कौन नहीं चाहता कि उसकी गर्लफ्रेंड खुश रहे और हर वक्त उसी के बारे में सोचे। लेकिन इसका तरीका क्या है यह ज्यादातर लोगों को नहीं पता होता। यहां जानते हैं स्टडी में क्या खुलासा हुआ…
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सबसे ज्यादा कैसे खुश होती है गर्लफ्रेंड, हुआ स्टडी में खुलासा
[object Promise]एक पुरानी कहावत है कि अगर किसी पुरुष के दिल तक पहुंचना है तो इसका रास्ता उसके पेट से होकर जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि यह कहावत महिलाओं पर भी सही बैठती है। फिलाडेल्फिया की ड्रेक्सेल यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिलवेनिया ने एक साझा स्टडी में यह निष्कर्ष निकाला कि जो महिलाएं प्रॉपर तरीके से खाती हैं वे रोमांस में ज्यादा इंट्रेस्टेड रहती हैं बजाय उनके जो भूखी रहती हैं।यह स्टडी काफी मजेदार तरीके से हुई थी। नॉर्मल वजन वाली फीमेल स्टूडेंट्स से 8 घंटे तक भूखे रहने को कहा गया और उनको कई तस्वीरें दिखाकर एमआरआई स्कैन किया गया।मजेदार बात यह थी कि जिन लोगों ने 8 घंटे से कुछ नहीं खाया था उनका निर्जीव तस्वीरों जैसे (स्टैपल, पेड़, बॉलिंग बॉल) के लिए वही रिऐक्शन था जो रोमांटिक तस्वीरों को लेकर। इन तस्वीरों में उन्हें हाथ पकड़े हुए कपल्स, कैंडल लाइट डिनर वगैरह की तस्वीरें दिखाई गई थीं।फिर इन लड़कियों को चॉकलेट शेक दिया गया जिसकी कैलरी लगभग 500 थी फिर यह एक्सपेरिमेंट दोहराया गया।। हैरानी की बात यह रही कि हिस्सा लेने वाली लड़कियों इस बार रोमांटिक तस्वीरों पर काफी स्ट्रॉन्ग रिऐक्शन दिया।शोधकर्ताओं ने यह नतीजा निकाला का भूखी महिलाओं का सबसे पहला फोकस खाना होता है। अगर वे भूखी नहीं हैं तभी किसी और चीज जैसे रोमांस या सेक्स वगैरह पर ध्यान दे पाती हैं।एक रिसर्च में यह बात भी सामने आई कि अगर आप डेट पर मीठा खाते हैं तो आपके रोमांस करने के चांस बढ़ जाते हैं। आप सोच रहे होंगे कि इसके पीछे लॉजिक क्या है। तो बता दें कि कुछ मीठा खाने से दिमाग में डोपामीन का लेवल बढ़ता है। यह न्यूरोट्रांसमिटर पैशनैट रोमांटिक लव से जुड़ा होता है।वैज्ञानिकों की मानें तो अच्छे लुक्स, महंगे गिफ्ट्स और रोमांटिक लाइनें ये सब पीछे छूट सकते हैं अगर आपकी गर्लफ्रेंड भूखी है। साथ ही खाने के बाद उन्हें स्वीट डिश खिलाना न भूलें। -
काली आंखों वाले लोग प्यार में कभी धोखा नहीं देते है, आंखों से जानिए स्वभाव
[object Promise]आँखें आपकी शकसियत का आइना होती हैं। यह वह बात भी बोल देती हैं जो आप नहीं बोल पाते है। समुद्र शास्त्र में भी आंखों के बारे में जिक्र किया गया है और बताया गया है कि आप कैसे किसी से पहली बार मिलने पर ही उसके स्वभाव को अच्छे तरीके से जान सकते हैं।
समुद्रशास्त्र के अनुसार, आंखों को देखकर हम पता लगा सकते हैं कि कौन वफादार और कौन धोखेबाज है। आइए आज हम आपको आंखों से जुड़े कुछ राज बताने जा रहे है जिनके माध्यम से आप दूसरों के बारे में सिर्फ उनकी आंखें देखकर पता लगा सकते हैं।
[object Promise]नीली आंखें
समुद्र शास्त्रों के अनुसार नीली आंखों वाले लोगों को बहुत चालाक कहा गया है। इन लोगों पर ज्यादा भरोसा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये लोग किसी भी तरह अपना मतलब निकालते है।भूरी आंखें
