गांधी: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम भारत मे बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। महात्मा गांधी ने अहिंसा का संदेश देते हुए देश को अंग्रेजो की बेड़ियों से निजात दिलाने के लिए सशक्त प्रयास किये। वही अगर हम महात्मा गांधी की आत्मकथा सत्य के साथ मेरे प्रयोग का जिक्र करें तो यह अब तक की ऐसी आत्मकथा मानी जाती है जिसने बेबाक अंदाज में गांधी के जीवन से जुड़े रहस्यों का खुलासा किया है। लेकिन महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ा एक पहलु ऐसा भी है जिसका वर्णन करना उन्होंने जरूरी नही समझा। क्योंकि गांधी ने यह पहलु अपने जीवन का निजी पहलु बताया।
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जब 55 की उम्र में शादीशुदा महिला को दिल दे बैठे थे गांधी
महात्मा गांधी का विवाह 13 वर्ष की आयु में उनकी उम्र से छह महीने बड़ी कस्तूरबा से हुआ था। लेकिन गांधी को एक अन्य महिला से प्रेम हो गया था। गांधी को शादी के करीब तीन दशक बाद एक अन्य महिला सरलादेबी चौधरानी से प्रेम हुआ था। जिस समय महात्मा गांधी को सरल देवी से प्रेम हुआ था उस समय उनकी उम्र 55 साल व सरला की उम्र 47 साल थी। गांधी ने अपने प्रेम को छुपाया नही। वह जब सरला के प्रेम में थे तब वह कांग्रेस के सर्वोच्च नेता भी नहीं थे लेकिन लोग उनके प्रेम को लेकर तरह तरह की बातें कर रहे थे। क्योंकि गांधी का नाम एक ऐसी महिला के साथ जुड़ गया था जो पहले से शादीशुदा थी।अपने प्रेम को स्वीकारते हुए महात्मा गांधी ने सी राजागोपालचारी को एक पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने कहा मुझे प्रेम हो गया है। सरला देवी गांधी के काफी करीब थी वह उनका काफी सम्मान करते थे। सरला के कहने पर गांधी ने जवाहरलाल नेहरू को यह सुझाव दिया कि वह इंदिरा का विवाह सरलादेबी के बेटे दीपक से करें। हालांकि नेहरू ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीें किया। गांधी के साथ पंजाब, बनारस, अहमदाबाद, बॉम्बे, बरेली, झेलम, सिंहगढ़, हैदराबाद (सिंध), झांसी और कोलकाता जैसे कई शहरों का दौरा किया। -
ओसामा बिन लादेन के पिता की थी 11 पत्नी और 52 बच्चे, मौत से पहले थी 23 शादी करने की योजना
सम्पादकीय: ओसामा बिन लादेन का नाम तो हर कोई जानता है यह अलकायदा आतंकी संगठन के कर्ताधर्ता थे। लेकिन क्या अपने कभी यह जानने की कोशिश की है कि इतने पढ़े लिखे व्यक्ति के पिता कौन थे। अगर हम ओसामा बिन लादेन के पिता के इतिहास पर गौर करे तो इनके पिता का नाम मोहम्मद बिन अवध बिन लादेन था। यह सऊदी के बड़े व्यापारी थे इनके पास अरबो की संपत्ति थी। इन्होंने अपना व्यापार अपनी मेहनत के बलबूते पर स्थापित किया। यह मुख्य रूप से निर्माण उद्योग में काम करते थे । उन्होंने सऊदी बिनलादिन समूह की स्थापना की और बिन लादेन परिवार की संपत्ति और प्रतिष्ठा की स्थापना करते हुए सबसे धनी गैर-शाही सऊदी बन गए ।
ओसामा बिन लादेन के पिता एक गरीबी और अशिक्षित परिवार से थे। उन्होंने अपने प्रारंभिक जीवन मे काफी कष्ट झेले थे। इनका परिवार प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान तिहामा के संपर्क में आया। मोहम्मद बिन अवध बिन लादेन ने अपने संघर्ष के दिनों कुली का काम किया। यह अन्य गरीबो की तरह अपना जीवन गुजार रहे थे। साल 1930 में उन्होंने अपना खुद का निर्माण का व्यापार शुरू किया। उनके काम की सराहना सऊदी अरब के पहले सम्राट अब्दुल अजीज इब्न सऊद ने की उसके बाद उनको सफलता हासिल हुई।इस सफलता ने उन्हें सऊदी के प्रतिष्ठित परिवार में शामिल कर दिया। ओसामा बिन लादेन के पिता को वहाबी मुस्लिम के रूप में जाना जाता था। वह अपने धर्म को बहुत सच्चे मन से मानते थे। ओसामा बिन लादेन के पिता ने 11 शादियां की थी और उनके 52 बच्चे थे। वह 23 पत्नियां बनाने की योजना बना रहे थे। 3 सितंबर 1967 को, मोहम्मद बिन लादेन एक विमान दुर्घटना में मारे गए। इनका बेटा ओसामा बिन लादेन था जो एक बड़ा आतंकी था। उसने अलकायदा संगठन का गठन किया था। -
