Category: health-lifestyle

  • मुस्कुराइए आपकी मुस्कुराहट के हैं कई फायदे

    HAPPINESS: मुस्कुराना जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। कुछ मुख्य कारण हैं:

    1. स्वस्थ मनोवृत्ति: मुस्कुराहट एक स्वस्थ मनोवृत्ति का संकेत है जो स्वस्थ मानसिक स्थिति का दर्शाता है। जब हम मुस्कुराते हैं तो विशेष तरह से हमारे शरीर में सुखद हार्मोन जैसे एंडोर्फिन और सीरोटोनिन उत्पन्न होते हैं जो हमें खुश महसूस कराते हैं।

    2. दिल को स्वस्थ रखना: मुस्कुराहट के दौरान हमारी दिल की धड़कनें तेज होती हैं जो हमारे दिल को स्वस्थ रखती हैं और उसकी क्षमता को बढ़ाती हैं।

    3. तनाव को कम करना: मुस्कुराने से हमारे तनाव कम होते हैं और हमारा शरीर शांत होता है।

    4. आत्मविश्वास बढ़ाना: मुस्कुराहट से हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है और हम सकारात्मक सोचने लगते हैं। इससे हमें अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आवश्यक संभवता बढ़ती है।

    हँसने के कई फायदे होते हैं। निम्नलिखित कुछ मुख्य फायदे हैं:

    1. स्वास्थ्य के लिए लाभदायक: हँसने से हमारे शरीर में खून का परिसंचार बढ़ता है जो हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। हँसने से हमारे शरीर में शांतिप्रद और खुश मिज़ाज होता है जो तनाव को कम करता है और हृदय के लिए लाभदायक होता है।

    2. स्ट्रेस कम करने में मददगार: हँसने से शरीर में एक फिजिओलॉजिकल प्रक्रिया शुरू होती है जो तनाव को कम करती है। इससे हम अपने दिनचर्या में अधिक उत्साह और जोश से काम कर सकते हैं।

    3. सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाने में मददगार: हँसने से हमारे सामाजिक संबंधों में सकारात्मक बदलाव आते हैं जो हमें अपने परिवार और दोस्तों के साथ अधिक खुशहाल बनाता है।

    4. दिमाग के लिए फायदेमंद: हँसने से हमारे दिमाग में जोश आता है जो काम करने में लाभदायक होता है। हँसने से हमारे दिमाग को शांति मिलती है.

    जीवन में मुस्कुराना क्यों जरुरी है-

    मुस्कुराने के कई फायदे हैं। कुछ फायदे निम्नलिखित हैं:

    1. तनाव कम करने में मददगार होता है – जब हम मुस्कुराते हैं, तो हमारे शरीर में खुशी और संतुष्टि के हार्मोन जैसे एंडोर्फिन उत्पन्न होते हैं, जो हमें तनाव से निजात दिलाते हैं।

    2. दिमाग को शांति प्रदान करता है – मुस्कुराहट आपके दिमाग को ताजगी देती है जो आपको एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है।

    3. स्वस्थ रखता है – हँसने से हृदय के कार्यों में सुधार होता है जिससे हृदय स्वस्थ रहता है। इसके अलावा जब आप हंसते हैं, तो आपके श्वसन प्रणाली को बल मिलता है जो आपके फेफड़ों को स्वस्थ रखता है।

    4. संबंधों को मजबूत बनाता है – हँसने से आपका मन और शरीर संतुलित होते हैं, जिससे आपके संबंध और परिवार के साथ मजबूत होते हैं।

    5. सफलता के लिए आवश्यक है – एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ हँसने से आप अपने लक्ष्यों के प्रति अधिक सक्रिय होते हैं।

  • सेक्स के दौरान कंडोम का उपयोग

    सेक्स एक जीवन शैली है जो मानव जाति के लोगों के बीच शारीरिक संबंधों को सम्बोधित करती है। सेक्स शारीरिक, भावनात्मक, सामाजिक और जीवन के अन्य क्षेत्रों में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सेक्स एक स्वास्थ्यप्रद शारीरिक गतिविधि है जो मानव जीवन के समस्त पहलुओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह आनंददायक और सुखद अनुभव होता है जो एक स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने में मदद करता है। इसके अलावा, सेक्स संबंधित शिक्षा, विज्ञान, रोग निवारण और जनसंख्या नियंत्रण जैसे कुछ दृष्टियों से भी बहुत महत्वपूर्ण है।

