Category: health-lifestyle

  • क्विनोआ खाने से मिलते हैं यह गजब के फायदे

    [object Promise]

    जब भी हेल्थ फूड की बात होती है तो क्विनोआ का नाम जरूर लिया जाता है। पिछले कुछ समय से यह बेहद पॉपुलर हुआ है। प्रोटीन से पैक यह क्विनोआ ग्लूटन फ्री होता है। इसकी पौष्टिकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह उन कुछ प्लांट फूड्स में से एक है, जिसमें पर्याप्त मात्रा में सभी नौ आवश्यक अमीनो एसिड होते हैं। यह फाइबर, मैग्नीशियम, बी विटामिन, लोहा, पोटेशियम, कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन ई युक्त है। इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सिडेंट्स भी उच्च मात्रा में पाए जाते हैं। आप इसे अपनी स्मूदी से लेकर सलाद तक में शामिल कर सकते हैं। तो चलिए आज हम आपको क्विनोआ से मिलने वाले लाभों के बारे में बता रहे हैं−

    आयरन से भरपूर

    हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि क्विनोआ में उचित मात्रा में आयरन होता है। आयरन हमारे लाल रक्त कोशिकाओं के लिए आवश्यक है जो हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं। आयरन, ऑक्सीजन को कोशिकाओं तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाता है। यह हमारी मांसपेशियों और मस्तिष्क को ऑक्सीजन की आपूर्ति भी करता है। इसलिए अगर आप एनीमिया की समस्या का सामना कर रहे हैं तो ऐसे में क्विनोआ को अपनी डाइट में शामिल करना यकीनन एक अच्छा विचार है।

    बेहतर पाचन तंत्र

    हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, क्विनोआ आपके पाचन तंत्र के लिए भी बेहद लाभकारी है। दरअसल, इसमें अधिकांश अन्य अनाजों की तुलना में लगभग दोगुना फाइबर होता है। जिसके कारण यह कब्ज व अन्य पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में सहायक है। साथ ही फाइबर दिल की बीमारियों और स्ट्रोक और उच्च रक्तचाप के जोखिम को कम करने में भी मदद करता है।

    वजन को करे नियंत्रित

    अगर आप हेल्दी और टेस्टी तरीके से अपने वजन को नियंत्रित करना चाहते हैं तो ऐसे में आपको क्विनोआ को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। दरअसल, इसमें फाइबर की अधिकता के कारण आपको लंबे समय तक पेट भरे होने का अहसास होता है। जिसके कारण आप ओवर ईटिंग से बच जाते हैं और अपने वजन पर नियंत्रण रख पाते हैं।

    दिल का रखे ख्याल

    हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि क्विनोआ आपके हद्य के लिए भी उतना ही लाभकारी है। दरअसल, इसमें हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं, जो गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। क्विनोआ में ओलिक एसिड, एक मोनोसैचुरेटेड फैटी एसिड और अल्फा−लिनोलेनिक एसिड पाया जाता है। यह कॉम्बिनेशन रक्त में अस्वास्थ्यकर (एलडीएल) कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और सूजन से लड़ने में मदद कर सकता है।

  • तेज दिमाग पाने के लिए गोटू कोला जरूर शामिल करें अपनी डाइट में

    [object Promise]