देश मे आजादी भी अधूरी है और आजादी का जश्न भी
हर घर तिरंगा: देश आजादी का 75 वां उत्सव मना रहा है। हर कोई हर घर तिरंगा अभियान के समर्थन में खड़ा है। बच्चे बूढ़े , बढ़े सब आजादी के रंग में रंगे हुए हैं। लेकिन इस आजादी के बीच महिलाएं चीख रही है वह अब सच में आजाद होना चाह रही है। वह अब उड़ने को बेताब हैं। वह चाहती है पितृसत्ता से मुक्त होना और नए युग मे प्रवेश करना। क्योंकि आजादी को आज भले ही 75 साल हो गए हैं लेकिन महिलाएं अभी भी बेड़ियों में जकड़ी हुई है।
आज हमारे देश मे एक वर्ग ऐसा है जिसका शोषण हो रहा है। देश जाति धर्म के नाम पर लड़ रहा है। आपसी भाईचारे का कत्ल हो रहा है। मानवता से ऊपर धर्म को रखा जा रहा है। आज इंसान इंसान का कत्ल करने को आमादा है। महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं।महिलाओं को आज भी अपने लिये निर्णय लेने की आजादी नहीं है वह जकड़ी है आज आजाद सी दिखने वाली गुलामी की बेड़ियों में जहां उन्हें हर बार यह बताया जाता है कि वह आजाद है लेकिन जैसे ही वह अपने हक की आवाज उठती है उन्हें यह याद दिला दिया जाता है वह महिला है उन्हें यह अधिकार नहीं है कि वह कोई निर्णय ले सकें।आज हमारे देश मे विकास की गंगा बह रही है। हजारों महिलाओं के ऐसे उदाहरण मिल जायेंगे जो प्रेरणादायक है। उन्हें देखकर लगता है हमारा देश वास्तव में आगे बढ़ रहा है। लेकिन एक सच यह भी है कि करोडों की आबादी में यह हजारों के उदाहरण मन को झझकोर देते हैं। क्योंकि यह महिलाओं की आजादी पर सवाल उठाते हैं। आज समाज काफी बदल गया है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाओं की स्थिति खराब है। उनका शोषण होता है। उन्हें काम करने की मशीन समझा जाता है।आज महिला सुरक्षा की बाते हो रही है उनकी सुरक्षा को लेकर कानून बनाये जा रहे हैं। लेकिन इस सबके बाद भी समाज मे महिलाओं को लेकर संकीर्ण सोच बनी हुई है। उनका सम्मान सोशल मीडिया पर खूब होता है लेकिन वास्तव में महिलाओं को पुरुषों से कम आंकने की सोच आज भी लोगो के मस्तिष्क पर हावी है। आज हम विकास के पथ पर चल रहे हैं लेकिन ग्रामीण परिवेश में महिलाओं की स्थिति खराब है।महिलाओं को आज भी हिंसा सहनी पड़ रही है उन्हें पुरुषों के अधीन रहना पड़ रहा है उन्हें शिक्षा के सुचारू साधन नही मिल पा रहे हैं। जिसके कारण वह विकास से काफी दूर है उन्हें नही पता है देश के बारे में और स्त्यता यही है कि आजादी तब तक अधूरी है जब तक महिलाओं को सच मे आजादी नहीं मिलती है।क्योंकि आजादी का मतलब समता, समानता , एकजुटता, समान शिक्षा है और महिलाएं अभी भी इन सभी चीजो से वंचित हैं। जब तक उन्हें यह सब नही मिलता ओर करोडों की आबादी ने करोड़ो महिलाएं पुरुष के बराबर नही खड़ी होती तब तक आजादी अधूरी रहेगी और आजादी का जश्न भी क्योंकि आज आप कोई भी क्षेत्र उठाकर देख ले वहां महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की अपेक्षा कम ही मिलेगी।उदाहरण के लिए हमारे देश की राजनीति को ही ले लो। आज राजनीति में महिलाओं की संख्या गिनी चुकी है। इतनीं कि उन्हें हम अंगुलियों पर गिन सकते हैं। भारत के उच्च पद पर महिलाएं तो पहुंच गई है लेकिन कितनी यह आप गिनती करके बता सकते हैं। वास्तव में देश आजाद तब होगा जब हम सबको समान देखेगे और महिलाओं की सँख्या किसी भी क्षेत्र में अंगुलियों पर नही गिनी जा सकेगी। -
