Category: editorial

  • निर्भया के दोषियों को फांसी अपराधियों के लिए सुधर जाने का सबक

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    देश में महिलाओं को उपभोग की वस्तु मानकर उनकी अस्मिता से खिलवाड़ करने वालों सुधर जाओं, अब ऐसे अपराधियों को देश में फांसी लगने की शुरुआत बहुत जल्द होने वाली है। 16 दिसंबर 2012 की स्याह रात को जब लोग चैन से अपने घरों में सो रहे थे, तब देश का दिल राजधानी दिल्ली में निर्भया के साथ सड़क पर दौड़ती बस में रेप करके इंसानियत को शर्मसार करने वाली ऐसी हैवानियत को अंजाम दिया गया था, जिससे सारा देश एकजुट होकर बेहद आक्रोशित होकर बहन, बेटी व सभी महिलाओं की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतर गया था। देश में हर तरफ से केवल एक मांग उठ रही थी कि निर्भया के दोषियों को जल्द से जल्द फांसी दो। लेकिन हमारे यहाँ कछुए की चाल से चलने वाली कार्यपालिका व न्यायिक प्रक्रिया के चलते, वर्ष 2012 के निर्भया गैंगरेप के इस झकझोर देने वाले मामले के सभी दोषियों की फांसी पर सात साल की लम्बी जटिल कानूनी प्रक्रिया के बाद 7 जनवरी 2020 मंगलवार को पटियाला हाउस कोर्ट ने अपनी मोहर लगा दी है। कोर्ट ने मंगलवार को डेथ वॉरंट जारी करते हुए आदेश दिया है कि इन चारों दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी दे दी जाएगी। आखिरकार मंगलवार को सभी देशवासियों की 7 साल पुरानी मांग पर अदालत ने डेथ वॉरंट जारी करके अपनी अंतिम मोहर लगा दी। इस निर्णय के बाद जहां एकतरफ लोगों में खुशी है वहीं लम्बी जटिल कानूनी अदालती प्रक्रिया के प्रति आक्रोश भी व्याप्त है, लोगों का मानना है कि न्याय मिलने में देरी भी पीड़ित पक्ष के साथ बड़ा अन्याय है, इसलिए सरकार को पीड़ित को समय से न्याय दिलाने के लिए कारगर तंत्र धरातल पर विकसित करना चाहिए। देश का हर कानून पंसद व्यक्ति 2012 से ही एक-एक दिन गिनकर निर्भया कांड के दोषियों की फांसी का बेहद बेसब्री से इंतजार कर रहा था।
    अधिकांश न्यायप्रिय देशवासियों का मानना है कि निर्भया के दोषियों को फांसी के फंदे पर झूलता देखकर देश में भविष्य में महिलाओं के प्रति अपराध में आश्चर्यजनक रूप से कमी आयेगी, निर्भया कांड का यह निर्णय आने वाले समय में लोगों के लिए नजीर बनेगा और अपराधियों में मौत के फंदे पर झूलने का पल-पल खौफ पैदा करेगा। इस निर्णय पर अब तत्काल अमल होना इसलिए बेहद जरूरी है कि क्योंकि आज भी हमारे देश में बहन-बेटियों के प्रति लगातार इंसानियत को शर्मसार करने वाली हृदय विदारक घटनाओं का शर्मनाक दौर जारी है। आयेदिन कहीं ना कहीं कोई माता, बहन, बेटी इन इंसानियत के नाम पर कंलक, वहशी, राक्षस, दरिंदों की दरिंदगी व हैवानियत का शिकार बन जाती है। ये शर्मनाक हालात आज हमारे देश में महिलाओं की जानमाल की सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गये है। जिसको आने वाले समय में कम करने व रोकने में निर्भया कांड के दोषियों की फांसी मदद अवश्य करेगी।
    वैसे तो हमारे देश में कानून के कम होते सम्मान व भय के चलते हर तरह के अपराध चरम पर हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से जिस तरह महिलाओं के प्रति हैवानियत के मामलों में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई है वह चिंताजनक है। देश की पुलिस की कार्यप्रणाली और निचली अदालत से लेकर सर्वोच्च अदालत तक की लम्बी व बेहद  जटिल न्यायिक प्रक्रिया के चलते अपराधियों के हौसले बुलंद व पीड़ित के हौसले पस्त हो जाते हैं, जिसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है। आज की मौजूदा परिस्थितियों में देखें तो देश की राजधानी सहित अधिकांश राज्यों की स्थिति यह है कि वहां अपराध चरम पर हैं अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। सभी राज्यों में महिलाओं के प्रति अपराध अपने चरम पर हैं। सभी जगह भोलीभाली जनता अपराध व अपराधियों से त्रस्त है, सिस्टम में बैठे अपने आकाओं की कृपा से व भ्रष्ट सिस्टम के आशिर्वाद से अपराधी बेखौफ कानून को अपनी जेब में रखकर अपराध करने में मस्त हैं। लेकिन देश में महिलाओं के प्रति जिस तरह अपराध बढ़े हैं वह स्थिति बेहद चिंताजनक है। उसके लिए कहीं ना कहीं हमारे समाज में लोगों के कम होते संस्कार, आज के व्यवसायिक दौर में खत्म होती नैतिकता, आपस में एकदूसरे की मदद ना करने का हम सभी का भाव भी जिम्मेदार हैं। अफसोस की बात है कि यह स्थिति संस्कारों के अभाव में उस देश में उत्पन्न हो गयी है जिस देश की संस्कृति में स्त्री को सर्वोच्च स्थान देकर पूजा जाता है, जहां कदम-कदम पर माता, बहन व बेटियों के सम्मान की खातिर प्राण न्यौछावर करना सिखाया जाता है।
    खैर निर्भया के मसले पर अब देशवासियों का इंतज़ार खत्म होने वाला है देर से ही सही अब वह वक्त आ गया है जब निर्भया रेप कांड के दोषियों को फंसी के फंदे पर झुलाकर निर्भया को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की जायेगी। अब इस तरह के अन्य मामलों में भी देशवासियों को उम्मीद बनी है कि यह मामला भविष्य में नजीर बनकर दोषियों को फांसी दिलायेगा और महिलाओं के प्रति होने वाली हैवानियत में कमी लायेगा। केंद्र व राज्य सरकारों के तंत्र को भी अपराधियों में कानून का भय व सम्मान पैदा करने के लिए इस तरह के सभी मामलों में फास्टट्रैक कोर्ट में चलाकर अपराधी को जल्द से जल्द सख्त सजा देकर समाज के सामने नजीर पेश करनी होगी, तब ही इस हालात में सुधार हो पायेगा और देश में मातृशक्ति सुरक्षित रह पायेंगी और फिर किसी निर्भया के परिवार के साथ न्याय मिलने में होने वाली देरी का अन्याय नहीं होगा।

  • आपदा से जूझ रहे देश पर बहुत भारी पड़ेगी लोगों की नादानी और ओछी राजनीति !

