Category: health-lifestyle

  • Cooking Hacks: अब प्याज से नहीं होगी पीड़ा अपनाएं यह टिप्स

    जीवन शैली : अगर आप कुकिंग किंग है, खाना बनाना आपका शौक है। लेकिन प्याज काटने से घबराते हैं, क्योंकि प्याज आपको बहुत रुलाता है तो यह खबर आपके मतलब की है। क्योंकि आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसा तरीका जिससे आप चाहें जितना प्याज काटें लेकिन आपकी आँखों से आंसू नहीं निकलेंगे।

     जानें प्याज काटने से क्यों निकलते हैं आंसू –

    प्याज के बिना सब्जी का कोई स्वाद ही नहीं है। जब लोग प्याज काटते हैं तो उनकी आँखों से आंसू निकलते हैं। आंसू निकलने का मुख्य कारण sy propanethial s oxide होता है। यह एक प्रकार की गैस है जो प्याज की कटिंग के समय निकलती है और हमारी आँखों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। 

    जानें ट्रिक की प्याज भी कटेगा और आंसू भी नहीं बहेगा –

    अगर आप प्याज काटने में बहुत रोते हैं तो आप प्याज काटते वक्त गॉगल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। गॉगल्स के उपयोग से आप प्याज काटने के दौरान आँखों से निकलने वाले आंसू से बच जाएंगे। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि आपकी आँखों तक प्याज से निकलने वाली sy propanethial s oxide गैस नहीं पहुंच पाएंगी। 

    इसके आलावा आप प्याज को दो टुकड़ो में काटकर अगर कुछ वक्त के लिए पानी में डालकर रख देते हैं तो जब आप प्याज काटेंगे तो आपकी आँखों से कभी भी आंसू नहीं निकलेंगे। 

    आप अगर प्याज की पीड़ा से बचना चाहते हैं तो आप प्याज को छीलकर अपने घर के फ्रिज में रख सकते हैं। प्याज को फ्रिज में रखने से उसके एन्जाइम्स उड़ जाते हैं और आपकी आँखों में प्याज नहीं लगता है। 

  • Chest Pain Treatment:अचानक Chest Pain के हो सकते हैं कई कारण

    Chest Pain Treatment:  सीने में अचानक दर्द उठने के वैसे तो बहुत सारे कारण हो सकते हैं, लेकिन इसे गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है. चेस्ट को नजरअंदाज करना आपको मुश्किल में डाल सकता है. सीने में दर्द होने का कारण सामान्य फिर हो सकता है और हार्टअटैक जितना गंभीर भी. ऐसे में अगर किसी व्यक्ति को अचानक दर्द पर होने लगे और डॉक्टर के पास पहुंचने में समय लग रहा है तो कारण पता करने कि बजाय पहले तुरंत मरीज को फर्स्ट एड देने के साथ ही तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचाएं. अलग-अलग चेस्ट पेन के लिए इलाज अलग-अलग हो सकते हैं. आज आपको बताते हैं तकलीफ  के हिसाब से इनिशियल ट्रीटमेंट का तरीका.

     इसलिए हो सकता है सीने में दर्द, कैसे करें इलाज

    हार्ट अटैक

    • चेस्ट के साथ साथ कंधे, बाहें, पीठ, जबड़े तक दर्द जा रहा हो तो वो हार्ट अटैक का दर्द भी हो सकता है. ऐसी  सिचुएशन में एस्पिरिन चबाई जा सकती है, जो  ब्लड क्लोटिंग होने से रोकती है.
    • आस पास कोई मौजूद हो तो CPR दे सकता है. इसमें चेस्ट को हाथ से प्रेशर दे कर बार बार दबाना चाहिए.
    • अगर पहले भी ऐसा हो चुका है और डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन है तो नाइट्रो ग्लिसरीन भी ले सकते हैं.

    एनजाइना-

    जब दिल में खून कम पहुंचता है तब सीने में जो दर्द महसूस होता है उसे एनजाइना कहते हैं. इसमें डॉक्टर की सलाह लेना ही बेहतर विकल्प है.

