Category: health-lifestyle

  • पुरुष महिलाओं की ऐसी छाती पर हैं फ़िदा

    जीवन शैली : हमने अक्सर सुना होगा कि उस आदमी की पार्टनर कितनी खूबसूरत है। वह दोनों साथ में कितने अच्छे लगते हैं। लेकिन कई बार हम ऐसे पार्टनर को देखते हैं जिसमे स्त्री बहुत अधिक खूबसूरत नहीं होती है लेकिन उसका पार्टनर उसपर जान छिड़कता है। असल में ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि पुरुष को स्त्री की सुंदरता से अधिक उसके शरीर की बनावट पसंद आती है। वहीं ब्रिटेन में पुरुष की स्त्री को पसंद करने के परिपेक्ष्य में हुई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि कोई भी पुरुष स्त्री के सौंदर्य को नहीं पसंद करता है। 

    अमेरिका में हुई रिसर्च के मुताबिक – ज्यादातर पुरुष स्त्री के सौंदर्य पर नहीं मरते, पुरुषों को स्त्री का सौंदर्य नहीं उनके शरीर पसंद आता है। 100 लोगों पर हुई रिसर्च के मुताबिक – पुरुष को स्त्री का गोरा, काला रंग नहीं भाता वह उसे जैसी है वैसी स्वीकार लेते हैं यदि उनके शरीर की बनावट उनकी आँखों को आकर्षित करती है। 

    रिसर्च से जुड़े पुरुषों से जब यह पूछा गया कि उनको स्त्रियों का कैसा शरीर  आकर्षित करता है तो वह कहते हैं जिस स्त्री की हिप कम होती है, हाइट मीडियम होती है, वेट कैसा भी चलेगा लेकिन उसकी छाती छोटी नहीं होनी चाहिए क्योंकि कम छाती स्त्री के सौंदर्य को कम करता है व सम्भोग के दौरान पुरुष को परम सुख की अनुभूति नहीं करवा पता है। पुरुषों का मनना है बड़ी छाती वाली स्त्रियां सिर्फ ईमानदार नहीं होती बल्कि वह सेक्स के दौरान सबसे ज्यादा सुख देती हैं। ऐसी स्त्रियां सेक्स में बराबरी की भागीदारी रखती हैं और पुरुष को संतुष्ट करने का गुण रखती हैं। 

    शोध में यह भी दावा किया गया है कि पुरुष बड़ी छाती वाली स्त्री के साथ इसलिए भी रहना पसंद करते हैं क्योंकि उनके साथ वह सिर्फ अपनी इन्द्रियों को शांत नहीं करते अपितु खुलकर रोमांस भी कर पाते हैं। 

  • कॉन्डोम और सेक्स, दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे

    डेस्क रिपोर्ट :

    कॉन्डोम और सेक्स, दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं” यह कहना अब गलत नहीं माना जा सकता है। दरअसल, कॉन्डोम का जिक्र होते ही सेक्स का ख्याल आता है और सेक्स की बात करते हैं, तो कॉन्डोम का उपयोग कैसे करें यह जानना बहुत जरूरी होता है।सेक्स के दौरान कॉन्डोम का उपयोग कैसे करें, इसका ध्यान रखना इसलिए भी बहुत जरूरी है कि यह अनचाहे गर्भ से सुरक्षित रखता है। साथ ही, कॉन्डोम का उपयोग करने से यौन जनित रोगों से भी सुरक्षित रहा जा सकता है। हालांकि, सेक्स के दौरान कॉन्डोम का उपयोग पूरी तरह से तभी सुरक्षित हो सकता है, जब कॉन्डोम का सही इस्तेमाल किया जाए। अगर कॉन्डोम के इस्तेमाल में जरा भी चूक की जाए, तो यह कई समस्याओं का कारण भी बन सकता है।

    • कॉन्डोम रबड़ का बना हुआ एक खोल (कवर) होता है। जिसका इस्तेमाल पुरुष लिंग को ढकने के लिए करते हैं। इससे सेक्स के दौरान पुरुष अपने शुक्राणुओं को महिला के गर्भाशय में प्रवेश करने से रोक सकते हैं।
    • इसी तरह, महिलाओं के लिए भी कॉन्डोम बने हुए हैं, जिसे योनि के अंदर फिट किया जा सकता है।
    • पुरुष कॉन्डोम का उपयोग एक तनावयुक्‍त लिंग पर ही कर सकते हैं।
    • अधिकतर कॉन्डोम लेटेक्‍स के बने होते हैं।
    • अगर कॉन्डोम का उपयोग ठीक प्रकार से किया जाए, तो यह गर्भधारण के जोखिम को 85 फीसदी से 98 फीसदी तक रोक सकता है।
    • एक कॉन्डोम का इस्तेमाल सिर्फ एक बार के लिए ही किया जा सकता है। एक ही इस्तेमाल के बाद यूज किए गए कॉन्डोम का उचित तरीके से निपटारा करना चाहिए।
    • जिन लोगों को लेटेक्‍स से एलर्जी है, वे पॉ‍लीयुरथेन से बने कॉन्डोम का उपयोग कर सकते हैं।