    सेक्स के दौरान कंडोम का उपयोग कैसे करें-

    कंडोम सेक्स सुरक्षा का एक अहम हिस्सा है जो सेक्स के दौरान संचारित संक्रमणों से बचाव करता है। कुछ लोग कंडोम के उपयोग के बारे में न जानने के कारण घटना संभव है जो इसके उपयोग के न समझने से नुकसान पहुंचा सकती है। कंडोम के सही उपयोग के लिए निम्नलिखित निर्देशों का पालन करें:

    1. सही साइज का चुनाव करें: कंडोम का सही साइज चुनें। अधिक या कम आकार के कंडोम इस्तेमाल करना बेहतर नहीं होता।

    2. इस्तेमाल से पहले जाँच करें: इस्तेमाल से पहले कंडोम की सतह की जाँच करें। कंडोम की सतह पर कोई निशान, टिप्पणी, या तनाव नहीं होना चाहिए। यदि कंडोम में कोई भी निशान हो, तो उसे नहीं इस्तेमाल करना चाहिए।

    3. सही तरीके से इस्तेमाल करें: कंडोम को सही तरीके से लगाएं। इसके लिए ध्यान रखें कि कंडोम के ऊपरी भाग में थोड़ा जगह होना चाहिए, जो इसे सही तरीके से लगाने में मदद करता है।

    कंडोम कई ब्रांडों द्वारा बनाए जाते हैं। कुछ लोकप्रिय कंडोम ब्रांडों की सूची निम्नलिखित है:

    1. Durex
    2. KamaSutra
    3. Manforce
    4. Skore
    5. Moods
    6. Kohinoor
    7. Playboy
    8. Okamoto
    9. Trojan
    10. LifeStyles
    11. Crown
    12. MySize
    13. ONE
    14. Glyde
    15. Sir Richard’s
    16. Sagami
    17. Billy Boy
    18. Beyond Seven
    19. RFSU
    20. Unique

  • अपनाएं ये तरीका मुहासे होंगे जड़ से गायब

    लाइफ स्टाइल – आजकल हमारी लाइफ पूरी तरह से बदल गई है. हम अपने खाने पीने का विशेष ध्यान नहीं रखते हैं जो हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है कई बार हम देखते हैं कि कुछ लोगों के चेहरे पर काफी मुहासे निकल आते हैं लोग इससे परेशान रहते है कई प्रकार के कोस्मेटिक का उपयोग करते हैं लेकिन उनको इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल पाता. वहीं आज हम आपको मुहासे के सन्दर्भ में कुछ ऐसे तत्व बताने जा रहे हैं जो अगर आप जान लेते हैं तो आपके मुहासे की समस्या आप घर बैठे स्वयं ही खत्म कर सकते हैं. तो आइये जानते हैं- 

    क्यों निकलते हैं मुहासे-

    1. अधिक तेल का निर्माण: त्वचा पर ज्यादा से ज्यादा तेल का निर्माण होना एक मुख्य कारण है जो मुहासों को उत्पन्न करता है। तेल के ज्यादा निर्माण के कारण चेहरे के त्वचा के तंत्रों के मुड़ जाने से त्वचा के अंदर गंदगी और बैक्टीरिया जमा होते हैं। इससे त्वचा पर मुहासे निकलने लगते हैं।

    2. हार्मोनल बदलाव: हार्मोनल बदलाव भी मुहासों के उत्पादन के लिए एक मुख्य कारण हो सकते हैं। इससे त्वचा के तंत्रों में बदलाव होता है और इससे त्वचा के अंदर गंदगी और बैक्टीरिया जमा होते हैं जो मुहासों के उत्पादन को बढ़ाते हैं।

    3. अनियमित खानपान और जीवनशैली: खाने की अनियमित आदतों, जल्दबाजी में खाने से और तंबाकू या अन्य विषाक्त पदार्थों के सेवन से मुहासे होने की संभावना बढ़ जाती है।

    मुहासे को ठीक करने के लिए कुछ घरेलू उपचार हैं, जो निम्नलिखित हैं:

    1. नींबू का रस: नींबू का रस त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होता है। इसमें विटामिन सी होता है जो त्वचा को नरम बनाने में मदद करता है और त्वचा के रंग को निखारता है।

    2. हल्दी और नींबू का अपने चेहरे पर लगाना: हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो मुहासों के लिए लाभकारी होते हैं। इसलिए आप हल्दी को नींबू के साथ मिलाकर लगा सकते हैं।

    3. एलोवेरा जेल: एलोवेरा जेल में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो मुहासों के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। इसे सीधे मुहासे पर लगाया जा सकता है।

    4. शहद और दही का मस्क: शहद और दही में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो मुहासों के लिए लाभकारी होते हैं। आप इन्हें एक साथ मिलाकर मस्क के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

    5. नमक और लहसुन का पेस्ट: नमक और लहसुन को पीस कर उनका पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को मुहासे पर लगाकर आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं.

