स्वस्थ और बीमारियों से दूर रहने के लिए आप हेल्दी भोजन, फल और सब्जियों का सेवन करते है। इसके बावजूद भी ब्लड प्रैशन, डायबिटीज, हार्ट ब्लॉकेज और जोड़ों के दर्द जैयी बीमारी हो जाती है। इन बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए आप कई तरह की दवाइयों का सेवन करते है, जोकि शरीर को ज्यादा नुकसान पहुंचा देते है। दवाइयों के बजाए इन बीमारियों को दूर करने के लिए आप घरेलू तरीके भी इस्तेमाल कर सकते है। ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर अलसी के काढ़े का सेवन कई बीमारियों के इलाज में फायदेमंद है। काढ़ा बनाने की विधिः 2 चम्मच अलसी के बीजों को 2 कप पानी में डालकर अच्छी तरह उबाल लें। जब यह उबल कर आधा हो जाए तो इसे छानकर ठंडा कर लें। रोजाना दिन में 1 बार इसका सेवन सेहत के लिए और बीमारियों को दूर करने के लिए फायदेमंद होता है। इस काढ़े से दूर होने वाली बीमारियां 1. ब्लड शुगर नियमित रूप से सुबह खाली पेट असली के काढेघ् का सेवन डायबिटीज लेवल को कंट्रोल करता है। जिससे आप ब्लड शुगर जैसी बीमारी से दूर रहते है। 2. थायराइड हाइपोथायराइड को दूर करने के लिए सुबह खाली पेट 1 कप अलसी के बीजों का काढ़ा पीएं। इसके अलावा इसका सेवन बालों को झड़ने से भी रोकता है। 3. जोड़ों का दर्द साइटिका, नस का दबना, घुटनों और जोड़ों के दर्द में नियमित रूप से इस काढ़े का सेवन करें। दर्द कुछ दिनों में ही गायब हो जाएगा। 4. हार्ट ब्लॉकेज नियमित रूप से अलसी का काढ़ा पीने से आर्टरीज में ब्लॉकेज की समस्या दूर होता है। इसके अलावा इसमें मौजूद ओमेगा-3 शरीर में कोलेस्ट्रॉल एलडीएल के स्तर को कम करके हृदय संबंधी बीमारियों को रोकने में मदद करता है। 5. मोटापा वजन कम करने के लिए आप कई तरह की डाइट और व्यायाम अपनाते है। इसकी बजाए दिन में 2 बार इस काढ़े का सेवन करें। अलसी में मौजूद फाइबर भूख को कम करता है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इससे जल्दी वजन कम करने में मदद मिलती है। 6. पेट की समस्याएं रोजाना नियमित रूप से इस काढ़े का सेवन करने पर कब्ज, पेट दर्द, अपच, पेट अफरना, इंफेक्शन और एसिडिटी की समस्या दूर होती है।
मोटापा बढने के कई कारण होते हैं। आज हम उन्हीं के बारे में आपको बता रहे हैं। अनुचित खान-पान, आराम पसंद लाइफस्टाइल, अनुवंशिक स्थितियों में मासिक धम की अनियमितता, थायरॉइड, हार्मोनल असंतुलन के कारण वजन का बढना तनाव अवसादयुक्त जीवन आदि वजन बढने के मुख्य कारण होते हैं।
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मोटापा एक भयानक रोग नहीं है, लेकिन मोटापे के कारण कई प्रकार की बीमारियां जन्म ले लेती हैं। जिसे वजह से हर किसी के लिए यह किसी गंभीर समस्या से कम नहीं होता है। मोटापे की वजह से, हृदय रोग, मधुमेह, ब्लडप्रेशर, बांझपन, सांस फूलना आदि बीमारियां हो जाती हैं।
सर्दियों में वजन का थोडा बढना बुरा नहीं है, लेकिन जो लोग पहले ही मोटे हैं, उनके लिए यह परेशानी का सबब बन जाता है। ऐसे लोगों को संतुलित भोजन के साथ व्यायाम और शारीरिक सक्रियता की जरूरत होती है।
हालांकि सर्दियों में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को हाइड्रेट करने के लिए कुछ समय पर पानी पीना जरूरी है। सर्दियों में मौसम रूखा भी होता है, इसमें त्वचा की स्वाभाविक नमी कम होती जाती है। इसे पानी से ही संतुलित किया जा सकता है।
