Category: health-lifestyle

  • भारत में अनुमति नहीं फिलहाल फाइजर वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की

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    नई दिल्ली। भारत के ड्रग रेग्युलेटरी अथॉरिटी ने फाइजर की कोविड वैक्सीन की मंजूरी पर रोक लगा दी है। इससे पहले विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने कहा कि वह देश में इसके आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण (ईयूए) के लिए अनुमति देने की सिफारिश नहीं करती है। सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी की घोषणा के बाद ड्रग रेग्युलेटरी अथॉरिटी ने भी फाइजर वैक्सीन को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है।

    सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑगेर्नाइजेशन (सीडीएससीओ) की विशेषज्ञ समिति ने कई गंभीर प्रतिकूल घटनाओं (एसएई) को नोट किया है। इसलिए अन्य देशों में फाइजर वैक्सीन की मार्केटिंग के बाद ईयूए के लिए इसकी सिफारिश नहीं करने का प्रमुख कारण है।

    दस्तावेज के अनुसार, समिति ने जांच परख की, जिसमें निष्कर्ष निकालते हुए कहा गया है, समिति ने नोट किया कि पोस्ट-मार्केटिंग के दौरान पक्षाघात, एनाफिलेक्सिस और अन्य एसएई की घटनाओं की सूचना दी गई है और वैक्सीन के साथ घटनाओं के संबंध में जांच की जा रही है।

    इसके अलावा, एसईसी ने नोट किया कि कंपनी ने भारतीय आबादी में सुरक्षा एवं प्रतिरक्षात्मकता डेटा उत्पन्न करने के लिए कोई योजना प्रस्तावित नहीं की है।

    दस्तावेज में विशेषज्ञों की समिति के निदेशरें के अनुसार, विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, समिति ने इस स्तर पर देश में आपातकालीन उपयोग के लिए अनुमति देने की सिफारिश नहीं की है।

    अमेरिका स्थित फार्मास्यूटिकल दिग्गज पांच दिसंबर को देश में अपनी कोविड वैक्सीन के ईयूए के लिए आवेदन करने वाली पहली दवा कंपनी थी। इसके बाद पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने छह दिसंबर को कोविशिल्ड के ईयूए के लिए आवेदन किया था। वहीं इसके बाद भारत बायोटेक ने सात दिसंबर को अपनी कोवैक्सीन के लिए ईयूए के लिए आवेदन किया था।

    कोविशिल्ड और कोवैक्सीन दोनों को भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल द्वारा ईयूए के लिए तीन जनवरी को अनुमति दी गई थी। देश के कोविड टीकाकरण कार्यक्रम में यही दोनों वैक्सीन लोगों को दी जा रही है।

    इस बीच, फाइजर ने एक बयान जारी कर कहा है कि उसने फिलहाल अपना आवेदन वापस ले लिया है और वह एसईसी द्वारा मांगे गए अतिरिक्त डेटा के साथ फिर से आवेदन करेंगे।

    बयान में कहा गया, बैठक में विचार-विमर्श और नियामक को अतिरिक्त जानकारी की हमारी समझ के आधार पर, कंपनी ने इस समय अपने आवेदन को वापस लेने का फैसला किया है।

    कंपनी के बयान में कहा गया है कि वह फाइजर प्राधिकरण के साथ संपर्क में रहेगी और निकट भविष्य में वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त जानकारी के साथ अनुमति के लिए फिर से आवेदन करेगी।

  • भविष्य की चुनौतियों से निपटने को तैयार होगा स्वस्थ भारत

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    कोरोना की वैश्विक महामारी के बाद पेश पहले बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने देश को भविष्य में स्वास्थ्य आपदा से निपटने के लिए तैयार करने की रूपरेखा पेश की। 2020-21 के आर्थिक सर्वेक्षण की सिफारिश करते हुए बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटन में 137 फीसद की बढ़ोतरी की गई। बढ़े हुए बजट से पूरे देश में प्राइमरी (प्राथमिक), सेकेंडरी (द्वितीयक) और टर्सियरी (तृतीयक) स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ही महामारी की पहचान और जांच के लिए अत्याधुनिक ढांचा तैयार किया जाएगा।

