चों को बताई गई मात्रा में दिया जाने वाला फ्रूट जूस एकदम फ्रेश होना चाहिए। चाहे फलों का जूस ताजा हो या फिर डिब्बाबंद, इनमें शुगर की मात्रा तो अधिक होती ही है, साथ ही कैलरी भी ज्यादा होती हैं। वहीं फल मांसपेशियों के विकास में मदद करते हैं और डेंटल हेल्थ के लिए भी जरूरी हैं।’

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    बच्चों को चाय-कॉफी कितनी मात्रा में?
    वहीं ऐसे कैफीनयुक्त ड्रिंक्स पर जारी किए गए आईएपी के दिशानिर्देशों के अनुसार, 5 साल से कम उम्र के बच्चों को कार्बोनेटेड ड्रिंक्स जैसे कि चाय और कॉफी से बिल्कुल दूर रहना चाहि। स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों की बात करें तो 5 से 9 साल के बच्चों के लिए चाय या कॉफी की मात्रा प्रति दिन आधा कप रहनी चाहिए, जबकि 10 से 18 साल के बच्चों के लिए प्रति दिन 1 कप चाय या कॉफी देनी चाहिए। बशर्ते उन्हें कैफीनयुक्त अन्य कोई चीज न दी जाए। आईएपी ग्रुप ने जंक फूड को JUNCS नाम की टर्म से रिप्लेस करने की भी सलाह दी है ताकि अनहेल्दी फूड्स से संबंधित अन्य चीजों और कॉन्सेप्ट्स को इसमें शामिल किया जा सके। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया है ताकि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स, कैफीनयुक्त ड्रिंक्स और शुगर स्वीटन्ड बेवरेजेस को इसमें शामिल किया जा सके। छोटे बच्चों को बिल्कुल भी न दें ये फूड


    क्या हो सकती हैं दिक्कतें?

    आईएपी की गाइ़डलाइन कहती है कि इन खाद्य पदार्थों और ड्रिंक्स का सीधा संबंध हाई बॉडी मास इंडेक्स से होता है और बच्चों में हार्ट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा कैफीनयुक्त ड्रिंक्स पीने से नींद आने में दिक्कत होने लगती है। भारतीय बच्चों में फास्ट फूड और शुगर स्वीटन्ड बेवरेजेस की खपत में वृद्धि को देखते हुए ये दिशानिर्देश काफी महत्वपूर्ण है। भारतीय बच्चों में ऐसी चीजों की खपत ज्यादा इसलिए है क्योंकि ये आसानी से मिल जाती है, अगर पैरंट्स वर्किंग हैं तो भी उस स्थिति में प्रोसेस्ड फूड्स और ड्रिंक्स एक तरह से वरदान का काम करते हैं। इसके अलावा इन्हें आकर्षक पैकेजिंग में परोसा जाता है, जिसकी वजह से बच्चे इनकी ओर अधिक आकर्षित होते हैं।

    13 अगस्त को सेंटर फॉर साइंस ऐंड इन्वाइरनमेंट यानी सीएसई द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक, 9 से 14 साल के 200 बच्चों में से 93 फीसदी ऐसे बच्चे थे जो हफ्ते में एक बार से अधिक पैकेज्ड या प्रोसेस्ड फूड आइटम्स खाते हैं वहीं 68 फीसदी बच्चे ऐसे थे जो इसी टाइम पीरियड में पैकेज्ड शुगर स्वीटन्ड बेवेरेजस का सेवन करते हैं। वहीं 53 फीसदी ऐसे बच्चों का भी आंकड़ा था जो कम से कम दिन में एक बार ये चीजें खाते हैं। ज्यादा फ्रूट जूस पीने से समय से पहले मौत का खतरा: स्टडी

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी वजह से बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट संबंधी परेशानियां, डेंटल हेल्थ इशूज और बिहेवियरल चेंजेस अत्यधिक होने लगे हैं।
    आईएपी ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI के एक सुझाव की वकालत करते हुए सुझाव दिया है कि सभी पैक खाद्य पदार्थों की ट्रैफिक लाइट कोडिंग की जाए ताकि जंक फूड्स के खतरे से लड़ा जा सके। इसके अलावा ऐसे उत्पादों के विज्ञापन और विपणन के लिए अलग-अलग दिशानिर्देश विकसित किए जाएं।

    भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के सीईओ पवन अग्रवाल ने कहा कि इस संबंध में उन्होंने एक प्रपोजल पर प्रोसेस्ड फूड इंडस्ट्री से बात की है। उन्होंने उन उत्पादों के पैकेटों के सामने लाल रंग की कोडिंग प्रदर्शित करने का प्रस्ताव रखा है जिनमें फैट, शुगर या सॉल्ट यानी नमक की अत्यधिक मात्रा है। बकौल पवन अग्रवाल, ‘इस इंडस्ट्री के कुछ रिजर्वेशन्स हैं और हम इस बात पर एक आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि इन्हें कैसे लागू किया जाए।

     

  • India में सबसे ज्यादा हॉट और खूबसूरत हैं इस शहर की लड़कियां !