दही से इम्यून सिस्टम सही होता है। फ्लेवर्ड या मीठे दही के बजाय सादे दही का सेवन करें। दही को स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाने के लिए उसमें ताजे फल मिलाएं।
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खाने की मात्रा पर ध्यान दें। कम मात्रा में दिन में कम से कम तीन बार भोजन करें। स्वादिष्ट होने के साथ ही खाना ताजा होना चाहिए।
आजकल बोल्ड लिप कलर खूब चलन में है। अगर आप मेकअप के साथ इन लिप कलर्स का सही मैच करें, तो ये आपको डिफरेंट लुक देते हैं। लिपस्टिक आपके लुक को एक अलग आयाम देता है, यह आपके सौंदर्य में चार चांद लगा देता है। अगर आप त्योहारों में अपने लुक के साथ प्रयोग करना चाहती हैं तो नारंगी, ब्लैक और बैंगनी रंग के लिपस्टिक का चुनाव कर सबसे अलग नजर आ सकती हैं।कॉपर ब्राउन कलर हर किसी पर सूट करता है। इस रंग की लिपस्टिक लगाते ही चेरहा एक शाइन करने लगता है।
चॉकलेट शेड आपके लुक को हॉट और ट्रेंडी बना देता है। इनदिनों हमारे ग्लैमर जगत की हसीन दीवास का ये पसंदीदा कलर्स में एक है।
नारंगी रंग की लिपस्टिक या इससे मिलते-जुलते शेड्स इस सीजन में छाए हुए हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह हर परिधान और गोरी या सांवली हर महिला पर जंचता है।
कॉपर कलर की खासियत ये है कि इसे कहीं भी लगाया जा सकता है।
रोजी लिप्स
रेड लिपस्टिक इस सीजन का हॉट है और ग्लैमरस लुक भी देती है, तो आप भी रेड रोज के कलर से मैच करती शॉकिंग रेड लिपस्टिक अप्लाई करें। आंखों पर सिल्वर शिमरी आईशैडो लगाएं और ब्लैक आईलाइनर से ऊपरी पलकों पर बाहर खींचते हुए एक लाइन लगाएं।
धूम्रपान के कारण होने वाले फेफड़ों के नुकसान को लेकर चिंतित हैं? तो फिर धूम्रपान करना छोड़कर रोजाना दो से ज्यादा टमाटर या ताजे फल का सेवन करें, खासतौर से सेबों का। इससे फेफड़ों को हुए नुकसान की भरपाई हो जाती है। एक शोध के निष्कर्षो से पता चलता है कि जो लोग धूम्रपान छोड़ देते हैं और टमाटर और फलों का ज्यादा सेवन करते हैं, उनमें 10 साल की अवधि में फेफड़ों की कार्यप्रणाली में गिरावट कम होती है।
कमजोर फेफड़ों के कारण व्यक्ति की मौत की संभावना बढ़ जाती है, जो कि क्रोनिक ऑबस्ट्रक्टिव पलमोनरी डिजिज (सीओपीडी), हृदय रोग और फेफड़ों के कैंसर के कारण होती है।
प्रमुख शोधार्थी जॉन हापकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की असिस्टेंट प्रोफेसर वानेशा गारेसिया-लार्सन ने बताया, इस शोध से पता चलता है कि आहार उन लोगों में फेफड़ों की क्षति की मरम्मत में मदद कर सकता है जिन्होंने धूम्रपान बंद कर दिया है।
इससे यह भी पता चलता है कि फलों से समृद्ध आहार फेफड़ों की प्राकृतिक बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है भले ही आप कभी धूम्रपान न करते हों या धूम्रपान करना छोड़ चुके हों।
365 दिन के लम्बे इंतजार के बाद नया साल मनाने की रात फिर से आ रही है। ठंडी हवाओं का चलना, नई कलियों का खिलना और प्रकृति का नवयौवना सा रूप नववर्ष के आगमन का संदेश देता है। जब सारी पृथ्वी पूरी मस्ती में होती है, तो भला युवा होती नई पीढी कैसे गुमसुम रह सकती है और रहे भी क्यों। नए साल का स्वागत करना हामारा कत्र्तव्य है और परिवर्तन हमारा जीवन। सिर्फ ध्यान इस बात का रखना है कि मस्ती में कहीं कुछ गलत ना हो जाएं। आज वैश्विक एकता का युग है। संपूर्ण संसार के देशों ने एकदूसरे को किसी ना किसी रूप में प्रभावित किया है, कभी सांस्कृतिक तौर पर, तो कभी बाजार बन कर। इसीलिए तो नववर्ष आज सारी दुनिया का त्यौहार बन गया है। इस दिन सभी कुछ नया करने की चाहत रखते हैं।
