Category: health-lifestyle

  • लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है सेहत पर भारी, पाचन तंत्र से जुड़ी बेहद गंभीर समस्या है आइबीएस

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    पाचन तंत्र से जुड़ी इस समस्या को मेडिकल साइंस की भाषा में आइबीएस यानी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम कहा जाता है। इसे स्पैस्टिक कोलन, इर्रिटेबल कोलन, म्यूकस कोइलटिस जैसे नामों से भी जाना जाता है। इसमें बड़ी आंत की तंत्रिकाएं और मांसपेशियां अति संवेदनशील हो जाती हैं। आमतौर पर हमारी आंतों की मांसपेशियां एक निश्चित गति में फैलती और सिकुड़ती हैं, लेकिन कुछ लोगों में आंतों का यह संकुचन सामान्य से अधिक लंबा और अधिक मजबूत होता है, जिससे उनके पेट में बहुत तेज दर्द महसूस होता है और भोजन के प्रवाह में भी रूकावट आती है। अगर भोजन का प्रवाह बहुत धीमा हो तो कब्ज़ और इसके तेज़ होने पर लूज़ मोशन की समस्या हो जाती है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस बीमारी से अधिक प्रभावित होती हैं। कुछ लोगों में इसके लक्षण इतने हल्के होते हैं कि उन्हें इसका पता नहीं चलता, लेकिन कुछ लोग को बहुत ज्यादा परेशानियों से गुजरना पड़ता है जिससे डेला रूटीन प्रभावित होता है।

    प्रमुख लक्षण

    • पेट में दर्द

    • पेट का फूलना

    • गैस बनना

    • डायरिया या कब्ज़

    • स्टूल में म्यूकस

    • टॉयलेट जाने का निश्चित समय न होना।

    • हर व्यक्ति में इसके अलग लक्षण हो सकते हैं।

    क्या है वजह

    • आंतों की संरचना में गड़बड़ी

    • इंफेक्शन

    • फूड एलर्जी

    • भोजन को पचाने वाले वाले गुड बैक्टीरिया की संख्या में कमी।

    • जंक फूड

    • सिगरेट, शराब का बहुत ज्यादा सेवन।

    • मिर्च मसाले का ज्यादा सेवन आदि।

    बचाव एवं उपचार

    • गुनगुना पानी पिएं।

    • पर्याप्त नींद लें।

    • तनाव कम लें।

    • भोजन में तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ाएं। दूध, दही, छाछ जैसी चीज़ें बहुत फायदेमंद होती हैं।

    • मिर्च-मसाले, घी-तेल और मैदे से बनी चीज़ों से दूर रहें।

    • भोजन में फाइबरयुक्त फलों और सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं।

    • अगर लगातार दो महीने तक इस समस्या के लक्षण नजर आएं तो डॉक्टर से संपर्क करें।

     

    (डॉ. सौमित्र रावत, एचओडी डिपार्टमेंट गैस्ट्रोलॉजी, लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन, सर गंगाराम हॉस्पिटल, दिल्ली से बातचीत पर आधारित)

  • जानिए – कैसे करें पहचान, कोविड-19 के नए स्ट्रेन के लक्षण पुराने कोरोना वायरस से हैं अलग

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    नई दिल्ली।  साल 2020 ने हमें कई नए शब्दों के बारे में सिखाया और कई ऐसे शब्दों से दोबारा पहचान करवाई, जिनका इस्तेमाल हमें रोज़ करना पड़ेगा, ये हमने कभी नहीं सोचा था। इनमें क्वारेंटीन, महामारी, शारीरिक दूरी, आइसोलेशन आदि जैसे शब्द शामिल हैं। वहीं, साल 2021 ने हमारे सामने इस वायरस के नए रूप, मयूटेंट्स और स्ट्रैन्स रख दिए हैं।

