Category: health-lifestyle

  • अपनाए ये आसान उपाय बचाएंगे आपको हार्ट अटैक से

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    आजकल व्यस्त जीवनशैली और खान-पान में अनियमितता ने आज लोगों को कई बीमारियों की ओर धकेल दिया है। हार्ट अटैक एक ऐसी बीमारी है जो बहुत ही तेजी से बढ़ी है। हार्ट अटैक एक ऐसी स्थिति है, जिसमें ज्यादातर लोग इसके लक्षणों को नहीं पहचान पाते और इस बीमारी की चपेट में आ जाते है।

    लेकिन आप अपनी जीवनशैली कुछ बदलाव कर इस जानलेवा बीमारी से बच सकते हैं। आइए आज हम आपको 3 ऐसे घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिन्हें आजमाकर आप हार्ट अटैक की बीमारी से बच सकते है।

    ब्लडप्रेशर
    रक्तचाप यानी कि ब्लडप्रेशर का बढ़ना और घटना दोनों ही हमारे शरीर के लिए हानिकारक है। ब्लडप्रेशर के हाई हो जाने से हृदय को नुकसान पहुंचाता है। हाई ब्लडप्रेशर धड़कन को बढ़ा देता है, जिसके कारण दिल सही तरीके से काम नहीं कर पाता है। आपको इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि आपके ब्लड प्रेशर का स्तर हमेशा 120 और 80 के अंदर ही रहे। हृदय स्वस्थ्य के लिए ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण बेहद जरूरी है।

    नियमित वॉकिंग करना
    हृदय के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आपको नियमित वॉक करनी चाहिए। अगर आपको पहले से ही सांस से जुड़ी कोई बीमारी है तो इतनी तेज गति से न टहलें कि आपकी सांस फूलने लग जाए। आपको सामान्य गति से ही टहलना चाहिए। ऐसा करने से आपका दिल हमेशा स्वस्थ रहेगा और आप हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति से दूर रहेंगे।

    कोलेस्ट्रॉल
    यह एक केमिकल कंपाउंड है जो हमारे लिवर में मौजूद होता है। यह हमारे शरीर में नई कोशिकाओं और हॉर्मोंस को व्यवस्थित रखने में मदद करता है। बता दें कि जब हमारे शरीर को कोलेस्ट्रॉल की जरूरत होती है तो लिवर इसे निकाल देता है और शरीर अपनी जरूरत को पूरा कर लेता है। लेकिन जो भी अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर में जमा होता है वह शरीर के लिए हानिकारक हो जाता है। कोलेस्ट्रॉल को एलडीएल कहते हैं। एलडीएल हमारे शरीर के रक्त प्रवाह को बाधित कर देता है, जिससे दिल और दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ता है। एलडीएल जानलेवा भी हो सकता है। इसलिए फैट युक्त चीजों के इस्तेमाल से बचना चाहिए, जिससे कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित रहे।

  • जानें, पुरुष किन जगहों को छूने से हो जाते हैं सेक्स के लिए उत्तेजित

    जानें, पुरुष किन जगहों को छूने से हो जाते हैं सेक्स के लिए उत्तेजित

    सेड्यूस करना सिर्फ लड़कों का काम ही नहीं बल्कि वे भी इसके हकदार होते हैं। उनकी की बॉडी में भी कुछ ऐसे जोन होते हैं जो उन्हें तुरंत उत्तेजित कर सकते हैं। इनमें काफी सारी नर्व एंडिंग्स होती हैं जो तुरंत उनका मूड बना सकती हैं। आपको बस वहां तक टच या किस से पहुंचने की जरूरत है। इसके बाद ऐसा स्टीमी सेशन शुरू हो सकता है जिसकी आपने कल्पना नहीं की होगी। यहां जानें कौन से हैं लड़कों को अराउज करने वाले ये शरीर के हिस्से…

    कान और इसके पीछे का हिस्सा

    लड़के और लड़कियों दोनों के लिए यह हिस्सा काफी प्लैजर देने वाला होता है। मूड बनाने के लिए उनके कान के पीछ आहिस्ता से किस करें। आप उनके कान में धीरे से कुछ सेक्सी सा बोलने के बाद प्यार से किस कर सकती हैं।