    लंग्स में ब्लड क्लोटिंग होना

    फेफड़ों में खून का थक्का जमता है तो उसे पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहते हैं. इसमें सांस लेने में तकलीफ, ज्यादा पसीना आना, कफ में खून आना, बेहोशी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. इस कंडीशन में भी डॉक्टर से संपर्क करना ठीक होगा.

    प्लूरिसी के साथ निमोनिया

    निमोनिया में छाती में दर्द के अलावा कंपकंपी आ सकती है और बुखार के साथ कफ भी हो सकता है. प्लूरिसी में लंग्स के आसपास की मेंबरेन में सूजन आ जाती है. जिससे चेस्ट पेन जैसा महसूस होता है. इस तरह का चेस्ट पेन थोड़ी देर सांस रोकने और दर्द वाली जगह पर प्रेशर देने से ठीक हो जाता है.

  • Relationships: स्त्री-पुरुष एक ही सिक्के के पहलु तो समाज में पुरुष क्यों अधिक शक्तिशाली

    जीवन शैली: स्त्री और पुरुष एक दूसरे के पूरक हैं।  इस सृष्टि की कल्पना बिना स्त्री या पुरुष के नहीं की जा सकती। जब स्त्री और पुरुष का मिलना होता है तो सृष्टि का कालचक्र आगे बढ़ता है। ईश्वर ने स्त्री और पुरुष को समान भाव से बनाया है, दोनों को एक दूसरे के प्रति समर्पित रहने की कला से सुशोभित किया। दोनों को एक दूसरे का पूरक बताया। लेकिन जब स्त्री का जन्म हुआ तो उसे धरा पर पुरुष से कमजोर समझा गया। ईश्वर ने जिस स्त्री-पुरुष को एकल भाव से बनाया उस स्त्री के साथ धरा पर दोहरा व्यवहार होने लगा। पुरुष स्त्री को स्वयं से कम आंकने लगे, उन्हें अपने उपभोग की वस्तु समझने लगे, जिस स्त्री की कोख से जन्म लिया उस स्त्री को दबाने लगाता है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि पुरुष स्त्री को स्वयं को समर्थवान और स्त्री को अपने पैर की जूती मानने लगे। 

    क्यों पुरुष के अधीन हुई स्त्री :

    हमारा देश राजा महाराजाओं का देश रहा है। पुरुष सदैव से सत्ता पर प्रभावी रहा है। स्त्री को भले ही देवी के रूप में पूजा गया है लेकिन स्त्री को कभी भी सिंघासन सौपने के लिए समाज से समर्थन नहीं दिया। जब पुरुष को सत्ता मिली और स्त्री को घर के कामकाज की जिम्मेदारी तो इसने एक संकीर्ण सोच को जन्म दिया। हर किसी के मन में यह भाव उत्पन्न हो गया कि स्त्री सिर्फ घर के काम काज करने के लिए बनी है। समय बीतता गया और यह सोच भारत के पुरुषों पर प्रभावी हो गई। 

    ऐसा नहीं था की स्त्री किसी काम को करने में पुरुष से कम थी।  लेकिन कुछ सत्तावर्गीय पुरुष ऐसे थे जो अपने हाथ से शक्ति नहीं जाने देना चाहते थे। उन्हें यह भय सताता रहता था कि यदि स्त्री उनके ऊपर सत्ता करेगी तो पुरुष के पौरुष पर प्रहार होगा,उसके मन से हमारा भय मिट जाएगा और समाज में एक ऐसे युग का प्रारम्भ होगा जहां स्त्री स्वयं को पुरुष के बराबर समझेगी। 

    समय बदला और स्त्री को सम्मान मिलना शुरू हुआ। हर बार स्त्री ने आपने पराक्रम से पुरुष को चकित कर दिया। जब १८५७ का स्वतंत्रता संग्राम हुआ तो महारानी लक्ष्मी बाई ने अंग्रेजो को धूल चटाई। उनके पराक्रम का लोहा हर कोई मानता है। लेकिन जब उनकी विजय गाथा गाई जाती है तो कहा जाता है खूब लड़ी मर्दानी वो थी झांसी वाली रानी। 

    रानी लक्ष्मी बाई की वीर गाथा में मर्दानी शब्द का उपयोग यह बताता है कि हमारा समाज कितना पुरुष प्रधान है एक स्त्री के पराक्रम की सराहना भी पुरुष यानि मर्दाना शब्द से कर रहा है। 