    भारत में भी कोरोना वायरस के नए रूप के मामले ते़ज़ी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में हमारे लिए ये समझना बेहद ज़रूरी हो गया है कि पुराने कोविड-19 संक्रमण से नए वायरस के लक्षण कैसे अलग हैं। हमने ये सुना है कि यूके का वैरिएंट या केंट वैरिएंट- B.1.1.7- बाकी वैरिएंट के मुकाबले ज़्यादा आसानी और ते़ज़ी से फैलता है। अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को बे एरिया में भी डबल म्यूटेंट स्ट्रेन पाया गया है, ये वही है जिसका कहर इस वक्त भारत में भी देखा जा रहा है।

    कोविड-19 के लिए नेशनल टास्क फोर्स के अनुसार, SARS-CoV2 वायरस के 7,000 वेरिएंट हैं में 24,000 से अधिक म्यूटेशन हैं। ये सभी वेरिएंट या म्यूटेशन संक्रमित नहीं करते या संक्रमण को नहीं फैलाते, लेकिन किस स्ट्रेन का क्या लक्षण है, ये अब भी साफ नहीं हुआ है।

    हालांकि, कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन में, लोगों में नए लक्षण देखे जा सकते हैं। आमतौर पर कोविड-19 के रोगियों में ये लक्षण दिखते हैं:

    • मांसपेशियों में दर्द

    • सूखी और लगातार खांसी होना

    • स्वाद और सुगंध का महसूस न होना

    लेकिन कई मरीज़ इन लक्षणों को महसूस नहीं भी कर सकते हैं, और उनमें इस तरह के अन्य लक्षण भी देखे जा सकते हैं:

    • कनजंक्टीवाइटिस

    • गला ख़राब होना

    • सिर दर्द

    • चकत्ते

    • पेट में दर्द

    • हाथों और पैरों की उंगलियों के रंग का बदल जाना

    बच्चों में इन लक्षणों का होना संभावित मल्टीसिस्टम इंफ्लामेंट्री सिंड्रोम (MIS-C) का संकेत हो सकता है, जो एक घातक कोविड का परिणाम हो सकता है। सबसे अच्छी सलाह यही है कि अगर आप इनमें से कोई लक्षण देखते हैं, तो मरीज़ और परिवार की सेहत के लिए बेहतर यही है कि मरीज़ को आइसोलेट कर दिया जाए। इसके बाद डॉक्टर से संपर्क करें और टेस्ट के लिए अपॉइंमेंट लें। इस वक्त लक्षणों की जल्दी पहचान करने और फौरन एक्शन ले लेने से जान बचाई जा सकती है।

    Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

  • पूर्ण होंगी मनोकामनाएं, आज शुक्र प्रदोष को इस विधि से करें भगवान शिव की पूजा

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    आज चैत्र मास का शुक्र प्रदोष व्रत है। प्रदोष के दिन व्रत रखा जाता है और प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि विधान से पूजा की जाती है। एक मास में दो प्रदोष व्रत आते हैं, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में। आज का प्रदोष व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष का है। जागरण अध्यात्म में आज हम आपको बता रहे हैं कि भगवान शिव की पूजा कैसे करें और पूजा का मुहूर्त क्या है।

    शुक्र प्रदोष पूजा मुहूर्त

    आज आपको भगवान शिव की पूजा करने के लिए प्रदोष काल में 02 घंटे 16 मिनट का समय मिलेगा। आज आप शाम को 06 बजकर 43 मिनट से रात 08 बजकर 59 मिनट के मध्य कभी भी भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ आज प्रात: 03 बजकर 15 मिनट से हुआ है। इसका समापन 10 अप्रैल को प्रात: 04 बजकर 27 मिनट पर होगा।

    प्रदोष व्रत की पूजा सामग्री

    प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा करने के लिए आवश्यक सामग्री में 5 प्रकार के मौसमी फल, दही, घी, गुड़, शक्कर, गन्ने का रस, गाय का दूध, शहद, चंदन, बेलपत्र, अक्षत, गुलाल, अबीर, धतूरा, भांग, मदार, जनेऊ, कलावा, कपूर, अगरबत्ती, दीपक आदि होते हैं।