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    हमारे देश का सम्पूर्ण सिस्टम आज एक घातक वायरस कोरोना के चलते उत्पन्न बेहद गंभीर परिस्थितियों से जंग लड़ रहा है। हमारे देश के नीतिनिर्माताओं और सिस्टम के सामने आज बहुत बड़े चुनौती पूर्ण हालात बन गये है कि कोरोना वायरस का संक्रमण देश में फैलने से किस प्रकार से रोककर उसको जल्द से जल्द देश से खत्म किया जाये। एक वायरस की बेहद तेजी से फैलने वाली प्रवृत्ति के चलते, लॉकडाउन के बाद भी सरकार के दिये निर्देशों का सही ढंग से पालन नहीं करने के चलते, कुछ नासमझ जमात के लोगों की भंयकर लापरवाही से आज हम बेहद विकट समस्या वाली स्थिति से अब घिरते जा रहे हैं। वहीं कभी एकजुट ना रहने की कसम खा चुके भारत के ना सुधरने वाले कुछ राजनेताओं ने आपदा के समय में भी ओछी राजनीति करनी शुरू कर दी है। उन्होंने लोगों की मदद ना करके इस समय भी देशवासियों को बरगलाकर अलग-अलग राज्य का निवासी बनाकर हिन्दू-मुसलमान में बांटना शुरू कर दिया है।
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    आपदा से जूझ रहे देश पर बहुत भारी पड़ेगी लोगों की नादानी और ओछी राजनीति !
    देश में आपदा के चलते उत्पन्न बेहद तनावपूर्ण भरे माहौल की हालात में भी पिछले कई दिनों से कुछ राजनेताओं के द्वारा आरोप-प्रत्यारोप की ओछी शर्मनाक राजनीति की जा रही है, ये चंद राजनेता बड़ी ही चतुराई के साथ अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़कर मौजूदा समय में उत्पन्न हालात के लिए एक-दूसरे दल के राजनेताओं व राज्यों को जिम्मेदार ठहरा कर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर रहे हैं, जिसको अब जल्द से जल्द समय रहते ही देश के आम-जनमानस को देशहित में समझना होगा। जिस भयावह कोरोना वायरस संक्रमण की आपदा के समय में देश के राजनेताओं को इंसान व इंसानियत को जिंदा रखने के लिए अपने-अपने राजनीतिक दलों से उपर उठाकर देश व देशवासियों के हित में एकजुट होकर लोगों की मदद करके सभी के लिए नज़ीर बनना था, लेकिन उस विकट समय में कुछ नादान लोगों को छोड़कर देश के अधिकांश समझदार निवासी तो एकजुट हैं, लेकिन अफसोस इस भयंकर महामारी के समय भी देश के कुछ राजनेता एकजुट नहीं होकर, आपदा में भी अपने राजनीतिक हित तलाशने से बाज नहीं आ रहे हैं, हालांकि देश के कुछ बेहद अच्छे इंसान राजनेताओं के द्वारा की जाने वाली हर तरह से लोगों के मदद के अपवाद भी हमारे सामने मौजूद हैं, वहीं दूसरी तरफ आपदा के समय में भी निस्वार्थ भाव से लोगों की मदद करने के लिए कुछ राजनेता तैयार नहीं है, कुछ नेता तो अपनी सरकारी निधि से दिये गये फंड का ऐसे ढ़िढोरा पीट रहे हैं जैसे उन्होंने लोगों पर बहुत बड़ा एहसान कर दिया है, यहां भी केवल कुछ अपवादों को छोड़ दे तो किसी भी राजनेता ने अपने निजी खाते से शायद ही सरकार या लोगों की कोई मदद की हो।
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    आपदा से जूझ रहे देश पर बहुत भारी पड़ेगी लोगों की नादानी और ओछी राजनीति !
    मानव सभ्यता पर आये भयानक संकट के समय में भी वो देश के लोगों को एकजुट रखने की जगह हिन्दू-मुसलमान करने में लगे हैं, अपने राजनीतिक स्वार्थों को पूरा करने के लिए आपदा के समय में भी वोट बैंक के अनुसार लोगों को अलग-अलग बाट़ रहे हैं, वो भयंकर आपदा में भी लोगों को हालात की गलत जानकारी देकर बरगलाकर उनकों गलत कदम उठाने के लिए उकसा रहे हैं, जो देश की मौजूदा परिस्थितियों में देश व देशवासियों के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। यह हमारे देश के चंद नेताओं की अपने कार्य व समाज की जिम्मेदारी के प्रति घोर लापरवाही को उजागर करता है और उनका देश की जनता के प्रति गैरजिम्मेदाराना शर्मनाक रवैये वाले व्यवहार को दर्शाता है।
    लेकिन अभी तक हमारे देशवासियों पर ईश्वर की विशेष कृपा के चलते और अधिकांश लोगों के द्वारा बरती जा रही कोरोना वायरस से बचाव के लिए पूर्ण सुरक्षा व सावधानी के चलते हालात नियंत्रण में हैं। सरकार के द्वारा समय रहते लिए गये लॉकडाउन के निर्णय और अधिकांश जनता का उस पर खुद के द्वारा की गयी सख्ती व सही ढंग से अमल करने के चलते, देश में अभी तक तो इक्कीस दिन के चल रहे लॉकडाउन के दौरान हालात सरकार के पूर्ण नियंत्रण में हैं। लेकिन देश में भयानक आपदा के समय में भी हमारे कुछ राजनेताओं को चैन से नींद कहाँ है, उन्होंने पिछले कई दिनों से देश में हो रहे बड़े पैमाने पर प्रवासी लोगों के पलायन के नाम पर आरोप-प्रत्यारोप की ओछी राजनीति करना शुरू कर दी है।
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    आपदा से जूझ रहे देश पर बहुत भारी पड़ेगी लोगों की नादानी और ओछी राजनीति !
    जबकि प्रवासी लोगों के द्वारा किया जा रहा यह पलायन कुछ जरूरतमंद मजबूर लोगों को छोड़कर बाकी का कहीं से भी उचित नहीं है, पलायन होने वाली राज्यों की सरकारों को समय रहते लोगों को समझाबुझाकर व उनकी जरूरत की मदद करके उसको रोकना चाहिए था, लेकिन कुछ नेताओं के द्वारा चतुराई के साथ अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की नीति के चलते उन्होंने पलायन को रोकने के लिए कोई प्रभावी ठोस कदम नहीं उठाया, बल्कि लोगों को पलायन के लिए उकसाया। वहीं इन कुछ लोगों के बेवजह शहरों से गांवों में पलायन करने कि जिद्द ने ना जाने देश के कितने लोगों में संक्रमण फैलाने के खतरे को बढ़ा दिया है। इन कुछ पलायन करने वाले लोगों ने आम-जनमानस के साथ-साथ शासन-प्रशासन के लिए बहुत बड़ा सिरदर्द पैदा करके पूर्ण नियंत्रण में अच्छे से चल रही लॉकडाउन की हालात को बेवजह बेहद तनावपूर्ण बना दिया है।
    कुछ लापरवाह नासमझ व्यक्तियों की गलतियों ने आपदा के समय में वास्तव में संकट में फंसे मजबूर व लाचर लोगों, परिंदों व बेजुबान जानवरों की मदद के अधिकांश अवसरों को छीन लिया है।
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    आपदा से जूझ रहे देश पर बहुत भारी पड़ेगी लोगों की नादानी और ओछी राजनीति !