    क्यों नहीं खत्म होता पुरुष प्रधान समाज:

    समाज आज भी पुरुष प्रधान है। समाज में स्त्री को लेकर हीन भाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। प्रत्येक अनुचित की जिम्मेदार आज भी स्त्री है। स्त्री के साथ हो रहे इस दुर्व्यवहार का कारण सिर्फ पुरुष नहीं है अपितु स्त्री भी स्त्री के साथ दोहरा वर्ताव करती है। 

    पुरुष स्त्री को स्वयं से आगे बढ़ता नहीं देख सकता क्योंकि पुरुष यह जनता है कि समाज इसे क्रांति के रूप में देखेगा और पुरुष का वर्चस्व समाप्त होगा, स्त्री पुरुष के बराबर में खड़ी होगी, तो पुरुष उसे अपने मुताबिक नहीं हांक सकेगा और वह तार्किक होकर पुरुष से सवाल कर सकेगी। 

    वही पुरुष प्रधान समाज न खत्म होने का एक कारण समाज की स्त्रियां भी हैं, ये स्त्रियां समाज में किसी भी आगे बढ़ती स्त्री के मार्ग में रोड़ा बनती हैं, उसके चरित्र पर सवाल करती हैं उसके साथ अनुचित व्यवहार करती हैं और उसे समाज से पृथक  करने के लिए अपनी आवाज बुलंद करती हैं। 

  • How to Increase Your Hemoglobin : इन चार चीजों को खाने से बढ़ेगा रक्त

    How to Increase Your Hemoglobin : जीवन के लिए जैसे भोजन, पानी, वायु आवश्यक है ठीक उसी तरह शरीर के लिए हीमोग्लोबिन आवश्यक है। बिना हीमोग्लोबिन के किसी भी सजीव के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। मनुष्य हो या जानवर सभी के शरीर में रक्त का संचरण होता है। हीमोग्लोबिन का निर्माण आयरन से होता है। हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है यदि शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाए तो व्यक्ति अस्वस्थ रहता है। एक सामान्य व्यक्ति के शरीर में 14  ग्राम प्रति डेसीलीटर हीमोग्लोबिन होना आवश्यक है। 

    लेकिन मनुष्य की दिनचर्या में आज इतना परिवर्तन आ गया है कि वह अपने खान-पान का ध्यान नहीं रख पाते हैं। जिसके चलते उसके शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है और उसे अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं। वही आज हम आपको कुछ ऐसी खाने की चीजों के विषय में बताने जा रहे हैं जिनका अगर आप रोजाना सेवन करते हैं तो आपके शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी कभी नहीं होगी। 

    जानें किन चीजों को खाने से बढ़ता है हीमोग्लोबिन –

    पालक – 

    पालक को खाना लोग कम पसंद करते हैं। लेकिन पालक आयरन भरपूर होता है अगर आप रोज सुबह खाली पेट पालक का जूस पीते हैं तो यह आपके शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाता है। पालक को खाली पेट खाने से आपके चेहरे की चमक भी बढ़ती है। कम हीमोग्लोबिन की स्थिति में डॉक्टर मरीज को पालक खाने की सलाह देते हैं। 

    राजमा-

    राजमा एक तरह का फॉलेट है जिसमें हीमोग्लोबिन पाया जाता है। यह  विटामिन बी भी कहलाता है। जब व्यक्ति की हीमोग्लोबिन कोशिकाएं विकसित नहीं होती और रक्त का संचरण शरीर में व्यववस्थित तरीके से नहीं हो पाता तो डॉक्टर मरीज को  विटामिन बी से युक्त सब्जियां खाने की सलाह देते हैं। राजमा में भरपूर मात्रा में  विटामिन बी पाया जाता है। 

    रसदार फल –

    रसदार फल विटामिन सी से भरपूर होते हैं। अगर आप खाने के साथ संतरा, मौसम्मी, नीबू, स्ट्राबेरी और खट्टे फल खाते हैं तो आपकी स्किन में ग्लो आएगा व आपके शरीर में रक्त का प्रवाह सही तरीके से होगा। खट्टे फलों के सेवन से व्यक्ति के शरीर में आयरन की कमी नहीं होती है। 