    सही कॉन्डोम का इस्तेमाल करना आनंदमय संभोग के लिए बेहद जरूरी होता है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि हर प्रकार के कॉन्डोम से सामान्य परिणाम ही आते हैं। जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है। अपने लिए बेस्ट कॉन्डोम का ऐसे करें चयन –

    • हमेशा अच्छी क्वालिटी और भरोसेमंद ब्रांड का ही कॉन्डोम खरीदें।
    • कॉन्डोम खरीदने से पहले उसके एक्सपायर होने की तारीख जांचें।
    • सही साइज चुनें, कॉन्डोम को चुनते समय अधिक भावनात्मक न हो और बड़े साइज को बेहतर न समझें। सही तरह से फिट होने वाला कॉन्डोम सबसे प्रभावशाली होता है। अधिक बड़ा या बहुत छोटा कॉन्डोम सेक्स के दौरान बाहर निकल सकता है और उसके फटने की आशंका भी ज्यादा रहती है।
    • प्रैक्टिस मेक्स अ मैन परफेक्ट – कॉन्डोम को तुरंत इंटरकोर्स करते समय लगाने की बजाए कुछ समय पहले उसे पहनने की कोशिश करें। अकेले में कुछ बार कॉन्डोम पहनने की कोशिश करें और सीखें कि उसे कैसे और कितने समय में पहना जा सकता है।
    • अन्य प्रकार के कॉन्डोम को चुनें और ट्राय करें। ज्यादातर लोग लेटेक्स कॉन्डोम का इस्तेमाल करते हैं और उसके अलावा अन्य विकल्प की ओर ध्यान भी नहीं देते। लेटेक्स सबसे अधिक बिकने वाला कॉन्डोम का मटेरियल है। लेकिन इससे कई लोगों को एलर्जी भी होती है, जिसके चलते लैम्बस्किन कॉन्डोम भी बनाए जाते हैं। अगर आपको सेक्स के दौरान जलन होती है, तो अन्य प्रकार के कॉन्डोम का इस्तेमाल करें।
    • आप चाहें तो फ्री में भी कॉन्डोम ले सकते हैं। कई जगहों पर मौजूद स्थानीय हेल्थ डिपार्टमेंट फ्री कॉन्डोम प्रदान करते हैं।
    • कॉन्डोम को सही जगह पर रखें। कॉन्डोम को जेब, अपने पर्स या बाथरूम में न रखें। इसकी बजाए उसे ठंडी-सूखी जगह पर रखें, जहां सूर्य की सीधी किरणें न पड़ती हों। इसके साथ ही ध्यान रखें कि कॉन्डोम हीट, नमी और घर्षण के संपर्क में न आए।

    कॉन्डोम का उपयोग कैसे करें?

    • कॉन्डोम का पैक खोलने से पहले उसके लेबल पर लिखे गए निर्देशों को सावधानी से पढ़ें। कॉन्डोम का इस्तेमाल कैसे करना है, इसकी पूरी सटीक जानकारी पैक के लेबल पर दिया गया होता है।
    • कॉन्डोम का पैक बहुत ही सावधानी से खोलें।
    • पैक को हमेशा किनारों से खोलें।
    • पैक खोलने के लिए दांतों का इस्तेमाल न करें।
    • कॉन्डोम का इस्तेमाल करने से पहले कॉन्डोम के अगले और पिछले हिस्से की जांचें।
    • ऊपरी हिस्सा चिकनाई युक्त होगा, जबकि अंदर की तरफ रहने वाला हिस्सा सूखा होगा।
    • कॉन्डोम का पैक तभी खोलें जब लिंग में इरेक्शन हो।
    • अगर आपने कॉन्डोम को उल्टी तरफ से पहन लिया है, तो उसे दोबारा निकाल कर न पहनें। इससे गर्भधारण का जोखिम बढ़ सकता है क्योंकि, सेक्स के दौरान पुरुषों के लिंग से लगातार एक लिक्विड जिसे प्री-इजेक्यूलेशन (प्री-कम) कहा जाता है, निकलता रहता है, यह यौन संचारित बीमारियों (STDs) के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।
    • कॉन्डोम पहनते समय कॉन्डोम की निकली हुई टिप को दबा कर रखें, ताकि इससे कॉन्डोम के अंदर हवा न जाए।
    • कॉन्डोम पहनने के दौरान टिप को दबा कर उसे इरेक्ट पेनिस पर लगाएं। फिर कॉन्डोम रिंग को ऊपर की तरफ घुमाएं। इससे कॉन्डोम खुलता जाएगा और लिंग में फिट हो जाएगा।
    • स्‍खलन के बाद और पुरुष लिंग के मुलायम होने से पहले ही कॉन्डोम के रिम को पकड़ें और इसे सावधानीपूर्वक निकाल लें। कॉन्डोम को लिंग से हटाते समय रिम पकड़ कर ही रखें, नहीं तो पुरुष साथी का वीर्य बाहर निकल सकता है।
    • एक बार इस्तेमाल किए गए कॉन्डोम का उपयोग दोबारा न करें। इस्तेमाल किए जाने के बाद इसका सही तरीके से निपाटा करें। इसे पालतू जानवर या बच्चों की पहुंच से भी दूर रखें।
    • शारीरिक संबंध बनाने के दौरान अगर कॉन्डोम फट जाता है या फिसल जाता है, तो पुरुष साथी को तुरंत संभोग की क्रिया रोक देनी चाहिए। इसके बाद वो एक नए कॉन्डोम का उपयोग कर सकते हैं या गर्भ रोकने के दूसरे तरीकों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
    • अगर फटे हुए कॉन्डोम से पुरुष साथी का वीर्य महिला के योनि में प्रेवश कर जाता है, तो अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए महिला डॉक्टर की सलाह पर गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन कर सकती हैं। हालांकि, गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन बहुत ही कम करना चाहिए।
    • गर्भावस्था के जोखिम को रोकने और यौन संचारित रोगों के जोखिम को कम करने के लिए कॉन्डोम का उपयोग करना सबसे बेस्ट होता है।
    • कॉन्डोम का उपयोग करना बहुत ही आसान होता है।
    • कॉन्डोम का उपयोग करने के कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं होते हैं।
    • कॉन्डोम का उपयोग पुरुष और महिला दोनों ही कर सकते हैं।