समुद्रशास्त्र में भूरी आंखों वालों को स्वार्थी कहा गया है। कहते हैं जिन व्यक्तियों की आंखें भूरी होती है वह अपने मतलब से वास्ता रखने वाले होते हैं।आंखें टिकाए रखना
ज्योतिष के अनुसार बात करते वक्त अगर कोई व्यक्ति आपके चेहरे पर आंखें टिकाए रखता हैं तो समझ लीजिए कि वह व्यक्ति अहंकारी है। ऐसे लोगों में बहुत आत्मविश्वास होता है और यह लोग सामने वाले पर अपना प्रभाव जताने की कोशिश करते हैं।धंसी आंखें
ऐसे लोगों की सोच गहरी होती हैं, इनकी रुचि रहस्यमयी चीजों में होती है। इनके दिल में बहुत रहस्य भी छुपे होते हैं।[object Promise]काली आंखें
काली आंखों वाले लोगों को समुद्रशास्त्र में गुणवान और ज्ञानी कहा गया है। ऐसे लोग अपने पार्टनर को जीवन में कभी भी धोखा नहीं देते है।बड़ी आंखें
समुद्रशास्त्र में बताया गया है कि बड़ी आंखों वाले लोग बहुत वफादार होते हैं। इन्हें परोपकारी और अच्छे दिल वाले माना गया है। ऐसे लोगों से जरूरत के समय सहयोग मांगने पर कभी मना नही करते। मदद के लिए ये हमेशा तत्पर रहते हैं।
गोलाकार आंखें
गोलाकर आंखों वाले लोग समझदार तथा दूरदर्शी होते हैं। ये लोग अपना फैसला सोच-समझकर और जांच परखकर करते हैं। ऐसे व्यक्ति किसी भी चीज पर जल्दी यकीन नहीं करते हैं।[object Promise] -
ये है सबसे खूबसूरत भारत की आदिवासी महिला, मिसेज राजस्थान 2018 का जीत चुकी है खिताब
[object Promise]वर्तमान में सोशल मीडिया फेमस होने के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म बन गया है। जिसकी वजह से लोग रातों ही रात में जमीन से आसमान की ऊंचाइयों पर पहुंच जाते हैं। आइए हम भारत की सबसे खूबसूरत आदिवासी महिला प्रीति मीणा की बात कर रहे है। यह राजस्थान की सबसे खूबसूरत महिला हैं। इन्होंने 2018 में मिसेज राजस्थान का खिताब भी जीता था।
बता दें कि एक छोटे से परिवार में रहने वाली प्रीति मीणा के पति एक इंस्पेक्टर हैं। वर्तमान में ये महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित करती हैं और अपने बच्चों के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर रही हैं।
बता दें कि प्रीति मीणा मॉडलिंग व कक्षा 12वीं से पीजी तक पढ़ाई में भी टॉपर रही थी। फिलहाल प्रीति समाज में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, महिला अत्याचार, स्वच्छ भारत अभियान, महिला सशक्तिकरण जैसे कार्यक्रमों में सहभागिता निभाकर समाज में सकारात्मकता का संदेश दे रही हैं।
मिसेज इंडिया यूनिवर्स 2018 की फाइनलिस्ट प्रीति मीणा का विशेषकर महिलाओं के लिए संदेश है कि जो भी सपना देखो, उसे पूरा करने का जज्बा भी रखो।
[object Promise]तीन वर्षीय पुत्र-पुत्री जुड़वां बच्चों की मां प्रीति ने बतौर गृहिणी घर-परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए यह मुकाम हासिल किया है।
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चीन में 830 मामलों की पुष्टि कोरोनावायरस निमोनिया के
