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  • स्त्री के शरीर के रंग से जानियें उस स्त्री का नेचर !

    स्त्री के शरीर के रंग से जानियें उस स्त्री का नेचर !

    जिन स्त्रियां का रंग अत्याधिक काला होता है, यहां तक कि आंखें, बाल और जीभ भी काली होती हैं, वे स्वभाव से बहुत कोमल कही जा सकती हैं। लेकिन परिस्थितियां अनुकूल ना हों तो ये स्त्रियां काफी हद तक कठोर बन जाती हैं। काली त्वचा वाली महिलाएं काफी समर्पित होती हैं, प्रेम में वे त्याग की भावना रखती हैं और इन पर आप आंख बंद करके भरोसा कर सकते हैं।

    स्त्री के शरीर के रंग से जानियें उस स्त्री का नेचर !
    फोटो-साभार: सोशल मीडिया

    गोरी त्वचा को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। पहली श्रेणी, गोरा और गुलाबी जिसे हल्का पिंकिश कह सकते हैं, इस रंग वाली महिलाएं देखने में बेहद आकर्षक होती हैं। ये बहुत बुद्धिमान और पढ़ने-लिखने की शौकीन होती हैं।

    स्त्री के शरीर के रंग से जानियें उस स्त्री का नेचर !
    फोटो-साभार: सोशल मीडिया

    दूसरी श्रेणी है पेल, यानि पीले और सफेद का मिश्रण। इस रंग वाली महिलाएं स्वभाव से विनम्र, गंभीर, धैर्यवान और वेल मैनर्ड होती हैं। जानकारों की मानें तो वे महिलाएं जो गोरी होती हैं, अपने साथी के प्रति समर्पित और बहुत सौभाग्यशाली कही जा सकती हैं। बहुत ही कम ऐसा होता है, जब इन्हें जीवन में आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़े।

    जानकारों के अनुसार इस संसार में सबसे ज्यादा तादात गेहुएं रंग वाले लोगों कीहै। गेहुएं रंग को भी दो श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी, जो गोरे रंग की तरफ झुकाव रखते हों। ऐसे लोग जिनका रंग गेहुंआं होते हुए भी थोड़ा गोरा दिखता है, वे लोग मेहनती और कभी-कभार बेहद आलसी हो जाते हैं।
    दूसरी श्रेणी में वो लोग आते हैं जिनका गेहुंआं रंग, ज्यादा काले की तरह दिखता है। ये लोग धैर्य और सहनशक्ति के मामले में पिछड़ जाते हैं। ये लोग अपने आसपास किसी भी प्रकार की नॉनसेंस बर्दाश्त नहीं कर पाते।

    स्त्री के शरीर के रंग से जानियें उस स्त्री का नेचर !

    जिन महिलाओं का रंग ना तो काला और ना गोरा होता है, वे धार्मिक कार्यों में रुचि रखती हैं। ये महिलाएं गृहस्थी संभालकर रखती हैं, मांगने से ज्यादा देने में विश्वास रखती हैं। लाइफ में ज्यादा टेंशन ना लेने वाली ये महिलाएं विश्वसनीय भी होती हैं।

    स्त्री के शरीर के रंग से जानियें उस स्त्री का नेचर !

    अब हमने आपको ये तो बता दिया कि त्वचा के रंग के आधार पर महिलाओं का स्वभाव निर्भर करता है। अब आपकी प्रेमिका या गर्लफ्रेंड का रंग क्या है, उनका रंग और व्यवहार उपरोक्त पंक्तियों के साथ कितना मेल खाता है, यह बात तो आप ही हमें बताएंगे।

  • आइस क्यूब के जरिए कायम रख सकती हैं आप अपनी खूबसूरती

    आइस क्यूब के जरिए कायम रख सकती हैं  आप अपनी खूबसूरती

    गर्मी के मौसम में face पर ताजगी बनाए रखना काफी मुश्किल होता है। क्योंकि पसीना और जल्दी होनेवाली थकान चेहरे की रंगत छीन लेती है। अगर आपको ज्यादा समय खुले में रहना पड़ता है, तब तो यह और भी अधिक दिक्कत भरा होता है। लेकिन परेशान न हों। आपको जानकर खुशी होगी कि एक छोटी-सी आइस क्यूब आपकी इस बड़ी समस्या का समाधान कर सकती है। आप कई तरीकों से आइस क्यूब के जरिए अपनी खूबसूरती कायम रख सकती हैं…