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    दिल्ली-मुंबई नहीं इस शहर की लड़कियां हैं सबसे खूबसूरत, इनकी नशीली आंखों से कोई नहीं बच पाता । वैसे तो भारत के हर शहर की लड़कियां खूबसूरत होती हैं पर हमने आपके लिए कुछ ऐसे शहर चुनें हैं जहां की लड़कियां बाकी शहर की लड़कियों से ज्यादा खूबसूरत होती हैं। वैसे ज्यादातर लड़कों को विदेशी लड़कियां पसंद आती हैं लेकिन अगर आप भी एेसा सोचते हैं तो आप गलत है। हम आपको भारत के वो कौन से शहर है..जहां सबसे खूबसूरत लड़कियां देखी जाती है।

    कोलकाता

    कोलकाता की लड़कियां दुनियाभर में मशहूर हैं। इनकी नशीली आंखों से कोई भी लड़का बच नहीं पाता। यहां की लड़कियां बेहद खूबसूरत होती है।

    बैंगलौर

    खूबसूरती के मामले में बैंगलौर की लड़कियां किसी से कम नहीं हैं। यहां देश के हर शहर की लड़कियां आती हैं इसलिए यहां की लड़कियां सबसे खूबसूरत मानी जाती हैं।

    चंडीगढ़

    चंडीगढ़ में अधिकतर पंजाबी लड़कियां देखने को मिलती हैं। ये लड़कियां अपने शार्प फीचर के लिए मशहूर हैं। इन्हें लड़कों के दिल को जीतना अच्छी तरह से आता है।

    दिल्ली

    दिल्ली की लड़कियां सबसे हॉट और खूबसूरत हैं। पूरे देश में यहां की लड़कियां मशहूर हैं।

     मुंबई

    मुंबई में लड़कियां अपनी किस्मत बनाने के लिए आती हैं। यहां एक से बढ़कर एक खूबसूरत लड़कियां है। यहां हर शहर की लड़कियां होती हैं।

  • Mental disorder की ओर पहला इशारा जाने क्या है लक्षण ?

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    मेंटल डिसऑर्डर को लेकर आज भी भारत में बहुत कम जागरूकता है। इस वजह से अक्सर इलाज तब शुरू हो पाता है जब स्थिति काफी बिगड़ जाती है। ऐसे में ज्यादा दवाइयां और अन्य उपायों का सहारा लेकर मरीज के डिसऑर्डर को दूर करने की कोशिश की जाती है। यह इलाज लंबा या जिंदगीभर चल सकता है।

    अगर मेंटल डिसऑर्डर के लक्षणों को शुरुआत में ही पहचान लिया जाए तो व्यक्ति को नॉर्मल होने व आम लोगों जैसा जीवन जीने में मदद मिलती है और उसके पूरी तरह ठीक होने के चांस भी काफी ज्यादा होते हैं। हम बता रहे हैं ऐसे ही कुछ मुख्य लक्षणों के बारे में:

    • दुखी महसूस करना और किसी चीज से खुशी न मिलना
    • किसी चीज पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना
    • बहुत ज्यादा डर लगना और चिंता होना
    • मूड में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव
    • दोस्तों और ऐक्टिविटीज से दूर होना
    • सोने में परेशानी, थकान महसूस करना और ऊर्जा में कमी आना
    • रिऐल्टी से दूर होना और इमेजिनेशन का सोच पर हावी होना व उसको रिऐल्टी समझना
    • रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करने में परेशानी
    • दूसरों की स्थिति को समझने में परेशानी आना
    • ड्रग्स लेना या शराब का बहुत ज्यादा सेवन
    • खाने की आदतों में बदलाव आना
    • सेक्स ड्राइव में बदलाव
    • बहुत ज्यादा गुस्सा आना, चीजें तोड़ना, मारना
    • आत्महत्या का ख्याल आना या खुद को नुकसान पहुंचाना