[object Promise]बीजिंग। चीन के 29 प्रांतीय स्तर के क्षेत्रों में कोरोनावायरस के कारण होने वाले निमोनिया के 830 मामलों की पुष्टि की गई है। चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के हवाले से बताया कि इन लोगों में से 34 ठीक हो गए और इन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
आयोग के अनुसार, 20 प्रांतीय स्तर के क्षेत्रों में कुल 1,072 संदिग्ध मामले सामने आए हैं।
निमोनिया से अब तक 25 लोगों की मौत हुई है। हुबेई प्रांत में 24 और हेबेई में एक की मौत हुई है।
गुरुवार मध्यरात्रि तक, हांगकांग में दो, मकाऊ में दो और ताइवान में एक मामले की पुष्टि हुई।
थाईलैंड में तीन मामलों की पुष्टि की गई थी, जिनमें से दो मरीज अब ठीक हैं।
जापान में इस रोग की चपेट में आया एक मरीज अब ठीक है। जबकि दक्षिण कोरिया, अमेरिका और सिंगापुर में एक-एक और वियतनाम में दो मामलों की पुष्टि हुई है।
आयोग ने कहा कि उनमें से 8,420 लोग मेडिकल ऑब्जर्वेशन में हैं, जबकि 1,087 अन्य को छुट्टी दे दी गई है।
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कोरोना वायरस – 96 विमानों के 20 हजार यात्रियों की भारत में थर्मल जांच
[object Promise]नई दिल्ली । कोरोना वायरस मामले में भारत में 96 विमानों के 20 हजार यात्रियों की थर्मल जांच की गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इन स्वास्थ्य जांचों में कोई भी व्यक्ति कोरोना वायरस से ग्रसित नहीं पाया गया है। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, “अभी तक अलग-अलग देशों से आ रहे 96 विमानों के यात्रियों की जांच की गई है। इन 96 विमानों में सवार सभी 20 हजार 844 यात्री कोरोना वायरस से पूरी सुरक्षित पाए गए हैं। कोरोना वायरस से चीन में कई व्यक्तियों की मौत के बाद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन स्थिति की निकटता से समीक्षा कर रहे हैं।”
चीन के बाद अब सिंगापुर में भी नोवेल कोरोना वायरस का मामला सामने आया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसकी पुष्टी की है। पड़ोसी देशों में गंभीर बीमारी का यह वायरस पाए जाने के बाद अब भारत सरकार ने भी अतिरिक्त सर्तकता बरतनी शुरू कर दी है। इसी के तहत अलग-अलग देशों से आ रहे 20 हजार से अधिक विमान यात्रियों की विशेषज्ञों द्वारा गहन थर्मल जांच की गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी के रूप में दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, अहमदाबाद, अमृतसर, कोयंबटूर, गुवाहाटी, जयपुर, बागडोगरा, गया, त्रिवेंद्रम, त्रिची, वाराणसी और विजाग हवाई अड्डों के लिए सतर्कता निर्देश जारी किए गए हैं। चीन से आने वाले अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों की थर्मल स्कैनर के जरिये जांच करने का निर्देश भी दिया है। नागर विमानन मंत्रालय के सहयोग से विमान में इस संबंध में घोषणाएं की जा रही हैं। चीन जाने वाले और वहां से आने वाले यात्रियों के लिए यात्रा परामर्श भी जारी किया गया है। यह परामर्श स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