    प्रदोष व्रत की पूजा विधि

    जो लोग आज शुक्र प्रदोष का व्रत हैं या जिनको प्रदोष व्रत की पूजा करनी है, वे प्रदोष काल के शुभ मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा करेंगे। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पहले के समय को कहा जाता है। सबसे पहले शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें या फिर घर पर ही शिवलिंग का जलाभिषेक करें। इसके बाद भगवान ​शिव को चंदन तिलक लगाएं। उनको अक्षत्, बेलपत्र, भांग, धतूरा, मदार, फल, पुष्प, शहद समेत सभी सामग्री अर्पित कर दें। अर्पण के समय ओम नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करते रहें। अब शिव चालीसा का पाठ करें। उसके बाद घी के दीपक या कपूर से शिव जी की आरती करें। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित कर दें। पूजा के समय आप शिव जी के मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं।

    शिव जी की आरती के बाद प्रदोष व्रत की पूजा सम्पन्न हो जाती है। बाद में आप भी पारण करके व्रत को पूरा कर लें। शिव जी की कृपा से सभी कष्ट मिट जाते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

  • बढ़ती गर्मी में आप भी हो सकते हैं फूड पॉइज़निंग का शिकार, बचाव के लिए रखें इन बातों का ध्यान

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    गर्मियों में सुबह का बना खाना अगर फ्रिज में नहीं रखा तो शाम तक वो खाने लायक नहीं रह जाता। गर्म करने के बाद भी इन्हें खाना पॉसिबल नहीं होता। फिर भी लोग लापरवाही और बचा हुआ खाना बर्बाद न हो इस वजह से ऐसा खाना खा लेते हैं और उसके बाद उल्टी, दस्त, बुखार से परेशान हो जाते हैं। तो आपको बता दें ये फूड प्वॉइजनिंग की वजह से होता है। फूड प्वॉइजनिंग के बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं। इसलिए मौसम को देखते हुए खान-पान की आदतें बदलें। फूड प्वॉइजनिंग को गैस्ट्रोएंट्राइटिस के नाम से भी जाना जाता है।

    फूड प्वॉइजनिंग की वजहें

    फूड प्वॉइजनिंग कई वजहों से हो सकती है। आमतौर पर यह बैक्टीरिया या वायरस के कारण होती है।

    • बासी, अधपका खाना खाने से,

    • गंदे बर्तनों में पकाए गए खाने से,

    • फ्रिज में रखा खाना गर्म किए बिना खाने से।

    • दूध, पनीर, दही जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स को फ्रिज में न रखने से।

    चीज़ें जो फैलाती हैं फूड प्वॉइजनिंग 

    पानी

    किसी भी चीज़ में बैक्टीरिया को पनपने के लिए पानी की जरूरत होती है। इसलिए गीली चीज़ों में प्वॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।

    टाइम

    गर्मियों में रात के बने हुए खाने को अगर आपने फ्रिज में नहीं रखा तो इसे सुबह खाना अवॉयड करें। सात घंटे में फूड प्वॉइजनिंग के एक बैक्टीरिया से 20 लाख बैक्टीरिया बन सकते हैं।

    न्यूट्रिशन वाले फूड्स

    अंडा, मीट, दूध, पनीर जैसी ज्यादा न्यूट्रिशन वाली चीज़ों में बैक्टीरिया भी ज्यादा तेजी से फैलते हैं।