    कई बार मेंटल डिसऑर्डर के लक्षण फिजिकली भी दिखाई देते हैं। इससे गुजरने वाले व्यक्ति को पेट में दर्द, खाने में दिक्कत, मोशन में दिक्कत, पीठ में दर्द, सिरदर्द जैसी परेशानियां होती हैं।

    कब दिखाएं डॉक्टर को
    अगर आपको ऊपर लिखे लक्षणों में से कोई एक भी दिखाई दे तो बेहतर यही है कि आप डॉक्टर को दिखाएं। सही डायग्नोज होने पर उसी के मुताबिक इलाज शुरू किया जा सकेगा। यह ध्यान रहे कि इलाज जितनी जल्दी शुरू होगा मरीज के पूरी तरह ठीक होने के चांस भी उतने ही ज्यादा होंगे।

  • शुरू हो चुका है सीजन मच्छरों से पनपने वाली बीमारियां- डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया का कैसे करे इनसे बचाव जानें

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    नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डेंगू के खिलाफ महाअभियान छेड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि 1 सितंबर से 10 हफ्ते, सुबह 10 बजे, 10 मिनट, हर रविवार, डेंगू पर वार का यह अभियान शुरू होगा। डेंगू और चिकनगुनिया के पनपने का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में इन जानलेवा बीमारियों से बचने के लिए सीएम केजरीवाल ने एक नई पहल की शुरुआत की है।

    हर रविवार 10 बजे, 10 मिनट करें घर की चेकिंग
    सीएम केजरीवाल ने कहा कि अगले दस हफ्ते तक दिल्लीवालों को हर रविवार को 10 मिनट अपने घर की चेकिंग करनी है और देखना है कि कहीं डेंगू के मच्छर उनके घर के किसी कोने में तो नहीं पनप रहे। कहीं गमले में, कूलर में, कोई छोटी सी भी जगह में पानी तो इकट्ठा नहीं हो रहा। अगर हो रहा हो तो उसको साफ करना है। कूलर आदि में तेल डालना है ताकि मच्छर के अंडे खत्म हो जाएं।

    डेंगू की रोकथाम के लिए कड़े कदम
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश के आंकड़ों को देखें तो 2009 से 2017 के बीच में पूरे देश में 300 प्रतिशत डेंगू और चिकनगुनिया का प्रकोप बढ़ा है। सबसे ज्यादा मौत डेंगू और चिकनगुनिया के कारण 2017 में हुई थीं। साल 2015 में 15 हजार 867 डेंगू के मामले सामने आए थे जिसमें से 60 लोगों की मौत हो गई थी जिसके बाद सरकार ने डेंगू की रोकथाम के खिलाफ कड़े कदम उठाए।

    3 साल में डेंगू और चिकनगुनिया के मामलों में 80% की कमी
    लेकिन दिल्ली में सरकार के प्रयासों और जनता की भागीदारी से डेंगू और चिकनगुनिया दोनों पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। 3 साल के अंदर 80 प्रतिशत डेंगू और चिकनगुनिया के मामले कम हुए हैं। साल 2018 में डेंगू के सिर्फ 2 हजार 798 मामले सामने आए थे। चिकगुनिया की बात करें तो 2016 में जहां इसके 7 हजार 760 मामले सामने आए थे वहीं, 2017 में 559 और 2018 में सिर्फ 165 मामले।

    200 मीटर से ज्यादा ऊंचे नहीं उड़ पाते डेंगू के मच्छर
    दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल इस कैंपेन की शुरुआत अपने घर से करेंगे और हर रविवार को सुबह 10 बजे, 10 मिनट के लिए अपने घर की चेकिंग करेंगे कि कहीं डेंगू के मच्छर तो नहीं पनप रहे। यह कैंपेन 10 हफ्ते तक चलेगा। केजरीवाल ने कहा, डेंगू फैलाने वाले मच्छर 200 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ नहीं सकते। इसलिए अगर आप अपने आसपास के वातावरण को साफ सुथरा रखें तो इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आने की आशंका कम हो जाती है।

