Category: health-lifestyle

  • अब झटपट टेस्टी एंड हेल्दी एप्पल मिल्क शेक बनाने की विधि

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    ज्यादातर बच्चे दूध और फ्रूट्स दोनों के नाम से ही दूर भागते हैं। ऐसे में क्यों न कुछ ऐसा तरीका ढूंढा जाए जिससे बच्चे इन दोनों पोष्टिक चीजों को मना न कर पाएं। सेब के फायदे तो आप सब जानते ही हैं, ऐसे में आज हम आपको एप्पल मिल्क शेक बनाना बताएंगे। जिसे न केवल बच्चे बल्कि घर के सभी सदस्य खुशी के साथ पिएंगे। तो चलिए जानते हैं एप्पल मिल्क शेक बनाने की विधि  ।सामग्री:
    सेब – 1
    दूध – 2 गिलास
    शहद – 1 टेबलस्पून
    पाउडर चीनी – 2 टेबलस्पून
    दालचीनी पाउडर – 1 टीस्पून
    इलायची पाउडर – 1 टीस्पून
    क्रश्ड आइस – 2 टेबलस्पून
    बादाम – 3 से 4
    किशमिश – 10
    पिस्ता – 10   बनाने की विधि:
    1. सबसे पहले सेब को छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
    2. ब्लेंडर में सेब और दूध डालकर दोनों को अच्छी तरह मिक्स कर लें।
    3. इसके बाद शहद, चीनी, दालचीनी और ईलायची पाउडर डालकर फिर से ब्लैंडर घुमा दें।
    4. आपका एप्पल मिल्क शेक बनकर तैयार है।
    5. गिलास में निकालर इसे क्रशड आइस और बारीक कटे ड्राइ-फ्रूट्स के साथ गार्निश कर सर्व करें।

  • घर की खूबसूरती में ये टिप्स लगा देंगे चार चांद ,जरूर करें ट्राई

    घर की खूबसूरती में ये टिप्स लगा देंगे चार चांद ,जरूर करें ट्राई

    कई बार लाखों रुपया खर्च करने के बाद भी आपका घर वैसा नहीं जगमगाता जैसे कि आप कल्पना करते हैं. इंटीरियर का सही चुनाव और डेकोरेशन में जरा सी चूक इसका कारण हो सकती है. आइए आपको 5 ऐसे टिप्स बताते हैं जिनकी मदद से आपका घर पहले से ज्यादा आकर्षक हो जाएगा.ऐसा हो दीवारों का कलर-अगर आपका घर काफी छोटा है तो उसमें डार्क कलर का पेंट करवाना गलत विकल्प होगा. वॉल पर डार्क पेंट के साथ जगह छोटी लगती है और घर में अंधेरा सा छाया रहता है. इसलिए कोशिश करें कि घर में व्हाइट या किसी लाइट शेड की पेंट करवाएं. ऐसा करने से घर में मिनी बल्ब जलाने पर भी ज्यादा रोशनी का एहसास होगा.बेडशीट और पर्दे-दीवारों से मैच करते हुए अगर आप लाइट शेड वाले पर्दे और बेडशीट का इस्तेमाल करें तो और भी अच्छा होगा. घर में लाइट कलर के पर्दे और चादर इस्तेमाल करने से छोटी जगह भी बड़ी लगने लगती है. साथ ही अगर आपकी दीवारों पर बड़ी-बड़ी खिड़कियां हो तो ये और भी बेहतर होगा
    .फर्नीचर का सही इस्तेमाल-
    घर के अंदर का फर्नीचर मिनी साइज में हो और सभी का शेड लाइट कलर में हो तो घर की चमक दोगुनी हो जाती है. बेड, ड्रेसिंग टेबल, मेज या अल्मारी जैसा कोई भी फर्नीचर सामन्य से थोड़ा छोटा होना चाहिए और लाइट कलर का होना चाहिए. इसमें आप लाइट ग्रीन, ग्रे, पिंक या दूसरे किसी भी कलर का इस्तेमाल सहूलियत के हिसाब से कर सकते हैं.लाइट एंड फ्लोरिंग-
    अंधेरे वाले कमरे में रिफ्लेक्टिंग फ्लोरिंग भी अच्छा ऑप्शन है, जिससे कमरे में चमक बढ़ सकती है. साथ ही साथ आप ज्यादा रोशनी वाली लाइट्स का इस्तेमाल करें तो बेहतर होगा.