  • स्त्री को हमेशा पहननी चाहिए ऐसी पैंटी

    जीवन शैली: स्त्रियों और पुरुष की शरीरिक बनावट अलग होने के साथ -साथ उनके उठने बैठने खाने और कपड़े पहनने के तरीके में भी काफी परिवर्तन देखने को मिलता था। स्त्रियों का शरीर ऐसा है कि यदि वह सही तरीके से कपडे न पहनें तो उनके शरीर को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ब्रा मानों स्त्री के लिए कम्पलसरी हो गई है। जानकारों का मानना है कि स्त्री यदि ब्रा नहीं पहनती है तो उसके ब्रेस्ट में कई समस्याएं हो सकती हैं। वहीं आज हम आपको यह बताने जा रहे हैं कि स्त्री को पैंटी कैसी पहननी चाहिए और अगर वह पैंटी नहीं पहनती है तो उससे क्या लाभ होते हैं। 

    जानें स्त्री को कैसे पहननी चाहिए पैंटी –

    वैसे तो मार्केट में कई डिजाइनर पैंटी मिल जाएगी। स्त्रियां बड़े शौक से इन पैंटी को खरीदती भी हैं और पहनती भी हैं। लेकिन क्या आपको यह मालूम है यह स्टाइलिश पैंटी आपके लिए सही नहीं होती हैं इससे आपको न कम्फर्ट मिलता है और न यह हेल्थ को आराम देती हैं। यदि आप पैंटी पहनती हैं तो आपको कॉटन की कट पैंटी पहननी चाहिए। पैंटी पर नीचे की साइड कोई डिजाइन न बना हो तो अधिक बेहतर रहेगा। इसके साथ ही महिलाओं को अधिक टाइट पैंटी पहनने से बचना चाहिए। 

    पैंटी न पहनने के लाभ –

    अगर महिलाएं पैंटी नहीं पहनती हैं तो उनकी यौनी का बेहतर विकास होता है और उनको सोने,उठने बैठने के आराम मिलती है। 

    पैंटी न पहनने से कई बीमारियों से महिलाएं बच जाती हैं। 

    पैंटी न पहनने से स्त्रियों के अंतरंग में सफाई रहती है। 

    नोट: पीरियड्स के दौरान स्त्रियों को पैंटी पहननी चाहिए, हालाकि इसमें सफाई रखने की आवश्यकता है यदि आप सफाई नहीं रखेंगे तो आपको यौन सम्बन्धित कई बीमारियों से जूझना पड़ सकता है। 

  • गर्मियों के मौसम में अंडरगारमेंट्स पहनते समय विशेष ध्यान दें

    डेस्क रिपोर्ट:

    गर्मियों में बीमारियां अधिक होने का खतरा रहता है। आज हम आपको बताएंगे कि आपको गर्मियों में स्वस्थ रहने के लिए अंडरगारमेंट्स से जुड़ी किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और साफ अंडरगारमेंट्स न पहनने से सेहत को क्या नुकसान हो सकता है। स्वस्थ रहने के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। साफ- सफाई हर चीज की होनी चाहिए। गर्मियों में विशेषकर अंडरगारमेंट्स की साफ- सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस मौसम में गर्मी की वजह से पसीना अधिक आता है जिस वजह से शरीर में गंदे बैक्टीरिया अपना घर बना लेते हैं, जिस वजह से कई तरहों की समस्याएं हो सकती हैंहमेशा साफ अंडरगारमेंट्स ही पहनने चाहिए। अगर आप साफ अंडरगारमेंट्स नहीं पहनते हैं तो आपको बैक्टीरिया से संक्रमण का खतरा रहता है, जिस वजह से आपको कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