    नोट- यह जानकारी कई अलग-अलग अनुभवों पर आधारित है इससे आपके मुहासे की समस्या वास्तव में खत्म होगी इसकी कोई गारंटी नहीं ली जा सकती.

  • किशमिश खाएं और बड़ी-बड़ी बीमारियों से छुटकारा पाएं

    किशमिश एक प्रकार का सूखा फल होता है जो अंगूर (ग्रेप्स) के सूखे हुए ड्राई फलों को कहते हैं। जब अंगूर को धूप और हवा में सुखाया जाता है, तो उसका पानी शुष्क हो जाता है और फल में मिठास बनती है। किशमिश एक प्रमुख औषधीय फल माना जाता है और यह खाद्य उपयोग में व्यापक रूप से प्रयोग होता है। इसे एक स्वादिष्ट सूखे मेवे के रूप में खाया जाता है और विभिन्न पकवानों में भी शामिल किया जाता है। किशमिश में ऊर्जा, पोषक तत्व और विटामिन ए, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, और खनिजों की मात्रा मौजूद होती है।

    किशमिश अंगूर (ग्रेप्स) के सूखे हुए ड्राई फ्रूट्स हैं। इन्हें बनाने की प्रक्रिया निम्नलिखित होती है:

    1. अंगूर के चयन: किशमिश बनाने के लिए, पहले अंगूर के उत्पादन में उच्च गुणवत्ता वाले अंगूर का चयन करें। यहां जर्मनी, आयरलैंड और टर्की जैसे देशों में प्रमुख अंगूर उत्पादक हैं।

    2. पकाने की प्रक्रिया: पहले अंगूर को पानी में धो लें और उसे साफ़ करें। फिर, इसे अधिकतम 12 घंटे तक गुनगुने पानी में भिगो दें। इससे अंगूर में मौजूद शक्कर का प्रतिशत कम होता है।

    3. सुखाने की प्रक्रिया: अंगूर को पानी से निकालें और इसे साफ़ करें। फिर, इसे धूप और उच्च तापमान वाले सुखाने के लिए रखें। सुखाने के दौरान, अंगूर अपने आकार में श्रिंक हो जाता है और उसकी चमक खत्म हो जाती है।

    4. उद्गमन: सुखाने के बाद, अंगूर को निपटाएं और इसकी खुराकों को अलग कर दें। इसके बाद, ये अंगूर किशमिश के रूप में उपयोग करें.

    किशमिश खाने के फायदे-

    किशमिश खाने के कई फायदे होते हैं। यहां कुछ मुख्य फायदे हैं:

    1. पोषण स्रोत: किशमिश में ऊर्जा, पोषक तत्व और विटामिन ए, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन, और खनिजों (जैसे कि पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन) की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इन्हें खाने से शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है और शारीरिक स्थिति को सुधारने में मदद मिलती है।

    2. अंतिऑक्सिडेंट्स: किशमिश में अंतिऑक्सिडेंट्स जैसे रेज़्वेरेट्रॉल पाए जाते हैं, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद कर सकते हैं। ये अंतिऑक्सिडेंट्स स्वस्थ रक्त प्रवाह, मजबूत इम्यून सिस्टम, और संचार के नियंत्रण में मदद कर सकते हैं।

    3. पाचन तंत्र को सुधारे: किशमिश में मौजूद फाइबर और नैचुरल सुगर पाचन तंत्र को सुधारने में मदद कर सकते हैं। यह पाचन को सुधारकर अपच, कब्ज़, और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं को कम कर सकता है।

  • जानें कढ़ी बनाने का सबसे बेहतरीन तरीका

    कढ़ी एक प्रमुख भारतीय व्यंजन है जो दही (कटा हुआ या बटाटा हुआ) और बेसन (ग्राम फ्लोर) के मिश्रण के आधार पर बनती है। इसे मसालों और तड़के के साथ तैयार किया जाता है। कढ़ी एक मसालेदार और तीखी रंगाई ग्रेवी होती है जिसे चावल, परांठे या रोटी के साथ सर्व किया जाता है। यह प्रत्येक राज्य में थोड़ा अलग तरीके से बनाई जाती है और उपयोगिता के लिए विभिन्न सब्जियों और आटे के पकोड़ों के साथ परोसी जाती है। कढ़ी अपने विशेष स्वाद, मसालेदार ग्रेवी और शाकाहारी विकल्पों के लिए जानी जाती है।

