Category: health-lifestyle

  • Milind Soman से लें स्टाइल और ग्रूमिंग टिप्स सफ़ेद बालो के लिए

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    इंडिया के सबसे फेमस मॉडल्स में से एक मिलिंद सोमन भले ही अब 53 साल के हो गए हों लेकिन उनकी पर्सनैलिटी का जादू आज भी महिलाओं ही नहीं टीनएज लड़कियों पर भी छाया रहता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है मिलिंद की फिटनेस, उनकी एथलेटिक बॉडी, फिजीक और उनका स्टाइल। ऐसे में अगर आपके बाल और दाढ़ी भी थोड़ी-थोड़ी सफेद हो रही है तो उन्हें कलर करने की जरूरत नहीं। अपने सफेद और काले मिक्स्ड सॉल्ट ऐंड पेपर लुक वाले बाल और दाढ़ी को स्टाइल कैसे कर सकते हैं, मिलिंद सोमन से लें टिप्स…

    मेसी स्पाइक्स लुक हेयर स्टाइल

    इन दिनों मेसी लुक काफी ट्रेंड में है। सिर्फ लड़कियां ही मेसी चोटी या मेसी बन नहीं बनाती बल्कि लड़के और पुरुष भी इस मेसी और स्पाइक्स वाले लुक को ट्राई कर सकते हैं। देखिए कैसे मिलिंद सोमन का बालों का यह मेसी लुक कितना कूल लग रहा है। अपने स्टाइल को पूरे कॉन्फिडेंस के साथ कैरी करें तो वह आपके चेहरे पर भी साफ झलकेगा।

    ​शेड्स के साथ करें एक्सपेरिमेंट

    अपने सफेद और काले मिक्स्ड बाल और दाढ़ी के साथ अगर आप और भी स्मार्ट और हैंडसम हंक दिखना चाहते हैं तो शेड्स के साथ भी एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं। यह ट्रांसपैंरट चश्मा हो, ब्लैक शेड्स या फिर रेड शेड्स, तीनों ही लुक मिलिंद पर काफी सूट कर रहा है।

    ​हैट देगा स्मार्ट लुक

    आप चाहें तो अपने मेसी बालों वाले लुक को स्टाइलिश जूट हैट के साथ भी टीमअप कर पहन सकते हैं और बेहद स्मार्ट दिख सकते हैं।

    ​गोटी या फुल बियर्ड करें ट्राई

    अगर बाल के साथ-साथ दाढ़ी भी सफेद हो गई है तो हर दिन शेव करके क्लीन शेव बनने की बजाए आप मिलिंद सोमन की तरह गोटी स्टाइल दाढ़ी भी रख सकते हैं। यह लुक भी काफी ट्रेंड में है। या फिर आप चाहें तो फुल बियर्ड भी रख सकते हैं। यह भी काफी सूट करेगा।

    शॉर्ट हेयरस्टाइल लुक
    अगर आपको बड़े बाल पसंद नहीं तो आप मिलिंद सोमन से टिप्स लेकर बज कट हेयर स्टाइल लुक भी ट्राई कर सकते हैं। छोटे बालों वाले इस सॉल्ट ऐंड पेपर लुक में भी बेहद हैंडसम लग रहे हैं मिलिंद।

    ​क्लीन शेव को ऐसे करें ट्राई

    अगर आपको बियर्ड लुक पसंद नहीं और क्लीन शेव ही रहना चाहते हैं तब भी आप मिलिंद सोमन की तरह बालों को सॉल्ट ऐंड पेपर लुक में रखें और दाढ़ी-मूंछ हटा लें। यह लुक भी आप पर सूट करेगा।

  • खतरनाक है सेक्स से जुड़ी ये सलाह, भूल से भी न करें फॉलो

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    कई बार हमारी सेक्स लाइफ बेहद बोरिंग हो जाती है और उसे फिर से स्पाइसी और रोमांचक बनाने के लिए हम अपने दोस्त, इरॉटिक मैग्जीन या इंटरनेट पर भरोसा करके उनके द्वारा जाकर दी गई सेक्स से जुड़ी सलाह को मान लेते हैं। हैं ना? लेकिन इस फ्री की सलाह, सेक्स ट्रिक्स और सेक्स टिप्स पर आंख बंद करके भरोसा करना किसी के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। लिहाजा इन्हें भूल से भी फॉलो न करें….