    फूड प्वॉइजनिंग से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

    • सब्जियों और फल को अच्छी तरह से धोने के बाद ही खाएं।

    • खाना बनाने और खाने से पहले हाथ जरूर धोएं।

    • मीट और सब्जियों को काटने के लिए अलग-अलग चॉपिंग बोर्ड रखें।

    • काटने के बाद हमेशा इसे धोकर ही रखें।

    • रोटी बनाने के बाद चकला-बेलन को अच्छी तरह धोकर रखें।

    • बाहर से खाना ऑर्डर करने पर मिलने वाले एक्स्ट्रा प्याज और चटनी को खाने से बचें।

  • कोरोना वैक्‍सीन लगवाने के बाद भी बरतनी होगी सावधानी, तभी जीत सकेंगे ये जंग

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    पिछले साल कोरोना संक्रमण के आने के बाद से ही दुनियाभर के देश वैक्सीन बनाने की तैयारी में जुट गए थे। जिससे इस वायरस के बढ़ते प्रसार को रोका जा सके। क्योंकि डॉक्टर्स से लेकर एक्सपर्ट्स तक का मानना है कि वैक्सीन ही फिलहाल कोरोना को रोकने का एकमात्र कारगर जरिया है। लेकिन अभी कई ऐसे मामले देखने-सुनने को मिल रहे हैं जिसमें वैक्सीन लेने के बाद भी लोग संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। तो इसके लिए वैक्सीन को दोष देना पूरी तरह से गलत है। बल्कि इसकी मुख्य वजह लोगों की लापरवाही है। तो संक्रमण से बचे रहने के लिए वैक्सीन लगने के बाद भी लोगों को मास्क पहनना , हाथ धोना जारी रखना चाहिए, साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन करना चाहिए।

    वैक्सीन के बाद संक्रमण की दर बेहद कम

    न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपी रिसर्च के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर में 8121 कर्मचारियों ने कोविड-19 का वैक्सीन लगवाया था। इनमें से महज 4 में बाद में संक्रमण देखने को मिला। वहीं, 14,990 कर्मचारियों को यूसी सैन डिएगो हेल्थ एंड डेविड जेफेन स्कूल ऑफ मेडिसिन में टीका लगाया गया, दूसरी डोज के कुछ हफ्तों बाद संक्रमण के सिर्फ 7 मामले सामने आए।

    वैक्सीन इसलिए है जरूरी

    अगर आपको लगता है कि वैक्सीन लगवाने से संक्रमण का खतरा पूरी तरह से खत्म हो जाता है तो ये गलत है। कोई भी मौजूदा वैक्सीन इंफेक्शन से 100% सुरक्षा की गारंटी नहीं देती।

    वैक्सीनेशन के बाद आपकी बॉडी वायरस के जानलेवा परिणामों से बचाने का काम करती है। इसलिए वैक्सीन लगवाने के बाद भी कोरोना के लिए जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

    जरा सी लापरवाही आपको तो संक्रमित करेगी ही साथ ही औरों को भी।

    वैक्सीन कोविड-19 इंफेक्शन के बढ़ते प्रसार को घटाती है, इसलिए इसकी तय खुराक लेना जरूरी है।

    वैक्सीन लेने के बाद भी संक्रमित होने की वजहें

    • अपने आप को इम्यून समझकर मास्क पहनने, हाथ धोने, सैनेटाइजर का यूज करने और सोशल डिस्टेंसिंग पर सुरक्षा उपायों का पालन नहीं करते।

    • वैक्सीनेशन के बाद डॉक्टर्स द्वारा बताए गए जरूरी एहतियातों का पालन नहीं करते।

    • इम्यून सिस्टम कमजोर होने की वजह से।

    • वैक्सीन की दूसरी खुराक समय पर नहीं लेना या लगवाना ही नहीं।

    • 80 से 90 परसेंट आबादी के टीकाकरण तक सर्तकता बनाए रखना जरूरी।

  • Proning से बढ़ जाएगा Oxygen Level, बच सकेगी कोरोना मरीज की जान, जानिए क्या है Process

