गोधरा कांड: सच क्या है? ‘द साबरमती रिपोर्ट’ फिल्म समीक्षा
क्या आप जानते हैं गोधरा कांड के बारे में? क्या आप जानते हैं कि इस त्रासदी के पीछे सच क्या छुपा हुआ है? ‘द साबरमती रिपोर्ट’ नामक एक नई फिल्म आपके सामने इस कांड की सच्चाई लाने का दावा करती है और इसे देखने के बाद आपको हैरानी होगी कि क्या कुछ सच में हुआ था और क्या दिखाया गया। यह फिल्म केवल एक थ्रिलर ही नहीं है, बल्कि यह देश के इतिहास का एक दर्दनाक पन्ना है।
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ 2002 के गोधरा कांड की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहाँ साबरमती एक्सप्रेस में आग लगने से 59 लोगों की जान चली गई थी। फिल्म एक युवा पत्रकार समर कुमार (विक्रांत मैसी) की कहानी है, जो इस कांड के बारे में सच्चाई जानने के लिए तत्पर है। लेकिन क्या वह इस सच को उजागर करने में कामयाब हो पाता है?
शुरुआती झलक और एक हैरान करने वाला सवाल
फिल्म की शुरुआत गोधरा कांड की भयावहता से होती है, लेकिन आगे चलकर कहानी समर के जीवन में आती है। फिल्म एक दिलचस्प सवाल के साथ आगे बढ़ती है जो पत्रकारिता की दुनिया पर एक गहरी टिप्पणी करती है।
एक भ्रामक यात्रा और पत्रकारिता की परीक्षा
समर की अपनी खोज के दौरान एक सच्चाई सामने आती है जो पूरे तंत्र को चुनौती देती है। क्या वह इस संघर्ष में सच्चाई की खोज को जारी रख सकता है या दबाव के आगे झुक जाएगा? उसकी यात्रा एक ऐसा साहसिक उपक्रम बन जाती है जो समाज और मीडिया पर गंभीर सवाल उठाती है।
सच्चाई का सामना
समर सच्चाई का पीछा करने में लगातार आने वाली मुश्किलों को बखूबी दर्शाता है। यह सिर्फ खबर देने के बारे में नहीं, बल्कि उसके अंदर छुपे सच के बारे में भी है।
फैक्ट्स से हुई छेड़छाड़: संवेदनशीलता का प्रश्न
यह फिल्म ऐतिहासिक तथ्यों को हल्के ढंग से प्रस्तुत करती है जो दर्शकों को सतर्क करती है। फिल्म वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है, लेकिन फिल्म निर्माता की रचनात्मक स्वतंत्रता कई सवालों को जन्म देती है। कुछ सीन्स मनोरंजन पर ज़्यादा ध्यान देते हुए, गंभीरता से कम करते हुए नजर आते हैं।
बारीकियों और वास्तविकताओं का अहसास
हालांकि फिल्म का दृष्टिकोण संवेदनशीलता और तथ्यात्मक सटीकता के बीच एक कठिन संतुलन है। निर्देशक ने पूरी कोशिश की है लेकिन वह सभी को संतुष्ट करने में कामयाब नहीं हुए।
अभिनय और तकनीकी पहलू
विक्रांत मैसी एक बार फिर अपने अद्भुत अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रहे हैं। ऋद्धि डोगरा और राशी खन्ना ने भी अपने-अपने किरदारों को बखूबी निभाया है। हालाँकि फिल्म का स्क्रीनप्ले कुछ स्थानों पर कमजोर दिखाई देता है।
एक और परत: पत्रकारिता का प्रश्न
फिल्म दर्शकों को पत्रकारिता के बारे में सोचने पर मजबूर करती है। क्या सच्चाई ही सबसे अहम है या फिर दर्शकों को मनोरंजन के तत्व भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं? यह प्रश्न हर दर्शक को सोचने के लिए मजबूर कर देगा।
टेक अवे पॉइंट्स
‘द साबरमती रिपोर्ट’ एक ऐसी फिल्म है जो गोधरा कांड को लेकर नई बहस छेड़ती है। यह हमें इतिहास, पत्रकारिता, और सच्चाई की तलाश में उभरने वाली मुश्किलों के बारे में सोचने के लिए मजबूर करती है। हालांकि फिल्म कुछ कमियों से मुक्त नहीं है, फिर भी इसकी विषय वस्तु इसे देखने लायक बनाती है।