    कढ़ी एक पारंपरिक भारतीय व्यंजन है जिसे योग्यतापूर्वक पकाने के लिए निम्नलिखित सामग्री और उपयोगी निर्देश आपकी मदद करेंगे:

    सामग्री:

    • 1 कप दही (कटा हुआ)
    • 4 कप पानी
    • 1/2 कप बेसन (ग्राम फ्लोर)
    • 1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
    • 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर (वैकल्पिक)
    • 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
    • 1/2 छोटा चम्मच जीरा
    • 1/2 छोटा चम्मच राई
    • 1/2 छोटा चम्मच हींग (असेफोटिडा)
    • 8-10 करी पत्ते
    • 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट
    • 1 छोटा चम्मच तेल
    • नमक स्वादानुसार

    निर्देश:

    1. एक बड़ी कटोरी में दही को अच्छी तरह से फेंटें और उसमें बेसन डालें। फिर से अच्छी तरह से मिलाएं ताकि कोई गांठ न बने।
    2. अब उसमें पानी डालें और अच्छी तरह से मिक्स करें। सामग्री को घोल बनाने के लिए बेसन को पूरी तरह घुलाएं।
    3. अब हल्दी पाउडर और नमक डालें और फिर से अच्छी तरह से मिलाएं। ध्यान दें कि गोला आकार की कढ़ी बनाने के लिए घोल धीरे-धीरे डालें और बारीक छलनी से चावल के अनुसार चावल को पीसें।
    4. एक कड़ाही में तेल गर्म करें।
    5. गर्म तेल में जीरा और मेथी दाना डालें। ध्यान दें कि जीरा और मेथी दाना सुनहरा होने तक अच्छी तरह से भूनें, जिससे उनका स्वाद निखरे।
    6. अब करी पत्ते डालें और उन्हें थोड़ी देर तक भूनें।
    7. अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें और उसे भूनें जब तक उसकी खुशबू आने लगे।
    8. अब लाल मिर्च पाउडर (वैकल्पिक) डालें और इसे अच्छी तरह से मिलाएं।
    9. तड़के को धीरे से बनी कढ़ी में मिलाएं और धीमी आंच पर पकाएं।
    10. चावल को धीरे-धीरे पीसें और उसे चावल के साथ मिलाएं।
    11. कढ़ी को हल्की आंच पर और बारीक अचार और रोटी के साथ परोसें।

    यहां आपकी स्वादिष्ट कढ़ी तैयार है! इसे गर्म या ठंडा परोस सकते हैं और उसे धनिया पत्ती से सजा सकते हैं। आप अपनी पसंद के अनुसार इसे ताड़के और मसालों से विविधता दे सकते हैं।

  • जानें क्यों करना चाहिए प्रेम विवाह

    जीवन शैली – प्रेम ब्रह्मंड का सत्य है जो व्यक्ति प्रेम के मूल को समझ लेता है और सत्य के साथ प्रेम से जुड़ता है उसका जीवन सफल हो जाता है. कहते हैं प्रेम के बिना जीवन अधूरा है जो व्यक्ति प्रेम नही समझ सकता वह इस शायद भगवान को नही समझ सकता है क्योंकि हम सभी अक्सर कहते हैं कि प्रभु सत्य हैं और जो सत्य है वही प्रेम है .आज के समय में हमने देखा है कि लोग प्रेम को महत्व नहीं देते अपने जीवन का निर्णय जल्दबाजी में लेते हैं किसी के लिए शारीरिक सम्बंध ही प्रेम हैं लेकिन वास्तव में प्रेम मन का भाव है और जो व्यक्ति मनोभाव को समझता है वह प्रेम के मूल को जनता ही नहीं अपितु उसे महसूस करता है .

    वहीं शादी एक पवित्र बंधन है यह प्रेम को साकर करता है वैसे तो प्रेम का अर्थ मन का मिलना है लेकिन सांसारिक जीवन के लिए विवाह आवश्यक है. कई लोग परिजनों के दबाव में आकर अपने प्रेम का त्याग करते हैं किसी अन्य स्त्री से विवाह करते हैं उन्हें लगता है वह जीवन में अपने माता-पिता के लिए त्याग कर रहे हैं यह उनके लिए सर्वशक्तिमान है लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम होता है कि उस समय वह अगर सबसे ज्याद किसी को ठग रहे होते हैं तो वह प्रेम है .