    ​सेक्स और फूड को मिक्स करना

    पिघली हुई चॉकलेट, विप्ड क्रीम, फ्रूट जूस जैसी चीजों को पार्टनर के सेंसेटिव और कामोत्तेजक बॉडी पार्ट्स पर डालना और फिर उसे चाटना… ये सुनने में भले ही इरॉटिक और बेहद सेक्सी लगे लेकिन यकीन मानिए सेक्स और खाने-पीने की चीजों को भूल से भी मिक्स नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से न इंफेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

    ​पार्टनर को नोंचना और काटना

    बहुत सी इरॉटिक फिल्मों में आपने देखा होगा कि जब बात सेक्स की आती है तो उसे और ज्यादा सेक्सी और स्टीमी बनाने के लिए फीमेल पार्टनर, मेल पार्टनर को अपने लंबे-लंबे नाखूनों से नोंचती हुई दिखती है। हालांकि इस तरह पार्टनर को नोंचने और काटने से पार्टनर की उत्तेजना बढ़ेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। हालांकि आपकी यह हरकत पार्टनर को तकलीफ जरूर पहुंचा सकती है जिससे उनकी सेक्स करने की इच्छा खत्म हो सकती है।

    ​कार में सेक्स करना

    भले ही पॉर्न फिल्म्स या हॉलिवुड फिल्मों में कार सेक्स को बेहद प्लेजरेबल और इंजॉयबेल दिखाया जाता हो लेकिन जब तक की आप बहुत ज्यादा फ्लेक्सिबल और ऐक्रोबैटिक स्किल्स वाले न हों, तब तक कार में सेक्स करना रिस्की हो सकता है और आप इसे इंजॉय भी नहीं कर पाएंगे। इतना ही नहीं, चलती कार में सेक्स करना तो बेहद रिस्की भी हो सकता है। लिहाजा जरूरी सावधानियां बरतें।

    ​सेक्स के दौरान डर्टी टॉक

    आप सोच रहे होंगे कि सेक्स के दौरान पार्टनर संग डर्टी टॉक करना बेहद आसान है और इस सेक्स टिप को आप बिना किसी तरह की टेंशन के आसानी से फॉलो कर सकते हैं। तो आपको बता दें कि डर्टी टॉक भी एक तरह की स्किल है जिसमें एक्सपर्ट बनने की जरूरत होती है। हो सकता है आप पार्टनर से डर्टी टॉक के नाम पर कुछ ऐसा कह दें जिससे उन्हें इरॉटिक फील होने की बजाए घिन आने लगे। लिहाजा डर्टी टॉक में कंफर्टेबल बनने के लिए बहुत प्रैक्टिस की जरूरत है।

  • Breast Cancer का खतरा करना है कम तो खाने में शुरू करिये कच्चा प्याज और लहसुन

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    प्याज और लहुसन को सुपरफूड्स माना जाता है क्योंकि यह खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। आयुर्वेद में प्याज और लहुसन को ब्लड प्यूरिफायर माना जाता है। और तो और लहसुन का प्रयोग कई आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण में भी किया जाता है। ऐसे में इन दोनों ही चीजों का सेवन बेहद फायदेमंद है लेकिन अगर आप प्याज और लहसुन को कच्चा ही खाएं तो यह आपके लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि कई रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है।

    ऐंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं प्याज और लहसुन
    एक नई रिसर्च में बताया गया है कि प्याज और लहसुन को कच्चा खाने से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कई गुना कम हो जाता है। प्याज और लहसुन दोनों ही हमारे डेली खानपान का हिस्सा हैं और दोनों में ढेर सारे ऐंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए लाभदायक हैं। न्यू यॉर्क की यूनिवर्सिटी ऑफ बफेलो और यूनिवर्सिटी ऑफ प्यूर्तो रिको की 600 महिलाओं पर की गई जॉइंट स्टडी में यह बात सामने आयी कि कच्चा प्याज और लहसुन खाकर ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है।

    कच्चा प्याज और लहसुन खाना है फायदेमंद
    स्टडी में पाया गया कि जिन महिलाओं ने दिन में एक से ज्यादा बार कच्चे प्याज और लहसुन को मिलाकर बनाए गए सोफ्रिटो यानी एक प्रकार सॉस जिसका लैटिन, इटैलियन और अमेरिकन फूड में बहुत इस्तेमाल होता है का सेवन किया उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 67 फीसदी तक कम पाया गया। हालांकि प्याज-लहसुन को कच्चा खाना ही फायदेमंद है। बताया जाता है कि इन्हें भूनने या पकाने से इनके ऐंटीऑक्सिडेंट्स खत्म हो जाते हैं जो कैंसर को हराने के लिए जरूरी माने जाते हैं।

    लंग्स, प्रॉस्टेट, पेट के कैंसर से भी बचाता है
    विशेषज्ञों के अनुसार प्याज में अल्केनाइल सिस्टीन सल्फॉक्साइड्स पाया जाता है, जो एक कैंसररोधी तत्व माना जाता है। स्टडी में यह भी सामने आया है कि प्याज-लहसुन का सेवन इंसानों में फेफड़े का कैंसर, प्रॉस्टेट कैंसर और पेट के कैंसर के रिस्क को भी कम करता है। इस स्टडी के नतीजे न्यूट्रिशन ऐंड कैंसर नाम के जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं।

  • 63% कर्मचारी हैं मोटापे का शिकार,जानें क्या है वजह और सॉल्यूशन

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    भारत के 63% कर्मचारी मोटापे का शिकार हैं, यह पता चला है हाल ही में आए एक सर्वे में। हेल्थ और फिटनेस ऐप हेल्दी फाई मी ने कॉरपोरेट इंडिया के फिटनेस लेवल पर एक सर्वे किया, जिसमें 63 प्रतिशत कार्यकारी (एग्जिक्यूटिव) 23 से अधिक बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के साथ अधिक वजन वाले हैं। इस रिपोर्ट में 12 महीने की अवधि के दौरान 20 से अधिक कंपनियों में करीब 60,000 कर्मचारियों की ऐक्टिविटीज और फूड हैबिट्स पर नजर रखी गई। यह सर्वे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता जैसे महानगरों के साथ झागड़िया, खंडाला व वापी जैसे दूरस्थ स्थानों में कारखानों में काम करने वाले कर्मचारी, सेल्स प्रफेशनल, आईटी प्रोफेशनल और बैंकर्स पर भी किया गया।

    सर्विस सेक्टर में काम करने वाले हैं कम ऐक्टिव

    इस स्टडी के अनुसार, प्रॉडक्शन से जुड़े सेक्टरों में काम करने वाले लोग सर्विस सेक्टर में काम करने वाले लोगों से ज्यादा ऐक्टिव होते हैं। जबकि स्टडी में इस बात का भी खुलासा है कि कॉरपोरेट जगत में काम करने वाले कर्मचारी वीकेंड के दिनों में ज्यादा सुस्त हो जाते हैं। स्टडी की मुताबिक, इन दिनों ये लोग जिम जाना छोड़ देते हैं। फिर होता यह है कि कैलरी बर्न होने की क्वांटिटी 300 से घट कर 200 तक पहुंच जाती है।