    नेक के पीछे का हिस्सा

    लड़कों की गर्दन का पिछला हिस्सा काफी सेंसिटिव होता है, यहां आप उन्हें वेट किस का सरप्राइज दें तो वे एकदम से आपके लिए क्रेजी हो जाएंगे। अगली बार से पहले शोल्डर पर हल्की मसाज दें फिर उनकी गर्दन के पिछले हिस्से पर ऐसे किस करें कि उन्हें आपकी सांसें महसूस हों।

    बैक टच

    आप चाहें तो उनके बट्स पर हल्के से हाथ मार सकती हैं या छूते हुए पीछे से हग कर लें। चाहें तो ऐसी जगह भी टच कर सकती हैं जहां उन्हें जरा भी उम्मीद न हो।

    निप्पल्स

    निप्पल टच आपका मूड बना सकता है तो क्यों न उन पर ट्राई किया जाए! अगर थोड़ी शैतानी करना चाहती हैं तो नटेला या चॉकले सॉस के साथ भी एक्सपेरिमेंट कर सकती हैं।

    जांघ के निचले हिस्से पर

    यह हिस्सा काफी इग्नोर किया जाता है। उनकी जांघ के निचले हिस्से को सहलाना काफी अच्छा असर कर सकता है। ऐसा करते वक्त थोड़ा प्यार जताएं और स्ट्रोक्स की स्पीड बदल दें।

    पैर

    अगर आपको पता न हो तो बता दें कि पैर और पैर की छोटी उंगली महिलाओं और पुरुषों दोनों को उत्तेजित करती है। आप उन्हें डिनर के बाद सरप्राइज फुट मसाज दे सकती हैं, खासतौर पर उनके पैर की उंगलियों पर फोकस रखें। ये काफी रोमांटिक फीलिंग होती है और अच्छी रात की सही शुरुआत। छोटी उंगली पर किस भी करके देखें, महिलाओं पर भी इसका जबरदस्त असर होता है।

  • लोग सोशल मीडिया की ले रहे मदद सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज के डायग्नोसिस में!

    लोग सोशल मीडिया की ले रहे मदद सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज के डायग्नोसिस में!

    लोगों का सोशल मीडिया में इंगेजमेंट इतना बढ़ता जा रहा है कि वे Reddit पर अजनबियों से सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज को डायग्नोज तक करने में मदद मांग रहे हैं। यह बात यूएस जर्नल ट्यूज्डे में छपी एक नई स्टडी में सामने आई है। इस प्रक्रिया को ‘क्राउड डायग्नोसिस’ का नाम दिया गया।

    यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया ने Reddit थ्रेड के 17000 पोस्ट देखे जो कि STD (सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज) पर ही थे। इसके बाद उन्होंने 500 पोस्ट्स के रैंडम सैंपल लिए। अट्ठावन फीसदी मेसेजज में खुलेआम क्राउड डायग्नोसिस की रिक्वेस्ट की गई थी वहीं 31 फीसदी ने लक्षणों की फोटो डाली थी।

    पांच में से एक रिक्वेस्ट ऐसी थी, जिसमें यूजर्स डॉक्टर्स से बात करने के बाद सेकंड ओपेनियन चाहते थे। इनमें एक ऐसा व्यक्ति भी शामिल था जो कि HIV पॉजिटिव था, लेकिन यह जानना चाहता था कि Reddit यूजर्स क्या सोचते हैं।

    STD पर पार्टनर से ऐसे करें बात

    • फर्स्ट टाइम सेक्स आपके अंदर जितना उत्साह लेकर आता है उतने ही सवाल भी। सेक्स आपके रिलेशनशिप का एक हिस्सा है और आपके रिश्ते को एक कदम आगे लेकर जाता है। हालांकि, फर्स्ट टाइम सेक्स के बाद इसे लेकर कई तरह के सवाल उठते हैं। क्या इससे आपकी सेहत को नुकसान पहुंचेगा, क्या सही है क्या नहीं जैसे कई सवाल आपके मन में चलते हैं। ऐसा ही एक अहम सवाल है कि क्या यह सेक्स सुरक्षित है। कहीं आपके पार्टनर को कोई सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STD) तो नहीं।

