देश– भारत मे शाकाहारी और मांसाहारी को लेकर अक्सर बवाल छिड़ा रहता है। कोई कहता है कि मांसाहारी भोजन करना पाप है। तो कोई इसे बड़ी ही खुशी के साथ खाता है और बताता है कि यह स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है।
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जानें क्यों मनाया जाता है Right To Protein day
वहीं अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण की एक रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि भारत मे 75 फीसदी लोग ऐसे हैं। जिन्हें मांसाहारी भोजन करना पसंद है। यह लोग बड़े चाव के साथ मांसाहारी भोजन करते हैं। लेकिन इस सबके बीच एक बात जो सबको परेशान कर रही है लोगों में प्रोटीन की कमी होना। प्रोटीन की कमी के संदर्भ में भारत मे अभियान शुरू होने जा रहा है। जिसका नाम है राइट टू प्रोटीन–लोगों में होने वाली प्रोटीन की कमी के प्रति उन्हें जागरूक करने के उद्देश्य से Right To Protein अभियान की शुरुआत की गई। भारत में प्रत्येक वर्ष 27 फरवरी को Right To Protein day मनाया जाता है।इस कार्यक्रम में तहत लोगों को प्रोटीन रहित भोजन करने के लिए जागरूक किया जाता है। उन्हें बताया जाता है कि प्रोटीन हमारे स्वास्थ्य के लिए कितनी फायदेमंद होती है और प्रोटीन के मुख्य स्रोत कौन-कौन से हैं। इसके साथ ही उनके डेली रूटीन में प्रोटीन युक्त भोजन को शामिल करना होता है।इस बार प्रोटीन दिवस की थीम Easy Access to Protein for All’ रखी गई है। -
जानें कैसे बदलता है व्यक्ति का व्यवहार
ज्ञान– आप कैसे हैं। आप क्या करते हैं आपका आचरण कैसा है और आपकी संगत क्या है। यह सब आपके व्यवहार में दिख जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि आपका व्यवहार अपनी संगत से ही निर्मित होता है।
ज्ञानात्माओं का कहना है कि आप जैसे लोगों के मध्य रहते हैं। आप जिस प्रकार के विचारों के विषय मे सोचते हैं और आप जिस प्रकार से लोगों से बातचीत करते हैं। आपका व्यवहार वैसा ही हो जाता है।अगर आप अपने दिन की शुरुआत अच्छे विचारों के साथ करते हैं और उचित कार्यों में अपना ध्यान लगाते हैं। तो आपका जीवन उसी पथ पर आगे बढ़ता है। वहीं यदि आप नकारात्मक विचारों के इर्द गिर्द रहते हैं तो आपका व्यवहार उसी प्रकार का हो जाता है और आप सदैव परेशान रहते हैं।कैसे बनता है व्यवहार-
ज्ञानात्माओं का कहना है कि आपका व्यवहार आपके रोजमर्रा के जीवन पर निर्भर करता है। आप जैसे लोगों के मध्य रहते है आप उन्हीं की तरह व्यवहार करने लगते हैं। अतः आपकी संगत जैसी होगी आप वैसे ही हो जाएंगे। यदि आप अच्छे विचार वाले लोगों के मध्य रहते हैं। तो आपके विचार अच्छे होंगे और आप सकारात्मक रहेंगे।वहीं यदि आप किसी बुरे विचार वाले लोगों के मध्य रहते हैं। तो इसका अपके ऊपर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और आपके मन मे भी वैसे ही विचार आने लगते हैं।इसे हम ऐसे भी समझ सकते हैं। यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ रहते हैं। जो निरंतर इसी प्रयास में लगा रहता है कि वह क्या करे कि उसे अपार धन की प्राप्ति हो। तो आपकी ललक भी धन कमाने की ओर बढ़ती है। वहीं यदि आप ऐसे व्यक्ति के मध्य रहते हैं जो बार-बार यही सोचता है कि कैसे दूसरों का अहित करें तो आप भी दूसरों के अहित के विषय में विचार करने लगते हैं। -
पुरुष और स्त्री करते हैं सेक्स तो होती हैं ऐसी चीजें की उड़ जाएंगे होश