  • महिलाओं में बढ़ रहा शादी में देरी से इस बीमारी का खतरा

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    स्तन कैंसर महिलाओं की मौत का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है। वर्तमान दौर में लड़िकयों की शादी में देरी भी स्तन कैंसर का एक प्रमुख कारण बन रहा है। ऐसे मामलों में पढ़ाई के बाद नौकरी की तलाश से अक्सर शादियां देरी से हो रही हैं। अगर समय पर स्तन कैंसर की पहचान हो जाए तो इसका इलाज मुमकिन है। ये बातें पीजीआई के रेडियोलॉजी विभाग की डॉक्टर अर्चना गुप्ता ने रविवार को ब्रेस्ट इमेजिंग अपडेट पर सतत चिकित्सा शिक्षा और कार्यशाला कहीं।

    पीजीआई और मेदांता के सहयोग से यहां के रेडियोलॉजी विभाग में रविवार को हुई कार्यशाला में बीएचयू, जीएसवीएम कानपुर, मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज से प्रशिक्षु रेडियोलॉजिस्ट, डॉक्टर और टेक्नीशियन शामिल हुए। इसमें स्तन कैंसर के इलाज और पहचान की नई तकनीक (एमआरआई, अल्ट्रासाउंड, मेमोग्राफी, डिजिटल ममोसेंथेसिस आदि) पर विशेषज्ञों ने चर्चा की।

    इस मौके पर डॉ. अर्चना ने बताया कि यदि दर्द के साथ स्तन का आकार तेजी से बढ़े, तरल द्रव्य निकले और स्तन के अंदर या बाहर कोई गांठ महसूस हो तो महिलाएं सतर्क हो जाएं। यह स्तन कैंसर के लक्षण हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत ही स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर जांच और इलाज कराएं।

    गांठ या आकार बढ़े तो संकोच नहीं इलाज कराएं
    रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना ने बताया कि विश्व में हर साल करीब 20 लाख महिलाएं पीड़ित होती हैं। वर्ष 2018 में विश्व में स्तन कैंसर से करीब छह लाख 27 हजार महिलाओं की मौत हुई। विकसित देशों और इलाकों में रहने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर की अधिक समस्या होती है। स्तन कैंसर की समय पर पहचान हो जाए तो इलाज मुमकिन है।

  • Happy Friendship Day 2019: ये SMS, Messages, Quotes भेजें यारों को और करें विश

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    इस साल दोस्ती का त्योहार 4 अगस्त, रविवार को मनाया जाएगा। दोस्तों के बिना लाइफ बोरिंग सी लगने लगती है। एक सच्चा दोस्त आपके सुख में ही नहीं बल्कि आपके दुख में भी आपके साथ हमेशा खड़ा रहता है। अगर आप भी फ्रेंडशिप डे पर अपने दोस्तों को विश करना चाहते हैं तो उन्हें नीचे दिए गए शुभकामना संदेश भेज सकते हैं। मैसेज, एसएमएस, ग्रीटिंग, शायरी, सोशल मीडिया पोस्ट, वॉट्सएप स्टेटस, फेसबुक मैसेंजर आदि से शुभकामना संदेश और तस्वीरें भेजकर अपने फ्रेंडशिप डे को खास बनाएं। इस खूबसूरत दिन को और ज्यादा यादगार बनाने के लिए कुछ लोग तो मौके पर अपने दोस्तों के साथ पुरानी तस्वीर साझा करने से भी नहीं चूकेंगे। को सोशल मीडिया के जरिए साझा कर अपनी दोस्ती को याद करेंगे। लेकिन आपके लिए यहां हैप्‍पी फ्रैंडशिप डे के कुछ चुनिंदा मैसेज, शुभकामना संदेश और ग्रीटिंग आदि दे रहे हैं जिन्हें आप अपने दोस्तों को भेजकर उन्हें छोटी सी खुशी दे सकते हैं-