    क्यों करना चाहिए प्रेम विवाह –

    आध्कायात्म  कहना है कि प्रेम जीवन को सुख और सकारात्मक बनाता है जो व्यक्ति प्रेम को चुनता है स्वयं भगवान का आशीर्वाद उनको प्राप्त होता है प्रेम जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है प्रेम विवाह से व्यक्ति के जीवन में सुख आता है और जीवन साथी के बीच एक आपसी तालमेल रहता है. जो व्यक्ति प्रेम विवाह करता है उसको अपने जीवन में सत्य प्राप्त होता है, प्रेम विवाह करने वाले व्यक्ति अपने साथी के प्रति न सिर्फ समर्पित रहते हैं बल्कि अपने साथी के आचरण से परिचित होते हैं .

  • OMG इस एक वजह से बनाई जातीं हैं महिलाओं के पैंट की जेब छोटी

    जीवन शैली- हम कपड़े खरीदते हैं तो हमारे दिमाग में यही रहता है कि काश हमें  मिल जाए जो हमारे ड्रेसिंग सेन्स को बेहतरीन बना दे। आजकल स्त्री और पुरुष के कपड़ों में कोई ख़ास अंतर नहीं है।  वहीं जींस एक ऐसी कॉमन ड्रेस है जिसे स्त्री और पुरुष दोनों पहनते हैं लेकिन एक चीज जो आप सभी ने ध्यान दी होगी की महिला की पैंट की जेब पुरुष की पैंट की जेब से छोटी होती है। अब सवाल यह उठता है कि पैंट की जेब में इतना अंतर क्यों ? क्या महिलाओं की पैंट की जेब छोटी बनाने के पीछे कोई लॉजिक है- तो आइये जानते हैं। 

    असल में महिलाओं की पैंट की जेब छोटी होती है इसका एक विशेष कारण यह है कि कंपनियां मार्केट में हैंड वॉलेट और महिलाओं के पर्स का बाजार खत्म नहीं करना चाहती हैं। कंपनियों का मानना है कि यदि महिलाओं की पैंट की जेब पुरुष की पैंट की जेब की तरह बड़ी बनाई जाएगी तो महिलाएं पर्स रखना बंद कर देंगी और यह बाजार खत्म हो जाएगा। 

    जानकारों का मानना है कि हमारा समाज फैशन के मामले में महिलाओं पर अधिक ध्यान देता है, फैशन का केंद्र बिंदु महिलाएं होती हैं, महिलाओं की पैंट में छोटी जेब रखने का एक कारण यह भी है कि उनकी जींस को स्टाइलिश और अटेंशन ग्रेबिंग लुक दिया जा सके।

  • जानें अधिक स्मार्टफोन चलाने से बच्चों की क्या होगी हालत

    जीवन शैली- तकनीकी का तेजी से विस्तार हो रहा है इंटरनेट से अपनी समस्या को सुलझाने का जमाना आप आर्टिफिशल इंटेलीजेंस पर पहुंच गया है। लोगों का ज्यादातर समय मोबाइल फोन के उपयोग में गुजरता है। माता पिता बच्चों को व्यस्त रखने के लिए उनके हाथ में मोबाइल थमा देते हैं बच्चे बड़े मन से घंटो बैठकर मोबाइल की स्कीन पर देखते रहते हैं उनका बाहर जाना कम हो गया है। 

    आज कल के बच्चें अब मोबाइल के इतने शौकीन हैं कि उन्हें भोजन से अधिक फोन की जरूरत है प्रकृति से उनका जुड़ाव खत्म हो चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चों का अधिक मोबाइल देखना उनके स्वास्थ्य के लिए कितना प्रतिकूल है जी हाँ सही सुना आपने अगर आपका बच्चा अधिक समय तक फोन का उपयोग करता है तो उसका मानसिक रूप से बीमार होना स्वाभाविक है। यह मैं नहीं कह रही यह कह रहें हैं विशेषज्ञ –

    जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ –

    विशेषज्ञ का कहना है भले तकनीकी हमारे जीवन को सरल करती है लेकिन इसका अधिक उपयोग हमारे लिए बड़ा खतरा बन सकता है अगर कोई बच्चा ज्यादा देर स्मार्टफोन का उपयोग करता है तो अभिभावकों को सचेत रहने की आवश्यकता है क्योंकि यह आपके बच्चे को माइग्रेन, मानिसक पीड़ा या वर्चुअल आटिज्म का शिकार बना सकता है। 

