Category: health-lifestyle

  • आज़माएं ये 6 आयुर्वेदिक उपाय परेशान हैं नींद ना आने से

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    नई दिल्ली। क्या आपकी रातें भी करवटें बदलने में गुज़रती हैं? अगर ऐसा है तो यह एक बड़ी समस्या है और यकीन मानिए आप ऐसे अकेले इंसान नहीं हैं, जिन्हें यह परेशानी है। अब आप सोच रहे होंगे कि हम आज आपसे नींद की बात क्यों कर रहे हैं? तो जनाब! आज यानी 18 मार्च को वर्ल्ड स्लीप डे है, जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है।

    वर्ल्ड स्लीप डे विशेषज्ञों और समाज के वरिष्ठ नागरिकों के एक समूह द्वारा 2007 में शुरू किया गया था। इसके बाद से वर्ल्ड स्लीप सोसाइटी हर साल एक वैश्विक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती है।

    क्यों मनाया जाता है कि वर्ल्ड स्लीप डे

    नींद की दिक्कत को ख़त्म करने और समाज पर नींद से जुड़ी समस्याओं के बोझ को कम करने के उद्देश्य से हर साल वर्ल्ड स्लीप डे का आयोजन किया जाता है। इसे वर्ल्ड स्लीप सोसाइटी (WSS) द्वारा होस्ट किया गया है, जो अमेरिका में एक गैर-लाभकारी संगठन है।

    दुनियाभर में इस वक्त 10 करोड़ से ज़्यादा लोग नींद से जुड़ी हुई समस्याओं से जूझ रहे हैं। ये मामूली दिक्कत एक गंभीर रूप ले लेती है, क्योंकि करीब 80 फीसद से ज़्यादा लोग इसका इलाज नहीं करा पाते।

    अच्छी नींद के लिए घरेलू उपाय हैं फायदेमंद

    1. लाइफस्टाइल सुधारें: दिनचर्या में सुधार बहुत ही ज़रूरी है। समय पर सोने के लिए बिस्तर पर जाना अच्छी नींद के लिए ज़रूरी है। अगर समय पर सोने की कोशिश नहीं करेंगे, तो अनिद्रा की समस्या और बढ़ सकती है।

    2. गर्म दूध: दूध में ट्रिपटोपॉन होता है, जो कि नींद को बढ़ाने में मदद करता है। रोज़ाना रात में सोने से पहले गर्म दूध पीने से अच्छी नींद आती है। सोने से पहले एक कप गर्म दूध में आधा चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाकर पी लें।

    3. तेल मालिश: सिर और पैर पर भृंगराज के तेल से मालिश करने से अच्छी नींद आने में मदद मिलती है। इस तेल से मालिश करने पर नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है।

    4. जीरा: औषधीय गुणों से भरपूर जीरा आयुर्वेद में नींद के लिए फायदेमंद माना गया है। जीरे में मेलाटोनिन होता है, जो अनिद्रा और सोने से संबंधित अन्य विकारों को ख़त्म करता है। मेलाटोनिन एक ऐसा हार्मोन है जो सोने में मदद करता है। सोने से पहले जीरे की चाय अच्छी नींद में मदद कर सकती है। दूध में एक चम्मच जीरे पाउडर डालकर पी लेने से रात को अच्छी नींद आ सकती है।

    5. जायफल: गर्म दूध तो फायदेमंद होती ही है, इसमें अगर जायफल पाउडर मिलाकर पिय जाए, तो नींद न आने की समस्या भी दूर होगी।

    6. केसर: नींद का इलाज करना है, तो केसर भी इसमें आपकी मदद कर सकती है। एक कप गर्म दूध में दो चुटकी केसर मिलाकर इसे पिएं। केसर में ऐसे घटक मौजूद होते हैं, जो प्रतिरक्षा तंत्र को फायदा पहुंचाते हैं।

    Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

  • संबंधों में पुल बनाएं खाई नहीं, पढ़ें दो भाइयों की यह प्रेरक कथा

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    आजकल के जीवन में स्वयं की प्राथमिकता ज्यादा हो गई। हम स्वयं को दूसरों से पहले रखकर सबकुछ सोचने लगते हैं। स्वयं के चक्कर में कई बार हम दूसरे को नीचा दिखाने लगते हैं या फिर गुस्से में छोटी-छोटी बातों पर मुंह फेर लेते हैं। छोटी-छोटी बातों से संबंधों में दरार पैदा हो जाती है। हमलोगों को छोटी बातों को नजरअंदाज कर देना चाहिए क्योंकि व्यक्ति के संबंध महत्वपूर्ण होते हैं। जागरण अध्यात्म में आज आपको एक प्रेरक कथा के बारे में बताते हैं, जिसे पढ़कर आप संबंधों के महत्व को समझ सकते हैं।

    एक गांव में दो भाई रहते थे। वे दोनों मिलकर खेती किया करते थे। उनकी मेहनत से फसलों की पैदावार अच्छी होती थी, जिससे उन दोनों की अच्छी आमदनी हो जाती थी। उस आमदनी को वे दोनों भाई आपस में बांट लिया करते थे। एक दिन दोनों भाइयों में एक किसी छोटी-सी बात पर झगड़ा हो गया।

    गुस्से में आकर बड़े भाई ने आधा खेत अपने कब्जे में कर लिया और बीच में खाई खुदवा दी, ताकि छोटा भाई उसके खेत में न आ सके। यह देखकर छोटे भाई ने भी तुरंत एक बढ़ई को बुलाया और कहा, मेरे खेत के किनारे लकड़ी की ऊंची-ऊंची बाड़ लगा दो, ताकि मुझे बड़े भाई की शक्ल भी न दिखाई दे।

    बढ़ई बोला- कल सुबह तक काम पूरा हो जाएगा। बढ़ई को दोनों भाइयों के बारे में पता चला। फिर उसके दिमाग में एक विचार आया। उसने दोनों भाइयों के बीच की खाई को पाटने के लिए एक तरकीब निकाली। अगली सुबह जब छोटा भाई अपने खेत में गया, तो देखा कि वहां बाड़ की जगह खाई पर लकड़ी का एक पुल बना हुआ था। यह देखकर वह गुस्सा हो गया।

    वह बढ़ई को डांटने ही वाला था कि उस जगह पर उसका बड़ा भाई भी आ गया। उसकी आंखों में पश्चाताप के आंसू थे। वह बोला, भाई, मैंने तुम्हारे साथ कितना अलगाव किया, संबंध तोड़ लेने के प्रयास किए, लेकिन तुमने इतना कुछ हो जाने के बाद भी मुझसे रिश्ता खत्म नहीं किया और संबंधों को जोड़े रखने के लिए पुल बनवा दिया।

    बड़े भाई ने संकल्प के साथ कहा कि दोनों भाइयों के बीच आई इस खाई को अब हम पाट देंगे और फिर से साथ मिलकर खेती करेंगे। बढ़ई की समझदारी से दोनों भाइयों के बीच संबंध सुधर गए और फिर वे मेहनत करके अच्छी पैदावार पाने लगे।

    कथा का सार

    नासमझी में आकर हम संबंधों में कड़वाहट पैदा कर लेते हैं, जिसे थोड़ी-सी समझदारी से दूर किया जा सकता है और आपस में प्रेम और सहयोगभाव से रहा जा सकता है।

  • Dash Diet फॉलो करें ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने और वजन घटाने के लिए