    दोस्ती कोई खोज नहीं होती,
    दोस्ती किसी से हर रोज नहीं होती,
    अपनी जिंदगी में हमारी मौजूदगी को बेवज न समझना,
    क्योंकि पलकें आखों पर कभी बोझ नहीं होतीं।।
    -Happy Friendship Day

     

    एक चिंगारी आग से कम नहीं होती,
    सादगी श्रृंगार से कम नहीं होती,
    ये तो सिर्फ सोच का फर्क है,
    वरना दोस्ती भी प्यार से कम नहीं होती।।
    -Happy Friendship Day

     

    friendship samajhdari h samjhauta nhi,
    friendship kshama karna h bhulana nhi,
    chahe yad dasht chali jaye
    ya contact list se no kho jaye,
    -Happy Friendship Day

    अच्छे दोस्त सितारों की तरह होते हैं,
    आप उन्हें हमेशा देश सकते हैं
    आप उनके बारे में यह भी जानते हैं
    कि ये ऐसे ही रहने वाले हैं।।

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    क्यों मुश्किलों में साथ देते हैं दोस्त,
    क्यों गम को बांट लेते हैं दोस्त,
    ना रिश्ता का खून का रिवाज से बंधा,
    फिर भी जिंदगीभर साथ देते हैं दोस्त।।
    -Happy Friendship Day

     

  • Friendship Day Special : रहना है डॉक्टरों से दूर, तो लाइए दोस्तों को करीब

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    आखिरी बार आप अपने दोस्तों के साथ कब बैठे थे? याद नहीं! आप कहेंगे कि थोड़ी देर पहले ही तो सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीर को लाइक किया था। ऐसा करने वाले शायद आप अकेले नहीं हैं, जिनकी दोस्ती-रिश्ते मोबाइल तक सीमित हो गए हैं। हम एक टच से अनजानों को भी ‘फ्रैंड लिस्ट’ में तो जोड़ रहे हैं, लेकिन हम खुद तक ही सीमित होते जा रहे हैं। इसका असर हमारे रिश्तों पर ही नहीं बल्कि सेहत पर भी दिखने लगा है। हालांकि कई अध्ययन बताते हैं कि डॉक्टरों से दूर रहना है, तो दोस्तों के करीब रहिए।

    जादू की झप्पी से दूर होगा जुकाम :  
    जादू की झप्पी का कमाल तो आप जानते ही हैं। अमेरिका के पिट‌्सबर्ग स्थित कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय के शोध की मानें तो दोस्तों से गले मिलने से आप खांसी जुकाम से भी दूर रह सकते हैं। शोध के मुताबिक जो लोग ज्यादा तनाव लेने की वजह से खांसी-जुकाम या किसी अन्य संक्रमण का शिकार हो जाते हैं। उन्हें दोस्तों का साथ मिलने से काफी फायदा होता है।

    बुढापे में नहीं बनेंगे भुलक्कड़ : 
    दोस्तों के साथ रहेंगे, तो बुढ़ापे में भुलक्कड़ नहीं बनेंगे। ये हम नहीं बल्कि लंदन के लॉघबोरोग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है। मुख्य शोधार्थी डॉक्टर ऐफ हॉगवर्स्ट सात साल तक 6,677 लोगों पर अध्ययन करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं। उनके मुताबिक आप भले ही लोगों से घिरे रहें, लेकिन बिछड़े हुए पुराने दोस्त अगर दोबारा मिल जाएं या खराब हो चुके रिश्तों में सुधार हो जाए तो डिमेंशिया का खतरा 60 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

    जिंदगी खूबसूरत भी होगी और लंबी भी : 
    अपनों का साथ मिलेगा, तो जिंदगी खूबसूरत तो होगी ही, लेकिन साथ ही आप लंबा जिएंगे। अमेरिका के वर्जिनिया में स्थित जॉर्ज मेसन विश्वविद्यालय ने इसी साल 50 से 79 साल की महिलाओं पर अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि जिन महिलाओं का सामाजिक दायरा कम था, उनमें मृत्यु दर अन्य की तुलना में 20 फीसदी ज्यादा थी। दोस्तों के रहने से दिल भी स्वस्थ रहता है।