    बच्चें जब वर्चुअल ऑटिज्म के शिकार होते हैं तो उनमे कई लक्षण प्रभावी रूप से दिखाई देते हैं, बच्चें अपने परिवार के लोगों से बातचीत करना नहीं  पसंद करते उनको अकेले रहना पसंद होता है।  वह देर तक एकांत में बैठ कर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइज का उपयोग करते हैं, अपनी प्रत्येक गतिविधि के साथ उनको मोबाइल की जरुरत होती है। समाज से उनकी दूरी बन जाती है , लोगों के साथ रहना या हंसी मजाक करना उनको रास नहीं आता और यदि कोई उनका फोन उनसे ले लेता है तो वह चिढ़ने लगते हैं। 

    वहीं अगर छोटे बच्चों को वर्चुअल आटिज्म होता है तो वह बच्चे बोलना, चलना और खड़े होना देर से शुरू करते हैं इसके आलावा मोबाइल का अधिक उपयोग करने वाले बच्चें भावना विहीन हो जाते हैं और उनका दिमाग रोबोटिक फॉर्म में काम करने लगता है। जानकारों का कहना है कि स्मार्ट फोन का अधिक उपयोग बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है बच्चों के विकास को स्थिर करता है, बच्चे समाजिक नहीं होते और उनको बचपन से ही मानसिक बीमारियां होती हैं।

  • World Food Safety Day 2023:जानें कैसे मनाया जाएगा World Food Safety Day

    हर साल जून माह की 7 तारीख का दिन वर्ल्ड फूड सेफ्टी डे के तौर पर मनाया जाता है। जिसका मकसद लोगों को फूड सेफ्टी के महत्व को समझाना है। शरीर के सेहतमंद बनाए रखने में खानपान का रोल सबसे खास होता है। लेकिन लोगों की फूड हैबिट्स और जरूरतों को देखते हुए अब कई सारी चीज़ों को बनाने और उगाने का तरीका बदल चुका है। उनमें तरह-तरह के केमिकल्स मिलाए जा रहे हैं। तो लोगों को दूषित भोजन और पानी के नुकसान के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 7 जून को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है।

    जुलाई 2017 में खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) सम्मेलन के 40वें सत्र में आपनाएं गए विश्व खाद सुरक्षा दिवस के प्रस्ताव पर दिसंबर 2017 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपना समर्थन व्यक्त किया। इसके बाद इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें सत्र की दूसरी समिति के समक्ष रखा गया, जिसे महासभा (UNGA) ने अपना लिया और 20 दिसंबर 2018 को हर साल 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाने की घोषणा की गई। 

    विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (World Food Safety Day) 2023 का उद्देश्य

    असुरक्षित खानपान से सेहत संबंधी कई सारी बीमारियां के होने का खतरा होता है। ऐसे में विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाने का मकसद हर एक व्यक्ति को पौष्टिक और संतुलित भोजन प्रदान करना है। इसके साथ ही खानपान से होने वाले खतरों को रोकना, मिलावटी चीज़ों का पता लगाना और इनके बारे में लोगों को बताकर उन्हें सेहत के प्रति जागरूक बनाना है। 

    विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (World Food Safety Day) 2023 महत्व

    टॉयफाइड की बीमारी दूषित जल और भोजन की वजह से होने वाली बीमारी है। जिससे हर साल सैकड़ों लोग प्रभावित होते हैं। बड़ों के साथ बच्चे भी अच्छी-खासी तादाद में खराब भोजन से होने वाली परेशानियों का शिकार होते हैं और कई बार तो उनकी जान भी चली जाती है।

    विश्व खाद्य सुरक्षा 2023 की थीम 

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन हर साल इस खास दिन को मनाने के लिए एक थीम डिसाइड करता है। इस साल यानी 2023 में इसकी थीम है ‘खाद्य मानक जीवन बचाते हैं (Food standards save lives)’। इस थीम के जरिए लोगों को खाने के लिए तय मानकों का महत्व समझाना है। पिछले साल यानी कि साल 2022 में इसकी थीम थी ‘सेफ फूड बेटर हेल्थ’।

  • चरम सुख का आनंद कैसे ले,अलग अलग सेक्स पोजिशन

    डेस्क रिपोर्ट;