    ऑफिस में खुद को रखें फिट
    ‘हेल्दी मी’ के सीईओ और को-फांउडर तुषार वशिष्ठ के मुताबिक, जिस तरह से आंकड़ें सामने आ रहे हैं, यह बिल्कुल भी एक बेहतर संकेत नहीं है। आज सर्विस सेक्टर में काम करने वाले अधिकतर कर्मचारी फिट नहीं हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि नियम से एक्सरसाइज और फिजिकल ऐक्टिविटी जैसे कि रोजाना टहलना, दौड़ना, तैराकी आपको फिट रख सकता है। इसके अलावा आप ऑफिस में कुछ मिनट निकालकर योग या बाहर टहलकर आ सकते हैं, क्योंकि वर्क प्लेस पर खुद को ऐक्टिव रखना काफी महत्वपूर्ण होता है।

    वजन घटाना हो जाएगा आसान

    1. जो भी खाएं उसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम हो। वजन बढ़ने की यह खास वजह होती है।

    2. जब भूख लगे, तो पेट भरकर खाएं. लेकिन कार्बोहाइड्रेट घटाने के साथ ही फैट कम न करें। कम मात्रा में मक्खन और घी ले सकते हैं।

    3. प्रॉसेस्ड और लो-कार्ब फूड खाने से परहेज करें।

    4. कुछ भी ऐसा न खाएं, जिसमें आर्टिफिशियल शुगर हो। इसके सेवन से एक ओर जहां वजन बढ़ता है, वहीं ऐसी चीजें मीठे को लेकर क्रेविंग बढ़ाने का भी काम करती हैं। वैसे भी मीठा हेल्थ को कई तरह से नुकसान देता है।

    75% महिलाएं मोटापे की चपेट में इसलिए हैं
    शहरों में रहने वाली 25 से 50 उम्र की 75 फीसदी कामकाजी महिलाएं मोटी हैं। Health.dot.com ने एक सर्वे के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है। सर्वे के दौरान अधिकतर महिलाओं ने कहा कि वे 8 से 9 घंटे कंप्यूटर पर काम करती हैं। इस दौरान वे मुश्किल से दो से तीन बार उठती हैं, वह भी कैंटीन तक चाय या कॉफी लेने के लिए। स्टडी में यह निकलकर आया कि मोटापा बढ़ने की खास कारणों में अधिक देर तक बैठकर काम करना और हेल्दी फूड न लेना है। अधिकतर महिलाओं में गलत लाइफस्टाइल फॉलो करना, वर्क प्रेशर और एक्सर्साइज न कर पाना और अनहेल्दी फूड खाना वेट बढ़ने की खास वजह पाई गई।

  • ढेरों मइक्रोप्लास्टिक्स पहुंच रहे आपके चाय के कप में Tea Bag की वजह से

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    अगर आप भी टी बैग वाली चाय का सेवन करते हैं तो यह खबर आपके लिए है और आपको सावधान हो जाने की जरूरत है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि क्योंकि एक नई स्टडी में यह दावा किया गया है कि प्लास्टिक टी बैग आपके पेय पदार्थ में सूक्ष्म या नैनो आकार के लाखों प्लास्टिक के कणों को पहुंचा सकते हैं।

    दिनों दिन छोटे कणों में टूटते रहते हैं प्लास्टिक के कण
    ‘इन्वायरमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ पत्रिका में पब्लिश स्टडी में कहा गया है कि इन सूक्ष्म कणों को शरीर के अंदर लेने पर इनका हमारे स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है अभी इस बारे में कुछ भी पता नहीं चल पाया है। प्लास्टिक दिनों-दिन छोटे-छोटे कणों में टूटते रहते हैं। प्लास्टिक के इन सूक्ष्म कणों का आकार 100 नैनोमीटर से भी कम होता है। तुलना के लिए जान सकते हैं कि इंसान के बाल का व्यास तकरीबन 75 हजार नैनोमीटर होता है।