    • ऐसे में कई बार आप चाहते हैं कि आप दोनों इसकी जांच करवा लें। लेकिन इस बारे में बात करना आपको काफी अजीब लगता है। आपको कुछ टिप्स बताते हैं जिससे आप अपने पार्टनर को टेस्ट के लिए आसानी से मना सकते हैं।

    • ध्यान रहे कि इस बातचीत में आप भी एक हिस्सेदार हों। आपको अपने पार्टनर को टेस्ट के लिए निर्देश नहीं देना है बल्कि खुद भी इसमें शामिल होना है। आप उनसे यह कहें कि आप भी अपने बारे में श्योर नहीं है। अगर आपने पहले टेस्ट करा लिया है तो उन्हें बताएं कि आप स्वस्थ हैं और अब उन्हें भी इसके लिए श्योर होने में मदद करना चाहते हैं।

    • अपने लॉन्ग टाइम पार्टनर से इस बारे में बात करना थोड़ा आसान है फिर भी आप पहले से नहीं जान सकते हैं कि वह कैसे रिऐक्ट करेंगे। हो सकता है कि वह इसका जवाब स्मार्टली दें या उखड़ कर बात करें या फिर आपपर हंस दें। ऐसे में आपको तैयार रहना चाहिए। आपके पास सही लॉजिक होना चाहिए कि आप ऐसा क्यों चाहते हैं। उन्हें बताएं कि आजकल STD कितने कॉमन हैं और टेस्ट कराना एक सामान्य बात है। अपने लॉन्ग टाइम पार्टनर से इस बारे में बात करना थोड़ा आसान है फिर भी आप पहले से नहीं जान सकते हैं कि वह कैसे रिऐक्ट करेंगे। हो सकता है कि वह इसका जवाब स्मार्टली दें या उखड़ कर बात करें या फिर आपपर हंस दें। ऐसे में आपको तैयार रहना चाहिए। आपके पास सही लॉजिक होना चाहिए कि आप ऐसा क्यों चाहते हैं। उन्हें बताएं कि आजकल STD कितने कॉमन हैं और टेस्ट कराना एक सामान्य बात है।

    • लोग सोशल मीडिया की ले रहे मदद सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज के डायग्नोसिस में!

      इस तरह बात न करें जिससे लगे कि आप उन्हें दोष दे रहे हों। उनके लिए अपना सम्मान और फिक्र जताएं। उन्हें समझाएं कि अगर वे किसी बीमारी से पीड़ित हुए तो कम से कम इस टेस्ट से उन्हें पता तो चल जाएगा।

    8-7 फीसदी बार ऐसी रिक्वेस्ट को जवाब भी मिले और इनको पहला जवाब मिलने में औसतन वक्त 3 घंटे लगा और किसी-किसी को यह जवाब एक मिनट से भी कम वक्त में मिला था।

    यूसी सैन डिएगो के एपिडेमियॉलजिस्ट जॉन कहता हैं कि हर कोई हर वक्त डॉक्टर गूगल के बारे में बात करता रहता है। लेकिन सच है कि लोग ऑनलाइन सिर्फ इन्फॉर्मेशन ही सर्च नहीं करते बल्कि असली लोगों से इस बारे में इंटरैक्शन भी करना चाहते हैं।

  • Disha Patani वेस्टर्न ही नहीं एथनिक लुक में भी दिखती हैं खूबसूरत

    Disha Patani  वेस्टर्न ही नहीं एथनिक लुक में भी दिखती हैं खूबसूरत

    बॉलिवुड ऐक्ट्रेस दिशा पाटनी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अक्सर जिमवेअर और इनरवेअर में अपनी सेक्सी तस्वीरें पोस्ट करती रहती हैं। लेकिन दिशा, ट्रडिशनल इंडियनवेअर और एथनिकवेअर में भी उतनी ही खूबसूरत लगती हैं जितनी वेस्टर्न ड्रेसेज में। आप भी देखें, एथनिक ड्रेसेज में दिशा पाटनी की बेहतरीन तस्वीरें