ऐसा क्या लिख डाला रुश्दी ने की हत्या करने वालो को 30 लाख डॉलर का इनाम दिये जाने की हुई घोषणा
Salman rishidei: भारतीय मूल के जाने माने लेखक सलमान रुश्दी पर कल अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान चाकू से हमला किया गया। सलमान रुश्दी की हालत नाजुक बनी हुई है और वह बोल नही पा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है इससे उनकी एक आंख की रोशनी जा सकती है। वही अगर हम बात सलमान रुश्दी की करे तो यह 80 के दशक से इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर है। इन्हें कई बार जान से मारने की धमकी दी गई।
वही साल 1989 से 90 तक का दौर ऐसा रहा जब इन्हें छुप के रहना पड़ा। यह उस समय बाहर की दुनिया से गायब थे। किसी भी सांस्कृतिक आयोजन में नही जाते थे। क्योंकि खतरा इनके सर पर मंडरा रहा है। और इनकीं हत्या करने वालो को 30 लाख डॉलर का इनाम दिए जाने की घोषणा की गई थी।1989 में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खुमैनी ने यह घोषणा की थी की जो व्यक्ति सलमान रुश्दी की हत्या करेगा उन्हें वह 30 लाख डॉलर का इनाम देगे। उनकी इस घोषणा का एक मात्र कारण उनकी किताब द सैटेनिक वर्सेज थी। इस पुस्तक में उन्होंने पैगम्बर मोहम्मद, इस्लामिक परम्पराओ और इस्लाम की आलोचना की है।उनकी इन आलोचनाओं को पढ़कर इस्लामी भड़क उठे। वह आग बबूला हो गए और उस वक्त खुमैनी ने सलमान रुश्दी की हत्या करने वाले के लिये इनाम घोषित कर दिया। अगर हम 30 लाख डॉलर को भारतीय रुपयों में देखे तो इसकी कीमत 4.2 करोड़ रुपये के बराबर थी।अपने ऐलान के बाद खुमैनी तो पीछे हट गए लेकिन ईरान के एक संगठन ने इस इनाम की राशि को 30 लाख कर दिया। साल 1989 में अलग अलग देशो ने सलमान रुश्दी की किताब सैटेनिक वर्सेज का विरोध किया। अलग अलग देशो में उनके पलते फूंके गए। भारत ईरान समेत कई देशों ने इस किताब के बैन की मांग उठाई।सलमान रुश्दी पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने इस किताब में पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया है। भारत मे इस किताब को खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। भारत मे तब राजीव गांधी की सरकार थी। वही ईरान ने इस किताब को बैन करके लेखक सलमान रुश्दी की हत्या पर इनाम घोषित कर दिया था।वही इस किताब का इतना बढ़ चढ़ कर विरोध हुआ कि जिन लोगो ने इसका अनुवाद किया उनका शोषण किया गया। लोगो की हत्या होने लगी। जापानी भाषा मे इस उपन्यास का रूपांतरण करने वाले लेखक हितोशी इगाराशी की हत्या कर दी गई। पब्लिसर निशाना बनाए जाने लगे और लोग रुश्दी का विरोध करने लगें। यह वह दौर था जब रुश्दी पर जान का खतरा मंडराने लगा और वह छुप गए। उन्होंने बाहर आना जाना बंद कर दिया।जाने क्या था किताब का विषय:
जानकारो का कहना है कि सलमान रुश्दी की इस किताब का विषय इस्लाम के विरुद्ध था। उन्होंने इस किताब में इस्लाम, पैगम्बर मोहम्मद की आलोचना की थी। उन्होंने इस किताब में मुस्लिम धर्म की परंपराओं पर सवाल उठाए थे और मोहम्मद को झूठा पाखंडी बताया और उनकी 12 बीवियों को लेकर तरह तरह की बाते की। जिसके बाद मुस्लिम समाज ने रुश्दी का विरोध किया और उनके खिलाफ लोग विरोध करने लगे। -
जाने पाकिस्तान गठन के बाद जिन्ना ने अपने पहले भाषण में क्या कहा था