    नई दिल्ली। आधुनिक समय में लोग तनाव भरी ज़िदंगी जीने लगे हैं। इससे मानसिक और शारीरिक सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। खासकर कोरोना काल में लोगों के मानसिक सेहत पर गहरा असर पड़ा है। इस दौर में सेहतमंद रहने के लिए आप जड़ी-बूटी का सहारा ले सकते हैं। प्राचीन काल से जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल दवा की तरह किया जाता है। इनमें एक वनस्पति गोटू कोला है। आयुर्वेद में गोटू कोला को औषधि माना जाता है। इसे ब्राह्मी बूटी या मण्डूकपर्णी भी कहा जाता है। जबकि अंग्रेजी में गोटू कोला को सेंटेला आस्टीटिका (Centella asiatica) कहा जाता है। इसकी पत्तियां हरे रंग की होती है और गोटू कोला का पौधा नमी वाले स्थान पर उगता है। इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं जो सेहत और सुंदरता दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। गोटू कोला कई तरह की बीमारियों को दूर करने में सक्षम है। अगर आप भी मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं और इससे निजात पाना चाहते हैं, तो अपनी डाइट में गोटू कोला जरूर शामिल करें। आइए, गोटू कोला के फायदे जानते हैं-

    दिमाग तेज होता है

    गोटू कोला के सेवन से ऑक्सीडेटिव तनाव कम होता है। साथ ही दिमाग तेज होता है। अगर शार्प मेमोरी की इच्छा है, तो अपनी डाइट में गोटू कोला को जरूर शामिल करें।

    रक्त चाप नियंत्रित रहता है

    एक शोध में खुलासा हुआ है कि गोटू कोला के सेवन से रक्त चाप नियंत्रित रहता है। इसमें टोटल फेनोलिक कंटेंट पाया जाता है जो रक्त चाप को कंट्रोल करने में सहायक होते हैं।

    त्वचा के लिए भी गुणकारी है

    गोटू कोला में पानी अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके सेवन से शरीर हायड्रेट रहता है। जबकि त्वचा में नमी बनी रहती है। साथ ही त्वचा संबंधी परेशानियों से निजात मिलता है।

    घाव भरता है

    2012 की एक शोध के अनुसार, गोटू कोला के सेवन से घाव जल्दी भर देता है। चूहों पर किए गए शोध में पाया गया है कि गोटू कोला घाव को भरने में सक्षम है। इसमें विटामिन-बी, सी, फ्लेवोनॉयड्स, टैनिन और पॉलीफिनोल पाए जाते हैं।

     

  • अगर आप भी सुबह पेट साफ न होने की समस्या से परेशान हैं, तो…

    [object Promise]

    सुबह पेट साफ न होने से पूरा दिन मूड खराब रहता है और किसी काम में दिल भी नहीं लगता। वैसे पेट साफ न होने की खास वजह कब्‍ज है तो सुबह-सुबह पेट साफ करने के लिए क्या खाएं, जो आसानी से अवेलेबल हो और फायदेमंद भी। क्योंकि पेट साफ न होने से गैस और दूसरी समस्याएं भी परेशान करती हैं। तो आज हम जानेंगे इस समस्या से कैसे पा सकते हैं जल्द निजात।

    गुनगुना पानी

    पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए पानी बहुत ही जरूरी है। इसलिए दिनभर में 8-10 ग्लास पानी जरूर पिएं। गुनगुना पानी मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और साथ ही बॉडी से टॉक्सिंस को भी बाहर निकालता है। तो सुबह उठकर सबसे पहले खाली पेट गुनगुने पानी पिएं, चाहें तो गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर भी पी सकते हैं। इससे पेट साफ होने के साथ फैट भी कम भी होता है।

    एलोवेरा

    सुबह-सुबह पेट साफ करने में एलोवेरा भी है बेहद उपयोगी। एलोवेरा का जूस पेट साफ करने के साथ कब्ज से भी राहत दिलाता है। सुबह उठने के बाद पेट साफ करने के लिए एलोवेरा का जूस पिएं। जो पेट के साथ त्वचा की समस्याओं से भी राहत दिलाता है।

    अजवाइन

    पेट की समस्याओं को दूर करने के लिए अजवाइन का इस्तेमाल काफी पहले से किया जाता रहा है। इसमें प्रोटीन, खनिज पदार्थ, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट होता है। अजवाइन खट्टी डकार और गैस से भी राहत दिलाता है।