    गलत इलाज से जानलेवा साबित हो सकता है डेंगू

    डेंगू अपने पांव पसार चुका है। दिल्ली में अक्टूबर के 6 दिनों में ही अब तक 169 नए मामलों की पुष्टि हो चुकी है। डॉक्टरों का कहना है कि जिस तरह से आंकड़ों में तेजी आई उससे लगता है कि अभी डेंगू और फैलेगा। शुरुआत में सामान्य-सा लगने वाला डेंगू बुखार देरी या गलत इलाज से जानलेवा साबित हो सकता है। डेंगू बरसात के मौसम और उसके फौरन बाद के महीनों यानी जुलाई से अक्टूबर में सबसे ज्यादा फैलता है क्योंकि इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं। लिहाजा सबसे जरूरी है कि खुद को और परिवार के सदस्यों को मच्छरों के काटने से बचाया जाए। अगर किसी को डेंगू हो जाए तो घबराने की बजाए उचित इलाज और घरेलू नुस्खों के जरिए बीमारी को दूर किया जा सकता है…

    एडीज इजिप्टी मच्छर के काटे जाने के करीब 3-5 दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण दिखने लगते हैं। साधारण डेंगू बुखार के लक्षण- ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ना, सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है, बहुत ज्यादा कमजोरी लगना, भूख न लगना और जी मितलाना और मुंह का स्वाद खराब होना, गले में हल्का-सा दर्द होना, शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज होना।

    आयुर्वेद में गिलोय का बहुत महत्व है। 1 कप पानी में 1 चम्मच गिलोय का रस मिलाएं। अगर गिलोय की डंडी मिलती है तो 4 इंच की डंडी लें। उस बेल से लें, जो नीम के पेड़ पर चढ़ी हो। आप चाहें तो इसमें अदरक को मिलाकर पानी को उबालें और काढ़ा बनाएं और 5 दिन तक पिएं। आप चाहें तो इसमें थोड़ा-सा नमक मिलाकर दिन में 2 बार, सुबह नाश्ते के बाद और रात में डिनर से पहले लें।

    पपीते के पत्ते का रस डेंगू फीवर के ड्यूरेशन को कम करता है, अस्पताल में मरीज के ठहराव को कम करता है, बॉडी से फ्लूइड लीक नहीं होने देता और वाइट ब्लड सेल्स (WBC) और प्लेटलेट्स की संख्या को बढ़ाता है। डेंगू का बुखार कन्फर्म होने के पहले दिन से ही पपीते के पत्ते का रस मरीज को दिया जा सकता है क्योंकि अभी तक इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं देखा गया है।

    आयुर्वेदाचार्य सुशीला दहिया का कहना है कि ‘बकरी का दूध सुपाच्य होता है। आयुर्वेद की किताबों में यह बताया गया है कि बकरी का दूध डेंगू के बुखार से निकलने में काफी कारगर होता है।’

    खाने में हल्दी का इस्तेमाल ज्यादा करें। सुबह आधा चम्मच हल्दी पानी के साथ या रात को आधा चम्मच हल्दी एक गिलास दूध या पानी के साथ लें। लेकिन अगर आपको- नजला, जुकाम या कफ आदि हो तो दूध न लें। तब आप हल्दी को पानी के साथ ले सकते हैं। ऐंटिऑक्सिडेंट्स से भरपूर हल्दी शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ाती है।

    8 से 10 तुलसी के पत्तों का रस शहद के साथ मिलाकर लें या तुलसी के 10 पत्तों को पौने गिलास पानी में उबालें। इसमें 2 काली मिर्च और अदरक भी डाल सकती हैं। जब यह पानी आधा रह जाए तब गैस बंद कर दें और तुलसी के काढ़े को सुबह-शाम पिएं। शरीर की इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होगी और बीमारी दूर।(नोट: डॉक्टर की सलाह के बिना इन घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल अपने मन से न करें)


    अब तक डेंगू के 57 मामलों की पुष्टि

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल दिल्ली में डेंगू के 57 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। 123 नए मामले डेंगू के आए हैं, जो दिल्ली से बाहर के हैं। इसी तरह अब तक 111 मामले मलेरिया के दिल्ली में आ चुके हैं। वहीं, 183 मामले दिल्ली के बाहर आए हैं। वहीं, चिकनगुनिया के अब तक दिल्ली में सिर्फ 20 मामले आए हैं। 28 मामले दिल्ली से बाहर के आए हैं।

    मच्छरों से होती हैं कई बीमारियां

    मच्छरों को दूर रखने के लिए समय-समय पर घर की साफ सफाई बेहद जरूरी है। खासकर, अगर आपके घर के आसपास पानी जमा है तो उसे हटाना आवश्यक है। मच्छरों के काटने से कई तरह की बीमारियां होती हैं जिनमें डेंगू, मलेरिया आम हैं। लेकिन डेंगू-मलेरिया के अलावा भी कई घातक बीमारियां मच्छरों के कारण होती हैं।