सम्पादकीय: 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ था। देश की आजादी में हर किसी ने बराबर की भूमिका निभाई। कोई मुस्लिम या हिन्दू नही था सब सिर्फ भारत के नागरिक थे सभी ने एकजुट होकर भारत को आजाद करवाने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन भारत की आजादी की घोषणा होने से पहले भारत दो टुकड़ों में बट गया और एक नए देश पाकिस्तान का निर्माण हुआ। पाकिस्तान का गठन इस बात का सबूत था कि अंग्रेज भारत की एकता को तोड़ने में सफल हो गए है।
जब पाकिस्तान का गठन हुआ तो हर भारतीय के दिल मे दर्द था लोगो का मन दुखी था। अपनो से अलग होने के कारण है सबकी आंखे नम थी। आसान नही था किसी के लिये यह देख पाना की आज तक जो एक साथ रहते थे। जिन्होंने एक साथ संघर्ष किया और अंग्रेजों की गुलामी से अपने देश को मुक्त करवाया। अब वही लोग दो अलग अलग देश के नागरिक बन गए हैं।पाकिस्तान के गठन के बाद मोहम्मद अली जिन्ना को पाकिस्तान का गवर्नर जनरल बनाया गया था। जिन्ना ने अपने पहले सम्बोधन में लोगो से कहा कि 15 अगस्त हमारा स्वतंत्रता दिवस है। जिन्ना की मौत से पहले 2 साल तक पाकिस्तान में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। लेकिन उनकी मौत के बाद पाकिस्तान के हालात बदल गए और पाकिस्तान में स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को मनाया जाने लगा।जाने क्या कहा था मोहम्मद अली जिन्ना ने:-
मोहम्मद अली जिन्ना ने अपने पहले सम्बोधन के दौरान कहा, 15 अगस्त हमारा पहला स्वतंत्रता दिवस है। हम उन सभी लोगो का शुक्रिया अदा करते हैं जिन्होंने पाकिस्तान को बनाने में कुर्बानी दी पाकिस्तान उन सभी का एहसानमंद रहेगा। उन्होंने आगे कहा, देश का गठन करना सिर्फ काफी नही था यह एक बड़ी जिम्मेदारी है। हमारे पास खुद को बेहतर साबित करने का यह एक अच्छा मौका है।हम पूरे विश्व को बता सकते हैं कि अलग अलग इलाको से मिलकर बने देश मे एकता और एकजुटता रह सकती है और नस्ल व भेदभाव से ऊपर उठकर अच्छा काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा पाकिस्तान की कोई नीति आक्रम नही है। यह देश संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति बाध्य है। जिन्ना ने कहा पाकिस्तान विश्व स्तर पर शान्ति और समृद्धि के लिये काम करेगा।मुसलमान ने साबित किया उनकी अलग देश की मांग गलत नही:-
मोहम्मद अली जिन्ना ने आगे कहा, देश के मुसलमान ने एकता का परिचय दिया और यह साबित कर दिया है कि हमारे द्वारा अलग देश की मांग गलत नही थी। यह जायज मांग थी। इससे कोई मुकर नही सकता। लेकिन अब हमारा यह कर्तव्य है कि हम लोगो के सम्मुख खुद को बेहतर साबित कर कसे।अब हमें अपने व्यवहार और विचारों से लोगो को यह दिखा देना चाहिए। वह वफादार नागरिको की तरह अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। किसी को भी चिंता करने की आवश्यकता नही है। उन्होंने कहा हम अपने दायरे को समझते हैं हम गरिमाओ में जीना चाहते हैं और हमारा उद्देश्य है कि दूसरे भी ऐसे ही जियें हम पूरे देश में शान्ति का परिचय देना चाहते हैं। -
पढ़े अटल बिहारी वाजपेयी की बेहतरीन कविताएं जो देती है एक संदेश
अटल बिहारी वाजपेयी कविता विशेष:-
1) पन्द्रह अगस्त का दिन कहता – आज़ादी अभी अधूरी हैसपने सच होने बाक़ी हैं, राखी की शपथ न पूरी हैजिनकी लाशों पर पग धर कर आजादी भारत में आईवे अब तक हैं खानाबदोश ग़म की काली बदली छाईकलकत्ते के फुटपाथों पर जो आंधी-पानी सहते हैंउनसे पूछो, पन्द्रह अगस्त के बारे में क्या कहते हैंहिन्दू के नाते उनका दुख सुनते यदि तुम्हें लाज आतीतो सीमा के उस पार चलो सभ्यता जहाँ कुचली जातीइंसान जहाँ बेचा जाता, ईमान ख़रीदा जाता हैइस्लाम सिसकियाँ भरता है,डालर मन में मुस्काता हैभूखों को गोली नंगों को हथियार पिन्हाए जाते हैंसूखे कण्ठों से जेहादी नारे लगवाए जाते हैंलाहौर, कराची, ढाका पर मातम की है काली छायापख़्तूनों पर, गिलगित पर है ग़मगीन ग़ुलामी का सायाबस इसीलिए तो कहता हूँ आज़ादी अभी अधूरी हैकैसे उल्लास मनाऊँ मैं? थोड़े दिन की मजबूरी हैदिन दूर नहीं खंडित भारत को पुनः अखंड बनाएँगेगिलगित से गारो पर्वत तक आजादी पर्व मनाएँगेउस स्वर्ण दिवस के लिए आज से कमर कसें बलिदान करेंजो पाया उसमें खो न जाएँ, जो खोया उसका ध्यान करे।।