    ओर्गाज़्म या चरमसुख बेहतर यौनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है हालांकि अभी भी इस दिशा में बहुत जानकारियों की तलाश बाक़ी है, ओर्गाज़्म पर होने वाली चर्चाओं ने अपनी वैश्विक उपस्थिति बना ली है।मानक परिभाषाओं के अनुसार  ओर्गाज़्म को कई बार सेक्सुअल एक्साइटमेंट की चरम अवस्था के तौर पर इंगित किया जाता है तो कई बार यह सेक्स के दौरान हासिल हुए असीम प्लेज़र और सेंसेशन के तौर पर देखा जाता है ।शरीर में जब एंडोर्फिन हॉर्मोन स्त्रावित या रिलीज़ होता है तो पूरी देह को बेहद अच्छा लगता है इस गुण की वजह से इस हॉर्मोन को फ़ील गुड हॉर्मोन भी कहा जाता है।

    इस हॉर्मोन के रिलीज़ होने के पास बहुत ख़ुशी, नींद और आराम का अहसास होता है. गौरतलब है कि चरम सुख या आर्गेस्म केवल सेक्स करने से नहीं हासिल होता है। यह हस्त मैथुन  से भी हासिल होता है। कई लोगों में ओर्गाज़्म डिसऑर्डर भी होता है। मसलन, पुरुषों में जाने वाला शीघ्रपतन ओर्गाज़्म डिसऑर्डर ही है। की यह समस्या औरतों को भी हो सकती है।अमेरिकन साइकोलॉ।जिकल एसोसिएशन के मुताबिक़ शरीर जब सबसे अधिक प्लेज़र की अवस्था में होता है तो इसमें ऐंठन पैदा होती है और पेरिनेल मसल के साथ-साथ जननांग एक लय में सिकुड़ते हैं। इस दरमियान एंड्रोफिन हॉर्मोन का स्त्राव होता है।मर्दों को जब चरमसुख मिलता है तो वे इजैकुलेट करते हैं अर्थात उनके लिंग से सीमेन का स्त्राव होता है, वहीं औरतों को जब ओर्गाज़म हासिल होता है तो उनकी योनी की अंदरूनी दीवारें सिकुड़ने लगती हैं।

    महिलाओ को कौन सी पसंद है सेक्स पोजिशन-

    सभी सेक्स पोजीशन्स को समान नहीं बनाया गया। हर शरीर अलग होता है, इसलिए स्वाभाविक रूप से, कुछ लोगों के लिए कुछ पोजीशन्स दूसरों की तुलना में बेहतर काम करती हैं। आप एक ऐसी पोजीशन पसंद कर सकते हैं जिससे अंदर तक पेनिट्रेट होता हो, या हो सकता है कि आपको वह पोजीशन पसंद आती हो जिसमें आप आपने पार्टनर की आंखों में आंखे डालकर देख सकें। महिलाएं वास्तव में जो सेक्स पोजीशन चाहती हैं, वे आपके अनुमान से कहीं अधिक विविध हैं।

    ​1. स्पूनिंग

    कैसे करें: इस पोजीशन में सेक्स करने के लिए आप सबसे पहले तो एक साइड लेट जाएं। आगे महिला पार्टनर लेटेगी और पीछे पुरुष पार्टनर। फिर पुरुष पीछे से महिला में प्रवेश कर सकता है। आपको अपने ऊपरी पैर को ऊपर उठाने की आवश्यकता हो सकती है, और इसे करते हुए आप लुब्रिकेंट का इस्तेमाल भी कर सकते हैं जिससे सेक्स करना आसान हो जाएगा।क्यों करना चाहिए: यह सेक्स पोजीशन शानदार है। खासकर सर्दियों के लिए । इस पोजीशन में आज सेक्स का खूब आनंद ले सकते हैं। इतना शारीरिक संपर्क आपको अच्छा और गर्म रखता है और यह सुबह के सेक्स के लिए बिल्कुल सही है। इसी के साथ ही आपको इस पोजीशन में सेक्स करने पर जी-स्पॉट और क्लिटोरल उत्तेजना मिलती है, इसलिए आप इस पोजीशन में सेक्स कर सकते हैं।

    ​2. सिटिंग सेक्स पोजीशन

    इसे कैसे करें: इस पोजीशन में सेक्स करना आसान नहीं है। इसमें पुरुष साथी अपने पैर क्रॉस कर के बैठता है और महिला साथी पुरुष के ऊपर बैठ सकती हैं। इसी दौरान पुरुष महिला में प्रवेश कर सकता है। इस पोजीशन में महिला का चेहरा पुरुष के चेहरे के बिल्कुल सामने होता है।इसे क्यों करना चाहिए: यह मूल रूप से एक सेक्स पोजीशन में गले लगाना है। जिसमें आप अपने हाथों और पैरों को उनके चारों ओर लपेट रहे हैं, और वे आपके साथ भी ऐसा ही कर रहे हैं। आपको अपनी पार्टनर को गले लगाना है और एक ही समय में सेक्स भी करना है। यह सुपर अंतरंग और सर्द दिनों के लिए एकदम सही सेक्स पोजीशन है।