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    नई दिल्ली। आमतौर पर वजन जंक फ़ूड खाने और वर्कआउट नहीं करने की वजह से बढ़ता है। साथ ही यह बीमारी आनुवांशिकी भी होती है। इससे छुटकारा पाने के लिए लोग कड़ी मेहनत करते हैं। इसके बावजूद उन्हें वजन कम करने में कोई खास मदद नहीं मिलती है। विशेषज्ञों की मानें तो वजन कम करने से पहले वजन संतुलित करना बेहद जरूरी है। चूंकि लोग वजन कम करने के लिए डॉयटिंग करने लगते हैं, जिसमें रोजाना भूखे-प्यासे रहते हैं। इससे वजन कम नहीं होता है, बल्कि शरीर कमजोर हो जाती है। आधुनिक समय में लोग बढ़ते वजन को कंट्रोल करने के लिए एटकिंस डाइट, Mediterranean डाइट, केटोजेनिक डाइट, वेगन डाइट, डॉक्टर दीक्षित डाइट और इंटरमिटेंट फॉस्टिंग फॉलो करते हैं। अगर आप भी बढ़ते वजन से परेशान हैं और वजन कंट्रोल करना चाहते हैं, तो डैश डाइट को अपना सकते हैं।  इसे फॉलो करने से बढ़ते वजन को कंट्रोल किया जा सकता है। आइए, इसके बारे में सब कुछ जानते हैं-

    हाल के दिनों में डैश डाइट बेहद पॉपुलर हुआ है। इस डाइट से न केवल वजन, बल्कि उच्च रक्तचाप को भी कंट्रोल किया जा सकता है। Harvard T.H. Chan School of Public Health की मानें तो डैश डाइट को पहली बार साल 1996 में American Heart Association की वार्ता में पेश किया गया था। इसके बाद साल 1997 में New England Journal of Medicine में डैश डाइट को पब्लिश किया गया था। एक शोध के जरिए खुलासा हुआ है कि डैश डाइट हाई बीपी के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। इस शोध में 456 लोगों को शामिल किया गया था।

    वजन घटाने में फायदेमंद

    इस डाइट में साबुत अनाज, फल, सब्जियां, नट्स, डेयरी प्रोडक्ट्स, मछली, बीन्स आदि चीजों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। साथ ही डैश डाइट में सोडियम यानी नमक और जंक फूड्स से परहेज अथवा बहुत कम सेवन करना पड़ता है। डैश डाइट को दो चरणों में बांटा गया है। एक चरण में रोजाना 1500 सोडियम लेने की सलाह दी जाती है। वहीं,  दूसरे चरण में 2300 तक सोडियम सेवन करने की इजाजत होती है। इससे वजन कम  करने में मदद मिलती है।

  • 20 मार्च 2021 का राशिफल:, तुला राशि वालों का आर्थिक पक्ष मजबूत होगा बिजनेस में प्रतिष्ठा बढ़ेगी

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    12 राशियों में से हर व्यक्ति की अलग राशि होती है, जिसकी मदद से व्यक्ति यह जान सकता है कि उसका आज का दिन कैसा होगा? ज्योतिष में ग्रहों की चाल से शुभ और अशुभ घड़ियां बनती हैं, जो हमारे जीवन को प्रभावित करती हैं। अगर आपकी राशि के बारे में आज का दिन अच्छा है, तो आप उसे सेलिब्रेट कर सकते हैं, वहीं अगर आज का दिन आपके लिए खराब है तो आप पंडित जी के दिए गए सुझावों को अपनाकर कुछ अच्छा कर सकते हैं।

    आज का पंचांग

    दिन: शनिवार, फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष, सप्तमी का राशिफल।

    आज का राहुकाल: प्रात: 09:00 बजे से 10:30 बजे तक।

    आज का दिशाशूल: पूर्व।

    विशेष: सूर्य का उत्तरगोल में प्रवेश।

    राशिफल

    मेष: दूसरे से सहयोग लेने में सफलता मिलेगी। उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। शिक्षा प्रतियोगिता के लिए अधिक परिश्रम करना होगा।

    वृष: पारिवारिक समस्या से ग्रसित हो सकते हैं। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी। पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। किसी कार्य के संपन्न होने से प्रभाव में वृद्धि होगी।

    मिथुन: आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। चली आ रही समस्या का समाधान होगा। भावुकता में नियंत्रण रखें। पारिवारिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे।

    कर्क: उपहार या सम्मान में वृद्धि होगी। रिश्तों में मधुरता आएगी। किसी कार्य के संपन्न होने से आपके प्रभाव तथा वर्चस्व में वृद्धि होगी। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी।

    सिंह: व्यावसायिक सफलता मिलेगी, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। संतान के कारण चिंतित रहेंगे। संयम से काम लें। किया गया पुरुषार्थ सार्थक होगा। मधुर संबंध बनेंगे।