    पुदीना

    पुदीने का सेवन बदहजमी या खट्टी डकार जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। इसलिए पेट साफ करने के लिए पुदीने  की पत्तियों का उपयोग पुदीना टी के रूप में भी कर सकते हैं या फिर ऐसे भी इसकी पत्तियां खा सकते हैं।

    नींबू का रस पाचन के लिए बहुत ही फायदेमंद होता हैं। नींबू में एंटीआक्‍सीडेंट और विटामिन सी की मात्रा होती है जो डाइजेशन के लिए बहुत अच्छा होता है। इसलिए पेट को साफ करने के लिए नींबू के रस का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें मौजूद एन्जाइम्स बॉडी को डिटॉक्सीफाई कर पाचन को सुधारता है।

     

  • मधुमेह रोगियों के लिए एक वरदान है कुर्मासन…

    [object Promise]

    दिल्ली।आधुनिक समय में सेहतमंद रहना एक चुनौती है। खराब दिनचर्या, गलत खानपान और तनाव की वजह से कई बीमारियां जन्म लेती हैं। खासकर डायबिटीज और मोटापा से लोग अधिक परेशान हैं। डायबिटीज में रक्त में शर्करा स्तर बढ़ जाता है। साथ ही अग्नाशय से इंसुलिन हार्मोन निकलना बंद हो जाता है। डायबिटीज रोग में मीठा खाने की मनाही होती है। इसके लिए जीवनशैली के साथ-साथ डाइट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इनसे आप बीमारियों से दूर रह सकते हैं। इसके लिए आप योग का भी सहारा ले सकते हैं। योग के कई प्रकार हैं। इनमें एक कुर्मासन है, जिसे करने से न केवल मानसिक, बल्कि शारीरिक विकार भी दूर होते हैं। इससे बल्ड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। अगर आप भी डाबिटीज के मरीज हैं और अपना बल्ड शुगर लेवल कंट्रोल करना चाहते हैं, तो रोजाना कुर्मासन जरूर करें। आइए, जानते हैं कि कुर्मासन क्या है और इसे कैसे करें-

    कुर्मासन क्या है

    कुर्मासन दो शब्दों कुर्मा और आसन से मिलकर बना है। इसका शाब्दिक अर्थ कछुए की मुद्रा में बैठना है। इस योग को करने से मधुमेह में आराम मिलता है। पाचन तंत्र मजबूत होता है और अनिद्रा की शिकायत भी दूर होती है।

    कुर्मासन कैसे करें

    इसके लिए समतल भूमि पर दरी बिछा लें। अब सूर्य की ओर मुखकर पैरों को फैलाकर बैठ जाएं। इसके लिए आप लेख में संलग्न तस्वीर की मदद ले सकते हैं। अब अपने हथेलियों को पैरों के अंदर रखकर आगे की ओर झुकें। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार झुकें। इसके बाद कुछ पल के लिए इस मुद्रा में रुकें। इसके बाद पुनः पहली अवस्था में आ जाएं। इस योगासन को रोजाना कम से कम दस बार जरूर करें।

    कुर्मासन के फायदे

     

  • कोरोना से ठीक हुए मरीजों के दिमागपर पड़ रहा असर, भूल रहे छोटी-छोटी चीज़े…

    [object Promise]

    गोरखपुर। कैंट क्षेत्र निवासी एक युवक को कोरोना का संक्रमण होने के बाद बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया था। सांस लेने में दिक्कत के बाद कई दिनों तक आक्सीजन सपोर्ट देना पड़ा था। कोरोना से जंग जीतकर युवक घर पहुंच गया है लेकिन दिमाग कमजोर हो गया है। यहां तक कि मोबाइल और एटीएम का पासवर्ड भी भूल जा रहा है।

    कोरोना से पीडि़त होने के बाद ज्यादा समय तक आक्सीजन लेने वाले युवाओं का दिमाग साथ छोड़ रहा है। मोबाइल व एटीएम के पासवर्ड भी युवा भूल जा रहे हैं। ज्यादा दिन तक आक्सीजन पर रहने के कारण शरीर की क्षमता पर भी असर पड़ा है।