    क्या इंसानों के लिए यह हानिकारक है?
    कनाडा में मैकगिल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पर्यावरण, जल और खाद्य श्रृंखला में मौजूद अति सूक्ष्म कणों का पता लगाया लेकिन अभी यह पता नहीं चला है कि क्या इंसानों के लिए ये हानिकारक होते हैं। शोधकर्ता नताली तूफेंकजी और उनके सहयोगी जानना चाहते थे कि क्या प्लास्टिक टी बैग पेय पदार्थ में अति सूक्ष्म कण छोड़ते हैं। अपने विश्लेषण के लिए शोधार्थियों ने चार अलग-अलग तरह के टी बैग खरीदे।

    माइक्रोप्लास्टिक के अरबों कण पहुंच रहे चाय में
    उन्होंने पैकेट से चायपत्ती निकालकर उसे धो दिया और उसके बाद प्रयोग किया। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी का इस्तेमाल करने पर टीम को पता चला कि एक प्लास्टिक टी बैग चाय उबालने के तापमान पर पानी में करीब 11.6 अरब माइक्रोप्लास्टिक और 3.1 अरब नैनोप्लास्टिक कण छोड़ता है।

  • Sania Mirza की Weight Loss स्टोरी, 4 महीने में घटाया 26 किलो वजन

    चाहे आप सिलेब्रिटी हों या फिर आम इंसान, वजन घटाना या बढ़ाना रातोंरात नहीं होता। इसके लिए आपको दिन-रात कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। भारत की मशहूर टेनिस स्टार सानिया मिर्जा ने अपने इंस्टाग्राम पर अपनी वेट लॉस स्टोरी शेयर करते हुए बताया कि उन्होंने प्रेग्नेंसी के दौरान 23 किलो वेट गेन किया था और 4 महीने के अंदर ही उन्होंने 26 किलो तक वजन कम कर लिया। ये कैसे संभव हुआ, आगे की स्लाइड्स में पढ़ें…

    ​प्रेग्नेंसी में 23 किलो वेट गेन किया था

    #Mummahustles के नाम से अपने इंस्टाग्राम पर अपनी पोस्ट प्रेग्नेंसी वेट लॉस स्टोरी शेयर करते हुए सानिया कहती हैं, ‘जब मैं ये कर सकती हैं तो कोई भी कर सकता है। यकीन मानिए, हर दिन अपने शरीर को 1 या 2 घंटे दीजिए और फिर देखिए आप सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी काफी बेहतर महसूस करेंगी।’ इस दौरान सानिया ने अपना वर्कआउट विडियो भी शेयर किया।

    ​सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं वर्कआउट विडियो

    सानिया सभी मॉम्स के लिए प्रेरणा हैं। वह जो भी वर्कआउट करती हैं उसके विडियो #mummahustles के साथ पोस्ट करती हैं। इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘इसके पीछे वजह यह है कि मां बनने के बाद भी आप खुद को फिट रख सकती हैं। मां बनने के बाद ऐसा नहीं है कि आपकी लाइफ खत्म हो गई, बल्कि तब तो आपकी लाइफ शुरू होती है।’

    सानिया ने खुद को हमेशा रखा ऐक्टिव

    सानिया ने फैसला कर लिया था कि वह प्रेग्नेंसी के दौरान खुद को ऐक्टिव रखेंगी। वह प्रीनेटल योगा करती थीं और वर्कआउट करना कभी नहीं भूलीं।

    ​इसलिए लिया वजन घटाने का फैसला

    सानिया अपने बढ़े वजन से खुश नहीं थीं और यही वजह थी कि उन्होंने वेट लूज करने का फैसला किया। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ‘चाहे मैं टेनिस खेलूं या न खेलूं, लेकिन जब भी मैं खुद को शीशे में देखती थी मुझे लगता था कि मैं अब वैसी नहीं लगती जैसी पहले लगती थी। यह सिर्फ आपके लुक की ही बात नहीं है, बल्कि आप कैसा फील करते हैं यह भी जरूरी है।’