    शकरकंद –

    हीमोग्लोबिन के लिए विटामिन ए सबसे अच्छा माना गया है। यह हीमोग्लोबिन को ऑब्जर्व करता है। आगर आप रोजाना विटामिन ए युक्त सब्जी और फल खाते हैं तो आपके शरीर में हीमोग्लोबिन तेजी से बढ़ता हैं। शकरकंद में विटामिन ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है यह स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर विकल्प है। 

  • J Robert Oppenheimer: एटॉमिक बम के जनक थे ओपेनहाइमर

    Oppenheimer realationship With BhagwatGita: इस समय जुलियस रॉबर्ट ओपनहीमर लोगों की जुबां पर हैं. इन्हें परमाणु बम बनाने का जनक माना जाता है. अब सवाल यह है कि इनके नाम की इतनी चर्चा क्यों हो रही है. इसके साथ ही भूतपूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू से इनका क्या कनेक्शन था. इस तरह की खबरें हैं कि 1954 में जब ओपनहीमर के न्यूक्लिर हथियारों वाले बयान पर आलोचना हुई तो उस समय जवाहर लाल नेहरू ने भारतीय नागरिकता देने की पेशकश की थी. अमेरिकन प्रोमेथियस: द ट्रायम्फ एंड ट्रेजेडी ऑफ जे रॉबर्ट ओपेनहाइमर पुस्तक के सह-लेखक काई बर्ड ने साक्षात्कार में एक मीडिया हाउस को बताया.किताब की लेखिका बर्ड का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि ओपेनहाइमर ने इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया होगा क्योंकि वह एक गहरे देशभक्त अमेरिकी थे. बर्ड ने कहा कि अमेरिका के महानतम वैज्ञानिक के रूप में मनाए जाने के नौ साल बाद ओपेनहाइमर को कंगारू अदालत में लाया गया और एक आभासी सुरक्षा सुनवाई में उनकी सुरक्षा भी छीन ली गई. वो मैक्कार्थी विच-हंट के मुख्य शिकार बन गए. रिपब्लिकन सीनेटर जोसेफ आर मैक्कार्थी सार्वजनिक रूप से सरकारी कर्मचारियों पर विश्वासघात का आरोप लगाने और उन पर मुकदमा चलाने के लिए जाने जाते थे. आश्चर्य की बात तो यह कि जब सरकार अमेरिका में साम्यवाद का मुकाबला कर रही थी.

    1954 में ओपेनहाइमर में आया बड़ा बदलाव-

    ओपेनहाइमर को फासीवाद के उदय का डर था. वह यहूदी वंश के थे लेकिन झुकाव नहीं था. उन्होंने जर्मनी से यहूदी शरणार्थियों को बचाने में मदद के लिए धन दिया। उन्हें डर था कि जर्मन भौतिक विज्ञानी हिटलर को परमाणु बम देने जा रहे हैं जिससे हिटलर द्वितीय विश्व युद्ध जीतने में सक्षम होगा और यह एक भयानक परिणाम होगा. दुनिया भर में फासीवाद की जीत होगी। इसलिए उन्हें लगा कि यह परमाणु बम आवश्यक था।”बर्ड ने कहा कि अगस्त 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम विस्फोटों के बारे में ओपेनहाइमर के मन में मिलीजुली भावनाएं थीं। 1945 के वसंत तक, जर्मनी हार गया था। और उस वसंत में कुछ भौतिकविदों और वैज्ञानिकों ने गैजेट के भविष्य पर चर्चा करने के लिए एक आकस्मिक बैठक की और पूछा कि हम सामूहिक विनाश के इस भयानक हथियार को बनाने के लिए इतनी मेहनत क्यों कर रहे हैं. हम जानते हैं कि जर्मन हार गए हैं और हिटलर मर गया है. जापानी शायद बम परियोजना नहीं कर सकते हैं? 