लाइफ स्टाइल- जिस प्रकार कौटिल्य(Acharya Chanakya) को अर्थशास्त्र के लिए जाना जाता है उसी प्रकार कामसूत्र ग्रन्थ(Kamasutra granth) को काम के लिए जाना जाता। कहते हैं सेक्स हमारे जीवन का अमुख अंग है इसके बिना मनुष्य के जीवन में कोई भाव नहीं है। यह दो लोगों के परस्पर मिलन का प्रमाण है और इससे दो लोगों के मध्य रिश्ता मजबूत होता है। वही कामसूत्र(Kamasutra) में सम्भोग(sex) को लेकर कई बड़े खुलासे किये गए हैं। कामसूत्र (According to kamsutra)के मुताबिक व्यक्ति अपनी मानसिक स्थिति के अनुरूप सेक्स करता है। सेक्स करने की जो व्यक्ति की क्रिया होती है उसके कुछ अमुख भेद हैं।
कामसूत्र के मुताबिक सेक्स के भेद-(according to kamsutra type of sex)मंद वेग-(slow sex)कामसूत्र (According to kamsutra)के मुताबिक यह ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति सेक्स (sex) के समय कम उत्तेजित होता है और उसके वीर्य(semen) कम निकलता है। वहीं वह स्त्री(woman) के नाखुक के निशान को सहने की शक्ति रखता है और सेक्स से अधिक उसके शरीर के स्पर्श को महसूस करता है।चण्डवेग-(chandveg)यह स्थिति मंद वेग के विपरीत होती है। इसमें पुरुष (male) बहुत अधिक उत्तेजित होता है उसके अंदर सेक्स(sex enjoyments) की तीव्र इच्छा होती है। वह स्त्री के साथ सेक्स(sex Life) का आनंद लेता हो इस स्थिति में स्त्री भी पुरुष के साथ एन्जॉय करती है।मध्यम वेग-(madhyamveg)यह स्थित मंद वेग से बेहतर होती है। इस स्थिति में पुरुष(male)के मन में सेक्स(sex Life) करने की इच्छा जाग्रत होती है लेकिन वह सेक्स(sex Life) को लेकर उसके मन में उठने वाले भाव को काबू करने में समर्थ होता है और अपनी भावनाओं(emotional touch) को किसी से भी छुपाने का गुण रखता है। -
इस तरह के लोग हमेशा रहते हैं गर्म
लाइफस्टाइल- आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya)ने प्रत्येक व्यक्ति के मार्गदर्शक हैं। चाणक्य के दिखाए मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन में सफलता हासिल करता है और सुखी जीवन व्यतीत करता है। आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) का मानना है कि व्यक्ति को अपने जीवन मे सदैव संतुलन बनाकर चलना चाहिए। वहीं जो व्यक्ति अपने जीवन मे संतुलित नहीं रहता है उसे सदैव समस्याओं से जूझना पड़ता है।
आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) का मानना है कि व्यक्ति के कर्म उसके सुख दुख का निर्धारण करते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनका दिमाग सदैव गर्म रहता है। यह लोग बिना आग के तपते और जलते रहते हैं। इन लोगों को अपने जीवन मे कभी भी सुख की प्राप्ति नहीं होती है और यह जीवन पर्यंत दुखों को भोगते हैं..जानें किस स्वभाव के लोग हमेशा रहते हैं गर्म-आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya quotes) का मानना के की अगर किसी व्यक्ति के अगर कोई व्यक्ति ऐसी जगह पर रहता है। जहां उसे उपयोगी संसाधनों की उपलब्धता नहीं है, जिसे बार-बार ख़राब भोजन का सेवन करना पड़े, जिसकी पत्नी सदैव गुस्से में रहे और जिसकी बेटी विधवा हो गई हो। ऐसे लोगों का दिमाग सदैव गर्म रहता है। यह बिना आग के जलते हैं इन्हें कहीं भी सुख नहीं मिलता है और यह लोग अपनी अन्तर्रात्मा में विलाप करते रहते हैं। -
स्त्री की अधिक सुंदरता में होता है यह काम?