    ​4 घंटे वर्कआउट और कार्डियो
    सानिया खाने की बेहद शौकीन हैं और डिलिवरी के बाद उन्होंने अपनी जिस आदत को बदला वह थी खाने की आदत। उन्होंने हेल्दी डायट लेना शुरू कर दिया। वह रोजाना जिम में 4 घंटे वर्कआउट करती थीं। इसके अलावा 100 मिनट का कार्डियो, एक घंटे किक बॉक्सिंग और पिलाटेज की ट्रेनिंग भी सानिया करती थीं।

    ​योग ने की वजन घटाने में मदद

    इन एक्सर्साइज़ के अलावा सानिया ने योग को भी अपने डेली रूटीन में शामिल किया। इसी का नतीजा है कि आज वह फिर से फिट और हॉट हो गई हैं।

  • फैशन फेस-ऑफ: किसका स्टाइल था बेहतर, Kareena या Priyanka?

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    बॉलिवुड की देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा इन दिनों मुंबई में हैं और लंबे समय बाद आ रही अपनी हिंदी फिल्म द स्काई इज पिंक के प्रमोशन्स में जुटी हैं। इस दौरान एक टीवी रिऐलिटी शो पर पहुंची प्रियंका चोपड़ा जिसकी जज करीना कपूर खान हैं।

    ​दो फैशनिस्ता एक मंच पर

    अब सोचिए जब बॉलिवुड इंड्रस्टी की दो सबसे बड़ी फैशनिस्ता- करीना और प्रियंका एक साथ एक मंच पर आएं तो धमाका तो होना तय है। इस दौरान करीना और प्रियंका दोनों ही बेहद सेक्सी नजर आ रहीं थीं।

    ​प्रियंका का ब्लेजर ड्रेस

    प्रियंका चोपड़ा ने ब्राउन कलर का वन पीस ब्लेजर ड्रेस पहन रखा था जिसे उन्होंने गोल्डन कलर के हाई हील पंप्स, बोल्ड रेड लिपस्टिक और स्ट्रेट खुले बालों के साथ टीमअप कर रखा था। इस लुक में प्रियंका बेहद हॉट नजर आ रहीं थीं।

    ​करीना का ऑफ-शोल्डर गाउन

    वहीं, करीना का लुक भी कुछ कम नहीं था। करीना ने पाउडर पिंक कलर का ऑफ-शोल्डर स्टाइल फैंसी आउटफिट पहन रखा था। इस ड्रेस का फिश कट, फ्रंट हाई स्लिट और ड्रमैटिक स्लीव्स ड्रेस की हाइलाइट थी।

    करीना का खास नेकलेस

    प्रियंका ने जहां नो अक्सेसरी लुक कैरी किया था वहीं, करीना का नेकलेस बेहद सेक्सी लग रहा था। अब करीना या प्रियंका दोनों में से किसका लुक आपको ज्यादा बेहतर लगा, हमें कॉमेंट कर बताएं।

  • बनाना है इम्प्रेशन तो ध्यान रखे मोबाइल यूज करते हैं समय ये नियम

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    जब आप बड़े होते हैं तो नई चीजें सीखते हैं। दूसरों को देखकर नए तौर-तरीके और एटिकेट्स सीखते हैं और उनको अपनाते हैं। लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि आप ध्यान भी नहीं देते और अनजाने में सामने वाले को बुरा लग जाता है। इसलिए जरूरी है कि आप हमेशा तौर-तरीकों का ध्यान रखें। यहां हैं कुछ गलतियां जो लोगों से अनजाने में हो जाती हैं।