    दिमाग की नसों में मिल रहा खून का थक्का

    कोरोना ने दिमाग की नसों पर भी बहुत असर डाला है। गंभीर हालत में पहुंचे कई मरीजों के दिमाग की नसों में खून का थक्का जमा हो गया है। डाक्टरों का कहना है कि ऐसे मामलों में लंबे समय तक इलाज चलता है।

    हाथ-पैर में भी आ रही कमजोरी

    बाबा राघवदास मेडिकल कालेज के न्यूरोलाजिस्ट डा. अजय यादव कहते हैं कि कोरोना के कारण न्यूरोपैथिक दर्द के मामले बढ़ गए हैं। इसमें शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द, सूजन या मांसपेशियों में कमजोरी आती है। ओपीडी में कोरोना से ठीक हुए ऐसे मरीज आ रहे हैं जिनके हाथ-पैर में कमजोरी की शिकायत रहती है। कई मामलों में भूलने की शिकायत भी आ रही है।

    डिप्रेशन, घबराहट के मरीज बढ़े

    कोरोना से जंग जीत चुके ज्यादातर लोग खांसी-बुखार होने पर भी घबरा जा रहे हैं। उनको लगता है कि उन्हें फिर कोरोना हो गया है। फिजिशियन की जांच से भी यह लोग संतुष्ट नहीं हो रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या मानसिक रोग के डाक्टरों की ओपीडी में बढ़ गई है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. गोपाल अग्रवाल बताते हैं कि कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में बीमारी को लेकर डर पैदा हो गया है। हल्की सी खांसी को भी वह कोरोना की शुरुआत मान ले रहे हैं। ऐसे लोगों का दवाओं व काउंसलिंग से उपचार किया जा रहा है।

     

  • पाएं खूबसूरत स्किन के साथ चमकदार बाल भी खीरे के इस्तेमाल से

    [object Promise]

    ये एक नैचुरल ब्लीच होता है और साथ ही इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेंटरी प्रोपर्टीज़ आपके चेहरे में मौजूद दाग-धब्बों को खत्म कर क्लीयर स्किन देती है। हर रोज़ सोने से पहले चेहरा धोकर एक खीरे का टुकड़ा अच्छी तरह चेहरे पर रगड़ें। आप चाहे तो इसका रस निकालकर भी इस्तेमाल कर सकती हैं। कुछ वक्त तक हर रोज़ इसका इस्तेमाल करें और पाएं क्लीयर स्किन।

    सिर्फ लंबे नहीं, इससे आप पा सकती हैं शाइनी बाल भी। इसमें मौजूद सिलिका आपके बालों को शाइन देकर इसे खूबसूरत बनाता है। इसके लिए भी हफ्ते में दो बार इसके रस को निकालर कर स्कैल्प और बालों पर अच्छी तरह लगाएं और फिर धो लें।

    इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और सीलिका इस परेशानी से राहत दिलाने में मदद करता है। इतना ही नहीं ये आंखों के पास नज़र आने वाली झुर्रियों को भी खत्म करता है। इसके लिए सोने से पहले या सुबह उठने के बाद दो खीरे के टुकड़े को काटकर फ्रिज़ में रखकर ठंडा कर लें। अब इसे अपनी आंखों पर रखें 10 मिनट तक रखें। ज़रूरत महसूस हो तो इसे दोबारा रिपीट करें। कुछ दिनों तक ऐसा हर रोज़ करें।

    इसमें मौजूद सिलिकॉन और सल्फर बालों की ग्रोथ में मदद करते हैं और इनके झड़ने की परेशानी खत्म करते हैं। इसके लिए खीरे का रस का इस्तेमाल करें। अपने बालों की लंबाई के हिसाब से इसका रस निकाल लें। अब इसे कॉटन की मदद से पूरे स्कैल्प पर लगाएं और दो मिनट तक इसकी मसाज करें। 20 मिनट बाद इसे धो लें।