अभी तक दिल्ली, मुंबई और कोलकाता एयरपोर्ट पर चीन, सिंगापुर व जापान से आने वाले 60 विमानों में सवार कुल 12,828 यात्रियों की जांच की जा चुकी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रयोगशाला जांच, निगरानी, संक्रमण रोकथाम तथा नियंत्रण (आईपीसी) और जोखिम संचार पर सभी सम्बन्धित को आवश्यक निर्देश जारी किया है। सामुदायिक निगरानी के लिए एकीकृत बीमारी निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) बनाया गया है। एनआईवी पुणे, आईसीएमआर प्रयोगशाला देश में एनसीओवी के लिए नमूने की जांच में समन्वय कर रहे हैं।
उच्चस्तरीय बैठकों में अस्पतालों में प्रबन्धन तथा संक्रमण रोकथाम नियंत्रण सुविधाओं के बारे में तैयारी की समीक्षा की गई है। राज्यों के साथ परामर्श और आईपीसी दिशा-निर्देश साझा किए गए हैं। पीपीई सहित पर्याप्त लॉजिस्टक भंडार उपलब्ध है। राज्य सरकारों को आवश्यक एहतियाती उपाय करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय कोरोना वायरस को लेकर विदेश मंत्रालय के भी सम्पर्क में है। हवाई अड्डों पर अप्रवासन अधिकारियों को इस बारे में सर्तक किया गया है।
चीन में वायरस फैलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने विभाग की सचिव प्रीति सूदन को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा करने को कहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा यह कदम समय से कोरोना वायरस की पहचान और इसके फैलाव को रोकने के लिए उठाए जा रहे हैं। इस वायरस का मानव से मानव संक्रमण वैश्विक स्तर पर कम है। इसलिए सीमित मानव से मानव संक्रमण के तथ्य को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
जेनेवा में गुरुवार को हुई विश्व स्वास्थ्य संगठन बैठक के बाद डब्ल्यूएचओ ने कहा कि अभी भी वायरस की स्थिति विकसित हो रही है। वायरस फैलने का ठोस कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है लेकिन डब्लूएचओ की प्राथमिक जांच इस वायरस को समुद्री खाद्य बाजार से जोड़ती है। कोरोना वायरस विषाणुओं के परिवार का है और इससे लोग बीमार पड़ जाते हैं। यह वायरस ऊंट, बिल्ली तथा चमगादड़ सहित पशुओं में प्रवेश कर जाता है। दुर्लभ स्थिति में पशु कोरोना वायरस बढ़कर लोगों को भी संक्रमित कर सकता है।
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Blood Sugar को खानपान व व्यायाम से रखें नियंत्रित, पढ़े एक्सपर्ट की राय
[object Promise]नई दिल्ली। सही खानपान से आप अपने ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रख सकते हैं। इसके लिए आपको केवल अपने आहार से संबंधित एक योजना बनानी पड़ेगी और उसी के अनुसार आप पूरे दिन के दौरान अपने आहार को ग्रहण करें। इसके लिए सबसे जरूरी है कि आप पहले उन खाद्य पदार्थों को सूचीबद्ध करें, जो आपके लिए हितकर नहीं हैं।
कभी-कभी हम अधूरी जानकारी के कारण फायदेमंद चीजों से भी वंचित रह जाते हैं। अगर हम डायबिटीज से ग्रसित हैं तो हमें खास ध्यान देने की आवश्यकता है अन्यथा बढ़ी हुई शुगर का शरीर के दूसरे अंगों पर भी असर पड़ सकता है। जानें क्या कहती है सीनियर डाइटीशियन ।
इन बातों पर करें अमल : धूमपान करने से बचें। ऐसा करने से रक्त नलिका सिकुड़ती हैं और ब्लड में फैट का स्तर बढ़ जाता है। इसलिए धूमपान करने से बचना चाहिए।
शारीरिक गतिविधियां बढ़ाएं: इससे आपका वजन नियंत्रित होगा साथ ही ब्लड शुगर का लेवल भी नियंत्रित रहेगा। रोज व्यायाम करना स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है और इससे मेटाबॉलिज्म अच्छा रहता है।