लाइफस्टाइल- आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) ने जीवन से जुड़े हर पक्ष पर लोगों का मार्गदर्शन(guidence)किया है। आप जीवन मे किस मार्ग पर चलकर सफल(success) होंगे और आपका किस प्रकार का व्यवहार(behaviour) आपके लिए संकट दायक बन जाएगा। इन सभी पहलुओं पर आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya guide everyone) ने लोगों को सही मार्ग दिखाया है।
वहीं आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya statment about beautiful women) ने स्त्री की सुंदरता को लेकर बड़ी बात कही है। उनका मानना है कि अधिक सुन्दर संकट(beauty is problem) का कारण बनती है। अगर कोई अधिक सुंदर(beautiful) है तो वह परिवार को परेशानी में डाल सकता है। क्योंकि सीता बेहद खूबसूरत थीं। उनकी सुंदरता के कारण ही सीताहरण हुआ था। वहीं आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) के मुताबिक कोई भी वस्तु यदि अत्यधिक है तो वह संकट का कारण बनती है।आचार्य चाणक्य (According to Acharya Chanakya beauty is one of the reason setaharana)का कहना है- सीता हरण सीता(seta haran) की अत्यधिक सुंदरता के कारण हुआ। रावण का अंत उसके अपार घमंड के कारण हुआ। अधिक दयालुता और दानी स्वभाव के कारण राजा बलि को बंधन में बंधना पड़ा। अतः व्यक्ति को अति की ओर झुकाव नहीं रखना चाहिए। क्योंकि किसी भी चीज की अति कष्टदायक होती है और अति के कारण व्यक्ति संकट में पड़ता है। -
व्यक्ति की इस आदत से पता चलता है उसका व्यवहार
आध्यात्मिक- आचार्य चाणक्य(Chanakya niti) ने जीवन को सकारात्मक(positive) दिशा दिखाने के लिए चाणक्य नीति(Chanakya niti) के माध्यम से व्यक्ति का मार्गदर्शन(guidence) किया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) के बताए मार्ग पर चलता है और अपने जीवन को सकारात्मक(positivity) दिशा की ओर ले जाता है। उस व्यक्ति के भीतर परिस्थितियों से लड़ने का स्मार्थ्य विकसित होता है।
आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) का मानना था कि अगर आप किसी व्यक्ति को परखना चाहते हैं। तो उसके त्याग को परखें। क्योंकि जो व्यक्ति त्याग कर सकता है। वह आपको कभी धोखा नहीं दे सकता और उसके जीवन का एकमात्र लक्ष्य समर्पण होता है।आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya)का मानना है कि जिस प्रकार सोने की परख उसे पीटकर, काटकर, गर्म करके होती है। उसी प्रकार व्यक्ति की परख उसके त्याग से होती है। व्यक्ति का आचरण कैसा है। उसका व्यवहार(behaviour) कैसा है। उसमें कौन से गुण हैं। यह सब व्यक्ति के त्याग से जाना जा सकता है। -
स्त्री जब स्त्री के साथ करती है ?