    जैसा कि ये एक नैचुरल ब्लीच होता है इसलिए ये टैनिंग से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। इतना ही नहीं, ये असमान रंगत को एक समान कर आपको देता है फेयर स्किन। इसके लिए आप खीरे और दही से बने मास्क का इस्तेमाल करें। एक चम्मच खीरे का गुदा लें और इसमें एक चम्मच दही मिलाकर पूरे चेहरे पर लगाएं। सूखने पर इसे धो लें। हफ्ते में हर दूसरे दिन ऐसा करें।

  • जानें- किसको दी जानी चाहिए सबसे पहले कोरोना की वैक्‍सीन

    [object Promise]

    कोरोना वायरस महामारी के दस माह बाद इसकी वैक्‍सीन की राह काफी हद तक साफ हो गई है। इसको पहले किन्‍हें दिया जाना चाहिए इसको लेकर भी तस्‍वीर काफी हद तक साफ है। हर देश ने इसका खाका तैयार कर लिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रॉस ऐडनेहॉम घेबरेयेसस ने भी इस वैक्‍सीन को किसे सबसे पहले दिया जाए, इसके बारे में कुछ खास कहा है। उनका कहना है कि इस वैक्‍सीन को पहले सबसे

    पहले फ्रंट लाइन पर काम करने वाले स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों को दी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन मरीजों को ये वक्‍सीन दी जानी चाहिए जो सबसे अधिक जोखिम वाले हालात में हैं। उन्‍होंने ये भी कहा कि हर देश को इस वैक्‍सीन को लेकर अपने यहां पर प्राथमिकता तय करनी चाहिए। इसके आधार पर ही इसको दिया जाना चाहिए। घेबरेयेसस ने कहा कि आने वाले कुछ समय में कुछ देशों में कोरोना की वैक्‍सीन मुहैया करवा दी जाएंगी।

    यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख ने जिनेवा में कहा कि दुनिया में काफी संख्‍या में लोग ऐसे हैं जो अधिक उम्र के हैं और कई तरह की गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं। ऐसे में उनको जोखिम अधिक है। इनको वैक्‍सीन दिए जाने से इनकी मौत का जोखिम काफी हद तक कम हो जाएगा। ऐसा करने से देश अपने यहां की स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं पर भी बोझ को कम कर कसेंगे। कुछ समय बाद जैसे-जैसे वैक्‍सीन की सुलभता होती जाएगी इसमें दूसरे लोगों को भी शामिल कर लिया जाएगा। डब्‍ल्‍यूएचओ ने वैक्‍सीन को प्राथमिकता के आधार पर इसका एक रोडमैप भी तैयार किया है। संगठन ने इसको लेकर कुछ दूसरी सिफारिशें भी की हैं।

    संगठन के प्रमुख का कहना है कि वैक्‍सीन अब देशों को मुहैया करवाए जाने शुरुआती दौर में है। हालांकि उन्‍होंने वैक्‍सीन की रखरखाव को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि सरकारों को इन वैक्‍सीन को सुरक्षित बनाए रखने के उपाय करने होंगे। उनके मुताबिक डब्‍ल्‍यूएचओ इस बात पर निगाह रखे हुए है कि ठीक होने वाले मरीजों में एंटीबॉडीज आखिर कितने समय तक शरीर में बरकरार रहती है।

    डब्‍ल्‍यूएचओ के वरिष्ठ अधिकारी और वैक्‍सीनेशन, वैक्‍सीन और बायोलॉजीकल्स विभाग की डायरेक्‍टर डॉक्टर कैथरीन ओ ब्रायन का कहना है कि कोविड-19 महामारी की वैक्सीन के बारे में लोगों को जागरुक करना और उन्‍हें इस बात का भरोसा दिलाना बेहद जरूरी है कि ये वैक्‍सीन सुरक्षित हैं, काफी जरूरी है। उन्‍होंने ये भी कहा है कि वैक्‍सीन और इसके फायदे के बारे में खुद अपनी राय विकसित करेंगे जो भविष्‍य में इसके लिए जरूरी इक्‍यूपमेंट जुटाने में सहायक साबित होंगी।