वजन पर नियंत्रण रखें: वजन का जरूरत से ज्यादा होना ब्लड शुगर की आशंका को बढ़ा देता है। शुगर और मोटापे में सीधा संबंध है। मरीज ब्लड शुगर की जांच नियमित रूप से कर सकते हैं।
डायबिटीज के कारण
शरीर में इंसुलिन का निर्माण नहीं हो पाता है। इस कारण शरीर शर्करा (शुगर), स्टार्च व अन्य भोजन को ऊर्जा में बदल नहीं पाता और ब्लड में ग्लूकोज एकत्र हो जाता है। इस कारण शरीर के दूसरे भागों जैसे आंखों और किडनी पर खराब असर पड़ता है।
- क्या न खाएं
- चाय कॉफी न लें।
- मादक पदार्थों से परहेज करें।
- मीठे फल जैसे अंगूर व केला आदि न लें।
- स्टार्च युक्त भोजन आलू, अरवी, चावल ,मैदा, तेल,चीनी तथा मिठाई आदि का सेवन न करें। स्वास्थ्य जीवनशैली पर अमल करने पर इस बीमारी से बचा जा सकता है और इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
खानपान पर रखें नियंत्रण कम मीठे फल खाएं: कुछ लोग सोचते हैं कि फलों में चीनी नहीं होती है। इसलिए कोई भी फल खा सकते हैं या कुछ लोग मीठे होने के कारण कोई भी फल नहीं खाते हैं। इसलिए डायबिटीज के रोगियों को उन फलों को लेना चाहिए जो कम मीठे हैं, जैसे पपीता, अमरूद और संतरा आदि। इन फलों में से कोई एक फल रोज खा सकते हैं।
हरी पत्तेदार सब्जियां: आप अपने रोज के भोजन में एक हरी सब्जी अवश्य सम्मिलित करें। हरी सब्जियों में एंटी ऑक्सीडेंट्स और मैग्नीशियम की मात्रा ज्यादा होती है और सभी प्रमुख पोषक तत्व पाए जाते हैं। पालक में आयरन, बींस में पोटेशियम, आयरन, कैल्शियम और पत्तागोभी में उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट्स दवा की तरह काम करते हैं। करेला, लौकी, टमाटर, सोयाबीन, शिमला मिर्च जैसी सब्जियों मे भी पर्याप्त मात्रा में जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो आपके शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में सहायता प्रदान करते हैं। भुने चने, दाल, टोंड दूध, पनीर, अंकुरित अनाज एवं सलाद के रूप में कच्ची सब्जियां जैसे खीरा, गाजर, ककड़ी मूली, चुकंदर आदि को सम्मिलित कर सकते हैं।
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शिशु में फ्रैक्चर होने का खतरा गर्भावस्था में धूम्रपान से
[object Promise]लंदन। हाल ही में हुए एक शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि गर्भावस्था के शुरुआती चरण में धूम्रपान करने से शिशुओं की हड्डियों में फ्रैक्चर होने का खतरा कुछ हद तक बढ़ जाता है। ऐसे कई सारे शोध हुए हैं, जिनमें पाया गया है कि गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान और शिशुओं की वृद्धि में आने वाली समस्याओं का एक सीधा संबंध है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान का प्रभाव शिशुओं की हड्डियों के स्वास्थ्य और जीवन के विभिन्न चरणों में इनके फ्रैक्चर होने के खतरे के बारे में मिले साक्ष्य दुर्लभ और भिन्न है।
स्वीडन के ऑरेब्रो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कहा, “अध्ययन से प्राप्त निष्कर्ष से यह संकेत मिलता है कि गर्भावस्था के दौरान मां के धूम्रपान का संबंध एक साल की उम्र से पहले के दौर में हड्डियों के फ्रैक्चर होने से है।”