    कॉल, मेसेज और ईमेल का जवाब न देना

    यह बेहद जरूरी शिष्टाचार है जिस पर अगर आपने अभी तक काम नहीं किया तो कर लेना चाहिए। आप भले ही मिसकॉल्स और चैट मेसेज नोटिफिकेशन को इग्नोर करते रहते हैं लेकिन जब आप अपने जीवन में बिजी होते हैं तो भूल जाते हैं कि जिन लोगों को आपने जवाब नहीं दिया वे आपकी केयर करते हैं। इस आदत को बदल लें कोशिश करें हर मेसेज और मेल का जवाब दें।

    कोई जरूरी बात मेसेज पर डिसकस करना

    मेसेज करना या ईमेल करना आसान काम होता है लेकिन आपको समझना होगा कि सबकुछ मेसेज पर नहीं कहना चाहिए। कुछ चीजें इतनी इम्पॉर्टेंट होती हैं कि उन्हें फेस टु फेस कहा जाना चाहिए खासतौर पर अगर कोई सेंसिटिव या लाइफ चेंजिंग टॉपिक हो। वहीं ऑफिस के केस में अगर पहुंचना संभव न हो और छुट्टी लेनी हो तो बात और मेल करें, मेसेज से छुट्टी न लें।

    मोबाइल पर बात करते वक्त ये सब भी ध्यान दें

    जब आपसे कोई बात कर रहा हो तो मोबाइल स्क्रॉल न करते रहें, सामने वाले को अवॉइडेड फील हो सकता है। वहीं ड्राइविंग के वक्त, खाने की टेबल पर और बिस्तर पर खासतौर पर मोबाइल न ले जाएं। इसके अलावा मीटिंग के दौरान भी फोन साइलंट रखें और मेसेज भी न करें।

    किसी के घर जाकर गंदगी फैला देना

    भले ही आपकी दोस्त का घर आपको अपने जैसा लगे लेकिन उसके पहले से ज्यादा गंदा करके मत आ जाएं। बल्कि आपको इसे थोड़ा अच्छी कंडिशन में करके आना चाहिए। आपके किसी के भी घर गेस्ट बनकर जाएं बेहतर होगा साफ-सफाई से रहें और चीजें इधर से उधर बिखेरें नहीं।

    रेस्ट्रॉन्ट में न करें ये गलतियां
    रेस्ट्रॉन्ट में वेटर को कभी भी आवाज देकर न बुलाएं, बल्कि उनसे आई कॉन्टैक्ट बनाने की कोशिश करें और इशारे से पास बुला लें। अगर वेटर न देख पाए तो हाथ से इशारा करके पास बुलाएं। स्टाफ से हमेशा तमीज से बात करें और सबसे जरूरी खाना खत्म होने के 15 मिनट के अंदर टेबल छोड़ दें।

    किसी को इग्नोर करना

    अगर आप अपने दोस्तों के ग्रुप में हैं और कोई नया है तो बात करते वक्त ध्यान रखें कि ऐसी बातें करें कि उसे भी समझ में आएं। उसे अलग-थलग नहीं फील करना चाहिए। अगर आपके साथ कोई ऐसा है जो आपके दोस्तों के लिए नया है तो उसका परिचय जरूर करवाएं।

    आई कॉन्टैक्ट न बनाना
    अगर आप बात करते वक्त किसी से आई कॉन्टैक्ट नहीं बनाते तो उसे फील हो सकता है कि आपको उसमें इंट्रेस्ट नहीं है। बात करते वक्त हमेशा आई कॉन्टैक्ट बनाकर रखें।