    उन्‍होंने ये भी कहा है कि डब्‍ल्‍यूएचओ चाहता है कि वैक्‍सीन के जरिए लोगों को इसके पीछे की साइंस के बारे में भी जानकारी हासिल हो। ऐसा इसलिए भी है क्‍योंकि इससे लोगों को भरोसा दिलाने में मदद मिलेगी कि वैक्‍सीन सुरक्षित है। इस काम में कंपनियां, डॉक्‍टर, नर्स बखूबी कर सकते हैं। इसके अलावा स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं से जुड़े लोग भी इसमें मदद कर सकते हैं।

  • COVID-19 से लड़ाई में नई दवा मोल्नूपीराविर गेमचेंजर साबित हो सकती है

    [object Promise]

    नई दिल्ली। भले ही दुनिया कोविड-19 महामारी से बचाव के लिए कई वैक्सीन पर तेजी से चल रही प्रगति को चीयर्स कर रही है, लेकिन संक्रमितों के लिए असरकारक दवा को लेकर वैज्ञानिक अभी भी शोध में जुटे हुए हैं। अब वैज्ञानिकों की एक टीम ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसी दवा ढूंढ ली है, जो किसी भी व्यक्ति के शरीर में मौजूद कोरोनावायरस को महज 24 घंटे में खत्म करने में सक्षम है। इस दवा को मोल्नूपीराविर नाम दिया गया है। इसे फार्मास्यूटिकल कंपनी मार्क और रिजबैंक एक साथ मिलकर बना रहे हैं। यह दवा सार्स-सीओवी-2 संक्रमण के खिलाफ अपने दूसरे/तीसरे नैदानिक परीक्षणों (क्लीनिकल ट्रायल) में है।

    अमेरिका में जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर बायोमेडिकल साइंसेज के शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि सार्स-सीओवी-2 संक्रमण का इलाज एक नई एंटी वायरल दवा मोल्नूपीराविर से किया जा सकता है। दावा किया गया है कि यह दवा इतनी प्रभावी है कि 24 घंटे के भीतर वायरस पूरी तरह से खत्म हो जाता है।

    जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रिचर्ड प्लेंपर के नेतृत्व में समूह ने मूल रूप से पता लगाया कि दवा इन्फ्लूएंजा वायरस के खिलाफ शक्तिशाली है।

    अध्ययन के लेखक रिचर्ड प्लेंपर के मुताबिक, कोरोना के इलाज के लिए गटकी जाने वाली दवाई के तौर पर यह पहली दवा है और कोरोना के इलाज में यह गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

    शोधकर्ताओं ने कहा, “क्योंकि यह दवा सामान्य रूप से ही निगल कर खाई जाने वाली है, इसलिए इसके लाभ भी अन्य से तीन गुना तेजी से देखने को मिलते हैं। मरीज के लक्षणों को देखते हुए यह दवा इस्तेमाल में लाई जा सकती है।”

    उन्होंने कहा कि मुंह से ली जाने वाली इस दवा का प्रदर्शन अच्छा है और यह तेजी से सार्स-सीओवी-2 ट्रांसमिशन को ब्लॉक करने का काम करती है।

    बड़े पैमाने पर टीकाकरण उपलब्ध होने तक कोविड-19 का व्यापक सामुदायिक प्रसारण बाधित करना कोविड-19 के प्रबंधन के लिए सर्वोपरि है और यह महामारी के भयावह परिणामों को कम करता है।