    ​मैगजीन के लिए वेडिंग फोटोशूट

    मैगजीन के वेडिंग स्पेशल कवर शूट के लिए दिशा पाटनी नजर आयीं 4 अलग-अलग एथनिक लुक्स में और यकीन मानिए इन चारों ही लुक में दिशा बेहद खूबसूरत लग रहीं थीं। लहंगा, लॉन्ग स्कर्ट, लॉन्ग ड्रेस…दिशा के इन सभी लुक्स को मशहूर डिजाइनर अभिनव मिश्रा ने तैयार किया था।

    ​लहरिया लॉन्ग स्कर्ट में दिशा

    सबसे पहले बात ऑरेंज और पिंक कलर की लहरिया स्टाइल लॉन्ग स्कर्ट लुक की। दिशा ने शिफॉन लहरिया स्कर्ट और मैचिंग जैकेट को फ्रिल वाली नेट ब्लाउज के साथ टीमअप कर पहना था। साथ में बड़े-बड़े एमरेल्ड इयररिंग्स और खुले बाल…

    ​गोटा वर्क वाला हेवी लहंगा

    दूसरे लुक में अभिनव मिश्रा द्वारा डिजाइन किए गए गोटा वर्क वाला लहंगा और मिरर वर्क वाली एम्बेलिश्ड रॉ सिल्क मटीरियल की नेट ब्लाउज में नजर आयीं दिशा पाटनी। ब्लाउज का प्लंजिंग नेकलाइन और हेवी चोकर नेकलेस दिशा के इस लुक की खासियत थे।

    ​डीप नेकलाइन वाली लॉन्ग ड्रेस

    गोटा और मिरर वर्क वाली गोल्डन कलर की डीप और प्लंजिंग नेकलाइन वाली लॉन्ग ड्रेस में खुले बाल और एमरेल्ड ग्रीन कलर की ईयररिंग्स के साथ बेहद खूबसूरत नजर आ रही हैं दिशा पाटनी।

    ​चोली संग शरारा का फ्यूजन लुक

    इन दिनों फ्यूजनवेअर ड्रेसेज भी काफी ट्रेंड में हैं और दिशा का यह लुक ट्रडिशनल और फ्यूजन का बेहतरीन मिक्स है। इस लुक में दिशा ने फुशिया पिंक कलर के वेलविट मटीरियल के हेवी वर्क वाले शरारा को सिल्क की मिरर वर्क वाली ब्लाउज के साथ टीमअप कर पहना है और इस लुक में भी वह खूबसूरत लग रही हैं।

  • किडनी की बीमारी का आयुर्वेद में असरदार इलाज

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    कोलकाता। आयुर्वेद में किडनी (गुर्दे) की बीमारी का असरदार इलाज संभव है। आयुर्वेद की दवा गुर्दे को नुकसान पहुंचाने वाले घातक तत्वों को भी बेअसर करती है। कोलकात्ता में चल रहे भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान मेले में पहली बार आयुर्वेद दवाओं पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया जिसमें गुर्दे के उपचार में इसके प्रभाव पर चर्चा की गई।

    इस सत्र के दौरान एमिल फार्मास्युटिकल के कार्यकारी निदेशक संचित शर्मा ने आयुर्वेद के उपचार में प्रभावी दवा नीरी केएफटी के बारे में अब तक हुए शोधों का ब्यौरा पेश करते हुए कहा कि नीरी केएफटी गुर्दे में टीएनएफ अल्फा के स्तर को नियंत्रित करती है। टीनएफ एल्फा परीक्षण से ही गुर्दे में हो रही गड़बड़ियों का पता चलता है तथा यह सूजन आदि की स्थिति को भी दर्शाता है। टीएनएफ अल्फा सेल सिग्नलिंग प्रोटीन है।