    चेहरे पर ग्लो
    रोज सुबह उठकर चेहरे पर बर्फ का एक टुकड़ा हल्के-हल्के हाथों से रब करें। इसे पूरे चेहरे पर सर्कुलर यानी घड़ी की चलने की दिशा में घुमाएं। चेहरे पर ग्लो लाने का यह सबसे सर्वोतम तरीका है।

    ब्लड सर्कुलेशन
    चेहरे पर बर्फ लगाने से चेहरे का ब्लड सर्कुलेशन सही बना रहता है। इससे चेहरे की त्वचा से जुड़ी दिक्कतें नहीं होती और चेहरा दिनभर ताजगीभरा लगता है। फेस पर निखार बढ़ता जाता है।

    सप्ताह में इतनी बार
    अगर आप हर रोज सुबह ऐसा करने में समर्थ नहीं है तो सप्ताह में तीन से चार पर हर दिन सुबह एक आइस क्यूब से चेहरे की मसाज जरूर करें। इससे आपको लंबे समय तक ताजगी मिलेगी।

    झुर्रियां घटाने में
    बढ़ती उम्र के साथ चेहरे पर झुर्रियां आना आम बात है। कई बार तनाव के लंबे दौर के कारण भी चेहरे पर लाइन्स उभर आती हैं। इनसे निजात पाने के लिए दिन में दो बार आइस क्यूब से चेहरे की मसाज करें। झुर्रियां दूर होंगी और स्किन में चमक आएगी।

    मेकअप करते समय
    गर्मी के मौसम में चेहरे पर मेकअप करने में काफी दिक्कत होती है। मेकअप करते समय ही चेहरे पर नमी आ जाती है या मेकअप ज्यादा देर नहीं टिक पाता है। इस परेशानी से बचने के लिए मेकअप करने से पहले चेहरे पर बर्फ का टुकड़ा रगड़ें। फिर मुलायम कपड़े से चेहरा साफ करें और फिर मेकअप करें। आपका मेकअप ज्यादा अच्छे तरीके से होगा और लंबा टिकेगा।

  • पहचानें डाइजेशन सिस्टम खराब होने के 5 लक्षण, बचें गंभीर बीमारियों से !

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    पाचन तंत्र भोजन को ऊर्जा में बदल कर आपके शरीर को रोगों से लड़ने के सक्षम बनाता है। इसलिए बिना अच्छे डाइजेशन के स्वस्थ रहना भी मुश्किल है। पाचन क्रिया खराब होने पर आपको न तो खाना पचता है और न ही भरपूर पोषण मिलता है। वहीं, खराब डाइजेशन के कारण आपको मतली आना, पेट दर्द या सूजन, अपच और गैस जैसी प्रॉब्लम का सामना भी करना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, खराब डाइजेशन यानि पाचन क्रिया में गड़बड़ी कई गंभीर बीमारीयों का कारण बन सकती हैं। ऐसे में इनसे संकेतों को पहचानकर समय पर इलाज करवाना बहुत जरूरी है। आज हम आपको खराब डाइडेशन के कुछ ऐसे लक्षण बताने जा रहे हैं, जिसे पहचानकर आप भी पाचन क्रिया में सुधार कर सकते हैं। चलिए जानते हैं हाजमा खराब होने के 5 लक्षण।