    प्लेंपर ने कहा कि शुरुआती शोध में इस दवा को इंफ्लूएंजा जैसे जानलेवा फ्लू को खत्म करने में असरदार पाया गया था, जिसके बाद कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए इस पर शोध किया गया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने कुछ जानवरों को पहले कोरोना से संक्रमित किया और उसके बाद जैसे ही उन जानवरों ने नाक से वायरस को छोड़ना शुरू किया, उन्हें तुरंत मोल्नूपीराविर दवा दी गई।

    मोल्नूपीराविर दवा देने के बाद संक्रमित जानवरों को स्वस्थ जानवरों के साथ एक ही पिंजरे में रखा गया, ताकि यह देखा जा सके कि उनमें संक्रमण फैलता है या नहीं।

    इस अध्ययन के सह लेखक जोसफ वुल्फ ने बताया कि शोध के दौरान यह पाया गया कि संक्रमित जानवरों से स्वस्थ जानवरों में संक्रमण नहीं फैला। उनका कहना है कि इस दवा का इस्तेमाल अगर संक्रमित मरीजों पर किया जाता है तो महज 24 घंटे में ही मरीज के शरीर से संक्रमण खत्म हो जाएगा।

    रिपोर्ट्स में बताया गया है कि काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) जल्द ही दवा के लिए मानव नैदानिक परीक्षण करने पर निर्णय लेगा।

  • वैज्ञानिक प्रमाण मिलेगा आयुर्वेद से कोरोना के इलाज को, लखनऊ में शुरू होगा ट्रायल

    [object Promise]

    लखनऊ। कोरोना महामारी को आयुर्वेद से मात देने के दावे का वैज्ञानिक प्रमाण शीघ्र ही ट्रायल के जरिए सामने आएगा। क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया (सीटीआरआइ) ने ट्रायल की अनुमति दे दी है, जो लोकबंधु कोविड अस्पताल में होगा। यहां कोविड के बायोमार्कर आयुर्वेदिक औषधियों से कोरोना ठीक होने का वैज्ञानिक प्रामाण परखा जाएगा। ट्रायल में एक से डेढ़ माह का समय लग सकता है। अगर यह सफल रहा तो देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।

    लोकबंधु कोविड-19 अस्पताल में कुछ माह पहले 120 कोरोना मरीजों पर आयुर्वेदिक औषधियों से संक्रमण मुक्त करने का ट्रायल हुआ था, जो 100 फीसद सफल रहा था। बाद में इस शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित भी किया गया। ट्रायल में मरीजों के तीन ग्रुप बनाए गए थे। इनमें से कुछ मरीजों को सुबह शाम सोंठ का पाउडर व कच्चे लहसुन की डोज डॉक्टर के परामर्श के अनुसार दी गई। कुछ मरीजों को लोकबंधु अस्पताल में ही तैयार विशेष प्रकार का काढ़ा दिया गया, जिसमें कई अतिरिक्त औषधियां मिलाई गई थीं।

    वहीं, कुछ मरीजों को इन दोनों में से कुछ भी नहीं दिया गया। पड़ताल में देखा गया कि जिन मरीजों को सोंठ पाउडर व कच्चा लहसुन की डोज दी गई, उनकी कोरोना रिपोर्ट पांच-छह दिन में निगेटिव आ गई। जिन्हें विशेष प्रकार का काढ़ा दिया गया, वह मरीज भी सात से नौ दिन बाद संक्रमण मुक्त हो गए। जिन्हें कुछ नहीं दिया गया, उनमें संक्रमण बना रहा। इस प्रकार यह सिद्ध हो गया कि आयुर्वेदिक नुस्खों से मरीज कोरोना संक्रमण से मुक्त हो रहे है। हालांंकि, दावे के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। यही वजह है, नए ट्रायल का फैसला हुआ है।