    लॉकडाउन के समय में देश में चंद नादान लोगों व चंद राजनेताओं के द्वारा उकसाने वाली की गयी ओछी हरकत से उत्पन्न किये गए अफरातफरी की हालातों में, यह सोचकर ही रुह कांप जाती है कि मजबूर, जरूरतमंद, दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा वाले, फेरीवाले, भिखारी, विक्षिप्त, अन्य बेघर लोगों, परिंदों व बेजुबान जानवरों का क्या हाल हुआ होगा, किस तरह उन्होंने अपना पेट भरा होगा क्या अभी तक किसी भी राजनेता ने भी इसकी कल्पना की है?  क्या कोरोना आपदा के चलते संकट के इस माहौल के समय में भूख-प्यास से जूझ रहे इन सभी के पास समय से वास्तव में ईमानदारी से मदद पहुंच पायी होगी? इन बेचारों की स्थिति केवल सर्वशक्तिमान ईश्वर ही जानता है या फिर मदद में लगा हमारा सिस्टम जानता है। लेकिन जिसने जो किया उसमें ना उलझकर हम सभी को एक जिम्मेदार नागरिक बनते हुए, अपने आसपास इस तरह के हालात में फंसे मजबूर व लाचार इंसान और जीव-जंतुओं पर उसकी मजबूरी को हावी नहीं होने देना है समय रहते ही सभी के लिए भोजन पानी की व्यवस्था करनी है या प्रशासन से करवानी है। आपदा के समय बनें इस बदहाल अव्यवस्थित हालात के लिए जिम्मेदार कुछ राजनेताओं के द्वारा इस समय भी राजनीति चमकाने का काम जरूर शुरू कर दिया गया है और वो भयावह स्थिति की जिम्मेदारी के लिए आपदा के समय में भी एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
    कोरोना महामारी की हालात में लोगों को ध्यान रखना होगा कि वो केन्द्र सरकार व राज्य सरकार के दिये गये दिशानिर्देशों का  सही ढंग से पालन करें। लेकिन कुछ लोग है कि किसी भी तरह की हालात में भी सुधारने का नाम ही नहीं लेते है, सबसे शर्मनाक बात यह है कि भयंकर आपदा के समय में भी देश में हिन्दू-मुसलमान करना जारी है, धर्म की आड़ लेकर देश में चोरी-छुपे लोगों का इकट्ठा होना अभी भी जारी है, जबकि सरकार बार-बार चेता रही है कि सोशल डिस्टेंसिंग का हर हाल में पालन करें, वरना लोगों को बहुत बड़ा खामियाजा उठाना पड़ सकता है, जिसका नमूना देश की राजधानी दिल्ली में देखने को मिला है, जहां निजामुद्दीन में तब्लीगी-ए-जमात के कार्यक्रम में पिछले कुछ दिनों में हजारों लोग आए थे। इनमें देश के 19 अलग-अलग राज्यों के निवासियों के साथ-साथ बंग्लादेश, चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड आदि बहुत सारे देशों के विदेशी लोग भी शामिल थे।

     

    सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा घोषित 22 मार्च के लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी यहां पर लगभग 2 हजार से ज्यादा लोग ठहरे हुए थे, देश की राजधानी दिल्ली के खूफिया तंत्र की खस्ताहाल हालात देखिए कि उनकी नाक के नीचे लोगों के इकट्ठा होने का सारा खेल चलता रहा और वो हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहे। इस मामले की सूचना अंडमान निकोबार प्रशासन ने जमात के कार्यक्रम से वापस आये 2 लोगों के कोरोना से संक्रमित पाये जाने पर केंद्र सरकार को तुरंत दे दी थी, लेकिन देश में वीवीआईपी का अघोषित दर्जा प्राप्त धर्मों के तथाकथित ठेकेदारों व उनके कार्यक्रमों पर सिस्टम के द्वारा कोई कार्यवाही करने की आसानी से हिम्मत नहीं होती है, आपदा के समय में मरकज के इस ज्वंलत मसले पर 24 मार्च से 29 मार्च तक सरकारों की तेरी ठोपी उसके सर करने की नीयत रही और केवल इस मसले पर कागजों में खानापूर्ति की जाती रही, लेकिन 30 मार्च को जब बात मीडिया के संज्ञान में आयी, तब तक इकट्ठा लोगों की जमात में कोरोना संक्रमित लोगों ने अन्य को गंभीर बिमारी बाट़ दी। इसके बाद ही जमात पर कानून कार्यवाही शुरू हुई है।

     

    जिसके चलते जमात में शामिल लोगों के कोरोना संक्रमित होने की आशंका के चलते संदिग्धों को जांच के लिए दिल्ली के अस्पताल भेजा गया है, जहां बहुत सारे लोगों की जाचं रिपोर्ट में कोरोना संक्रमण पाया गया है। सरकार ने यहां इकट्ठा लोगों को निकाला कर क्वारंटाइन में रखने के लिए भेजा दिया। वहीं दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार व उसके मंत्री मीडिया के सामने कर्ताधर्ताओं पर सख्त कार्यवाही करने के लिए बोल रहे हैं, इस मसले पर आयोजकों पर एफआईआर दर्ज हो गयी है। लेकिन आपदा के समय में राजनीति के गंदे खेल के चलते और चंद नेताओं की कृपा से इस मसले पर सख्त कार्यवाही की जगह राजनीति शुरू हो गयी है। हालांकि पुलिस ने क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर निजामुद्दीन के पूरे इलाके से इस मरकज वाली इमारत के एरिया को सील करके अलग-थलग कर दिया है।

     

    अब सरकार के सामने बहुत बड़ी चुनौती है कि वो जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए 19 राज्यों के लोगों की जल्द से जल्द पहचान करके संक्रमण को लोगों मे फैलने से कैसे रोकें, इसके लिए सभी राज्यों से संपर्क करके लोगों की पहचान के कार्य को युद्ध स्तर पर अंजाम दिया जा रहा है, जिसमें राज्यों को काफी सफलता हाथ लगी है। अब चाहे कुछ भी होता रहे लेकिन यह तय है कि इन लोगों की लापरवाही व नादानी भरी हरकत ने लॉकडाउन के उद्देश्य को पलीता जरूर लगा दिया है। वहीं इस जमात के कार्यक्रम में शामिल लोगों के संदर्भ में अलग-अलग राज्यों से आ रही जानकारी के अनुसार सरकार ने बताया कि इस आयोजन में हिस्सा लेनेे वाले 9 लोगों की कोरोना संक्रमण के चलते मौत हो गई है, जो देश व समाज के हित में बेहद भयावह खबर है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह की जमात के इस आयोजन में शामिल लोग ने सरकार के द्वारा बनाये गये बचाव के नियमों का पालन ना करके व एडवाईजरी की अनेदखी करके, ये लोग बेखौफ होकर देश के अलग-अलग भागों में मस्जिदों में अन्य लोगों से मिलते घूम रहे है, इन चंद लोगों की यह भंयकर गलती ना जाने कितने लोगों की अनमोल जिंदगी पर भारी पड़ेगी यह तो आने वाला समय ही तय करेगा। लेकिन कुछ राजनेताओं व सोशलमीडिया के इंसान व इंसानियत के दुश्मन वीरों की कृपा से सारे मसले पर हिन्दू-मुसलमान का रंग जरूर चढ़ा दिया गया है।
    कोरोना वायरस की चपेट में आये विश्व के साधन संपन्न सुपरपावर ताकतवर देशों का वायरस के संक्रमण के सामने सरेंडर करना और उनकी भयानक स्थिति से आज हम सभी लोगों को और हमारी सरकार को समय रहते सीखना होगा, क्योंकि हमारे 130 करोड़ लोगों की जनसंख्या वाले देश में कुछ लोगों की नादानी व कुछ नेताओं की कृपा से अब जो स्थिति दिखाई दे रही है, उससे यह साफ होने लगा है कि लोगों की नादानी, राजनेताओं की स्वार्थ के वशीभूत होकर की गयी ओछी राजनीति, भयंकर आपदा से जूझ रहे देश व देशवासियों पर अब बहुत भारी पड़ सकती है। इसलिए अब हम सभी जागरूक देशवासियों को यह ध्यान रखना होगा कि कुछ नादान लोगों के द्वारा की गयी लॉकडाउन की अवेहलना के चलते, कोरोना वायरस का संक्रमण देश में बड़े स्तर पर किसी भी हालात में ना फैल पाये।
    क्योंकि उस भयावह स्थिति में कोरोना जैसी भयंकर महामारी से लड़ने के लिए हमारे पास विकसित देशों की तरह भरपूर संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। बल्कि हमारे देश में उच्च गुणवत्ता पूर्ण चिकित्सा से जुड़े हुए संसाधनों व चिकित्सकों का तो सामान्य दिनों में भी अभाव रहता है। हमारे देश में आबादी के अनुपात में जाचं के लिए ना ही तो कोरोना की जांच में इस्तेमाल होने वाली किट मौजूद हैं, ना ही मरीजों के बचाव के लिए प्रर्याप्त संख्या में डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ मौजूद हैं, ना मरीजों के लिए जरूरत के मुताबिक आइसोलेशन वार्ड मौजूद हैं, ना ही वेंटिलेटर व ना ही अन्य जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरण मौजूद हैं।