    मोटापे से भी दूर रखते हैं दोस्त : 
    अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल ‘जामा’ में प्रकाशित एक अध्ययन में यह बात भी सामने आई कि दोस्त आपको मोटापे से भी दूर रखने में मदद करते हैं। शोध के मुताबिक अगर आपके दोस्त मोटे हैं, तो आपका वजन भी बढ़ सकता है। अमेरिकी सैनिकों पर यह अध्ययन किया गया, जिसमें पाया गया कि ज्यादा वजन वाले साथियों के साथ तैनात जवानों का भी वजन बढ़ गया।

    इसका भी रखें ख्याल : 
    -अमेरिकन जर्नल फॉर हेल्थ प्रमोशन के हिसाब से सोशल मीडिया पर बिताए जाने वाले समय को कम करना चाहिए, दोस्तों से सोशल मीडिया की जगह मिलकर बात करने से संबंध प्रगाढ़ होंगे
    -जर्नल ऑफ बिजनेस एंड साइकोलोजी के अनुसार, घर में बैठकर दफ्तर का काम करने वाले लोग दफ्तर से काम करने वालों की तुलना में ज्यादा चिंतित रहते हैं, इसका कारण अकेलापन है।

     

  • अच्छी खबर: ऑनलाइन बुकिंग शुरू पूर्वजों के पिंडादान के लिए

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    गया में इसबार पितृपक्ष मेला 12 से 28 सितम्बर के बीच लगने जा रहा है। हर बार इस मेले में देशभर के हिन्दू श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा शांति के लिए पिंडदान करने आते हैं। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गया पितृपक्ष मेला पिंडदान पैकेज की ऑनलाइन व ऑफलाइन बुकिंग शुरू की है। श्रद्धालु ऑनलाइन बुकिंग वेबसाइट http://www.bstdc.bih.nic.in या http://www.pitrapakshagaya.com पर कर सकते हैं। ऑफलाइन बुकिंग पर्यटन निगम के होटल कौटिल्य विहार के काउंटर से होगा। श्रद्धालुओं के लिए पांच तरह के पैकेज हैं। सभी पैकेज को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। श्रद्धालु जिस तरह की सुविधा लेंगे उसी अनुसार उन्हें बुकिंग करानी होगी।

    पैकेज में मिलेंगी ये सुविधाएं
    श्रद्धालुओं को इस पैकेज में खाने-पीने, होटल में ठहरने, आने-जाने के लिए एसी गाड़ी, पूजन सामग्री के साथ पंडा का दक्षिणा तक की सुविधाएं मिलेगी। पिंडदान गया के साथ पुनपुन में कराया जाएगा।

    श्रद्धालुओं के लिए ई पिंडदान
    वैसे श्रद्धालु जो पिंडदान के लिए गया नहीं आ सकते उन श्रद्धालुओं के लिए ई पिंडदान की सुविधा बहाल की गई है। पंडित के द्वारा पिंडदान तीन जगहों पर विष्णुपद, अक्षयवट, फल्गु नदी में होगा। उसका मंत्रोचार, दान-दक्षिणा एवं पूजन सामग्री विधि विधान का संपूर्ण विडियो रिकॉर्डिंग के साथ सीडी/डीवीडी एवं पेन ड्राइव तैयार कर पंडा सुनील कुमार भईया के द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए शुल्क 19950 रुपए लगेंगे।

    श्रद्धालुओं के लिए वाहनों की सुविधा
    श्रद्धालुओं के लिए पांच तरह के टूर पैकेज हैं। पैकेज लेने वाले श्रद्धालुओं को वाहनों की बेहतर सुविधा दी जाएगी। श्रद्धालु पटना एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या पटना शहर के किसी कोने से इस नम्बर 8544418374, 8544402437 पर कॉल करने पर वाहनों की सुविधाएं शीघ्र मुहैया कराई जाएगी।