    2021-22 के बजट के छह स्तंभों में स्वास्थ्य को सबसे ऊपर रखते हुए निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया कि आम लोगों को गुणवत्ता और सस्ता इलाज मुहैया कराने के लिए सिर्फ निजी क्षेत्र के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है, बल्कि सरकार इसकी जिम्मेदारी उठाने को तैयार है।

    पीएम आत्मनिर्भर स्वस्थ्य भारत के नाम से योजना का ऐलान

    निर्मला सीतारमण के अनुसार सरकार की कोशिश सिर्फ बीमारियों के बेहतर इलाज का ढांचा तैयार करना नहीं है, बल्कि बीमारियों को होने के पहले से रोकने के उपायों पर समान रूप से जोर दिया जाएगा। वहीं, आम जनता के स्वस्थ्य सुखी जीवन के लिए 2018 में आयुष्मान भारत योजना के तहत खोले जा रहे हेल्थ और वेलनेस सेंटर के ढांचे को भी मजबूत किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में आधारभूत ढांच के निर्माण के लिए ‘पीएम आत्मनिर्भर स्वस्थ्य भारत’ के नाम से नई योजना का ऐलान किया। अगले छह साल में इस योजना पर 64,180 करोड़ रुपये का व्यय आएगा।

    दरअसल कोरोना की महामारी ने देश में स्वास्थ्य ढांचे की कमजोरियों को उजागर कर दिया। कोरोना की टेस्टिंग से लेकर इलाज की सुविधाओं का अभाव एक भयावह तस्वीर पेश कर रह रहे थे। लॉकडाउन से लेकर युद्ध स्तर पर शुरू की गई तैयारियों की वजह से भारत अन्य देशों की तुलना में कोरोना से निपटने में बेहतर स्थिति में जरूर है, लेकिन इसने स्वास्थ्य के आधारभूत ढांचे को तत्काल मजबूत करने की जरूरत को नकारा नहीं जा सकता है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में एकमुश्त 137 फीसद की बढ़ोतरी

    जाहिर है वित्तमंत्री ने कोरोना महामारी के संदेश को सही तरीके से लिया और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बजट के आवंटन को 2020-21 के 94,452 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2021-22 में 2,23,846 करोड़ कर दिया। 137 फीसद बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में बजटीय आवंटन दो फीसद से ऊपर आ गया है। ध्यान देने की बात है कि 2017 के राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट का 2.5 से तीन फीसद आवंटन का लक्ष्य रखा गया था और आर्थिक सर्वेक्षण में भी इसको तत्काल लागू करने की जरूरत बताई गई थी।

    बजट में संक्रामक बीमारियों का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए देश में सर्विलांस और टेस्ट का मजबूत ढांचा तैयार करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत बीमारियों की टेस्टिंग, रिपोर्टिंग और मॉनीटरिंग का ब्लाक व जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कई लेबोरेटरी खोले जाएंगे। ऑनलाइन पोर्टल के सहारे देश के विभिन्न भागों में हो रही बीमारियों पर नजर रखी जाएगी।

    नर्सिंग व मिडवाइफ कमीशन बिल पेश करने का ऐलान

    नेशनल मेडिकल कमीशन के गठन कर दशकों से व्याप्त भ्रष्टाचार और लालफीताशाही को खत्म करते हुए मेडिकल शिक्षा में सुधारों की राह आसान करने के बाद सरकार ने अब नर्सिंग शिक्षा में भी सुधार करने का मन बना लिया है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि इसके लिए इसी साल नर्सिंग व मिडवाइफ कमीशन बिल पेश करने का ऐलान किया है। माना जा रहा है कि नए बिल से देश में नर्सों और प्रशिक्षित दाइयों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा सरकार नेशनल हेल्थकेयर प्रोफेशनल के लिए राष्ट्रीय कमीशन बनाने का विधेयक पहले ही लोकसभा में पेश कर चुकी है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में एकरूपता लाने में मदद मिलेगी।

  • पूरी दुनिया में फैलेगा कोरोना का नया वैरियंट- ब्रिटिश वैज्ञानिक का दावा ‘केंट’, एक दशक तक चलेगी वायरस से लड़ाई