    कन्या: ससुराल पक्ष का सहयोग रहेगा। व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। धन, यश, कीर्ति में वृद्धि होगी। पिता या धर्म गुरु का सहयोग मिलेगा। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे।

    तुला: आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। रिश्तों में निकटता आएगी। पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद होगी, लेकिन सचेत रहें। व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

    वृश्चिक: गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। संतान के दायित्व की पूर्ति होगी, लेकिन कोई ऐसा घटना भी घट सकती है जो आपके हित में न हो। संयम बरतना जरूरी है।

    धनु: किया गया पुरुषार्थ सार्थक होगा। जीवनसाथी का सहयोग एवं सानिध्य मिलेगा। रिश्तों में निकटता आएगी। पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। आर्थिक मामलो में प्रगति होगी।

    मकर: आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। शिक्षा प्रतियेागिता के क्षेत्र में चल रहा प्रयास फलीभूत होगा। किसी कार्य के संपन्न होने से आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कुछ नए संबंध बनेंगे।

    कुंभ: रचनात्मक प्रयास फलीभूत होगा। व्यावसायिक मामलों में प्रगति होगी। शासन सत्ता का सहयोग रहेगा। जीविका के क्षेत्र में प्रगति होगी। किया गया पुरुषार्थ सार्थक होगा।

    मीन: पारिवारिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। उपहार या सम्मान का लाभ मिल सकता है।

  • जानिये होलिका दहन की कथा, होलिका दहन कब है

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    होली का त्यौहार आने में कुछ ही दिन शेष हैं। इस वर्ष होली 29 मार्च, सोमवार को पड़ रही है। इस हिसाब से होलिका दहन रविवार 28 मार्च 2021 को मनाया जाएगा। होलिका दहन का मुहूर्त रविवार को सुबह 06 बजकर 37 मिनट से लेकर शाम 08 बजकर 56 बजे तक का है। होलिका दहन को होलिका दीपक और छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। इसे होली से एक रात पहले मनाया जाता है। मान्यता है कि होली के त्यौहार पर होलिका पूजा करने से सभी प्रकार के भय पर विजय प्राप्त होती है। होलिका दहन को लेकर एक कथा प्रचलित है जिसकी जानकारी हम आपको यहां दे रहे हैं।

    होलिका दहन की पौराणिक कथा:

    सबसे लोकप्रिय कथा भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद और दानव होलिका के बारे में है। प्रह्लाद राक्षस हिरण्यकश्यप और उसकी पत्नी कयाधु का पुत्र था। हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु का शत्रु था। वह नहीं चाहता था कि प्रह्लाद भगवान विष्णु की पूजा करे। वह अपने पुत्र भगवान विष्णु का भक्त होने के खिलाफ था। एक दिन, उसने अपनी बहन होलिका की मदद से अपने बेटे को मारने की योजना बनाई। होलिका के पास एक दिव्य शॉल थी। होलिका को यह शॉल ब्रह्मा जी ने अग्नि से बचाने के लिए उपहार में दिया था। होलिका ने प्रह्लाद को लालच दिया कि वो प्रचंड अलाव में उसके साथ बैठे। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा के कारण, दिव्य शाल ने होलिका के बजाय प्रह्लाद की रक्षा की। इसलिए दानव होलिका जलकर राख हो गई और प्रह्लाद अग्नि से बाहर निकल आया। इसलिए इस त्यौहार को होलिका दहन के नाम से जाना जाता है।

    होलिका दहन का महत्व:

    होलिका दहन का महत्व अत्याधिक है। मान्यता है कि इस दिन समाज की समस्त बुराईयों का अंत होता है। यह बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय का सूचक है। इस दिन गांव में लोग देर रात तक जागते हैं और होली के गीत गाते हैं तथा नाचते हैं।

    डिसक्लेमर

    ‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।’  