  • ये आसान उपाय दिलाएंगे Body Odour से तुरंत मुक्ति

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    आप अपने Body Odour को छिपाने के लिए तेज परफ्यूम लगाते हैं या डियो का उपयोग करते हैं। कई बार इससे आपके आस-पास के लोग परेशानी महसूस करते हैं। क्योंकि हर गंध हर किसी को पसंद नहीं आती। साथ ही कुछ समय बाद ये सब तरीके बेअसर हो जाते हैं और आप शरीर की दुर्गंध से परेशान होने लगते हैं। इससे बचने के लिए अपनाएं ये घरेलू तरीके…

    ऐसे मिलेगी तुरंत मदद

    शरीर से आने वाली पसीने की बदबू से तुरंत छुटकारा पाने के लिए कॉटन बॉल्स की मदद से शरीर के उन हिस्सों में गुलाबजल लगाएं जहां से दुर्गंध आ रही हो। इसके बाद आप ऐंटिबैक्टीरियल क्रीम लगा सकते हैं। इससे आपको दोबारा जल्द ही बॉडी ऑडर से परेशानी नहीं होगी। साथ ही पसीनेवाली जगह पर खुजली भी नहीं होगी।
    असेंशल ऑइल्स हैं मददगार

    आप अपनी पसंद की खुशबू वाला कोई भी असेंशल ऑइल खरीदकर हर समय अपने साथ रखें। कॉटन बॉल्स की मदद से इस ऑइल को सुबह नहाने के बाद और दिन में जब भी बॉडी ओडर की समस्या हो तो इस ऑइल को लगा लें। आप भीनी-भीनी खुशबू से महकने लगेंगे।

    सिरका और पानी

    आप एक चम्मच सिरका आधा कप पानी में मिलाएं और संबंधित एरिया पर कॉटन की मदद से लगाएं। दो-तीन मिनट ऐसा करने के बाद कॉटन को साफ पानी में भिगोएं और इस जगह की सफाई कर दें। आपको तुरंत राहत मिलेगी।

    रात को लगाएं नारियल का तेल

    नारियल का वर्जिन ऑइल बॉडी ओडर से मुक्ति पाने का आसान तरीका है। आप हर रोज रात को सोने से पहले शरीर के उन हिस्सों पर नारियल तेल से हल्की मसाज करें जहां दुर्गंध आती है। कुछ दिन ऐसा करने पर आपको आराम मिलेगा।

  • दिनभर थकान के बाद ये चीजें खाने से मिलेगी Instant Energy

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    कई बार हमारे शरीर में अचानक ही एनर्जी की बहुत ज्यादा कमी हो जाती है और हमारा कोई काम करने का मन नहीं करता। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसी चीजों के बारे में जिन्हें खाकर आप पा सकते हैं तुरंत पर्याप्त ऊर्जा। एक नजर ऐसे ही खाद्य पदार्थों पर…

    ​सिंपल कार्ब

    इंस्टेंट एनर्जी के लिए आप पास्ता, वाइट ब्रेड, क्रैकर, कैंडी, कुकी या स्वीट का विकल्प अपना सकते हैं। ज्यादा शुगर या फिर सफेद आटे से बनी चीजों को शरीर द्वारा अवशोषित कर पाना ज्यादा आसान नहीं होता। इस कारण यह शुगर रक्त प्रवाह में तेजी से मिलती है। इससे ऊर्जा का तुरंत संचार होता है, लेकिन जब आपका ब्लड शुगर घटना शुरू होता है तो आप आलस जैसा महसूस करने लगते हैं।

    ​साबुत अनाज

    इनमें ब्राउन राइस, जौ, ओटमील और साबुत अनाज शामिल है। आपको इनसे ज्यादा फाइबर मिलेगा, जो आपकी ऊर्जा को लंबे समय तक बरकरार रखेंगे। इसके साथ ही ये खाद्य पदार्थ कई पोषक तत्वों से भरे होते हैं जो सेहत के लिए बेहद अच्छे होते हैं।

    ​नींबू पानी

    अगर आपको शरीर में एनर्जी की कमी महसूस हो रही है या फिर सिर घूम रहा है या चक्कर जैसा महसूस हो रहा है तो एक गिलास ठंडा-ठंडा नींबू पानी पी लें और इसका हर दिन सेवन करें। नींबू पानी में चुटकी भर नमक, चुटकी भर चीनी और थोड़ा सा पुदीना भी डालें। ऐसा करने से आपके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बना रहेगा और आपको पूरे दिन एनर्जेटिक भी महसूस होगा और शरीर में पानी की कमी भी नहीं होगी।