     

    सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि  मरीजों के उपचार में और सिस्टम में व्यवस्था बनाने में लगे हुए सभी जाबांज़ कोरोना वारियर्स की सुरक्षा के लिए जरूरी वस्तुओं की आज आपदा के समय में भी भारी किल्लत है, इलाज में लगे डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ की संक्रमण से सुरक्षा लिए पीपीई सूट, एन 95 मास्क व अन्य सुरक्षा के लिए जरुरी वस्तुओं तक की भारी किल्लत है, जो स्थिति इन कोरोना वारियर्स की कार्य करने की क्षमता व कार्यशैली को प्रभावित कर सकती है, हालांकि संतोष की बात यह है कि हमारी सरकार ने अन्य देशों की स्थिति से सबक लेकर समय रहते ही इन सभी के लिए युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू कर रखीं है। वहीं इस आपदा से लड़ने के जज्बे को देखें तो अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बलबूते आज दक्षिण कोरिया जैसा दुनिया का एक छोटा-सा देश के लाखों लोगों की कोरोना जांच कर चुका है, वह हर जगह को सेनेटाइज करवा कर संक्रमण को बहुत तेजी से नियंत्रित कर रहा है। जबकि दूसरी तरफ हमारे देश में संसाधनों की भारी कमी व सिस्टम में शामिल कुछ लोगों की अपनी जिम्मेदारी के प्रति दृढ़ इच्छाशक्ति के अभाव के चलते हमारे देश के बड़े-बड़े शहर तक भी समय से सेनेटाइज नहीं हो पा रहे हैं, तो कस्बों व गांव का क्या हाल होगा आप खुद सोच सकते हैं, हमारे देश में कोरोना के संभावित मरीजों की जांच भी बहुत कम संख्या में हो पा रही हैं।

     

    इस तरह की आपात स्थिति में सबसे जरूरी कदम यह है कि देश का प्रत्येक नागरिक व राजनेता अपनी जिम्मेदारी को देशहित में समय रहते समझें और उसका सही ढंग से पालन करें। इक्कीस दिनों के चल रहे लॉकडाउन के पीरियड़ के समय में हम सभी देशवासियों को यह ध्यान रखना है कि कोरोना वायरस के भयावह प्रकोप से बचने के लिए संयम, संकल्प व दृढ़ इच्छाशक्ति से केंद्र व राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे हमारे बचाव संबंधी कदमों और जीवन रक्षक उपायों की हम लोग जरा भी अवहेलना नहीं करेंगे, उनका ध्यान से सावधानी पूर्वक पूर्ण सुरक्षा बरतते हुए अक्षरशः पालन करेंगे। कोरोना आपदा के समय में यही हम सभी देशवासियों की सबसे बड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिसका हम सभी लोग अपने प्यारे देश व देशवासियों की खातिर दिल से व पूर्ण जिम्मेदारी और ईमानदारी से पालन करेंगे और चंद जाहिल लोगों की तरह कोई नादानी नहीं करेंगे, यही हमारा आपदा से जूझ रहे देश के लिए सबसे बड़ा सहयोग व अनमोल योगदान होगा।

  • सरदार पटेल की प्रतिमा की छत्रछाया में हुए सम्मेलन से निकले कई अहम संदेश

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    अहमदाबाद, गुजरात के केवड़िया में विश्वविख्यात सरदार पटेल की प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिटी की छत्रछाया में हुए भारत के पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में इस बार कई अहम संदेश निकले हैं। अपने शताब्दी वर्ष में बेहद अलग अंदाज में 25 और 26 नवंबर को हुए इस सम्मेलन में पहली बार राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति से लेकर तमाम दिग्गजों की मौजूदगी रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वर्चुअल तरीके से इसके समापन सत्र को संबोधित किया। संविधान दिवस बीच में पड़ने के नाते यह और विशेष बन गया, लिहाजा इसमें सशक्त लोकतंत्र के लिए विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का आदर्श समन्वय को चर्चा का मुख्य विषय रखा गया था।

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    भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। सदनों को लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है। इसकी गरिमा बनाए रखने से लेकर पीठासीन अधिकारियों के जिम्मे तमाम अहम भूमिकाएं होती हैं।

    भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। सदनों को लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है। इसकी गरिमा बनाए रखने से लेकर पीठासीन अधिकारियों के जिम्मे तमाम अहम भूमिकाएं होती हैं। वे सदस्यों के अधिकारों के संरक्षक और अभिभावक होते हैं। इनका सबसे बड़ा संगठन विधायी निकायों के पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन है जिसके पदेन अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष होते हैं। इसके सम्मेलनों में उपलब्धियों, नई योजनाओं, कार्यसंचालन नियमों में बदलाव समेत विधायी मसलों पर अहम चर्चाएं होती हैं।

    भारत में संसदीय लोकतंत्र में विधायी निकायों के पीठासीन अधिकारियों का बहुत महत्व है। उनमें स्वस्थ परंपराओं और परिपाटियों के विकास के लिए पीठासीन अधिकारियों का पहला सम्मेलन 14 सितंबर 1921 को शिमला में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली के तत्कालीन अध्यक्ष सर फ्रेडरिक वाइट के नेतृत्व में हुआ। बाद में यह बेहद अहम और प्रतिष्ठित संगठन बना।

    वर्ष 1926 से यह अंग्रेजों द्वारा मनोनीत अध्यक्षों की जगह निर्वाचित अध्यक्षों का सम्मेलन बन गया, क्योंकि विट्ठल भाई पटेल 1925 में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली के पहले भारतीय निर्वाचित अध्यक्ष बन गए थे। इसकी अध्यक्षता उनके हाथों में आ गई। हालांकि 1950 तक यह सम्मेलन दिल्ली या शिमला में ही होता था। वर्ष 1951 में जीवी मावलंकर की पहल पर इसे अन्य राज्यों में करने का फैसला हुआ और 1951 में तिरुअनंतपुरम में इसका आयोजन किया गया। इसके बाद इसके स्वरूप में काफी बदलाव आया।

    केवड़िया में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए संवाद को लोकतंत्र के लिए सर्वश्रेष्ठ माध्यम बताया और कहा कि यही विचार-विमर्श को विवाद में परिणत नहीं होने देता। उनका विचार था कि संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सामंजस्य, सहयोग और सार्थक विमर्श जरूरी है। वहीं पीठासीन अधिकारियों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे सदन में जन प्रतिनिधियों को स्वस्थ बहस के लिए अनुकूल परिवेश प्रदान करें।

    वैसे उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने यहां चर्चा में नया मोड़ दिया कि पटाखों पर अदालत के फैसले और जजों की नियुक्ति में कार्यपालिका को भूमिका देने से इन्कार करने जैसे फैसलों से लगता है कि न्यायपालिका का हस्तक्षेप बढ़ा है। कई न्यायिक फैसले किए गए जिनमें हस्तक्षेप का मामला लगता है। आजादी के बाद बेशक सुप्रीम कोर्ट और कई हाई कोर्ट ने ऐसे फैसले दिए जिनका सामाजिक-आíथक मामलों में दूरगामी असर हुआ। लेकिन कई बार विधायिका ने भी लक्ष्मण रेखा लांघी है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में कहा कि कोरोना संकट जैसे विषम हालात में 130 करोड़ से अधिक भारतीयों ने जिस परिपक्वता का परिचय दिया, उसकी एक बड़ी वजह उनके द्वारा संविधान के तीनों अंगों पर पूर्ण विश्वास है। संविधान में ही उसके तीनों अंगों की भूमिका से लेकर मर्यादा तक सब कुछ वíणत है। तीनों संस्थाओं में आपसी विश्वास को बढ़ाने के लिए निरंतर काम हुआ है, इस नाते हमें संविधान से जो ताकत मिली है, वह हर मुश्किल कार्य को आसान बना देती है। हर नागरिक का आत्मसम्मान व आत्मविश्वास बढ़े यह संविधान की भी अपेक्षा है। लेकिन यह तभी संभव है, जब हम अपने कर्तव्यों को अपने अधिकारों का स्नोत मानते हुए उनको सर्वोच्च प्राथमिकता दें। हमारे कानूनों की भाषा इतनी सरल होनी चाहिए कि आम आदमी उसे आसानी से समझ ले।

