Category: health-lifestyle

  • BTS की तरह पाएँ चमकदार त्वचा: आसान टिप्स और ट्रिक्स

    BTS की तरह पाएँ चमकदार त्वचा: आसान टिप्स और ट्रिक्स

    पुरुषों के लिए के-पॉप स्टार जैसी चमकदार त्वचा पाने का तरीका क्या है? क्या आप भी चाहते हैं कि आपकी त्वचा BTS सदस्यों जितनी मुलायम और चमकदार हो? यह संभव है! कोरियाई त्वचा देखभाल (K-beauty) के सिद्धांतों का पालन करके, आप अपनी त्वचा की गुणवत्ता में नाटकीय रूप से सुधार कर सकते हैं। यह सिर्फ महंगे उत्पादों के बारे में नहीं है, बल्कि सही उत्पादों का सही तरीके से उपयोग करने और त्वचा की देखभाल की एक नियमित दिनचर्या को बनाए रखने के बारे में है। आइये जानते हैं कुछ सरल चरण जो आपको BTS सदस्यों जैसी चमकदार त्वचा पाने में मदद करेंगे। यह रूटीन आसान है और इसमें बहुत अधिक समय नहीं लगेगा, बस आपको थोड़ा धैर्य और निरंतरता रखने की जरूरत है। अपनी त्वचा को उस ध्यान और देखभाल से नवाज़ें जिसके वो हक़दार हैं और आपको एक बेहतरीन परिणाम मिलेगा।

    गहराई से सफ़ाई (Deep Cleaning)

    कोरियाई त्वचा देखभाल का एक महत्वपूर्ण पहलू है त्वचा की गहरी सफाई। यह सिर्फ चेहरे को धोने से ज़्यादा है। आपको अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार एक कोमल क्लींजर का चुनाव करना होगा। क्लींजर का काम है त्वचा की सतह पर जमी हुई गंदगी, तेल और अन्य अशुद्धियों को हटाना। यह कदम दिन में दो बार, सुबह और रात को, ज़रूर करना चाहिए। ध्यान रखें कि ज्यादा रगड़ने से त्वचा परेशान हो सकती है, इसलिए हल्के हाथों से क्लींजिंग करना महत्वपूर्ण है। क्लींजिंग के बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें जिससे त्वचा के छिद्र सिकुड़ जायेंगे और त्वचा ताज़ा महसूस होगी।

    सही क्लींजर का चुनाव कैसे करें?

    अपनी त्वचा के प्रकार को समझना महत्वपूर्ण है। शुष्क त्वचा के लिए मॉइस्चराइजिंग क्लींजर बेहतर है, जबकि तैलीय त्वचा के लिए फोमिंग क्लींजर उपयुक्त होगा। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को हल्के और हाइपोएलर्जेनिक क्लींजर का उपयोग करना चाहिए।

    डबल क्लींजिंग टेक्नीक:

    कोरियाई ब्यूटी रूटीन में डबल क्लींजिंग का विशेष महत्व है। पहले ऑइल-बेस्ड क्लींजर का प्रयोग करके मेकअप और तेल को हटाया जाता है, फिर पानी बेस्ड क्लींजर से गंदगी और अशुद्धियों को साफ़ किया जाता है।

    नियमित एक्सफ़ोलिएशन (Exfoliate Weekly)

    एक्सफ़ोलिएशन एक महत्वपूर्ण कदम है जो त्वचा की ऊपरी परत से मृत कोशिकाओं को हटाता है। यह त्वचा की चमक को बढ़ाता है, छिद्रों को बंद होने से रोकता है और त्वचा को मुलायम बनाता है। हालांकि, एक्सफ़ोलिएशन ज़्यादा करने से त्वचा पतली और संवेदनशील हो सकती है, इसलिए सप्ताह में एक या दो बार ही करना चाहिए। एक कोमल स्क्रब या केमिकल एक्सफ़ोलिएंट जैसे AHAs या BHAs का चयन करें जो आपकी त्वचा के अनुकूल हो। एक्सफ़ोलिएशन के बाद त्वचा को मॉइस्चराइज़ करना ज़रूरी है ताकि त्वचा सूखी न हो जाए।

    एक्सफ़ोलिएट करने के सही तरीके:

    एक्सफ़ोलिएंट को हल्के हाथों से त्वचा पर लगाएं और गोलाकार गति में मालिश करें। ज्यादा दबाव न डालें। एक्सफ़ोलिएशन के बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें और मॉइस्चराइज़र लगाएँ।

    सनस्क्रीन का प्रयोग (Use Sunscreen)

    धूप से त्वचा को बचाना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि सूरज की हानिकारक UV किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। हर दिन, बाहर जाने से पहले उच्च SPF वाले ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का प्रयोग करना चाहिए, चाहे मौसम कैसा भी हो। यह प्रक्रिया त्वचा के समय से पहले बूढ़ा होने, धब्बे पड़ने और त्वचा कैंसर से बचाती है। सनस्क्रीन को दो से तीन घंटे के अंतराल पर फिर से लगाना चाहिए, खासकर अगर आप पसीने से तर हों या तैर रहे हों।

    सही सनस्क्रीन का चुनाव कैसे करें?

    SPF 30 या उससे अधिक SPF वाला सनस्क्रीन चुनें जो UVA और UVB किरणों से सुरक्षा प्रदान करता हो। अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार सनस्क्रीन का चयन करें। कुछ लोग जेल बेस्ड सनस्क्रीन पसंद करते हैं, जबकि कुछ को क्रीम बेस्ड पसंद आता है।

    शीट मास्क और अन्य उत्पादों का प्रयोग (Sheet Masks and Other Products)

    शीट मास्क त्वचा को हाइड्रेट करने और पौष्टिक तत्व प्रदान करने का एक अच्छा तरीका है। सप्ताह में एक या दो बार शीट मास्क का प्रयोग करें। अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार शीट मास्क का चयन करें। इसके अलावा, एक अच्छा फेशियल एसेंस भी अपने स्किनकेयर रूटीन में शामिल करें। एसेंस त्वचा को हाइड्रेट करने और अन्य उत्पादों के अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद करता है।

    अन्य उपयोगी उत्पाद:

    टोनर, सीरम, और मॉइस्चराइज़र का उपयोग त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद करता है। इन उत्पादों का चुनाव अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार करें।

    मुख्य बातें (Takeaway Points):

    • नियमित रूप से चेहरे की गहरी सफ़ाई करें।
    • सप्ताह में एक या दो बार एक्सफ़ोलिएशन करें।
    • हर दिन उच्च SPF वाले सनस्क्रीन का प्रयोग ज़रूर करें।
    • सप्ताह में एक या दो बार शीट मास्क का प्रयोग करें।
    • अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार उत्पादों का चयन करें।
    • धैर्य रखें और निरंतरता बनाए रखें।
  • पुनर्नवीनीकरण चिकित्सा उपकरण: आत्मनिर्भर भारत के लिए खतरा या अवसर?

    पुनर्नवीनीकरण चिकित्सा उपकरण: आत्मनिर्भर भारत के लिए खतरा या अवसर?

    भारत में चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहे प्रयासों के बीच, पुनर्नवीनीकरण और पुराने चिकित्सा उपकरणों के आयात की अनुमति देने वाली नीति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। भारतीय चिकित्सा उपकरण निर्माताओं के संगठन, इमेजिंग, थेरेपी और रेडियोलॉजी उपकरण निर्माताओं के संघ, भारत के नैदानिक उपकरण निर्माताओं के संघ और मेड-टेक उद्योग के प्रमुख हितधारकों ने प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्रालय से इस अनुमति को वापस लेने की अपील की है। इन संगठनों का मानना है कि यह निर्णय भारत में चिकित्सा उपकरण निर्माण में आत्मनिर्भरता के प्रयासों के लिए एक बड़ा खतरा है। यह विरोध पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, महानिदेशालय स्वास्थ्य सेवाएँ और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापनों के बाद आया है, जिनमें प्रयुक्त चिकित्सा उपकरणों के आयात की अनुमति दी गई है। इस नीति के दूरगामी परिणामों और घरेलू उद्योग पर इसके प्रभावों पर विस्तृत विश्लेषण आवश्यक है।