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    देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के प्रकोप के चलते हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। बड़ी संख्या में कोरोना के मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है, लेकिन देशभर में ऑक्सीजन की भारी कमी के चलते कई मरीजों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने सांस लेने में जिन मरीजों को तकलीफ हो रही है, उनके लिए प्रोनिंग के कुछ आसान तरीके सुझाए हैं। प्रोनिंग प्रक्रिया से कोरोना के मरीजों को अपना ऑक्सीजन लेवल सुधारने में काफी मदद मिल सकती है। खासकर वो मरीज, जो होम आइसोलेशन में रह रहे हैं। प्रोनिंग किसी मरीज को पीठ घुमाकर सटीक व सुरक्षित तरीके से पेट के बल लाने की प्रक्रिया है, जिससे चेहरा नीचे की तरफ कर लेटने की मुद्रा में रहे।

    क्या होती है प्रोनिंग?

    • प्रोनिंग एक तरह की प्रक्रिया है जिससे मरीज अपना ऑक्सीजन लेवल खुद ही मेनटेन कर सकता है।

    • प्रोन पोजीशन ऑक्सीजनेशन तकनीक 80 परसेंट तक कारगर है।

    • यह प्रक्रिया मेडिकली स्वीकार्य है, इसे पेट के बल लेटकर पूरी करना होता है।

    • इससे सांस लेने में सुधार होता है और ऑक्सीजन लेवल में सपोर्ट मिलता है।

    कब करें यह प्रक्रिया

    • इस प्रक्रिया को तब अपनाना है जब कोरोना मरीज को सांस लेने में परेशानी हो रही हो और ऑक्सीजन लेवल 94 से कम हो जाए।

    • अगर आप होम आइसोलेशन में हैं तो समय-समय पर अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहें।

    • बुखार, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर भी समय-मय पर मापते रहें।

    • समय पर सही प्रक्रिया के साथ प्रोनिंग कई लोगों की जान बचाने में मददगार है।

    कैसे करें

    प्रोनिंग प्रक्रिया के लिए मरीज को पेट के बल लिटा दें।

    गर्दन के नीचे एक तकिया रखें फिर एक या दो तकिए छाती और पेट के नीचे बराबर रखें और दो तकिए पैर के पंजे के नीचे रखें।

    30 मिनट से लेकर 2 घंटे तक इस पोजीशन में लेटे रहने से मरीज को फायदा मिलता है।

    ध्यान रहे हर 30 मिनट से दो घंटे में मरीज के लेटने के पोजिशन को बदलना जरूरी है।

    इसके बाद मरीज को

    नहीं गिरता ऑक्सीजन लेवल

    • इस प्रक्रिया में फेफड़ों में खून का संचार अच्छा होने लगता है।

    • फेफड़ों में मौजूद फ्लूइड इधर-अधर होने लगता है।

    • इससे लंग्स में ऑक्सीजन आसानी से पहुंचती रहती है।

    • ऑक्सीजन का लेवल भी नहीं गिरता है।

    कब न करें प्रोनिंग

    • खाना खाने के तुरंत बाद ही प्रोनिंग की प्रक्रिया न करें।

    • खाना खाने के कम से कम एक घंटे बाद ही इस प्रक्रिया को अपनाएं।

    • अगर आप प्रेग्नेंट हैं, गंभीर कॉर्डिएक कंडीशन है तो भी इसे मत करें।

    • शरीर में स्पाइनल से जुड़ी कोई समस्या है या फ्रैक्चर हो तो इस प्रक्रिया को न अपनाएं।

  • इन तरीकों से रखें दिल का ख्याल क्योंकि कोरोना वायरस से डैमेज हुए हार्ट की रिकवरी है मुश्किल