    गर्मियों के मौसम में अंडरगारमेंट्स पहनते समय विशेष ध्यान दें। गर्मियों के मौसम में पसीना अधिक आता है, जिस वजह से बैक्टीरिया से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। गर्मियों में साफ अंडरगारमेंट्स ही पहनने चाहिए।अंडरगारमेंट्स को प्रतिदिन अच्छी तरह साफ करना चाहिए। गर्मियों में पसीना अधिक आने की वजह से बैक्टीरिया का खतरा अधिक रहता है, इसलिए अपने अंडरगारमेंट्स को डिटर्जेंट पाउडर की मदद से धोएं। डिटर्जेंट पाउडर से अंडरगारमेंट्स धोने से बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं।महिलाओं का प्राइवेट पार्ट ऐसा हिस्सा जहां बहुत जल्द ही इंफेक्शन हो सकता है ।इसलिए अंडरवियर को इस हिसाब से बनाया जाता है कि उन्हें पहनने में ना ही असुविधा हो और ना ही उनके स्वास्थ  पर बुरा प्रभाव पड़े ।अंडरवियर के अंदर लगने वाली खुफिया जेबअसल में जेब का काम नहीं करती ।अंडरवियर के निचले भाग में अलग से एक ऐसा कपड़ा लगाया जाता है जो ज्यादा नमी को सोखे अक्सर ये कपड़ा कॉटन का बना होता है. इससे प्राइवेट अंग जल्दी सूख जाते हैं और पर्याप्त हवा शरीर के निचले हिस्से तक पहुंचती है जिससे दाद या स्किन से जुड़ी कोई अन्य समस्या होने का खतरा कम हो जाता है।

  • पीरियड्स से पहले होता है प्री मेन्स्ट्रुअल सिंड्रोम

    डेस्क रिपोर्ट:

    जब किसी लड़की को पहली बार पीरियड्स होते हैं तो उसे मिनार्की कहते हैं। ये आमतौर पर 10-13 साल की उम्र में होते हैं। जब कोई लड़की किशोरावस्था में पहुंचती है तब उसके ओवरी एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन नाम के हॉर्मोन उत्पन्न करने लगते हैं। इसके बाद ओवरी एग रिलीज करती है। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन की वजह से यूट्रस की परत मोटी होने लगती है। जब एग फर्टिलाइडज नहीं होता है तो ये परत टूट जाती है जिससे पीरियड्स आते हैंमेनोपॉज तब होता है जब किसी महिला को लगातार 12 महीने तक पीरियड्स नहीं आते हैं। इसके बाद महिला नेचुरली प्रेग्नेंट नहीं हो सकती है। दरअसल, 45-55 की उम्र के बीच महिलाओं के शरीर में ओवरी एस्ट्रोजन रिलीज करना कम कर देती है जिसे पीरियड्स कम आते हैं। मेनोपॉज के लक्षण आखिरी पीरियड से करीब 4 साल पहले दिखने लगते हैं। इस दौरान महिलाओं को सिरदर्द, बदन दर्द, नींद न आना, एंग्जायटी, ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डीयां कमजोर होना, जैसी कई परेशानियां होती हैं।
    पीरियड्स आने के 3-7 दिन पहले बॉडी में कुछ बदलाव होते हैं। प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन की कमी होने से पीरियड्स आते हैं, लेकिन अचानक आए इस चेंज के कारण कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसमें पेट-पीठ और कमर में दर्द, मूड स्विंग्स, थकान, चिड़चिड़ापन, गैस होना, टिशू में पानी जमा होना, चक्कर आना और बेहोशी तक शामिल है।पीरियड्स के दौरान अधिकतर महिलाओं को पेट में दर्द होता है जो कई बार कमर और पैरों में भी महसूस होता है। कुछ महिलाओं को ये दर्द इतना ज्यादा होता है कि इसका असर उनके काम पर भी पड़ता है। दरअसल, महिलाओं की कोख में पीरियड्स के दौरान प्रोस्टाग्लैन्डिन नाम का हॉर्मोन निकलता है जिससे यूट्रस पर दबाव पड़ता है। यही पेट में दर्द का कारण होता है।2014 में NGO डासरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 23 मिलियन लड़कियां पीरियड्स आने पर स्कूल जाना बंद कर देती हैं। 2016 में YouGov ने BBC के लिए एक सर्वे किया जिसमें सामने आया कि 52% महिलाएं पीरियड पेन या क्रैम्प्स से गुजरती हैं, जिसका सीधा असर उनके काम पर होता है। वहीं हर 10 में से 9 महिलाओं ने माना कि उन्हें कभी न कभी पीरियड पेन से गुजरना पड़ा है।

    एक इंसान का शरीर 45 डेल यूनिट दर्द सहन कर सकता है। वहीं बच्चे को जन्म देने के लिए एक औरत 57 डेल यूनिट तक का दर्द सहन करती है। दरअसल, जन्म के दौरान बच्चेदानी का मुंह 6-10 सेमी तक खुल जाता है। जिससे होने वाला दर्द 20 हड्डियों के एक साथ टूटने जैसा होता है। वहीं पीरियड्स के दौरान बच्चेदानी का मुंह (सर्विक्स) 2-3 सेमी तक खुलता है जिससे तेज दर्द महसूस होता है। डॉ. जेन गनटर के मुताबिक, इस दौरान उतना दर्द होता है जितना बिना एनेस्थीसिया के उंगली काटने पर होगा।

    PMDD: आपने PMS के बार में जान लिया। इसी के एडवांस्ड स्टेज को प्री-मेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर यानी PMDD कहते हैं। 3-8% महिलाएं PMDD का शिकार हैं। इसमें गंभीर डिप्रेशन, थकान, ध्यान लगाने में दिक्कत और पैनिक अटैक तक आ सकते हैं।