    शर्मा ने अपने प्रजेंटेशन में कहा कि नीरी के एफटी को लेकर अमेरिकन जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च में शोध प्रकाशित हो चुका है। इस शोध में पाया गया कि जिन समूहों को नियमित रूप से नीरी केएफटी दवा दी जा रही थी उनके गुर्दे सही तरीके से कार्य कर रहे थे। उनमें भारी तत्वों, मैटाबोलिक बाई प्रोडक्ट जैसे क्रिएटिनिन, यूरिया, प्रोटीन आदि की मात्रा नियंत्रित पाई गई। जिस समूह को दवा नहीं दी गई, उनमें इन तत्वों का प्रतिशत बेहद ऊंचा था। यह पांच बूटियों पुनर्नवा, गोखरू, वरुण, पत्थरपूरा तथा पाषाणभेद से तैयार की गई है।

    उन्होंने कहा कि जिन लोगों के गुर्दे खराब हो चुके हैं लेकिन अभी डायलिसिस पर नहीं हैं, उन्हें इसके सेवन से लाभ मिलता है। उन्हें डायलिसिस पर जाने की नौबत नहीं आती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि आयुर्वेद में कई उपयोगी दवाएं हैं। आयुर्वेद में उन बीमारियों का उपचार है जिनका एलोपैथी में नहीं है। लेकिन उन्हें आधुनिक चिकित्सा की कसौटी पर परखे जाने और प्रमाणित किये जाने की जरूरत है। इस दिशा में डीआरडीओ और सीएसआईआर ने कार्य किया है इस पर और ध्यान दिये जाने की जरूरत है।

  • ये जड़ी-बूटी आपको सर्दियों में देंगी गर्माहट

    ये जड़ी-बूटी आपको सर्दियों में देंगी गर्माहट

    नई दिल्ली। एमवाई22बीएमआई की संस्थापक और प्रमुख हेल्थ कोच प्रीति त्यागी ने सर्दियों के मौसम में खुद को चुस्त-दुरुस्त व स्वस्थ रखने के लिए कुछ खास जड़ी बूटियों के बारे में बताया है, जो आसानी से आपकी रसोई में ही आपको मिल जाएंगे।

    आइए जानते हैं उनके बारे में :

    1. तुलसी :
     तुलसी को एलर्जी, सांस संबंधी समस्या और ब्रोंकाइटिस की समस्या से निजात पाने में कारगार बताया गया है। प्रतिदिन आप दो पत्तियों का सेवन सीधे या फिर चाय में डालकर कर सकते हैं। इस पौधे के हर्बल सप्लीमेंट भी आसानी से मिल जाते हैं।

    2. अदरक : अदरक को भी जड़ी बूटी के तौर पर देखा जाता है। एक हालिया शोध में यह तथ्य सामने आए हैं कि अदरक के मौखिक सेवन से अस्थमा में काफी आराम मिलता है। इसके साथ ही चाय के साथ इसका सेवन कर इसका सेवन डिटॉक्स ड्रिंक के तौर पर किया जा सकता है। अदरक को काली मिर्च और शहद के साथ मिलाकर लेने पर सांस संबंधी एलर्जी में काफी आराम मिलता है, इससे नाक की नली भी साफ होती है।

    3. बटरबर : यह माइग्रेन की समस्या में लाभदायक है। शोध में इस बात की पुष्टि हुई है कि यह अनचाहे एलर्जी के लक्षणों में लाभदायक है। हालांकि इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हैं। किसी भी मामले में इसका अतिरिक्त सेवन हानिकारक है।

    4. बिच्छू बूटी : यह एक बारहमासीय पौधा है, जिसका प्रयोग उम्र के लिए औषधी के तौर पर किया जाता है। मौसमी एलर्जी में यह काफी लाभदायक है।

    5. रोजमेरी : ताजे और सूखे रोजमेरी का प्रयोग कई व्यंजनों में किया जाता है। शोध में यह प्रमाणित हुआ है कि रोजमेरी में एलर्जी से लड़ने की क्षमता होने के साथ ही यह अस्थमा से ग्रसित लोगों को आराम पहुंचाती है।