बात जब भी नवीनता को अपनाने की होती है, तो आलोचनाओं के तीर पसोपेश में डाल देते हैं। सामाजिक बंधन अपनी धारा से हटना नहीं चाहते और युवा मन नवीनता की चाह में सारे बंधन तोड देना चाहता है।
बुराई संस्कृति में नहीं, उसे अपनाने के तरीके में होती है। इसलिए किसी भी शैली को दोष देने के बजाय उस के मूल में छिपे उत्तम आधार का सार अपनी संस्कृति के अनुसार ढाल कर अपनाना चाहिए। शैली कोई भी हो, बुरी नहीं होती। उद्देश और लक्ष्य निर्धारित होना चाहिए।
मनोरंजन ना बने मनोभंजन
मनोभंजन ना बन जाए। आनंद की अंधी खोज कहीं गमों के अंधेरे में खोने को मजबूर ना कर दे।
एक कहावत है कि नया नौ दिन पुराना सौ दिन। कहावत भले ही पुरानी है, किन्तु शब्दों की सार्थकता आप भी उतनी ही है जितनी इस कहावत के जन्म के समय थी। सचाई मापने के लिए हम किसी भी मामले को ले सकते हैं, फिर चाहे वह वस्तुओं की उपयोगिता हो या गुणों की गुणवत्ता, प्राय: मजबूत आधार को ही स्थान प्राप्त हुआ है। नवीनता अपनेआप में एक उत्साह व उमंग जगाती है। निश्चय ही यह प्रगति का पैमाना भी है। यह उदास मन को प्रसन्न करने की एक प्रेरणा भी है। नवीन उपायों की खोज ने ही हमें सुविधायुक्त आधुनिक जीवन दिया हैप नया करने की चाह ही नया संसार बनाती है। नई सोच, नए विचार हमें परिपक्व और साहसी बनाते हैं। नया तरीका, नई संस्कृति, नया रूप एक नई जीवनशैली बनाते हैं।
लेकिन नवीनता उस रूप में ही सब के द्वारा अपनाने लायक होती है, जिस में शालीनता हो तथा जिस में सब के भले की भावना हो। कोई भी नया दौर संपूर्ण सतुष्टि नहीं दे सकता। किसी भी नवीन कल्पना के अच्छे-बुरे दोनों पहलुओं का होना शाश्वत सत्य है। ये एक दूसरे के पूरक भी होते हैं, किन्तु इन के मध्य का संतुलन ही समाज में पल्लवित हो सकता है और अपना स्थान बना सकता है। नववर्ष नई रूचियों को अपना कर भी मनाया जा सकता है। अच्छे नवीन कार्यों का संकल्प नई स्फूर्ति दे सकता है। सामाजिक सेवा से जुडे कार्यों का आरंभ भी नया नाम देता है। संबंधों की नई पहल से नया उत्साह जागजा है। उगते सूरज से स्वास्थ्य की कामना करना भी नववर्ष के आरंभ का सुंदर आधार बन सकता है। विभिन्न सांस्कृतिक कलाओं का सामूहिक आयोजन जागरूकता और एकता को बढावा देता है, जो नववर्ष को यादगार भी बना सकता है।
किसी की खूबसूरत हंसी शांति भरे माहौल में भी खुशियां भर देती हैं। दांत अगर सफेद और चमकदार हो तो आपकी स्माइल भी हर किसी का मन मोह लेती है लेकिन कई बार कुछ कारणों के कारण दांत पीले हो जाते हैं। कई बार तो उम्र से पहले की दांतों में दर्द,मसूढों में सूजन,दांतों में कीडें या फिर और भी बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह जरूरी नहीं है कि जो लोग दांतों की साफ-सफाई की तरफ ध्यान नहीं देते सिर्फ उन लोगों के दांत ही खराब होते हैं कई बार ज्यादा मीठा खाने, कोल्ड ड्रिंक का जरूरत से ज्यादा सेवन करने आदि से भी ये दिक्कतें आनी शुरू हो जाती हैं। आप भी दांतों की समस्याओं से परेशान रहते हैं तो कुछ घरेलू तरीके अपना कर इससे राहत पा सकते हैं।