    भगवद गीता से खास कनेक्शन

    बर्ड ने कहा कि ओपेनहाइमर को हिंदू रहस्यवाद और भगवद गीता के प्रति आकर्षित हुए. उन्होंने बर्कले विश्वविद्यालय के एकमात्र संस्कृत विद्वान आर्थर राइडर को संस्कृत में पढ़ाने के लिए कहा ताकि वह मूल रूप में गीता पढ़ सकें.और वह प्रसिद्ध पंक्ति जिसका उपयोग उन्होंने यह वर्णन करने के लिए किया था कि जब उन्होंने ट्रिनिटी विस्फोट परमाणु हथियार का पहला विस्फोट देखा था तो उन्होंने सोचा था कि वो मृत्यु हैं, दुनिया के विनाशक हैं. कुछ संस्कृत विद्वान, जैसा कि मैं इसे समझता हूं कि अधिक सटीक अनुवाद होगा ‘मैं समय हूं, दुनिया का विनाशक’. वह एक क्वांटम भौतिक विज्ञानी थे, इसलिए वह समय और स्थान को समझने की कोशिश कर रहे थे. ये ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें गीता कुछ स्तर पर संबोधित करती है।

  • World Brain Day 2023: क्यों मनाया जाता है ‘वर्ल्ड ब्रेन डे’

    World Brain Day 2023: हर साल की तरह इस साल भी 22 जुलाई के दिन टवर्ल्ड ब्रेन डेट पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है. इस खास दिन मनाने के पीछ सबसे कारण है कि दुनियाभर के लोगों को दिमाग संबंधी बीमारी और स्थितियों के बारे में जागरूकता फैलाया जा रहा. एक सेहतमंद इंसान के लिए दिमाग का हेल्दी रहना कितना जरूरी है इस खास अवसर को अलग-अलग अंदाज में पूरी दुनिया में सेलिब्रेट किया जाता है. 

    वर्ल्ड ब्रेन डे की स्थापना

    वर्ल्ड ब्रेन डे की स्थापना 2014 में ‘वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजी’ द्वारा की गई थी. यह एक संस्था है जो 145 से अधिक नैशनल न्यूरोलॉजिकल समाजों का प्रतिनिधित्व करती है. प्रत्येक साल ‘फेडरेशन विश्व मस्तिष्क दिवस’ पर जश्न मनाने के लिए एक थीम चुनता है, जैसे स्ट्रोक, मानसिक स्वास्थ्य, उम्र बढ़ना या मिर्गी आदि. इस साल की थीम “मस्तिष्क स्वास्थ्य और विकलांगता: किसी को भी पीछे न छोड़ें” है और इसे न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के बारे में बेहतर शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने के लिए चुना गया है.

    जागरूकता फैलाने के लिए चुना गया ये थीम

    इस दिन का महत्व दो गुना है. सबसे पहले, यह तंत्रिका संबंधी विकारों और स्थितियों पर ध्यान आकर्षित करता है जिनका अक्सर निदान नहीं किया जाता है या इलाज नहीं किया जाता है. दूसरे, यह लोगों को इन विकारों के बारे में और अधिक जानने का अवसर देता है और उन्हें कैसे प्रबंधित या इलाज किया जा सकता है.

    वर्ल्ड ब्रेन डे 2023 के उपलक्ष्य में दुनिया भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. न्यूरोलॉजिकल स्थितियों पर केंद्रित व्याख्यान, सेमिनार और कार्यशालाएं होंगी और साथ ही न्यूरोलॉजिकल विकारों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालने वाली फिल्म स्क्रीनिंग और कला प्रदर्शनियां जैसी गतिविधियां भी होंगी. इसके अलावा, विभिन्न संगठन न्यूरोलॉजिकल देखभाल से संबंधित चिकित्सा सेवाओं पर छूट की पेशकश कर रहे हैं.

    ‘वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजी’ ने वर्ल्ड ब्रेन डे 2023 के उपलक्ष्य में एक वेबसाइट और सोशल मीडिया अभियान भी स्थापित किया है. इसमें न्यूरोलॉजिकल विकारों की जानकारी, उन्हें प्रबंधित करने के सुझाव और इस दिन होने वाली घटनाओं के बारे में विवरण शामिल हैं.