    इस जड़ी बूटी में रोजमेरिनिक एसिड होता है, जिसमें एंटीफ्लेमेंटॉरी और एंटीऑक्सिडेंट दोनों गुण होते हैं। वहीं अगर आप रोजमेरिनिक एसिड को एक सप्लिमेंट के तौर पर लेते हैं तो इसे खाने के साथ ले, इससे पेटदर्द में राहत मिलेगी।

    6. ऑर्गेनो : यह एक इतालवी जड़ी बूटी है। यह कई स्वास्थ्य संबंधी लाभों के लिए सप्लीमेंट के तौर पर भी उपलब्ध रहता है। ऑर्गेनो तेल के तत्व गोली और सॉफ्टजेल कैप्सूल के तौर पर उपलब्ध रहते हैं। इसे सीधे गोली के तौर पर भी लिया जा सकता है, वहीं इसे काटकर इसके तेल को चेहरे पर भी लगाया जा सकता है।

  • रखें फोरप्ले में इन अंगों का ध्यान, लग जाएगा सेक्स में तड़का

    रखें फोरप्ले में इन अंगों का ध्यान, लग जाएगा सेक्स में तड़का

    सेक्स में संतुष्टि की बात होती है तो अकसर बात ऑर्गज्म की ही होती है। ऑर्गज्म से पहले भी आप इन पलों में तड़का लगा सकते हैं। ऑर्गज्म के साथ ही सेक्स काओवरऑल मजा लेना है तो फोरप्ले पर ध्यान देना भी बहुत जरूरी है। फोरप्ले में आपको अपने पार्टनर के इन अंगों को ध्यान में रखना चाहिए।

    निपल

    निपल स्टिमूलेशन महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए काम करना है। निपल्स में कई सारे नर्व होते हैं। इस जगह पर सहलाने और लिक करने से उत्तेजना बढ़ती है और ऑर्गज्म बेहतर महसूस होता है।

    पैर की उंगलियां

    पार्टनर के पैर की उंगलियां लिक करना भी उन्हें उत्तेजित करता है। इसके लिए फुट हाइजिन का अच्छा होना बेहद जरूरी है। अगर आप अपने रेगुलर फोरप्ले से बोर हो गए हैं, तो इसे ट्राई कर सकते हैं।

    कान

    ईयरलोब्स बेहद सेनसिटिव होते हैं। उन्हें टच करने से पार्टनर को अराउज करने में मदद मिलेगी। अगर आप उनके कान को सक करेंगे तो यह अनुभव और तगड़ा हो जाएगा।

    पेट

    अब्डॉमिनल मसल्स और पेल्विक मसल्से यहां जुड़े होते हैं। ऐसे में फोरप्ले को इस स्पॉट को आपको बिल्कुल इग्नोर नहीं करना चाहिए।

    गला

    वह भाग जहां गला छाटी से मिलता है, बेहद सेंसिटिव होता है। लाइट किसिंग और लव बाइट्स आपके पार्टनर का मजा दुगना कर सकते हैं।

  • शरीर में होती है पोषण की कमी वजन घटाने की सर्जरी से

    शरीर में होती है पोषण की कमी वजन घटाने की सर्जरी से

    लाइफस्टाइल। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बेरियाट्रिक सर्जरी भले ही मोटापे से ग्रसित कई किशोरों के लिए जीवन बदलने वाला कदम साबित हो सकता है, लेकिन इस सर्जरी से भविष्य में उनके शरीर में पोषण तत्वों की कमी हो सकती है, जिसका सही तरीके से ध्यान न रखने पर उन्हें स्वास्थ्य संबंधित समस्या हो सकती है।

    उन्होंने कहा है कि इससे निपटने के लिए जीवनशैली में बदलाव के साथ स्वस्थ खाना और व्यायाम मददगार हो सकता है।