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1. बेकिंग सोडा बेकिंग सोडे का इस्तेमाल किचन के साथ-साथ ब्यूटी के लिए भी किया जाता है लेकिन आप शायद यह नहीं जानते होंगे कि दांतों का पीलापन दूर करने के लिए भी यह बहुत कारगर है। दांतों में दर्द और पीलेपन को दूर करने के लिए 1 टेबलस्पून बेकिंग सोडा में एक चुटकी नमक मिला लें। रोजाना दिन में 2 बार ब्रश पर इस पाउडर को हल्का सा लगा कर दांत साफ करें। 2. एलोवीरा और ग्लिसरीन एलोवीरा सेहत,ब्यूटी और दांतों की परेशानियों को दूर करने का सबसे बढ़िया नैचुरल उपाय है। ग्लिसरीन भी दांतों के लिए बहुत लाभकारी है। इस तरह बनाएं नैचुरल टूथपेस्ट। 1 कप पानी 1/2 बेकिंग सोड़ा 1 टेबलस्पून एलोवीरा 1 टीस्पून ग्लिसरीन 2-3 बूंद नींबू का तेल इन सब चीजों को मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें। इससे रोजाना दांत साफ करें। इस नेचुरल पेस्ट से दांत सफेद, पीलापन दूर और मसूढ़ों में दर्द से छुटकारा मिल जाएगा।
किसी दुर्घटना का शिकार होने पर या किसी धारदार हथियार से कट जाने पर जब त्वचा से खून आने लगता है तो उसे चोट कहा जाता है। वहीं किसी ऊबड़-खाबड़ जगह पर चलने या गड्ढे में अचानक से पैर आने पर मोच या फिर अंदरूनी चोट आ जाती है। मोच आने से उस अंग पर सूजन आ जाती है और काफी दर्द होने लगता है। इस दर्द का सही तरीके से अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है क्योंकि यह दिखाई तो नहीं देती लेकिन महसूस बहुत होती है। इसलिए हमें मोच या चोट आने पर तुरंत इसे ठीक करने के लिए प्राथमिक उपचार करना चाहिए। चलिए आपको बताते है कि ऐसी स्थिति में कुछ घरेलू उपचार के जरिए कैसे मोच,अंदरूनी चोट एवं सूजन को दूर कर सकते है।
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MOCH KA DESI UPCHAR- SPRAIN TREATMENT
अंदरूनी चोट को ठीक करने के उपाय 1. अगर आपको लकड़ी-पत्थर लगने से सूजन आई है तो इसके लिए आप हल्दी एवं खाने का चूना एक साथ पीसकर गर्म लेप लगाए अथवा इमली के पत्तों को उबालकर बांधने से भी सूजन उतर जाती है। 2. कभी-कभी कठिन व्यायाम करने पर भी अचानक से मोच आ जाती है। इसके लिए अरनी (एक प्रकार का पौधा) के उबाले हुए पत्तों को किसी भी प्रकार की सूजन पर बांधने से काफी आराम मिलता है। 3. मोच या चोट के कारण यदि खून जम गया हो एवं गांठ पड़ गई हो तो बट के पेड के कोमल पत्तों पर शहद लगाकर बांधने से लाभ होता है। 4. बच्चों को खेलते समय मोच आ जाए तो मोच के स्थान पर चने बांधकर उन्हें पानी से भिगोते रहें। जैसे-जैसे चने फूलेंगे वैसे-वैसे मोच दूर होती जाएगी, यह एक बेहतरीन इलाज माना गया है। 5. मोच के कारण आई सूजन के दूर करने के लिए गुनगुने पानी में फिटकरी मिलाकर चोट वाले हिस्से पर सिकाई करें। 6. सीढियों से अचानक पैर फिसल जाने के कारण भी अक्सर लोगों को चोट व मोच आ जाती हैं । सरसो और हल्दी को गर्म करके उसे मोच वाले स्थान पर लगाए और उस पर एरण्ड के पत्ते को रखकर पट्टी बांध दें। 7. सूजन में करेले का साग खाना भी लाभप्रद माना जाता है।
सर्दी के मौसम में बीमारियों से बचने के लिए खान-पान का खास ख्याल रखना पड़ता है। इस मौसम में जरा सी लापरवाही आपको सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों की शिकार बना सकती है। वैसे तो सर्दियों में संतरा खाना हर किसी को पसंद होता है लेकिन शायद ही कोई इससे होने वाले फायदों के बारे में जानता हो। सर्दियों में रोजाना संतरे या इसके जूस का सेवन जुकाम-खांसी के साथ कई बड़ी-बड़ी बीमारियों को दूर करने में मदद करता है। एमिनो एसिड, फाइबर, कैल्शियम, आयोडीन, फॉस्फोरस, सोडियम, मिनरल्स, विटामिन । गुणों से भरपूर संतरा कैंसर और दिल की बीमारियों को दूर रखता है। इसके अलावा रोज संतरा खाने से इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है। तो चलिए जानते है रोजाना संतरे या इसके जूस का सेवन आपको किन बीमारियों से दूर रखता है।