    बुकिंग दर
    पटना से पुनपुन और गया से पटना एक दिन
    एक व्यक्ति-11500
    दो व्यक्ति – 11900
    चार व्यक्ति-19500

    पटना से पुनपुन, गया-बोधगया, राजगीर, नालंदा से पटना एक रात और दो दिन का पैकेज
    एक व्यक्ति-13400
    दो व्यक्ति- 14510
    चार व्यक्ति- 25450

    गया में एक दिन का पैकेज
    एक व्यक्ति-7400
    दो व्यक्ति-8050
    चार व्यक्ति-16050

    गया में एक रात, दो दिन का पैकेज
    एक व्यक्ति-11800
    दो व्यक्ति -12900
    चार व्यक्ति-24000

    गया-बोधगया, राजगीर, नालंदा-गया एक रात दो दिन पैकेज
    एक व्यक्ति-11350
    दो व्यक्ति-12400
    चार व्यक्ति-21200

     

  • बच्चों की दोस्ती मोबाइल गेम ही नहीं किताबों से भी कराएं

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    टेक्नोलॉजी का असर बच्चों पर इस तरह हो रहा है कि वे कोर्स से अलग कविता-कहांनियों की किताबें पढ़ना भूल गए हैं। वक्त मिलने पर मोबाइल पर गेम खेलना और वीडियो देखना ही उनकी पहली पसंद बन गया है। मगर किताबों से दोस्ती भी तो जरूरी है।

    किताबें हमारी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। यह बात अक्सर कही जाती है। लेकिन ये सिर्फ बड़ों के मामले में ही सच साबित नहीं होती, बल्कि बच्चों पर भी उतनी ही लागू होती है। बेशक आज के दौर में अधिकतर बच्चे कोर्स से अलग किताबें नहीं पढ़ पाते। वजह है मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर जैसे तकनीकी गैजेट्स। हालांकि बाजार में बच्चों की कहानी और कविताओं की किताबों की आज भी कोई कमी नहीं है। मगर समस्या है कि बच्चों में पढ़ने का शौक विकसित नहीं हो पा रहा। ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह किताबों का शौक कैसे विकसित करें।

    खुद पढ़कर सुनाएं 
    अपने नन्हे-मुन्ने का अपने जीवन में स्वागत करने के कुछ वर्षों बाद ही आप उसे कहानी पढ़ कर सुनाने की प्रक्रिया आरंभ कर दें। इससे न केवल आप का अपने बच्चे से बंधन मजबूत होगा बल्कि स्वाभाविक तौर पर उसे पुस्तकों से प्यार होने लगेगा। उम्र के छोटे पड़ाव से ही किताबों के साथ से बच्चों में पढ़ने की अच्छी आदत विकसित होती है। प्रयास करें कि प्रतिदिन कम से कम 20 मिनट आप अपने बच्चों के साथ मिल कर बैठें और पढ़ें। पुस्तकों में कोई रोक न रखें, जो आप के बच्चे को पसंद आए, उसे वह पढ़ने दें।

    पढ़ने के साथ समझना भी जरूरी
    बच्चा तेजी के साथ किताब पढ़ पाए, यह हमारा लक्ष्य नहीं है, बल्कि जो कुछ वह पढ़ रहा है, उसे समझ भी सके, इसके लिए आप को बीच-बीच में कहानी से संबंधित प्रश्न करना चाहिए। इससे बच्चा न केवल पढ़ता जाएगा, बल्कि उसे समझने की कोशिश भी करेगा। आप ऐसे प्रश्न पूछें, जैसे अब आगे क्या होना चाहिए, क्या फलां चरित्र ठीक कर रहा है, यदि तुम इस की जगह होते तो क्या करते। ऐसे प्रश्नों से बच्चे की कल्पनाशक्ति विकसित होगी।