उन्होंने आगे कहा, “गर्भावस्था के दौरान सिगरेट के धुएं के संपर्क में आना वैसे तो बाल्यावस्था या युवावस्था के पहले चरण में फ्रैक्चर के जोखिम पर एक लंबे समय तक चलने वाला जैविक प्रभाव नहीं लगता है।”
शोध का निष्कर्ष पत्रिका बीएमजे में प्रकाशित हुआ है। यह शोध साल 1983 से लेकर 2000 तक के बीच स्वीडन में पैदा हुए 16 लाख की आबादी पर आधारित था। माताओं में से 377,367 ने अपनी गर्भावस्था के प्रारंभिक चरणों में धूम्रपान किया था, जबकि 1,302,940 महिलाओं ने ऐसा नहीं किया था। जन्म से लेकर 21 वर्ष की औसत आयु (अधिकतम 32 साल) तक इसके नतीजे को देखा गया।
शोध निष्कर्ष में कहा गया है कि इस अवधि के दौरान 377,970 फ्रैक्चर की पहचान (हर साल 1,000 लोगों में 11.8 की दर से) की गई। शोधकर्ताओं ने भाई-बहनों के बीच तुलना कर इसका भी विश्लेषण किया, ताकि इनसे प्राप्त अपरिमेय पारिवारिक कारकों (आनुवांशिक और पर्यावरणीय) के अनचाहे प्रभावों को नियंत्रित किया जा सके।
मोटे तौर पर, गर्भावस्था के दौरान मां के धूम्रपान करने का संबंध बच्चों में हड्डियों के फ्रैक्चर होने से हैं, जिसकी संभावना सबसे ज्यादा एक साल की आयु के पहले तक के दौर में होती है, लेकिन इसका प्रभाव बचपन से लेकर पांच साल की आयु व 32 साल तक की उम्र तक रहता है।
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CORONAVIRUS: चीन में ठीक होने के बाद 328 मरीजों को मिली छुट्टी, अब तक 304 लोगों की मौत
[object Promise]बीजिंग। कोरोनावायरस से संक्रमित कुल 328 मरीजों को ठीक होने के बाद शनिवार के अंत तक अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी। चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचसी) ने अपनी दैनिक रिपोर्ट में कहा कि शनिवार को ठीक होने के बाद 85 लोगों (हुबेई में 49) को अस्पताल से छुट्टी मिली। शनिवार के अंत तक, बीमारी से कुल 304 लोगों की मौत हो गई थी और चीन में 31 प्रांतीय स्तर के क्षेत्रों और झिंजियांग प्रोडक्शन एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्प’ कोरोनावायरस संक्रमण के 14,380 मामलों की पुष्टि हुई थी।
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विकल्प चुनने से पहले जानें, IVF के प्रोसेस के बारे में हर एक डीटेल
[object Promise]जब कोई कपल नैचरल तरीके से गर्भधारण करने या प्रेग्नेंट होने में असफल रहता है तो उनके दिमाग में सबसे पहले जो बात आती है वो है IVF तकनीक का इस्तेमाल कर बच्चा पैदा करना। अक्षय कुमार और करीना की फिल्म ‘गुड न्यूज’ में भी आईवीएफ का जिक्र बार-बार आया है और आईवीएफ से जुड़े एक बेहद अहम खतरे के बारे में भी बताया गया है। लेकिन मजाक अपनी जगह पर है। आईवीएफ भले ही आपको अपना बच्चा हासिल करने के सपने के करीब ले जाने वाला प्रोसेस हो लेकिन इस विकल्प को चुनने से पहले आपको इससे जुड़े prosऔर cons यानी पक्ष-विपक्ष दोनों के बारे में जान लेना चाहिए…