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    कोरोनावायरस के खतरे के बीच लोगों को अपनी सेहत के प्रति ज्यादा जागरूक रहने की जरूरत है। खास तौर पर हमें अपने हार्ट के मरीजों को अपनी हेल्थ को लेकर ज्यादा अलर्ट रहना होगा। डॉक्टर्स का कहना है कि हार्ट के मरीजों में अगर कोविड-19 का संक्रमण हो जाए तो रिस्क 30 से 40 परसेंट बढ़ जाता है। कोविड वायरस का हार्ट के अंदर मसल्स तक पहुंचकर उसे डैमेज करने का खतरा बढ़ जाता है। जिससे रिकवरी भी जल्दी नहीं होती है। वायरस की वजह से हार्ट पंप सही से नहीं कर पता है, जिससे कुछ मरीजों में पर्मानेंट डैमेज का भी खतरा रहता है। तो बहुत ही जरूरी है कुछ बातों का ध्यान रखना जिससे भयानक स्थिति से बचा जा सके और वक्त रहते निपटा जा सके।

    30 मिनट की वॉक है वरदान

    डॉक्टर्स का कहना है कि मात्र 15-30 मिनट की वॉक आपके लिए वरदान है। इसलिए रोजाना पैदल चलने की आदत डालें।

    साथ ही तनाव को दूर करने के लिए योगा का सहारा ले सकते हैं। जो हार्ट के मरीजों के लिए मददगार होता है।

    डाइट का रखें ध्यान

    • हार्ट के मरीजों को अपनी डाइट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। हार्ट के मरीज भोजन में नमक और वसा की मात्रा कम कर लें, जिससे कोलेस्ट्रॉल न बढ़ने पाए।

    • टाइम से सोएं और टाइम से जागें।

    • हेल्दी डाइट लें, जंक फूड से बचें और खूब पानी पिएं।

    • ताजी सब्जियां और फल ज्यादा से ज्यादा मात्रा में लें।

    • अपनी प्रतिदिन की दिनचर्या में समय पर नाश्ता, लंच और समय पर डिनर करें।

    इनका भी रखें ध्यान

    • तंबाकू, शराब जैसे मादक पदार्थों से हमेशा दूरी बनाए रखें।

    • साइकिल चलाना, नियमित रूप से टहलना और तैरना, ये काम अवश्य करने चाहिए।

    • ऐसे खाद्य तेल का चयन करें, जिसमें शून्य ट्रांस फैटी एसिड्स हों।

    • रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें।

    • कैफीन की मात्रा कम करें और काली या हरी चाय पिएं।

  • ब्राइड मेकअप के लिए पॉर्लर जा रही हैं, तो ध्यान रखें संक्रमण से बचने के लिए ये बातें

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    लिमिटेड गेस्ट्स के साथ कोरोना महामारी में भी शादियां का दौर जारी है। तरह-तरह के खूबसूरत लिबास और मेकअप में दुल्हनें अपनी तस्वीरें पोस्ट कर रही हैं। तो अगर आपकी शादी का मुहूर्त भी इस बीच है और पॉर्लर में मेकअप की बुकिंग करवा रखी है तो उसे कैंसल कराने की जरूरत नहीं, बस कुछ बातों का खास ध्यान रखना होगा जिससे आप इस खतरनाक संक्रमण से बची रहें। तो आइए जानते हैं इसके बारे में…

    अवॉयड करें इन्हें

    मेकअप स्पंज 

    सिर्फ कोरोना के वक्त ही नहीं, नॉर्मली भी किसी दूसरे का मेकअप स्पंज करने से स्किन इंफेक्श होने का खतरा बना रहता है। तो इसका खासतौर से ध्यान रखें। स्पंज में छोटे-छोटे होल्स होते हैं जिससे इसमें बहुत ही आसानी से यीस्ट और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। जिससे फंगल इन्फेक्शन, मुंहासे और भी कई दूसरी तरह की स्किन से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा बना रहता है।

    मेकअप ब्रश

    स्पंज की तरह ही दूसरों पर इस्तेमाल किया हुआ ब्रश भी इस्तेमाल न करें। फ्रेश ब्रश और स्पंज के लिए अलग से पेमेंट करने की जरूरत पड़े तो कर दें कम से कम संक्रमण का खतरा तो कम रहेगा।