    पाचन क्रिया खराब होने के संकेत
    1. शरीर की गंध
    शरीर से विषॉक्त पर्दाथ को न निकालने पर यह पूरे शरीर में गंध फैला देते हैं, जिसे आप डिओड्रेंड से दूर करने की कोशिश करते हैं। मगर पसीने, पैरों में से बदबू आना खराब हाजमे का संकेत है। शरीर से न निकलने वाले विषॉक्त रक्त धारा में जाकर आपकी स्किन में फसे रह जाते हैं, जिससे शरीर की गंध खराब हो सकती हैं। ऐसे में आपको डिटॉक्स करने वाले फूड्स का सेवन करना चाहिए।
    2. त्वचा की समस्या
    लंबे समय तक खराब हाजमे की समस्या होने पर आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में मुंहासे, सोरायसिस या एक्जिमा की समस्या होने पर आपका पाचन तंत्र खराब हो सकता है। आप चाहे तो इस बारे में अपने गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट से सलाह जरूर लें।
    3. सांसों की दुर्गंध
    पाचन तंत्र खराब होने पर सांसो से भी बदबू आने लगती है। हालांकि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप कितनी बार ब्रश करते हैं। इसलिए अगर ब्रश करने के बावजूद भी आपकी सांसो से बदबू आ रही तो आपको तुंरत चेकअप करवाना चाहिए।
    4. बालों का झड़ना
    आपको सुनकर हैरानी होगी लेकिन पाचन तंत्र खराब होने से बाल भी गिऱ सकते हैं। खराब डाइजेशन बालों को कमजोर बना देता है। डाइजेशन सिस्टम खराब होने के कारण आपके खाने की सहा पोषण बालों तक नहीं पहुच पाता, जिसके कारण बाल झड़ने, बालों का असमय सफेद होना और बाल पतले होना जैसे समस्या हो सकती है।
    5. कमजोर नाखून
    लंबे समय तक खराब हाजमे का असर शरीर के साथ-साथ नाखूनों पर भी पड़ता है। जब पाचन तंत्र खराब होता है तो शरीर के अपशिष्घ्ट पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते है, जिसके कारण आपको कई समस्याएं होती हैं, जिसमें नाखूनों का टूटना या खुरदुरापन भी शामिल है। इसलिए खराब या नाजुक नाखून बिगड़े पाचन तंत्र के संकेत हैं।
    कैसे करें हाजमा दुरुस्त
    पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए सही भोजन का सेवन करें और भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं। अगर आप जल्दी-जल्दी में खाना निगलते हैं तो इससे आपकी पाचन क्रिया खराब हो जाती है। इसके अलावा पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए हैल्दी भोजन के साथ एक्सरसाइज भी करें।

  • घर की खूबसूरती में ये टिप्स लगा देंगे चार चांद ,जरूर करें ट्राई

    घर की खूबसूरती में ये टिप्स लगा देंगे चार चांद ,जरूर करें ट्राई

    कई बार लाखों रुपया खर्च करने के बाद भी आपका घर वैसा नहीं जगमगाता जैसे कि आप कल्पना करते हैं. इंटीरियर का सही चुनाव और डेकोरेशन में जरा सी चूक इसका कारण हो सकती है. आइए आपको 5 ऐसे टिप्स बताते हैं जिनकी मदद से आपका घर पहले से ज्यादा आकर्षक हो जाएगा.ऐसा हो दीवारों का कलर-अगर आपका घर काफी छोटा है तो उसमें डार्क कलर का पेंट करवाना गलत विकल्प होगा. वॉल पर डार्क पेंट के साथ जगह छोटी लगती है और घर में अंधेरा सा छाया रहता है. इसलिए कोशिश करें कि घर में व्हाइट या किसी लाइट शेड की पेंट करवाएं. ऐसा करने से घर में मिनी बल्ब जलाने पर भी ज्यादा रोशनी का एहसास होगा.बेडशीट और पर्दे-दीवारों से मैच करते हुए अगर आप लाइट शेड वाले पर्दे और बेडशीट का इस्तेमाल करें तो और भी अच्छा होगा. घर में लाइट कलर के पर्दे और चादर इस्तेमाल करने से छोटी जगह भी बड़ी लगने लगती है. साथ ही अगर आपकी दीवारों पर बड़ी-बड़ी खिड़कियां हो तो ये और भी बेहतर होगा
    .फर्नीचर का सही इस्तेमाल-
    घर के अंदर का फर्नीचर मिनी साइज में हो और सभी का शेड लाइट कलर में हो तो घर की चमक दोगुनी हो जाती है. बेड, ड्रेसिंग टेबल, मेज या अल्मारी जैसा कोई भी फर्नीचर सामन्य से थोड़ा छोटा होना चाहिए और लाइट कलर का होना चाहिए. इसमें आप लाइट ग्रीन, ग्रे, पिंक या दूसरे किसी भी कलर का इस्तेमाल सहूलियत के हिसाब से कर सकते हैं.लाइट एंड फ्लोरिंग-
    अंधेरे वाले कमरे में रिफ्लेक्टिंग फ्लोरिंग भी अच्छा ऑप्शन है, जिससे कमरे में चमक बढ़ सकती है. साथ ही साथ आप ज्यादा रोशनी वाली लाइट्स का इस्तेमाल करें तो बेहतर होगा.