    बेरियाट्रिक सर्जरी एक ऐसी सर्जरी है, जिससे मोटापे से ग्रसित लोग इस बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं। भयंकर मोटापे की वजह से मधुमेह, हाइपरटेंशन, हाई कॉलेस्ट्रॉल और अनिंद्रा की समस्या होने लगती है।

    देखा जाए तो कई तरह की बेरियाट्रिक सर्जरी होती हैं, लेकिन सर्जन प्रमुखत: तीन तरह की सर्जरी का प्रयोग करते हैं, जो है- रूक्स-एन-वाई गैस्ट्रिक बाईपास, वर्टिकल स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी और लैप्रोस्कोपिक एडजस्टेबल गैस्ट्रिक बैंडिंग।

    हालांकि बेरियाट्रिक सर्जरी के साइड इफेक्ट में संक्रमण, अस्थियों में कमजोरी, एनीमिया, डायरिया, पोषण की कमी, गैस की समस्या, हर्निया, गर्भधारण में समस्या जैसी परेशानियां देखी जा सकती हैं।

    दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल की मिनिमली इनवैसिव सर्जरी विभाग की वरिष्ठ सलाहकार फैजल मुमताज ने इस बारे में आईएएनएस से कहा, “इसे या तो रेस्ट्रीक्टिव या फिर रेस्ट्रीक्टिव और मैलेबसोप्र्शन संयुक्त होना चाहिए। रेस्ट्रीक्टिव बेरियाट्रिक सर्जरी पेट के आकार को कम करती है। यह खाने की सीमा को सीमित करती है, जिससे पेट के भरे होने का अहसास होता है।”

    उन्होंने आगे कहा, “मैलेबसोप्र्शन बेरियाट्रिक सर्जरी शरीर में पोषण को सीमित करती है और मरीजों को पोषण सप्लीमेंट(आयरन, बी1, बी2, बी12 आदि) दिया जाता है।”

    हाल ही में क्लीनिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी और हेपेटोलॉजी में छपे एक लेख के अनुसार शोधकर्ताओं को पता चला है कि रूक्स-एन-वाई गैस्ट्रिक बाईपास और वर्टिकल स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी से विटामिन बी12 और आयरन की कमी होती है।

    विटामिन बी12 से ग्रसित लोग न सिर्फ एनीमिया से जूझते हैं, बल्कि अवसाद, चिड़चिड़ापन और भूलने की समस्या भी उन्हें परेशान करती है।

    वहीं नई दिल्ली स्थित सरोज सुपर स्पेशियलटी हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट आर. पी. सिंह का कहना है कि किशोरों को इस तरह की सर्जरी से बचना चाहिए।

  • 7 गुना ज्यादा खतरा ‘इकलौते बच्चे’ का मोटापे का शिकार होने का: स्टडी

    7 गुना ज्यादा खतरा ‘इकलौते बच्चे’ का मोटापे का शिकार होने का: स्टडी

    यह बात तो हम सभी जानते हैं और मानते भी हैं कि अगर बच्चा इकलौता हो तो वह भाई-बहन वाले बच्चों की तुलना में ज्यादा लाड़-प्यार से पला होता है। जाहिर सी बात है मां-बाप का सारा प्यार उसी इकलौते बच्चे को ही मिलता है, लिहाजा इस वजह से कई बार बच्चा थोड़ा जिद्दी भी हो जाता है। लेकिन अब एक रिसर्च ने इसमें एक नया ऐंगल जोड़ दिया है। अनुसंधानकर्ताओं की मानें तो वैसे बच्चे जो इकलौते होते हैं, उनका वजन बढ़ने और मोटापे का शिकार होने की आशंका अधिक होती है उन बच्चों की तुलना में जिनके भाई-बहन होते हैं।

    युवाओं में मोटापा दिखने की आशंका 7 गुना अधिक

    इस बात को साबित करने के लिए एक स्टडी की गई जिसके नतीजे बताते हैं कि वैसे परिवार जिनमें एक से ज्यादा बच्चा होता है वे ज्यादा हेल्दी ईटिंग की आदत को अपनाते हैं उन परिवारों की तुलना में जहां सिंगल चाइल्ड यानी इकलौता बच्चा होता है। न्यूट्रिशन एजुकेशन ऐंड बिहेवियर नाम के जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी में यह भी कहा गया कि इस तरह का मोटापा, युवाओं में 7 गुना ज्यादा देखने को मिलता है।