  • पहाड़ों का ये कीड़ा दे रहा जानलेवा इन्फेक्शन

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    दिल्ली में इन दिनों एक नए किस्म की बीमारी फैली है। डॉक्टरों ने इसे स्क्रब टाइफस नाम दिया है। ये पहाड़ों में पाए जाने वाले एक खास किस्म के कीड़े टिक बाइट के काटने से फैलने वाला इन्फेक्शन है। इसके काटने से शरीर पर खास तरह का निशान बन जाता है। समय पर इस इन्फेक्शन की पहचान न हो तो इसका सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है, जिससे शरीर के कई अंगों के फेल हो जाने का खतरा बढ़ जाता है। यह जानलेवा हो सकता है। गाजियाबाद में एक महिला की इसकी चपेट में आने से मौत हो चुकी है।

    अस्पतालों में इन दिनों स्क्रब टाइफस के मरीजों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई है। गंगाराम अस्पताल में इसके एक दर्जन से ज्यादा मरीज पहुंच चुके हैं। इनमें से कुछ तो आईसीयू में भर्ती हैं। मैक्स के डॉक्टर रोमेल किट्टू ने बताया कि आमतौर पर स्क्रब टाइफस की पहचान के लिए मरीज का आइजीएम टेस्ट कराया जाता है। इसके इलाज के तौर पर ऐंटीबायोटिक्स मौजूद हैं।

    डेंगू जैसे लक्षण
    इसमें मरीज को बुखार के अलावा सांस लेने में दिक्कत, सिर दर्द, सूखी खांसी के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे ही लक्षण डेंगू, वायरल फीवर या चिकनगुनिया के भी होते हैं।

  • Anxiety Disorder: दिमाग पर पड़ सकती है भारी तनाव या प्यार की कमी

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    हर इंसान जीवन में थोड़ा-बहुत परेशान होता है लेकिन एक साथ ऐसी स्थिति है जिसमें कई मेंटल कंडिशंस एक साथ होती हैं। इस सिचुएशन में इंसान को बहुत घबराहट, चिंता होती है और वे छोटी बात पर भी बेचैन हो जाते हैं। अब एक नई रिसर्च से पता चला है कि पैनिक अटैक्स और ऐंग्जाइटी डिसऑर्डर्स का जवाब हमारी कोशिका को ऊर्जा देने वाला माइटोकॉन्ड्रिया में है।

    माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाओं को काम करने के लिए ऊर्जा देते हैं। लेकिन जब कभी इंसानों या चूहों में ज्यादा स्ट्रेस होता है तो यह ऐक्टिविटी डिस्टर्ब हो जाती है। यह नतीजे जर्नल PLOS Genetics में छपे थे।

    जीवन में तनाव देने वाले कुछ मुद्दे जैसे तलाक, बेरोजगारी, प्यार का बिछड़ना या फिर युद्ध वगैरह पैनिक अटैक्ट्स और ऐंग्जाइटी पैदा करने वाले मुख्य फैक्टर्स हैं।

    ऐसा हर इंसान के साथ नहीं होता कि उसके जीवन में तनाव आए और उसको यह डिसऑर्डर हो जाए, हालांकि वैज्ञानिक उनक फैक्टर्स का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कुछ लोगों पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है और कुछ लोग अप्रभावित रहते हैं।

    एक एक्सपेरिमेंट में उन्होंने चूहों को स्ट्रेस दिया और उनके ब्रेन सेल्स में के माइटोकॉन्ड्रिया में कई बदलाव देखे गए। इसके बाद पैनिक डिसऑर्डर के मरीजों के ब्लड सैंपल पैनिक डिसऑर्डर के बाद लिए गए इसमें भी माइटोकॉन्ड्रिया पाथवे अलग आया। इससे यह पता चला कि सेल्युलर एनर्जी मेटाबॉलिजम में बदलाव जानवरों और इंसानों में स्ट्रेस के रिस्पॉन्स का सिमिलर तरीका है।

    -यहां देखें ऐंग्जाइटी डिसऑर्डर के कुछ लक्षण
    -नर्वसनेस या उलझन महसूस करना
    -तेज सांस चलना
    -कांपना
    -हर वक्त थका महसूस करना
    -चिंता पर कंट्रोल न कर पाना
    -नींद न आना