  • Happy Friendship Day 2019: ये SMS, Messages, Quotes भेजें यारों को और करें विश

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    इस साल दोस्ती का त्योहार 4 अगस्त, रविवार को मनाया जाएगा। दोस्तों के बिना लाइफ बोरिंग सी लगने लगती है। एक सच्चा दोस्त आपके सुख में ही नहीं बल्कि आपके दुख में भी आपके साथ हमेशा खड़ा रहता है। अगर आप भी फ्रेंडशिप डे पर अपने दोस्तों को विश करना चाहते हैं तो उन्हें नीचे दिए गए शुभकामना संदेश भेज सकते हैं। मैसेज, एसएमएस, ग्रीटिंग, शायरी, सोशल मीडिया पोस्ट, वॉट्सएप स्टेटस, फेसबुक मैसेंजर आदि से शुभकामना संदेश और तस्वीरें भेजकर अपने फ्रेंडशिप डे को खास बनाएं। इस खूबसूरत दिन को और ज्यादा यादगार बनाने के लिए कुछ लोग तो मौके पर अपने दोस्तों के साथ पुरानी तस्वीर साझा करने से भी नहीं चूकेंगे। को सोशल मीडिया के जरिए साझा कर अपनी दोस्ती को याद करेंगे। लेकिन आपके लिए यहां हैप्‍पी फ्रैंडशिप डे के कुछ चुनिंदा मैसेज, शुभकामना संदेश और ग्रीटिंग आदि दे रहे हैं जिन्हें आप अपने दोस्तों को भेजकर उन्हें छोटी सी खुशी दे सकते हैं-

    दोस्ती कोई खोज नहीं होती,
    दोस्ती किसी से हर रोज नहीं होती,
    अपनी जिंदगी में हमारी मौजूदगी को बेवज न समझना,
    क्योंकि पलकें आखों पर कभी बोझ नहीं होतीं।।
    -Happy Friendship Day

     

    एक चिंगारी आग से कम नहीं होती,
    सादगी श्रृंगार से कम नहीं होती,
    ये तो सिर्फ सोच का फर्क है,
    वरना दोस्ती भी प्यार से कम नहीं होती।।
    -Happy Friendship Day

     

    friendship samajhdari h samjhauta nhi,
    friendship kshama karna h bhulana nhi,
    chahe yad dasht chali jaye
    ya contact list se no kho jaye,
    -Happy Friendship Day

    अच्छे दोस्त सितारों की तरह होते हैं,
    आप उन्हें हमेशा देश सकते हैं
    आप उनके बारे में यह भी जानते हैं
    कि ये ऐसे ही रहने वाले हैं।।

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    क्यों मुश्किलों में साथ देते हैं दोस्त,
    क्यों गम को बांट लेते हैं दोस्त,
    ना रिश्ता का खून का रिवाज से बंधा,
    फिर भी जिंदगीभर साथ देते हैं दोस्त।।
    -Happy Friendship Day

     

  • हो सकता है यह कारण जल्दी मासिक धर्म शुरू होने के पीछे

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    जल्दी मासिक धर्म की शुरुआत ज्यादा जोखिम वाले टाइप-2 मधुमेह से जुड़ी है, लेकिन बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) इसमें रोकथाम कर सकता है। मेनोपॉज जर्नल में प्रकाशित एक शोध के अनुसार मासिक धर्म आयु में हर साल की देरी टाइप-2 मधुमेह का जोखिम छह फीसदी कम होता है।