    सेरोटोनिन की कमी: पीरियड के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन की कमी होती है। इसकी वजह से दिमाग से रिलीज होने वाले कुछ केमिकल्स पर भी असर पड़ता है। रिसर्च के मुताबिक एस्ट्रोजन कम होने की वजह से दिमाग से सेरोटोनिन हॉर्मोन भी कम निकलता है। सेरोटोनिन को ‘हैप्पी केमिकल’ भी कहा जाता है। इस केमिकल की कमी की वजह से महिलाएं उदास और डिप्रेस्ड रहने लगती हैं। ये कई बार पैनिक अटैक का कारण बनता है।

    बॉडी और लुक में बदलाव: पीरियड्स के कारण होने वाले हॉर्मोनल बदलाव की वजह से उदास होना, बिना बात के गुस्सा आना आम बात है। हॉर्मोनल चेंज के कारण महिलाओं के वजन बढ़ता-घटता है। साथ ही बॉडी हेयर ग्रोथ और स्किन एक्ने के कारण आत्मविश्वास कम होने लगता है, जिसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है।

    पीरियड से जुड़ी बिमारियों के बारे में…

    स्टैटिस्टा वेबसाइट के 2020 के सर्वे के मुताबिक, 20 से 29 साल की महिलाओं में 16% पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या PCOS से पीड़ित थी। इस बिमारी के पीछे मुख्य वजह खराब लाइफस्टाइल को बताया गया।

    तो ये PCOS/PCOD क्या होता है: महिलाओं की ओवरीज से निकलने वाले हॉर्मोन्स ही पीरियड्स मैनेज करते हैं। जब इन्ही हॉर्मोन्स का इम्बैलेंस होता है तो उस कंडीशन को PCOS/PCOD कहा जाता है। इसमें कई बार पीरियड्स कुछ महीनों के गैप पर आते हैं। इस वजह से प्रेगनेंसी में काफी दिक्कतें आती हैं। इसके अलावा चेहरे पर दाने निकलना और शरीर पर बालों की ज्यादा ग्रोथ होना भी इसी कंडीशन की वजह से होता है। समस्या बढ़ने पर बांझपन और डायबिटीज भी हो सकती है।

    अब तक इस बीमारी का कोई सटीक इलाज नहीं मिला है। मगर समय रहते डॉक्टर की सलाह लेने पर इसे कंट्रोल जरूर किया जा सकता है। साथ ही महिलाएं अपनी दिनचर्या में मामूली बदलाव करके PCOS को काबू में कर सकती हैं।

    यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI): यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन वैजाइना में होने वाला इंफेक्शन है जो एसिड लेवल कम होने की वजह से होता है। पीरियड्स के दौरान निकलने वाले ब्लड की वजह से कई बार वैजाइना का एसिड लेवल घट जाता है, जिससे UTI होने की खतरा रहता है। इस दौरान वैजाइना में तेज जलन और दर्द की समस्या होती है।

    जेनिटल ट्रैक्ट इंफेक्शन: ये एक तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन है जो पीरियड के दौरान होने वाले हॉर्मोनल बदलाव की वजह से होता है। दरअसल, वैजाइना में एसिड लेवल को बनाए रखने का काम लैक्टोबैसिलाई नाम का बैक्टीरिया करता है। पीरियड के दौरान हॉर्मोनल बदलाव की वजह से ये बैक्टीरिया मरने लगते हैं जिसकी वजह से जेनिटल ट्रैक्ट इंफेक्शन हो सकता है।

    रीप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इंफेक्शन (RTI): मेंस्ट्रुएशन के दौरान अगर साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए तो भी महिलाओं को कई बीमारियां हो सकती हैं। इनमें से एक है रीप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी RTI। इसकी वजह से कई बार महिलाएं मां नहीं बन पाती हैं।

  • कम उम्र के लड़के लड़कियों को ज्यादा पसंद आते

    डेस्क रिपोर्ट:

    आज के समय में बहुत सी ऐसी लड़कियां हैं, जो अपने से कम उम्र के लड़के के साथ रिलेशनशिप में हैं। बॉलिवुड के सितारों से लेकर हमारे आस-पास कई ऐसे कपल्स होते हैं, जिनमें उम्र का फासला बहुत अधिक होता है या फिर जिनमें लड़की की उम्र, लड़के की तुलना में अधिक होती है।चलन की बात करें तो आजकल कम उम्र के लड़के लड़कियों कोज्यादा पसंद आते हैं वहीं लड़कों को भी एक मैच्योर पार्टनर के रूप में बड़ी उम्र की लड़कियां पसंद आ रही हैं। उम्र का ये फासला कई मायनों में रिश्ते को मजबूती देने का काम करता है। अगर आप भी किस कम उम्र के लड़के को डेट कर रही हैं तो इन बातों का ख्याल रखना आपके लिए जरूरी हो जाता है।