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    लंदन। ब्रिटेन के एक वैज्ञानिक ने कोरोना वायरस को लेकर बड़ा दावा किया है।ब्रिटेन के एक वैज्ञानिक ने दावा किया है कि कोरोना वायरस का नया वैरियंट ‘केंट'(Kent) पूरी दुनिया में फैलेगा और इससे कोरोना वायरस के खिलाफ दुनिया की लड़ाई कम से कम एक दशक तक चलेगी। ब्रिटेन के जेनेटिक सर्विलांस प्रोग्राम के प्रमुख ने कहा कि ब्रिटेन के केंट इलाके में मिले कोरोना वायरस के नए वैरिएंट के दुनिया भर में फैलने की संभावना है और साथ ही कहा कि वायरस के खिलाफ लड़ाई कम से कम एक दशक तक चलने वाली है।

    कोविड-19 जीनोमिक्स यूके के कंसोर्टियम के निदेशक शेरोन पीकॉक ने  एक मीडिया रिपोर्ट में बताया कि कैंट कोरोना वायरस वैरिएंट पूरे ब्रिटेन में फैल चुका है और इसकी पूरी संभावना है कि ये पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने वाला है।

    ब्रिटिश वैज्ञानिक ने कहा कि एक बार जब हम [वायरस] के शीर्ष पर पहुंच जाते हैं या यह स्वयं को विषाणु-जनित बीमारी से बाहर निकाल देता है- तब हम इसके बारे में चिंता करना बंद कर सकते हैं। लेकिन मुझे लगता है भविष्य में हम सालों तक ऐसा ही करने वाले हैं। हम अभी 10 साल तक इस वायरस के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे।

  • ये फूड पाइप से जुड़ी गंभीर समस्या की ओर इशारा हो सकता है, खाते समय पानी या जूस की खाते लेनी पड़ती है मदद

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    अक्सर कुछ लोग यह शिकायत करते हैं कि उन्हें भोजन निगलने में कठिनाई होती है, इसलिए कुछ भी खाते समय पानी, चाय या जूस जैसे तरल पदार्थों की मदद लेनी पड़ती है। अगर ऐसा हो तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए क्योंकि यह फूड पाइप से जुड़ी किसी गंभीर समस्या का लक्षण हो सकता है।

    क्या है भूमिका

    आहार नली पाचन-तंत्र का प्रमुख हिस्सा है।यह खाद्य पदार्थों को मुंह से पेट तक ले जाती है। महीन मांसपेशियों की दो परतों से बनी फूड पाइप की लंबाई लगभग 25 सेंटीमीटर होती है। इसके शीर्ष पर टिश्यूज़ का एक समूह होता है, जिसे एपिगलॉटिस कहते हैं। दरअसल, एसोफैगस यानी आहार नली संबंधी रोगों के बारे में ज्यादातर लोग शुरुआत में ध्यान ही नहीं देते। धीरे-घीरे यह परेशानी बढ़ने लगती है। आइए जानते हैं इस समस्या और इसके उपचार के बारे में।

    एसोफैगस फंगल इंफेक्शन

    ग्रास नली में यह संक्रमण होने पर भोजन निगलने में दिक्कत और गले में दर्द की शिकायत होती है। इसे एसोफैगस फंगल इंफेक्शन कहा जाता है। आमतौर पर डायबिटीज़ से पीड़ित रोगियों के फूड पाइप में इंफेक्शन होने की आशंका रहती है।

    इसके अलावा उपचार के दौरान जो लोग स्टेरॉयड दवाओं का सेवन करते हैं, उन्हें भी ऐसी समस्या हो सकती है। इसकी जांच बायोप्सी या एंडोस्कोपी द्वारा की जाती है। उपचार के दौरान एंटी-फंगल दवाएं दी जाती हैं, जिससे मरीज को जल्द ही आराम मिल जाता है। इसी तरह एकैल्शिया कार्डिया भी आहार नली से जुड़ी ऐसी समस्या है, जिसमें उसकी मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं। आमतौर पर दवाओं और बलून थेरेपी के माध्यम से इसका उपचार किया जाता है। इतना ही नहीं जिन्हें सिगरेट और तंबाकू की लत होती हैं, उनमें एसोफैगल यानि फूड पाइप कैंसर की आशंका बढ़ जाती है।