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Read More : दांतों का पीलापन दूर करने के लिए अपनाएं ये उपाय 1. सर्दी-जुकाम संतरे में मौजूद विटामिन सी सर्दी-जुकाम, खांसी और कप जैसी समस्याओं को दूर करता है। रोजाना इसके जूस में नींबू का रस मिलाकर पीना भी सेहत के लिए फायदेमंद होता है।
2. ब्लड प्रेशर कंट्रोल फाइबर और सोडियम के गुणों से भरपूर संतरा डायबिटीज मरीजों के लिए अच्छा होता है। रोजाना इसका सेवन ब्लड प्रैशर को कंट्रोल करता है। 3. कैंसर इसमें मौजूद विटामिन ए और सी शरीर में मौजूद लाइमोनिन कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकते है। एक स्टडी के मुताबिक संतरा लीवर और ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करता है। 4. किडनी की पथरी किडनी स्टोन की समस्या होने पर रोजाना संतरे और इसके जूस का सेवन करें। पथरी 2-3 हफ्ते में ही निकल जाएगी। 5. बवासीर यह पेट के अल्सर को खत्म करके बवासीर से राहत दिलाता है। इसके अलावा संतरे के छिलका का पाउडर बनाकर गर्म पानी के साथ पीने से बवासीर से राहत मिलती है।
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Santra Khane Ke Fayd
6. गठिया सर्दियों में गठिया रोगियों के जोड़ों और घुटनों का दर्द और भी बढ़ जाता है। ऐसे में संतरे के रस और बकरी के दूध को मिलाकर पीने पर इस दर्द से राहत मिलती है। 7. बुखार अगर आपको तेज बुखार है तो दिन में 2 बार संतरे के जूस का सेवन करें। इसका सेवन शरीर के तापमान को कम करने में मदद करता है। 8. पेट की समस्याएं संतरे के रस को गर्म करके उसमें काली मिर्च और सूंड का रस मिला लें। पेट में गैस, अपच, कब्ज, बदहजमी, सूजन, इंफेक्शन और बदहजमी को दूर करने के लिए इस मिश्रण का सेवन का सेवन करें।
हर कोई आजकल अपने-अपने काम में बहुत व्यस्त हो गया है। ज्यादातर पति-पत्नी दोनों ही कामकाजी होते हैं और सारा दिन जिम्मेदारियों और भागदौड में वह अपनी सेहत का भी सही तरह से ध्यान नहीं रख पाते। इसकी बीच लोगों को छोटी-मोटी सेहत से जुड़ी परेशानियों से भी जूझना पड़ता है। इन्हीं में से एक है एड़ी का दर्द। पुरूष हो या फिर महिला दोनों में से किसी को भी इस असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है। इसके बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे ऊंची एड़ी के सैंडल पहनना,पैर की हड्डी का बढ़ना,दवाइयों का सेवन,पोषक तत्वों की कमी,वजन का बढ़ना आदि। पैर में कुल 26 हड्डियां होती हैं। इसमें से एक हड्डी सबसे बड़ी होती है जो कुुदरती रूप से शरीर का भी भार उठाने में सक्षम होती है। जिसे हम आसानी से अगले चल फिर सकते हैं। चोट या फिर किसी और कारण भी कई बार इसमें दर्द होने लगता है। आइए जानें इसका कारण। एड़ी में दर्द के कारण – ऊंची एड़ी का सैंडल – पैर में मोच आना – टाइट फुटवियर पहनना – नींद की गोलियों का ज्यादा सेवन – डायबिटिज या फिर मोटापा – शरीर में पोषक तत्वों की कमी – पैर की हड्डी बढ़ जाना – ज्यादा देर तक खड़े रहना दर्द से बचने के उपाय पैरों में दर्द होने पर शुरुआत में ही इस तरफ ध्यान देना बहुत जरूरी है। अनदेखी करने पर यह परेशानी और भी बढ़ सकती है। 