    1.अगर आप अपने से कम उम्र के किसी लड़के को डेट कर रही हैं तो इस बात का ख्याल हमेशा रखें कि आपका व्यवहार अपरिपक्व न हो। कम उम्र के लड़को को अपने से बड़ी लड़की पसंद ही इसलिए आती है क्योंकि उन्हें लगता है कि बड़ी उम्र की लड़कियां काफी गंभीर होती हैं। ऐसे में अगर आप कुछ भी ऐसा करेंगी जो अपरिपक्व हो तो वह आपसे दूर जा सकता है।

    2. अगर आप किसी कम उम्र के लड़के को डेट कर रही हैं तो इस बात के लिए तैयार रहें कि लोग आपसे तरह-तरह के सवाल करेंगे ही। कई बार ऐसा होता है कि लोग ऐसे सवालों से असहज हो जाते हैं और रिश्ते को छिपाने की कोशिश करने लगते हैं लेकिन ऐसा करना गलत है। रिश्ता चाहे जो हो उसे लेकर हमेशा गर्व महसूस करें। ऐसा करने से आपके पार्टनर के मन में भी आपके लिए इज्जत बढ़ेगी और इससे आपका रिश्ता और मजबूत होगा।

    3. अगर आप कम उम्र के किसी लड़के को डेट कर रही हैं तो इस बात का ध्यान जरूर रखें कि आप दोनों के बीच जेनरेशन गैप नही होने पाए। आपको उसके अनुसार खुद को अपडेट रखने की जरूरत है ताकि वह अपने दोस्तों और साथ के लोगों को सामने आपको इंट्रोड्यूस करने में हिचकिचाए नहीं।

    4. उम्र का अंतर है तो शारीरिक अंतर भी होगा ही साथ ही लाइफस्टाइल का भी अंतर होना सामान्य है। ऐसे में आपको अपने फिटनेस और लाइफस्टाइल को लेकर काम करने की जरूरत होगी। ताकि आप दोनों के बीच इस वजह से कोई परेशानी न आए।

    5. माना की आपका साथी आपसे उम्र में कम है लेकिन यह जरूरी तो नहीं कि आप हर मामले में जो सोचें वही सही हो। ऐसा भी हो सकता है कि भले ही उसके पास अनुभव कम हो लेकिन उसके पास किसी बात को समझने का कोई सही तर्क हो। ऐसे में खुद को अनुभवी बताकर अपनी बातों को उस पर थोपने से बचें।

  • लहसुन का लच्छा पराठा स्वाद के साथ आपको देगा अच्छा स्वास्थ

    डेस्क। लहसुन एक हर्ब है जिसकी तासीर काफी गर्म होती है। आयुर्वेद में लहसुन को एक औषधीय जड़ी-बूटी की संज्ञा दी जाती है और लहसुन के सेवन से आपकी इम्यूनिटी को बढ़ाने में भी काफी मदद करते हैं।
    आमतौर पर लहसुन को खाने में फ्लेवर के लिए इस्तेमाल किया जाता है और क्या आपने कभी लहसुन का लच्छा पराठा ट्राई किया है? अगर नहीं तो आज हम आपके लिए लहसुन का लच्छा पराठा बनाने की रेसिपी को लेकर आए हैं।
    अगर आप नाश्ते में लहसुन का लच्छा पराठा खाते हैं तो इससे आपका पाचन और इम्यूनिटी मजबूत बनी रहती है और इसके साथ ही इससे आपको कोलेस्ट्रॉल को घटाने में काफी मदद मिलती है। लहसुन का पराठा स्वाद में भी बेहद मजेदार होता है। इसके साथ ही इससे बनाना भी बेहद आसान होता है।
    लहसुन का लच्छा पराठा बनाने की सामग्री-
    2 कप आटा
    10 लहसुन की कलियां
    3 चम्मच देसी घी
    आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर
    3 हरी मिर्च (कटी हुई)
    आधा चम्मच अजवाइन
    स्वादानुसार नमक
    1 चम्मच मक्खन
    लहसुन का लच्छा पराठा कैसे बनाया जाता है?
    लहसुन का लच्छा पराठा बनाने के लिए आप सबसे पहले लहसुन को लें।
    फिर आप करीब 10 लहसुन की कली को छीलकर बारीक उसे काट लें।
    इसके बाद आप एक बड़े बाउल में आटा, बारीक कटा लहसुन और 1 चम्मच मक्खन को डालें।
    फिर आप इसमें आवश्यकतानुसार पानी डालकर सॉफ्ट सा आटा भी गूंथ लें।
    इसके बाद आप इस आटे को करीब 10 मिनट तक सेट होने के लिए रख सकते हैं।
    फिर आप आटे की लोइयां बनाकर अच्छी तरह से इसे बेल लें।
    इसके बाद आप एक नॉन स्टिक तवे को घी से अच्छी तरह से ग्रीस कर लीजिए।
    फिर आप तवे पर पराठे को डालकर दोनों तरफ से अच्छी तरह से सेंक लिजिए।
    अब आपका लहसुन का लच्छा पराठा बनकर अच्छे से तैयार हो चुका है।
    फिर आप इसको पसंदीदा चटनी या अचार के साथ गर्मागर्म सर्व भी करें।