    नार्थ अमेरिकन मेनोपॉज सोसाइटी (एनएएमएस) के मेडिकल निदेशक स्टेफनीन फ्यूबियन ने कहा, “मासिक धर्म का 14 साल में शुरुआत बाद के जीवन में मधुमेह से जुड़ा है, यह वयस्क के बीएमआई से भी प्रभावित है।”

    स्टेफनीन फ्यूबियन ने कहा, “बचपन में दूसरे कारक जैसे पोषण व बीएमआई भी इसके जुड़ाव में मुख्य भूमिका निभाते हैं।”

    टाइप-2 मधुमेह दुनिया भर में सबसे आम बीमारियों में एक बन गया है। 2015 में इससे वैश्विक रूप से 20 से 79 की आयु के 8.8 फीसदी लोग प्रभावित थे और 2040 तक इससे 10.4 फीसदी लोगों के प्रभावित होने की संभावना है।

     

  • Friendship Day Special : रहना है डॉक्टरों से दूर, तो लाइए दोस्तों को करीब

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    आखिरी बार आप अपने दोस्तों के साथ कब बैठे थे? याद नहीं! आप कहेंगे कि थोड़ी देर पहले ही तो सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीर को लाइक किया था। ऐसा करने वाले शायद आप अकेले नहीं हैं, जिनकी दोस्ती-रिश्ते मोबाइल तक सीमित हो गए हैं। हम एक टच से अनजानों को भी ‘फ्रैंड लिस्ट’ में तो जोड़ रहे हैं, लेकिन हम खुद तक ही सीमित होते जा रहे हैं। इसका असर हमारे रिश्तों पर ही नहीं बल्कि सेहत पर भी दिखने लगा है। हालांकि कई अध्ययन बताते हैं कि डॉक्टरों से दूर रहना है, तो दोस्तों के करीब रहिए।

    जादू की झप्पी से दूर होगा जुकाम :  
    जादू की झप्पी का कमाल तो आप जानते ही हैं। अमेरिका के पिट‌्सबर्ग स्थित कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय के शोध की मानें तो दोस्तों से गले मिलने से आप खांसी जुकाम से भी दूर रह सकते हैं। शोध के मुताबिक जो लोग ज्यादा तनाव लेने की वजह से खांसी-जुकाम या किसी अन्य संक्रमण का शिकार हो जाते हैं। उन्हें दोस्तों का साथ मिलने से काफी फायदा होता है।

    बुढापे में नहीं बनेंगे भुलक्कड़ : 
    दोस्तों के साथ रहेंगे, तो बुढ़ापे में भुलक्कड़ नहीं बनेंगे। ये हम नहीं बल्कि लंदन के लॉघबोरोग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है। मुख्य शोधार्थी डॉक्टर ऐफ हॉगवर्स्ट सात साल तक 6,677 लोगों पर अध्ययन करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं। उनके मुताबिक आप भले ही लोगों से घिरे रहें, लेकिन बिछड़े हुए पुराने दोस्त अगर दोबारा मिल जाएं या खराब हो चुके रिश्तों में सुधार हो जाए तो डिमेंशिया का खतरा 60 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

    जिंदगी खूबसूरत भी होगी और लंबी भी : 
    अपनों का साथ मिलेगा, तो जिंदगी खूबसूरत तो होगी ही, लेकिन साथ ही आप लंबा जिएंगे। अमेरिका के वर्जिनिया में स्थित जॉर्ज मेसन विश्वविद्यालय ने इसी साल 50 से 79 साल की महिलाओं पर अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि जिन महिलाओं का सामाजिक दायरा कम था, उनमें मृत्यु दर अन्य की तुलना में 20 फीसदी ज्यादा थी। दोस्तों के रहने से दिल भी स्वस्थ रहता है।