  • 24 घंटे में सामने आए 59 हजार से अधिक मामले, कोरोना का फिर टूटा रिकॉर्ड

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    नई दिल्ली। देश में कोरोनावायरस को लेकर दिन-ब-दिन स्थिति खराब होती जा रही है। पिछले 24 घंटों में देश में 59,118 नए मामले दर्ज हुए हैं, जो कि अक्टूबर 2020 के बाद से अब तक के सबसे ज्यादा दैनिक मामले हैं। इसके साथ ही अब देश में मामलों की संख्या 1,18,46,652 तक पहुंच गई है। पिछले 2 हफ्तों से मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, नए मामलों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार महाराष्ट्र और पंजाब हैं। यहां रोजाना बड़ी संख्या में नए मामले दर्ज हो रहे हैं। देश में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार लगातार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए काम कर रही है।

    इसी अवधि में 257 लोगों की मौत भी हुई है। इससे इस जानलेवा वायरस के कारण मरने वालों की संख्या 1,60,949 पर पहुंच गई है। देश में सक्रिय मामले भी बढ़कर 4,21,066 हो गए हैं। एक दिन में 32,987 लोगों के ठीक होने के बाद अब तक बीमारी से उबरे लोगों की संख्या 1,12,64,637 हो गई है।

    बता दें कि 16 जनवरी से शुरू हुए सामूहिक टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 5.55 करोड़ कोरोना वैक्सीन डोज दिए जा चुके हैं। वहीं सरकार ने 1 अप्रैल से 45 साल की उम्र से ज्यादा के सभी लोगों को वैक्सीन देने की घोषणा की है

  • जानें इस माह के व्रत एवं त्योहार, अप्रैल में है चैत्र नवरात्रि, राम नवमी, शीतला अष्टमी, पापमोचिनी एकादशी

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    हिन्दुओं का बड़ा त्योहार होली का समापन हो गया है और अब अंग्रेजी कैलेंडर का चौथा माह अप्रैल दो दिन बाद से प्रारंभ होने वाला है। हालांकि हिन्दू कैलेंडर का नववर्ष और पहला माह चैत्र होली के दिन से ही प्रारंभ हो गया है। चैत्र माह में हिन्दुओं का सबसे प्रसिद्ध पर्व नवरात्रि और राम नवमी आने वाली है। अप्रैल माह में गुड फ्राइडे, ईस्टर डे, शीतला अष्टमी, पापमोचिनी एकादशी, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, आवस्या, पूर्णिमा, चैत्र नवरात्रि, राम नवमी, महावीर जयंती, हनुमान जयंती, कामदा एकादशी जैसे महत्वपूर्ण व्रत एवं त्योहार आने वाले हैं। जागरण अध्यात्म में आज हम जानते हैं कि ये व्रत एवं त्योहार कब और किस दिन पड़ने वाले हैं। अप्रैल माह में हनुमान जयंती भी है और राम नवमी भी। हनुमान जी के साथ ही साथ उनके आराध्या श्री राम प्रभु का भी जन्मदिवस है।

    अप्रैल 2021 के व्रत एवं त्योहारों की सूची

    02 अप्रैल: दिन: शुक्रवार: गुड फ्राइडे

    04 अप्रैल: दिन: रविवार, ईस्टर डे, शीतला अष्टमी

    07 अप्रैल: दिन: बुधवार, पापमोचिनी एकादशी

    09 अप्रैल: दिन: शुक्रवार, प्रदोष व्रत

    10 अप्रैल: दिन: शनिवार, मासिक शिवरात्रि

    11 अप्रैल: दिन: रविवार, चैत्र अमावस्या

    12 अप्रैल: दिन: सोमवार, रमजान प्रारंभ

    13 अप्रैल: दिन: मंगलवार, घटस्थापना, चैत्र नवरात्रि प्रारंभ

    14 अप्रैल: दिन: बुधवार, वैसाखी, चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी पूजा, मेष संक्रांति

    15 अप्रैल: दिन: गुरुवार: चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन: चंद्रघंटा पूजा

    16 अप्रैल: दिन: शुक्रवार: विनायक चतुर्थी, चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन: कुष्मांडा पूजा

    17 अप्रैल: दिन: शनिवार: चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन: स्कन्दमाता पूजा