  • ये कार एक्सेसरीज गर्मियों के लिए काफी काम की

    डेस्क। गर्मी के मौसम में यात्रा करना बहुत ही कठिन होता है। अधिक गर्मी के कारण एसी भी केबिन को बहुत ज्यादा ठंडा नहीं कर पाता है। ऐसे में कुछ कार एक्सेसरीज आपके बहुत काम आ सकती हैं जिनका इस्तेमाल करके आप गाड़ी को गर्म होने से बच भी सकते हैं।
    इनकी कीमत भी ज्यादा नहीं है। तो चलिए जानते हैं इन सस्ती कार एक्सेसरीज के बारे में सब कुछ 

    विंडशील्ड स्क्रीन

    इस एक्सेसरी से शीशे के जरिए गाड़ी के अंदर सीधे धूप नहीं आती है, जिससे स्टीयरिंग, सीटविंड और डैशबोर्ड ज्यादा गर्म भी नहीं होते है। इसकी कीमत 300 रुपये से 500 रुपये के बीच में है जिसे आप ऑनलाइन या ऑफलाइन खरीद भी सकते हैं। 

    ब्लोअर

    ब्लोअर की मदद से आपकी गर्म गाड़ी बहुत तेजी से ठंडी हो जाती है और इसे 12V के चार्जिंग सॉकेट से चलाया जा सकता है। और यह एसी की हवा को तेजी से बाहर फेंकता है जिससे गाड़ी बहुत जल्दी ठंडी भी हो जाती है। इसे भी ऑनलाइन और ऑफलाइन खरीदा भी जा सकता है। 

    साइड ग्लास कार कर्टेन

    तेज धूप के कारण गाड़ी में साइड ग्लास और बैक ग्लास के जरिए भी बहुत हीट होती है। इससे बचने के लिए आप साइड ग्लास कर्टन का इस्तेमाल कर सकते हैं इससे गाड़ी कम गर्म होगी और इसकी कीमत 500 रुपये से भी कम है। 

    कार विंडो फैन

    यह सोलर एनर्जी से काम करता है और जब गाड़ी को लॉक किया जाता है तो यह अपने आप काम करने लगता है और केबिन के अंदर की गर्म हवा को बाहर भी निकालने लगता है। इसकी कीमत केवल 2000 रुपये से शुरू होती है।

  • सेक्सी फिल्में देखने वाले बच्चों द्वारा असुरक्षित यौन संबंध बनाए जाने की संभावना अधिक

     

     

    डेस्क रिपोर्ट:

    सेक्स दृश्यों से भरपूर फिल्में देखने वाले बच्चों के यौन-स्वच्छंद होने और सेक्सुअली एक्टिव होने की संभावना ज़्यादा होती है.एक नए अध्ययन में पाया गया है कि सेक्सी फिल्में देखने वाले बच्चे, ऐसी फिल्में नहीं देखने वाले बच्चों की तुलना में न केवल जल्दी अपना कौमार्य खोते हैं, अर्थात ऐसे बच्चे पहला सेक्स अनुभव अथवा पहला यौन संबंध जल्दी स्थापित करते हैं, बल्कि सेक्सी फिल्में देखने वाले बच्चों द्वारा असुरक्षित यौन संबंध बनाए जाने की संभावना भी ज़्यादा होती है.समाचारपत्र ‘डेली मेल’ की एक ख़बर के अनुसार, छह साल तक चले इस अध्ययन में 1,200 से भी ज़्यादा बच्चों पर फिल्मों में दिखाए जाने वाले सेक्स दृश्यों के असर की पड़ताल की गई. अमेरिका के दार्थमाउथ कॉलेज और आईवी लीग यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने वर्ष 1998 से लेकर वर्ष 2004 तक की 684 फिल्मों का सर्वे किया और उनमें दिखाए गए सेक्स दृश्यों के आधार पर उनका वर्गीकरण किया. ‘आइज़ वाइड शट’ जैसी फिल्मों को ‘अधिक सेक्स दृश्य’ वाली श्रेणी में रखा गया, जबकि ‘लॉर्ड ऑफ द रिंग्स : द रिटर्न ऑफ द किंग’ को ‘कम सेक्स दृश्य’ वाली श्रेणी में रखा गया था.

    सुरक्षित सेक्स:

    एक रिश्ते को लम्बे समय तक चलाने के लिए दो सबसे ज़रूरी बातें

    चाहे आप शादीशुदा हों, किसी को डेट कर रहे हो या एक रात के रिश्तों में विश्वास रखते हो अपने साथी से सुरक्षित सेक्स के बारे में बात करना बेहद ज़रूरी है। एक और विषय जिसके बारे में बात करना अजीब हो सकता है के लिए पेश है हमारी सुझाव पुस्तिका: क्या करें जब आपको कोई यौन संचारित रोग हो या हो जाएंIसेक्स करने से पहले अपने साथी से सुरक्षित सेक्स के बारे में बात करें! अगर आप वर्जिन हैं तो आपके साथी को आपसे किसी भी प्रकार के संक्रमण का खतरा ना के बराबर है। लेकिन हो सकता है कि आपके साथी ने पहले सेक्स किया हो। और अगर उन्होंने एक बार भी बिना कंडोम के सेक्स किया तो इस बात की पूरी संभावना है कि उन्हें यौन संचारित रोग होI