लाइफ:- आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) ने जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर अपना मत रखा है। आज संसार का प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन मे सुखी रहना चाहता है। वहीं अगर कोई अपना जीवन आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) के मार्गदर्शन(Guidence) के मुताबिक व्यतीत करता है तो उसे कष्टों का सामना कम करना पड़ता है।
आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) ने वैसे तो व्यक्ति के स्वभाव को लेकर कई रहस्यों से पर्दा हटाया है। वहीं उन्होंने स्त्री के बारे में एक बड़ी बात कही है। आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) का मानना है कि अगर कोई स्त्री पवित्र है, सकारात्मक(positive) रहती है और अपने जीवन मे खुश रहती है। तो स्त्री ही उस स्त्री के साथ ईर्ष्या का व्यवहार रखती है। स्त्री उससे जलती है और उसका अहित सोचती हैं।आचार्य चाणक्य(Chanakya Granth) के मुताबिक पवित्र स्त्री की दुश्मन स्त्री ही होती है। वह उसकी पवित्रता पर सवाल उठाती है और उससे ईर्ष्या करती है। निरंतर दूसरे लोगो से उसकी चुंगली करती रहती है।आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya)ने कहा है कि जो लोग मूढ़ होते हैं वह बुद्धिमान व्यक्ति से ईर्ष्या करते हैं। अपवित्र स्त्री पवित्र स्त्री से ईर्ष्या करती है। बदसूरत औरत खूबसूरत औरत से ईर्ष्या करती है और यह लोग ईर्ष्या की आग में निरंतर जलते रहते हैं। -
अगर सेक्स के दौरान पुरुष में होती है यह चीज, तो स्त्रियां करती हैं नफरत
लाइफस्टाइल- सेक्स लाइफ(Sex Life) का सबसे अनोखा अनुभव(experience) है। कहते हैं सेक्स से दो लोगों के आपसी संबंध(strong relationship) मजबूत होते हैं और मानसिक तनाव(stress) से आराम मिलती है। वहीं सेक्स(sex) को लेकर कामसूत्र ग्रंथ(kamsutra granth) में कई बड़े खुलासे किए गए हैं। जिन्हें अगर आप जान लेते हैं तो आप अपनी सेक्स लाइफ(sex Life) को बेहतर तरीके से जी सकते हैं।
कामसूत्र ग्रंथ(kamsutra granth) के मुताबिक जब स्त्री और पुरूष(male) के मध्य संभोग(Sex) होता है। तो दोनो ही उसका आनंद(enjoy) लेते हैं। वहीं आज तक यह समझना मुश्किल रहा है कि आखिर स्त्री संभोग(women Sex) में इतना लीन क्यों होती है और उसे किस तरह के पुरूष सेक्स(male Sex) के लिये चाहिए होते हैं।कामसूत्र(kamsutra) में कहा गया है कि स्त्री पुरुष(male-female) के चुम्बन(kiss), आलिंगन(hug) की वजह से सेक्स(Sex) की ओर आकर्षित होती है। वहीं स्त्री पुरुष जिस सुख के लिये सेक्स(why male and female sex) करते हैं उसे आज तक कोई नहीं समझ पाया है। क्योंकि वास्तव में यह उनका मानसिक आनंद(enjoy) होता है जिसे शब्दों में उल्लेखित नहीं किया जा सकता है।पुरुष कब हो जाते हैं संतुष्ट और स्त्री को किस तरह के पुरुष नहीं पसन्द-आचार्य ओघालिक(Acharya ogholik) के मुताबिक जब पुरुष स्खलित(male semen) हो जाता है। तो उसकी उत्तेजना खत्म हो जाती है। इसके बाद उसका मन सेक्स(Sex) से हट जाता है और उसे स्त्री की आवश्यकता नहीं रहती है। लेकिन स्त्री(female) इससे बिल्कुल अलग होती है। वह इतने में संतुष्ट(satisfaction) नहीं होती है।क्योंकि स्त्री(female) को ऐसे पुरुष पसन्द होते हैं। तो तेजी से और देर तक सेक्स(sex) करने का सामर्थ्य रखते हैं। वह देर में स्खलित(semen) होते हैं और स्त्री की इच्छा के मुताबिक उसके साथ सेक्स करते रहते हैं।वहीं अगर कोई पुरुष जल्दी ही स्खलित(semen) हो जाता है। सेक्स(sex) से स्त्री को संतुष्ट(satisfaction) नहीं कर पाता है और बार-बार सेक्स के दौरान थका महसूस करता है। स्त्री ऐसे पुरुषों(male satisfaction) से संतुष्ट नहीं रहती हैं और इनसे नफ़रत(hate) करती हैं। -