IVF जादू की छड़ी नहीं है, इसमें काफी समय लगता हैऐसा नहीं है कि आज आप आईवीएफ करवाने गईं और अगले दिन आप कंसीव कर लेंगी। ये एक लंबा प्रोसेस है और इसमें कई बार डॉक्टर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अगर आप आईवीएफ के विकल्प को चुन रहे हैं तो आपको धैर्य रखने की जरूरत है। शुरुआती 15 दिनों में दवाइयां दी जाती हैं ताकि ओवरीज मल्टीपल एग्स प्रड्यूस करने लगे। इस दौरान आपको हर दिन ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड के लिए डॉक्टर के पास जाना पड़ता है। स्टिमुलेशन प्रोसेस के बाद डॉक्टर महिला के शरीर से एग्स निकालकर पुरुष के स्पर्म के साथ उसे लैब में इन्फ्यूज करते हैं। 5 दिन के बाद तैयार भ्रूण को यूट्रस में डाला जाता है। 2 हफ्ते बाद इस बात की जांच होती है कि आईवीएफ सफल रहा या नहीं। IVF से पहले ही करवा लें अपना हेल्थ चेकअप
अगर आप चाहते हैं कि आपका ये आईवीएफ प्रोसेस पूरी तरह से सफल रहे उसमें किसी भी तरह की रुकावट न आए तो बेहद जरूरी है कि आपका वजन हेल्दी हो, ऐल्कॉहॉल और तंबाकू का सेवन ना करें, जंक फूड से पूरी तरह से दूर रहें, हेल्दी डायट का सेवन करें। इन सबके अलावा हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए बेहद जरूरी है कि आप आईवीएफ से पहले ही अपना मेडिकल टेस्ट करवा लें और अगर हाई बीपी और डायबीटीज जैसी कोई दिक्कत हो तो दवाइयां लेकर इन सभी समस्याओं को कंट्रोल में रखें।
IVF के कई साइड इफेक्ट्स भी हैं
कई दूसरे मेडिकल ट्रीटमेंट की ही तरह आईवीएफ के भी कई साइड इफेक्ट्स हैं। इस प्रोसेस को करवाने के दौरान चूंकि शरीर में बहुत सारे हॉर्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं लिहाजा आप भी इस पूरे आईवीएफ साइकल के दौरान आपको भी काफी इमोशनल बदलावों से गुजरना होगा। इसके अलावा आपको खुद पर काफी प्रेशर महसूस होगा, पेल्विक एरिया में क्रैम्पिंग हो सकती है, ब्रेस्ट में दर्द या नरमी हो सकती है। कई बार आईवीएफ की वजह से जब ओवरीज ज्यादा एग्स बनाने लगती है तो इस वजह से वजन बढ़ना, पेट में सूजन होना, चक्कर आना, उल्टी आना जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं।
प्रेग्नेंसी में कॉम्प्लिकेशन का भी थोड़ा रिस्क होता है
IVF से जिन बच्चों का जन्म होता है उनमें जन्मजात दोष होने का भी थोड़ा बहुत रिस्क रहता है। इसके अलावा डॉक्टर्स आईवीएफ को सफल बनाने के इरादे से आमतौर पर यूट्रस में 1 से ज्यादा भ्रूण को इम्प्लांट करते हैं जिससे जुड़वां या अधिक बच्चे होने का खतरा भी रहता है। साथ ही आईवीएफ से प्रेग्नेंट होने पर प्रीमच्योर लेबर, समय से पहले डिलिवरी और जन्म के वक्त बच्चे का वजन कम होने का खतरा भी रहता है।
IVF प्रेग्नेंसी की 100 फीसदी गारंटी नहीं है
दुर्भाग्यवश कई बार इतनी महंगी तकनीक का इस्तेमाल करने के बाद भी कुछ महिलाएं प्रेग्नेंट नहीं हो पाती हैं। लिहाजा आपको इस बात के लिए पहले से तैयार रहना होगा कि आईवीएफ प्रेग्नेंसी की 100 फीसदी गारंटी नहीं है। कुछ महिलाएं जहां आईवीएफ की पहली ही कोशिश में प्रेग्नेंट हो जाती हैं वहीं कई महिलाएं बार-बार कोशिश करने के बाद भी प्रेग्नेंट नहीं हो पातीं। इस टेक्नीक की सफलता आपकी उम्र पर भी निर्भर करती है।
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जानिए क्यों देती है शादीशुदा महिलाएं अपने पति को धोखा ?