    3 दिन तक डेली फूड लॉग के डेटा की हुई जांच
    इस स्टडी के तहत अनुसंधानकर्ताओं ने मांओं द्वारा 3 दिन तक डेली फूड लॉग के डेटा की जांच की जिसमें 2 वीकडे और एक वीकेंड डे का दिन शामिल था। साथ ही साथ टीचर्स ने भी बच्चों ने स्कूल में क्या खाया इस बात का लॉग रखा। साथ ही साथ मांओं ने फैमिली न्यूट्रिशन और फिजिकल ऐक्टिविटी के क्वेश्चनेयर के जरिए खाने पीने के मामले में अपने परिवार की आदतों के बारे में जानकारी दी।

    मांओं के भी खुद मोटापा का शिकार होने का खतरा
    अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि अगर परिवार में सिंगल चाइल्ड यानी इकलौता बच्चा है तो उस परिवार का हेल्दी ईटिंग प्रैक्टिस, पेय पदार्थों की चॉइस और टोटल हेल्दी ईटिंग इंडेक्स का स्कोर कम था। रिसर्च में ये भी पाया कि सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि इकलौते बच्चों की मांएं भी खुद मोटापे का शिकार पायी गईं।

  • क्या अचानक मचल उठता है Sex के लिए आपका मन? वजह है ये

    क्या अचानक मचल उठता है Sex के लिए आपका मन? वजह है ये

    अक्सर ऐसा होता है जब किसी को भी अचानक सेक्स करने की इच्छा होने लगती है। कई बार यह इच्छा इतनी तीव्र होती है कि खुद को कूल डाउन करने में वक्त लगता है। आपके मन में भी अक्सर ऐसा सवाल उठता होगा कि आखिर अचानक से ऐसे क्यों सेक्स करने की इच्छा हुई, जबकि आप तो इस बारे में कुछ सोच भी नहीं रहे हैं और ना ही ऐसा कुछ देख रहे हैं। आइए जानते हैं क्यों अचानक मन सेक्स के लिए मचल उठता है…

    दरअसल, सेक्स की इच्छा दो तरह की होती है, एक स्पॉन्टेनियस यानी अचानक से सेक्स का मन करने लगना। जबकि दूसरी होती है रेस्पॉन्सिव यानी किसी क्रिया की प्रतिक्रिया स्वरूप। अचानक सेक्स का मन करनेवाली जो स्वभाविक इच्छा होती है यह काफी हद तक आपकी सोच, ध्यान और हॉर्मोनल चेंजेज पर निर्भर करती है।

    महिलाओं की बात करें तो पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले और पीरियड्स के दौरान महिलाओं में सेक्स की इच्छा बहुत तीव्र होती है। जबकि पुरुषों में थॉट प्रॉसेस और इवेंट इसके लिए अधिक जिम्मेदार होते हैं। यह सब हॉर्मोन्स पर निर्भर करता है। अगर किसी के साथ ऐसा होता है कि अचानक ही सेक्स की इच्छा करने लगती है और फिर कंट्रोल करना मुश्किल होता, साथ ही यह स्थिति आय दिन रहती है तो आपको डॉक्टर की सलाह की जरूरत है। बाकि अन्य स्थितियों में यह बेहद सामान्य है।

    अब बात करते हैं रेस्पॉन्सिव सेक्स डिजायर की। यह आमतौर पर तब होती है, जब आप आपने पार्टनर या लवर के साथ एकांत में होते हैं और इस इंटेशन के साथ एक-दूसरे के करीब आते हैं। तब मेल और फीमेल दोनों की ही बॉडी सेक्स की डिमांड करती है। ऐसा पोर्न देखते वक्त भी होता है। इस दौरान महिलाओं के प्यूबिक एरिया में खिंचाव होता है जबकि पुरुषों में इरेक्शन होता है।