    ​कैफीन

    जब आप दिन की शुरुआत कॉफी या चाय से करते हैं तो तुरंत ऊर्जा का अहसास होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कैफीन में ऐसे रसायन होते हैं, जो आपको अलर्ट कर देते हैं। अगर आप सोने से पहले कॉफी पीते हैं तो नींद आने में दिक्कत हो सकती है। इस कारण आपको अगले दिन थकान लगने लगेगी।

  • Breast Cancer: कैंसर दोबारा होने का ये है कारण

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    लंबे समय से ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए हॉर्मोन थेरपी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन मामलों में कई बार कैंसर ठीक होने के बाद फिर आ जाता है। अब एक रिसर्च में पता चला है कि हॉर्मोन थेरपी से कुछ कैंसर सेल्स स्लीप मोड में चले जाते हैं जो बाद में फिर ऐक्टिव हो सकते हैं।

    इस रिसर्च के बाद अब ऐसे रास्ते खोजे जा सकेंगे जिनसे इन सेल्स को लंबे समय तक स्लीप मोड में रखा जा सके या फिर ऐक्टिव करके इलाज के दौरान उन्हें मार दिया जाए।

    इस रिसर्च में लैबोरेटरी में ब्रेस्ट कैंसर सेल्स पर हॉर्मोन के प्रभाव को देखा गया। लीड रिसर्चर लुसा मगनानी ने कहा कि इसके बारे में जानना बेहद जरूरी है क्योंकि ब्रेस्ट कैंसर के ज्यादातर मामलों में हॉर्मोन थेरपी से ही इलाज किया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर इन डॉर्मेंट सेल्स के बारे में अच्छे से पता लगा सकें तो कैंसर को वापस आने से रोका जा सकता है।

    इसके लिए या तो उन्हें और भी लंबे समय तक के लिए स्लीप स्टेज में ही रखा जा सकता है या फिर उन्हें ऐक्टिव करके खत्म किया जा सकता है। ब्रेस्ट कैंसर के ज्यादातर मामलों ट्यूमर को निकाल दिया जाता है। इसके बाद उन्हें हॉर्मोन थेरपी दी जाती है। हालांकि, कई मरीजों को दोबारा कैंसर हो जाता है।

    कई मामलों में तो 20 साल बाद भी कैंसर फिर से हो जाता है। कैंसर का इतने लंबे समय बाद वापस आना और भी खतरनाक होता है क्योंकि तब तक यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका होता है और दवाओं के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है।

  • स्टडी: अल्जाइमर का खतरा सही डायट से होता है दूर

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    पेट के बैक्टीरिया पर आहार का प्रभाव अल्जाइमर के जोखिम को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। एक निश्चित प्रकार की डायट लेने से आंत में मौजूद माइक्रोब्स प्रभावित होते हैं। हमारी बॉडी में दो तरह के माइक्रोब्स और बैक्टीरिया होते हैं ,अच्छे और बुरे। जो हमारी आंत और पाचनतंत्र में रहते है। पिछले दिनों हुए एक रिसर्च में सामने आया है कि ये अल्जाइमर रोग के जोखिम को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

    वेक फॉरेस्ट स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में पाया कि अगर एक खास प्रकार की सही डायट का पालन किया जाए तो अल्जाइमर के रोग से बचा जा सकता है। शोधकर्ताओं ने आंत में रहनेवाले ऐसे कई माइक्रोबायोम की पहचान की जो अल्जाइमर से बचाने में मददगार हैं। बैक्टीरिया द्वारा उत्पादित रसायन उचित डायट लेने पर शरीर में अल्जाइमर के रोग की रोकथाम करते हैं।

    रिसर्च में सामने आया कि सही डायट के बाद ये बैक्टीरिया और माइक्रोबायोम जिस तरह के रसायन हमारे शरीर में बनाते हैं, वे हमारे दिमाग को दुरुस्त रखने में मददगार होते हैं। इस शोध में शामिल जिन लोगों को सही डायट दी गई उनके दिमाग में ऐसे रसायन पाए गए, जो अल्जाइमर से बचाने में मददगार हैं। जबकि जिन लोगों को बेतरतीब डाइट दी गई उनके मस्तिष्क में इन रसायनों का अभाव देखा गया। खास कीटोजेनिक डायट ने आंत के माइक्रोबायोम और इसके चयापचयों में परिवर्तन किया, जो दोनों अध्ययन समूहों में शामिल सदस्यों में अल्जाइमर के मार्करों के कम स्तर से संबंधित थे।