    इस सम्मेलन के प्रमुख और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समापन भाषण में इस बात पर संतोष जताया कि विषम परिस्थितियों के बावजूद इस सम्मेलन में 20 विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारी उपस्थित रहे। सम्मेलन में सभी का यह मत था कि संविधान की मूल भावना के अनुसार लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को अपनी-अपनी सीमाओं के अंदर सहयोग, सामंजस्य और समन्वय की भावना से काम करना चाहिए। पीठासीन अधिकारियों ने महसूस किया कि राज्यों के विधानमंडलों को वित्तीय अधिकार देने के विषय पर सभी से संवाद होना चाहिए।

    हालांकि हमारी संसदीय प्रणाली ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली के अनुसरण में बनी हैं। लेकिन बीते दशको में तमाम विधानमंडलों ने अपनी जरूरतों के हिसाब से तमाम अभिनव प्रयोग किए हैं और नए विचारों को आत्मसात किया है। समय की मांग के लिहाज से खुद को बदला है, लेकिन व्यवधानों से विधायिका की छवि आहत हुई है। सदन सुचारु रूप से चलें और बैठकों की संख्या बढ़े तो बहुत से सवालों का हल हो सकता है।

    गुजरात में आयोजित पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन देश में विधायी निकायों के लिए एक मार्गदर्शक साबित हो सकता है। इस मंच की मदद से कई बेहतर प्रथाओं की शुरुआत हुई है।

  • भ्रष्टाचार के जंजाल से कितना मुक्त हुआ भारत 

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    भ्रष्टाचार एक अहम मुद्दा हैं जो हर एक देश को कमज़ोर बना देता हैं। जिस देश में भ्रष्टाचार होता हैं वो देश कभी भी तरक्की के रास्ते में अग्रसर नहीं हो पाता हैं। इसका अगर सीधा मतलब समझ ले तो भ्रष्टाचार आपके देश की अर्थव्यवस्था, नौकरियाँ और इज़्ज़त को भारी नुकसान पहुँचाता हैं। इसलिए हर देश चाहता हैं कि वो भ्रष्टाचार मुक्त देश बने और अपनी तरक़्क़ी से दुनिया को दिखा सके कि हमारा देश एक शक्तिशाली देश हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ाने के लिए भारत देश भी जी तोड़ मेहनत कर रहा हैं क्योंकि एक समय यहाँ हालात ऐसी थे कि कोई भी काम हो चाहे सरकारी या निजी संस्थाएं हों हर जगह बस भ्रष्टाचार नाम की गूँज सुनाई देती थी। हालात आज भी ज्यादा अच्छे नहीं हुए हैं पर फिर भी भारत जैसे प्रभावशाली देश ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत में काफी अच्छे कदम उठाएं हैं।

    हम सबको पता हैं भारत दुनिया का सबसे बड़ा और शक्तिशाली देश हैं हर जगह भारतीय बस्ते हैं और पूरी दुनिया भारत के लोगों की काबिलियत की मुरीद हैं। यहाँ scientist, इंजीनियर, astronaut, मजबूत defense, doctors, और हर तरह के ऐसे होनहार काबिल लोग मिलेंगे जिन्होंने विश्वभर में अपने भारत देश का नाम रोशन किया हैं। पर जब भारत देश पे उंगलियाँ उठती थी कि यहाँ तो भारत में भ्रष्टाचार से पूरा देश लिप्त हैं तो 130 करोड़ जनसंख्या के सीने पे खंजर जैसा अभाव पड़ता था। हर जगह एक नकारात्मक इमेज बनती जा रही थी जिसको मिटाने के लिए कुछ मजबूत और ठोस कदम उठाने थे। 

    2013 माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जब सत्ता संभाली तो देश में ख़ुशियों की लहर से उठ गई मानों हर जगह बस दीवाली ही हो गयी हो, क्योंकि उन्होंने एक दृढ़ संकल्प लिया था जिसके तहत उनको पूरे भारत को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना हैं। यह काम काफी मुश्किल था पर फिर भी इसको मोदी जी की सरकार ने बखूबी किया। नोट बंदी, कोल ब्लॉक, स्पेक्ट्रम, और अन्य संस्थाओं की नीलामी में पारदर्शिता और एक निति प्रणाली अपनाई गई। यहीं नहीं स्विस बैंक में भारत के कुछ गलत भ्रष्टाचारी खातों को बंद करवा के मोदी जी की सरकार ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत का एक नया अध्याय जोड़ने का कार्य किया। भ्रष्टाचार शब्द कोई रातों रात या सरकारी संस्थाओं से नहीं उत्पन्न हुआ यह हमारे दिए गए हुए उन कार्यो का ही नतीजा हैं जिसके लिए हमने रिश्वत या घूस देकर करवाने की कोशिश की। यह भी एक सच्च हैं कि भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनने के लिए हमारी मेहनत सरकार से काफी ज्यादा हैं क्योंकि हम ही आसपास ऐसे घूसखोरों को पनाह देते हैं और जब कोई रिश्वत लेता हैं तो उसको नज़रअंदाज़ करके भूल जाते हैं रिश्वत देना और रिश्वत लेना दोनों ही कानूनी जुर्म हैं। 

    यह बात सच्च हैं की कीचड़ एक दिन में साफ़ नहीं होता और जब तक हम अंदर से पूरी तरह ईमानदारी का रास्ता नहीं अपनाएंगे तबतक भ्रष्टाचार की दल दल में हमेशा ही धँसते रहेंगे। कोई भी सरकार तब तक कोई कार्य में सफल नही हो सकती जबतक जनता का पूर्ण समर्थन ना मिल जाए और यह तो भ्रष्टाचार हैं इसमें तो हम्हे सबसे पहले खुद देखना हैं कि अगर कोई काम जरूरी हैं तो उसको पूरा करने के लिए अगर कोई आपसे घूस या फिर रिश्वत माँग रहा हैं तो उस इंसान के खिलाफ कार्यवाही की जाए ताकि वो दोबारा ऐसी गलती ना करे। मोदी जी ने हमेशा यह कहाँ हैं और यह नियम भी लागू किया हैं कि अगर कोई रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाये तो उसपर कड़ी कार्यवाही हो परंतु फिर भी हम अपनी ही जड़ो को खोखला कर रहे हैं क्योंकि भारत में अगर भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ तो हम कभी भी विकसित देश नहीं बन पाएंगे।

     

    भारत सरकार ने सारे सरकारी कामों में जैसे की pan कार्ड बनाना, आधार कार्ड बनाना, बैंक अकाउंट खुलवाना, पुलिस complaint करवाना, इत्यादि हर कामों में digital उपकरणों या फिर हेल्पलाइन नंबर की सुविधा उपलब्ध करवाई हैं फिर भी आप इन कामो के लिए अगर घूस या रिश्वत देंगे तो आप भी गुनाहगार होंगे क्योंकि जो रिश्वत माँगेगा वो तो नहीं बचेगा पर आप खुद को भी फसा लोगे। इसलिए सरकार का साथ देकर ऐसे घूसखोरों को सख्त से सख्त सज़ा दिलवाने का कार्य करे और हमारे देश को भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाए।