    बच्चे के रोलमॉडल बनें 
    यदि आप का बच्चा बचपन से पढ़ने का शौकीन है तब भी घर में किसी रोलमॉडल की अनुपस्थिति उसे इधर-उधर भटकने पर मजबूर कर सकती है। आप स्वयं अपने बच्चे की रोलमॉडल बनें और उसकी उपस्थिति में अवश्य पढ़ें। चाहे आप को स्वयं पढ़ना बहुत अधिक पसंद न भी हो तब भी आप को प्रयास करना होगा कि बच्चे के सामने आप पढ़ती नजर आएं। क्या पढ़ते हैं, यह आप की इच्छा है, लेकिन आप के पढ़ने से आप का बच्चा यह सीखेगा कि पढ़ना उम्र का मुहताज नहीं होता और हर उम्र में इंसान सीखता रह सकता है।

     

  • लड़कियों को जबरन बनाया जाता है मां

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    पैसों के लिए अफ्रीकी देश नाइजीरिया में बच्चा पैदा करने वाली फैक्ट्रियां चल रही हैं। चौंकिए नहीं, यह भले ही हैरानीजनक लग रहा हो, लेकिन है सौ फीसद सच। यहां ‘बेबी फार्मिंग’ नाम से यह गोरखधंधा खतरनाक रूप ले चुका है। यहां कम उम्र की लड़कियों को जबरन मां बनने पर मजबूर किया जाता है और फिर उस बच्चे को भारी दामों में बेऔलाद रईसों को बेच दिया जाता है। इसके लिए बेऔलाद कपल्स मोटी रकम चुकाने तैयार होते हैं।

    नाइजीरिया में चोरी छिपे चल रहा बच्चा पैदा करने का व्यापार बेहद खतरनाक हो चुका है। यहां जन्म देने वाली लड़कियों की उम्र 14 से 17 साल होती है और वो चाहकर भी अबॉर्शन नहीं करा सकती, क्योंकि नाइजीरिया के कानून में इसकी इजाजत नहीं है। इसी बात का फायदा माफिया यानी ‘बेबी फार्मर्स’ उठाते हैं और बच्चों को तीन से चार लाख रुपए में बेचते हैं। वहीं, बच्चे की ख्वाहिश रखने वाले लोग इसका विरोध नहीं करते, क्योंकि मेडिकल ट्रीटमेंट के बजाय ये तरीका ज्यादा सस्ता होता है।

    हालांकि कुछ महिलाएं और लड़कियां यहां पैसे के लालच में मर्जी से आती हैं, तो वहीं इसी की आड़ में कई लड़कियों को खरीद कर यहां लाया जाता है और फिर उन्हें जबरन मां बनने पर मजबूर किया जाता है। सिर्फ नाइजीरिया ही नहीं, इंडोनेशिया समेत कई और देशों में भी बेबी फार्मिंग अस्पतालों और अनाथालायों जैसी जगहों में चोरी-छिपे की जाती है।

  • खतरनाक फैशन : गठिया का मर्ज दिया ऊंची हील ने, रीढ़ की हड्डी भी खिसकी

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    ऊंची हील पहनने का शौक कम उम्र में ही गंभीर रोगों का शिकार बना सकता है। फैशन के क्षेत्र में काम करने वाली 35 साल की एक युवती ऊंची हील पहनने से गठिया और रीढ़ की बीमारी स्पोंडिलोलिस्थीसिस से पीड़ित हो गई। महिला की रीढ़ की कशेरुका खिसक गईं।

    एम्स में इलाज करा रही 35 वर्षीय अंशुमा (बदला नाम) कॉलेज के दिनों से ही ऊंची हील वाले जूते पहनतीं थीं। गुरुग्राम की रहने वाली अंशुमा पिछले सात साल से फैशन जगत में काम कर रही हैं। कुछ दिनों से उन्हें पैर के टखने में दर्द रहने लगा। उन्होंने कई निजी अस्पतालों में इसे दिखाया तो उन्हें रुमेटोलॉजी विशेषज्ञ से इस मर्ज को दिखाने की सलाह दी गई। इसके बाद अंशुमा एम्स के रुमेटॉलॉजी विभाग की प्रमुख प्रोफेसर उमा कुमार के पास परामर्श के लिए गईं।