    काजल और मस्कारा

    अच्छी क्वालिटी का मस्कारा और काजल अगर आपके मेकअप किट में है तो उसे ही पॉर्लर जाते वक्त कैरी कर लें क्योंकि  पलकों पर मौजूद बैक्टीरिया मस्कारा ब्रश या काजल में लग जाते हैं। जिससे आंखों की समस्याएं जैसे लालिमा, आंखों में दर्द और कार्निया में सूजन आदि हो सकती है।

    हेयर ब्रश

    ये तो बचपन से ही बताया जाता है कि दूसरों का हेयर ब्रश कभी नहीं इस्तेमाल करना चाहिए। इससे भी स्किन इंफेक्शन होने की संभावना रहती है। तो कोरोना काल में तो इस बात का ध्यान रखना और जरूरी हो जाता है।

    लिपस्टिक 

    बेशक पॉर्लर में आपसे ज्यादा लिपस्टिक का कलेक्शन रहता है लेकिन बेहतर होगा कि लहंगे पर सूट करने वाला शेड आप खुद ही खरीद लें। जिससे आप संक्रमण से बच सकती हैं। क्योंकि पॉर्लर में एक ही लिपस्टिक कई सारी दुल्हनों के मेकअप में इस्तेमाल किया जाता है जो बहुत ही हानिकारक होता है।

  • कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में बेहद मददगार है प्लाज्मा, डोनेट करने से पहले जान लें ये जरूरी बातेें

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    अगर आप कोरोना से ठीक हो चुके हैं तो आपके पास मौका है किसी की जान बचाने का। आपके प्लाज्मा से आईसीयू में भर्ती कोरोना मरीज की जान बचाई जा सकती है। कोरोना की पहली वेव में हजारों लोगों की जान इससे बचाई गई हैं। आइए जानते हैं कि क्या है प्लाज्मा थ्योरी और इसके जरिए कैसे किसी की जान बचा सकते हैं।

    कैसे डोनेट कर सकते हैं प्लाज्मा?

    प्लाज्मा थेरेपी के लिए सबसे पहले दान करने वाले का टेस्ट होगा। टेस्ट के जरिए ये देखा जाएगा कि उनके खून में किसी प्रकार का संक्रमण तो नहीं है। मसलन शुगर, एचआईवी या हेपेटाइटिस तो नहीं है। अगर ब्लड ठीक पाया गया तो उसका प्लाज्मा निकालकर आईसीयू के पेशेंट को दिया जाए तो वो ठीक हो सकता है।

    कैसे काम करता है प्लाज्मा?

    कोरोना पॉजिटिव मरीजो में इलाज के बाद ब्लड में एंटीबॉडीज आ जाती हैं। डॉक्टरों के अनुसार अब उसके ब्लड से प्लाज्मा निकालकर कोरोना पेशेंट को दिया जाए तो वो उसे ठीक होने में हेल्प करेगा। इस तरह ठीक हो गए पेशेंट से बीमार को देकर उसे ठीक कर सकते हैं। ये एंटी बॉडीज मरीज के ब्लड में मिलकर कोरोना से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है।