    यह हमारी मेहनत की कमाई है ना जाने कितने लोग खून पसीना एक करके रात दिन मेहनत करके चंद रुपये कमा पाते हैं पर जब कोई इन्हीं पैसों से रिश्वत ले कर उसी पोस्ट पे रह कर आपसे अमीर बन जाता हैं तो शायद वो दर्द हम शब्दों में बयान नहीं कर सकते। वो किसी प्रकार की ईर्षा नहीं होती वो आपका मनोबल गिरा देती हैं कि हम मेहनत करते हैं तब जाके दो वक़्त कि रोटी कमा पाते हैं और कई लोग रिश्वत के पैसों से अमीर बन गए हैं। यही नहीं भ्रष्टाचार करते वक़्त आप कई ज़िंदगी बर्बाद करते हैं एक जो रिश्वत लेकर घूसखोरों को बढ़ावा देना, खुद को अपनी नज़रों में गिरा देना और आने वाली नई पीढ़ी को अंधकार में धकेल देना।

    मैं समस्त देशवासियों से बस यहीं कहना चाहूँगा कि भारत सरकार का साथ दे और हमारे देश को भ्रष्टाचार मुक्त भारत बना के नई ऊंचाई तक ले जाए, यह आत्मनिर्भर भारत हैं इसने गरीबी, ग़ुलामी, नफ़रत सब झेली हैं और इन सब चीज़ो से पूरी निष्ठा और ईमानदारी से मुकाबला किया हैं तो इसी तरह भ्रष्टाचार जैसे गंदे वायरस को हमारे देश से निकाल फेंकने में भारत सरकार की मदद करे और अपने आसपास होने वाले गलत कामों की रिपोर्ट दर्ज़ करवाए। अगर कोई रिश्वत या घूस ले रहा हो आपसे या आपके किसी अपने से या कोई भी अनजान व्यक्ति से तुरंत अपनी आवाज़ बुलंद करके उनके खिलाफी कार्यवाही करे।

    यह देश हमारा है यहाँ की हर एक फ़िज़ा में सिर्फ अमन, शांति और ईमानदारी होनी चाहिए तभी हमारा देश नए ज़माने का आत्मनिर्भर भारत बन सकेगा। जब तक हमारे अंदर देश के प्रति यह भावना नहीं होगी की भ्रष्टाचार कितनी बुरी बीमारी हैं तब तक हम भ्रष्टाचार मुक्त भारत नहीं बना पाएंगे तो आज ही सरकार की मुहिम के साथ जुड़े और भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाएं… सावधान रहे अपने आसपास सफाई रखे और भारत सरकार की भ्रष्टाचार मुक्त वाली मुहिम पे उनका भरपूर साथ दे।

  • बेमिसाल सिंह सिस्टर्स(सिंहनी बहने)

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    जौनपुर शहर के बगल एक गांव में जाने के लिए आज तक कि ओवी वैन रास्ते में किसी से पूछती हैं।
    —-भैया, उन पांच शेरिनियो का गांव कौन सा है, जो बास्केटबॉल खेलती हैं?
    —-अरे अहमदपुर है, अहमदपुर । सीधे जाइये वो तो जॉनपुर की पांच पांडवी हैं।—–चौकिए मत,
    अहमदपुर सोलंकी(सोनवान) ठाकुरों के एक गांव और वंही गौरीशंकर जी के यँहा बेटे की आश कहिये या कुछ करिश्मे की आहट, एक के बाद एक पांच पुत्रियों ने जन्म लिया, प्रियंका, दिब्या, आकांक्षा, प्रशान्ति और प्रतिमा। उसके बाद बेटा।
    ——जन्मी बेटियां गौरीशंकर के यँहा कलेजा दब गया सब नाते रिस्तेदारो, जान पहचान वालों का, पांच बेटियों के मा बाप को देख को और जान लोगो को लगता कि गौरीशंकर के घर को पांच ग्रहों ने घेर लिया है, पता नहीं कब उबर पाएंगे।
    ——लेकिन करिश्मा आगे था, बैंक में नौकरी करने वाले गौरीशंकर जी परिवार लेकर बनारस बस गए, सोलंकी ठाकुर की आधुनिकता और अपने डीएनए का भरोसा उन्होंने लड़कियों को लड़को की ही तरह पालना सुरु किया।
    ——-यू पी कालेज के पास घर था जिसके कारण स्पोर्ट्स (खेलने )की सुविधा थी, लड़कियों ने भी खेलना शुरू कर दिया, और सुरु से ही कोई लड़की किसी खेल में उन लोगो के सामने टिक नहीं पाती थी ।
    ———–उसी समय वंहा के साईं सेंटर में गुरु द्रोणाचार्य के रूप में सरदार अमरजीत सिंह आये जिनकी निगाह इन पांडव बहनों पे पड़ी और उन्होंने परिवार की सहमति से बास्केटबॉल खिलाना शुरू कर दिया।
    ——फिर क्या देखते देखते सभी पांच की पांच बहनों ने तहलका मचाते हुए, एक के बाद एक सभी बास्केटबॉल की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बन गई और पूरे भारत मे सिंह सिस्टर्स के नाम का डंका बजा दिया।
    ——–उन्ही बहनों में एक प्रशान्ति सिंह को पदम् श्री और अर्जुन एवार्ड दोनो मिला जो कि महिला बास्केटबॉल में पहली बार मिला है।
    ———दिब्या सिंह पहली महिला खिलाड़ी हैं जो भारतीय पुरूष टीम की कोच हैं, जो पुरुष महिलाओं के साथ खेलने में अपने को छोटा समझते हैं उन्हें आज एक महिला सीखा रही है।
    ——-इन्ही बहनों में एक प्रतिमा सिंह की शादी प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी इशांत शर्मा के साथ हुई है जो हाल ही में100 टेस्ट मैच खेलने वाले तेज गेंदबाज बने हैं।
    ———खास बात ये की ये सब बहने खेल के साथ ही साथ पढ़ने में भी बहुत तेज रही है, दिब्या BHU की गोल्ड मेडलिस्ट, प्रशान्ति इंटर की टॉपर, अन्य बहने भी क्लास की टॉपर रही हैं।इनके पिता को इस बात का कष्ट रहता है कि उनके सभी बच्चे खेल की तरफ घूम गये किसी ने UPSC क्रैक नही किया।
    जौनपुर के हर सोलंकी ठाकुरों का पहला सपना यही होता है कि उसका बेटा ये बेटी UPSC की परीक्षा पास करके IAS या PCS बने, अपनी बेटियों की प्रतिभा देख गौरीशंकर सिंह की ये कसक स्वाभाविक है।
    ——-लेकिन जिस तरह से इन बहनों के मा बाप ने इनकी परवरिश की वो काबिले तारीफ है, और सबसे जादा तारीफ उस मां की है जो इन छह खिलाड़ियों को संभाल के और खिला के आगे ले गई, पांच बेटियों के उस मां का कलेजा सोने का होगा जिसने इन्हें तपा के कुंदन बनाया।
    ——-अहमद पुर की इन बेटियों पे जनपद, प्रदेश ही नहीं देश को गर्व है, इन शेरिनियो ने मां के दूध का मान बढ़ाया, बाप के सीने को चौड़ा किया और भारत जैसे समाज मे गौरीशंकर सिंह को अनोखा खिताब दिया कि —
    “”देखो वो हैं गौरीशंकर सिंह उन्ही पांच शेरिनियो के पिता, जिनपे देश को नाज है””
    —–पांच पांडव की तरह इन पांच पांडवी बहने भी समाज के लोगो के लिए लिए एक संदेश हैं कि लड़कियों के सितारे भी बुलंद हैं, बेटियां किसी से कम नही है, अगर आप के पास हैं तो समझिए को कोई कोहिनूर है, पालिये ,पोषिये, पढाईये, खिलाइए ये आप की पहचान हैं, और आगे आप की रोशनी भी, चमकेंगी तो आप भी चौधिया जाएंगे।
    ——-तो ये कहानी हैं, सिंह सिस्टर्स की, इसको कॉपी करिये, आगे शेयर करिये, फारवर्ड करिये, पढिये ,बताइये, बेटियों को सुनाइये, भरोसा रखिये आने वाला समय बेटियों का हैं ।
    ——-और हां कान में एक बात बताये बुरा ना लगे तो क्योकि ये सच है—-
    -“”–बेटों में सफलता के बाद अहम होता है कि मैं हु, मैंने किया है, बेटियों में हम होता है कि मैं जो भी हु उसमे मेरा परिवार भी है””
    —तो मैं को पालने के चक्कर मे हम को मत भूल जाइए।
    —–जिंदाबाद शेरिनियो—