    कैसे होती है पहचान

    • सीने में जलन

    • चक्कर आना

    • बार-बार हिचकी या डकार आना

    • वॉमिटिंग

    • भूख न लगना

    • सांस लेने में तकलीफ

    • भोजन निगलने में परेशानी

    क्या है उपचार

    अगर सही समय पर इसकी पहचान करके इसका उपचार शुरु किया जाए तो केवल दवाओं की मदद से यह समस्या दूर हो सकती है। अगर दवाओं से राहत नहीं मिलती तो एंडोस्कोपी के जरिए आहार नली की बारीकी से जांच की जाती है, उसकी स्थिति का जायजा लेने के बाद उपचार शुरू किया जाता है। कई बार सिकुड़ चुकी आहार नली को खोलने के लिए भी एंडोस्कोपी और सर्जरी की मदद ली जाती है। यह उपचार की सुरक्षित प्रक्रिया है, इसके बाद मरीज पूर्णतः स्वस्थ हो जाता है। इसलिए अगर भोजन निगलने में अक्सर परेशानी महसूस हो तो इसे मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लें।

  • इस तरह मौनी अमावस्या के दिन करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न, करें ये उपाय

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    आज माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या है। इसे मौनी अमावस्या भी कहा जाता है। यह माघ महीने में आती है जिसके चलते इसे माघी अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन स्नान और दान का महत्व बहुत अधिक है। ऐसा करने से व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यही वो दिन था जब देवगँ संगम में निवास करते हैं। इस दिन गंगा स्नान का महत्व बहुत अधिक है। अगर इस दिन कोई व्यक्ति मौन रहकर व्रत करता है तो उसे मुनि पद की प्राप्ति होती है। अगर मौनी अमावस्या के दिन कुछ उपायों को करने से मां लक्ष्मी को प्रसन्न किया जा सकता है।

    मौनी अमावस्या के दिन करें ये उपाय:

    1. अगर इस दिन अगर चींटियों को शक्कर मिलाकर आटा खिलाया जाए तो व्यक्ति के पाप-कर्म कम हो जाते हैं। वहीं, उनके पुण्य-कर्म में बढ़ोत्तरी होती है।

    2. इस दिन सुबह के समय स्नान करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं फिर इन्हें मछलियों को खिलाए। यह बेहद शुभ होता है। अगर ऐसा किया जाए तो व्यक्ति के जीवन की परेशानियां खत्म हो जाती हैं।

    3. इस दिन अगर स्नान के बाद चांटी से बने नाग या नागिन की पूजा की जाए तो व्यक्ति को कालसर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है। इसके बाद सफेद पुष्प के साथ इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।

    4. इस दिन शाम के समय अगर घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक जलाया जाए तो मां लक्ष्मी बेहद प्रसन्नो हो जाती हैं।

    मौनी अमावस्या 2021 मुहूर्त:

    माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 10 फरवरी को देर रात 01 बजकर 08 मिनट पर हो रहा है, जो 11 फरवरी को देर रात 12 बजकर 35 मिनट तक है। ऐसे में उदया तिथि 11 फरवरी को प्राप्त हो रही है, ऐसे में मौनी अमावस्या 11 फरवरी को होगी। 11 फरवरी को ही मौनी अमावस्या का स्नान, दान, व्रत, पूजा-पाठ आदि किया जाएगा।

  • तेलंगाना : कोराेना के 149 नए मामले दर्ज

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    हैदराबाद। तेलंगाना में सोमवार रात 8 बजे तक 31,834 लोगों का कोरोना परीक्षण किया गया। इस दौरान कोरोना के 149 नए मामले दर्ज किए गए। इसके साथ ही राज्य में अब तक कोरोना मामलों की संख्या 2,95,831 हो गई है। मंगलवार को राज्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुलेटिन में बताया कि सोमवार को कोरोना से एक व्यक्ति की मौत हुई है।

    राज्य में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 1,612 हो चुकी है। सोमवार को

    186 लोगों को कोरोना से ठीक होने के बाद विभिन्न अस्पतालों से डिस्चार्ज किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्तमान में राज्य में 1,804 सक्रिय मामले हैं, जिनमें से 694 का इलाज गृह एकांतवास में चल रहा है। तेलंगाना में अब 81,54,347 कोरोना परीक्षण किए जा चुके हैं।

    तेलंगाना में अब 81,54,347 कोरोना परीक्षण किए जा चुके हैं

  • क्या कोरोना संक्रमण से कोल्ड की एंटीबॉडीज़ भी बचा सकती हैं?