    घरेलू चिकित्सा उपकरण उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव

    ‘मेक इन इंडिया’ पहल को झटका

    पुनर्नवीनीकरण चिकित्सा उपकरणों के आयात की अनुमति ‘मेक इन इंडिया’ पहल को एक बड़ा झटका है। भारत में उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा उपकरणों के निर्माण की क्षमता के बावजूद, पुराने उपकरणों के आयात से घरेलू क्षेत्र में हाल के वर्षों में हुई प्रगति को नुकसान पहुँचेगा। यह नीति भारतीय उद्यमियों के नवाचार और निवेश को कमज़ोर करती है, जिससे भारत में एक मज़बूत और प्रतिस्पर्धी मेडटेक उद्योग के विकास में बाधा उत्पन्न होती है। इससे घरेलू निर्माण क्षमताओं में कमी आएगी और रोजगार के अवसरों पर भी विपरीत असर पड़ेगा। छोटे और मझोले उद्यमों (MSME) पर इसका असर विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि इनकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो सकती है और उन्हें बंद होने का भी सामना करना पड़ सकता है।

    भारतीय स्टार्टअप्स और MSMEs को नुकसान

    यह नीति न केवल स्थापित कंपनियों बल्कि नवोदित स्टार्टअप्स और MSMEs को भी गंभीर रूप से प्रभावित करेगी। इन कंपनियों ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत बड़ा निवेश किया है और उन्नत तकनीक वाले चिकित्सा उपकरणों का निर्माण कर रहे हैं। सस्ते पुनर्नवीनीकरण उपकरणों के आयात से इन स्टार्टअप्स और MSMEs की प्रतिस्पर्धात्मकता कम होगी, जिससे उनके व्यापार को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है और कुछ कंपनियाँ बंद होने पर मजबूर हो सकती हैं। यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के विरुद्ध भी जाता है।

    रोगी सुरक्षा पर गंभीर चिंताएँ

    गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का अभाव

    पुनर्नवीनीकरण उपकरणों के आयात से रोगी सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल उठते हैं। ऐसे उपकरणों की गुणवत्ता और सुरक्षा नये उपकरणों के बराबर नहीं हो सकती। नियमों के अनुसार नए उपकरणों के लिए कई सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल हैं, लेकिन पुराने उपकरण इन मानकों पर खरे नहीं उतर सकते हैं। इससे रोगियों की सेहत को खतरा हो सकता है और स्वास्थ्य सेवा में कमी आ सकती है। अनाधिकृत आयात से उपकरणों की उत्पत्ति और उनकी मेडिकल फिटनेस की जांच करना मुश्किल होगा। यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के खिलाफ भी है।

    स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

    कम गुणवत्ता वाले पुराने उपकरणों के उपयोग से अस्पतालों और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। मशीनों के बार-बार खराब होने और मरम्मत की जरुरत होने से चिकित्सा सेवाएँ बाधित होंगी। इससे रोगियों की देखभाल में व्यवधान आएगा और समय की बर्बादी के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी होगा।

    आत्मनिर्भर भारत और नीतिगत विरोधाभास

    राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति 2023 के विपरीत

    यह नीति भारत की राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति 2023 के सिद्धांतों के बिल्कुल विपरीत है। इस नीति का उद्देश्य देश में मेडटेक क्षेत्र का विकास करना और आत्मनिर्भरता हासिल करना है। पुनर्नवीनीकरण उपकरणों का आयात इस नीति के लक्ष्यों को हासिल करने में बाधक होगा।

    सरकार की नीतियों में सामंजस्य का अभाव

    यह स्थिति सरकार की नीतियों में सामंजस्य के अभाव को दर्शाती है। एक ओर सरकार स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना चाहती है और दूसरी ओर पुराने और कम गुणवत्ता वाले उपकरणों के आयात को अनुमति दे रही है। इससे उद्योग के विकास में भ्रम की स्थिति पैदा होती है और निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है।

    मुख्य बिन्दु:

    • पुनर्नवीनीकरण चिकित्सा उपकरणों के आयात से घरेलू मेडटेक उद्योग को भारी नुकसान होगा।
    • इससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को झटका लगेगा और स्टार्टअप्स तथा MSMEs को गंभीर नुकसान होगा।
    • रोगी सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्न उठते हैं क्योंकि ऐसे उपकरणों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर संदेह है।
    • यह नीति राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति 2023 के उद्देश्यों के खिलाफ़ है और सरकार की नीतियों में सामंजस्य की कमी दर्शाती है।