    यह स्टडी द लैंसेट द्वारा प्रकाशित एक पत्रिका ईबियोमेडिसिन के ताजा अंक में प्रकाशित की गई है। अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, पेट के माइक्रोबायोम और आहार के संबंध में न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों पर पिछले दिनों काफी ध्यान दिया गया है और यह अध्ययन बताता है कि अल्जाइमर रोग आंत के जीवाणुओं में विशिष्ट परिवर्तन से जुड़ा है और एक खास प्रकार की कीटोजेनिक डायट माइक्रोबायोम को प्रभावित कर सकती है। यह डायट ओड डिमेंशिया को प्रभावित कर सकती है।

    जिन लोगों पर यह शोध किया गया उनमें से कुछ को बेतरतीब ढंग से या तो कम कार्बोहाइड्रेट संशोधित कीटोजेनिक डायट या कम फैट वाली और उच्च कार्बोहाइड्रेट से भरपूर डायट छह सप्ताह तक दी गई। छह सप्ताह की “वॉशआउट” टाइमिंग के बाद दूसरे आहार दिए गए। पेट के माइक्रोबायोम, फेकल शॉर्ट-चेन फैटी एसिड और अल्जाइमर के मार्कर, जिनमें सेरीब्रोस्पाइनल तरल पदार्थ में अमाइलॉइड और ताऊ प्रोटीन शामिल हैं, को हर तरह की डाइट के बाद मापा गया और शरीर के अंगों पर इनका प्रभाव देखा गया।

  • हो जाएं सावधान अगर सुबह जागते ही उठा लेते हैं हाथ में मोबाइल

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    मोबाइल लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। विडियो देखने हों, गाने सुनने हों, गेम्स खेलना हो या फिर अलार्म ही लगाना हो, इस सबके लिए मोबाइल का इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि सोने से पहले और जागने के बाद ज्यादातर लोग अपने स्मार्टफोन को यूज करते हैं। रात के अंधेरे में मोबाइल यूज करने के इस्तेमाल के नुकसान के बारे में तो आप जानते ही होंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि सुबह उठकर सबसे पहले स्मार्टफोन को चेक करना भी सेहत के लिए अच्छा नहीं है।

    दिन की खराब शुरुआत

    यूके में करीब 2000 लोगों पर हुए एक सर्वे के मुताबिक, सुबह जागते ही सबसे पहले मोबाइल चेक करने पर दिन की शुरुआत ही स्ट्रेस से होती है, जो दिमाग के वर्किंग प्रोसेस पर असर डालते हुए कार्यक्षमता पर असर डालता है।

    क्या कहते हैं एक्सपर्ट

    एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब व्यक्ति जागने पर सबसे पहले मोबाइल पर मेल या नोटिफिकेशन चेक करता है तो उसका दिमाग उनसे जुड़े विचारों से ही भर जाता है, जिससे वह किसी अन्य चीज के बारे में बेहतर तरीके से नहीं सोच पाता।

    स्ट्रेस ऐंड ऐंग्जाइटी

    उठने के बाद एक ही चीज के बारे में सोचते रहने के कारण स्ट्रेस और ऐंग्जाइटी लेवल बढ़ जाता है। सुबह के समय वैसे ही बीपी बढ़ा हुआ होता है ऐसे में तनाव उसे और बढ़ा सकता है जो खतरनाक साबित होगा।

    बीते हुए दिन का प्रभाव

    सोने के बाद अगले दिन उठने पर जब व्यक्ति मेल या नोटिफिकेशन चेक करता है तो वह बीते हुए दिन की घटनाओं से संबंधित जानकारी पढ़ रहा होता है। एक्सपर्ट की मानें तो इसका असर यह होता है कि व्यक्ति के प्रेजेंट को पास्ट हाइजैक कर लेता है और नए दिन को नए तरीके से जीने की जगह वह बीते हुए दिन के मुताबिक ही उसे जीता है।

    एकाग्रता में कमी

    एक सर्वे में सामने आया है कि जागने के बाद सबसे पहले मोबाइल चेक करना और पास्ट इवेंट्स को लेकर सोचने के कारण एकाग्रता में भी कमी आती है। इसका असर ड्राइविंग से लेकर ऑफिस में काम करने और पढ़ाई करने तक में दिखाई देता है।