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    नई दिल्ली। एंटीबॉडीज़ न सिर्फ संक्रमण का इलाज करती हैं, बल्कि इसे भविष्य में होने से रोकती भी हैं। आपका शरीर जब एक बार किसी रोगाणु के खिलाफ एंटीबॉडीज़ बना लेता है, तो रोगाणु के लिए कुछ समय के लिए शरीर को संक्रमित करना मुश्किल हो जाता है।

    कोविड-19 के मामले में पहले ऐसा पाया गया था कि इसी तरह के वायरस की एंटीबॉडीज़ भी कोरोना से कुछ हद से सुरक्षित रख सकती हैं। हालांकि, एक नए शोध में नई बातें पता चली हैं। नए शोध के मुताबिक, आम ज़ुकाम की वजह से शरीर में बनीं एंटीबॉडीज़ आपको कोरोना वायरस से नहीं बचा पाएंगी।

    क्या कहती है नई स्टडी

    पेंसिलवेनिया के पेरेलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन में कोविड महामारी से पहले मौसमी कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए करीब 100 लोगों के ख़ून के नमूनों की जांच की थी। जिसमें पाया गया कि लगभग 20 प्रतिशत लोगों में मौसमी कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज़ थीं।

    शोधकर्ताओं ने पाया कि ये एंटीबॉडीज़ सर्दी पैदा करने वाले वायरस और SARS-CoV-2 से सुरक्षित रख सकते हैं। हालांकि, बाद में जिन लोगों को कोविड-19 संक्रमण हुआ उनके लिए ये एंटीबॉडीज़ काम नहीं आईं। शोधकर्ताओं ने ये भी पाया कि आम ज़ुकाम की एंटीबॉडीज़ छोटे बच्चों को भी कोविड-19 संक्रमण से नहीं बचाएंगी। हालांकि, छोटे बच्चे कितनी जल्दी कोविड से संक्रमित हो सकते हैं, और कितीन आसानी से इस संक्रमण को फैला सकते हैं, इस विषय पर अब भी बहस जारी है।

    शोधकर्ताओं ने ये भी पाया कि बच्चे औप बड़े दोनों में मौसमी कोरोना वायरस की एंटीबॉडीज़ का स्तर समान होता है। जिसे CoV कहा जाता है। जिसका मतलब ये हुआ कि CoV एंटीबॉडीज़ गंभीर कोविड-19 संक्रमण से बच्चों का बचाव नहीं कर सकतीं।

    इस शोध में कहा गया कि आम ज़ुकाम की एंटीबॉडीज़ भले ही कोविड-19 संक्रमण से बचाव नहीं कर सकतीं, लेकिन ऐसा संभव है कि पहले से मौजूद  मेमोरी बी-सेल्स और टी-सेल्स एक हद तक सुरक्षित रख सकती हैं, या कम से कम कोविड संक्रमण को गंभीर बनने से रोक सकती हैं।

    Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

  • इस तरह पहनेंगे मास्क तो कोरोना वायरस से मिलेगी बेहतर सुरक्षा!

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    नई दिल्ली। कोरोना वायरस की वैक्सीन भले ही लगना शुरू हो गई हो, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि अब कोविड संक्रमण का ख़तरा ही ख़त्म हो गया हो। खासतौर पर भारत जैसी आबादी वाले देश में आधी आबादी को वैक्सीन लगने में कम से कम 6 महीने लग जाएंगे और जब तक सभी लोगों को वैक्सीन नहीं लग जाती तब तक सावधानियां बरतनी बेहद ज़रूरी है। इसके अलावा नए अत्यधिक संक्रामक कोविड का नया वेरिएंट दुनिया के कई हिस्सों में फैलने लगा है, इसलिए सतर्क रहना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

    मास्क पहनना संक्रमण के ख़तरे को कम करने के प्रभावी तरीकों में से एक है, इसलिए अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल और प्रीवेंशन (CDC) ने इससे जुड़ी कुछ सलाह दी हैं, जिससे आपके बेहतर सुरक्षा मिल सकती है।