2) बाधाएं आती हैं आएंघिरें प्रलय की घोर घटाएं,पावों के नीचे अंगारे,सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,निज हाथों में हंसते-हंसते,आग लगाकर जलना होगा।कदम मिलाकर चलना होगा।हास्य-रूदन में, तूफानों में,अगर असंख्यक बलिदानों में,उद्यानों में, वीरानों में,अपमानों में, सम्मानों में,उन्नत मस्तक, उभरा सीना,पीड़ाओं में पलना होगा।कदम मिलाकर चलना होगा।उजियारे में, अंधकार में,कल कहार में, बीच धार में,घोर घृणा में, पूत प्यार में,क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,जीवन के शत-शत आकर्षक,अरमानों को ढलना होगा।कदम मिलाकर चलना होगा।सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,असफल, सफल समान मनोरथ,सब कुछ देकर कुछ न मांगते,पावस बनकर ढलना होगा।कदम मिलाकर चलना होगा।कुछ कांटों से सज्जित जीवन,प्रखर प्यार से वंचित यौवन,नीरवता से मुखरित मधुबन,परहित अर्पित अपना तन-मन,जीवन को शत-शत आहुति में,जलना होगा, गलना होगा।क़दम मिलाकर चलना होगा।3) भरी दुपहरी में अँधियारासूरज परछाई से हारा,अंतरतम का नेह निचोड़े, बुझी हुई बाती सुलगाएँ।आओ फिर से दिया जलाएं।हम पड़ाव को समझें मंजिल,लक्ष्य हुआ आँखों से ओझल,वर्तमान के मोहजाल में, आने वाला कल न भुलाएँ।आओ फिर से दिया जलाएं।आहूति बाकी यज्ञ अधूरा,अपनों के विघ्नों ने घेरा,अंतिम जय का वज्र बनाने,नव दधीचि हड्डियाँ गलाएँ।आओ फिर से दिया जलाएँ।4) कौरव कौनकौन पांडव,टेढ़ा सवाल है|दोनों ओर शकुनिका फैलाकूटजाल है|धर्मराज ने छोड़ी नहींजुए की लत है|हर पंचायत मेंपांचालीअपमानित है|बिना कृष्ण केआजमहाभारत होना है,कोई राजा बने,रंक को तो रोना है| -
14 अगस्त की रात एक फोन कॉल ने उड़ा दी थीं पीएम नेहरू की नींद
Independence Day: 15 अगस्त 1947 को देश को अंग्रेजों की गुलामी से आज़ादी मिली। वहीं 14 अगस्त की रात दिल्ली में नई सुबह के स्वागत की काफी तैयारियां हो रही थीं। एतिहासिक इमारतों और चौराहों को सजाया जा रहा है।। कोई आज़ाद सूरज देखने को बेकरार था तो कोई इस गुलामी की अंधेरी रात के बस गुजर जाने के इंतज़ार में था।
वहीं पंडित जवाहर लाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बनने वाले थे। पर इसी बीच रात में नेहरू को लाहौर से एक फोन आया। लाहौर जो पाकिस्तान का हिस्सा बन चुका था। इस फोन के बाद से जवाहर लाल नेहरु के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थीं।
फोन पर बात करने के बाद नेहरू घबराए हुए थे। बता दें कि पाकिस्तान में 14 अगस्त 1947 की रात से ही गैर मुस्लिमों के साथ खूनी खेल शुरू हो गया था। लाहौर में हिंदू और सिखों को खून के घाट उतारा जा रहा था। जब नेहरू को फोन कॉल पर इसकी जानकारी दी गई तो उनके होश उड़ गये और उनके मुंह से एक शब्द तक नहीं निकल रहा था।
नेहरू परेशानी में थे, क्योंकि लाहौर के नए प्रशासन ने वहां के हिंदू और सिख इलाकों में पानी की सप्लाई, लाइट आदि सुविधाओं को भी बंद कर दिया था। प्यास से तड़प रहे लोग पानी की तलाश में बाहर निकलते, तो उन्हें मुसलमानों द्वारा मार दिया जाता।
स्थिति काफी गंभीर हो चुकी थी। पूरा लाहौर बंटवारे की आग में जल रहा था। फोन पर मिली इस जानकारी के कुछ घंटे बाद ही नेहरू को भारत की आजादी पर अपना संबोधन देना था।