    18 अप्रैल: दिन: रविवार: चैत्र नवरात्रि का छठा दिन: कात्यायनी पूजा

    19 अप्रैल: दिन: सोमवार: चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन: कालरात्रि पूजा

    20 अप्रैल: दिन: मंगलवार: चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन: महागौरी की पूजा, दुर्गा अष्टमी, महाष्टमी

    21 अप्रैल: दिन: बुधवार: राम नवमी, भगवान राम का जन्म दिवस।

    22 अप्रैल: दिन: गुरुवार: चैत्र नवरात्रि पारण

    23 अप्रैल: दिन: शुक्रवार: कामदा एकादशी

    24 अप्रैल: दिन: शनिवार: शनि प्रदोष

    25 अप्रैल: दिन: रविवार: महावीर जयंती

    27 अप्रैल: दिन: मंगलवार: चैत्र पूर्णिमा, हनुमान जयंती

    30 अप्रैल: दिन: शुक्रवार: संकष्टी चतुर्थी

  • जानिए 7 फायदे, गर्मी में इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ ही बॉडी को कूल भी रखती है दही की लस्सी

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    नई दिल्ली। गर्मी में हमारा डाइट पैटर्न पूरी तरह बदल जाता है, हम खाने से ज्यादा पीने पर ज़ोर देते हैं। प्यास इतनी ज्यादा लगती है कि हम ज्यादा से ज्यादा ठंडे जूस और लस्सी पीना पसंद करते हैं। आप जानते हैं कि गर्मी में दही की लस्सी सेहत के लिए बेहद उपयोगी है। गर्मी में दही पोषक तत्वों का ख़ज़ाना है, इसमें विटामिन, कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, मैग्नीशियन, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल आदि गुण मौजूद रहते हैं जो हमारी मांसपेशियों व हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी हैं। गर्मी में दही की लस्सी ना सिर्फ आपको हाइड्रेट रखती है बल्कि कई बीमारियों का उपचार भी करती है। आइए जानते हैं गर्मी में दही की लस्सी पीने के कौन-कौन से फायदे हैं।

    ब्लड प्रेशर कंट्रोल करती है:

    लस्सी में मैग्नीशियम, पोटैशियम, प्रोटीन, एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल होने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है। गर्मी में ब्लड प्रेशर के मरीज इसे अपनी डाइट में शामिल करें।

    इम्यूनिटी इंप्रूव करती है:

    दही में प्रोबायोटिक, गुड़ बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं जो हमारा इम्यून सिस्टम दुरुस्त रखते हैं। गर्मी में हम कई बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं ऐसे में दही की लस्सी हमें बीमारियों से लड़ने की ताकत देती है।

    वज़न कंट्रोल करती है:

    कम कैलोरी व फैट की लस्सी का एक गिलास रोजाना पीने से वजन कंट्रोल किया जा सकता है। इसे पीकर आप दिनभर एनर्जेटिक महसूस करते हैं।

    गर्मियों में ज्यादा मसालेदार, ऑयली फूड खाने से पाचन तंत्र बिगड़ने लगता है, ऐसे में ठंडी लस्सी आपके पाचन को दुरुस्त करती है। इसके सेवन से पेट को ठंडक मिलती है और पेट में जलन, अपच, एसिडिटी से भी छुटकारा मिलता है।

    कब्ज से निजात दिलाती है लस्सी:

    डायरिया और कब्ज की समस्या से राहत दिलाती है लस्सी। दही में गुड बैक्टीरिया पाए जाते हैं जिसके सेवन से कब्ज से निजात मिलती है।

    बॉडी को ठंडा रखती है:

    लस्सी गर्मी में बॉडी के तापमान को ठीक रखती है। इसमें पानी व लैक्टिक एसिड अधिक होने से शरीर का तापमान सही रहता है।

    प्रेग्नेंसी में भी है उपयोगी:

    प्रेग्नेंसी के दौरान लस्सी इम्यूनिटी बूस्ट करती है। पोषक व एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर लस्सी शरीर को हाइड्रेट रखती है। ये मांसपेशियों व हड्डियों को मजबूत करने के साथ पाचन तंत्र दुरुस्त रखती है। लस्सी मां और बच्चे दोनों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