    दो मास्क पहनें

    दो मास्क पहनना भले ही आपको कुछ अजीब लगे, लेकिन शोध बताते हैं कि इससे असल में फायदा मिलता है। CDC की गाइडलाइन्स के मुताबिक, सर्जिकल मास्क के ऊपर कपड़े का मास्क पहनने से आपको वायरस के खिलाफ ज़्यादा अच्छी सुरक्षा मिल सकती है। दो मास्क पहनने के पीछे का विचार यह है कि यह हवा के कणों से रक्षा कर सकता है जो कि ख़राब फिट के मास्क की वजह से ज्यादातर लोग में सांस के ज़रिए शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। दो मास्क मिलकर बेहतर तरीके से इस कणों को रोक सकते हैं। साथ ही, दो मास्क चेहरे पर बेहतर तरीके से फिट हो जाते हैं और 90 प्रतिशत वायरस को दूर रखते हैं।

    मास्क को कान के पीछे टाइट करें

    मास्क के लूप्स को कानों के पीछे बांधने से वो चेहरे पर फिट हो जाएगा और आपका मुंह और नाक पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएगी। अगर मास्क आपके मुंह और नाक पर फिट है, तो वायरस के शरीर में प्रवेश होने के आसार कम हो जाते हैं। अगर आपका मास्क ढीला है, तो दोनों कानों के पीछे उसपर एक गांठ लगा लें।

    मास्क फिटर का इस्तेमाल करें

    मास्क की फिटिंग को बेहतर बनाने के लिए मास्क फिटर या फिर मास्क के ऊपर नाएलॉन मास्क कवर पहन सकते हैं। मास्क फिटर पहनने हवा अंदर नहीं जाएगी और आप प्रदूषित कणों को सांस के ज़रिए शरीर में पहुंचाने से बचेंगे। दो मास्क के साथ आप फिल्टर मटीरियल क्वालिटी जैसे वैक्युम बैग का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तरह आप तीन लेयर पहनेंगे, पहला सर्जिकल मास्क, फिर कपड़ें का मास्क और फिर वैक्युम बैग मटीरियल से बना मास्क।

    मास्क पहनते वक्त इन बातों का रखें ख्याल

    पहला स्टेप: हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं या फिर सैनीटाइज़र से हाथ साफ कर ही मास्क को छुएं।

    दूसरा स्टेप: मास्क की जांच करें कि कहीं वो फटा हुआ या फिर गंदा तो नहीं है।

    तीसरा स्टेप: मास्क को चेहरे पर इस तरह पहनें कि चेहरा, मुंह, नाक और ठुड्डी अच्छी तरह से ढक जाएं। कहीं भी हवा जानें के लिए जगह न हो।

    मास्क निकालते वक्त इन बातों का ख्याल रखें

    पहला स्टेप: हाथों को साबुन-पानी या फिर सैनीटाइज़र से साफ करें और फिर मास्क उतारें।

    दूसरा स्टेप: मास्क को कानों या सिर के पीछे स्ट्रेप की मदद से उतारें।

    तीसरा स्टेप: अगर मास्क गंदा नहीं हुआ है, तो उसे प्लास्टिक बैग में रखें या फिर उसे साबुन और गर्म पानी से धोएं।

    चौथा स्टेप: मास्क उतारने के बाद हाथों को ज़रूर धोएं।

    Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

  • बूढ़े होने के हैं लक्षण शरीर में ये बदलाव, ऐसे पाएं निजात

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    नई दिल्ली। आजकल हर कोई फिट रहना चाहता है। हालांकि, खराब दिनचर्या, अनुचित खानपान और तनाव के चलते लोग ऐसा करने में सफल नहीं हो पाते हैं। इससे लोग कम उम्र में ही बूढ़े दिखने लगते हैं। कम उम्र में बूढ़ा दिखना चिंता का विषय है। इसके संकेत शरीर में बदलाव से मिलते हैं। अगर आपको नहीं पता है, तो आइए जानते हैं कि शरीर में कौन से बदलाव बूढ़े होने के संकेत हैं और कैसे निजात पाएं-

     क्या है संकेत

    -अगर कमर में पेंट टाइट होने लगे और घुटनों पर सही रहे, तो यह बुढ़ापे का संकेत है।

    -अगर आप अपने बैग का भार उठा नहीं पाते हैं अथवा उठाने में थक जाते हैं, तो यह भी बुढ़ापे का लक्षण है।