  • Health Benefits Of Fig: अंजीर खाएं और कई बीमारियों से मुक्त हो जाएं

    Health Benefits Of Fig: सूखे मेवा हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद साबित होते हैं। अगर आप रोजाना सूखे मेवा का सेवन करते हैं तो इससे आपके शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। वैसे तो सभी मेवा शरीर के लिए अच्छे होते हैं लेकिन अगर आप अंजीर का रोजाना सेवन करते हैं तो यह आपके लिए संजीवनी बूंटी साबित हो सकता है क्योंकि अंजीर में कॉपर, मैग्नीशियम, पोटैशियम, राइबोफ्लेविन, थियामिन, विटामिन बी6, विटामिन K पाया जाता है जो स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छा होता है। 

    अंजीर एक ऐसा मेवा है जो स्वाद में कुछ ख़ास नहीं होता है लेकिन सेहत के लिए यह सबसे अच्छा होता है। अंजीर में एंटीकैंसर, एंटीऑक्‍सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी, फैट लोवरिंग के गुण पाए जाते हैं। अंजीर एंडोक्राइन, रेस्पिरेटरी, डायजेशन, प्रजनन और इम्‍यूनिटी को मजबूत करता है। अगर डायबिटीज का मरीज रोजाना अंजीर का सेवन करता है तो उसका शुगर लेवल कंट्रोल रहता है। 

    इसमें फाइबर और प्रीबायोटिक पाया जाता है जो पेट के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। इससे कब्ज की समस्या दूर होती है। व्यक्ति का हृदय उम्दा तरीके से रक्त का संचरण करता है। ह्रदय घात के चांस कम होते हैं और अगर किसी महिला को पीरियड्स में दर्द होता है तो अंजीर के सेवन से इस दर्द में राहत मिलती है। 

  • Friendshipday: अपने दोस्तों के लिए करें यह 3 काम, फ्रेंडशिप डे बन जाएगा यादगार

    जीवन शैली: दोस्ती इस दुनिया का सबसे खूबसूरत रिश्ता है। दोस्तों के बीच जाति धर्म अमीरी-गरीबी का भाव नहीं होता। दोस्त एक दूसरे से भावनाओं के बंधन से बंधे होते हैं। जब कोई किसी की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाता है तो वह स्वयं को अपने मित्र के प्रति समर्पित रखता है। वैसे तो दोस्ती को सेलेब्रेट करने का कोई दिन नहीं होता क्योंकि दोस्त के साथ हर दिन खूबसूरत होता है। लेकिन अगस्त के प्रथम रविवार को प्रत्येक वर्ष फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। इस साल फ्रेंडशिप डे रविवार को पड़ रहा है। 

    यह दिन मित्रों को समर्पित होता है लोग अपने प्रिय मित्रो के साथ घूमने जाते हैं। तो कई लोग अपने दोस्तों को बेहतरीन तोहफा देकर उनको खुश करने का प्रयास करते हैं। वही आज हम आपको कुछ ऐसे विशेष तोहफों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें यदि आप अपने मित्रो को देते हैं तो यह आपके दोस्त को आपसे भावनात्मक रूप से जोड़ देगा। तो आइये जानते हैं –

    वीडियो स्लाइड –

    अगर आप और आपका मित्र कई वर्षों से एक साथ हैं तो आपके पास आपकी और उसकी कुछ बेहतरीन तस्वीरें जरूर होंगी। आपको अपने मित्र को एक अच्छा सा वीडियो स्लाइड बनाकर देना चाहिए। इसे वह जब देखेगा तो उसका आपके प्रति भावनात्मक जुड़ाव होगा और वह अपनी पुरानी यादों को याद करके मुस्कुराएगा। 

    वक्त –

    कई मित्र ऐसे होते हैं जो एक दूसरे के दिल के काफी करीब होते हैं लेकिन वह कई सालों तक एक दूसरे से नहीं मिल पाते हैं। आप अगर अपने मित्र से कई वर्षों से नहीं मिले हैं तो आपको उनके लिए वक्त निकालना चाहिए और उनसे मिलने के लिए जाना चाहिए। जब आप वक्त निकाल कर उससे मिलने जाएंगे तो वह आपको देखकर खुश होगा और आपके प्रति उसका झुकाव बढ़ेगा। 

    बचपन की स्टॉल पर चाय –

    कुछ दोस्त बचपन में अपनी पॉकेट मनी से पैसा बचाकर अपने दोस्तों के साथ चाय की टापरी पर जाते होंगे। अगर आप भी ये करते थे तो आप एक बार पुनः अपने दोस्त के साथ वही जाएं। जब आप वहां जाएंगे तो इससे आपकी और आपके दोस्त की बचपन की सभी यादें ताजा होंगी और आप दोनों का बांड और मजबूत होगा।

  • क्या होती है बियर टैनिंग ?