[object Promise]लाइफस्टाइल। यह बात हम सभी जानते है कि कॉलेज के दिनों में इंसान प्यार में धोखा खाता और देता है। लेकिन आजकल शादी के बाद धोखा देने का एक ट्रेंड सा बन गया है। यदि आपको ऐसा लगता है कि शादी के बाद आपकी पत्नी या आपके पति का किसी अन्य के साथ अफेयर नहीं हो सकता है तो ऐसे में यह आपकी जीवन की सबसे बड़ी भूल होगी। शादी से पहले और बाद धोखा देने के लिए अक्सर पति को अपराधी माना जाता था परन्तु समय बदलने के साथ महिलाएं भी धोखा करने लगी है। यदि किसी शादीशुदा महिला को शादी के बाद भी मानसिक और शारीरिक रूप से शांति नहीं मिल पा रही होती है तब वह निश्चित रूप से कहीं और चली जाती है।
अक्सर रोजाना ऐसी खबरे आती रहती है कि प्रेमी के साथ मिलकर की पति की हत्या। जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि कोई भी व्यक्ति किसी को जान-बुझकर धोखा नहीं देना चाहता है हर स्त्री या पुरूष चाहता है कि वह अपने पति या पत्नी को खुश रखें। आइए हम आपको बताते है कि क्या वजह हो सकती है। जिसकी वजह से एक शादीशुदा महिला अपने पति को धोखा देती है।
[object Promise]पहले प्यार को नहीं भूल पाना
शादी से पहले किसी से लव अफेयर होने की वजह से सामान्य रूप से महिलाएं शादी के बाद पुरूषों को धोखा देने लगती हैं। अक्सर महिलाए पहले प्यार को नहीं भूल पाने के कारण वह धोखा देने पर मजबूर हो जाती हैं।
घरेलू हिंसा
शादी नए जीवन की शुरूआत होती है और हम अनेक सपने संजोए गृहस्थ जीवन में प्रवेश करते हैं। विवाह दो इंसानों का मिलन रूपी समझौता है, लेकिन अगर शादी के बाद घर में रोज ही झगड़े हो रहे होते हैं और हिंसा होती हैं तो ऐसे में बड़ी आसानी से कोई और जीवन में आ जाता है। खासतौर पर घरेलु हिंसा का सबसे ज्यादा प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है ऐसे में उनका परिवार से विश्वास उठ जाता है और वह किसी और पार्टनर की तलाश मे रहती है जो उसकी परेशानी महसूस कर सके।ऐसी लाइफ से खुश ना होना
यदि कोई भी मर्द या महिला शादी के बाद अपनी सेक्स लाइफ से संतुष्ट नहीं हो पा रहे होते हैं तो ऐसे में उनके किसी और के साथ अफेयर होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती हैं। कई बार महिला अपने पुरूष साथी से रोमांस के दौरान असंतुष्ट रहती है। उनकी यह असंतुष्टि महिलाओं को धोखा देने और बाहर की ओर जाने पर मजबूर करती है और वह जल्द ही दूसरे पुरूषों के सम्पर्क में आने लगती है।दोनों के बीच विश्वास में कमी
अक्सर देखा जाता है कि कुछ महिलाएं शादी के बाद इसलिए धोखा देने लगती है। क्योंकि उनके पति को उन पर विश्वास नहीं होता और वह बिना किसी वजह के उन पर शक करते रहते हैं। अक्सर महिलाएं चाहती है कि वह अपने पति से खूब बातें करें और उनके पति भी अपनी बातें उनसे शेयर करें लेकिन जब आपसी वार्तालाप या संवाद की स्थिति खत्म हो जाती है तो रिश्तों में दरार आने और धोखा देने की संभावना अधिक बढ़ जाती है।[object Promise]बदला लेने की प्रवृतिकुछ महिलाएं अपने पति से बदला लेने के लिए धोखा देने लगती है। जब पति द्वारा उनके भरोसे को तोड़ा जाता है। तो महिलाओं को दिल टूट जाता है और वह उसी तरह से धोखा और चोट पहुंचना चाहती हैं।
कई बार ऐसा होता है कि महिलाओं को लगता है कि उनके पति उनके साथ धोखा कर रहे है और किसी और के बारें में बात करना उनकी तारीफ करना उन्हें समय नही देना जैसे कारण की वजह से महिलाएं अपने पति से बदला लेने के लिए कई ऐसा निर्णय लेती है।