जानकारों के मुताबिक नेहरू अपने भाषण में अपने मन की बात कहना चाहते थे पर उस वक्त उनके मन में लाहौर में रह रहे हिंदू और सिखों की चिंता घर कर गईं थी।
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हिंदुस्तान में संघर्ष करती हिंदी
Hindi diwas:- भारत जो की हिंदी भाषी देश हैं यहां बड़ी तादाद में लोग आज भी हिंदी का उपयोग करते हैं और हिंदी बोलने व लिखने में निपुणता रखते है। कहते हैं हिंदी वह भाषा है जो लोगों को एक दूसरे से जोड़ती है और उनमें अपनत्व का भाव जगाती है। लेकिन आजादी के 75 वर्ष बाद भी हिंदी का ऐसा संघर्ष मन हो आहत कर देता है समझ नही आता अपनी भाषा से इतना बैर देश के लोगों की मजबूरी है या उनकी जरूरत।
क्योंकि हिंदी हमारे देश की भाषा है हमारी भाषा है लेकिन इस सबके बाबजूद भी यह अपने अस्तित्व को तलाश रही है और अंग्रेजी के सम्मुख होते अपने तिरस्कार को देखकर टूट जाती है की भारत जहां संस्कृत सभी भाषाओं की मां मानी जाती है और हिंदी सभी भाषाओं की बड़ी बहन वहां इसे इतना तिरस्कार क्यों सहना पड़ रहा है और आज तक भारत की कोई मातृ भाषा क्यों नहीं बनी। क्या इतना खोखला है भारत का अंदरूनी ढांचा जो अपने देश की एक भाषा को स्वतंत्र नहीं करवा पाया और अंग्रेजों के जाने के बाद अब भारत के सपूत ही अंग्रेजी में बड़बड़ाकर हिंदी को नीचा दिखा रहे हैं।
लेकिन अगर गौर करें तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है की हम विकशील देश की श्रेणी में आने के बाद भी अपने देश की भाषा को सम्मान नहीं दे पा रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है बाहरी चमक ने हमारी आंखों पर पट्टी बांध दी है जो हमे हमारी सांस्कारिक भाषा से अलग कर रही है। लेकिन हिंदी पर अंग्रेजी का हावी होना आगामी समय मे हिंदी को लुप्त कर देगा क्योंकि अंग्रेजी के सामने आज के दौर में हिंदी का संघर्ष है ओर जो लोग इस संघर्ष से जूझ रहे हैं वह कभी अपनी आगामी पीढ़ी को हिंदी प्रेमी नहीं होने देंगे।आज हिंदी के डगमगाते कदम और रोजगार के क्षेत्र में अंग्रेजी का अधिक महत्व बता रहा है की यदि जीविका के लिए कुछ हासिल करना है तो हिंदी नहीं अंग्रेजी प्रेमी बनिए।वहीं हिंदी के निरंतर लुप्त होते अस्तित्व के बाद महसूस हो रहा है की हिंदी मीडियम स्कूलों पर ताला लगा देना चाहिए या फिर उन्हें भी अंग्रेजी मीडियम बना देना चाहिए। क्योंकि हिंदी मीडियम से पढ़कर एक छात्र 12 वीं में 99 प्रतिशत अंक तो प्राप्त कर सकता है लेकिन जीवन के संघर्ष में अंग्रेजी के सम्मुख उसे शर्मिंदगी महसूस होती है।क्योंकि वहां उसके हुनर से ज्यादा देखा जाता है की उसे अंग्रेजी में निपुणता हासिल है या नहीं। जहां हिंदी में काम होता है वहां के लोगों को भी फर्राटेदार अंग्रेजी जानने वाले कर्मचारियों की आवश्यकता होती है और अगर गलती से इंटरव्यू के दौरान अपने अपना परिचय हिंदी में दे दिया तो हाय तौबा नौकरी मिलने से पहले ही चली जाती है।आज कल हिंदी पर कर्मचारियों के लिए एक और चुनैती ने जन्म लिया है जो हैं उनकी तनख्वाह अगर आप हिंदी भाषी है तो आपकी तनख्वाह आपके साथ समान पद पर कार्यरत व्यक्ति की तनख्वाह से आधी होगी क्योंकि अंग्रेजी का शब्द बुना ही अंग्रेजी पद्धति से है वहीं अंग्रेज जिन्होंने हिंदुस्तान को कभी सम्मान नहीं दिया तो हम उनकी भाषा से क्या उम्मीद लगा दें। -
Happy Gandhi Jayanti:- जाने क्यों गांधी को कभी नही मिटा सकती आलोचनाएं
देश– गांधी जी का नाम पूरा विश्व जानता है। हर कोई गांधी जी के मार्ग चलना चाहता है। क्योंकि गांधी ने हिंसा का मार्ग अपनाए बिना देश को अंग्रेजों की बेड़ियों से आजाद करवाया। महात्मा गांधी का नाम भारत मे बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। बच्चे महात्मा गांधी को प्यार से बापू कहकर पुकारते हैं। वही गांधी जी भारत के राष्ट्रपिता है।