    ये लोग दान कर सकते हैं प्लाज्मा

    • कोरोना पॉजिटिव हुए हों

    • अब निगेटिव हो गए हों

    • ठीक हुए 14 दिन हो गए हों

    • स्वस्थ महसूस कर रहे हों और प्लाज्मा डोनेट करने के लिए उत्साहित हों

    • उनकी उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच हो

    ऐसे लोग नहीं दे सकते प्लाज्मा

    • जिनका वजन 50 किलोग्राम से कम है

    • महिला जो कभी भी प्रेग्नेंट रही हो या अभी हो

    • डायबिटीज के मरीज जो इंसुलिन ले रहे हों

    • ब्लड प्रेशर 140 से ज्यादा हो

    • ऐसे मरीज जिनको बेकाबू डायबिटीज हो या हाइपरटेंशन हो

    • कैंसर से ठीक हुए व्यक्ति

    • जिन लोगों को गुर्दे/हृदय/फेफड़े या लिवर की पुरानी बीमारी हो।

    ऐसे हुई थी प्लाज्मा थेरेपी की शुरुआत

    नोबल प्राइज विनर जर्मन वैज्ञानिक एमिल वॉन बेरिंग ने प्लाज्मा थेरेपी की शुरुआत की थी। इसके लिए उन्होंने खरगोश में डिप्थीरिया का वायरस डाला, फिर उसमें एंटीबॉडीज डाली गई। इसके बाद वो एंटीबॉडीज बच्चों में डाली गई। इसलिए एमिल को सेवियर ऑफ चिल्ड्रेन कहा जाता है।

  • 18+ आबादी के टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन आज से, यहां जानें पूरा प्रोसेस और अन्य डिटेल्स

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    देश में आगामी एक मई से 18 साल से ज्यादा एज ग्रूप के लोगों का वैक्सीनेशन शुरू हो जाएगा। इसके लिए रजिस्ट्रेशन 28 अप्रैल से शुरू हो रहा है। इस नई व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने नई पॉलिसी बनाई है। पात्र सभी भारतीय नागरिक वैक्सीन लगवाने के लिए को-विन एप (Cowin APP) cowin.gov.in या फिर आरोग्य सेतु एप (Aarogya Setu App) पर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं पूरा प्रॉसेस की आप कैसे वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

    को-विन पोर्टल के जरिए ऐसे करें रजिस्ट्रेशन

    • को-विन वेबसाइट पर रजिस्टर या साइन-इन पर क्लिक करें।

    • अपना मोबाइल नंबर डालें और फिर गेट ओटीपी पर क्लिक करें। ओटीपी डालकर वैरीफाई पर क्लिक करें।

    • इसके बाद ‘रजिस्टर फॉर वैक्सीनेशन’ पेज में अपने फोटो आईडी प्रूफ के साथ अपनी जानकारी दर्ज करें।

    • रजिस्ट्रेशन करने के बाद आपको अपॉइंटमेंट शेड्यूल करने का ऑप्शन मिलेगा। शेड्यूल बटन पर क्लिक करें।

    • अपना पिन कोड दर्ज करें और फिर सर्च पर क्लिक करें। इसके बाद उस पिन कोड के साथ जोड़े गए सेंटर आपको दिखाई देने लगेंगे।

    • आप डेट और टाइम सिलेक्ट कर के कंफर्म पर क्लिक कर दें।

    नोटः एक यूजर एक लॉगिन से चार मेंबर्स को वैक्सीनेशन के लिए रजिस्टर कर सकता है और आसानी से अपॉइंटमेंट को रिशेड्यूल भी कर सकता है।

    आरोग्य सेतु एप से भी रजिस्ट्रेशन

    • सबसे पहले आरोग्य सेतु ऐप को ओपन करें और फिर होम स्क्रीन पर दिए गए कोविन टैब पर क्लिक करें।

    • वैक्सीनेशन रजिस्ट्रेशन को सिलेक्ट करें और फिर अपना फोन नंबर एंटर करें। आपको एक ओटीपी प्राप्त होगा और उससे खुद को वैरिफाई कर सकते हैं।

    • ‘रजिस्टर फॉर वैक्सीनेशन’ खुलेगा, जहां अपनी सभी जानकारी देने के बाद आप ‘रजिस्टर’ पर क्लिक करें।

    • रजिस्टर करने के बाद आपको अपॉइंटमेंट को शेड्यूल करने का ऑप्शन मिलेगा। नाम के बगल में दिए ‘रजिस्टर’ बटन पर क्लिक करें।

    • अपना पिन कोड डालें और सर्च पर क्लिक करें। ऐसा करने के बाद आपको सेंटर्स दिखाई देंगे।

    • आप डेट-टाइम को सिलेक्ट कर के कंफर्म पर क्लिक करें। ऐसा करने के बाद आपका अपॉइंटमेंट बुक हो जाएगा।