    ​3. मोडिफाइड डॉगी स्टाइल

    इसे कैसे करें: यह सेक्स पोजीशन काफी शानदार है। इस पोजीशन में सेक्स करने के लिए आपको अपने ध्यान में डॉगी स्टाइल सेक्स पोजीशन को रखना है। इस पोजीशन में महिला अपने घुटनों और कोहनी के बल पर लेट जाएगी और फिर पुरुष पीछे से महिला में प्रवेश कर सकते हैं।ये क्यों करनी चाहिए: इस सेक्स पोजीशन में नियमित डॉगी की तुलना में अधिक शारीरिक संपर्क होता है जो इसे अंतरंग और गर्म दोनों बनाता है। इस पोजीशन को सर्दियों में जरूर आजमाना चाहिए। यह पोजीशन काफी बेहतर है और जिन्हें डॉगी स्टाइल पसंद है; उन्हें इस पोजीशन को भी जरूर ट्राई करना चाहिए।

    ​4. डॉगी स्टाइल

    यह कैसे करें: इस पोजीशन में सेक्स करने के लिए महिला पार्टनर को अपने घुटनों और हाथों के बल पर उल्टा बैठना है जिसके बाद पुरुष पीछे से महिला के अंदर प्रवेश कर सकते हैं।

    यह क्यों करना चाहिए: डॉगी स्टाइल सेक्स पोजीशन हमेशा ही शानदार होती है। महिलाओं को यह पोजीशन काफी ज्यादा पसंद होती है। साथ ही सर्दियों में भी इस पोजीशन का आनंद लिया जा सकता है।

    ​5. वूमेन ऑन टॉप

    इसे कैसे करें: इस पोजीशन में सेक्स करने के लिए महिला पुरुष के ऊपर आती हैं और पुरुष बिस्तर पर सीधे लेटते हैं। इस पोजीशन में सेक्स करने के लिए आपको आगे या पीछे की तरफ झुकना होता है। अगर आप आगे झुकेंगी तो आप बेहतर सेक्स कर पाएंगी।

    इसे क्यों करें: यह पोजीशन काफी अंतरंग है। इस पोजीशन में सेक्स करने पर पुरुषों को काफी आनंद प्राप्त होता है और महिलाएं भी इस पोजीशन में आराम महसूस कर पाती हैं और वह खुद सब कुछ नियंत्रण कर पाती है।

    प्रेग्नेंट होने के लिए महिलाओ की बेस्ट  सेक्स पोजीशन –

    ऑर्गेज्म के समय पुरुष के पेनिस से स्पर्म रिलीज होते हैं, जो महिला को प्रेग्नेंट करने के लिए पर्याप्त होते हैं। किसी भी खास सेक्स पोजीशन में प्रेगनेंसी के चांसेज नहीं बढ़ते हैं। हां, कुछ सेक्स पोजीशन अन्य से बेहतर जरूर होते हैं और इन पोजीशन में सेक्स करने से स्पर्म जल्दी और आसानी से एग तक पहुंच जाते हैं। इस लिहाज से डॉगी स्टाइल और मिशनरी पोजीशन को बढ़िया माना जाता है 

    आईए जानते है बेस्ट सेक्स पोजिशन

    1:मिशनरी पोजीशन(डॉगी स्टाइल)

    मिशनरी पोजीशन में महिला नीचे रहती है और पुरुष ऊपर ।ऐसा माना जाता है कि इस पोजीशन में स्पर्म को एग तक पहुंचने में आसानी रहती है, लेकिन इसके बारे में अब तक किसी तरह का शोध नहीं हुआ है, जो इसे साबित कर सके. हां, इंट्रा यूटेराइन इनसेमिनेशन  के समय स्पर्म को विशेष कैथेटर की मदद से महिला के यूट्रस में ट्रांसफर करते समय महिला को पीठ के बल लेटाया जाता है।एक शोध के अनुसार, जो महिला स्पर्म ट्रांसफर के बाद पीठ के बल 15 मिनट तक लेटी रहती है, उस महिला के गर्भवती होने की संभावना 27 प्रतिशत रहती है इसकी तुलना में स्पर्म ट्रांसफर के तुरंत बाद उठ जाने वाली महिलाओं में प्रेगनेंसी दर सिर्फ 18 प्रतिशत रहती है। इस आधार पर मिशनरी पोजीशन को कुछ हद तक बेहतर माना जा सकता है।