  • इन 6 आसान तरीकों से करें इम्यूनिटी को मज़बूत कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच

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    नई दिल्ली।  भारत इस वक्त कोरोना वायरस की दूसरी लेहर से जूझ रहा है। ऐसे में हर्बर्ट स्पेंसर का फ्रेज़ “सबसे योग्य ही ज़िंदा रहता है” (survival of the fittest) याद आता है। चिकित्सा समुदाय ने इस महामारी को चुनौती के रूप में लिया, इसे लड़े और अब वैक्सीन ड्राइव के साथ आगे बढ़ रहे हैं, कोविड वायरस के कई तरह के रूप अब लोगों को तेज़ी से संक्रमित कर रहे हैं, ऐसे में एक विश्वसनीय उपचार की कमी ज़रूर महसूस हो रही है।

    पिछले साल जिस वक्त पूरी दुनिया लॉकडाउन से गुज़र रही थी, उस स्थिति को देखें, तो कई लोग इस संक्रमण से हार गए, लेकिन उससे ज़्यादा लोग जिनकी इम्यूनिटी मज़बूत थी, उन्होंने इस वायरस को मात दी और स्वस्थ हो गए। हम सभी को ये याद रखने की ज़रूरत है, कि एक अच्छी और मज़बूत इम्यूनिटी वायरस से लड़ सकेगी।

    1. एंटीऑक्सीडेंट्स का सेवन 

    एंटीऑक्सीडेंट्स यौगिक होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करते हैं और मुक्त कणों से लड़ते हैं, जो अन्यथा शरीर में स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करते हैं और नष्ट करते हैं। खासतौर पर मौसमी ताज़ा फल और सब्ज़ियां, इन फाइटर्स से भरपूर होते हैं। शरीर में विटामिन-सी का स्तर बढ़ाने का आसान सा तरीका है, खट्टे फलों का सेवन करना और श्वसन पथ के संक्रमण से लड़ने के लिए यह सबसे प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट है। अपनी डाइट में अमरूद, अनार और बैरीज़ को शामिल करें। विटामिन-ई, बादाम, एवकाडो और हेज़लनट में पाया जाता है, जो बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से लड़ता है और प्रतिरक्षा प्रणाली में प्राकृतिक हत्यारे की कोशिकाओं के उत्पादन में सुधार के अलावा एंटीबॉडी की एकाग्रता को भी बढ़ाता है।

    गाजर, शकरकंद और लाल व पीली मिर्च में पाया जाने वाला बीटा कैरोटीन, और जामुन, केले, नट्स, बीन्स, टमाटर में पाया जाने वाला फ्लेवोनोइड, में सबसे प्रभावी एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो प्रतिरक्षा को बढ़ावा देते हैं।

    2. औषधियां और मसाले 

    हल्दी, अदरक और काली मिर्च जैसे मसाले एंटी-इंफ्लामेंट्री व इम्यूनोमॉड्यूलेट्री गुणों के लिए जाने जाते हैं। लौंग, दालचीनी, चक्रफूल, इलाइची जैसे मसाले अपनी खुशबू से न सिर्फ खाने का ज़ायका बढ़ाते हैं, बल्कि कई तरह की बीमारियों से भी बचाते हैं। इनके अलावा तुलसी और गिलॉय भी इम्यून को मज़बूती देते हैं। रोज़ सुबह खाली पेट इनके 5-6 पत्ते चबाने से इम्यूनिटी को बढ़ावा मिलता है।

    3. अच्छी नींद लें 

    शोध से पता चला है कि कम नींद आने से इम्यून सिस्टम पर असर पड़ता है। आपकी नींद जितनी अच्छी होगी आपका इम्यून उतना ही मज़बूत होगा, शरीर बीमारियों से लड़ पाएगा और रिकवरी भी तेज़ी से होगी। जब आप सोते हैं, तो आपके शरीर को पर्याप्त आराम मिलता है। इसलिए रात को सही समय पर सोने के लिए टीवी, मोबाइल, टेब को बंद कर सो जाएं।