    हाल ही में सोशल मीडिया पर ‘बियर टैनिंग’ खूब चलन में हैं. एक ब्यूटी टिप के तौर पर इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है और इसे आजमाकर सोशल मीडिया पर साझा करने का चलन निकल पड़ा है. फोर्ब्स के मुताबिक जहां कुछ लोगों को दावा है कि शरीर पर बियर लगाकर सनबाथिंग करने से टैनिक के बढ़िया नतीजे मिलते हैं, इससे त्वचा में स्थित रंग बदलने के जिम्मेदार तत्व मेलेनिन सक्रिय होता है जिससे ज्यादा टैनिंग होती है. अब विशेषज्ञों ने इस बियर टैनिंग के उपयोग और उससे संबंधित जोखिमों को लेकर चिंता जताते हुए इसके खतरों से आगाह कर रहे हैं. आइए जानते हैं कि यह बियर टैनिंग क्या है और इससे किस तरह के खतरे हो सकते हैं.

    क्या होती है टैनिंग
    पहले टैनिंग को समझें क्या यह क्या है. सरल शब्दों में कहें तो शरीर की त्वचा को सूर्य की चमकीली रोशनी का सामना कराना है जिससे त्वचा के रंग में कालापन आ जाता है. यह प्रक्रिया आमतौर पर सनबादिंग के दौरान होती है जब लोग सूर्य की रोशनी के जरिए शरीर को विटामिन डी ग्रहण करने का मौका देते हैं. यह काम अधिकांश देशों में समुद्र किनारों के बीच पर ज्यादा लोकप्रिय है.

    टैनिंग फैशन का हिस्सा
    तेज धूप में सनबाथ या धूप स्नान करने से माना जाता है कि इससे सूर्य की किरणें शरीर की त्वचा संवदन को जगा कर त्वचा कोशिकाओं में अच्छे रासायनिक बदलाव लाती हैं. भले ही धूप स्नान के फायदे हों या ना हों, लेकिन इससे त्वचा रंग बदलना फैशन कि हिस्सा है और बहुत से लोग खास तौर पर महिलाएं टैनिंग के लिए ही खास तौर पर धूप स्नान करती हैं  और इस टैनिंग के प्रभाव को बढ़ाने या कारगर करने के लिए कई उपाय भी अपनाती हैं.

    तो फिर क्या होती है बियर टैनिंग
    अब टैनिंग के लिए बियर टैनिंग की तकनीक की लोकप्रियता विशेषज्ञों को चिंता में डाल रही है और वे इसीलिए इसके लिए चेता रहा हैं. आमतौर पर टैनिंग के अच्छे नतीजे के लिए लोग शरीर पर किसी तरह का तेल या मॉस्चराइजर जैसा कुछ लगाते हैं जिससे टैनिंग बहुत बढ़िया हो. लेकिन जब इस तेल या क्रीम की जगह बियर को शरीर पर लगा कर धूप स्नान कर टैनिंग की जाए तो वह बियर टैनिंग कहलाती है.

    क्या फायदा बताया जा रहा है?
    बियर टैनिंग का समर्थन करने वाले मानते हैं कि हॉप इन्फ्यूज्ड बेवरेज यानि पेय पदार्थों में मेलेनिन पैदा करने के जादुई गुण होते हैं.  जिससे त्वचा जल्दी और समान रूप से टैन होती है. कुछ इसके लिए चार सरल चरणों की प्रक्रिया भी सुझा रहे हैं, सबसे सस्ती बियर लें, पानी में मिलाएं, उससे स्नान करें और फिर खुद को धूप मे सुखाएं.