    न कैल्शियम की कमी और न थॉइराइड : एम्स के रुमेटॉलॉजी विभाग की प्रमुख प्रोफेसर उमा कुमार ने बताया कि जब अंशुमा उनके पास आई थीं तो उनके पैर के अंगुठों, टखने और पैर की पिंडलियों में तेज दर्द की शिकायत थी। इसके बाद उनकी कई जांच हुईं। जांच में पाया गया कि न तो उन्हें कैल्शियम की कमी है और न ही थाइराइड की समस्या है। उनके टखनों और पिंडलियों में दर्द की कोई सामान्य वजह नजर नहीं आई। इसके बाद और कई जांच की गई तो पता चला कि वह गठिया से पीड़ित हैं।

    डॉक्टर उमा ने बताया कि इतनी कम उम्र में गठिया के मामले आमतौर पर कम ही आते हैं। उन्होंने अंशुमा से कई सवाल पूछे तो पता चला कि वह पिछले आठ साल से लगातार ऊंची हील वाले सैंडल और जूते पहनती थीं। इसके बाद डॉक्टर ने उन्हें सपाट जूते या चप्पल पहनने की सलाह दी।

    पीठ दर्द की शिकायत : अंशुमा की पीठ में भी दर्द की शिकायत थी। उनका एक्सरे कराया गया तो पता चला की ऊंची हील पहनने की वजह से रीढ़ की हड्डी खिसक गई है। स्पोंडिलोलिस्थीसिस से पीड़ित होने का पता चला।

    इन बातों का ख्याल रखें
    * ऊंची हील पहनने से शरीर का संतुलन बिगड़ता है। लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से बचें।
    * घंटों तक लगातार एक ही मुद्रा में खड़े या बैठे न रहें। अगर ऑफिस में बैठकर काम करते हैं तो हर 45 मिनट पर उठकर घूमें।
    * हमेशा अपना वजन नियंत्रित रखें। इससे गठिया और जोड़ों के दर्द से भी बचा जा सकता है।
    * कैल्शियमयुक्त भोजन लें, पैदल चलें और नियमित व्यायाम करें, ताकि हड्डियों का घनत्व बढ़ सके।

    एम्स में रुमेटॉलॉजी विभाग की प्रमुख प्रोफेसर उमा कुमार ने कहा, “लगातार ऊंची हील वाली सैंडल पहनने से चाल और शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है। पैर की अंगुलियों से लेकर रीढ़ की हड्डी तक प्रभाव पड़ता है। ध्यान नहीं देने पर पंजों, पांव में लगातार दर्द, नसों में खिचाव, कमर दर्द, पीठ दर्द और घुटनों में दर्द की समस्या सामने आने लगती है।”

     

  • गूगल पर सबसे ज्यादा खोजी गई सनी लियोनी :मोदी, सलमान सब पीछे

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    भारत में गूगल सर्च में इस साल अगस्त के पहले हफ्ते तक सबसे अधिक ढूंढे जाने वाली हस्तियों की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सुपरस्टार सलमान खान और शाहरुख खान को पीछे छोड़ते हुए अभिनेत्री सनी लियोन शीर्ष स्थान पर बनी हुई हैं।  गूगल ट्रेंड्स एनालिटिक्स के अनुसार, सनी से जुड़ी ज्यादातर खोजें उनके वीडियो के संबंध में हैं, इसके अलावा उनकी बायोपिक श्रृंखला ‘करणजीत कौर : द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ सनी लियोन’ को भी लोगों ने ढूंढा है।इसके अलावा सनी से जुड़े अधिकतर सर्च ट्रेंड्स बताते है कि उन्हें सबसे ज्यादा पूवरेत्तर के राज्यों जैसे मणिपुर और असम में खोजा गया। शीर्ष स्थान पर बने रहने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सनी ने कहा, ‘‘मेरी टीम ने मुङो इस बात की जानकारी दी और मैं इसका श्रेष अपने फैंस को देना चाहूंगी, जो हमेशा मेरे लिए खड़े रहे हैं। यह एक महान भावना है।पिछले साल भी भारत में सबसे ज्यादा खोजे जाने वाले हस्तियों की इस सूची में सनी पहले स्थान पर रही थीं।