वो महिला जो सेक्स के बाद अपने प्रेमी को देती थी मौत
लाइफस्टाइल- इतिहास(History) में क्रूरता के कई साक्ष्य मिल जाएंगे। ऐसे राजा महाराजाओं की कहानियों इतिहास(History) में मुद्रित हैं जिन्होंने अपने स्वार्थ के लिए अपने भाई-बहन, पिता, चाचा हर किसी के साथ छल-कपट किया।
लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला(women) के बारे में बताने जा रहे हैं। जो सुंदरता(beauty) में हर किसी को मात देती थी। उसे देखकर ऐसा प्रतीत होता था मानों वह कोई अप्सरा(Apaara) हो। लेकिन उसकी क्रूरता से हर कोई भयभीत था। कहा जाता है कि यह ऐसी क्रूर रानी थी जिसे किसी से भी प्रेम नहीं था। यह अपने प्रेमियों को सेक्स(Sex) करने के पश्चात मौत देती थी।जानें कौन थी क्रूर रानी-यह रानी मिस्र की थीं इनका नाम क्लियोपेट्रा था। यह बेहद खूबसूरत थी। हर कोई इनकी खूबसूरती का दीवाना था। कहते हैं कि लोग इन्हें कभी नजर उठाकर नहीं देखते थे क्योंकि जो एक दफा इन्हें देख लेता वह इनके प्रेम में मदहोश हो जाता था।लेकिन इनके अंदर काबिलियत का भंडार था। बुद्धि बेहद पैनी थी और यह सभी को आकर्षित कर लेती हैं। इन्हें कई भाषाएं आती थी। यह पुरुष और महिलाओं दोनों को अपनी भाषा और अपने सौंदर्य से अपनी ओर आकर्षित कर लेती थीं।यह 14 साल की उम्र से अपने पिता के साथ सत्ता पर हावी थीं। वहीं 18 साल की उम्र में यह रानी बन गईं। कई राजाओं ने जब इनपर हावी होना चाहा तो इन्होंने सेक्स को अपना हथियार बना लिया।अब यह हर किसी को अपने सौंदर्य का दीवाना बनाती और अपने विद्रोही को अपने प्यार के जाल में फसा कर सेक्स के बाद मौत के घाट उतार देती थीं। इतिहास के मुताबिकजूलियस सीजन के साथ रातें गुजारकर वह सिंहासन को वापस पाने में सक्षम बनी, दूसरे प्रेमी मार्क एंटनी के साथ भी उसने ऐसा ही किया। -
ऐसे लोगों के लिए स्त्री नहीं भोग का विषय
लाइफ: स्त्री को पुरूष अपनी जरूरत का सामान समझता है। पुरूष को लगता है स्त्री सिर्फ उसके भोग की वस्तु है। स्त्री का जन्म पुरुष की शरीरिक अभिलाषा को शान्त करने के लिए हुआ है। लेकिन आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) ने चाणक्य ग्रंथ(Chanakya granth) में कुछ ऐसे पुरुषों का वर्णन किया है। जो स्त्री को भोग की वस्तु नहीं समझते हैं।
आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) के मुताबिक जो पुरूष अपनी कामनाओं पर विजय प्राप्त कर लेता है। उसके लिए स्त्री भोग की वस्तु नहीं होती है। ऐसे पुरुष स्त्री का सम्मान करते हैं। स्त्री के साथ खड़े होते हैं। कामनाओं को जो पुरुष जीत लेता है वह अपने घर की स्त्रियों को बराबरी का दर्जा देता है और उसका यह स्वभाव उसके घर में सुख-समृद्धि बनाए रखता है।आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) के मुताबिक- जो व्यक्ति अपने स्वरूप को जान लेता है। उसे स्वर्ग की अभिलाषा नहीं होती है। जिस व्यक्ति ने अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया है उसे संसार की किसी भी वस्तु का मोह नहीं रहता है। वहीं अगर कोई व्यक्ति अपनी कामनाओं को नियंत्रित करता है उसे कभी भी स्त्री के भोग की अभिलाषा नहीं होती है।