    50 मरीजों पर ट्रायल

    लोकबंधु अस्पताल के आयुर्वेद एवं पंचकर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. आदिल रईस ने बताया कि क्लीनिकल ट्रायल के लिए 50 मरीज चुने हैैं। इनके ब्लड मार्कर में आयुर्वेदिक दवाएं शुरू करने से पहले और बाद में उनके साइटोकाइन स्टॉर्म की स्थिति का आकलन करेंगे।

    ऐसे सिद्ध होगी वैज्ञानिक प्रमाणिकता

    देखा जाएगा कि ब्लड मार्कर आयुर्वेदिक दवाओं के असर से किस प्रकार परिवर्तित हो रहे हैं। साइटोकाइन स्टॉर्म एक तरह से इम्यून सिस्टम हैं, जो रोगों से लड़ते हैं। हां, कोविड के मामले में यह देखा गया है कि साइटोकाइन स्टॉर्म अपने ही शरीर को नुकसान पहुंचाने लगते हैं। आयुर्वेदिक दवाओं से साइटोकाइन स्टॉर्म की स्थिति को ठीक किया जाता है, ताकि शरीर का इम्यून सिस्टम कोरोना से जंग लड़ सके।

    यह जांच होगी जरूरी

    प्रक्रिया के दौरान मरीजों के कई रक्त आधारित टेस्ट होंगे। इनमें आइएल-6, डी-डाइमर (रक्त के जमने की स्थिति बताता है), एलडीएच, सीबीसी, सीआरपी, लिवर व किडनी फंक्शन टेस्ट इत्यादि हैं। यदि सभी ब्लड मार्कर दवाओं के असर से संतुलित स्थिति में आते हैं या सकारात्मक परिणाम देते हैं तो आयुर्वेदिक इलाज पर वैज्ञानिक मुहर लग जाएगी।

     

  • कई सारी बीमारियों से दूर रहें न्यूट्रिशन से भरपूर मशरूम खाकर

    [object Promise]

    खराब मेटाबॉलिज्म की वजह से हृदय रोग, मोटापा, कैंसर व मधुमेह जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मशरूम में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण मेटाबॉलिज्म सुधारने के साथ ही इन सभी समस्याओं को दूर करने में भी मददगार होता है।

    मशरूम में मौजूद एंजाइम्स और फाइबर कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने का काम करते हैं। इसके अलावा मशरूम में पाए जाने वाले उच्च फाइबर, अनसैचुरेटेड फैटी एसिड व सोडियम के साथ-साथ इरिटेडेनिन फेनोलिक यौगिक और स्टेरोल्स हानिकारक कॉलेस्ट्राल को कम करते हैं और आपके दिल को रखता है दुरूस्त।

    [object Promise]

    मोटापा कम करने वालों को प्रोटीन रिच डाइट लेने की सलाह दी जाती है और मशरूम प्रोटीन का स्त्रोत है। इसमें लीन प्रोटीन होता है। इसके अलावा मशरूम में एंटी ओबेसिटी गुण भी होते हैं, जो बढ़ते वजन को कम करने में फायदेमंद हो सकते हैं

    एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर मशरूम फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। इन्हें खाने में बॉडी में प्रोटीन और एंटीवायरल की मात्रा बढ़ती है जो डैमेज सेल्स की मरम्मत और नए सेल्स की ग्रोथ में मदद करता है। मशरूम एक नेचुरल एंटीबायोटिक है जिसके सेवन से फंगल इंफेक्शन को भी ठीक किया जा सकता है।

    कुछ खास प्रकार के मशरूम में एंटीडायबिटिक गुण पाए जाते हैं, जो ब्लड में मौजूद शुगर की मात्रा को कम करने में मदद कर सकते हैं। इनके कारण मशरूम डायबिटीज को कंट्रोल कर उसके असर को बढ़ने से रोक सकता है। साथ ही अगर मशरूम का इस्तेमाल आप डायबिटीज की दवाओं के साथ करें, तो शरीर में इंसुलिन का लेवल बेहतर हो सकता है।