    -आलस आना

    -एक्टिव न रहना

    -सुस्त हो जाना

    -फिजीकल काम करने से कतराना

    ये सभी संकेत बताते हैं कि आप बुढ़ापे की ओर अग्रसर हैं।

    कैसे पाएं निजात

    अपनी डाइट में फाइबर युक्त फल, सब्जियां, ओटस्, नट्स आदि चीजों को जरूर शामिल करें। इनके सेवन से आंत मजबूत  होते हैं। फाइबर कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखता है। इससे वजन भी संतुलित रहता है। साथ ही फोलेट और विटामिन बी का सेवन करें। इससे मस्तिष्क सेहतमंद रहता है। साबुत अनाजों का सेवन अधिक से अधिक करें। इससे कैंसर जैसी बीमारी हमेशा दूर रहती है। इसके लिए आप दलिया, क्विन्वा,सूजी और दाल का सेवन कर सकते हैं।

    पानी खूब पिएं

    हमेशा शरीर हाइड्रेट रखें। पाचन तंत्र को सुचारू ढंग से चलाने के लिए रोजाना कम से कम 2 से 3 लीटर पानी जरूर पिएं। इससे शरीर में मौजूद टॉक्सिन बाहर निकल जाता है और शरीर का प्यूरिफाई हो जाता है। इसके अतिरिक्त शरीर का तापमान भी नियंत्रित रहता है।

    फिजिकल एक्टिविटी जरूर करें

    आधुनिक समय में सेहतमंद रहने के लिए फिजिकल एक्टिविटी बहुत जरूरी है। इससे हड्डियां और जॉइंट्स मजबूत होते हैं। साथ ही ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है। फिजिकल एक्टिविटी करने से तनाव का खतरा कम रहता है। इसके लिए हफ्ते में कम से कम डेढ़ सौ मिनट एक्सरसाइज जरूर करें।

    मेडिटेशन करें

    आजकल लोग तनाव भरी जिंदगी जीने लगे हैं। इससे बचने के लिए रोजाना सुबह में मेडिटेशन अथवा योग जरूर करें। विशेषज्ञों की मानें तो तनाव से डीएनए पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके लिए रोजाना कम से कम 10 मिनट मेडिटेशन जरूर करें।

    डिस्क्लेमर: स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • पापों के भागीदार बनते हैं, भूलकर भी इन जगहों पर न करें हंसी-ठिठोली

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    यह तो हम सभी जानते हैं कि हंसना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि किसी गलत जगह पर हंसना आपको सहस्त्र पापों का भागी बना सकता है। अगर कोई व्यक्ति इन जगहों पर हंसता है तो वो पाप का भागीदार बनता है। तो आइए जानते हैं कि वो कौन-कौन सी जगहें होती हैं जहां पर हंसना सही नहीं माना जाता है।

    श्मशान में हंसना है गलत: अगर किसी व्यक्ति का दाह संस्कार हुआ है या फिर किसी की शव यात्रा निकल रही है तो हंसना गलत होता है। यह मृत व्यक्ति का अपमान माना जाता है। जो व्यक्ति शवयात्रा या श्मशान में हंसता है वो पाप का भागीदार होता है।

    शोकाकुल परिवार में न हंसे: अगर आप किसी शोकाकुल परिवावर में हैं तो वहां पर आपको हंसने से चबना चाहिए। यह उस परिवार की भावनाओं का अपमान करना होता है। साथ ही इधर-उधर की बातें भी नहीं करनी चाहिए। यह आपको पाप का भागीदार बनाता है।

    मंदिर में न हंसे: यह एक ऐसी जगह है जहां पर आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। यहां पर हंसी-ठिठोली सही बात नहीं है। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपका जुड़ाव ईश्वर से नहीं हो पाता है। साथ ही दूसरों को पूजा करने में भी बाधा आती है।

    सत्संग या कथा में न हंसे: अगर आप किसी ऐसी जगह हैं जहां पर कथा या सत्संग हो रहा है तो आपको वहां हंसना नहीं चाहिए। इससे आपका नुकसान हो सकता है। यहां पर दिए जा रहे प्रवचनों या गुरुवाणी को ध्यान से सुनना चाहिए।

    डिसक्लेमर

    ‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।’