1. एड़ी में दर्द होने पर हाई हील पहनना बंद कर दें। इससे पैरों को आराम मिलेगा। 2. दर्द वाली जगह पर बर्फ की सिकाई करने से भी बहुत लाभ मिलता है। दिन में 3-4 बार 15-20 मिनट के लिए बर्फ से पैर की सिकाई करें। 3. सैर,व्यायाम, साइक्लिंग और स्वमिंग से पैरों की हड्डियों को मजबूती मिलती है। 4. दिन में एक बार 1 चम्मच दूध के साथ 1 चम्मच अश्वगंधा का चूर्ण मिलाकर सेवन करें। इसके बाद एक कप गर्म दूध पी लें। 5. एलोवेरा, अदरक और काला तिल को मिलाकर गर्म करें और एड़ी पर लगाएं। 6. घरेलू तरीके से पाएं एड़ी की दर्द से राहत एलोवीरा 1/4 चम्मच नौशादर का एक टुकड़ा हल्दी 1/4 चम्मच इस्तेमाल का तरीका एक बर्तन में एलोवीरा को हल्की आंच पर गर्म करेें। अब इसमें नौशादर और हल्दी भी मिला लें। जब यह पानी छोड़ दें तो गैस बंद कर दें और फिर गुनगुना होने पर एक रूई के टुकड़े पर रख दें। इसे एड़ी पर पट्टी की तरह बांध लें। इस बात का ध्यान रखें कि यह उपचार रात के समय करें ताकि आपको चलना फिरना न पड़े। लगातार कुछ दिन इसका इस्तेमाल करने से राहन मिलेगी।
साउथ इंडियन एक्ट्रेस जिया शंकर इन दिनों हिंदी सीरियल ‘मेरी हानिकारक बीवी’ में डॉक्टर का रोल प्ले करते हुए नजर आ रही हैं। सीरियल में उनका कैरेक्टर हेल्थ को लेकर बहुत कॉन्शस रहता है। असल जिंदगी में भी जिया खुद को फिटनेस फ्रीक मानती हैं।
अब वह एंड टीवी पर टेलीकास्ट हो रहे सीरियल ‘मेरी हानिकारक बीवी’ में लीड रोल कर रही हैं। वह अपने रोल के लिए जितना डेडिकेटेड रहती हैं, उतना ही अलर्ट अपनी फिटनेस को लेकर भी रहती हैं। वह खुद को फिट रखने के लिए खास एक्सरसाइज, डाइट पैटर्न भी फॉलो करती हैं। जानिए, जिया का फिटनेस फंडा उन्हीं की जुबानी।।
इससे मैं सारा दिन फ्रेश और एनर्जेटिक भी फील करती हूं और अपना काम अच्छे से कर पाती हंू। इसके अलावा मैं एक्सरसाइज के कुछ प्रोग्राम्स भी देखती हूं, जिसमें 5 मिनट, 7 मिनट या 10 मिनट में मैक्सिमम एक्सरसाइज कैसे करें? इस बारे में बताया जाता है। इन टिप्स को शामिल करने से मेरी रेग्युलर एक्सरसाइज में वैरायटी आ जाती है, जिससे एंज्वॉयमेंट के साथ एक्सरसाइज कर पाती हूं।
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बिना हेल्दी-न्यूट्रीशस डाइट के फिगर मेंटेन करना नामुमकिन है। बेसिकली मैं नॉनवेजीटेरियन हूं, लेकिन अपनी डाइट को लेकर बहुत अलर्ट रहती हूं। अपनी डाइट में वही चीजें शामिल करती हूं, जो हेल्दी होती हैं। इन दिनों सीरियल ‘मेरी हानिकारक बीवी’ की शूटिंग में काफी समय देना होता है, बहुत एनर्जी की जरूरत होती है।
यही वजह है कि स्पेशल डाइट फॉलो कर रही हूं। इन दिनों मेरी डाइट में ज्यादातर सलाद, हरी सब्जियां, पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, ग्रीन टी और जूस शामिल हैं। ब्रेड अवॉयड कर रही हूं। खाने में कॉर्ब्स नहीं ले रही हूं। इसके साथ ही मैं खूब पानी भी पीती हूं, इससे डिहाइड्रेशन की प्रॉब्लम नहीं होती है।
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स्क्रीन पर मुझे हमेशा हैवी मेकअप में रहना होता है। जबकि मैं घर पर लाइट मेकअप प्रेफर करती हूं। सिर्फ मस्कारा और लिपस्टिक लगाती हूं। मस्कारे से मेरी आंखें हाईलाइट होती हैं और लिपस्टिक से मेरे लिप्स अट्रैक्टिव नजर आते हैं। इससे मेरा लुक हमेशा अच्छा नजर आता है।