    चिंता की बात क्यों
    लेकिन दुनिया भर के त्वचा रोग विशेषज्ञ इस चलन पर चिंता जता रहे हैं और लोगों को सावधान कर रहे हैं. 20 लाख फॉलोअर वाले सर्टिफाइड डर्मैटोलॉजिस्ट डस्टिन पोर्टेला का कहना है कि टैनिंग को बढ़ाने या तेज करने वाली कोई भी प्रक्रिया त्वचा के लिए हानिकारक हो सकती है और त्वचा के कैंसर तक के लिए जिम्मेदार हो सकती है. विशेषज्ञ साफ तौर पर सुझाते है कि टैनिंग से पहले केवल सनस्क्रीन लगाना ही सही होगा ना कि एल्कोहल.

    एल्कोहल या बियन नुकसानदयाक क्यों
    विशेषज्ञों का कहना है कि अलकोहल त्वचा से प्राकृतिक तेल और नमी बाहर निकाल देता है जिससे त्वचा सूखी हो जाती है और धूप से उसे ज्यादा नुकसान होता है. बियर का उपयोग त्वचा में जलन, और एलर्जी वाले रिएक्शन दे सकता है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में प्राइमस सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की डर्मेटोलॉजिस्ट, कॉस्मेटोलॉजिस्ट और लेजर सर्जन डॉ नव्या हांडा ने बताया कि सनबाथिंग के साथ  बियर उपयोग सुरक्षित नहीं है.

    बियर के उपयोग के त्वचा को सीधे तौर पर भी कई तरह के नुकासन हो सकते हैं. इससे त्वचा की संवेदनशील का बढ़ सकती है जिसकी वजह अल्कहोल का होना होता है. अल्कोहल त्वचा को सूर्य की पराबैंगनी किरणों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाता है. इससे त्वजा जल्दी शुष्क भी हो जाती है बियर या अल्कहोल शरीर को डीहाइड्रेट करने के लिए पहले से ही जाने जाते हैं. इससे शरीर पर लगी प्राकृतिक तेल की परत हट जाती है और त्वचा सूर्य की सीधी किरणों का सामना करती है. और सबसे जरूरी बात ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि इससे बेहतर टैनिंग होती है बल्कि त्वचा में जलन का खतरा बढ़ जाता है.

  • High BP की दिक्कत है तो इन चीजों से बना लें दूरी

    High BP​ Control Tips: वैसे तो हाई ब्लड प्रेशर का कोई स्थायी इलाज नहीं है. लेकिन इसे दवाओं और कुछ चीजों के परहेज से कंट्रोल किया जा सकता है. नॉर्मल ब्लड प्रेशर 120/80 माना जाता है, लेकिन 130/90 भी चिंताजनक नहीं है. इससे ऊपर जाने पर ये सेहत पर बुरा असर डालता है. इसे हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है. बता दें, हाई बीपी का अगर वक्त पर इलाज न कराया जाए तो यह हार्ट को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए इसके मरीजों को कई चीजों से परहेज करना जरूरी है. हम आपको बताते हैं किन 6 चीज से दूर रहना चाहिए.

    हाई बीपी के मरीज न खाएं ये चीजें

    1. कैफीन- हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए यह जरूरी है कि वह कैफीन (Caffeine) से दूर रहें. उनके लिए कॉफी और सोडा जैसे ड्रिंक नुकसानदेह साबित हो सकती हैं. चाय से भी परहेज करें तो बेहतर होगा.

    2. मसाले- ज्यादा स्पाइसी फूड हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. खाने में इस्तेमाल होने वाले मसाले ब्लड प्रेशर की समस्या को और बढ़ा सकते हैं. ध्यान रहे, कम मसालों वाला खाना ही खाएं.

    3. शुगर- हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) के मरीजों को शुगर या मीठी चीजों से भी दूरी बनानी चाहिए. ज्यादा शुगर खाने से मोटापा बढ़ सकता है, जो हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए नुकसानदेह है.

    4. नमक- ज्यादा नमक (Salt) हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए जहर से कम नहीं. नमक का ज्यादा सेवन उच्च रक्तचाप और हार्ट से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है.

    5. अचार – किसी भी फूड आइटम को बचाए रखने के लिए नमक की जरूरत होती है. नमक खाने को जल्दी सड़ने से बचाता है. नमक वाली सरंक्षित चीजों का सेवन हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए परेशानी का कारण हो सकता है. इसमें सबसे पहले तो अचार (Pickles) ही आता है. इसलिए इसके सेवन से बचें.