    क्या करें

    एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सुबह उठने पर सबसे पहले मोबाइल चेक करने की जगह म्यूजिंग सुनें या मेडिटेशन करें, इससे दिमाग को रिलैक्स शुरुआत मिलेगी जिससे उसे दिनभर के लिए तैयार होने का मौका मिलेगा और व्यक्ति हर चीज में ज्यादा बेहतर तरीके से परफॉर्म कर पाएगा।

  • कम होगी स्वेटिंग इन टिप्स को अपनाने पर

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    मौसम चाहे जो भी हो शरीर पर पसीना आता ही है। गर्मियों और उमस भरे मौसम में तो पसीने के कारण हालत खराब हो जाती है। इस वजह से कहीं आने-जाने की भी इच्छा नहीं होती और यह समस्या चिड़चिड़ा भी बना देती है। लेकिन कुछ तरीकें हैं जो इस परेशानी को काफी हद तक दूर कर सकते हैं।

    शेव या वैक्सिंग

    शरीर पर बाल यानी ज्यादा पसीना, इसलिए टाइम टू टाइम शेव करते या वैक्सिंग करवाते रहें। इससे स्किन के पोर्स को भी क्लीन रहने में मदद मिलेगी जो पसीने की समस्या को भी कम कर देगा।

    लोशन और क्रीम

    स्किन के हाइड्रेशन को बनाए रखने के लिए लोशन या क्रीम बेहद जरूरी है, हालांकि इसके कारण पसीना भी ज्यादा आता है। इससे बचने के लिए ऐसे लोशन या सनस्क्रीन चुनें तो वॉटर या जेल बेस्ड हों। आप चाहें तो ऐलोवेरा या समर स्पेशल लोशन भी चुन सकती हैं जो स्किन में आसानी से अब्जॉर्ब हो जाते हैं और स्किन चिपचिपी नहीं होती। इससे पसीना भी कम आता है।

    कपड़े

    ऐसे कपड़े पहने जिनमें से हवा आर-पार हो सके। कॉटन इसके लिए बेस्ट चॉइस है। साथ ही में कलर भी लाइट चुनें। ज्यादा डार्क कलर ज्यादा गर्मी व सनलाइट सोखते हैं जिससे बॉडी का तापमान बढ़ता है और पसीना ज्यादा आता है, इसलिए लाइट फैब्रिक और कलर के कपड़े बेस्ट चॉइस हैं।

    न खाएं ये चीजें

    ज्यादा ऑइली, स्पाइसी, नॉन वेज और फास्ट फूड खाने से बचें। इन सभी को पचाने में बॉडी ज्यादा एनर्जी लेती है जिससे पसीना भी ज्यादा आता है।

    कूल ड्रिंक्स

    कम पसीने के लिए बॉडी को बाहर ही नहीं बल्कि अंदर से भी कूल रखने की जरूरत है। इसके लिए आप छाछ, दही, लस्सी, नारियल पानी, ताजे फलों के जूस, सब्जियों के जूस आदि को पी सकते हैं।

    नॉर्मल तापमान की डालें आदत

    गर्मी से बचने के लिए लोग एसी में रहना पसंद करते हैं जो उनकी बॉडी को तुरंत कूल डाउन करता है और पसीना बिल्कुल भी नहीं आता। हालांकि, शरीर को इसकी आदत लग जाए तो उसे मौसम के मुताबिक खुद को ढालने में परेशानी होती है। कोशिश करें कि आप ज्यादा से ज्यादा समय नॉर्मल रूम टेंपरेचर में गुजारें जिससे शरीर को आसानी से अजस्ट होने में मदद मिलेगी और पसीना कम आएगा।

    ऐपल साइडर विनिगर

    ऐपल साइडर विनिगर को एक बोल में निकालें और रुई की मदद से अपने बॉडी के उन हिस्सों पर लगाएं जहां आपको सबसे ज्यादा पसीना आता है। इसे रातभर लगे रहने दें और सुबह धो लें। माना जाता है कि इस विनिगर से पोर्स को टाइट होने में मदद मिलती है जिससे पसीना कम आता है।

    ब्लैक टी

    एक कप पानी गरम करें और उसमें चाय पत्ती मिलाएं। इसे उबलने दें और फिर गैस बंद कर दें। पानी ठंडा हो जाए तो उसे छान लें और पानी को रुई की मदद से ज्यादा स्वैट करने वाले हिस्सों पर लगाएं। ब्लैक टी में भी ऐपल साइडर विनिगर जैसी खासियत है। यह भी पोर्स को टाइट करते हुए स्वैटिंग की समस्या को कम करता है।