    मोटापे से भी दूर रखते हैं दोस्त : 
    अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल ‘जामा’ में प्रकाशित एक अध्ययन में यह बात भी सामने आई कि दोस्त आपको मोटापे से भी दूर रखने में मदद करते हैं। शोध के मुताबिक अगर आपके दोस्त मोटे हैं, तो आपका वजन भी बढ़ सकता है। अमेरिकी सैनिकों पर यह अध्ययन किया गया, जिसमें पाया गया कि ज्यादा वजन वाले साथियों के साथ तैनात जवानों का भी वजन बढ़ गया।

    इसका भी रखें ख्याल : 
    -अमेरिकन जर्नल फॉर हेल्थ प्रमोशन के हिसाब से सोशल मीडिया पर बिताए जाने वाले समय को कम करना चाहिए, दोस्तों से सोशल मीडिया की जगह मिलकर बात करने से संबंध प्रगाढ़ होंगे
    -जर्नल ऑफ बिजनेस एंड साइकोलोजी के अनुसार, घर में बैठकर दफ्तर का काम करने वाले लोग दफ्तर से काम करने वालों की तुलना में ज्यादा चिंतित रहते हैं, इसका कारण अकेलापन है।

     

  • बच्चों की दोस्ती मोबाइल गेम ही नहीं किताबों से भी कराएं

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    टेक्नोलॉजी का असर बच्चों पर इस तरह हो रहा है कि वे कोर्स से अलग कविता-कहांनियों की किताबें पढ़ना भूल गए हैं। वक्त मिलने पर मोबाइल पर गेम खेलना और वीडियो देखना ही उनकी पहली पसंद बन गया है। मगर किताबों से दोस्ती भी तो जरूरी है।

    किताबें हमारी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। यह बात अक्सर कही जाती है। लेकिन ये सिर्फ बड़ों के मामले में ही सच साबित नहीं होती, बल्कि बच्चों पर भी उतनी ही लागू होती है। बेशक आज के दौर में अधिकतर बच्चे कोर्स से अलग किताबें नहीं पढ़ पाते। वजह है मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर जैसे तकनीकी गैजेट्स। हालांकि बाजार में बच्चों की कहानी और कविताओं की किताबों की आज भी कोई कमी नहीं है। मगर समस्या है कि बच्चों में पढ़ने का शौक विकसित नहीं हो पा रहा। ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह किताबों का शौक कैसे विकसित करें।

    खुद पढ़कर सुनाएं 
    अपने नन्हे-मुन्ने का अपने जीवन में स्वागत करने के कुछ वर्षों बाद ही आप उसे कहानी पढ़ कर सुनाने की प्रक्रिया आरंभ कर दें। इससे न केवल आप का अपने बच्चे से बंधन मजबूत होगा बल्कि स्वाभाविक तौर पर उसे पुस्तकों से प्यार होने लगेगा। उम्र के छोटे पड़ाव से ही किताबों के साथ से बच्चों में पढ़ने की अच्छी आदत विकसित होती है। प्रयास करें कि प्रतिदिन कम से कम 20 मिनट आप अपने बच्चों के साथ मिल कर बैठें और पढ़ें। पुस्तकों में कोई रोक न रखें, जो आप के बच्चे को पसंद आए, उसे वह पढ़ने दें।

    पढ़ने के साथ समझना भी जरूरी
    बच्चा तेजी के साथ किताब पढ़ पाए, यह हमारा लक्ष्य नहीं है, बल्कि जो कुछ वह पढ़ रहा है, उसे समझ भी सके, इसके लिए आप को बीच-बीच में कहानी से संबंधित प्रश्न करना चाहिए। इससे बच्चा न केवल पढ़ता जाएगा, बल्कि उसे समझने की कोशिश भी करेगा। आप ऐसे प्रश्न पूछें, जैसे अब आगे क्या होना चाहिए, क्या फलां चरित्र ठीक कर रहा है, यदि तुम इस की जगह होते तो क्या करते। ऐसे प्रश्नों से बच्चे की कल्पनाशक्ति विकसित होगी।