आज विश्व के लगभग 70 देश ऐसे होंगे जहां महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित होगी और वहां महात्मा गांधी को अहिंसा प्रेमी के रूप में जाना जाता है। एक ओर जहां कई देश गांधी का सम्मान करते हैं उनका नाम गर्व के साथ लेते हैं। वही दूसरी और कई जगहों से गांधी की प्रतिमा खंडित होने की खबरे सामने आती रहती है।गांधी के चंपारण में, मोतिहारी के चरखा पार्क में खड़ी गांधी की मूर्ति पिछले दिनों ही खंडित की गई है। लेकिन यह कोई नई बात नहीं है हर समय यह खबरे सामने आती रहती है कि आज महात्मा गांधी की तस्वीरें टूट गई है। लेकिन इससे महात्मा गांधी की महानता को कोई कम नही कर सका क्योंकि गांधी ने अपनी छवि अपने कर्मो से बना रखी थी और उनके आलोचना उनकी प्रतिभा को कम नही कर सकते.संघर्ष ही गांधी है-
महात्मा गांधी को संघर्ष के रूप में देखा जाता है। गांधी ने अपने जीवन मे कई उतार चढ़ाव देखे। जब वह विदेश पढ़ने गए तो उन्हें नश्ल भेद देंखने को मिला। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गांधी जी अंहिसा प्रेमी थे। उन्हें लगता था कि हम अहिंसा से इस संसार को जीत सकते हैं।वही आज जब गांधी की प्रतिमाओं को तोड़ा जा रहा है तब भी गांधी का संघर्ष बोल रहा है। आलोचनाओ के बाद भी गांधी की प्रतिभा कम नही हुई है। लोग आज भी गांधी को सम्मान से देखते है और उनका स्मरण बड़े ही प्रेम के साथ करते हैं।कब से चल रहा गांधी की प्रतिमा तोड़ने का ट्रेंड-
महात्मा गांधी की प्रतिमा तोड़ना आज कोई नई बात नहीं है यह ट्रेड पहले भी चल चुका है। 60 से 70 के दशक में कई लोग ऐसे हुए जिन्होंने गांधी का विरोध किया। जब नक्सली उन्माद जोरों पर था. गांधी की मूर्तियों पर हमले हो रहे थे. वो तोड़ी जा रही थीं. विकृत की जा रही थीं. अपशब्द आदि लिखकर उन्हें मलिन करने की कोशिश की जा रही थी।जयप्रकाश नारायण ने एक बार अपनी गांधी बिरादरी को संबोधित करते हुए लिखा था, “गांधी से इन लोगों को इतना ख़तरा महसूस होता है. वे इनकी मूर्तियां तोड़ने में लगे हैं, इसे मैं आशा की नज़रों से देखता हूँ.”जेपी ने कहा था, “यह हम गांधीजनों को सीधी चुनौती है, जो अपनी-अपनी सुरक्षित दुनिया बनाकर जीने लगे हैं. चुनौती नहीं, तो गांधी नहीं।लेकिन आज के समय मे अगल तरीके से गांधी का विरोध हो रहा है। आज भी वो नक्सली है जो गांधी का विरोध करते हैं लेकिन अब उन्होंने एक नया चोला पहन रखा है। वह अब एक विशेष विचारधारा के माध्यम से गांधी को तोड़ने का प्रयास करते हैं। लेकिन गांधी तो संघर्ष है और संघर्ष जारी रहता है।जब गांधी जयंती पर ट्रेड किया गोडसे-
गांधी विरोधी अभियान चलाने में सोशल मीडिया ने कोई कसर नही छोड़ी है। बीते साल गांधी जयंती के मौके पर।सोशल मीडिया पर गोडसे ट्रेड में आए। गोडसे के समर्थकों ने #गोडसे के साथ जमकर गांधी का विरोध किया। लेकिन गांधी के समर्थकों ने गांधी जयंती पर गांधी के संदेश को दुनिया तक पहुंचाया।सोशल मीडिया पर अक्सर लोग गांधी के खिलाफ जहर उगलते दिख जाते हैं। लेकिन इससे गांधी पर कोई फर्क नही पड़ता था। क्योंकि गांधी शुरुआत से संघर्ष का प्रमाण रहे हैं और गांधी का संघर्ष कभी आलोचनाओ से नही डरा। आज आलोचनाओ के बाद भी गांधी अस्तित्व में है और लोग गांधी की नीतियों पर चल रहे हैं। इससे यह तो साफ है कि गांधी हिसा पर प्रहार है आलोचनाओ का शान्त जवाब है और कभी न हारने वाले संघर्ष है। -
क्या भारत जोड़ो यात्रा ने राहुल को बना दिया है गम्भीर नेता