  • आज का प्रेरक प्रसंग दो घड़े

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    एक बार एक नदी में जोरो की बाढ़ आई। तीन दिनों के बाद बाढ़ का जोर कुछ कम हुआ। बाढ़ के पानी में ढेरों चीजें बह रही थीं। उनमें एक ताँबे का घड़ा एवं एक मिट्टी का घड़ा भी था। ये दोनों घड़े अगल-बगल तैर रहे थे।

    ताँबे के घड़े ने मिट्टी के घड़े से कहा- अरे भाई, तुम तो नरम मिट्टी के बने हुए हो और बहुत नाजुक हो, अगर तुम चाहो तो मेरे समीप आ जाओ। मेरे पास रहने से तुम सुरक्षित रहोगे!

    मेरा इतना ख्याल रखने के लिए आपको धन्यवाद, मिट्टी का घड़ा बोला, मैं आपके करीब आने की हिम्मत नहीं कर सकता। आप बहुत मजबूत और बलिष्ठ हैं। मैं ठहरा कमजोर और नाजुक कहीं हम आपस में टकरा गए, तो मेरे टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगे। यदि आप सचमुच मेरे हितैषी हैं, तो कृपया मुझसे थोड़ा दूर ही रहिए।

    इतना कहकर मिट्टी का घड़ा तैरता हुआ ताँबे के घड़े से दूर चला गया।

    शिक्षा:-
    ताकतवर पड़ोसी से दूर रहने में ही भलाई है।

    सदैव प्रसन्न रहिये।
    जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

  • आज का प्रेरक प्रसंग लक्ष्य

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    इसी तरह काफी उम्र बित गई, न वह धनी हो सका ना विद्वान और ना ही एक अच्छा संगीतज्ञ बन पाया। तब उसे बड़ा दुख हुआ। एक दिन उसकी मुलाकात एक बहुत बड़े महात्मा से हुई। उसने महात्मन को अपने दुःख का कारण बताया। महात्मा ने उसकी परेशानी सुनी और मुस्कुराकर बोले, “बेटा, दुनिया बड़ी ही चिकनी है, जहाँ भी जाओगे कोई ना कोई आकर्षण ज़रूर दिखाई देगा। एक निश्चय कर लो और फिर जीते जी उसी पर अमल करते रहो तो तुम्हें सफलता की प्राप्ति अवश्य हो जाएगी, नहीं तो दुनियां के झमेलों में यूँ ही चक्कर खाते रहोगे। बार-बार रूचि बदलते रहने से कोई भी उन्नत्ति नहीं कर पाओगे।”

    युवक महात्मा की बात को समझ गया और एक लक्ष्य निश्चित कर उसी का अभ्यास करने लगा।

    शिक्षा :-
    उपर्युक्त प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि, हम जिस भी कार्य को करें, पूरे तन और मन से से एकाग्रचित होकर करें, बार-बार इधर-उधर भटकने से बेहतर यही की एक जगह टिककर मेहनत की जाएं, तभी सफलता प्राप्त की जा सकती हैं।

    सदैव प्रसन्न रहिये।
    जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

  • आज का प्रेरक प्रसंग हाथी का घमण्ड

    [object Promise]

    एक हाथी नदी पर पानी पीने गया । उसने देखा कि पानी बहुत गन्दा है । अभी-अभी कोई नहाकर गया होगा । उसको बहुत प्यास लगी हुई थी इसलिए उसने सोचा जिसने भी पानी गन्दा किया है उसको मैं सजा दूँगा।

    साही ने पूरा शरीर बिल में छिपाने के बाद केवल मुँह बाहर निकाला और हाथी को डांटते हुए कहा- ‘तुम मुझ पर इल्जाम लगा रहे हो । मुझे इस तरह आँख मत दिखाओ, मैं इस जंगल का राजा हूँ । तुम इसी समय यहाँ से चले जाओ ।’

    हाथी क्रोधित हो उठा और गरज कर कहा तुम बाहर आओ ।’ साही समझ गया कि यह मुझे देखना चाहता है । वह बाहर नहीं निकला । उसने अपनी पूँछ से एक नुकीला काँटा हाथी की तरफ फेंका और कहा कि ये मेरे शरीर का एक रोम है ।

    हाथी ने देखा कि यह एक रोम लोहे से भी कठोर व नुकीला है । ऐसा पशु तो मैंने पहले कभी नहीं देखा, यह सोचते हुए वह वहाँ से खिसक गया । साही खुब जोर से हँसने लगा और कहने लगा कि हाथी शरीर में मुझ से बड़ा है परन्तु वह बुद्धि में मेरे बराबर नहीं है ।

    सदैव प्रसन्न रहिये।
    जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

  • आज का प्रेरक प्रसंग लक्ष्य की प्राप्ति

    [object Promise]

    इसी तरह काफी उम्र बित गई, न वह धनी हो सका ना विद्वान और ना ही एक अच्छा संगीतज्ञ बन पाया। तब उसे बड़ा दुख हुआ। एक दिन उसकी मुलाकात एक बहुत बड़े महात्मा से हुई। उसने महात्मन को अपने दुःख का कारण बताया। महात्मा ने उसकी परेशानी सुनी और मुस्कुराकर बोले, “बेटा, दुनिया बड़ी ही चिकनी है, जहाँ भी जाओगे कोई ना कोई आकर्षण ज़रूर दिखाई देगा। एक निश्चय कर लो और फिर जीते जी उसी पर अमल करते रहो तो तुम्हें सफलता की प्राप्ति अवश्य हो जाएगी, नहीं तो दुनियां के झमेलों में यूँ ही चक्कर खाते रहोगे। बार-बार रूचि बदलते रहने से कोई भी उन्नत्ति नहीं कर पाओगे।”

    युवक महात्मा की बात को समझ गया और एक लक्ष्य निश्चित कर उसी का अभ्यास करने लगा।

    शिक्षा:-
    उपर्युक्त प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि हम जिस भी कार्य को करें, पूरे तन और मन से से एकाग्रचित होकर करें, बार-बार इधर-उधर भटकने से बेहतर यही की एक जगह टिककर मेहनत की जाएं, तभी सफलता प्राप्त की जा सकती हैं।

    सदैव प्रसन्न रहिये।
    जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

  • नई दिल्ली पत्रकारों के साथ पूरे भारतवर्ष से हमला और हत्या करने के मामले सामने आ रहे हैं

    हत्या की साजिस का मामला? किसी की हत्या होने पर,या किसी की पीटाई होने पर? बडे चैनलो पर बैठ कर ये कहने वाले लोग,, किसी ने मदद क्यो नही की ,,कोई मदद के लिये आगे क्यो नही आया? वो इस खबर को ध्यान से पढे,, मदद के लिऐ आगे आने वालो के साथ क्या हूआ? रोहिणी कोर्ट के बाहर सडक पर न्यूज कवर कर रही पत्रकार के साथ वकिलो ने पूलिस की मौजूदगी मे,अभ्रद्रता करते हूए की छीना-झपटी, भीड को उकसाकर साजिशन हत्या की कोशिस