    बच्चे के रोलमॉडल बनें 
    यदि आप का बच्चा बचपन से पढ़ने का शौकीन है तब भी घर में किसी रोलमॉडल की अनुपस्थिति उसे इधर-उधर भटकने पर मजबूर कर सकती है। आप स्वयं अपने बच्चे की रोलमॉडल बनें और उसकी उपस्थिति में अवश्य पढ़ें। चाहे आप को स्वयं पढ़ना बहुत अधिक पसंद न भी हो तब भी आप को प्रयास करना होगा कि बच्चे के सामने आप पढ़ती नजर आएं। क्या पढ़ते हैं, यह आप की इच्छा है, लेकिन आप के पढ़ने से आप का बच्चा यह सीखेगा कि पढ़ना उम्र का मुहताज नहीं होता और हर उम्र में इंसान सीखता रह सकता है।

     

  • गूगल पर सबसे ज्यादा खोजी गई सनी लियोनी :मोदी, सलमान सब पीछे

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    भारत में गूगल सर्च में इस साल अगस्त के पहले हफ्ते तक सबसे अधिक ढूंढे जाने वाली हस्तियों की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सुपरस्टार सलमान खान और शाहरुख खान को पीछे छोड़ते हुए अभिनेत्री सनी लियोन शीर्ष स्थान पर बनी हुई हैं।  गूगल ट्रेंड्स एनालिटिक्स के अनुसार, सनी से जुड़ी ज्यादातर खोजें उनके वीडियो के संबंध में हैं, इसके अलावा उनकी बायोपिक श्रृंखला ‘करणजीत कौर : द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ सनी लियोन’ को भी लोगों ने ढूंढा है।इसके अलावा सनी से जुड़े अधिकतर सर्च ट्रेंड्स बताते है कि उन्हें सबसे ज्यादा पूवरेत्तर के राज्यों जैसे मणिपुर और असम में खोजा गया। शीर्ष स्थान पर बने रहने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सनी ने कहा, ‘‘मेरी टीम ने मुङो इस बात की जानकारी दी और मैं इसका श्रेष अपने फैंस को देना चाहूंगी, जो हमेशा मेरे लिए खड़े रहे हैं। यह एक महान भावना है।पिछले साल भी भारत में सबसे ज्यादा खोजे जाने वाले हस्तियों की इस सूची में सनी पहले स्थान पर रही थीं।

  • लड़कियों को जबरन बनाया जाता है मां

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    पैसों के लिए अफ्रीकी देश नाइजीरिया में बच्चा पैदा करने वाली फैक्ट्रियां चल रही हैं। चौंकिए नहीं, यह भले ही हैरानीजनक लग रहा हो, लेकिन है सौ फीसद सच। यहां ‘बेबी फार्मिंग’ नाम से यह गोरखधंधा खतरनाक रूप ले चुका है। यहां कम उम्र की लड़कियों को जबरन मां बनने पर मजबूर किया जाता है और फिर उस बच्चे को भारी दामों में बेऔलाद रईसों को बेच दिया जाता है। इसके लिए बेऔलाद कपल्स मोटी रकम चुकाने तैयार होते हैं।

    नाइजीरिया में चोरी छिपे चल रहा बच्चा पैदा करने का व्यापार बेहद खतरनाक हो चुका है। यहां जन्म देने वाली लड़कियों की उम्र 14 से 17 साल होती है और वो चाहकर भी अबॉर्शन नहीं करा सकती, क्योंकि नाइजीरिया के कानून में इसकी इजाजत नहीं है। इसी बात का फायदा माफिया यानी ‘बेबी फार्मर्स’ उठाते हैं और बच्चों को तीन से चार लाख रुपए में बेचते हैं। वहीं, बच्चे की ख्वाहिश रखने वाले लोग इसका विरोध नहीं करते, क्योंकि मेडिकल ट्रीटमेंट के बजाय ये तरीका ज्यादा सस्ता होता है।

    हालांकि कुछ महिलाएं और लड़कियां यहां पैसे के लालच में मर्जी से आती हैं, तो वहीं इसी की आड़ में कई लड़कियों को खरीद कर यहां लाया जाता है और फिर उन्हें जबरन मां बनने पर मजबूर किया जाता है। सिर्फ नाइजीरिया ही नहीं, इंडोनेशिया समेत कई और देशों में भी बेबी फार्मिंग अस्पतालों और अनाथालायों जैसी जगहों में चोरी-छिपे की जाती है।