Politics -कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को एक महीना पूरा हो गया है। यात्रा को एक माह पूरा हुआ तो राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत की और इस यात्रा के कई पहलुओं पर अपनी राय रखी है। राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा, मेरे लिए मीडिया पर बहुत पैसा खर्च किया गया लोगो की काफी ऊर्जा बर्बाद हुई क्योंकि मेरी छवि को गलत तरीके से जनता के बीच प्रस्तुत करने का यह प्रयास था।[object Promise]उन्होंने आगे कहा, यह सब मशीनें है जो अपने वित्तीय लाभ के लिए काम कर रही है और अंत तक करती ही रहेगी। लेकिन मेरा सत्य अलग है। जो इसे गौर से देखेंगे उन्हें समझ आएगा कि मैं क्या हूँ और मैं किन मूल्यों पर खड़ा हूँ। मेरा सत्य हर वह व्यक्ति जनता है जो मुझे करीब से देख रहा है और इन मशीनों से थोड़ा दूर है।जाने क्या है भारत जोड़ो यात्रा का उद्देश्य-
[object Promise]राहुल गांधी ने 7 सितंबर को कन्याकुमारी से महत्वाकांक्षी भारत जोड़ो यात्रा शुरू की थी और 3750 किलोमीटर पैदल चलने के बाद वो 150 दिन बाद कश्मीर पहुंचेगे। इस यात्रा का उद्देश्य साफ है कि बीजेपी की राजनीति के चक्रव्यूह को तोड़ना और कांग्रेस को पुनः स्थापित करना है।भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से कही न कही कांग्रेस नेता राहुल गांधी खुद को जमीनी स्तर का नेता बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इस यात्रा के माध्यम से राहुल गांधी सीधे जनता से सम्पर्क साधा रहे हैं। इस यात्रा को एक महीना पूरा हो चुका है। अब भारत जोड़ो यात्रा कर्नाटक की यात्रा पर है।[object Promise]कही न कही भारत जोड़ो यात्रा को दक्षिण में जनता का खूब समर्थन प्राप्त हो रहा है और जनता राहुल गांधी के साथ खड़ी है। उम्मीद यह भी है कि कांग्रेस की यह यात्रा कांग्रेस के लिये संजीवनी बूटी साबित हो सकती है और कांग्रेस को आगमी चुनाव में जनता का अच्छा समर्थन मिल सकता है।कितनी बदली राहुल की छवि-
बीते दिनों में सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की कई तस्वीरें वायरल हुई। इन तस्वीरों में राहुल गांधी से साथ जनता का जनसैलाब देंखने को मिला। कभी राहुल गांधी अपनी मां के जूते का फीता बांधते दिखाई दिए तो कभी राहुल गांधी तेज बारिश में भाषण देते दिखे। कभी राहुल को बच्चो ने गले लगाया तो कभी एक मध्यम वर्ग के परिवार के साथ राहुल उनका दुख बांटते दिखे।यह सभी तस्वीरे इस ओर इशारा कर रही है कि साल 2019 में जब कांग्रेस को करारी हार मिली थी और राहुल ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। तब भले ही राहुल गांधी जनता के बीच लोकप्रिय नही रहे हो लेकिन आज भारत जोड़ो यात्रा ने कही न कही राहुल गांधी की छवि एक मजबूत लीडर के रूप में विकसित की है।[object Promise]राहुल की बरसात में भाषण वाली तस्वीर यह बता रही है कि राहुल गांधी ने अपना विश्वास अटल कर लिया है और अब वह जनता को जीतने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रहे हैं। कही न कही राहुल गांधी की छवि विकसित भी हुई है क्योंकि राहुल गांधी ने आत्मविश्वास ने कही न कही जनता को जीत लिया है और जनता के बीच भारत जोड़ो यात्रा ने राहुल गांधी को एक एक्टिव और मजबूत लीडर के रूप में विकसित किया है।[object Promise]राहुल गांधी ने अब अपने आप को एक गम्भीर राजनेता के तौर पर विकसित किया है। लोग राहुल गांधी के जज्बे से प्रभावित हुए है। अब राहुल गांधी हर बात पर प्रतिक्रिया न देकर सधे हुए तरीके से अपनी बात करते हैं और मुद्दों पर आय दिन एक अच्छे विपक्षी नेता की तरह सत्ताधारी दल को घेरते है।