    नई दिल्ली पत्रकारों के साथ पूरे भारतवर्ष से हमला और हत्या करने के मामले सामने आ रहे हैं पत्रकार देश का चौथा स्तंभ बताया जाता है लेकिन उनके अधिकारों की बात करें तो उनके साथ अभद्रता की सारी सीमाएं पार हो जाती हैं । आख़िर उनको सुने तो सुने कौन?आखिर कार्रवाई करें तो करे कौन?  क्योंकि सत्ताधारी पार्टियों व सरकार के अंदर ऊंचे पदों पर बैठे हुए लोग व अधिवक्तागण उनकी मदद करते हैं। उनका फेवर करते हैं और कार्यवाही नहीं होने देते हैं ? यह एक कड़वी सच्चाई है ? न्यायालय न्याय का मंदिर है जहां लोग इंसाफ की उम्मीद में जाते हैं लेकिन अदालतों में बैठे हुए कुछ अधिवक्ता सत्ताधारी पार्टियों के साथ जुड़े होते हैं और उनके प्रवक्ता तक होते हैं सत्ताधारी पार्टियों के पैनल पर होते ऐसे मे वह अपने प्रोफेशन के साथ भी न्याय नहीं कर पाते हैं । और  कहीं ना कहीं न्याय मांगने गए व्यक्ति के साथ न्याय नहीं हो पाता है । हम माननीय सुप्रीम कोर्ट से भी गुहार लगाते हैं कि जो अधिवक्ता पावर सत्ताधारी पार्टियों से जुड़कर ,पद लेकर उनकी विचारधारा या उनके लिए काम करते हैं । ऐसे लोगों को तो अदालतों में न्याय के मंदिरों में प्रैक्टिस करने का अधिकार नहीं होना चाहिए?‌ उनके सामने एक ही विकल्प होना चाहिए या तो वह अपने प्रोफेशन के साथ समझौता करें या फिर वह पार्टी में रहकर पार्टी की सेवा करें दोनों में से एक को चुनने का हक ही उनको होना चाहिए तभी सही मायने में न्याय के मंदिर कहे जाने वाले न्यायालय से आम आदमी और गरीब से गरीब आदमी को न्याय मिल पाएगा  ? होगा कैसे ? जो असंभव सा लगता है लेकिन इसके लिए बहुत जद्दोजहद और प्रयास करने की आवश्यकता है , तभी देश के न्यायमंदिर पर देश की जनता का भरोसा कायम होगा । 

    अब बात करते हैं उस मामले की जो न्याय के मंदिर कहे जाने वाले न्यायालय के बाहर ही एक पत्रकार के साथ अभद्र छीना झपटी की घटना सामने आई है ।जिसने पूरे अधिवक्ताओं को शर्मसार कर दिया है और देश के अधिवक्ताओं की छवि खराब करने का काम भी किया है।
    वकिलो की गून्डई का एक ओर नमूना आया सामने ,सडक पर स्टोरी कवर कर रही पत्रकार के साथ गून्डई करते हूऐ की बतमीजी, पत्रकार के साथ बदसलूकी करते हूए,भीड को उकसा कर पत्रकार की षडयन्तर व साजिस के कहत हत्या कराने की नाकामयाब कोशिस  , गीता चाैहान देश की वो हिम्मत वाली पत्रकार है जो अपनी निपक्ष पत्रकारिता के लिये जानी -पहचानी जाती है,  पूरा देश उनकी पत्रकारिता की सराहना करता है , देश की जनता व देश के ज्वनशील मूददो को उठाने वाली मूख्यसम्पादक पर हमला व छीना-झपटी करने वाले वकिलो पर बार ऐसोशियशन रोहिणी ने क्या ऐक्शन लिया इस विषय मे मीडिया को कोई जानकारी नही दी, वही इस बाबत 100 नम्बर पर सूचना दी गई थी, थाने मे लिखित शिकायत भी दी गई थी , पर खबर लिखे जाने तक मामला दर्ज हूआ या नही कोई एफआईआर की  कापी नही दी गई |

    पत्रकार के साथ हूई घटना के दाैरान पूलिस माैजूद थी एएसआई सूभाष मेबाईल झपटने वाले आरोपी के साथ किसी की हत्या होने पर,या किसी की पीटाई होने पर? बडे चैनलो पर बैठ कर ये कहने वाले लोग,, किसी ने मदद क्यो नही की ,,कोई मदद के लिये आगे क्यो नही आया? वो इस खबर को ध्यान से पढे,, मदद के लिऐ आगे आने वालो के साथ क्या हूआ ? रोहिणी कोर्ट के बाहर सडक पर न्यूज कवर कर रही पत्रकार के साथ वकिलो ने पूलिस की मौजूदगी मे,अभ्रद्रता करते हूए की छीना-झपटी , छीना झपटी ही नही बल्कि सडक पर स्टोरी कवर कर रही पत्रकार के साथ गून्डई करते हूऐ की  बतमीजी, पत्रकार के साथ बदसलूकी करते हूए,भीड को उकसा कर पत्रकार की षडयन्तर व साजिस के कहत हत्या की कोशिस |

    मामला है 21 जून 2021 का जब पत्रकार रोहिणी कोर्ट के बाहर 3 महिलाओ व एक ई- रिक्षा चालक की पिटाई  किये जाने के मामले मे उनसे बातचित कर विडियो स्टोरी कर रही थी, खूद को वकिल बताने वाले वहा माैजूद चंद लोग उनको मोबाईल चोर बता कर पूलिस के सामने ही मार पीट रहे थे | कार पर मीडिया लिखा देख पीडितो ने पत्रकार के पैर पकड कर बात सूनने का अनूरोध किया मदद करने की गूहार लगाई | पत्रकार होने के नाते हमने उनसे पूरी वजह जानी तो उन्होने अपनी बात हमारे सामने रख दी सच्चाई मीडिया के सामने आते देख वहा माैजूद उन चंद वकिला मे भीड को उकसाना शूरू कर दिया और हमारे काम मे बाधा डालते हूऐ पूलिस को लालच देकर हमारे साथ बदसलूकी करनी शूरू कर दी , गीता चाैहान की हत्या कराने के मकसद से भीड को उकसाया ,पत्रकार को घेर लिया गया उसकी आईडी व मोबाईल छीन लिया गया जब मोबाईल से सबूत व विडियो डिलिट कर दिये गये |पत्रकार अपना परिचय पहले ही दे चूकी थी और आईडी मागने पर दिखा दी थी | पर यहा स्वाल यह है की यहा किसी को अधिकार नही था आईडी माँगने का क्योकी वो पब्लिक प्लैस था कोर्ट परिसर नही था जबकि सूपरिम कार्ट मे भी मीडिया लोभी है जहा तमाम पत्रकार वहा पर लोगो की बाईट लेते है | इस पूरे पकरण मे ,षडयन्त्र की बू आ रही है | गीता चाैहान जानी -पहचानी पत्रकार है ,घोताले उजागर करना, अच्छी बूरी सभी प्रकार की खबरे लिखती है वकिलो के अन्दर कोई षडयन्तर कारी माैजूद रहा होगा जिन्होने उनको पहचाकर यह पूरा हमला पत्रकार की भीड से हत्या कराने का षडयन्तर रहा होगा पूलिस को इसे हल्के मे नही लेना चाहिये और झोलाछाप आरोपियो की पहचान कराकर ठोस एक्शन लेना होगा कोर्ट मे माैजूद सीसी टीवी के फूटेज निकाल कर तथा वायरल हो रही विडियो मे दिख रहे चेहरो को अरेस्ट कर बाकी की छानबीन कर सलाखो के पीछे भेजना चाहिये ताकी भविष्य मे किसी के साथ इस प्रकार की घटना ना हो देश की अदालतो मे बैठे बार ऐसोशिएन के पद आझिकारियो को इस पर कार्वाही करते हूए इनके लाईसेस रदद कर देने चाहिये कूछ लोग विडियो मे दिख रहा है बाकी इनकी गिरफ्तारी पर सामने आ जायेगे और सामने आने पर उनकी पहचान पत्रकार कर सकती है