    4. शरीर को ताकत दें 

    ताज़ा फल और सब्ज़ियां, गेहूं, दालें और डेरी प्रोडक्ट्स से शरीर को अच्छी ताकत मिलती है और इम्यूनिटी भी बढ़ती है। वहीं, फ्रोज़न, प्रोसेस्ड और जमा किए गए फलों में वही पोषण नहीं होता, इसलिए ताज़ा फल और सब्ज़ियां लोकल बाज़ार से ही लें, बाहर से लाए गई सब्ज़ियां या फल सेहतमंद नहीं होते।

    5.  पाचन तंत्र पर ज़्यादा भार न डालें

    दिन का खाना पूरी तरह तभी लें जब सुबह का खाना अच्छी तरह पच गया हो, वरना बेहतर है कि कुछ हल्का ही खाएं, जैसे सब्ज़ियों का सूप, नारियल पानी या सलाद।

    6. ताज़ा हवा, धूप लेना और वर्कआउट करना 

    सूरज की किरणें न सिर्फ शरीर में विटामिन-डी के स्तर को बनाए रखती हैं, बल्कि हमें शक्ति भी देती हैं। जो एक संतुलित शरीर और मानसिक स्वास्थ्य के बेहद ज़रूरी है। रोज़ सुबह 15-20 मिनट धूप व ताज़ा हवा ज़रूर लें और प्रणायाम करें। इसके अलावा राज़ोना 30 मिनट एक्सर्साइज़ भी करें।

    कोरोना वायरस के दौर में इन सभी 6 चीज़ों के अलावा ये भी ज़रूरी है कि हम मास्क पहनने, शारीरिक दूरी बनाने और सैनीटाइज़र का समय-समय पर इस्तेमाल करते रहें।

     

    Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

  • जानें तारीखें, अप्रैल माह में इस दिन से शुरू होंगी शादियां

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    जल्द ही शादियों की शहनाईयां बजनी शुरू होने वाली हैं। अप्रैल माह से शादियों के शुभ मुहूर्त शुरू होने जा रहे हैं। ज्योतिषों के अनुसार, 19 जनवरी को गुरु और शुक्र अस्त हो गए थे। अब शुक्र 18 अप्रैल से उदय हो रहे हैं जिसके चलते 22 अप्रैल से शादी के मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। वहीं, गुरु का भी उदय 18 अप्रैल को ही हो रहा है। ऐसा माना जाता है कि अगर गुरु और शुक्र के अस्त हैं तो इस दौरान शादियां नहीं की जाती हैं। लेकिन अब 18 अप्रैल से एक बार फिर से गुरु और शुक्र उदय होने जा रहे हैं तो अप्रैल के तीसरे हफ्ते से एक बार फिर से शादी की शहनाईयां बजनी शुरू हो जाएंगी। आइए जानते हैं अप्रैल में कब से कब तक चलेंगी शादियां।

    जानें अप्रैल में कब से कब तक चलेंगी शादियां:

    अप्रैल माह में 22 तारीख से शादियां शुरू हो जाएंगी। यह 15 जुलाई तक चलेंगी। 15 जुलाई के बाद विष्णु जी शयन में चले जाएंगे। इसके बाद देवउठनी एकादशी से एक बार फिर से शादियां शुरू हो जाएंगी। ज्योतिषों के अनुसार, 22 अप्रैल से 15 जुलाई के बीच में 37 शादियों के मुहूर्त हैं।

    अप्रैल से दिसंबर तक के शादी के शुभ मुहूर्त:

    अप्रैल- 22, 24, 25, 26, 27, 28, 29, 30

    मई- 1, 2, 7, 8, 9, 13, 14, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 28, 29, 30

    जून- 3, 4, 5, 16, 20, 22, 23, 24

    जुलाई- 1, 2, 7, 13, 15

    नवंबर- 15, 16, 20, 21, 28, 29, 30

    दिसंबर- 1, 2, 6, 7, 11, 13

    डिसक्लेमर

    ‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी। ‘