    – यह ना सोचें कि एक लड़के की जेब में हमेशा कंडोम मौजूद रहेगा। पूछ लेना बेहतर है। एक बार आप किसी के साथ आश्वस्त हो गए हैं और यौन सम्बन्ध स्थापित करने के बारे में बात कर चुके हैं तो आप कुछ ऐसा कह सकते हैं:

    ‘मुझे ख़ुशी है कि हम सेक्स के बारे में बात कर सकते हैं क्यूंकि मैं भी कंडोम और गर्भनिरोधकों..’उसके बाद आप उनकी प्रतिक्रिया देखकर गर्भनिरोध के अलग अलग तरीकों के बारे में बात कर सकते हैंI गर्भनिरोध के अलग-अलग तरीकों के बारे में यहाँ पढ़ेंIइस वार्तालाप के लिए उपयुक्त समय ढूंढना मुश्किल हो सकता है। शायद आप तब बात कर पाएं जब एक रोमांटिक फिल्म में कोई कामुक दृश्य आ रहा होI

    ‘क्या यह कंडोम का इस्तेमाल करेगा?’अपने साथी की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करेंI अगर वो कहते हैं कि उन्हें नहीं लगता कि वो करेगा तो उन्हें कंडोम या गर्भनिरोधक इस्तेमाल करे बिना सेक्स करने से होने वाले जोखिमों के बारे में बताएंI

    ‘कहीं वो गर्भवती ना हो जाएं या उसे किसी प्रकार का कोई यौन संक्रमण ना जाए’

    अपने साथी को कैसे बताएं कि आपको यौन संक्रमित रोग है:

    अगर आपको यौन संक्रमण है तो यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण है कि आप अपने साथी को इस बात से अवगत कराएं। और अगर आप यह बात कहने का उपयुक्त समय ढूंढ लें और उन्हें अपनी बात अच्छी तरह से समझा दें तो इस बात की पूरी संभावना है कि वो आपको समझ जायेंगेI

    उपयुक्त समय- सही समय अत्यंत आवश्यक हैI फोरप्ले या सेक्स के दौरान अपने साथी को नहीं बताएंI यह बात निर्वस्त्र होकर नहीं हो सकती। जैसे आप अपने रिश्ते की और गतिविधियों के बारे में चर्चा करते हैं, इस बारे में ऐसे ही बात करनी होगीI

              जब वहां केवल आप दोनों हो और आपके पास अपने साथी की प्रतिक्रिया देखने का पूरा मौक़ा हो, तब उनसे पूछें कि क्या उन्हें कभी यौन संक्रमण हुआ है और क्या वो इस बारे में कुछ जानते हैंI हो सकता है कि यह उनके साथ  भी हुआ होI खुल कर बात करें – इससे आपके साथी को लगेगा कि वो भी आपके साथ दिल खोल कर बात कर सकते हैंI

     बोलने का ढंग- इस तरह से ना बताएं कि परेशानी सुनने में और भी ज़्यादा बड़ी और खतरनाक लगेंI बात की शुरुआत ऐसे ना करें:

  • कैसे बढ़ाएं शावर का प्रेशर, गर्मी में काफी उपयोगी

    How To Clean Shower Head: गर्मी के मौसम में शाॅवर में नहाने का मजा ही अलग है पर सारा मजा गायब हो जाता है जब शाॅवर से पानी काफी कम आने लगे।
     ऐसे में प्‍लंबर को बुलाने पर काफी खर्च भी होता है और कई बार तो ये समस्‍या बार-बार हमें परेशान करने लग जाती है।
    लेकिन अगर आप इस समस्‍या का घर पर ही निदान करना चाहते हैं तो हम लाए हैं एक कमाल की ट्रिक, जिसकी मदद से आप आसानी से शाॅवर हेड या हैंड शाॅवर जेट को साफ भी कर सकते हैं, तो आइए जानते हैं इसे करने का आसन तरीका।
    शाॅवर हेड को साफ करने के लिए सामग्री 
    –एक पॉलीथिन 
    –बेकिंग सोडा 
    –नींबू 
    –ईनो 
    –सफेद सिरका 
    –रबर बैंड या धागा 
    –पुराना ब्रश
    इस तरह करें शाॅवर हेड को साफ
    बनाएं सॉल्‍यूशन
    सबसे पहले एक मग लें और इसमें एक ग्‍लास पानी भर लें, अब इसमें 5 से 6 चम्‍मच बेकिंग सोडा डाल दें। अब इसमें एक नींबू निचोड़ लें और फिर ईनो का एक सैशे डालें और आधा कप सफेद सिरका भी मिलाएं और अब इसे आप अच्‍छी तरह से मिला दे। आपका सॉल्‍यूशन तैयार है।
    कैसे करें साफ
    अब एक मजबूत पॉ‍लीथिन में यह सॉल्‍यूशन धीरे धीरे डाल लें और अब एक स्‍टूल या टेबल की मदद से आप शाॅवर के करीब आ जाएं और हाथों को उठाकर शाॅवर हेड को पॉलीथिन में मौजूद सॉल्‍यूशन में डुबाते हुए इसे अच्‍छी तरह से हैंडल पर बांध दीजिए और कुछ देर में धुल दें। ये अच्छे से साफ हो गया होगा।